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ट्रंप की धमकियों को नजरअंदाज कर रूस में भारत का डिप्लोमैटिक गेम प्लान शुरू, डोभाल और जयशंकर एक्शन में

नई दिल्ली  टैरिफ पर अमेरिकी दादागीरी, ट्रंप के बड़बोले बयानों के बीच भारत ने यूएस समेत दुनिया को रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश दिया है. रूस के साथ कच्चे तेल, S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर बात करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल मॉस्को पहुंच चुके हैं. अगले कुछ ही दिनों में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस की यात्रा पर जाने वाले हैं. भारत की ओर से ये दो हाई प्रोफाइल यात्राएं तब हो रही हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को लगातार टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं. ट्रंप की धमकी तब आ रही है जब वे भारत पर 25 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. इसके बाद मंगलवार को उन्होंने कहा कि भारत अच्छा ट्रेडिंग पार्टनर नहीं है और वे इंडिया पर टैरिफ को और भी बढ़ा देंगे. ट्रंप की आपत्ति भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद पर है. ट्रंप का आरोप है कि भारत इससे न सिर्फ रूस की वॉर मशीन को चला रहा है बल्कि इस तेल को बाजार में बेचकर फायदा भी कमा रहा है. इस घड़ी में भारत ने रूस में अपने डिप्लोमैटिक मिशन को बेहद सक्रिय कर दिया है. भारत ने रूस से तेल खरीद पर स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का परिचय देते हुए कहीं से भी यह मैसेज नहीं दिया है कि अब वो रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा. भारत अभी अपनी जरूरत का 35 से 40 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीदता है. भारत चीन के बाद रूस के कच्चे तेल का दूसरा बड़ा खरीदार है. गौरतलब है कि एनएसए अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर की रूस यात्राओं के बाद ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा भी प्रस्तावित है. हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं है. बता दें कि ट्रंप भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को डेड इकोनॉमी बता चुके हैं. रूस ने ट्रंप की ओर से भारत को दी जा रही टैरिफ धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ये 'अवैध व्यावसायिक दबाव' हैं.  क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, "हम ऐसे कई बयान सुनते हैं जो दरअसल देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए मजबूर करने की धमकियां और प्रयास हैं. हम ऐसे बयानों को वैध नहीं मानते. संप्रभु देशों को अपने हितों के आधार पर व्यापार और आर्थिक सहयोग में अपने साझेदार चुनने का अधिकार होना चाहिए और है भी." सोमवार रात को भारत केविदेश मंत्रालय ने अमेरिकी धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "भारत को निशाना बनाना अनुचित और अविवेकपूर्ण है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि, "भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा." डोभाल और रूसी लीडरशिप के बीच चर्चा के प्रमुख बिंदू ट्रंप की धमकियों के बीच डोभाल और जयशंकर की यह यात्रा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश देती है. इन दोनों नेताओं की रूस दौरे पर इन मुद्दों पर चर्चा संभावित है. रक्षा सहयोग: अजित डोभाल रूसी समकक्षों के साथ रक्षा उद्योग सहयोग पर बातचीत करेंगे. इसमें अतिरिक्त S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद, भारत में इसके रखरखाव के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्टर की स्थापना और रूसी Su-57 फाइटर जेट्स के खरीद पर चर्चा हो सकती है. रूसी तेल की आपूर्ति: इस दौरे में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और रूसी तेल की आपूर्ति पर भी चर्चा होगी. भारत रूस से लगभग 35 से 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले ये आंकड़ा मात्र 0.2% था. रूसी तेल की कम कीमत ने भारत को घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन देने में मदद की है.  भारत ने जोर देकर कहा कि वह अपनी राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देगा. भारत ने कहा है कि हम अपने उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देंगे. अगर रूसी कच्चा तेल अन्य स्रोतों से सस्ता है, तो हम अपने नागरिकों को क्यों दंडित करें.? ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने भी कहा कि भारत का रूसी तेल व्यापार पारदर्शी रहा है और यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर करने में मदद करता है. मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन की तैयारी: यह यात्रा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और आगामी भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों का हिस्सा है.  भारत ने दिया रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश डोभाल और जयशंकर की मॉस्को यात्राएं भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का मजबूत संदेश देती हैं. भारत और रूस के बीच संबंध 1947 से चले आ रहे हैं और 2000 में रणनीतिक साझेदारी संधि के बाद से हर साल शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं. 2021 से दोनों देश 2+2 वार्ता (विदेश और रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक) भी आयोजित करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान से परहेज किया है.  ट्रम्प की धमकियों के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखेगा, यह न केवल तेल व्यापार तक सीमित है बल्कि रक्षा, ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को भी शामिल करता है. रूस ने भी भारत के व्यापारिक भागीदार चुनने के अधिकार का समर्थन किया है इसे संप्रभु देशों का मूलभूत अधिकार बताया. 

