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ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बढ़ाया ब्रह्मोस पर भरोसा, मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर जारी

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना अब भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर दे रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही हाई लेवल मीटिंग में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए बड़ी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी जा सकती है। साथ ही, भारतीय वायु सेना के लिए भी इन मिसाइलों के जमीनी और हवाई वैरिएंट खरीदे जाएंगे। पाकिस्तान के वायु ठिकानों और सेना के कैंपों पर हमले के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। नौसेना इन मिसाइलों को अपने वीर-कैटेगरी के युद्धपोतों पर तैनात करने वाली है, जबकि वायु सेना इन्हें अपने रूसी मूल के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों पर लगाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों स्वदेशी हथियारों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने हमारे स्वदेशी हथियारों की ताकत देखी। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन ने आत्मनिर्भर भारत की शक्ति दिखाई, खासकर ब्रह्मोस मिसाइलों ने। आतंकी मुख्यालयों पर किया हमला भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पंजाब प्रांत में स्थित मुख्यालयों पर हमला किया। भारतीय वायु सेना ने इसके लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसने टारगेट को बहुत सटीकता से तबाह कर दिया। ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों और उनके ठिकानों को बचाने की कोशिश में जवाबी कार्रवाई की थी।

लाल किले की सुरक्षा में सेंध: स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी लापरवाही, 5 विदेशी पकड़े गए, 7 पुलिसकर्मी निलंबित

नई दिल्ली  दिल्ली स्थित लाल किले में घुसने का प्रयास कर रहे 5 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। इन्होने यह प्रयास सोमवार (4 अगस्त 2025) को किया। ये सभी 20 से 25 साल के हैं और फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए दिल्ली में मजदूरी कर रहे थे। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को जब शक हुआ तो इन सभी को हिरासत में लिया गया जिसके बाद पूछताछ में इसका खुलासा हुआ। पुलिस कर रही है पूछताछ पुलिस पूछताछ में पता चला कि ये पांचों बांग्लादेश के रहने वाले हैं और अवैध प्रवासी हैं. पुलिस के मुताबिक सभी की उम्र 20 से 25 के करीब है जो दिल्ली में लेबर का काम करते हैं. पुलिस ने उनके पास से बांग्लादेश के कुछ डॉक्यूमेंट बरामद किए हैं. फिलहाल इनसे पूछताछ की जा रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर यह लाल किला परिसर में क्यों घुस रहे थे और इनका क्या मकसद था. 15 अगस्त को लेकर लाल किला परिसर में सिक्योरिटी काफी टाइट है. इसे लेकर कई तरह की ड्रिल भी हो रही हैं. 15 अगस्त के दिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. यही वजह है कि अगस्त का महीना शुरू होते ही यहां कई लेयर सिक्योरिटी होती है. इस सुरक्षा में अगर चूक होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाता है. यही वजह है कि अब लाल किले में घुसने की कोशिश कर रहे इन युवकों को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया. डमी बम नहीं पकड़ पाए पुलिसकर्मी, सभी सस्पेंड बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ के इस मामले के साथ ही लाल किले की सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला सामने आया है. जिसमें कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है. इन सभी को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले में सस्पेंड किया गया है. दरअसल लाल किले में 15 अगस्त को लेकर रोजाना अलग-अलग सिक्योरिटी ड्रिल होती हैं, जिसमें ये देखा जाता है कि सुरक्षा व्यवस्था कितनी पुख्ता है. इसी दौरान जब स्पेशल सेल की टीम ने सिविल ड्रेस में पहुंचकर अपने बैग में एक डमी बम रखा और अंदर घुसने की कोशिश की तो वो इसमें सफल रहे. ये लाल किले की सुरक्षा में एक बड़ी चूक थी, इसीलिए इसके लिए जिम्मेदार 7 पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया.

