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बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने उठाया तख्तापलट का मुद्दा, ट्वीट से गरमाया माहौल

तेल अवीव इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने एक ऐसा ट्वीट किया है, जिससे देश में हलचल मच गई है। इजरायली पीएम के बेटे ने याएर नेतन्याहू ने एक ट्वीट किया, जिसमें दावा किया गया कि सेना प्रमुख एयाल जामिर देश में तख्तापलट करने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गाजा पर इजरायल के पूर्ण नियंत्रण का भी उन्होंने विरोध किया है। दरअसल जामिर ने कहा था कि गाजा पर पूरी तरह नियंत्रण करने का प्लान इजरायल डिफेंस फोर्सेज को फंसाने का एक जाल है। हिब्रू मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू जूनियर की पोस्ट पर विवाद छिड़ गया है। याएर नेतन्याहू के पास कोई सरकारी पद नहीं है। ऐसे में उनकी तरफ से सेना प्रमुख पर तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगाने से गहरा विवाद हो गया है। उन्होंने कहा कि जामिर चाहते थे कि विद्रोह कर दिया जाए और इजरायल में सैन्य तख्तापलट हो जाए। वहीं सेना प्रमुख एयाल जामिर ने ऐसे आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे आप कह सकते हैं। आपको इससे क्या मिलेगा? आप मेरे ऊपर हमले क्यों कर रहे हैं। आखिर जंग के बीच ऐसा करने का क्या मकसद है। अब इस मामले में बेंजामिन नेतन्याहू का भी जवाब आया है। उन्होंने सेना प्रमुख को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया में अपना पद छोड़ने की धमकी न दें। मैं हर बार आपकी ऐसी धमकी को स्वीकार नहीं कर सकता। यदि हम आपके प्लान को स्वीकार नहीं करेंगे तो आपको जाना होगा। मेरा बेटा 33 साल का है और वह अब बड़ा हो गया है। दरअसल खबरें आती रही हैं कि जामिर की इजरायली कैबिनेट के कई मंत्रियों से असहमति रही है। गाजा पर पूरी तरह कब्जा करने के प्लान का भी विरोध करते रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को भी कहा था कि यदि हमने गाजा पर फुल कंट्रोल की कोशिश की तो हमास की कैद में रखे गए 20 बंधकों को नुकसान होगा, जो फिलहाल जीवित हैं और रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल मंगलवार को बेंजामिन नेतन्याहू कैबिनेट की मीटिंग थी। तीन घंटे चली इस मीटिंग में सेना की राय और कब्जे के प्लान पर चर्चा हुई। अब इसे लेकर वोटिंग कराने की तैयारी है। नेतन्याहू कब्जे के प्लान पर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। यह मांग इजरायल में लंबे समय से होती रही है। इस पर जामिर का कहना था कि आप गाजा में एक जाल बिछा रहे हैं। इससे बंधकों की जिंदगी पर खतरा होगा और सेना को भी इससे बड़ा नुकसान होने की आशंका है।  

पानी-पानी हुआ सिंधु डेल्टा: 80% जलाशय सूखे, 12 लाख विस्थापन की त्रासदी, कौन है जिम्मेदार?