धनखड़ जैसी ऐतिहासिक जीत दोहराएगा NDA? उपराष्ट्रपति चुनाव में BJP का पलड़ा भारी

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने उनके विकल्प की तलाश शुरू कर दी है. उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का औपचारिक ऐलान होने के साथ ही सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 'डिनर डिप्लोमेसी' के जरिए उपराष्ट्रपति के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, तो बीजेपी ने भी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी सियासी कवायद शुरू कर दी है.  चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान का ऐलान किया है, जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व उपराष्ट्रपति पद के लिए व्यापक समर्थन जुटाने की रणनीति बनाने में जुट गया है.  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सोमवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई, जिसमें उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर मंथन किया गया. इसके अलावा जगदीप धनखड़ जैसी बड़ी जीत के लिए गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाने का प्लान बनाया गया है. पार्टी के सामने उपराष्ट्रपति पद के लिए जगदीप धनखड़ का विकल्प ढूंढने के साथ-साथ 2022 की तरह बड़ी जीत हासिल करने की चुनौती है.  बीजेपी उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाने की रणनीति बना रही है, जो पार्टी के साथ-साथ आरएसएस की विचारधारा में भी फिट बैठ सके. इसके अलावा, एनडीए के साथ-साथ दूसरे दलों का समर्थन भी उसके नाम पर आसानी से जुटाया जा सके. इसकी कमान अमित शाह ने अपने हाथ में संभाल रखी है.  उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को होगा चुनाव चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को देश के 17वें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. 7 अगस्त को अधिसूचना जारी हो जाएगी, जिसके साथ नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. उपराष्ट्रपति पद के लिए 21 अगस्त तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे. 22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी और उम्मीदवार 25 अगस्त तक अपने नाम वापस ले सकते हैं.  उपराष्ट्रपति पद पर एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर 9 सितंबर को मतदान होगा. संसद भवन के कमरा नंबर एफ-101 वसुधा, प्रथम तल में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. वोटिंग खत्म होने के बाद मतगणना शुरू हो जाएगी. इस तरह, नतीजे 9 सितंबर की शाम तक घोषित कर दिए जाएंगे. लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान में हिस्सा लेते हैं.  उपराष्ट्रपति के लिए बीजेपी की सियासी कवायद बीजेपी ने उपराष्ट्रपति चुनाव की सियासी हलचल को देखते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, अमित शाह के कार्यालय में सोमवार को एक बैठक हुई, जिसमें बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष, महासचिव विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे नेता शामिल हुए थे. बैठक में आगामी राज्यों के चुनाव के साथ-साथ उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई.  बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग के लिए एनडीए सांसदों के लिए एक ट्रेनिंग सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें उन्हें मतदान प्रक्रिया और बैलेट पेपर के प्रारूप से अवगत कराया जाएगा. इसके अलावा, एनडीए के साथ-साथ गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाने की रणनीति बनाई गई है. इसके लिए पार्टी के कुछ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने की योजना बनाई गई है ताकि समय रहते उनसे संपर्क और संवाद करके समर्थन जुटाया जा सके. धनखड़ से भी बड़ी जीत का बीजेपी बना रही प्लान बीजेपी की कोशिश जगदीप धनखड़ से भी बड़ी जीत की इबारत लिखने की है. 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ थे, तो विपक्ष की तरफ से कांग्रेस नेता मारग्रेट अल्वा उम्मीदवार थीं. धनखड़ ने मारग्रेट अल्वा को भारी मतों से हराया था. जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे, जबकि मारग्रेट अल्वा को 182 सांसदों का ही समर्थन मिल सका था.  