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2026 से लागू होगा 8वां वेतन आयोग, करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 8th Pay Commission को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रारंभिक कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लागू होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। Finance Ministry ने केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए प्रमुख मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के साथ शुरुआती चर्चाएं शुरू कर दी हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित उत्तर में साझा की है। वित्त राज्य मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय सहित विभिन्न राज्य सरकारों के साथ आठवें वेतन आयोग के संबंध में परामर्श शुरू कर दिए हैं। लोकसभा में अपने लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों से इनपुट मांगे गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसके अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। अभी तक किसी भी नाम की घोषणा नहीं की गई है। कब लागू होगा आठवां वेतन आयोग? 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशें तैयार नहीं हुई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इनका क्रियान्वयन पूर्व के वेतन आयोगों द्वारा निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही किया जाएगा। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन फरवरी 2014 में हुआ था, लेकिन इसकी सिफारिशों को 1 जनवरी, 2016 से लागू किया गया था। इसी तर्ज पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 की शुरुआत से लागू की जा सकती हैं। पंकज चौधरी ने नए वेतन आयोग के लागू होने के सवाल पर आगे कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशें किए जाने और सरकार द्वारा इन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही इनका कार्यान्वयन किया जाएगा।   50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स को मिलेगा फायदा आठवें वेतन आयोग के लागू होने से देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख से ज़्यादा पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। जब तक नया वेतन आयोग अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर देता और सरकार की ओर से इन्हें मंज़ूरी नहीं मिल जाती, तब तक कर्मचारियों की सैलरी या पेंशन स्ट्रक्चर में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होगा। हर साल दो बार होने वाले DA में बढ़ोतरी का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। महंगाई भत्ते में 4% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन को महंगाई भत्ते (DA) के ज़रिए संशोधित करती है, जिसका ऐलान हर 6 महीने में समीक्षा के बाद किया जाता है। डीए हाइक सीधे AICPI-IW  से जुड़ा होता है. महंगाई भत्ते में आमतौर पर हर साल जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला DA 60% तक पहुंच सकता है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2025 में AICPI-IW इंडेक्स 143 था, जो मई तक 144 पर पहुंच चुका है। ऐसे में DA और DR में 3 से 4 % तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो 1 जुलाई से प्रभावी मानी जाएगी> इस संबंध में सरकार सितंबर या अक्टूबर में घोषणा कर सकती है>