कराची पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों एक कुदरती कहर की मार झेल रहा है। देश के दक्षिणी हिस्से में सिंधु डेल्टा उजड़ चुका है। हालात ये हैं कि वहां से लोगों का पलायन जारी है और बसे-बसाए करीब 40 गांव वीरान पड़ गए हैं और इसी के साथ सिन्धु डेल्टा में एक बसी बसाई सभ्यता उजड़ चुकी है। दरअसल, ये दर्दनाक कहानी है सिंध प्रांत के दक्षिणी छोर पर अरब सागर से सटे सिंधु डेल्टा में बसे उन गांवों की जहां के लोग परंपरागत रूप से खेतीबारी करने और मछली पकड़ने का काम करते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों में समुद्री जल ने वहां अतिक्रमण किया है और सबकुछ नष्ट कर दिया है। अब इन गांवों से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। उनमें से अधिकांश कराची में आकर बसे हैं। पिछले दिनों कराची पलायन करने वाले हबीबुल्लाह खट्टी खारो चान कस्बे के अपने पुश्तैनी गांव मीरबहार में अपनी मां की कब्र पर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे, क्योंकि उनका गांव अब समंदर की आगोश में समाता जा रहा है। जहां उनकी मां की कब्र है, वहां अब समुद्री नमक का साम्राज्य है। जब वह अपनी मां की कब्र पर पहुंचे तो उनके पैरों पर नमक की मोटी चादर चढ़ चुकी थी। यह गांव सिंधु डेल्टा में उस जगह से करीब 15 किलोमीटर दूर है, जहां सिंधु नदी अरब सागर में मिलती है। डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हबीबुल्लाह के मुताबिक, खारो चान में 40 गांव हुआ करते थे लेकिन बढ़ते समुद्री जल के कारण अब अधिकांश लुप्त हो चुके हैं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उस कस्बे की आबादी 1981 में 26000 के करीब थी जो 2023 में घटकर 11,000 रह गई है। हबीबुल्लाह खट्टी अब अपने परिवार के साथ कराची में बसने जा रहे हैं। उनकी तरह इस डेल्टा से करीब 12 लाख लोगों ने पलायन किया है। थिंक टैंक जिन्ना इन्स्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में सिंधु डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पानी का बहाव 80 फीसदी कम गया यूएस-पाकिस्तान सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ इन वॉटर द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सिंचाई नहरों, जलविद्युत बांधों और हिमनदों व बर्फ पिघलने पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण 1950 के दशक से अब तक सिंधु डेल्टा में पानी का बहाव 80 फीसदी कम हो चुका है। इस कारण से डेल्टा में समुद्री जल का विनाशकारी प्रवेश हुआ है और आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के बाद से डेल्टा के पानी की लवणता लगभग 70% बढ़ गई है, जिससे वहां फसलें उगाना अब असंभव हो गया है और झींगा मछली और केकड़े की प्रजाति नष्ट हो चुकी है। भारत ने भी सिंधु जल समझौता स्थगित किया तिब्बत से शुरू होकर, सिंधु नदी पूरे पाकिस्तान में बहने से पहले कश्मीर से होकर बहती है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है। इसकी वजह से भी सिंदु में पानी का बहाव कम हो गया है। यह नदी और इसकी सहायक नदियाँ देश के लगभग 80% कृषि भूमि की सिंचाई करती हैं और लाखों लोगों की आजीविका का साधन हैं। सिंधु नदी द्वारा समुद्र में मिलने से पहले दोनों छोरे पर जमा किए गए समृद्ध तलछट से निर्मित यह डेल्टा कभी खेती, मछली पकड़ने, मैंग्रोव और वन्यजीवों के लिए आदर्श हुआ करता था।  