जगदीप धनखड़ को मिली भारी मतों से जीत में एनडीए दलों के समर्थन के साथ-साथ कई गैर-एनडीए दलों का भी अहम योगदान था. नवीन पटनायक की बीजेडी, जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस और मायावती की बसपा ने एनडीए के प्रत्याशी जगदीप धनखड़ को समर्थन दिया था. इस बार भी उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने 2022 की तरह समर्थन की उम्मीद लगाई हुई है. बीजेपी ने वाईएसआर कांग्रेस, बीआरएस और बीजेडी के नेताओं से संपर्क साधने का काम अपने नेताओं को सौंप दिया है.  विपक्ष उपराष्ट्रपति के लिए तलाश रहा संयुक्त प्रत्याशी विपक्षी इंडिया गठबंधन उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में जुट गया है, जिसके लिए संयुक्त उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहा है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अगस्त को विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेताओं को अपने आवास पर दावत दी है, जिसमें माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार को लेकर फैसला किया जाएगा. इस तरह, कांग्रेस ने विपक्षी दलों की किलेबंदी अभी से शुरू कर दी है, ताकि 2022 की तरह किसी तरह की कोई गलती न हो.  2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार है, जब इंडिया गठबंधन के नेता एकजुट हो रहे हैं. राहुल गांधी ने दावत ऐसे समय रखी है, जब अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है. ऐसे में उपराष्ट्रपति पर संयुक्त रणनीति तैयार करने की कोशिश में राहुल गांधी लगे हैं. विपक्षी दलों का मानना है कि एक मजबूत उम्मीदवार के साथ वे उपराष्ट्रपति चुनाव को रोचक बना सकते हैं, और भले ही एनडीए के उम्मीदवार को जीत से न रोक सकें, लेकिन धनखड़ जैसी बड़ी जीत से जरूर पीछे रख सकते हैं.  धनखड़ से बड़ी जीत के लिए बीजेपी को क्या करना होगा बीजेपी की रणनीति एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश करना है, जिसके नाम को आगे करके विपक्षी किलेबंदी में सेंध लगाई जा सके. यह कदम बीजेपी की क्षेत्रीय संतुलन और व्यापक समर्थन हासिल करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद हैं, जिसमें से बीजेपी को करीब 425 सांसदों का समर्थन हासिल है. लेकिन धनखड़ को मिले 528 वोटों से करीब 103 वोट कम है. ऐसे में धनखड़ जैसी जीत के लिए एनडीए को 100 से ज्यादा … Read more

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एल्विश यादव के खिलाफ ट्रायल पर रोक, सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब तलब

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही सांप के जहर से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। एल्विश यादव ने इस मामले में चार्जशीट और मुकदमे की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई तक निचली अदालत में मामले की सुनवाई नहीं होगी। क्या है मामला? नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव समेत कुछ लोगों पर सांप का जहर पार्टी में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने एक पार्टी में अवैध तरीके से सांपों और जहर का इस्तेमाल किया था। इस मामले में वन विभाग और पुलिस की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई थी। एल्विश यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके खिलाफ गलत और बिना सबूत के आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। यूपी सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले में अपने खिलाफ आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली एल्विश यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ यादव की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। आरोपपत्र में विदेशियों समेत अन्य लोगों की तरफ से रेव पार्टियों में मनोरंजन के लिए साँप के जहर का सेवन करने का आरोप लगाया गया है। पिछले साल मार्च में नोएडा पुलिस ने किया था गिरफ्तार एल्विश यादव को पिछले साल मार्च में नोएडा पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। मामले में उनके वकील ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि आवेदक और सह-आरोपी के बीच कोई कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं होने के अलावा, उसके पास से कोई सांप, मादक या मनोविकारजनक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। वकील ने आगे कहा था कि हालांकि सूचना देने वाला अब पशु कल्याण अधिकारी नहीं है, फिर भी उसने खुद को पशु कल्याण अधिकारी बताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एल्विश यादव को एक जाने-माने प्रभावशाली व्यक्ति और टेलीविजन पर कई रियलिटी शो में दिखाई देने वाला व्यक्ति बताते हुए वकील ने कहा था कि एफआईआर में उनकी संलिप्तता ने मीडिया का बहुत ध्यान आकर्षित किया है।

