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आपदा पीड़ितों के साथ संवेदनशील राष्ट्रपति, लोगों से सहयोग और एकजुटता की अपील

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को मानसून के दौरान देश में हुई प्राकृतिक आपदाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए लोगों से एकजुटता का आह्वान किया। साथ ही इस संकट की घड़ी में राहत बचाव कार्यों में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की सराहना की।   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम सहित देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। इन आपदाओं के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।" उन्होंने पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति ने लिखा, "इस साल मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की खबरों ने मुझे बहुत दुखी किया। पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और मैदानी इलाकों में बाढ़ ने भारी विनाश किया है।" उन्होंने राष्ट्र की ओर से प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता दिखाई और इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। उन्होंने लिखा, "राष्ट्र प्रभावित लोगों के दुख में शामिल है और इस संकट की घड़ी में उनके साथ है।" राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों में लगे लोगों के समर्पण और जज्बे की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं उन सभी के प्रयासों को सलाम करती हूं जो इस मुश्किल समय में लोगों की मदद के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।" साथ ही उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने का आह्वान किया। बता दें कि हाल के दिनों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकारें राहत कार्यों में जुटी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ जैसी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

टैक्स विवाद के चलते ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने छोड़ा पद

ब्रिटेन  ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने संपत्ति कर यानी टैक्स से जुड़ी गलती स्वीकार करने के बाद शुक्रवार को अपना इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की लेबर सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। रेनर ने कहा कि उन्होंने एक स्वतंत्र जाँच की रिपोर्ट मिलने के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है। इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि उन्होंने कानूनी सलाह की पूरी सावधानी नहीं बरती और मंत्रिस्तरीय संहिता का उल्लंघन किया। क्या है मामला एंजेला रेनर पर यह आरोप था कि उन्होंने संपत्ति कर का भुगतान सही तरीके से नहीं किया। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कई बार सफाई दी थी, लेकिन स्वतंत्र जांच में उनके खिलाफ पाया गया कि उन्होंने प्राप्त कानूनी सलाह को ठीक से नहीं समझा और उसका पालन नहीं किया। इस कारण वे मंत्रिस्तरीय संहिता के नियमों के उल्लंघन में शामिल मानी गईं। लेबर सरकार के लिए बड़ा झटका रेनर का इस्तीफा ब्रिटेन की लेबर सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। वे सरकार की दूसरी सबसे बड़ी नेता थीं और उनके इस्तीफे से सरकार की छवि पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है और कहा है कि वे स्थिति को संभालने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। 

अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत का अचूक खेल, दुनिया ने देखा चौंकाने वाला मोड़

नई दिल्ली  भारत ने अमेरिकी टैरिफ की परवाह किए बिना ऐसा गेम खेला कि पूरी दुनिया देखती रह गई। रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदकर भारत ने न सिर्फ अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैक्स को ठेंगा दिखाया, बल्कि उस तेल को प्रोसेस करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में जमकर बेचा और भारी मुनाफा भी कमाया। अब भारत का डीजल यूरोप तक में धड़ल्ले से बिक रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अगस्त 2025 में डीजल शिपमेंट के मामले में यूरोप को चौंका दिया है। भारत की तेल नीति से बदला ग्लोबल गेमप्लान रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जब पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और ऊर्जा संसाधनों पर सख्त प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया। इसे घरेलू रिफाइनरियों में प्रोसेस कर भारत ने वैश्विक बाजार, खासकर यूरोप, में डीजल की आपूर्ति तेज कर दी। एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक उछाल आंकड़ों की बात करें तो भारत का डीजल निर्यात अगस्त 2025 में सालाना आधार पर 137% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ प्रतिदिन 2,42,000 बैरल तक पहुंच गया। ग्लोबल रियल टाइम डेटा एंड एनालिटिक्स प्रोवाइडर Kpler के अनुसार, सिर्फ यूरोप को भारत ने अगस्त में 73% अधिक डीजल भेजा, जबकि सालाना आंकड़ा 124% की ग्रोथ दिखाता है। वहीं, Vortexa की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में यूरोप को भारत का डीजल एक्सपोर्ट 228,316 बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 166% अधिक है और जुलाई 2025 के मुकाबले 36% ज्यादा। रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका लग सकता है भले ही फिलहाल भारत की ऊर्जा नीति फायदेमंद नजर आ रही हो, लेकिन 2026 की शुरुआत में यूरोपीय यूनियन के प्रस्तावित प्रतिबंधों के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियों को बड़ा धक्का लग सकता है, जो रूस के तेल पर आधारित रिफाइनिंग करती हैं और यूरोप को सप्लाई देती हैं।   क्यों बढ़ा भारत का डीजल निर्यात? इस बूम के पीछे कई कारण हैं:- -यूरोप में शीतकालीन मांग (Winter Demand) की तेजी। -रिफाइनरियों द्वारा की गई अन्यतम मेंटेनेंस। -रूस पर प्रतिबंधों से उत्पन्न आपूर्ति की कमी। -भारत की गंभीर सप्लाई चेन क्षमताएं और लो-कोस्ट रिफाइनिंग। -इन सभी कारकों ने भारत को यूरोपीय ऊर्जा संकट के बीच एक प्रमुख सप्लायर बना दिया है। पश्चिमी आलोचना और भारत का जवाब भारत की इस ऊर्जा रणनीति पर अमेरिका और उसके सहयोगी तीखी आलोचना कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि भारत, रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करने के बाद यूरोप को ऊंचे दाम पर बेच रहा है- और ऐसा करके मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए अप्रत्यक्ष फंडिंग मिल रही है। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा है: “हम बाजार से खरीदते हैं और उसे वैश्विक बाजार में बेचते हैं। यदि किसी देश को इससे आपत्ति है, तो वे खरीद बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं।” क्या डीजल की मांग बनी रहेगी? ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के अंत तक डीजल की वैश्विक मांग मजबूत बनी रहेगी। विशेषकर यूरोप जैसे बाजार, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में हैं, फिलहाल भारतीय सप्लायर्स पर निर्भर रह सकते हैं।  

