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पाकिस्तान की बड़ी चूक! न्यूक्लियर ज़ोन के पास गिरी खुद की मिसाइल, शाहीन-3 टेस्ट में खामी

 बलूचिस्तान  पाकिस्तान की सेना ने हाल ही में अपनी शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. लेकिन ये टेस्ट बुरी तरह नाकाम रहा. मिसाइल निशाना चूक गई और डेरा गाजी खान (पंजाब प्रांत) में एक परमाणु केंद्र के पास धमाका हुआ. इसका मलबा बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में गिरा, जो नागरिक बस्तियों के बेहद करीब था. इस घटना ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाए, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया. 22 जुलाई 2025 को हुए इस हादसे के बाद पाकिस्तानी सेना ने इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.  शाहीन-3 मिसाइल क्या है? शाहीन-3 पाकिस्तान की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है. ये एक सतह से सतह (सरफेस-टू-सरफेस) बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 2750 किलोमीटर तक मार कर सकती है. यानी ये भारत के कई शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच सकती है. इसकी खासियतें हैं…     परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता: ये 20-25 से 300-500 किलोटन तक के परमाणु हथियार ले जा सकती है.     सॉलिड फ्यूल: ये ठोस ईंधन पर चलती है, जो इसे जल्दी लॉन्च करने में मदद करता है.     चीन की मदद: पाकिस्तान ने इसे 2000 के दशक में चीन की तकनीकी मदद से बनाना शुरू किया. पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है, खासकर भारत की सैन्य ताकत का जवाब देने के लिए. लेकिन बार-बार टेस्ट फेल होने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. क्या हुआ 22 जुलाई 2025 को? 22 जुलाई 2025 को पाकिस्तान ने डेरा गाजी खान के राखी इलाके से शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया. लेकिन मिसाइल अपने निशाने से भटक गई. बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में मट्ट इलाके में जा गिरी. ये जगह नागरिक बस्तियों से सिर्फ 500 मीटर दूर थी. लूप सेहरानी लेवी स्टेशन के पास ग्रेपन रवाइन में मलबा गिरा, जिससे बड़ा धमाका हुआ.     धमाके की आवाज: धमाका इतना जोरदार था कि 20-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दिया, जिसमें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाके भी शामिल थे.     सोशल मीडिया पर हंगामा: कुछ वीडियो में लोग डरकर भागते दिखे. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल डेरा गाजी खान के परमाणु केंद्र पर गिरी, तो कुछ ने कहा कि ये किसी दुश्मन ड्रोन का हमला था.     पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया: सेना ने तुरंत इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.     DG खान कमिश्नर के प्रवक्ता मझर शीरानी ने कहा कि ये शायद किसी फाइटर जेट की सोनिक बूम (ध्वनि की दीवार टूटने की आवाज) थी, लेकिन पक्की जांच का इंतजार है.  रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान नाम के संगठन ने इस टेस्ट की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि मिसाइल टेस्ट ने बलूचिस्तान के लोगों की जान खतरे में डाली. अगर मलबा थोड़ा और इधर-उधर गिरता, तो सैकड़ों लोग मारे जा सकते थे. डेरा गाजी खान क्यों खास है? डेरा गाजी खान पाकिस्तान का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है. यहां यूरेनियम का भंडारण और प्रोसेसिंग होती है. 1970 में पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन (PAEC) ने यहां एक पायलट प्लांट बनाया था, जो रोजाना 10,000 पाउंड यूरेनियम प्रोसेस करता है. ये जगह पाकिस्तान के परमाणु हथियार प्रोग्राम का दिल है. अगर मिसाइल सचमुच इस केंद्र पर गिरी, तो ये बहुत बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि कोई नुकसान नहीं हुआ. पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान का मिसाइल टेस्ट फेल हुआ. पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है…     2023 में डेरा गाजी खान: अक्टूबर 2023 में भी शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ था. उस बार भी धमाका डेरा गाजी खान के पास हुआ, जिसकी आवाज 30-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल परमाणु केंद्र पर गिरी, लेकिन सरकार ने इसे सोनिक बूम बताया.     2021 में डेरा बुगटी: जनवरी 2021 में शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ और मिसाइल डेरा बुगटी के नागरिक इलाके में गिरी. कई घर तबाह हुए और लोग घायल हुए. बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने इसे बलूचिस्तान को पाकिस्तानी सेना की प्रयोगशाला बनाने का सबूत बताया.     2020 में बाबर-II मिसाइल: बाबर-II मिसाइल, जो जमीन और समुद्र से लॉन्च हो सकती है, बलूचिस्तान में टेस्ट के दौरान क्रैश हो गई.     2022 में जमशोरो: एक अज्ञात मिसाइल सिंध के जमशोरो शहर में गिरी. कुछ का दावा था कि ये भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हादसे का जवाब देने की कोशिश थी. ये हादसे दिखाते हैं कि पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक में अभी भी खामियां हैं. बलूचिस्तान का गुस्सा रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान और स्थानीय लोग इस टेस्ट से बहुत नाराज हैं. उनका कहना है… बलूचिस्तान को प्रयोगशाला बनाया जा रहा है: पाकिस्तानी सेना बार-बार बलूचिस्तान में मिसाइल और परमाणु टेस्ट करती है, जिससे वहां के लोग खतरे में रहते हैं. 1998 में छागाई में हुए परमाणु टेस्ट की वजह से आज भी वहां कैंसर और त्वचा रोग जैसी बीमारियां फैली हैं. जबरन विस्थापन: सेना टेस्ट से पहले बलूच लोगों को उनके घरों से निकाल देती है. डेरा बुगटी और काहन जैसे इलाकों में ये आम बात हो गई है. इसका मकसद वहां के प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) का दोहन करना बताया जाता है. सुरक्षा की कमी: मिसाइल टेस्ट के दौरान नागरिकों को पहले से नहीं बताया जाता, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ती है. बलूच रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुगटी ने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को अपनी हथियारों की प्रयोगशाला बना दिया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से इसकी जांच करने की मांग की. पाकिस्तान का परमाणु प्रोग्राम पाकिस्तान दुनिया के उन नौ देशों में शामिल है, जिनके पास परमाणु हथियार हैं. 2025 तक उसके पास 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है, जो 2026 तक 200 तक पहुंच सकते हैं. पाकिस्तान की नीति न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध (मिनिमम क्रेडिबल डिटरेंस) की है, यानी वो भारत जैसे पड़ोसियों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है.     शाहीन सीरीज: ये मिसाइलें 1250 से 2750 … Read more