श्रावण अष्टमी पर 10 दिवसीय मेला: माता चिंतपूर्णी में भक्ति और परंपरा का संगम

ऊना उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त तक श्रावण अष्टमी मेले का आयोजन किया जाएगा। एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने इसे लेकर शुक्रवार को माईदास सदन चिंतपूर्णी में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और मेले के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने जानकारी दी कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान एडीसी ऊना मेला अधिकारी, एसडीएम अंब सहायक मेला अधिकारी जबकि एएसपी ऊना को पुलिस मेला अधिकारी तथा डीएसपी अंब को सहायक पुलिस मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है।  सचिन शर्मा ने कहा कि मेले के दौरान माता श्री चिंतपूर्णी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे खुला रहेगा। साफ-सफाई के लिए रात्रि के दौरान मंदिर को केवल एक घंटे के लिए बंद किया जाएगा। दोपहर को मां के श्रृंगार व भोग इत्यादि के लिए भी मंदिर कुछ समय के लिए बंद रहेगा।   लंगर लगाने की लेनी होगी अनुमति एसडीएम ने बताया कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान लंगर लगाने की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा। आयोजक को लंगर की समाप्ति के बाद साफ-सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा मेले के दौरान डीएफएससी ऊना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। नियमों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने कहा कि मेले के दौरान ढोल नगाड़े, चिमटा, लाउडस्पीकर इत्यादि बजाने और प्लास्टिक व थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा मालवाहक वाहनों के माध्यम से माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर आने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।   दस सेक्टरों में बांटा जाएगा क्षेत्र मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटा जाएगा। सुरक्षा के दृष्टिगत पर्याप्त मात्रा में पुलिस व होमगार्ड के जवानों सहित त्वरित कार्य बल की टीमें तैनात रहेंगी। सभी सेक्टरों की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम एसडीएम सचिन शर्मा ने बताया कि मेले के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे तथा ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए रिकवरी वैन तैनात की जाएगी। भिक्षावृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा तथा इसे लेकर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की टीमों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। मेले में श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए विभिन्न स्थानों पर एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक कैंप स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपदा अथवा आग इत्यादि की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन तैनात रहेंगे। साथ ही मेलावधि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मेला शुरू होने से पूर्व सड़कों की व्यवस्था को भी दुरूस्त करने के भी निर्देश दिए। एसडीएम ने निजी सराय प्रबंधकों को सरायों में अग्निशमन उपकरण लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन इनकी जांच भी करवाएगा। उन्होंने विद्युत विभाग को मेलावधि के दौरान विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने के लिए विद्युत लाइनों का आवश्यक रखरखाव करना सुनिश्चित करने को कहा ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा मेले के दौरान अस्थाई रूप से अतिरिक्त स्ट्रीट लाईटें भी लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पीने के पानी के लिए प्याऊ भी लगाए जाएंगे। उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए जल भंडारण टैंकों का क्लोरिनेशन करना भी सुनिश्चित करें। बैठक में एएसपी ऊना संजीव भाटिया, सीएमओ डॉ संजीव वर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत छपरोह शशि कालिया, प्रधान नारी पंचायत अल्का, गंगोट की प्रधान एश्वर्या, डूहल भंगवाल की प्रधान प्रतिभा और अप्पर लोहारा की प्रधान संगीता वाला सहित अन्य मौजूद रहे। 

खाद्य सुरक्षा पर सवाल: आलू, प्याज और रोटी अब नहीं रहे सुरक्षित – इंटरनेशनल स्टडी का दावा

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन देखते-देखते हमारी थाली और जेब तक पहुंचने लगा है. शोधकर्ताओं ने बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ तो वहीं कुछ जगहें भीषण सूखा या अकाल का सामना कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है.  खेती कैसे हो रही है प्रभावित? जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर दुनिया भर में होने वाली खेती पर काफी बुरे तरीके से पड़ रहा है. खेती कम होने के कारण अनाज, फल और सब्जियों के दाम को बढ़ाया जा रहा है. अगर इसी तरह से मौसम बिगड़ता रहा तो आने वाले समय में गरीब देश कुपोषण, राजनीतिक समस्या और समाज में अशांति की समस्या से जूझ रहे होंगे. किन-किन चीजों के दाम में आया उछाल? ब्रिटेन की एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलीजेंस यूनिट, European Central Bank, फूड फाउंडेशन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इमपैक्ट के संयुक्त अध्ययन में 2022 और 2024 के बीच 18 देशों के मौसम का डाटा लिया गया जिसमें पाया गया कि खाने वाली चीजों के दाम में बढ़ोतरी का कनेक्शन गर्मी, सूखा और बारिश से था. शोध से पता चला कि बीते साल ब्रिटेन में आलू, साउथ कोरिया में पत्तागोभी और घाना में कोको के दाम में तेजी से उछाल आया. इनकी वजह असामान्य मौसम था. खेती करने में क्या आ रही है मुश्किल? Climate Change ने खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. तेज बहाव के साथ आने वाली बाढ़ ऊपजाऊ मिट्टी को अपने साथ बहा ले जाती है. इसके बाद उस जगह पर सिर्फ ऐसी जमीन रह जाती है जिस पर खेती करना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इसके बाद अनाज की कमी और मंहगाई की वजह से परिवारों को बुनियादी पोषण का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है.  आलू-प्याज पर भी खतरा? इसी शोध में ये भी पाया गया कि साल 2022 के मुकाबले भारत में जून 2024 तक प्याज और आलू के दाम 89 फीसदी तक बढ़े थे. यहीं हाल बाकी देशों का भी है. बता दें कि मोजाम्बिक में जब ब्रेड की कीमत बढ़ी थी तो लोग सड़कों पर उतर आए थे. शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि, जब खाने की चीजें महंगी होती हैं तो गरीबों को कम पोषण मिलता है जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है. 