फडणवीस का बयान: नंदनी मठ के साथ हैं, हथिनी विवाद में सरकार उठाएगी कानूनी कदम

मुंबई  महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में नंदनी मठ को माधुरी उर्फ महादेवी हाथी को वापस लाने के लिए राज्य सरकार का साथ मिला है। राज्य सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस मामले में सरकार, मठ के साथ है और उसे वापस लाने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में मठ के साथ है और सरकार भी अलग से पुनर्विचार याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति रखेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय के कैबिनेट हॉल में माधुरी हथिनी के मुद्दे पर बैठक हुई। इस दौरान उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ, जनस्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर, नंदनी मठ के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि नंदनी मठ की परंपराओं और स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर कानूनी प्रक्रिया के जरिए माधुरी हथिनी को वापस लाने की कोशिश की जाएगी। पिछले 34 साल से माधुरी मठ में है और जनता चाहती है कि वह वापस आए। इसके लिए राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी और मठ को भी अपनी याचिका में सरकार को शामिल करना चाहिए। वन विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत पक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें उच्च-स्तरीय समिति और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सुझावों को लागू किया जाएगा। हथिनी की देखभाल के लिए डॉक्टरों सहित एक टीम बनाई जाएगी और जरूरी सहायता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू सेंटर जैसी व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार इस याचिका में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध भी करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में नागरिकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। वहीं, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि वन विभाग को महाराष्ट्र से बाहर ले जाए गए सभी हाथियों की जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए। इस अवसर पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए माधुरी हथिनी को वापस लाने की पहल करनी चाहिए।

भारत-अमेरिका ट्रेड तनाव पर रूस की प्रतिक्रिया: हर देश को है स्वतंत्रता अपने साझेदार चुनने की

नई दिल्ली  भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने की धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे तर्कहीन और अनुचित करार दिया। भारत के इस स्टैंड की रूसी मीडिया ने जमकर तारीफ की है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ को पाखंडपूर्ण नीति का तमगा दिया गया है, तो क्रेमलिन ने भी भारत का सपोर्ट किया है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश को अपने व्यापारिक साझेदार चुनने का अधिकार है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के वक्तव्य को धमकी भी बताया। बोले, हम कई ऐसे बयान सुनते हैं जो दरअसल धमकियां हैं, देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिशें हैं। हम ऐसे बयानों को लीगल नहीं मानते।" तो वहीं रूसी मीडिया ने रणधीर जायसवाल की कही को प्रमुखता से छापा। रशिया टुडे ने शीर्षक दिया- रूस के तेल व्यापार पाखंड पर भारत का पश्चिमी देशों पर पलटवार। इस पूरे आर्टिकल में ट्रंप को भारत की ओर से दिए गए जवाब का जिक्र है। लिखा है- भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के दोहरे रवैये की पोल खोली और आंकड़ों के माध्यम से बताया कि यूरोपियन यूनियन और अमेरिका मास्को के साथ व्यापार करते हैं और दूसरे देशों पर अन्यायपूर्ण प्रतिबंध लगा रहे हैं। फिर उन 6 प्वाइंट्स का जिक्र है जिसके आधार पर भारत के स्टैंड को रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है। बता दें कि सोमवार को भारत ने ट्रंप को आईना दिखाने का काम किया। उनकी धमकी को अनुचित और तर्कहीन करार देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'अमेरिका अब भी रूस से अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, उर्वरक और रसायन आयात करता है।' उन्होंने कहा कि किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा। इसके लिए हमें निशाना बनाया जाना अनुचित और अविवेकपूर्ण है। प्रवक्ता ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा, "यूरोपीय संघ ने 2024 में रूस के साथ 67.5 अरब यूरो का माल और 2023 में 17.2 अरब यूरो का सेवा व्यापार किया था। यह मास्को के साथ भारत के कुल व्यापार से कहीं ज्यादा है। पिछले साल यूरोपीय देशों ने रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात भी रिकॉर्ड 16.5 मिलियन टन तक पहुंचा, जिसमें ऊर्जा के अलावा उर्वरक, रसायन, इस्पात और मशीनरी तक का व्यापार शामिल था।" भारत ने यह भी कहा कि अमेरिका रूस से प्रमुख वस्तुओं का आयात जारी रखे हुए है, जिनमें परमाणु संयंत्रों के लिए यूरेनियम, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पैलेडियम, और विभिन्न रसायन एवं उर्वरक शामिल हैं। इससे पहले , अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी देने के अंदाज में कहा था कि वह भारत पर टैरिफ बढ़ाएंगे। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर मास्को यूक्रेन के साथ एक बड़े शांति समझौते पर सहमत नहीं होता, तो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए जाएंगे।