10 साल का मासूम खेलते-खेलते गिरा, गणेश उत्सव में हुआ दिल का दौरा और निधन

मुंबई  महाराष्ट्र के कोल्हापुर से दिल को झकझोर देने वाली एक खबर सामने आई है। यहां एक 10 साल के मासूम की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मासूम ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। घटना कोल्हापुर जिले के कोडोली गांव की है। बुधवार रात को हुई इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है। जानकारी के मुताबिक दस वर्षीय श्रवण अजीत गावड़े बुधवार शाम आनंदनगर में एक गणेश पंडाल के शेड में अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। वह हमेशा की तरह हंस-खेल रहा था और बिल्कुल स्वस्थ था। कुछ मिनट बाद ही उसकी तबियत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद वह खेलना छोड़कर घर की तरफ जाने लगा। घर पहुंचते ही वह अपनी मां की गोद में लेट गया। वह मां से कुछ कहने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तभी उसे हार्ट अटैक आया और उसने आंखें मूंद लीं। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक श्रवण की मां का रोना सुनकर पड़ोसी वहां पहुंचे, जिसके बाद बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी मृत्यु अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुई। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक चार साल पहले ही परिवार ने अपनी छोटी बच्ची को भी खो दिया था। अब श्रवण की मौत के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों और युवाओं में इस तरह अचानक हार्ट अटैक की घटनाओं में बढ़ोतरी चिंता का कारण बनती जा रही है। बीते जुलाई में राजस्थान के सीकर में एक 9 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली प्राची स्कूल में इंटरवल के दौरान अचानक गिर पड़ी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसी तरह एक अन्य घटना में हैदराबाद में एक 25 साल का शख्स बैडमिंटन खेलते हुए अचानक गिर पड़ा। बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