पाकिस्तानी खतरे को लेकर CDS की चेतावनी: सेना को 365 दिन सतर्क रहने के निर्देश

नई दिल्ली चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से होने वाले हमले के लेकर भारतीय सेना (Indian Army) को अलर्ट किया है। CDS अनिल चौहान ने कहा कि हमें 24×7 और 365 दिन चौंकन्ना रहने होंगे। सीडीएस ने यह भी कहा कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ‘पूर्ण-आयामी प्रतिरोध सिद्धांत’ को चुनौती देने की जरूरत है। सीडीएस ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवादी पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में छिप नहीं सकते। वार्षिक ‘ट्राइडेंट’ व्याख्यान श्रृंखला के उद्घाटन सत्र में उन्होंने दोहराया कि सैन्य तैयारी अत्यंत उच्च स्तर की होनी चाहिए, चौबीसों घंटे और साल के 365 दिन तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने जवानों से कहा कि युद्ध और शांति के बीच बहुत कम अंतर है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज के समय में यह अंतर धुंधला हो रहा है और वे एक दूसरे में विलीन हो रहे हैं। सीडीएस ने कहा, ‘हमें अपरंपरागत और परमाणु क्षेत्रों के बीच पारंपरिक अभियानों के लिए अधिक स्थान बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान की धरती पर कहीं भी छिप नहीं सकते। जनरल अनिल चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली किसी भी हिंसात्मक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। चाहे वह राज्य के अंदर से किया जाए या राज्य के बाहर से किया जाए, और यह पहला मानदंड है, जो हमें समझना होगा। यह हम सभी के लिए नया मानदंड है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि एक और सैन्य मानक यह है कि अब परमाणु नीति पर अधिक निर्भरता होगी, जो पारंपरिक सैन्य अभियानों की बुनियाद बन गई है। उन्होंने कहा कि एक और मानक यह होगा कि भारत को अपने विरोधियों के मुकाबले तकनीकी रूप से आगे रहना होगा।

पाकिस्तान में सिंधु आपदा: डूबता डेल्टा, उजड़ते गांव, लाखों विस्थापित

कराची.  पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों एक कुदरती कहर की मार झेल रहा है। देश के दक्षिणी हिस्से में सिंधु डेल्टा उजड़ चुका है। हालात ये हैं कि वहां से लोगों का पलायन जारी है और बसे-बसाए करीब 40 गांव वीरान पड़ गए हैं और इसी के साथ सिन्धु डेल्टा में एक बसी बसाई सभ्यता उजड़ चुकी है। दरअसल, ये दर्दनाक कहानी है सिंध प्रांत के दक्षिणी छोर पर अरब सागर से सटे सिंधु डेल्टा में बसे उन गांवों की जहां के लोग परंपरागत रूप से खेतीबारी करने और मछली पकड़ने का काम करते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों में समुद्री जल ने वहां अतिक्रमण किया है और सबकुछ नष्ट कर दिया है। अब इन गांवों से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। उनमें से अधिकांश कराची में आकर बसे हैं। पिछले दिनों कराची पलायन करने वाले हबीबुल्लाह खट्टी खारो चान कस्बे के अपने पुश्तैनी गांव मीरबहार में अपनी मां की कब्र पर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे, क्योंकि उनका गांव अब समंदर की आगोश में समाता जा रहा है। जहां उनकी मां की कब्र है, वहां अब समुद्री नमक का साम्राज्य है। जब वह अपनी मां की कब्र पर पहुंचे तो उनके पैरों पर नमक की मोटी चादर चढ़ चुकी थी। यह गांव सिंधु डेल्टा में उस जगह से करीब 15 किलोमीटर दूर है, जहां सिंधु नदी अरब सागर में मिलती है। डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हबीबुल्लाह के मुताबिक, खारो चान में 40 गांव हुआ करते थे लेकिन बढ़ते समुद्री जल के कारण अब अधिकांश लुप्त हो चुके हैं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उस कस्बे की आबादी 1981 में 26000 के करीब थी जो 2023 में घटकर 11,000 रह गई है। हबीबुल्लाह खट्टी अब अपने परिवार के साथ कराची में बसने जा रहे हैं। उनकी तरह इस डेल्टा से करीब 12 लाख लोगों ने पलायन किया है। थिंक टैंक जिन्ना इन्स्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में सिंधु डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पानी का बहाव 80 फीसदी कम गया यूएस-पाकिस्तान सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ इन वॉटर द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सिंचाई नहरों, जलविद्युत बांधों और हिमनदों व बर्फ पिघलने पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण 1950 के दशक से अब तक सिंधु डेल्टा में पानी का बहाव 80 फीसदी कम हो चुका है। इस कारण से डेल्टा में समुद्री जल का विनाशकारी प्रवेश हुआ है और आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के बाद से डेल्टा के पानी की लवणता लगभग 70% बढ़ गई है, जिससे वहां फसलें उगाना अब असंभव हो गया है और झींगा मछली और केकड़े की प्रजाति नष्ट हो चुकी है। भारत ने भी सिंधु जल समझौता स्थगित किया तिब्बत से शुरू होकर, सिंधु नदी पूरे पाकिस्तान में बहने से पहले कश्मीर से होकर बहती है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है। इसकी वजह से भी सिंदु में पानी का बहाव कम हो गया है। यह नदी और इसकी सहायक नदियाँ देश के लगभग 80% कृषि भूमि की सिंचाई करती हैं और लाखों लोगों की आजीविका का साधन हैं। सिंधु नदी द्वारा समुद्र में मिलने से पहले दोनों छोरे पर जमा किए गए समृद्ध तलछट से निर्मित यह डेल्टा कभी खेती, मछली पकड़ने, मैंग्रोव और वन्यजीवों के लिए आदर्श हुआ करता था।