शेख हसीना का संदेश: देशवासियों के नाम खुले खत में बताया संघर्ष का सफर

ढाका  बांग्लादेश में मंगलवार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित अवामी लीग सरकार के पतन के एक वर्ष पूरे होने पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वर्तमान अंतरिम सरकार की आलोचना की। उन्होंने अन्याय और दमन के खिलाफ खड़े होने के देशवासियों की सराहना की। देश की जनता के नाम एक खुले पत्र में, शेख हसीना ने लिखा, "आज से एक साल पहले, हमारे देश ने हमारे कठिन संघर्षों से हासिल लोकतंत्र में हिंसक व्यवधान देखा, जब एक गैर-निर्वाचित शासन ने असंवैधानिक तरीकों से सत्ता हथिया ली। यह हमारे इतिहास का एक काला क्षण था। यह जनता की इच्छा का अपमान और नागरिकों और राज्य के साथ विश्वासघात था।" मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए, हसीना ने लिखा, "भले ही उन्होंने सत्ता हथिया ली हो, लेकिन वे हमारी भावना, हमारे संकल्प या हमारे भाग्य को कभी नहीं छीन पाएंगे। मैं आपको इसका आश्वासन दे सकती हूं।" उन्होंने बांग्लादेश के लोगों के असाधारण साहस की प्रशंसा की, जिन्होंने 'अन्याय और दमन' के सामने चुप रहने से इनकार कर दिया है। पत्र में उन्होंने लिखा, "आपने लोकतंत्र, स्वतंत्रता और उस भविष्य के लिए आवाज उठाई, जिसके हम सभी हकदार हैं। मैं आपके साहस और देश के प्रति आपके प्रेम से निरंतर प्रेरित हूं। हालांकि, इस बीते वर्ष ने हमारी परीक्षा ली है, लेकिन इसने हमारे लोगों और लोकतंत्र के मूल्यों के बीच के अटूट बंधन को भी उजागर किया है। हमने कठिनाइयां झेली हैं, लेकिन उन कठिनाइयों में भी हमने एकता और उद्देश्य पाया है।" हसीना ने लिखा, "सत्ता जनता की होती है, कोई भी शासन किसी राष्ट्र की इच्छाशक्ति को हमेशा के लिए दबा नहीं सकता, और न्यायोचित उद्देश्यों के लिए उनका संघर्ष जारी है।" पूर्व प्रधानमंत्री ने लोगों से न्याय, आर्थिक अवसर, शिक्षा, शांति और एक ऐसे राष्ट्र के लिए खड़े रहने का आग्रह किया जहां कोई भी भय में न रहे। उन्होंने लिखा, "हम सब मिलकर जो टूट गया है उसे फिर से बनाएंगे। हम सब मिलकर उन संस्थानों को पुनः प्राप्त करेंगे जो हमसे छीन लिए गए थे। हम सब मिलकर एक नया अध्याय लिखेंगे, जो उत्पीड़न से नहीं, बल्कि आशा, प्रगति और स्वतंत्रता से परिभाषित होगा।" पूर्व प्रधानमंत्री ने लिखा, "बांग्लादेश ने पहले भी विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है। हम फिर से उठ खड़े होंगे, और भी मजबूत, और भी एकजुट, और एक ऐसे लोकतंत्र के निर्माण के लिए और भी दृढ़ संकल्प के साथ, जो वास्तव में अपने लोगों की सेवा करे। मुझे आप पर विश्वास है। मुझे बांग्लादेश पर विश्वास है। और मेरा मानना है कि हमारे सबसे अच्छे दिन अभी आने बाकी हैं।" हसीना ने पत्र को ' उज्जवल कल के लिए एक आह्वान' के रूप में याद रखने की अपील की।