ट्रंप के सलाहकार की विवादित टिप्पणी पर भारत का कड़ा जवाब, रिश्तों पर उठे सवाल

नई दिल्ली  भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की हालिया टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत द्वारा रूस से तेल आयात करने के मामले में नवारों ने आरोप लगाया था कि ब्राह्मण आम भारतीयों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नवारों की टिप्पणी को गलत और भ्रामक बताया है। साथ ही, यह भी दोहराया है कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान और हितों के आधार पर आगे बढ़ते रहेंगे। पीटर नवारों के बयान पर रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने नवारो के गलत और भ्रामक बयानों को देखा है और हम उन्हें अस्वीकार करते हैं। हमने पहले भी इस बारे में बात की है। अमेरिका और भारत के बीच यह रिश्ता हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देश एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जो हमारे साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जन-जन संबंधों पर आधारित है। इस साझेदारी ने कई बदलावों और चुनौतियों का सामना किया है। हम उस ठोस एजेंडे पर केंद्रित हैं जिसके लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं, और हमें उम्मीद है कि आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर यह रिश्ता आगे बढ़ता रहेगा।'' उन्होंने आगे कहा, ''जैसा कि आपने देखा होगा, मैं आपका ध्यान अलास्का में चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास की ओर आकर्षित करना चाहूंगा। कुछ दिन पहले, 2+2 अंतर-सत्रीय बैठक हुई थी… दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और हम अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" नवारो फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर टिप्पणी कर रहे थे, जब उन्होंने दावा किया कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण से पहले, भारत का रूसी कच्चे तेल के साथ बहुत कम जुड़ाव था। उन्होंने कहा, "क्या हुआ? रूसी रिफाइनरियां भारत की बड़ी तेल कंपनियों के साथ गठजोड़ कर बैठीं। पुतिन (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी को कच्चे तेल पर छूट देते हैं। वे इसे रिफाइन करते हैं और यूरोप, अफ्रीका और एशिया में भारी प्रीमियम पर भेजते हैं और खूब पैसा कमाते हैं।" उन्होंने आगे आरोप लगाया, "भारत क्रेमलिन के लिए एक धोबीघर के अलावा कुछ नहीं है। यह यूक्रेनियों को मारता है।" उन्होंने आगे कहा, "मैं बस इतना कहूंगा कि भारतीय लोग, कृपया समझें कि यहाँ क्या हो रहा है। ब्राह्मण भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं। हमें इसे रोकना होगा।"  

वीडियो वायरल: महिला IPS के सामने नंबर मांगते पकड़े गए अजित पवार, देना पड़ा सफाई

मुंबई  महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद विवाद इतना बढ़ गया है कि अब उन्हें सफाई देनी पड़ी है। दरअसल बीते दिनों NCP प्रमुख अजित पवार का वीडियो सामने आया जिसमें वह एक महिला IPS ऑफिसर से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्हें अधिकारी से नंबर मांगकर वीडियो कॉल पर बात करने को कहते सुना जा सकता है। घटना तब हुई जब अधिकारी वहां अवैध मिट्टी खनन पर कार्रवाई को रोकने गई थीं। पवार ने उन्हें कार्रवाई रोकने के भी निर्देश दिए। विवाद बढ़ने पर अजित पवार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि उनका कानूनी कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं था। अजित पवार ने लिखा, “ "सोलापुर में पुलिस अधिकारियों के साथ मेरी बातचीत से संबंधित कुछ वीडियोज की ओर मेरा ध्यान आकर्षित हुआ है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि मेरा इरादा कानून प्रवर्तन में हस्तक्षेप करने का नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि जमीनी स्तर पर स्थिति शांत रहे और आगे न बिगड़े। पवार ने आगे लिखा कि वे महिला अधिकारियों का बेहद सम्मान करते हैं। उन्होंने लिखा, “मैं पुलिस फोर्स और उसके अधिकारियों, जिनमें महिला अधिकारी भी शामिल हैं का बहुत सम्मान करता हूं। मैं कानून के शासन को सबसे ऊपर रखता हूं। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हूं कि रेत खनन सहित हर अवैध गतिविधि से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाए।" वीडियो में क्या? जानकारी के मुताबिक वायरल हुए वीडियो में अजित पवार कथित तौर पर NCP कार्यकर्ता के फोन से करमाला की पुलिस उपाध्यक्ष अंजना कृष्णा से बात करते सुने जा सकते हैं। इस दौरान आईपीएस अधिकारी उनकी आवाज नहीं पहचान पातीं। इसके बाद पवार पुलिस अधिकारी को वीडियो कॉल करते हैं और कथित तौर पर उनसे मिट्टी के अवैध उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए कहते हैं। वीडियो में पवार यह कहते हुए भी सुने गए, “मैं उप उपमुख्यमंत्री अजित पवार बोल रहा हूं। क्या आप मुझे नहीं पहचानती हैं? अपना नंबर दीजिए, मैं आपको वीडियो कॉल करता हूं। आप मेरी आवाज नहीं पहचानतीं?”  