उत्तराखंड में फिर फटा कहर का बादल, उत्तरकाशी के बाद अब पौड़ी में तबाही

पौड़ी. उत्‍तराखंड पर आपदा की दोहरी मारी पड़ी है। उत्‍तरकाशी के बाद अब पौड़ी में बादल फटने की घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक ग्राम सारसों चौथान थलीसैण विकास खंड में बादल फटा है। यह सड़क के किनारे नेपाली मजदूरों का टेंट लगा हुआ था। अचानक बादल फटने की घटना में 3-4 नेपाली मलबे में दब गए। गांव वालों ने बमुश्किल मबले से निकाल कर उनकी जान बचाई। स्कूल में ग्राम वासियों ने उनकी रहने की व्यवस्था कर दी है। इनमें कुछ लोगों को गहरी चोटें आई हैं। बचाव कार्य अभी भी जारी है। वहीं कुछ मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने कि आशंका है।

सेंट्रल विस्टा में नया अध्याय: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ‘कर्तव्य भवन’ का लोकार्पण

नई दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी आज दिल्ली के कर्तव्य पथ पर स्थित कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे. केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग, जो वर्तमान में विभिन्न भवनों में फैले हुए हैं, जल्द ही कर्तव्य पथ के दोनों ओर बन रहे नए कर्तव्य भवनों में समाहित होंगे. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत इस नई इमारत में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, पेट्रोलियम मंत्रालय और कई अन्य प्रमुख मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए जाएंगे. जनसभा को संबोधित करेंगे PM मोदी कर्तव्य भवन-3 का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 अगस्त को दोपहर 12.15 बजे करेंगे. इसके साथ ही, वह शाम 6 बजे कर्तव्य पथ पर एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें मंत्रालयों के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे. शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जानकारी दी कि पहले मंत्रालयों की इमारतें अव्यवस्थित तरीके से बनाई गई थीं, जबकि अब सेंट्रल विस्टा को एक संगठित और आधुनिक योजना के तहत विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना के तहत अब तक तीन कर्तव्य भवन पूर्ण हो चुके हैं, और कुल मिलाकर दस भवनों का निर्माण किया जाएगा. अन्य सात भवन भी अप्रैल 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे काम अब अंतिम चरण में पहुँच चुका है. प्रस्तावित अन्य सात भवन अप्रैल 2027 तक तैयार हो जाएंगे. इन भवनों का निर्माण मंत्रालयों के लिए किया जा रहा है, जिसमें तकनीकी, सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूलता का विशेष ध्यान रखा गया है. पूरे परिसर की निगरानी के लिए एक कमांड सीसीटीवी सेंटर स्थापित किया गया है, जिससे परिसर और अंदर के गलियारों पर सतत निगरानी रखी जाएगी. केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लिए बनाए गए नए भवनों को पहले कामन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) का नाम दिया गया था. इन भवनों को मेट्रो लाइन से जोड़ने के उद्देश्य से इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. क्यों बनाया गया आधुनिक भवन केंद्रीय मंत्री ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मंत्रालयों के नए और आधुनिक भवनों की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई, क्योंकि