छोटे वक्त की शादी, बड़ी एलिमनी की डिमांड – SC ने सुनाया सख्त फैसला

नई दिल्ली एक महिला की ओर दायर एलिमनी के केस में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली अदालत ने इस मामले में शख्स को आदेश दिया कि वह अपनी पूर्व पत्नी को एलिमनी के तौर पर मुंबई की हाईप्रोफाइल सोसायटी में स्थित फ्लैट दे दें। इसके साथ ही एलिमनी का केस अब बंद कर दिया जाए। इसके साथ ही बेंच ने महिला को भी सुनाया, जिसने मांग रखी थी कि उसे 12 करोड़ रुपये की रकम और मुंबई स्थित एक फ्लैट एलिमनी में दिया जाए। इस पर चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि आप दोनों की शादी ही 18 महीने चली और आप 18 करोड़ रुपये मांग रही हैं। इसका अर्थ हुआ कि आप शादी के प्रति एक महीने के बदले एक करोड़ चाहती हैं। जस्टिस गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने महिला की दलीलों पर कहा कि आपकी तो शादी ही बहुत कम समय चली। ऐसे में इतनी बड़ी डिमांड करना कैसे तार्किक है। चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि जिस फ्लैट की मांग की जा रही है वह मुंबई की कल्पतरू सोसायटी में है, जो शहर का नामी हाउसिंग प्रोजेक्ट है। उन्होंने महिला से पूछा कि आप कितनी पढ़ी लिखी हैं। इस पर महिला ने बताया कि उसने एमबीए तक की पढ़ाई की है और पूर्व में आईटी सेक्टर में काम कर चुकी है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में नौकरी कर सकती हैं। फिर काम क्यों नहीं करती हैं? यही नहीं मुख्य न्यायाधीश ने शादी की कम अवधि का हवाला देते हुए कहा कि यह कुल 18 महीने ही चली और आप हर एक महीने के बाद 1 करोड़ की डिमांड कर रही हैं। शख्स की वकील माधवी दीवान ने कहा कि महिला 18 महीने की शादी के अंत के नतीजे में अनिश्चितकाल तक आर्थिक सहयोग नहीं मांग सकती। दीवान ने कहा कि वह पढ़ी लिखी हैं और काम कर सकती हैं। इसके बाद बेंच ने संबंधित व्यक्ति की इनकम टैक्स डिटेल भी मंगाई ताकि तय किया जा सके कि उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है। वह एलिमनी के तौर पर कितनी रकम देने में सक्षम है। इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने साफ कर दिया कि महिला ऐसी किसी संपत्ति में हक नहीं मांग सकती, जो उसके पूर्व के पति के नाम नहीं है बल्कि उसके पिता के नाम है। अंत में अदालत ने कहा कि महिला चाहे तो फ्लैट ले ले या फिर एकमुश्त 4 करोड़ रुपये की रकम लेकर समझौता करे। इसके अलावा चीफ जस्टिस ने यहां तक कहा कि जो लोग नौकरी करने के योग्य हैं, वे जानबूझकर बेरोजगारी का रास्ता नहीं ले सकते कि फिर उसकी आड़ में मोटा अमाउंट मांग लें। उन्होंने कहा कि आप पढ़ी लिखी हैं। आपको इस रकम के भरोसे नहीं रहना चाहिए। आपको खुद कमाना चाहिए और पूरी गरिमा के साथ जीवन निर्वाह करना चाहिए।  

