samacharsecretary.com

‘गुंडा टैक्स’ और गैंगरेप का मुद्दा उठाकर पीएम मोदी ने दीदी पर बोला हमला, बोले- बंगाल की हालत चिंताजनक

दुर्गापुर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 6 साल बाद पीएम मोदी ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत दुर्गा में विशाल जनसभा को संबोधित कर किया था। शुक्रवार को अपने संबोधन में पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार की तीखे शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सावन का पवित्र महीना है, ऐसे पावन समय में मुझे पश्चिम बंगाल के विकास पर्व का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए बड़े सपने देखे हैं। भाजपा एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहती है। भाजपा एक विकसित पश्चिम बंगाल का निर्माण करना चाहती है। हमें बंगाल को इस बुरे दौर से बाहर निकालना है, और आज यहां जिन परियोजनाओं की शुरुआत हुई है, वो इसी का प्रतीक हैं। बंगाल बदलाव चाहता है। बंगाल में पालायन शुरू हो गयाः पीएम पीए मोदी ने कहा कि देशभर से रोजगार के लिए आते थे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह उलट गई। आज पश्चिम बंगाल का नौजवान पलायन के लिए मजबूर है। छोटे-छोटे काम के लिए भी उसे दूसरे राज्यों की तरफ जाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज आपको ये यकीन दिलाने आया हूं कि बंगाल की बदहाल स्थिति को बदला जा सकता है। भाजपा की सरकार आने के बाद सिर्फ कुछ ही वर्षों में बंगाल देश के शीर्ष औद्योगिक राज्यों में से एक बन सकता है। यह मेरा दृढ़ विश्वास है। बंगाल के विकास में दिवार बनकर खड़ी टीएमसीः पीएम टीएमसी सरकार बंगाल के पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि टीमएमसी विकास के आगे दीवार बनकर खड़ी है। जिस दिन टीएमसी सरकार की ये दीवार गिरेगी, उसी दिन से बंगाल विकास की नई तेजी पकड़ लेगा। टीएमसी की सरकार जाएगी, तभी असली परिवर्तन आएगा। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा की ओर से मैं आपसे आग्रह करता हूं, एक बार भाजपा को अवसर दीजिए। एक ऐसी सरकार चुनिए जो कामदार हो, ईमानदार हो और दमदार हो। ‘गुंडा टैक्स बंगाल में निवेश को रोक रहा’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टीएमसी का ‘गुंडा टैक्स’ बंगाल में निवेश को रोक रहा है। राज्य के संसाधन माफिया के हाथों में चले गए हैं और सरकारी नीतियां जानबूझकर मंत्रियों को खुलेआम भ्रष्टाचार करने के लिए प्रेरित करने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि ‘मां, माटी, मानुष’ की बात करने वाली पार्टी की सरकार में बेटियों के साथ जो अन्याय हो रहा है, वो पीड़ा भी देता है और आक्रोश से भी भर देता है। आज पश्चिम बंगाल में अस्पताल भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। जब यहां एक डॉक्टर बेटी के साथ अत्याचार हुआ तो टीएमसी सरकार आरोपियों को बचाने में जुट गई। इस घटना से देश अभी उबरा भी नहीं था कि एक और कॉलेज में एक और बेटी के साथ भयंकर अत्याचार किया गया। इस घटना के आरोपियों का कनेक्शन भी टीएमसी से निकला है। हमें मिलकर बंगाल को इस निर्ममता से मुक्ति दिलानी है। साउथ लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप का पीएम ने किया जिक्र बता दें कि हाल ही में कोलकाता के साउथ लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पीएम मोदी ने इसी घटना का जिक्र कर ममता सरकार को घेरा। पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी और लेफ्ट ने सालों तक दिल्ली में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाई। इस दौरान इनको बांग्ला भाषा की याद तक नहीं आई। ये भाजपा सरकार है, जिसने बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।