EC की SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर बवाल: 65 लाख लोगों को क्यों हटाया? SC ने मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्वाचन आयोग से बिहार में मतदाता सूची मसौदा से बाहर किए गए लगभग 65 लाख मतदाताओं का विवरण नौ अगस्त यानी शनिवार तक प्रस्तुत करने को कहा है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा कि वे हटाए गए 65 लाख मतदाताओं का विवरण प्रस्तुत करें और इसकी एक प्रति गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) को भी दें। यह विवरण पहले ही राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जा चुका है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्देश देने वाले निर्वाचन आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाले एनजीओ ने एक नया आवेदन दायर कर निर्वाचन आयोग को लगभग 65 लाख हटाए गए मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। याचिका में ADR ने कहा था कि जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके विवरण में यह भी उल्लेख हो कि वे (मतदाता) मृत हैं, स्थायी रूप से पलायन कर गए हैं या किसी अन्य कारण से उनके नाम पर विचार नहीं किया गया है। प्रशांत भूषण से क्या बोला कोर्ट? हालांकि, पीठ ने ADR की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण से कहा कि नाम हटाने का कारण बाद में बताया जाएगा क्योंकि अभी यह केवल एक मसौदा सूची है। इस पर भूषण ने दलील दी कि कुछ राजनीतिक दलों को हटाए गए मतदाताओं की सूची दी गई है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उक्त मतदाता मर चुका है या पलायन कर गया है। प्रभावित हर मतदाता से संपर्क करेंगे: SC पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा, ‘‘हम प्रभावित होने वाले हर मतदाता से संपर्क करेंगे और आवश्यक जानकारी प्राप्त करेंगे। आप (निर्वाचन आयोग) शनिवार तक जवाब दाखिल करें और मिस्टर भूषण को इसे देखने दें, फिर हम देखेंगे कि क्या खुलासा होता है और क्या नहीं।’’ भूषण ने आरोप लगाया कि गणना फॉर्म भरने वाले 75 प्रतिशत मतदाताओं ने 11 दस्तावेजों की सूची में उल्लिखित कोई भी सहायक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं दिए हैं और उनके नाम निर्वाचन आयोग के बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की सिफारिश पर शामिल किए गए थे। पीठ ने कहा कि वह 12 अगस्त को निर्वाचन आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर रही है और एनजीओ उस दिन ये दावे कर सकता है। निर्वाचन आयोग को कानून के अनुसार कार्य करने वाला एक संवैधानिक प्राधिकारी बताते हुए शीर्ष अदालत ने 29 जुलाई को कहा था कि अगर बिहार में मतदाता सूची की एसआईआर में ‘‘बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए’’ हैं, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगी। पीठ ने बिहार में निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने के लिए समयसीमा तय की थी और कहा था कि इस मुद्दे पर सुनवाई 12 और 13 अगस्त को होगी।  