घरेलू शोषण की हदें पार: अधिकारी ने पत्नी की जासूसी कर किया मानसिक उत्पीड़न

पुणे महाराष्ट्र के पुणे में एक क्लास वन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हैं. उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी के निजी पलों को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करने और उसे ब्लैकमेल करने की धमकी देने के लिए बाथरूम सहित अपने घर के अंदर कई स्पाई कैमरे लगाए थे.पीड़ित महिला, जो खुद भी एक क्लास वन की अधिकारी है, ने अंबेगांव पुलिस स्टेशन में अपने पति और उसके परिवार के सात सदस्यों पर उत्पीड़न, ब्लैकमेल और निजता के हनन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस के अनुसार, कपल की शादी 2020 में हुई थी. कुछ सालों के बाद, पति को कथित तौर पर अपनी पत्नी के चरित्र पर शक हो गया और उसने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. उस पर नज़र रखने के लिए, उसने कथित तौर पर पूरे घर में जासूसी कैमरे लगा दिए थे. यहां तक कि काम के दौरान भी, वह उसकी गतिविधियों पर नजर रखता था. शिकायत में आगे कहा गया है कि आरोपी ने बार-बार धमकी दी थी कि अगर वह कार और होम लोन की ईएमआई चुकाने के लिए अपने मायके से 1.5 लाख रुपये नहीं लाएगी, तो वह उसके नहाते हुए वीडियो ऑनलाइन लीक कर देगा. महिला ने अपनी सास, ससुर, देवर, ननद और अन्य ससुराल वालों पर शादी के बाद से ही लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने और अपने माता-पिता से पैसे और कार लाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है. पुलिस ने पति और सात ससुराल वालों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, घरेलू हिंसा, शोषण और निजता के हनन के लिए बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. जांचकर्ता घर से बरामद जासूसी कैमरों और वीडियो फुटेज की जांच कर रहे हैं.