जस्टिस वर्मा पर कार्रवाई तय! सभी राजनीतिक दलों ने जताई एकराय: रिजिजू

नई दिल्ली  केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार को कहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकमत हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि इस मुद्दे पर सभी पार्टियां से बातचीत जारी है और इसकी पहल अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने की है जिनमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर एक स्टोर में 14 मार्च की रात लगी आग में 500 करोड रुपए के सैकड़ो और जले हुए नोटों की गाड़ियां मिली थीं। जस्टिस वर्मा ने इस मामले में निर्दोष होने का दावा किया है। हालांकि उच्चतम न्यायालय की आंतरिक जांच समिति ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की सिफारिश की है। सांसदों ने की है पहल- रिजिजू रिजिजू ने पीटीआई को दिये एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने विभिन्न राजनीतिक दलों के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं एकमात्र सांसद वाले कुछ दलों से भी संपर्क करुंगा, क्योंकि मैं किसी भी सदस्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहता। ताकि यह भारतीय संसद की एक संयुक्त राय के रूप में सामने आए।’’ केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि जस्टिस वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लाने की पहल सरकार की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने की है, जिनमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार गंभीर मसला केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मामला गंभीर है। उन्होंने कहा, ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला है, क्योंकि न्यायपालिका ही वह जगह है जहां लोगों को न्याय मिलता है। अगर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, तो यह सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी कारण न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा।’’ रिजिजू ने कहा कि उन्हें खुशी है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मामले की गंभीरता को समझा है और इस मुद्दे पर साथ देने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि उसने चीजों को वैसे ही समझा जैसा उसे समझना चाहिए, क्योंकि कोई भी पार्टी भ्रष्ट न्यायाधीश के साथ खड़ी या भ्रष्ट न्यायाधीश को बचाती हुई नजर नहीं आ सकती।’’ रिजिजू ने कहा, ‘‘जब न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात आती है, तो हमें एकजुट होना होगा। इसमें पार्टी के आधार पर रुख नहीं होना चाहिए और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।’’ बता दें कि कांग्रेस ने कहा है कि उसके सभी सांसद जस्टिस वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। रिजिजू ने बताई आगे की प्रक्रिया रिजिजू ने आगे बताया कि किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि नोटिस लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष को और राज्यसभा में सभापति को प्रस्तुत किया जाएगा, जो सदन को सूचित करेंगे, न्यायाधीश जांच अधिनियम के अनुसार जांच समिति गठित करेंगे तथा तीन महीने में रिपोर्ट प्राप्त करेंगे। रिजिजू ने कहा, ‘‘तीन महीने की अवधि की आवश्यकता पूरी करनी होगी। उसके बाद जांच रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी और दोनों सदनों में इस पर चर्चा होगी।’’ पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा जस्टिस वर्मा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के बीच तुलना करने संबंधी टिप्पणी पर रिजिजू ने कहा कि संसद को एक वकील-सांसद के निजी एजेंडे से निर्देशित नहीं किया जा सकता। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिब्बल सिर्फ अपने निजी एजेंडे से प्रेरित हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘वह एक बहुत ही साधारण वकील हैं। वह भारत की संसद का मार्गदर्शन नहीं कर सकते। भारत की संसद का मार्गदर्शन सभी सांसदों द्वारा किया जाएगा।’’  

जम्मू-कश्मीर में बनी देसी व्हिस्की को अमेरिका में मिला डबल अवॉर्ड, जानें क्यों है खास