मौजूदा भवन 1950 से 1970 के बीच बने थे और अब पुराने हो चुके हैं. इन भवनों का वार्षिक रखरखाव काफी महंगा हो गया है. वर्तमान में केंद्र सरकार के पास लगभग 55 मंत्रालय और 93 विभाग हैं, जिनमें नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के साथ-साथ कृषि भवन, शास्त्री भवन, उद्योग और निर्माण भवन भी शामिल हैं. गृह व विदेश मंत्रालय सहित कुल सात विभाग होंगे कर्तव्य भवन-3 में शिफ्ट नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों को स्थान दिया गया है, जिनमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय शामिल हैं. अगले महीने तक तैयार होने वाले कर्तव्य भवन-1 में वित्त मंत्रालय का स्थानांतरण किया जाएगा. इस भवन में एक प्रिंटिंग प्रेस भी स्थापित किया जा रहा है, जिससे वित्त मंत्रालय अपने बजट का प्रकाशन स्वयं कर सकेगा. इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, पहले से ही आवश्यक स्थान आवंटित किया गया है. जब कर्तव्य भवनों का निर्माण पूरा हो जाएगा, तब नार्थ और साउथ ब्लाक में स्थित सभी मंत्रालयों को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा. इसके बाद, दोनों ब्लाक को खाली करके इनमें युगे-युगीन भारत संग्रहालय की स्थापना की जाएगी. सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम दिसंबर 2031 होगा पूरा इस परियोजना के तहत महाभारत काल से लेकर वर्तमान समय तक के इतिहास, कला और संस्कृति को बिना ढांचे में किसी प्रकार के परिवर्तन के प्रदर्शित किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने जानकारी दी कि सेंट्रल विस्टा परियोजना का कार्य दिसंबर 2031 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए नए आवास और कार्यालय भी शामिल हैं. इसके लिए आवश्यक प्रक्रियाएं भी आरंभ कर दी गई हैं. कर्तव्य भवन-3: एक नजर में कुल क्षेत्रफल 1.50 लाख वर्ग मीटर है, जिसमें भूतल क्षेत्रफल 40 हजार वर्ग मीटर है. इस भवन में दो भूतल सहित कुल दस तल हैं, जिनमें दोनों भूतल पार्किंग के लिए निर्धारित हैं, जिसमें 600 कारों की पार्किंग क्षमता है. बैठने की व्यवस्था में वर्क हाल और केबिन शामिल हैं. कॉमन सुविधाओं में योगा, क्रेच, मेडिकल रूम, कैफे और मल्टीपरपज हाल उपलब्ध हैं. इसके अलावा, 24 मुख्य कांफ्रेंस हाल हैं, जिनमें प्रत्येक में 45 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है, और 26 छोटे कांफ्रेंस हाल हैं, जिनकी क्षमता 25 व्यक्तियों की है. इसके साथ ही, 67 मीटिंग रूम या वर्क हाल हैं, जिनमें प्रत्येक में नौ लोगों के बैठने की व्यवस्था है. भवन में 27 लिफ्ट, केंद्रीकृत एयर कंडीशनिंग और दो स्वचालित सीढ़ियां भी हैं. क्या है सेंट्रल विस्टा? कर्म पथ के दोनों किनारों पर विस्तारित क्षेत्र को सेंट्रल विस्टा के नाम से जाना जाता है. यह क्षेत्र राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट के निकट प्रिंसेस पार्क तक फैला हुआ है. इसमें संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, उपराष्ट्रपति निवास, राष्ट्रीय संग्रहालय और अभिलेखागार जैसी कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं. सरकार इस पूरे इलाके को और अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाने के लिए ‘सेंट्रल विस्टा री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ पर काम कर रही है.