ढाका विमान हादसा: भारत से पहुंची बर्न एक्सपर्ट टीम, घायलों का होगा विशेष इलाज

नई दिल्ली बांग्लादेश में जेट हादसे में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है. इसमें 25 बच्चे शामिल हैं. इस हादसे में कई बच्चे दर्दनाक रूप से जल गए हैं. ढाका में उनका उचित इलाज नहीं पो रहा है. अब भारत ने ऐसे गंभीर रूप से जल चुके मरीजों के इलाज के लिए दिल्ली से बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और नर्स की एक टीम ढाका जा रही है. भारत ऐसे मरीजों के इलाज में काम आने वाले जरूरी मेडिकल उपकरणों को भी भेज रहा है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है.  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दुखद हवाई दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि पर गहरा शोक जाहिर किया. तब पीएम मोदी ने बांग्लादेश को सहायता का आश्वासन दिया था. बता दें कि सोमवार को वायुसेना के एफ-7 बीजीआई ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट ने स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजकर 6 मिनट पर उड़ान भरी थी. करीब डेढ़ बजे एयरक्राफ्ट ढाका के उत्तरा स्थित माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज की इमारत से टकरा गया था. इस भयावह हादसे के बाद स्कूल में आग लग गई थी.  विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आवश्यक चिकित्सा सहायता के साथ बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और नर्सों की एक टीम पीड़ितों का इलाज करने के लिए ढाका जा रही है.  विदेश मंत्रालय के अनुसार अगर जरूरत पड़ी तो ऐसे मरीजों के इलाज के लिए उन्हें भारत भी लाया जा सकता है. एक बयान में कहा गया, "वे मरीजों की स्थिति का आकलन करेंगे और आवश्यकतानुसार भारत में आगे के इलाज और विशेष देखभाल की सिफारिश करेंगे." विदेश मंत्रालय  ने कहा कि प्रारंभिक आकलन और उपचार के आधार पर और भी चिकित्सा दल भी भेजे जा सकते हैं.  बताया जा रहा है कि बांग्लादेश भेजी जा रही टीम में दिल्ली के दो डॉक्टर शामिल हैं. इनमें एक राम मनोहर लोहिया अस्पताल से और दूसरा सफदरजंग अस्पताल से है. इसके अलावा बर्न डिपार्टमेंट की विशेषज्ञ नर्सें भी ढाका जा रही हैय बांग्लादेश वायु सेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है.  सोमवार को इस हादसे के बाद पीएम मोदी ने गहरी संवेदना जताई थी. उन्होंने कहा था कि भारत इस संकट में बांग्लादेश के साथ खड़ा है और हर संभव मदद देने के लिए तैयार है. ढाका के अस्पतालों में दर्दनाक दृश्य बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के अनुसार ढाका के अस्पतालों में नाउम्मीदी की हालत है. कई परिवार जिनके बच्चे आईसीयू में थे वे उम्मीद भरी निगाहों से अपडेट का इंतज़ार कर रहे थे. कुछ कम भाग्यशाली लोग अपने बच्चों के शवों की तलाश में एक मुर्दाघर से दूसरे मुर्दाघर भटक रहे थे.  सोमवार को सैकड़ों लोगों ने 500 बिस्तरों वाले अस्पताल में हंगामा किया. इसके बाद अस्पताल में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मंगलवार को अधिकारियों ने केवल मरीजों उनके रिश्तेदारों और अस्पताल के कर्मचारियों को ही अस्पताल के अंदर जाने दिया. सेना के जवानों को अस्पताल के एंट्री गेट पर पहरा देते देखा गया. द डेली स्टार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आईसीयू के बाहर अपने प्रियजनों की खबर के लिए परेशान परिवारों के इंतजार के दर्दनाक दृश्य देखे. "मकिन के बारे में कोई खबर?" सलेहा नाज़नीन अपने पति मोहम्मद मोहसिन से हर बार जब कोई आईसीयू से बाहर निकलता बार-बार पूछती थीं. उनका बेटा अब्दुर मुसब्बिर मकिन, जो कक्षा 7 का छात्र है, इस हादस में गंभीर रूप से जल गया था. "कृपया, मेरे मकिन को मेरे पास लाओ," वह बार-बार यही कहती रहीं. जबकि उनका बेटा अंदर अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था. मोहसिन ने बताया कि उनका सबसे छोटा बेटा दोपहर 1:00 बजे स्कूल का समय समाप्त होने के बाद एक एक्स्ट्रा क्लास के लिए रुका था. "वह ठीक नहीं है. उसे वेंटिलेशन पर रखा गया है," उन्होंने आंसु रोकने की कोशिश करते हुए कहा. बांग्लादेश में जो प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हुआ है वो F-7BGI बांग्लादेश एयरफोर्सका मल्टीरोल फाइटर जेट है. यह प्लेन चीन के चेंगदू J-7 फाइटर का एडवांस वर्जन है. इसे सोवियत यूनियन के MiG-21 की तर्ज पर बनाया गया था. इस हादसे के बाद बांग्लादेश में इस विमान पर प्रश्न उठ रहे हैं.    