जम्मू कश्मीर  जम्मू की धरती से निकली एक खास सिंगल माल्ट व्हिस्की "ज्ञानचंद अम्बरा" ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर धमाल मचा दिया है। डेवन्स मॉडर्न ब्रुअरीज की इस नई पेशकश को इंटरनेशनल व्हिस्की कॉम्पिटिशन (IWC) 2025 में "बेस्ट इंडियन सिंगल माल्ट" और "बेस्ट इंडियन व्हिस्की" का खिताब मिला है। अमेरिका में मुकाबला, दुनियाभर की व्हिस्कियों को पीछे छोड़ा यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता अमेरिका के लास वेगास में हुई, जिसमें दुनियाभर की बेहतरीन व्हिस्कियों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता की खास बात यह है कि सभी ब्रांड्स का स्वाद ब्लाइंड टेस्टिंग के ज़रिए परखा जाता है। यानी जज को यह नहीं बताया जाता कि वे किस ब्रांड की व्हिस्की चख रहे हैं। हर कैटेगरी में केवल तीन पुरस्कार – गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज दिए जाते हैं। ऐसे में ज्ञानचंद अम्बरा का दो शीर्ष अवॉर्ड जीतना भारत के लिए गर्व की बात है। जम्मू में बनी, दुनिया में छाई ज्ञानचंद अम्बरा को जम्मू की डिस्टिलरी में तैयार किया गया है। यह डेवन्स की पहली अनपीटेड सिंगल माल्ट व्हिस्की है, जिसे अमेरिकी बॉर्बन बैरल्स में परिपक्व किया गया है। इसका गहरा एंबर रंग, और शहद, सूखी खुबानी और भुने हुए मसालों जैसे स्वाद इसे खास बनाते हैं। डेवन्स के चेयरमैन प्रेम देवान ने इस जीत को परंपरा और आधुनिक सोच का मेल बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञानचंद अम्बरा दशकों के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्वाद को ध्यान में रखकर बनाई गई है।   विश्व प्रसिद्ध समीक्षक भी हुए प्रभावित दुनिया के मशहूर व्हिस्की समीक्षक जिम मरे, जिन्होंने व्हिस्की बाइबल (Whisky Bible) जैसी प्रसिद्ध किताब लिखी है, उन्होंने इसे चखने के बाद हैरानी जताते हुए कहा, "क्या यह सच में भारतीय व्हिस्की हो सकती है?" ज्ञानचंद अम्बरा को मिला यह सम्मान सिर्फ एक ब्रांड की जीत नहीं, बल्कि पूरी भारतीय स्पिरिट इंडस्ट्री की उपलब्धि है। इससे साफ है कि अब भारतीय व्हिस्की को भी वैश्विक मंचों पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

नई सरकारी स्कीम 1 अगस्त से होगी शुरू, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा

धूरी इम्प्लॉईज प्रोविडैंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ई.पी.एफ.ओ.) के सहायक आयुक्त मनोज पटेल और इनफोर्समैंट अधिकारी दिनेश गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार ने निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की बेहतरी के लिए प्रधानमंत्री ई.एल.आई. स्कीम शुरू की है।  यह स्कीम पूरे भारत में 1 अगस्त से लागू हो जाएगी। उन्होंने यह जानकारी औद्योगिक इकाई के.आर.बी.एल., भसौड़ (धूरी) में आयोजित एक जागरूकता सेमिनार में दी। मनोज पटेल और दिनेश गर्ग ने बताया कि यह स्कीम औद्योगिक इकाइयों पर चार साल और अन्य नियोक्ताओं पर 2 साल के लिए लागू होगी। उन्होंने कहा कि ई.पी.एफ.ओ. के पूरे देश में 7.83 करोड़ पी.एफ. खाताधारक हैं, जिन्हें करीब 150 कार्यालयों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन 1 अगस्त से शुरू होकर 31 जुलाई 2027 तक चलेगी। यह स्कीम 1 लाख रुपए महीना वेतन प्राप्त करने वालों पर भी लागू होगी, लेकिन उन्हें मिलने वाली 15 हजार रुपए की राशि सालाना 2 किश्तों में दी जाएगी। यह स्कीम कर्मचारियों के साथ-साथ उत्पादकों (नियोक्ताओं) के लिए भी है। इसके तहत, 10 हजार रुपए तक वेतन वाले कर्मचारियों के मालिकों को 1 हजार रुपए प्रति महीना, 10,001 से 20,000 रुपए तक वेतन वालों के लिए 2 हजार रुपए, और 20,001 से 1 लाख रुपए तक वेतन वालों के लिए 3 हजार रुपए प्रति महीना नियोक्ताओं को दिया जाएगा। अधिकारियों ने कर्मचारियों और उद्योगपतियों से इस स्कीम का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट रखा गया है और इसके माध्यम से करीब साढ़े 3 करोड़ नई नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है। इस अवसर पर संस्थान के जनरल मैनेजर सागर सिद्धू द्वारा ई.पी.एफ.ओ. अधिकारियों को सम्मानित किया गया। 