भारतीय वायुसेना का गौरव मिग-21 हो रहा रिटायर, छह दशक की सेवा को सलाम

नई दिल्ली  हिंदुस्तान के आसमान में 60 और 70 के दशक में अपनी बादशाहत कायम रखने वाला फाइटर जेट मिग-21 सिंतबर में रिटायर हो रहा है। पैंथर्स के नाम से मशहूर 23 स्क्वाड्रन ने भारत के हर छोटे-बड़े युद्ध में हिस्सा लिया। 60 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहने के बाद इसे अब 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस पर एक समारोह में विदाई दे दी जाएगी। जानते हैं 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद कैसा रहा मिग-21 का सफर… मिग-21 लड़ाकू विमान का इतिहास मिला-जुला रहा। इस फाइटर जेट को भारत ने सोवियत संघ से खरीदा था। इसके बाद इसे 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसके कई विमान भारत में बनाए। 1960 और 70 के दशक में मिग-21 स्क्वाड्रन की आकाश में मौजूदगी से उस समय भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त मिली। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध, 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति, 1999 में कारगिल युद्ध और 2019 में बालाकोट स्ट्राइक में मिग-21 का अहम योगदान रहा। अभी चल रहे ऑपरेशन सिंदूर में भी मिग-21 स्क्वाड्रन अलर्ट मोड में है। हादसों के बाद दिया गया 'उड़ता ताबूत' नाम जहां एक तरफ 60-70 के दशक में आकाश में अपनी मौजूदगी से भारतीय वायुसेना को मिग-21 ने सशक्त किया। वहीं दूसरी ओर समय के साथ इसकी टेक्नोलॉजी कमजोर पड़ने लगी। कई हादसों के कारण इसे 'उड़ता ताबूत' भी नाम दिया गया। आप के दौर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के विमानों के सामने मिग-21 कुछ खास नहीं रह गया। हालांकि 60-70 के दशक में इसकी गिनती बेहतरीन फाइटर जेटों में होती थी। इसकी पुरानी तकनीक और हादसों के बाद उठ रहे सवाल को लेकर अब इसे 62 वर्षों बाद 19 सितंबर को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं पैंथर्स स्क्वाड्रन की विदाई के बाद भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 हो जाएगी। जो कि 1960 के दशक के बाद सबसे कम है। यहां तक की 1965 में 32 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या थी। हर युद्ध में मिग-21 ने किया कमाल एविएशन एक्सपर्ट अंगद सिंह ने कहा, 'कोई और फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के साथ इतने लंबे समय तक नहीं जुड़ा रहा। वायुसेना के 93 साल के इतिहास में दो-तिहाई समय तक यह जेट रहा है। इसने 1965 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर मोर्चे पर अपना अहम योगदान दिया है। आज हर भारतीय फाइटर पायलट के करियर में इसका योगदान है। इसमें कोई शक नहीं कि यह भारतीय आसमान के एक महान विमान को भावुक विदाई होगी।' सूत्रों के अनुसार, मिग-21 के विदाई समारोह में वायुसेना के बड़े अधिकारी और पुराने सैनिक शामिल होंगे। इस मौके पर फ्लाईपास्ट और विमानों की प्रदर्शनी भी होगी। मिग-21 ने सबसे लंबे समय तक वायुसेना में सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। भारत ने मिग-21 के 850 से अधिक विमान खरीदे थे, जिनमें ट्रेनर विमान भी शामिल थे। लगभग 600 विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में बनाए थे। स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी दुनियाभर में इन विमानों का इस्तेमाल अब खत्म हो चुका है, लेकिन वायुसेना इनकी समय सीमा बढ़ाती रही है। क्योंकि इनकी जगह लेने के लिए आधुनिक लड़ाकू विमान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। पहले यह तय हुआ था कि मिग-21 स्क्वाड्रन की जगह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लेंगे, लेकिन इन स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी हो गई है।  