ब्रिटेन दौरे की शुरुआत आज: पीएम मोदी और स्टार्मर करेंगे आर्थिक साझेदारी को नई दिशा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ब्रिटेन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं. उनका यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है. पीएम की इस यात्रा के दौरान भारत-ब्रिटेन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन किए जाने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को एक नई ऊंचाई मिलेगी. लंदन में मौजूद भारतीय हाई कमिश्नर विक्रम दोराईस्वामी के मुताबिक यह समझौता अपने आखिरी लीगल फेज में है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 6 मई को भारतीय-ब्रिटिश अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के आधार पर तैयार किए गए हैं. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत-ब्रिटेन की कोशिश द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की है. उम्मीद की जा रही है कि इस समझौते पर गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर की मुलाकात के दौरान आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो सकते हैं. व्यापारियों को मिलेगी स्पष्ट रूपरेखा, बढ़ेगा द्विपक्षीय व्यापार भारतीय हाई कमिश्नर दोराईस्वामी के मुताबिक, एफटीए सिर्फ टैरिफ रिडक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ट्रेड के नियम, कस्टम्स अरेंजमेंट, रूल्स ऑफ ऑरिजिन, गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट और सर्विस सेक्टर से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं. एक बार यह समझौता साइन और ब्रिटेन की संसद द्वारा रैटिफाई किए जाने के बाद, दोनों देशों के व्यापारियों को ज्यादा प्रीडिक्टिबल फ्रेमवर्क मिलेगा. इससे दोनों देशों के व्यापारियों के लिए नियम आसान और ट्रांसपेरेंट होंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा. प्रधानमंत्री मोदी के लोकल टाइम के मुताबिक बुधवार शाम को ब्रिटेन पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद गुरुवार को ब्रिटिश पीएम स्टार्मर के साथ उनकी बैठकें होंगी, जहां दोनों पक्षों के बीच सहमत एफटीए पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लिए गर्व का मौका भारतीय हाई कमिश्नर दोराईस्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा को लेकर कहा कि हम चाहते थे कि पीएम मोदी का दौरा लंबा हो लेकिन पीएम ब्रिटेन में सिर्फ 24 घंटे रुकेंगे, जो यह दर्शाती है कि भारत इस साझेदारी को कितना महत्व देता है. हाई कमिश्नर ने कहा, "प्रधानमंत्री हमेशा यह मानते हैं कि पारंपरिक और महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने चाहिए. संसद सत्र के दौरान भी इतनी दूरी तय कर प्रधानमंत्री का आना इस रिश्ते को एक नई ऊंचाई देने की मंशा को दर्शाता है." किंग चार्ल्स से मुलाकात और आयुर्वेद पर चर्चा पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात किंग चार्ल्स-III से भी तय है. 2018 में जब पीएम ब्रिटेन गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स के साथ मिलकर एक Ayurvedic Centre of Excellence की शुरुआत की थी. दोराईस्वामी ने उम्मीद जताई कि इस बार भी दोनों नेताओं के बीच स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. बिजनेस डेलीगेशन और मालदीव की यात्रा पीएम मोदी के साथ एक बिजनेस डेलीगेशन भी इस दौरे पर है. ब्रिटेन में अपने कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मालदीव रवाना होंगे, जहां वे 26 जुलाई को वहां की स्वतंत्रता के 60 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ होंगे.

786 वोटों की जंग: उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA की ताकत का आकलन