राशन कार्ड संकट गहराया: नियम सख्त, लाखों को खतरे का अलर्ट

नई दिल्ली  भारत में करोड़ों लोग सरकार की खाद्य सुरक्षा योजनाओं के तहत हर महीने सस्ते या मुफ्त राशन का लाभ उठाते हैं। यह लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उन्हीं लोगों को मिलता है जिनके पास वैध राशन कार्ड होता है। लेकिन अब सरकार ने राशन कार्डधारकों के लिए एक सख्त फैसला लिया है-अगर आपने समय पर ई-केवाईसी नहीं करवाई, तो आपका नाम राशन कार्ड सूची से हटाया जा सकता है। क्यों जरूरी है ई-केवाईसी? सरकार ने यह कदम फर्जी राशन कार्ड और अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने से रोकने के लिए उठाया है। ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिर्फ सही और पात्र लाभार्थियों को ही राशन मिले। नई गाइडलाइन के मुताबिक: जिन राशन कार्डधारकों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं करवाई है, उनका नाम कार्ड से हटा दिया जाएगा। बिना ई-केवाईसी के राशन वितरण में पारदर्शिता और नियंत्रण संभव नहीं है। क्या करें जिससे नाम ना कटे? अगर आप भी इस स्कीम के लाभार्थी हैं और आपका नाम सूची में बना रहे, तो तुरंत नीचे दिए गए तरीकों से ई-केवाईसी करवा लें:   ई-केवाईसी कैसे कराएं? ऑफलाइन तरीका: अपने नजदीकी राशन डीलर या लोक सेवा केंद्र (CSC) पर जाएं। आधार कार्ड ले जाएं और वहां बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) के जरिए पहचान सत्यापित करवाएं। ऑनलाइन तरीका (अगर राज्य की वेबसाइट पर सुविधा उपलब्ध है): अपने राज्य के राशन पोर्टल पर लॉगइन करें। आधार नंबर डालें, फिर मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) के जरिए ई-केवाईसी पूरी करें।  अगर ई-केवाईसी में परेशानी हो रही है? जिन लोगों को ऑनलाइन फिंगरप्रिंट या ओटीपी वेरिफिकेशन में दिक्कत आ रही है, वे सीधे निकटतम सेंटर जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। कब तक करवा लें? सरकार ने ई-केवाईसी के लिए अंतिम तारीख भी तय कर दी है (जो राज्यवार अलग-अलग हो सकती है)। यदि आप तय समयसीमा से पहले ई-केवाईसी नहीं कराते हैं, तो राशन वितरण बंद हो सकता है और आपका नाम सूची से हटाया जा सकता है।  

सर्वे से साफ़ तस्वीर: बिहार, बंगाल समेत 5 राज्यों में किस पार्टी की सरकार बनती दिख रही है?