रूसी तेल पर भारत अडिग, ट्रंप ने यूरोप से कहा– सिर्फ हमें नहीं, चीन को भी रोको

वाशिंगटन रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत को टैरिफ का दंड देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब यूरोप के पीछे पड़ गए हैं. गुरुवार को दुनिया के नेताओं के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि यूरोप को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध को खत्म करने के लिए चीन पर आर्थिक दबाव डालना चाहिए. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने अमेरिका ब्रॉडकास्टर सीएनएन को यह जानकारी दी. ट्रंप ने गुरुवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ 'Coalition of the Willing' की बैठक में यह टिप्पणी की. यह यूक्रेनी सहयोगियों का एक समूह है जो युद्ध को समाप्त करने और भविष्य के हमलों से यूक्रेन को सुरक्षा प्रदान करने की कोशिश कर रहा है. यूरोपीय देशों पर ट्रंप की टिप्पणी के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन में शांति को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 26 देशों ने वादा किया है कि अगर युद्ध विराम समझौते को अंतिम रूप दिया जाता है तो वे संभावित शांति सेना में योगदान देंगे. हालांकि, माना जाता है कि अमेरिकी के बिना यूरोपीय देश यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाएंगे. मैक्रों ने गुरुवार को इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि यूक्रेन की सेना को मजबूत करने और यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों को तैनात करने में तीसरा फैक्टर अमेरिका का 'सेफ्टी नेट' होना चाहिए. फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, 'आने वाले दिनों में हम इन सुरक्षा गारंटियों के लिए अमेरिकी समर्थन को अंतिम रूप दे देंगे.' पुतिन के साथ मीटिंग के हफ्तों बाद भी रूस के साथ ट्रंप की बात नहीं बन रही ट्रंप और यूरोपीय नेताओं की यह बैठक यूक्रेन में युद्ध समाप्त न करा पाने की ट्रंप की हताशा के बीच हो रही है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का शिखर सम्मेलन के लगभग तीन हफ्ते बाद भी ट्रंप शांति वार्ता में प्रगति न होने से लगातार निराश हो रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप इस बात पर विचार कर रहे हैं कि रूस और यूक्रेनी नेताओं के बीच बैठक कराने में उन्हें पर्सनली कितना शामिल होना चाहिए. रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी आरआईए के अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच किसी भी शीर्ष स्तरीय बैठक से पहले 'काफी काम' करने की जरूरत है. व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि मैक्रों और यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप को बैठक में बुलाया था जिसमें ट्रंप ने 'इस बात पर जोर दिया कि यूरोप को रूसी तेल खरीदना बंद करना चाहिए क्योंकि इससे रूस को युद्ध में मदद मिल रही है. ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस ने एक साल में यूरोपीय संघ को ईंधन बेचकर 1.1 अरब यूरो कमाया है. अधिकारी ने कहा, 'राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि यूरोपीय नेताओं को रूस के युद्ध प्रयासों की फंडिंग के लिए चीन पर आर्थिक दबाव डालना चाहिए.' रूस के साथ व्यापार करने वालों को निशाना बना रहे ट्रंप लेकिन… रिपोर्ट में कहा गया कि भले ही ट्रंप रूस के साथ बिजनेस करने वाले देशों को निशाना बना रहे हैं लेकिन निजी तौर पर वो इस बात से फिक्रमंद भी हैं कि ऐसा करने से रूस के साथ यूक्रेन में युद्ध खत्म करने की वार्ता प्रभावित हो सकती है.  जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं, तो ट्रंप ने कहा कि वो ऐसा पहले ही कर चुके हैं. ट्रंप ने कहा, 'मैंने भारत के संबंध में पहले ही ऐसा कर दिया है.' उन्होंने रूसी तेल आयात करने को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% करने के अपने फैसले का जिक्र किया. 