नई दिल्ली  जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है और इस संबंध में होम मिनिस्ट्री की ओर से नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। अब उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्शन कमिशन अपनी प्रक्रिया कभी भी शुरू कर सकता है। संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति के इस्तीफे, निधन या फिर किसी अन्य कारण से पद पर न रहने की स्थिति में जल्दी से जल्दी चुनाव कराया जाना चाहिए। ऐसे में कभी भी चुनाव आयोग की ओर से इलेक्शन का नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। अब बात करते हैं उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होने की स्थिति में नंबर गेम की। यदि समीकरणों की बात करें तो एनडीए सीधे तौर पर भारी है। एनडीए को विपक्ष की मान-मनौव्वल के बिना ही आसानी से जीत मिल सकती है, लेकिन वह चाहेगा कि विपक्षी दलों को साथ लेकर सर्वसम्मति से राज्यसभा का नया चेयरमैन लाया जाए। फिर भी चुनाव हुआ तो एनडीए आसानी से अपने कैंडिडेट को जिताने की स्थिति में है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में राज्यसभा और लोकसभा के सांसद वोट डालते हैं। इसके अलावा राज्यसभा के नामित सदस्य भी वोटिंग कर सकते हैं। कुल 543 सदस्यों वाली लोकसभा में बशीरहाट की एक सीट ही खाली है। इस तरह 542 मेंबर हैं। वहीं 245 सदस्यों की राज्यसभा में 5 सीटें खाली हैं और 240 मेंबर हैं। इस तरह दोनों सदनों की कुल क्षमता फिलहाल 786 सदस्यों की है। यदि सभी सदस्य वोट डालते हैं तो किसी कैंडिडेट को जीतने के लिए 394 सदस्यों का वोट चाहिए होगा। लोकसभा में एनडीए के पास 293 सदस्य हैं। इसके अलावा राज्यसभा में भी उसके पास 129 मेंबर हैं। इस तरह दोनों सदनों को मिलाकर कुल 422 नंबर एनडीए का बनता है। यह संख्या जीत के लिए पर्याप्त है। संविधान के आर्टिकल 68 के क्लॉज 2 के अनुसार उपराष्ट्रपति का चुनाव जल्द से जल्द होना चाहिए। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है। जगदीप धनखड़ से पहले किसी ने इस तरह से इस्तीफा नहीं दिया है। बिहार कनेक्शन वाले इस नेता को उम्मीदवार बनाने के कयास इस बीच चर्चा है कि राज्यसभा के वाइस चेयरमैन हरिवंश को एनडीए कैंडिडेट बनाय जा सकता है। उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी का भरोसा हासिल है। इसके अलावा बिहार से कनेक्शन है और जेडीयू के वह नेता हैं। इसीलिए कयास जोरों पर हैं कि उन्हें ही उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है।  

मोदी का डिप्लोमेसी डबल स्ट्राइक: यूके-मालदीव में वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने विस्तार से जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी 23-24 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम (यूके) के दो दिवसीय ​​दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 25-26 जुलाई को उनकी मालदीव यात्रा तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूके की आधिकारिक यात्रा पीएम कीर स्टारमर के निमंत्रण पर हो रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी की यूके की चौथी यात्रा होगी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह यात्रा जरूर छोटी है, लेकिन दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक पहलुओं की समीक्षा करने, इसे और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार करने का अवसर देगी। विदेश सचिव ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि भारत-यूके साझेदारी को 2021 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में उन्नत किया गया था और तब से उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्क नियमित रूप से हो रहे हैं। दोनों पक्ष इस साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विक्रम मिस्री ने कहा, "ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालय भी भारत में अपना कैंपस खोलने पर विचार कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण रिश्ते के कुछ और भी तथ्य और आंकड़े हैं। 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 55 बिलियन डॉलर को पार कर गया। यूके भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसके पास कुल निवेश 36 बिलियन डॉलर का है।" खालिस्तान के विषय पर भी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "खालिस्तानी चरमपंथियों और उनसे जुड़े संगठनों की मौजूदगी का मुद्दा हम ब्रिटेन में अपने सहयोगियों के ध्यान में लगातार लाते रहे हैं और आगे भी लाते रहेंगे। यह न सिर्फ हमारे लिए चिंता का विषय है, बल्कि हमारे सहयोगियों के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि यह उनके देशों में सामाजिक समरसता और सार्वजनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।" लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन टीआरएफ पर विदेश सचिव ने कहा, "अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में टीआरएफ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया। यकीन है कि हमारे ब्रिटिश सहयोगियों को इस घटनाक्रम की जानकारी है, लेकिन इससे हमें सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों और ऐसी चुनौतियों का दृढ़ता से जवाब देने की जरूरत पर अपने विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।" विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की मालदीव यात्रा 25 और 26 जुलाई को होगी। वे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर इस दौरे पर जाएंगे। विक्रम मिस्री ने कहा, "प्रधानमंत्री का मालदीव दौरा निश्चित रूप से मालदीव के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय आधिकारिक बैठकों को भी शामिल करेगा। कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि हम नई पहल के संबंध में भी कुछ घोषणाएं करेंगे, जिनका विवरण बाद में दिया जाएगा। विदेश सचिव ने कहा, "मालदीव हमारे पड़ोस में है और हमारा एक बहुत करीबी साझेदार है। यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और महासागर विजन का भी हिस्सा है, जो सुरक्षा और विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। संकट के समय, चाहे प्राकृतिक हो या मानवनिर्मित, हमने हमेशा मालदीव की जरूरतों का तुरंत समर्थन किया है। हमारे बीच मजबूत राजनीतिक संबंध रहे हैं, जो नियमित उच्च स्तरीय दौरों से और मजबूत होते रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "आर्थिक मोर्चे पर, भारत मालदीव का एक सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 500 मिलियन डॉलर का है। भारतीय निवेशक मालदीव में पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते और एक निवेश संधि पर भी बातचीत कर रहे हैं।"