नई दिल्ली  भारत के पांच बड़े राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले जो ताज़ा सर्वे सामने आए हैं उनसे यह साफ हो गया है कि राजनीतिक माहौल में बदलाव की बयार बह रही है। वोट वाइब और इंक इनसाइट्स जैसे सर्वेक्षणों में जनता के रुझान ने कई पुराने आंकड़ों को उलट दिया है। इन राज्यों में केरल, तमिलनाडु, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। आइए जानते हैं क्या कहता है ताज़ा जनमत और किसकी बन सकती है सरकार। केरल: कांग्रेस गठबंधन UDF को जनता का भरोसा केरल में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। वोट वाइब के सर्वे के मुताबिक राज्य में यूडीएफ (UDF) को 38.9% लोगों का समर्थन मिला है। यह गठबंधन कांग्रेस और कुछ अन्य सहयोगी दलों का है। वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला एलडीएफ (LDF) 27.8% समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) भी पीछे नहीं है। उसे 23.1% वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि केरल में भाजपा को अब तक बड़ी सफलता नहीं मिली है लेकिन इस आंकड़े से संकेत मिलता है कि पार्टी की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। बाकी अन्य दलों को 4.2% समर्थन मिला है। तमिलनाडु: डीएमके को बढ़त लेकिन जनता में नाराज़गी भी तमिलनाडु में डीएमके (DMK) को 37% समर्थन मिला है जो इसे राज्य की सबसे लोकप्रिय पार्टी बना रहा है। हालांकि AIADMK को भी 33% वोट मिल सकते हैं और यह आंकड़ा उसे कड़ी टक्कर देने वाला बनाता है। अभिनेता कमल हासन की पार्टी टीवीके (TVK) को 12% समर्थन मिला है जो एक नई राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ 41% लोग एंटी इनकंबेंसी यानी सरकार से नाराज हैं। वहीं 31% लोग सरकार के समर्थन में हैं। यानी स्टालिन सरकार की राह आसान नहीं लेकिन बढ़त उनके पक्ष में है। असम: बीजेपी की मजबूत स्थिति, सीएम की दौड़ में कड़ी टक्कर असम में भाजपा को फिर से सत्ता में लौटने की संभावना दिख रही है। सर्वे के मुताबिक भाजपा को 50% लोगों का समर्थन है जबकि कांग्रेस को 39% समर्थन मिल सकता है। मुख्यमंत्री पद के लिए हेमंत बिस्वा शर्मा को 46% लोग पसंद कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के गौरव गोगोई को 45% समर्थन मिला है। यह मुकाबला बेहद नजदीकी है और अंतिम परिणामों में उलटफेर भी संभव है। बिहार: NDA को बढ़त लेकिन तेजस्वी यादव सबसे पसंदीदा चेहरा बिहार में एनडीए (NDA) को 48.9% समर्थन मिल सकता है जबकि महागठबंधन को 35.8% का समर्थन मिला है। यानी भाजपा और जदयू का गठबंधन चुनावी मैदान में आगे दिख रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय चेहरा तेजस्वी यादव बनकर उभरे हैं जिन्हें 38% लोगों ने पसंद किया है। वहीं नीतीश कुमार को 36% और चिराग पासवान को 5% समर्थन मिला है। सम्राट चौधरी को सिर्फ 2% लोगों का समर्थन मिला। यह दर्शाता है कि भाजपा गठबंधन भले ही चुनावी आंकड़ों में आगे हो लेकिन नेतृत्व की पसंद के मामले में मतदाता तेजस्वी यादव को अधिक पसंद कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी फिर सबसे बड़ी पसंद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लोकप्रियता बरकरार है। वोट वाइब के अनुसार 41.7% लोग उन्हें सीएम फेस के रूप में देखना चाहते हैं। भाजपा के शुभेंदु अधिकारी को 20.4%, सुकांत मजूमदार को 9.7% और तृणमूल के अभिषेक बनर्जी को 5.3% समर्थन मिला है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ममता बनर्जी की पकड़ अब भी मजबूत है लेकिन भाजपा के पास भी एक बड़ा जनाधार मौजूद है। आने वाले दिनों में प्रचार और रणनीति इन आंकड़ों को बदल सकते हैं।  