कुलपति या कारोबारी? ED ने 20.28 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर किया चौंकाने वाला खुलासा

शिलॉन्ग केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पैसे लेकर फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में शिलांग में एक यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति यानी चांसलर और उनके परिवार के सदस्यों की करीब 20.28 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी तौर पर कुर्क की है। ईडी की ओर से जारी विज्ञप्ति में एक अधिकारी ने बताया कि इन संपत्तियों में नई दिल्ली में 19.28 करोड़ रुपये मूल्य की चार अचल संपत्तियां और बैंक बैलेंस के रूप में एक करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है, जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क किया गया है। इससे पहले शिलांग में ईडी उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन जुलाई को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था, जिसमें पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत सीएमजे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चंद्रमोहन झा और उनके परिवार के सदस्यों की 20.28 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने की बात कही गयी थी। ईडी ने बयान में कहा है कि ये अचल संपत्तियां 2013 और 2022 के बीच खरीदी गईं, जबकि बैंक बैलेंस को छिपाने के प्रयास में 16 दिसंबर, 2024 को धोखाधड़ी से उनके परिवार के एक सदस्य को हस्तांतरित कर दिया गया। IAS अधिकारी ने दर्ज कराई थी शिकायत ईडी ने मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स शिलांग जिले के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) पुलिस थाने में सीएमजे विश्वविद्यालय के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर जाँच शुरू की थी। यह शिकायत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी एमएस राव ने राज्य के तत्कालीन राज्यपाल आरएस मूशाहरी के निर्देश पर दर्ज की थी, जो सीएमजे विश्वविद्यालय के अतिथि (विजिटर) थे। ईडी ने कहा, “सीआईडी द्वारा मामले की जांच में विश्वविद्यालय से संबंधित कई अनियमितताओं का पता चला, जिनमें डिग्रियां बेचना भी शामिल था। लेकिन मामला सिर्फ इतना ही नहीं था जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय के हितधारकों ने अनुमानित 83 करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की थी।” दिसंबर 2024 में तीन दिनों तक चली थी तलाशी इससे पहले 31 मार्च 2017, 30 नवंबर 2021 और 11 जुलाई 2024 को अनंतिम कुर्की आदेश पारित किए गए और कुलाधिपति झा और उनके परिवार के सदस्यों के कब्जे में क्रमशः 27.66 करोड़ रुपये, 13.54 करोड़ रुपये और 7.56 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी थी। कुलाधिपति झा के विभिन्न परिसरों में अवैध आय के स्रोत का पता लगाने के लिए दिसंबर 2024 में तीन दिनों तक की गई तलाशी के बाद 1.15 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस भी ज़ब्त किया गया था। SC ने यूनिवर्सिटी कर दी थी भंग इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने सीएमजे विश्वविद्यालय को उसके ‘कुप्रबंधन, कुप्रशासन, अनुशासनहीनता और धोखाधड़ी के इरादे’ के कारण भंग करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद मेघालय सरकार ने शिक्षा संयुक्त सचिव डी. लिंगदोह को सीएमजे विश्वविद्यालय का प्रशासक नियुक्त किया ताकि राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित तरीके से विश्वविद्यालय को बंद किया जा सके। सीएमजे विश्वविद्यालय ने 2010 से 2013 के बीच करीब 20570 फर्जी डिग्रियां प्रदान की थी।  