2026 से लागू होगा 8वां वेतन आयोग, करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 8th Pay Commission को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रारंभिक कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लागू होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। Finance Ministry ने केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए प्रमुख मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के साथ शुरुआती चर्चाएं शुरू कर दी हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित उत्तर में साझा की है। वित्त राज्य मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय सहित विभिन्न राज्य सरकारों के साथ आठवें वेतन आयोग के संबंध में परामर्श शुरू कर दिए हैं। लोकसभा में अपने लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों से इनपुट मांगे गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसके अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। अभी तक किसी भी नाम की घोषणा नहीं की गई है। कब लागू होगा आठवां वेतन आयोग? 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशें तैयार नहीं हुई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इनका क्रियान्वयन पूर्व के वेतन आयोगों द्वारा निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही किया जाएगा। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन फरवरी 2014 में हुआ था, लेकिन इसकी सिफारिशों को 1 जनवरी, 2016 से लागू किया गया था। इसी तर्ज पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 की शुरुआत से लागू की जा सकती हैं। पंकज चौधरी ने नए वेतन आयोग के लागू होने के सवाल पर आगे कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशें किए जाने और सरकार द्वारा इन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही इनका कार्यान्वयन किया जाएगा।   50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स को मिलेगा फायदा आठवें वेतन आयोग के लागू होने से देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख से ज़्यादा पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। जब तक नया वेतन आयोग अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर देता और सरकार की ओर से इन्हें मंज़ूरी नहीं मिल जाती, तब तक कर्मचारियों की सैलरी या पेंशन स्ट्रक्चर में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होगा। हर साल दो बार होने वाले DA में बढ़ोतरी का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। महंगाई भत्ते में 4% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन को महंगाई भत्ते (DA) के ज़रिए संशोधित करती है, जिसका ऐलान हर 6 महीने में समीक्षा के बाद किया जाता है। डीए हाइक सीधे AICPI-IW  से जुड़ा होता है. महंगाई भत्ते में आमतौर पर हर साल जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला DA 60% तक पहुंच सकता है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2025 में AICPI-IW इंडेक्स 143 था, जो मई तक 144 पर पहुंच चुका है। ऐसे में DA और DR में 3 से 4 % तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो 1 जुलाई से प्रभावी मानी जाएगी> इस संबंध में सरकार सितंबर या अक्टूबर में घोषणा कर सकती है>