दो दिल, एक कहानी और एक सौतन! मोहब्बत में आई दरार की दर्दनाक दास्तां

नई दिल्ली  दिल्ली के मधु विहार इलाके से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 19 साल के युवक ने अपने ट्रांसजेंडर पार्टनर की निर्मम हत्या कर दी। हत्या के पीछे पैसों का लेनदेन और धोखे का शक बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपी युवक और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है। प्यार के रिश्ते में आया पैसों का विवाद यह घटना रेहान और करण नाम के दो युवकों के बीच की है। रेहान (19) और करण (ट्रांसजेंडर) बीते चार महीनों से मधु विहार इलाके में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। उनका रिश्ता एक आम दोस्ती से बढ़कर था लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनके रिश्ते में पैसों को लेकर तकरार शुरू हो गई थी। रेहान बार-बार करण से पैसे ऐंठने लगा था जिससे करण ने उससे दूरी बनाना शुरू कर दी। रेहान को यह दूरी बर्दाश्त नहीं हुई और उसे लगा कि करण उसे धोखा दे रहा है।   झाड़ियों में मिला शव धोखे के शक में रेहान ने अपने 20 साल के दोस्त मोहम्मद सर्वर के साथ मिलकर करण की हत्या की साजिश रची। 3-4 अगस्त की रात रेहान और सर्वर बहाने से करण को टेल्को टी-पॉइंट पर ले गए। वहां दोनों ने मिलकर करण पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और उसकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों मौके से फरार हो गए। पुलिस को किसी राहगीर ने सूचना दी कि झाड़ियों में एक युवक का शव पड़ा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।   पुलिस ने 12 घंटे में सुलझाया मामला क्राइम ब्रांच ने कुछ ही घंटों में इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया। पुलिस ने ट्रांसयमुना से लेकर गाजियाबाद तक कई जगहों पर छापेमारी की लेकिन आरोपी फरार थे। आखिरकार पुलिस को जानकारी मिली कि दोनों पूर्वी दिल्ली इलाके में आने वाले हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने बीती रात 12:45 बजे शकरपुर फ्लाईओवर के पास से दोनों आरोपियों रेहान और मोहम्मद सर्वर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।   

संसद में बिहार की मतदाता सूची पर नहीं हो रही चर्चा, विपक्ष नाराज़: खरगे का बयान

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि विपक्षी पार्टियां बिहार में चल रही 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) यानी मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा पर संसद में चर्चा की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। खरगे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करती है, तो इसे ऐसा माना जाएगा कि वह लोकतंत्र और संविधान को नहीं मानती। उन्होंने कहा, 'एसआईआर पर चर्चा बेहद जरूरी है ताकि हर भारतीय नागरिक के मतदान के अधिकारों की रक्षा की जा सके।' क्या है एसआईआर? विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग मतदाता सूची को दोबारा जांचेगा, ताकि उसमें किसी भी तरह की गलती, दोहराव या अपात्र नामों को हटाया जा सके और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जा सके। विपक्ष की क्या है चिंता? विपक्षी दलों का कहना है कि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, और इससे कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे उनके वोट देने का अधिकार छिन सकता है। इसी वजह से वे इस पर संसद में खुली बहस चाहते हैं। खरगे ने यह भी कहा कि, 'अगर सरकार वाकई में लोकतांत्रिक मूल्यों को मानती है, तो उसे एसआईआर पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।' सरकार की चुप्पी पर खरगे का सवाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अनुसार, केंद्र सरकार एसआईआर पर चर्चा से बच रही है, जिससे शक पैदा होता है कि वह जानबूझकर इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर से झटका खाने के बाद मसूद अजहर की नई चाल, जैश को दोबारा खड़ा करने की मुहिम