500 के नोटों पर नहीं लगेगा ब्रेक, केंद्र ने बताया सप्लाई जारी रहेगी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने मंगलवार को दोहराया कि 500 रुपए के नोटों की सप्लाई बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और एटीएम से 100 रुपए और 200 रुपए के नोटों के साथ-साथ 500 रुपए के नोट भी निकलते रहेंगे। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि किसी विशेष मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई का निर्णय सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परामर्श से लेती है ताकि जनता की लेन-देन संबंधी मांगों को पूरा करने के लिए मूल्यवर्ग मिश्रण बनाए रखा जा सके। राज्य मंत्री ने कहा, "आरबीआई ने सूचित किया है कि बार-बार इस्तेमाल होने वाले बैंक नोटों तक जनता की पहुंच बढ़ाने के अपने प्रयास के तहत, 28 अप्रैल, 2025 को 'एटीएम के माध्यम से 100 रुपए और 200 रुपए के बैंक नोटों का वितरण' शीर्षक से एक परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें सभी बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (डब्ल्यूएलएओ) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके एटीएम नियमित रूप से 100 रुपए और 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करें।" लगभग 75 प्रतिशत एटीएम 30 सितंबर तक कम से कम एक कैसेट से 100 रुपए या 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करेंगे। इसके अलावा, लगभग 90 प्रतिशत एटीएम 31 मार्च, 2026 तक कम से कम एक कैसेट से 100 रुपए या 200 रुपए के बैंक नोट वितरित करेंगे। रविवार को सरकार ने एक वॉट्सऐप मैसेज को 'असत्य' करार दिया, जिसमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने बैंकों को 30 सितंबर तक एटीएम के माध्यम से 500 रुपए के नोट जारी करना बंद करने का आदेश दिया है। सरकार ने कहा कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। इस भ्रामक संदेश में यह भी दावा किया गया था कि 90 प्रतिशत एटीएम 31 मार्च, 2026 तक 500 रुपए के नोट जारी करना बंद कर देंगे और 75 प्रतिशत एटीएम 30 सितंबर तक ऐसा कर देंगे। इसके अतिरिक्त, इसमें लोगों को अपने 500 रुपए के नोट समाप्त करने की सलाह दी गई थी और यह भी कहा गया था कि भविष्य में एटीएम के माध्यम से केवल 100 और 200 रुपए के नोट ही उपलब्ध होंगे। इस मैसेज पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने कहा कि आरबीआई ने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया है और 500 रुपए के नोट अभी भी वैध मुद्रा हैं। एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया कि व्यापक रूप से साझा किया जा रहा यह दावा असत्य है और लोगों को ऐसी झूठी सूचनाओं पर विश्वास न करने की सलाह दी गई। फैक्ट चेक यूनिट ने आधिकारिक स्रोतों से किसी भी फाइनेंशियल अपडेट की पुष्टि करने के महत्व पर जोर दिया और आगाह किया कि ऐसे संदेशों का उद्देश्य धोखा देना होता है।

पहलगाम आतंकी हमला: फिलीपींस ने जताई कड़ी आपत्ति, भारत के साथ एकजुटता जाहिर की

नई दिल्ली फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की। साथ ही उन्होंने आतंक के खिलाफ भारत के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि मैं आतंकवाद के खिलाफ व्यापक लड़ाई में भारत के साथ हमारी एकजुटता का संदेश लेकर आया हूं। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "मैं इस साल की शुरुआत में पहलगाम में हुए दुखद हमले और आतंकवाद के खिलाफ व्यापक लड़ाई में भारत के साथ हमारी एकजुटता का संदेश लेकर आया हूं। इन चुनौतियों के बावजूद मैं प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में 2047 तक भारत के उल्लेखनीय परिवर्तन और 'विकसित भारत' बनने की अथक यात्रा के लिए बधाई देता हूं।" प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ समर्थन जताने के लिए राष्ट्रपति मार्कोस का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा, "हम पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए और आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े रहने के लिए फिलीपींस सरकार और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हैं।" बता दें कि फिलीपींस के राष्ट्रपति पांच दिवसीय भारत दौरे पर हैं। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर का मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह राजकीय यात्रा भारत और फिलीपींस के बीच बढ़ती साझेदारी की पुष्टि करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर फिलीपींस के राष्ट्रपति सोमवार को भारत की पांच दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। राष्ट्रपति मार्कोस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "यह यात्रा उस गठबंधन और साझेदारी की दोबारा पुष्टि है, जिसे हम मजबूत कर रहे हैं। पहले हमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र कहा जाता था, अब हमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र कहा जाता है, जो राजनीति, व्यापार और अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रकृति के कारण उस समझ का सही विकास है।"

तनाव की नई लहर: ट्रंप-मेदवेदेव की बयानबाजी से न्यूक्लियर युद्ध का खतरा?