दोस्ती के नए रंग: भारत और रूस का चीन के साथ नजदीकी संबंध ट्रंप को नहीं भाया

वॉशिंगटन  50 फीसदी टैरिफ के चलते भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में दरार आई है। भारत, चीन और रूस के बीच दोस्ती बढ़ने लगी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिर्ची लगी है। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा है कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर ट्रंप ने पोस्ट किया, ''ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को सबसे गहरे, सबसे अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है। उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो।" अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल में भारत के प्रति थोड़ा सख्त नजर आ रहे हैं। पहले उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया तो बाद में रूस से तेल आयात करने के चलते 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाकर कुल टैरिफ 50 पर्सेंट कर दिया। इसकी वजह से भारत और चीन, जिनके बीच सीमा विवाद के बाद से तनाव बना हुआ था, दोनों फिर से करीब आने लगे। हाल ही में चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ बैठक में पीएम मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तिकड़ी की खूब चर्चा हुई। तीनों नेताओं एक-दूसरे से बात करते हुए दिखाई दिए। इसे पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के लिए संदेश माना गया। सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुईं तीनों राष्ट्राध्यक्षों की तस्वीरों के बाद अब ट्रंप ने भी टिप्पणी की है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की तस्वीर भी शेयर की है। इससे पहले, ट्रंप ने चीनी सैन्य परेड में हथियारों को सार्वजनिक तौर पर दिखाए जाने को लेकर भी चीन पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि यह परेड चीन ने उन्हें दिखाने के लिए की है। चीन ने सैन्य परेड में फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, मिसाइलों समेत तमाम अत्याधुनिक हथियार दिखाए थे। इस परेड में रूस, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया आदि देशों के प्रमुखों को बतौर मेहमान बुलाया गया था। ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''बहुत ही अच्छा कार्यक्रम था, लेकिन मुझे पता है कि वह किन वजहों से ऐसा कर रहे हैं। उन्हें विश्वास था कि मैं उसे देख रहा हूं। मैं देख रहा था।''  

ट्रंप की सख्त टिप्पणी: यूरोप और चीन को रूस के तेल पर निर्भरता कम करने को कहा

वॉशिंगटन  यूक्रेन के साथ पिछले कई सालों से जारी युद्ध को रुकवाने के लिए अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसके बावजूद यूरोप ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया है। इससे नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दुनियाभर के नेताओं के साथ एक बैठक में साफ-साफ कह दिया कि यूरोप को रूस से तेल खरीदना बंद करना चाहिए। इसके अलावा, यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए चीन पर भी आर्थिक दबाव डालना चाहिए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल आयात करने को लेकर 25 फीसदी अतिरिक्त (कुल 50%) टैरिफ लगाया हुआ है, जबकि दूसरी ओर यूरोप को कोई सजा नहीं दी है। इसको लेकर दुनियाभर में ट्रंप की किरकिरी हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी गुरुवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ हुई एक बैठक में की। ट्रंप के इस कदम से माना जा रहा कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध को रोकने के लिए अपने सहयोगियों को भी शामिल होने के लिए कह रहा है। इसके बाद, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि 26 देशों ने युद्धविराम समझौते के अंतिम रूप दिए जाने पर संभावित शांति सेना में योगदान देने का वादा किया है। मैक्रों ने गुरुवार को इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को मजबूत करने और यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ, यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी का तीसरा घटक अमेरिकी सुरक्षा जाल होना चाहिए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, "आने वाले दिनों में हम इन सुरक्षा गारंटियों के लिए अमेरिकी समर्थन को अंतिम रूप देंगे।" रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को कहा कि मॉस्को और कीव के बीच किसी भी शीर्ष-स्तरीय बैठक से पहले काफी काम करने की जरूरत है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि मैक्रों और यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप को गठबंधन बैठक में बुलाया और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए जिससे युद्ध को फायदा हो रहा है। क्योंकि रूस को एक साल में यूरोपीय संघ से ईंधन की बिक्री में 1.1 अरब यूरो मिले हैं।"  

महाराष्ट्र में हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप का ऐलान, विपक्ष ने कहा– बनेगा मिनी पाकिस्तान