श्रावण अष्टमी पर 10 दिवसीय मेला: माता चिंतपूर्णी में भक्ति और परंपरा का संगम

ऊना उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त तक श्रावण अष्टमी मेले का आयोजन किया जाएगा। एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने इसे लेकर शुक्रवार को माईदास सदन चिंतपूर्णी में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और मेले के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने जानकारी दी कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान एडीसी ऊना मेला अधिकारी, एसडीएम अंब सहायक मेला अधिकारी जबकि एएसपी ऊना को पुलिस मेला अधिकारी तथा डीएसपी अंब को सहायक पुलिस मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है।  सचिन शर्मा ने कहा कि मेले के दौरान माता श्री चिंतपूर्णी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे खुला रहेगा। साफ-सफाई के लिए रात्रि के दौरान मंदिर को केवल एक घंटे के लिए बंद किया जाएगा। दोपहर को मां के श्रृंगार व भोग इत्यादि के लिए भी मंदिर कुछ समय के लिए बंद रहेगा।   लंगर लगाने की लेनी होगी अनुमति एसडीएम ने बताया कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान लंगर लगाने की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा। आयोजक को लंगर की समाप्ति के बाद साफ-सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा मेले के दौरान डीएफएससी ऊना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। नियमों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने कहा कि मेले के दौरान ढोल नगाड़े, चिमटा, लाउडस्पीकर इत्यादि बजाने और प्लास्टिक व थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा मालवाहक वाहनों के माध्यम से माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर आने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।   दस सेक्टरों में बांटा जाएगा क्षेत्र मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटा जाएगा। सुरक्षा के दृष्टिगत पर्याप्त मात्रा में पुलिस व होमगार्ड के जवानों सहित त्वरित कार्य बल की टीमें तैनात रहेंगी। सभी सेक्टरों की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम एसडीएम सचिन शर्मा ने बताया कि मेले के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे तथा ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए रिकवरी वैन तैनात की जाएगी। भिक्षावृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा तथा इसे लेकर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की टीमों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। मेले में श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए विभिन्न स्थानों पर एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक कैंप स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपदा अथवा आग इत्यादि की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन तैनात रहेंगे। साथ ही मेलावधि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मेला शुरू होने से पूर्व सड़कों की व्यवस्था को भी दुरूस्त करने के भी निर्देश दिए। एसडीएम ने निजी सराय प्रबंधकों को सरायों में अग्निशमन उपकरण लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन इनकी जांच भी करवाएगा। उन्होंने विद्युत विभाग को मेलावधि के दौरान विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने के लिए विद्युत लाइनों का आवश्यक रखरखाव करना सुनिश्चित करने को कहा ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा मेले के दौरान अस्थाई रूप से अतिरिक्त स्ट्रीट लाईटें भी लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पीने के पानी के लिए प्याऊ भी लगाए जाएंगे। उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए जल भंडारण टैंकों का क्लोरिनेशन करना भी सुनिश्चित करें। बैठक में एएसपी ऊना संजीव भाटिया, सीएमओ डॉ संजीव वर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत छपरोह शशि कालिया, प्रधान नारी पंचायत अल्का, गंगोट की प्रधान एश्वर्या, डूहल भंगवाल की प्रधान प्रतिभा और अप्पर लोहारा की प्रधान संगीता वाला सहित अन्य मौजूद रहे। 

खाद्य सुरक्षा पर सवाल: आलू, प्याज और रोटी अब नहीं रहे सुरक्षित – इंटरनेशनल स्टडी का दावा

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन देखते-देखते हमारी थाली और जेब तक पहुंचने लगा है. शोधकर्ताओं ने बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ तो वहीं कुछ जगहें भीषण सूखा या अकाल का सामना कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है.  खेती कैसे हो रही है प्रभावित? जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर दुनिया भर में होने वाली खेती पर काफी बुरे तरीके से पड़ रहा है. खेती कम होने के कारण अनाज, फल और सब्जियों के दाम को बढ़ाया जा रहा है. अगर इसी तरह से मौसम बिगड़ता रहा तो आने वाले समय में गरीब देश कुपोषण, राजनीतिक समस्या और समाज में अशांति की समस्या से जूझ रहे होंगे. किन-किन चीजों के दाम में आया उछाल? ब्रिटेन की एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलीजेंस यूनिट, European Central Bank, फूड फाउंडेशन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इमपैक्ट के संयुक्त अध्ययन में 2022 और 2024 के बीच 18 देशों के मौसम का डाटा लिया गया जिसमें पाया गया कि खाने वाली चीजों के दाम में बढ़ोतरी का कनेक्शन गर्मी, सूखा और बारिश से था. शोध से पता चला कि बीते साल ब्रिटेन में आलू, साउथ कोरिया में पत्तागोभी और घाना में कोको के दाम में तेजी से उछाल आया. इनकी वजह असामान्य मौसम था. खेती करने में क्या आ रही है मुश्किल? Climate Change ने खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. तेज बहाव के साथ आने वाली बाढ़ ऊपजाऊ मिट्टी को अपने साथ बहा ले जाती है. इसके बाद उस जगह पर सिर्फ ऐसी जमीन रह जाती है जिस पर खेती करना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इसके बाद अनाज की कमी और मंहगाई की वजह से परिवारों को बुनियादी पोषण का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है.  आलू-प्याज पर भी खतरा? इसी शोध में ये भी पाया गया कि साल 2022 के मुकाबले भारत में जून 2024 तक प्याज और आलू के दाम 89 फीसदी तक बढ़े थे. यहीं हाल बाकी देशों का भी है. बता दें कि मोजाम्बिक में जब ब्रेड की कीमत बढ़ी थी तो लोग सड़कों पर उतर आए थे. शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि, जब खाने की चीजें महंगी होती हैं तो गरीबों को कम पोषण मिलता है जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है. 