नई दिल्ली कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सैन्य बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के कुल 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर उसे जमींदोज कर दिया था। इसमें कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित हेडक्वार्टर भी शामिल था। अब खबर है कि इस आतंकी संगठन का मुखिया मसूद अजहर ने उसे हेडक्वार्टर को फिर से खड़ा करने की मुहिम छेड़ी है और इसके लिए ऑनलाइन चंदा जुटा रहा है। एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जमात की ओर से पोस्ट कर यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित सुभान अल्लाह मस्जिद का फिर से पुनर्निर्माण किया जा रहा है। सुभान अल्लाह मस्जिद की जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर था। पोस्ट में कहा गया कि इसके लिए सब एक होकर काम करें, पैसे जमा करें। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि किसने कितना चंदा दिया, इसका किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए। शहीद मस्जिदें फिर से मुस्कुराएंगी, मसूद का दावा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जैश सरगना मसूद अजहर ने इस पोस्ट में कहा कि इस कैंपेन से जमीन के कई हिस्से जन्नत बन जाएंगे, शहीद मस्जिदें फिर से मुस्कुराएंगी और रौनक लौट आएगी। पोस्ट में ये भी कहा गया है कि जो दीवाने ‘जेहाद' की राह में तरस रहे हैं, उनके लिए भी अब नए रास्ते खुलेंगे। मसूद अजहर का भीख मांगने का यह कैम्पेन आज से ही शुरू हुआ है। 15 एकड़ क्षेत्र में फैला है आतंक का मरकज बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों द्वारा 26 पर्यटकों की धर्म पूछकर की गई हत्या के बाद भारतीय सेना ने 6 और 7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। 22 मिनट के इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के ठिकाने बर्बाद कर दिए थे। इसमें सबसे अहम सुभान अल्लाह मस्जिद था। पाकिस्तान पंजाब प्रांत के बहाबलपुर में स्थित यह मस्जिद जैश-ए-मोहम्मद का सबसे महत्वपूर्ण आतंकी केंद्र था, जो 15 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह पुलवामा हमले जैसे आतंकी हमलों की योजना और प्रशिक्षण का गढ़ रहा है।  

पिता की जान बचाने पहुंचे पुलिसकर्मी को बेटों ने पीट-पीटकर मार डाला

तमिलनाडु दो बेटों और उनके पिता के बीच जारी हिंसक घरेलू विवाद को शांत कराने के चक्कर में तमिलनाडु में एक पुलिसकर्मी को अपनी ही जान गंवानी पड़ गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। फिलहाल, पुलिस तीन आरोपियों की तलाश कर रही है। वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया है। घटना तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले के उडुमलपेल के पास सोमवार रात की है। यहां कथित तौर पर शराब के नशे में दो युवकों और उनके पिता के बीच झगड़ा हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों और चश्मदीदों ने बताया कि रात में गश्त कर रहे एसएसआई शानमुगावेल इस मारपीट की जानकारी मिलने के बाद तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कुडिमंगलम की एक निजी संपत्ति में हुई है, जिसके मालिक स्थानीय AIADMK विधायक हैं। यहां काम करने वाले मूर्ति और उसके बेटे थंगापांडियन और मणिकंदन के बीच झगड़ा हो रहा था। खबर है कि इस दौरान दोनों बेटे अपने पिता के साथ मारपीट कर रहे थे। तब पुलिसकर्मी ने झगड़ा शांत कराने की कोशिश की और घायल पिता को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की। इस दौरान छिपे हुए मणिकंदन ने थंगापांडियन के साथ बातचीत करते हुए कथित तौर पर एसएसआई पर हमला कर दिया। इसके बाद खबर है कि पिता और दूसरा बेटा भी मारपीट में शआमिल हो गए। इस दौरान तीनों पुलिसकर्मी के पीछे दौड़ पड़े और पीट-पीट कर मार डाला। अचानक हुए इस हमले में पुलिसकर्मी का ड्राइवर बचकर निकलने में सफल रहा। फिलहाल, तीनों आरोपी फरार हैं और पुलिस तलाश कर रही है। सीएम स्टालिन ने घटना पर शोक जताया है। फिलहाल, इस पर राज्य के प्रमुख विपक्षी दल AIADMK की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। खास बात है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब राज्य में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी नेता नारायण तिरुपति ने इस हमले पर हैरानी जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को निजी दुश्मनी कहकर खत्म नहीं किया जा सकता।  