वाशिंगटन  अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  और रूस के पूर्व राष्ट्रपति व वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के बीच सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाज़ी अब  न्यूक्लियर सबमरीन की तैनाती तक पहुंच गई है। मुद्दा सिर्फ यूक्रेन युद्ध पर बातचीत का नहीं, बल्कि अब यह दोनों नेताओं की व्यक्तिगत रंजिश और सत्ता के प्रभाव क्षेत्र को लेकर सीधा टकराव बनता जा रहा है।   ट्रंप का अल्टीमेटम और मेदवेदेव की नाराज़गी डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को चेतावनी दी थी कि अगर 8 अगस्त तक  यूक्रेन के साथ युद्धविराम नहीं होता है, तो अमेरिका सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप का कहना था कि रूस को अब 50 नहीं, बल्कि सिर्फ 10 से 12 दिन  ही दिए जाएंगे। इस पर  दिमित्री मेदवेदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “ट्रंप रूस के साथ अल्टीमेटम का गेम खेल रहे हैं। उन्हें दो बातें याद रखनी चाहिए- रूस ना तो इज़रायल है और ना ही ईरान। हर नया अल्टीमेटम एक धमकी है और युद्ध की ओर एक और कदम है।” मेदवेदेव ने आगे चेताया कि यह विवाद रूस-यूक्रेन का नहीं बल्कि  अमेरिका और रूस के बीच सीधा टकराव  बनता जा रहा है। उन्होंने ट्रंप को ‘ स्लीपी जो ’ (जो बाइडेन का उपहास वाला नाम) की राह पर न चलने की सलाह दी।   ट्रंप की  न्यूक्लियर चेतावनी ट्रंप ने भी जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि  “मेदवेदेव को बता दो, जो रूस का असफल पूर्व राष्ट्रपति है और खुद को अब भी राष्ट्रपति समझता है, कि वह खतरनाक जोन में जा रहा है।”इसके बाद ट्रंप ने 1 अगस्त को ऐलान किया कि उन्होंने  दो परमाणु पनडुब्बियां रणनीतिक स्थानों पर तैनात करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मेदवेदेव के "मूर्खतापूर्ण बयानों" से स्थिति बिगड़ सकती है, और यह शब्दों की लड़ाई से आगे बढ़कर गंभीर परिणाम ला सकती है। मेदवेदेव का तीखा तंज और "डेड हैंड"   मेदवेदेव ने ट्रंप की चेतावनी पर कहा कि अमेरिका की प्रतिक्रिया दिखाती है कि रूस सही रास्ते पर है।  उन्होंने सोवियत युग की "डेड हैंड" प्रणाली का उल्लेख किया  कि एक ऐसी स्वचालित परमाणु हमला प्रणाली जो दुश्मन के पहले हमले के बाद सक्रिय हो जाती है। उन्होंने ट्रंप को तंज कसते हुए "Walking Dead" जैसे ज़ॉम्बी शो देखने की सलाह दी और अमेरिका के "घमंड" को रूस की अनदेखी नीति का जवाब बताया।   कौन हैं मेदवेदेव ? रूस के पूर्व राष्ट्रपति व वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष हैं दिमित्री मेदवेदेव 2008-2012  तक रूस के राष्ट्रपति रहे। पुतिन  ने उन्हें राष्ट्रपति बनाया था और खुद प्रधानमंत्री बने थे। दिमित्री मेदवेदेव अब रूसी सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद से  अमेरिका और नाटो के मुखर आलोचक बन चुके हैं। रूस बनाम अमेरिका: परमाणु शक्ति की होड़ फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुसार: दुनिया में मौजूद करीब  12,241 परमाणु हथियारों में से  83% रूस और अमेरिका के पास हैं। जनवरी 2025 तक दोनों देशों की क्षमता अब भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा बनी हुई है। ट्रंप और मेदवेदेव के बीच यह टकराव अब केवल राजनीतिक नहीं रहा, यह वैश्विक सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और परमाणु हथियारों के खतरे का मामला बन गया है। सोशल मीडिया की बयानबाज़ी ने दोनों महाशक्तियों को एक बार फिर कोल्ड वॉर के दौर की याद दिला दी है।

गाजा में जलती ज़िंदगी: नेतन्याहू का ऐलान- जब तक लक्ष्य नहीं पूरा, युद्ध जारी रहेगा