आसिम मुनीर की भारत विरोधी रणनीति उजागर, पाक सेना ने किया खतरनाक प्लान का खुलासा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को गीदड़ भभकी दी है। हाल ही में द इकोनॉमिस्ट को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ISPR यानी इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि अगर कोई और सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के खिलाफ शुरू की गई, तो भारत में 'अंदर घुसकर' हमला किया जाएगा। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इकोनॉमिस्ट से बातचीत में जनरल चौधरी ने कहा कि मुनीर 'भारत को बातचीत की टेबल' पर लाना चाहते हैं। चौधरी से भारत की तरफ से दी गई चेतावनी को लेकर भी सवाल किया गया, जिसमें भारत की तरफ से कहा गया था कि किसी भी तरह की आतंकवादी घटना होने पर भारत की तरफ से तत्काल सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इसपर चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान अब भारत पर 'पूर्व से हमला करेगा।' उन्होंने कहा, 'हम पूर्व से शुरुआत करेंगे। उन लोगों को भी समझना होगा कि उनपर भी हर जगह से हमला हो सकता है।' हालांकि, इस दौरान उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। रिपोर्ट के अनुसार, सेना के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि 16 अप्रैल को मुनीर की तरफ से दिए गए भाषण में साफ नजर आता है कि वह भारत को लेकर क्या विचार रखते हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले तीन आतंकवादी ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं और इस हमले में उनकी संलिप्तता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर ली गई है। शाह ने कहा, 'मैं सदन के माध्यम से, ‘ऑपेरशन महादेव’ की जानकारी पूरे देश को देना चाहता हूं। ‘ऑपेरशन महादेव’ में सुलेमान, अफगान और जिब्रान नाम के तीन आतंकवादी – सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए।' गृह मंत्री के अनुसार, गत 22 अप्रैल को दिन में एक बजे पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला हुआ था और वह शाम 5.30 बजे श्रीनगर पहुंच गए थे तथा 23 अप्रैल को एक सुरक्षा बैठक की गई और इसकी पुख्ता व्यवस्था की गई कि नृशंस हत्या करने वाले हत्यारे देश छोड़कर भागने न पाएं। उन्होंने बताया कि पूरी छानबीन एवं वैज्ञानिक तरीकों से यह पुष्टि की गई कि इन तीनों आतंकवादियों ने ही 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की जान ली थी।  

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: भारत पर भारी टैक्स लगा सकता हूं 24 घंटे में

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा है कि अगले 24 घंटों में भारत पर लगे टैरिफ में भारी इजाफा कर सकते हैं। खास बात है कि अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है। साथ ही रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर जुर्माना भी लगाया है। बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'भारत और अच्छा व्यापारी साथी नहीं है, क्योंकि वो हमारे साथ बहुत व्यापार करता है, लेकिन हम उनके साथ बिजनेस नहीं करते। ऐसे में हमने 25 फीसदी तय किया है, लेकिन मैं सोच रहा हूं कि मैं इस दर को अगले 24 घंटों में काफी ज्यादा बढ़ाने जा रहा हूं।' उन्होंने कहा, 'वो रूसी तेल खरीद रहे हैं और वॉर मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं और अगर वो ऐसा करने वाले हैं, तो इस बात से मैं खुश नहीं हूं।' एक दिन पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा, 'भारत न सिर्फ रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि मोटा मुनाफा कमाने के लिए खुले बाजार में बेच रहा है। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि रूसी युद्ध मशीन के चलते यूक्रेन में कितने लोग मर रहे हैं।'  

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा लौटेगा? सुप्रीम कोर्ट में 8 अगस्त को हो सकती है बड़ी बहस