मुंबई  महाराष्ट्र में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन पर मजहबी बहस छिड़ गई है। इसकी वजह है कि विज्ञापन में इस सोसायटी को 'हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप' बताया गया था। इसे लेकर जब विवाद छिड़ा तो बिल्डर ने विज्ञापन ही वापस ले लिया। प्रोजेक्ट का विज्ञापन यह कहते हुए जारी किया गया था कि यह हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप है, जिसमें मुस्लिमों को अपने मजहब की मान्यताओं के अनुसार ही रहने का मौका मिलेगा। इस विज्ञापन को लेकर आरोप लगे कि यह तो देश के अंदर एक नया मुल्क बनाने जैसा है। खासतौर पर मजहब के आधार पर टाउनशिप बसाने जैसा देश में कहीं और कभी नहीं हुआ है। ऐसे में इस पर विवाद होना तय ही था। इस टाउनशिप को मुंबई से करीब 100 किलोमीटर दूर करजत में बसाने का प्लान है। मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर दूर नेरल में प्रस्तावित एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल, इस प्रोजेक्ट को ‘हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा था. इस विज्ञापन के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इसे धार्मिक आधार पर विभाजनकारी करार दिया गया है. अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी हस्तक्षेप करते हुए महाराष्ट्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. विज्ञापन कहता है, 'यहां आप पूरी तरह कम्युनिटी लिविंग का अनुभव लेंगे। आप अपने जैसे विचारों वाले परिवार के साथ ही रहेंगे।' ऐड में लिखा गया कि इस टाउनशिप में कुछ कदमों की ही दूरी पर मस्जिद रहेगी और सामूहिक जुटान वाले आयोजनों के लिए भी स्थान रहेगा। कानूनगो ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र सरकार को इसके लिए नोटिस दिया जा रहा है। इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि इस तरह हलाल का इस्तेमाल करना तो नफरत फैलाने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे काम में शामिल बिल्डर और अन्य लोग नहीं चाहते कि समाज में एकता बनी रहे। फिलहाल इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) अध्यक्ष प्रियंक कानूंगो ने प्रोजेक्ट का एक वीडियो अपने एक्स (X) अकाउंट पर साझा किया. इस वीडियो में हिजाब पहनी एक महिला कहती है, “जब सोसाइटी में अपने प्रिंसिपल्स कॉम्प्रोमाइज करने पड़ें तो सही नहीं है. Sukoon Empire में रीडिस्कवर करें ऑथेंटिक कम्युनिटी लिविंग. यहां लाइक-माइंडेड फैमिलीज रहेंगी, बच्चे हलाल एनवायरनमेंट में सुरक्षित बड़े होंगे, बुजुर्गों को सम्मान और देखभाल मिलेगी. प्रेयर प्लेसेस और कम्युनिटी गैदरिंग वॉकिंग डिस्टेंस पर होंगे. यह निवेश न सिर्फ आपकी फैमिली बल्कि आपके भविष्य को भी सुरक्षित करेगा.” प्रियंक कानूनगो का बयान वहीं, प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर कहा, “यह विज्ञापन नहीं, विष-व्यापन है. मुंबई के पास करजत इलाके में केवल मुसलमानों के लिए हलाल लाइफस्टाइल वाली टाउनशिप बनाई जा रही है. यह ‘नेशन विदिन द नेशन’ है. महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया गया है.” राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया जैसे ही विज्ञापन वायरल हुआ, राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेजे ने विज्ञापन को तुरंत वापस लेने की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का प्रचार संविधान में दी गई समानता और धर्मनिरपेक्षता की भावना का उल्लंघन नहीं करता. वहीं, भाजपा ने इसे और बड़ा मुद्दा बनाया. पार्टी प्रवक्ता अजीत चव्हाण ने आरोप लगाया कि यह प्रोजेक्ट ‘गजवा-ए-हिंद’ की मानसिकता का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं मुंबई और महाराष्ट्र जैसे बहुधार्मिक समाज में अस्वीकार्य हैं और डेवलपर्स पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. NHRC की दखलअंदाजी बढ़ते विवाद को देखते हुए अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया है. आयोग ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि क्या इस प्रोजेक्ट का प्रचार सचमुच साम्प्रदायिक आधार पर किया गया है और इसमें कौन से कानूनी या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. आयोग की दखल के बाद यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता से लिया जा रहा है. कम्युनिटी-सेंट्रिक मार्केटिंग बना बहस का बड़ा मुद्दा यह विवाद अब रियल एस्टेट सेक्टर की मार्केटिंग रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है. आमतौर पर डेवलपर्स खरीदारों को आकर्षित करने के लिए लाइफस्टाइल सुविधाएं जैसे: जिम, गार्डन, क्लबहाउस या सीनियर सिटिजन फ्रेंडली सोसायटी का प्रचार करते हैं. लेकिन खुले तौर पर धार्मिक पहचान पर आधारित ‘कम्युनिटी लिविंग’ को बढ़ावा देना, आलोचकों के अनुसार, समाज में अलगाव की दीवार खड़ी कर सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तरह की परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिला तो यह समाज में धार्मिक आधार पर बंटवारे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है. अब आगे क्या? फिलहाल महाराष्ट्र सरकार पर दोहरा दबाव है. एक ओर राजनीतिक दल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और दूसरी ओर NHRC ने औपचारिक रिपोर्ट मांगी है. सरकार को यह तय करना होगा कि इस विज्ञापन और प्रोजेक्ट को किस कानूनी दायरे में जांचा जाए. यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और रियल एस्टेट नियमों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है.