प्रशासनिक कार्यों को नई रफ्तार, PM मोदी ने किया कर्तव्य भवन-3 का शुभारंभ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर कर्तव्य भवन में शिफ्ट किया जाएगा जिससे दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय/विभाग और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय होंगे। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए ऐसे कुल 10 भवनों का निर्माण होना है। इनमें से कर्तव्य भवन-3 बनकर तैयार हो गया है, इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। साथ ही वह शाम छह बजे कर्तव्य पथ पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। परियोजना पूरी होने के बाद किराये के तौर पर खर्च होने वाले 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी। कर्तव्य भवन में क्या है खास लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस अत्याधुनिक कार्यालय परिसर में दो बेसमेंट और सात मंजिलें (भूतल+6 मंजिल) हैं। वर्तमान में, कई प्रमुख मंत्रालय 1950 और 1970 के दशक के बीच निर्मित शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों से काम करते हैं, जो 1950-70 के दशक में बनाई गई थीं।  भवन में सुरक्षित और आईटी-सक्षम कार्यस्थल, स्मार्ट एंट्री सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कमांड सेंटर, सोलर पैनल, सौर वॉटर हीटर और ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिसमें अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। इमारत को ठंडा रखने और बाहरी ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए इसमें कांच की विशेष खिड़कियां लगाई गई हैं। 30 फीसदी कम ऊर्जा का खपत कर्तव्य भवन को 30 प्रतिशत कम ऊर्जा खपत के लिए तैयार किया गया है। ऊर्जा की बचत करने वाली एलईडी लाइटें, जरूरत न होने पर लाइटें बंद करने वाले सेंसर, बिजली बचाने वाली स्मार्ट लिफ्ट्स और बिजली के उपयोग को प्रबंधित करने की एक उन्नत प्रणाली लगाई गई है। जल्द ही अन्य भवन भी हो जाएंगे पूरी तरह तैयार शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 के सभागार में पत्रकारों से चर्चा में बताया कि अगले महीने तक कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी बनकर तैयार जाएंगे। दोनों का काम लगभग अंतिम चरण में है। प्रस्तावित अन्य सात भवन भी अप्रैल 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे इन भवनों में तकनीक, सुरक्षा व पर्यावरण अनुकूलता का पूरा ख्याल रखा गया है। पूरे भवन की निगरानी के लिए एक कमांड सीसीटीवी सेंटर भी बनाया गया है,जहां से परिसर व अंदर के गलियारों पर पैनी नजर रखी जाएगी। खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए नवनिर्मित इन नए भवनों को पहले कामन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) नाम दिया गया था। इन कर्तव्य भवनों को मेट्रो लाइन से जोड़ने के लिए इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा भवन हैं 75 साल पुराने मंत्री खट्टर ने एक सवाल के जवाब में बताया कि मंत्रालयों के नए और अत्याधुनिक भवनों को बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि जो मौजूदा भवन हैं वह 1950 से 1970 के बीच बनाए गए थे। ये सभी पुराने हो गए है, इनका सालाना रखरखाव काफी महंगा हो गया था। गौरतलब है कि मौजूदा समय में केंद्र सरकार के पास करीब 55 मंत्रालय और 93 विभाग मौजूद है। ये अभी नार्थ और साउथ ब्लाक के साथ कृषि भवन, शास्त्री भवन, उद्योग व निर्माण भवन आदि शामिल है। नार्थ और साउथ ब्लाक होगा पूरा खाली कर्तव्य भवनों के तैयार होते ही नार्थ और साउथ ब्लाक में मौजूद सभी मंत्रालयों को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दोनों ही ब्लाक को खाली कराकर इनमें भारत संग्रहालय बनाया जाएगा। इस दौरान ढांचे के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ किए बगैर इसमें महाभारत काल से लेकर देश के आज तक के इतिहास, कला व संस्कृति आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सेंट्रल विस्टा परियोजना का यह काम दिसंबर 2031 तक पूरा कर लिया जाएगा। इनमें ही प्रधानमंत्री के लिए नए आवास व कार्यालय भी बनाए जा रहे है। इसके लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्तव्य भवन-3 : एक नजर में ⦁ कुल क्षेत्रफल- 1.50 लाख वर्ग मीटर ⦁ भूतल क्षेत्रफल- 40 हजार वर्ग मीटर ⦁ कुल तल- दो भूतल सहित कुल दस तल ⦁ पार्किंग क्षमता- 600 कारों की ⦁ बैठने की व्यवस्था- वर्क हाल और केबिन ⦁ कॉमन सुविधा- योगा, क्रेच,मेडिकल रूम, कैफे, मल्टीपरपज हॉल ⦁ 24 मुख्य कांफ्रेंस हाल, क्षमता- प्रत्येक में 45 व्यक्तियों के बैठने की ⦁ 26 छोटे कांफ्रेंस हाल, क्षमता-प्रत्येक में 25 व्यक्तियों के बैठने की ⦁ 67 मीटिंग रूम या वर्क हाल, प्रत्येक की क्षमता नौ लोगों की ⦁ लिफ्ट- 27, सेंट्रलाइज एयर कंडीशन, स्वचालित सीढियां- दो जल्द ही टूटेंगे कृषि, उद्योग, निर्माण और शास्त्री भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत जल्द ही कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन और निर्माण भवन टूटेंगे। इनमें मौजूद सभी मंत्रालयों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन दौरान कुछ मंत्रालय अगले दो साल के लिए किराए भवन में भी शिफ्ट हो रहे है। माना जा रहा है कि जैसे ही नए कर्तव्य भवनों का निर्माण होगा, वैसे-वैसे इन सभी मंत्रालयों और विभागों को इनमें शिफ्ट किया जाएगा।  