कहां है आतंकी सरगना मसूद अजहर? खुफिया रिपोर्ट से हुआ बड़ा पर्दाफाश

नई दिल्ली  भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ी खुफिया जानकारी सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में छिपा हुआ देखा गया है। उसे उसके गढ़ बहावलपुर से कई किलोमीटर दूर इस क्षेत्र में देखा गया है। स्कर्दू के सदपारा रोड इलाके में देखा गया खुफिया जानकारी से पता चला है कि मसूद अजहर को हाल ही में स्कर्दू में विशेष रूप से सदपारा रोड इलाके में देखा गया था। यह इलाका महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दो मस्जिदें और कई निजी व सरकारी गेस्ट हाउस मौजूद हैं। यह जानकारी मसूद अजहर के नए ठिकाने की ओर इशारा कर रही है। पाकिस्तान में अन्य आतंकियों को भी पनाह मसूद अजहर का पारंपरिक गढ़ पाकिस्तान का बहावलपुर माना जाता है। बहावलपुर में उसके दो मुख्य ठिकाने हैं। गौरतलब है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर और मदरसे को निशाना बनाकर हमला किया था। अजहर अकेला ऐसा आतंकी नहीं है जिसे पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली है। एक अन्य आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ सैयद सलाहुद्दीन भी इस्लामाबाद से ही ऑपरेट करता है जो पाकिस्तान में आतंकियों की मौजूदगी पर सवाल खड़े करता है। बिलावल भुट्टो ने कहा था 'अफगानिस्तान में हो सकता है' हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में हो सकता है। बिलावल ने अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में यहां तक कहा था कि "अगर मसूद अजहर पाकिस्तान की सरजमीं पर पाया गया तो उसे हम उसे भारत को सौंप देंगे। जब भी भारत सरकार हमसे जानकारी शेयर करेगी कि मसूद अजहर को पाकिस्तानी सरजमीं पर देखा गया तो हम उसे अरेस्ट कर भारत को सौंपकर खुश होंगे।" हालांकि नई खुफिया जानकारी बिलावल के इस दावे के विपरीत है और अजहर के पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में होने की पुष्टि करती है।   भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड बता दें कि मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। इनमें 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। भारत लंबे समय से मसूद अजहर को सौंपने की मांग करता रहा है। इस नई खुफिया जानकारी के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान पर मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने की संभावना है।  

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा- तमिलनाडु दिवस तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि 1967 में आज ही के दिन तमिलनाडु को अपनी पहचान मिली थी और यह तमिलों के इतिहास में एक अनोखा दिन है। स्टालिन ने राज्य का नाम रखने में द्रविड़ द्रमुक कषगम (द्रमुक) सरकार के प्रयासों को याद करते हुए कहा, ‘‘18 जुलाई 1967 को द्रमुक के सत्ता में आने के बाद इस भूमि की पहचान बदल गई।'' उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ''तमिलनाडु दिवस – तमिल समुदाय के इतिहास में एक अनोखा दिन ! वह दिन जब हमें आधिकारिक तौर पर अपना असली नाम तमिलनाडु मिला, एक सपना जो हम वर्षों से अपने दिलों में संजोए हुए थे, एक सपना सच हुआ।'' द्रमुक अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि यही वह दिन था जब महान नेता (पूर्व मुख्यमंत्री) सी एन अन्नादुरई ने राज्य का नामकरण किया और राज्य विधानसभा में तीन बार ‘तमिलनाडु’ नाम दोहराया, फिर चारों ओर यह आवाज गूंजी।  

57 मुस्लिम देशों के सामने पाकिस्तान ने उठाया सिंधु मुद्दा, पानी को बताया अस्तित्व का संकट