उपायों की अनदेखी बड़ी समस्या है: ‘विश्व और भारतीयता’ पर मोहन भागवत के विचार

नई दिल्ली नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) और अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास की ओर से आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 10वें अणुव्रत न्यास निधि व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस मौके पर RSS सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने 'विश्व की समस्याएं और भारतीयता' पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समस्याओं पर तो चर्चा होती है, लेकिन उपायों पर कम चर्चा होती है। विश्व समस्याओं से घिरा है। हम आधुनिक युग में बैठे हैं। हमें जितना इतिहास पढ़ाया गया है, वह पश्चिम की ओर से पढ़ाया जाता है। विश्व में भारत को लेकर विचार नहीं मिलते भागवत ने कहा कि भारत के बारे में सामान्यतः विचार नहीं मिलते हैं, भले ही नक्शे पर भारत हो, पर विचारधारा में नहीं। जिन समस्याओं पर हजारों वर्षों से विचार होता रहा, उन पर प्रयास भी हुए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहीं। समस्याओं की वैश्विक सूची 2000 वर्ष पुरानी है। घर, परिवार, राष्ट्र, व्यक्ति आदि इनमें कोई भी समस्या हो, पहली समस्या 'दुख' है। कहा कि दुख दूर करने के प्रयास होते रहे, कुछ दुख दूर भी हुए। सुख-सुविधा बढ़ी, लेकिन दुख वहीं हैं सौ साल पहले भाषण देते तो लाउडस्पीकर नहीं था। अब भाषण देना आसान है, इसलिए भाषण भी लंबा हो गया है। पहले जोर-जोर से बोलना होता था तो 10 मिनट में ही बात खत्म करनी पड़ती थी। पहले इधर-उधर जाने में पदयात्रा करनी पड़ती थी, अब अमेरिका जाना भी आसान है। विज्ञान से सुख-सुविधा बढ़ी, लेकिन दुख वहीं हैं। कौन दुखी नहीं है? रास्ते से भीख मांगने वाला हो या करोड़पति, सब अपने-अपने दुख गिनाएंगे। जितना सुख बढ़ाया, दुख वही का वही है। हर साल कहीं न कहीं युद्ध चलता रहता है भागवत ने कहा कि आज भी कलह है। 1950 में मेरा जन्म हुआ, तब से देखता आ रहा हूं कि हर साल कहीं न कहीं युद्ध चलता रहता है। कलह से हानि, रक्तपात और जीव की हानि होती है, लेकिन फिर भी बार-बार वही अनुभव दोहराया जाता है। पहले महायुद्ध के बाद शांति की किताबें लिखीं, लीग ऑफ नेशन बना, लेकिन दूसरा महायुद्ध भी हुआ और फिर यूएनओ बना। अब सोच रहे हैं कि क्या तीसरा महायुद्ध होगा? शांति आई क्या? ज्ञान तो बढ़ा है, लेकिन अज्ञानी भी बढ़े हैं उन्होंने कहा कि अज्ञानता भी एक समस्या है। क्या वह दूर हुआ? अज्ञान ने तो अपना रूप बदल लिया है। आज चंद्रमा, मंगल, क्रोमोसोम की बातें होती हैं, मनुष्य क्या नहीं कर सकता। बस एक जीव का निर्माण बाकी है, ज्ञान बढ़ा है, साथ ही अज्ञानी लोगों की संख्या भी बढ़ी है। सुशिक्षित कितने हैं, पता नहीं।

चारधाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, रिकॉर्ड 39 लाख तीर्थयात्री पहुंचे दर्शन को