‘नोटिस निकाल देना’: CJI की टिप्पणी से हड़कंप, वरिष्ठ वकीलों की पैरवी पर लगी लगाम

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को कहा कि अगले सोमवार (11 अगस्त) से कोर्ट संख्या 1 में कोई भी वरिष्ठ वकील मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख नहीं कर सकेंगे। सीजेआई गवई ने यह पाबंदी तब लगाई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी आज एक मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उनकी अदालत में खड़े हुए थे। कोर्टरूम में सिंघवी के खड़ा होते और मामले का उल्लेख करने की मांग करते ही सीजेआई ने कहा कि जूनियर्स को भी मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश गवई ने कोर्ट मास्टर को इस संबंध में एक नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गवई ने कहा, "नोटिस निकाल देना… अब से किसी भी वरिष्ठ वकील को मामले का मौखिक उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार से किसी भी नामित वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।" अगले सोमवार से होगा नियम प्रभावी सीजेआई ने कहा कि वह इस नियम को अगले सोमवार से प्रभावी कर रहे हैं, ताकि सभी को तब तक इसकी सूचना मिल सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बहुत बड़ी मांग है कि किसी भी मामले का उल्लेख अब वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा नहीं किया जाए।" सिंघवी बोले- समान रूप से हो लागू दरअसल, जब सिंघवी कोर्ट नंबर 1 यानी सीजेआई की अदालत में किसी मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उठे, तो सीजेआई गवई ने उनसे कहा, "एक बड़ी मांग है, हमें वरिष्ठ वकीलों द्वारा मौखिक उल्लेख करना बंद करना चाहिए।" इस पर सिंघवी ने कहा, "मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं, अगर इसे समान रूप से लागू किया जाता है।" इस पर CJI ने कहा, “हम इसे लागू करेंगे। किसी भी वरिष्ठ वकील को उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। जूनियर को मौका देना चाहिए। सोमवार से, कोर्ट नंबर 1 में, किसी भी वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। कोई नामित वरिष्ठ वकील नहीं। सोमवार से हम इसका पालन करेंगे। ताकि किसी को अचरज न हो।” लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी दौरान सिंघवी ने सुझाव दिया, "इसे सभी अदालतों में एक समान लागू किया जा सकता है।" इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इसे केवल अपनी पीठ में ही लागू कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कम से कम कोर्ट नंबर 1 में तो इसकी अनुमति नहीं होगी। जूनियर्स को अवसर मिलने चाहिए।"