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट 8 अगस्त (शुक्रवार) को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के निर्देश देने की मांग की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने इस याचिका को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) वीआर गवई के समक्ष उठाया और आग्रह किया कि इसे निर्धारित तिथि (8 अगस्त) की सूची से हटाया न जाए। न्यायमूर्ति गवई ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया। यह मामला अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण से संबंधित है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था। यह याचिका उस पुराने केस से जुड़ी एक मिक्स्ड एप्लिकेशन के रूप में दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में अपने ऐतिहासिक फैसले में अनुच्छेद 370 को हटाने को वैध ठहराया था। हालांकि, उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की थी, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि राज्य का दर्जा "शीघ्र" बहाल किया जाएगा। कोर्ट ने उस समय कहा था- “राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए” लेकिन कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई थी। ताजा याचिका कॉलेज शिक्षक जाहूर अहमद भट और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक द्वारा दायर की गई है। यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड इजाज मकबूल के माध्यम से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आए लगभग 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जबकि क्षेत्र में विधानसभा चुनाव भी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुके हैं। इधर सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठकों से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर सकती है। रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच हुई अलग-अलग मुलाकातों और मंगलवार सुबह एनडीए सांसदों की बैठक ने इन अटकलों को और हवा दी है। सोमवार को संसद भवन परिसर में हुई एक और अहम बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका और गृह सचिव गोविंद मोहन शामिल हुए। हालांकि इस बैठक से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। अब निगाहें 8 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा देने के लिए क्या रोडमैप तय करती है।  

भारतीय सेना की दो-टूक: अमेरिका ने किया भरोसे का उल्लंघन, क्या रिश्तों में आएगी दरार?

नई दिल्ली   भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने एक पुरानी खबर को साझा कर अमेरिका को उसकी दशकों पुरानी नीति याद दिलाई है. सेना ने पांच अगस्त 1971 को प्रकाशित एक समाचार लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है. इसमें बताया गया था कि अमेरिका ने 1954 से 1971 तक पाकिस्तान को दो अरब डॉलर (लगभग 17,500 करोड़ रुपये) के हथियार भेजे थे. इस पोस्ट को ‘This Day That Year’ कैप्शन के साथ शेयर किया गया, जिसमें हैशटैग #KnowFacts का इस्तेमाल किया गया. यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव और व्यापारिक मुद्दों के साथ-साथ भारत-रूस संबंधों पर डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बीच आया है. यह लेख 1971 के उस समय का है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. उस साल दिसंबर में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ. भारतीय सेना की इस पोस्ट को मौजूदा हालात में अमेरिका की नीतियों पर एक तीखा कटाक्ष माना जा रहा है. 1971 में अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति जारी रखी थी, भले ही उसने भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए हथियारों पर प्रतिबंध की घोषणा की थी. इस दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को टैंक, जेट विमान और अन्य सैन्य उपकरण दिए. ये हथियार बाद में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान इस्तेमाल हुए. भारतीय सेना की इस पोस्ट का समय महत्वपूर्ण है. हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है. भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-रूस संबंधों पर टिप्पणी करते हुए भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं. इसके जवाब में भारत ने साफ किया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता देता है. भारतीय सेना की यह पोस्ट न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि भारत अमेरिका की दोहरी नीति को भूला नहीं है. 1971 के युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया था और अपने विमानवाहक पोत USS एंटरप्राइज को हिंद महासागर में तैनात किया था, जिसे भारत के खिलाफ एक चेतावनी माना गया. इस दौरान भारत ने सोवियत संघ के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत किया, जिसने युद्ध में भारत को कूटनीतिक और सैन्य सहायता प्रदान की. भारतीय सेना की यह पोस्ट उस समय की याद दिलाती है, जब अमेरिका की नीतियों ने भारत के लिए चुनौतियां खड़ी की थीं. वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है, लेकिन पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति का मुद्दा समय-समय पर विवाद का कारण बनता रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट भारत का एक रणनीतिक संदेश है, जिसमें वह अमेरिका को उसकी पुरानी नीतियों के प्रति आगाह कर रहा है. यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में नई तल्खी ला सकता है, खासकर तब जब भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है.