देहरादून उत्तराखंड में चारधाम यात्रा जारी है। इस बार गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा में अब तक 39 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस उपलब्धि के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने कहा, "चारधाम यात्रा के लिए गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम के लिए कुल 47 लाख 27 हजार 619 श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। साथ ही हेमकुंड साहिब के लिए 2 लाख, 16 हजार, 960 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। चारधाम यात्रा के लिए अब तक 49 लाख, 41 हजार, 527 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराए हैं।" उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि अब तक यमुनोत्री धाम में 5 लाख, 73 हजार, 812, गंगोत्री धाम में 6 लाख, 47 हजार, 571, केदारनाथ धाम में 13 लाख, 91 हजार, 348, बदरीनाथ धाम में 11 लाख, 63 हजार, 867, और हेमकुंड साहिब में 2 लाख, 16 हजार, 305 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। कुल मिलाकर, सभी धामों में 39 लाख, 92 हजार, 903 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। मंत्री सतपाल महाराज ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा, "इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की योजना है, जिससे उत्तराखंड का नाम इतिहास में दर्ज हो।" पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाए जाने को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने से इसे लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों से जोड़ा जा सकेगा। इससे विशेष रूप से भारतीय मूल के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के लिए आसानी से हरिद्वार पहुंच सकेंगे। मंत्री ने बताया कि हरिद्वार चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार है, और यहां हवाई अड्डा बनने से तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी। इसके लिए दो स्थानों को चिन्हित किया गया है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

सियासी सरगर्मी तेज: हरिवंश ने राष्ट्रपति से की भेंट, धनखड़ के इस्तीफे पर अटकलें तेज

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। बीते दिन ही धनखड़ ने राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र भेजकर पद से इस्तीफे की बात कही थी। उन्होंने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। उनके इस्तीफे के बाद मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन उपसभापति हरिवंश ने किया।  राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐस समय हो रही है, जब सोमवार शाम को जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन ने एक्स पर बैठक की एक तस्वीर भी साझा की। जिसमें लिखा गया है, राज्यसभा के उपसभापति  हरिवंश ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।   बता दें कि सोमवार को जगदीप धनखड़ ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन अचानक इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद हरिवंश ने मंगलवार को राज्यसभा में सुबह के सत्र की कार्यवाही की अध्यक्षता की। हालांकि की राज्यसभा की कार्यवाही को कुछ समय बाद कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।  सभापति का पद स्वत: रिक्त हुआ उपराष्ट्रपति के पद छोड़ने के साथ ही राज्यसभा के सभापति पद भी स्वत: रिक्त हो गया। उपराष्ट्रपति उच्च सदन के पदेन सभापति होते हैं। ऐसे में अब जब इस्तीफा मंजूर हो गया है तो मानसून सत्र में राज्यसभा की पूरी कार्यवाही उपसभापति हरिवंश चलाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति की ओर से अधिकृत सदस्य को भी यह जिम्मेदारी दी सकती है।  सोमवार को पूरे दिन राज्यसभा में सक्रिय थे धनखड़ इससे पहले सोमवार को धनखड़ पूरे दिन राज्यसभा में सक्रिय थे। सुबह उन्होंने विपक्ष को संसद को संवाद एवं चर्चा का सकारात्मक मंच बनाने की नसीहत दी और दोपहर बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करते हुए पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया। जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ पेश महाभियोग के नोटिस में एक सांसद के दोहरे दस्तखत पर जांच बैठाने की भी घोषणा की थी। पिछले सप्ताह भी बिगड़ी थी धनखड़ की तबियत उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने त्यागपत्र में कहा था कि वह स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और  चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं। हालांकि वे हाल के महीनों में राज्यसभा में काफी सक्रिय और ऊर्जावान नजर आए, लेकिन उनकी तबीयत लगातार ठीक नहीं चल रही थी। मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी से बाहर की यात्राओं से परहेज की सलाह दी थी। इके बाद जून में उत्तराखंड के नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान वे मंच पर बेहोश हो गए थे। अधिकारियों ने बताया था कि उस दिन बहुत गर्मी थी और कार्यक्रम स्थल बेहद घुटन भरा था। इस महीने की शुरुआत में केरल यात्रा के दौरान भी उनकी तबीयत गड़बड़ा गई थी और उन्हें उनकी पत्नी सुदेश और एक सहयोगी ने सहारा दिया था।  वहीं, 17 जुलाई को दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना द्वारा विकसित वटिका के दौरे के समय भी धनखड़ अस्वस्थ महसूस करने लगे और कुछ देर के लिए उन्हें बैठकर आराम करना पड़ा था। उनकी पत्नी ने उन्हें पानी पिलाया था। जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था। 