भारतीय वायुसेना का गौरव मिग-21 हो रहा रिटायर, छह दशक की सेवा को सलाम

नई दिल्ली  हिंदुस्तान के आसमान में 60 और 70 के दशक में अपनी बादशाहत कायम रखने वाला फाइटर जेट मिग-21 सिंतबर में रिटायर हो रहा है। पैंथर्स के नाम से मशहूर 23 स्क्वाड्रन ने भारत के हर छोटे-बड़े युद्ध में हिस्सा लिया। 60 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहने के बाद इसे अब 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस पर एक समारोह में विदाई दे दी जाएगी। जानते हैं 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद कैसा रहा मिग-21 का सफर… मिग-21 लड़ाकू विमान का इतिहास मिला-जुला रहा। इस फाइटर जेट को भारत ने सोवियत संघ से खरीदा था। इसके बाद इसे 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसके कई विमान भारत में बनाए। 1960 और 70 के दशक में मिग-21 स्क्वाड्रन की आकाश में मौजूदगी से उस समय भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त मिली। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध, 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति, 1999 में कारगिल युद्ध और 2019 में बालाकोट स्ट्राइक में मिग-21 का अहम योगदान रहा। अभी चल रहे ऑपरेशन सिंदूर में भी मिग-21 स्क्वाड्रन अलर्ट मोड में है। हादसों के बाद दिया गया 'उड़ता ताबूत' नाम जहां एक तरफ 60-70 के दशक में आकाश में अपनी मौजूदगी से भारतीय वायुसेना को मिग-21 ने सशक्त किया। वहीं दूसरी ओर समय के साथ इसकी टेक्नोलॉजी कमजोर पड़ने लगी। कई हादसों के कारण इसे 'उड़ता ताबूत' भी नाम दिया गया। आप के दौर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के विमानों के सामने मिग-21 कुछ खास नहीं रह गया। हालांकि 60-70 के दशक में इसकी गिनती बेहतरीन फाइटर जेटों में होती थी। इसकी पुरानी तकनीक और हादसों के बाद उठ रहे सवाल को लेकर अब इसे 62 वर्षों बाद 19 सितंबर को रिटायर कर दिया जाएगा। वहीं पैंथर्स स्क्वाड्रन की विदाई के बाद भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 हो जाएगी। जो कि 1960 के दशक के बाद सबसे कम है। यहां तक की 1965 में 32 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या थी। हर युद्ध में मिग-21 ने किया कमाल एविएशन एक्सपर्ट अंगद सिंह ने कहा, 'कोई और फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के साथ इतने लंबे समय तक नहीं जुड़ा रहा। वायुसेना के 93 साल के इतिहास में दो-तिहाई समय तक यह जेट रहा है। इसने 1965 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर मोर्चे पर अपना अहम योगदान दिया है। आज हर भारतीय फाइटर पायलट के करियर में इसका योगदान है। इसमें कोई शक नहीं कि यह भारतीय आसमान के एक महान विमान को भावुक विदाई होगी।' सूत्रों के अनुसार, मिग-21 के विदाई समारोह में वायुसेना के बड़े अधिकारी और पुराने सैनिक शामिल होंगे। इस मौके पर फ्लाईपास्ट और विमानों की प्रदर्शनी भी होगी। मिग-21 ने सबसे लंबे समय तक वायुसेना में सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। भारत ने मिग-21 के 850 से अधिक विमान खरीदे थे, जिनमें ट्रेनर विमान भी शामिल थे। लगभग 600 विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में बनाए थे। स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी दुनियाभर में इन विमानों का इस्तेमाल अब खत्म हो चुका है, लेकिन वायुसेना इनकी समय सीमा बढ़ाती रही है। क्योंकि इनकी जगह लेने के लिए आधुनिक लड़ाकू विमान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। पहले यह तय हुआ था कि मिग-21 स्क्वाड्रन की जगह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लेंगे, लेकिन इन स्वदेशी विमानों की डिलीवरी में देरी हो गई है।