इस्लामाबाद भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को रोके जाने का दुख़ा पाकिस्तान ने मुस्लिम देशों के संगठन OIC में भी सुनाया है। पाकिस्तान 57 मुसलमान देशों की संस्था इस्लामिक सहयोग संगठन की मीटिंग में यह बात रखी और कहा कि भारत ने एकतरफा तौर पर यह फैसला लिया है। जेद्दा में आयोजित OIC के ह्यूमन राइट्स कमिशन के 25वें सत्र में पाकिस्तान ने कहा कि हमारे अधिकारों का भारत की ओर से हनन किया जा रहा है। पाकिस्तान ने 'राइट टू वार' नाम से आयोजित सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला मनमाना है। टीवी के मुताबिक सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि सैयद फवाद शेर ने कहा भारत ने एकतरफा तौर पर यह निर्णय लिया है और इससे वर्ल्ड बैंक की ओर से तय शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी तो हमारे लिए मूल अधिकार की तरह है, लेकिन भारत उसे भी हमसे छीनने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि हम तो पहले ही पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि भारत से आने वाली नदियों में पानी की कमी हुई तो हमारे आगे मुश्किल हालात होंगे। उन्होंने कहा कि इससे हमारे इलाके में जलवायु का संकट पैदा हो सकता है। पानी की किल्लत होगी और खेती से लेकर तमाम जरूरी चीजों पर खतरा पैदा होगा। सैयद फवाद शेर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह बड़ी परेशानी है। हालांकि पाकिस्तान के इस रुख के बाद भी मुस्लिम देशों के संगठन ने अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें इस मसले का कोई जिक्र हो। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इसके अलावा सिंधु समेत सभी नदियों पर बांध आदि परियोजनाओं पर तेजी लाई जा रही है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की ओर से जाने वाले पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।  

नई जीवन तकनीक: तीन लोगों के DNA से बच्चा पैदा करने में ब्रिटेन को मिली कामयाबी

नई दिल्ली  मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए मेडीकल जगत में नित नए प्रयोग होते रहते हैं। इसी क्रम में ब्रिटेन ने भी आज से दस साल पहले माइटोकॉन्ड्रियल दान को वैध बना दिया था। इस नियम के बनने के सालों बाद इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। इस उच्च स्तरीय तकनीक के जरिए मानवीय डीएनए में आई खराबी को आगे बढ़ने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी। अब डॉक्टरों ने इस शोध के नतीजे प्रकाशित किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तीन माता-पिता वाले शिशु की इस तकनीक से अभी तक आठ बच्चे पैदा किए जा चुके हैं, खुशी की बात यह है कि यह आठों ही अभी स्वस्थ हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रजनन उपचार पर प्रकाशित दो शोध पत्रों के मुताबिक सरकार से अनुमति मिलने के बाद इसका प्रयोग 22 महिलाओं के डीएनए के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह वह महिलाएं थी जिनका जीन परेशानी खड़ा करने वाला था। यानी इनके जीन को लेकर अगर बच्चा पैदा होता तो वह गंभीर अनुवांशिक विकार यार जन्मजात विकलांगता के साथ पैदा होता। इन महिलाओं के जीन में लेह सिंड्रोम भी उपस्थित था। रिपोर्ट के मुताबिक न्यूकैसल टीम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक में तीन लोगों के डीएनए का उपयोग करके एक भ्रूण का निर्माण किया गया है। इसमें होने वाले माता पिता के न्यूक्लियर डीएनए को लिया गया और डोनर एक से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को लिया गया। आपको बता दें कि एक बच्चे के माइटोकॉन्ड्रिया के निर्माण के लिए उसकी माता ही जिम्मेदार होती है। ऐसे में अगर माता किसी बीमारी से ग्रसित है तो बच्चा भी उसी परेशानी के साथ पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में यहां पर किसी दूसरी महिला के अंड़े से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए लिया गया। इसके बाद इन तीनों को निषेचित करके भ्रूण का निर्माण किया गया। 2015 में जब ब्रिटेन की संसद से इस माइटोकॉन्ड्रियल दान के बारे में बहस की जा रही थी। तब इसकी प्रक्रिया और प्रभावशीलता के बारे में कई सवाल उठे थे। हालांकि बाद में संसद से इसे मंजूरी मिल गई थी। हालांकि अब जबकि रिपोर्ट सामने आ गई है तो इसके बाद भी ब्रिटिश मीडिया में इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह तकनीक सफल हो गई थी तो अभी तक इसके बारे में सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं बताया गया, जबकि इसमें बहुत बड़ा वित्तीय निवेश किया गया था। मीडिया के मुताबिक आखिर कार इस तकनीक को अभी तक दुनिया से क्यों छिपाया गया। अगर इसमें पारदर्शिता दिखाई जाती तो यह कई शोध टीमों के लिए महत्वपूर्ण साबित होती।