इजरायल इजरायल-हमास संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री   बेंजामिन नेतन्याहू  ने गाजा पट्टी पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित करने और हमास के पूरे सैन्य ढांचे को जड़ से खत्म करने का स्पष्ट आदेश दे दिया है। इस फैसले से हमास के साथ चल रही सीजफायर बातचीत एक बार फिर अंधेरे में जाती दिख रही है, जबकि गाजा के हालात लगातार मानवीय त्रासदी की ओर बढ़ रहे हैं।   गाजा पर 'फुल कैप्चर' को कैबिनेट की मंजूरी  इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गाजा के  राफाह, बेत हनून और बेत लाहिया  जैसे इलाकों में सक्रिय  हमास के बचे हुए आतंकी ठिकानों को खत्म करने के लिए  गोलानी ब्रिगेड  को पहले ही अप्रैल 2025 में निर्देश दे दिया था। अब उन्होंने गाजा में पूर्ण सैन्य कब्जे का रोडमैप साफ करते हुए  कैबिनेट से इसकी मंजूरी भी ले ली है।रिपोर्टों में यह भी खुलासा हुआ है कि नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठकों से इतर अपनी निजी बातचीत में 'गाजा पर कब्जा' जैसे शब्दों का उपयोग किया है, जिससे यह साफ है कि वे अब किसी भी आधे-अधूरे समाधान के पक्ष में नहीं हैं।   गाजा में भूख, कुपोषण और बर्बादी  नेतन्याहू की योजना सामने आने के साथ ही गाजा पट्टी में मानवीय स्थिति तेजी से भयावह  होती जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रहा है कि कैसे बच्चे भूख से बिलख रहे हैं, लोग  कूड़े में भोजन तलाशने  को मजबूर हैं, और भोजन वितरण केंद्रों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन चुकी है। इजरायल की ओर से हाल ही में बंधकों की तस्वीरें शेयर की गईं, ताकि यह दिखाया जा सके कि हमास अब भी कई नागरिकों को बंदी बनाए हुए है। 70% गाजा पर इजरायल का नियंत्रण  इजरायली सेना के अनुसार, गाजा के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर सेना का नियंत्रण स्थापित हो चुका है।  गोलानी ब्रिगेड जैसे विशेष दस्ते हमास के हथियार भंडार और सुरंग नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटे हैं। इनमें वे सुरंगें भी शामिल हैं जिनमें ईरान से आए हथियार, क्रूड रॉकेट टेक्नोलॉजी और स्मगल किए गए विस्फोटक रखे गए हैं। इजरायल का कहना है कि हमास इन सुरंगों से लड़ाई जारी रखते हुए स्थानीय नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है, जिससे युद्ध और जटिल हो जाता है। सीजफायर की उम्मीद विफल  हमास ने मई 2025 में अमेरिका के मध्यस्थ स्टीव विटकॉफ  की प्रस्तावित योजना को मंजूरी दी थी, जिसमें 10 बंधकों की रिहाई के बदले 70 दिनों का युद्धविराम प्रस्तावित था। लेकिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि  जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं डालता और गाजा छोड़ता नहीं, तब तक युद्धविराम नहीं होगा। इसके बाद जुलाई 2025 में नेतन्याहू ने दोहराया कि युद्धविराम का कोई रास्ता तभी खुलेगा, जब हमास अपनी सैन्य ताकत खत्म करेगा । हमास ने इसे नकार दिया, और इसी वजह से मार्च 2025 के बाद से कोई भी बड़ा युद्धविराम संभव नहीं हो सका है।   हमास को कहां से मिलती है ताकत?  इजरायल के मुताबिक, हमास को हथियार, प्रशिक्षण और फंडिंग की मदद ईरान, हिजबुल्लाह (लेबनान) और कतर से मिलती है। यही वजह है कि इजरायल इन देशों को भी गाजा में हिंसा को बढ़ावा देने वाला  मानता है। गाजा के भीतर चल रहे सैन्य अभियानों में कई  आतंकी ठिकाने नष्ट,  हथियार बरामद और सुरंगें खत्म की जा चुकी हैं।