जनता का पैसा हंगामे की भेंट चढ़ा रहे विपक्षी: किरेन रिजिजू

नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने विपक्ष पर "टैक्स का पैसा बर्बाद करने" और मौजूदा सत्र के दौरान जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। किरेन रिजिजू ने लोकसभा में मंगलवार को कहा कि बैठक में ये तय किया गया कि सबसे पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा होगी। इसके लिए समय भी तय किया गया है। एक साथ सारे मुद्दे पर चर्चा संभव कैसे है? फिर भी, सहयोग करने के बजाय, वे तख्तियां लेकर आए और सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला। ये हर समय नियम के विरुद्ध तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते हैं, यह निंदनीय है। जबकि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में यह तय हुआ था कि पोस्टर, बैनर लेकर सदन में नहीं आएंगे। उन्होंने आगे कहा, "पोस्टर-बैनर लेकर सदन को बाधित करना आपत्तिजनक है, वह (विपक्ष) चर्चा की मांग कर रहे हैं और हम इसके लिए तैयार हैं। फिर वह सदन क्यों नहीं चलने दे रहे? यह दोहरा मापदंड गलत है। अगर आप चर्चा चाहते हैं, तो ये हंगामा नहीं करें। सरकार ने बार-बार कहा है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। लेकिन ये हंगामा क्यों कर रहे हैं, इसकी कौन जिम्मेदारी लेगा। देश की टैक्स मनी को आप हंगामा करके बर्बाद कर रहे हैं। इसका जवाब देना पड़ेगा। आप लोग सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और उनके कुछ साथी दो दिन से हंगामा कर रहे हैं। मैं इसका खंडन करना चाहता हूं।" संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष की ओर से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), पहलगाम हमले और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा की मांग की गई और जमकर नारेबाजी हुई। जिसके बाद हंगामे की वजह से सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

मौसम की मार: पाकिस्तान में मूसलधार बारिश से 221 लोगों की मौत

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में जून के अंत से भारी मानसूनी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और बारिश से हुई अन्य घटनाओं में कम से कम 221 लोगों की मौत और 592 अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी पाकिस्तान के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दी है। ताजा स्थिति रिपोर्ट में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कहा कि हताहतों की संख्या 26 जून से 21 जुलाई के बीच दर्ज की गई, जिसमें पिछले 24 घंटों में पांच नई मौतें और 10 घायल होने की सूचना है। पूर्वी पंजाब प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 135 लोगों की मौत हुई और 470 घायल हुए। उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में 46 लोगों की जान चली गई और 69 अन्य घायल हुए। दक्षिणी सिंध प्रांत में 22 लोगों की मौत और 40 घायल होने की सूचना है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में 16 लोगों की मौत और चार घायल होने की सूचना है। एनडीएमए ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में एक बच्चा घायल हुआ है। अधिकारियों ने बाढ़ की चेतावनी जारी की है। वे लगातार हो रही बारिश के बीच राहत अभियान चलाने और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए प्रांतीय सरकारों के साथ समन्वय कर रहे हैं। क्योंकि पाकिस्तान में लगातार मानसून का प्रकोप जारी है, इसलिए अधिकारियों ने कई अलर्ट जारी किए हैं। इनमें मध्यम से भारी बारिश, नदियों का जलस्तर बढ़ने और संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की चेतावनी दी गई है। पाकिस्तान के एनडीएमए और पंजाब के प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने निवासियों से सतर्क रहने और निचले व जलमग्न इलाकों से दूर रहने का आग्रह किया है। बता दें कि अरब सागर से आ रही नमी से तीव्र मानसूनी गतिविधि पूरे पंजाब में सक्रिय बनी हुई है, जहां लाहौर में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने आर्द्रता के स्तर को बढ़ा दिया है।