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वास्तु के अनुसार इस दिशा में लगाएं पारिजात, जीवन में आएगी तरक्की और सकारात्मक ऊर्जा

 हिंदू धर्म में पारिजात के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. सफेद-नारंगी रंग के पारिजात के इन फूलों को हरसिंगार या रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पारिजात के फूल माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण है कि इसे घर में लगाने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. वास्तु शास्त्र में भी इस पौधे का खास महत्व है. यह पौधा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सुख, समृद्धि और शांति लाता है, लेकिन इसे लगाते समय सही दिशा और शुभ दिन का ध्यान रखना जरूरी होता है, नहीं तो इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं. कब लगाएं पारिजात का पौधा पारिजात के पौधे को घर में लगाने के लिए सोमवार या शुक्रवार और गुरुवार का दिन शुभ माना गया है. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, वहीं शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी का माना गया है, गुरुवार  का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इन दिनों में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है. किस दिशा में लगाएं पारिजात का पौधा वास्तु शास्त्र के अनुसार, पारिजात के पौधे को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में लगाना सबसे शुभ माना गया है. यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और यहां पौधा लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. आप उत्तर दिशा भी इस पौधे को लगा सकते हैं. माना जाता है कि इस दिशा में पारिजात लगाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता बढ़ती है. ध्यान रहे कि पौधे को कभी भी घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में न लगाएं, क्योंकि वास्तु के अनुसार  यह दिशा स्थिरता की होती है और यहां पौधा लगाने से उन्नति रुक सकती है. पारिजात के फायदे   1. धन और समृद्धि की प्राप्ति: पारिजात का पौधा घर में धन और समृद्धि लाने वाला माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब पारिजात का पौधा घर में लगाया जाता है, तो माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसके आसपास की ऊर्जा सकारात्मक रहती है, जिससे घर के सदस्यों के व्यवसाय और आर्थिक मामलों में लाभ होता है.  2. वास्तु दोष से मुक्ति: पारिजात का पौधा सिर्फ सुंदर नहीं है, बल्कि वास्तु दोष दूर करने वाला भी माना जाता है. घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को यह पौधा कम करता है. इसके लगाने से घर का वातावरण स्वच्छ, शांत और सकारात्मक बनता है.  3. संतान और पारिवारिक सुख: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारिजात का पौधा परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने में मदद करता है. इसे लगाने से परिवार के सदस्यों के बीच मेलजोल और सामंजस्य बढ़ता है. साथ ही, इसे घर में लगाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.  4. पूजा में महत्व: पारिजात के फूल केवल सुंदर नहीं, बल्कि पूजा में अत्यंत शुभ माने जाते हैं. इन फूलों से देवी-देवताओं की आराधना करने पर विशेष कृपा प्राप्त होती है.  पारिजात के फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय हैं. इसलिए यह पूजा और हवन में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जिससे घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता बनी रहती है. 

छठ महापर्व कल से आरंभ, पूजा के चार चरणों और संध्या अर्घ्य की पूरी जानकारी यहां जानें

हिंदू धर्म में छठ का पर्व बहुत ही विशेष और खास माना जाता है. इस त्योहार पर सूर्यदेव और छठी मैय्या की पूजा-उपासना की जाती है. छठ पर्व के ये 4 दिन बहुत ही खास माने जाते हैं, जो कि विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है. छठ पूजा को प्रतिहार, डाला छठ, छठी और सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है. छठ पूजा का व्रत महिलाएं अपने परिवार और पुत्र की दीर्घायु के लिए करती हैं. इस बार छठ के पर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर, शनिवार से होने जा रही है और इसका समापन 28 अक्टूबर, मंगलवार को होगा. छठ के पर्व ये चार दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं जिसमें पहला होता है नहाय-खाय, दूसरा खरना, तीसरा संध्या अर्घ्य और चौथा ऊषा अर्घ्य-पारण. चलिए अब छठ के पर्व की सभी तिथियों के बारे में जानते हैं.  छठ पर्व 2025 कैलेंडर (Chhath Puja 2025 Calender) पहला दिन- नहाय खाय, जो कि 25 अक्टूबर 2025 को है. दूसरा दिन- खरना, जो कि 26 अक्टूबर को है. तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य, जो कि 27 अक्टूबर को किया जाएगा.  चौथा दिन- ऊषा अर्घ्य, जो कि 28 अक्टूबर को किया जाएगा. छठ पर्व के चार दिनों का महत्व नहाय खाय (Nahay Khay)- छठ पूजा का पहला दिन होता है नहाय खाय. इस दिन व्रती किसी पवित्र नदी में स्नान करके, इस पवित्र व्रत की शुरुआत करती हैं. स्नान के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है, जिससे व्रत की शुरुआत हो जाती है. इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 42 मिनट पर होगा.  खरना (Kharna)- छठ पूजा का दूसरा दिन होता है खरना. खरना को लोहंडा भी कहा जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं. शाम के समय व्रती मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर गुड़ की खीर (रसिया) और घी से बनी रोटी तैयार करती हैं. सूर्य देव की विधिवत पूजा के बाद यही प्रसाद सबसे पहले ग्रहण किया जाता है. इस प्रसाद को खाने के बाद व्रती अगले दिन सूर्य को अर्घ्य देने तक अन्न और जल का पूर्ण रूप से त्याग करती हैं. संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)- छठ पूजा का तीसरा और महत्वपूर्ण दिन होता है संध्या अर्घ्य. इस दिन व्रती दिनभर बिना जल पिए निर्जला व्रत रखती हैं. फिर, शाम को व्रती नदी में डूबकी लगाते हुए ढलते हुए सूरज को अर्घ्य देती हैं. इस दिन सूर्य अस्त शाम 5 बजकर 40 मिनट पर होगा. ऊषा अर्घ्य (Usha Arghya)- इस पूजा का चौथा और आखिरी दिन होता है ऊषा अर्घ्य. इस दिन सभी व्रती और भक्त नदी में डूबकी लगाते हुए उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा. अर्घ्य देने के बाद, 36 घंटे का व्रत प्रसाद और जल ग्रहण करके खोला जाता है, जिसे पारण कहा जाता है. छठ पूजा महत्व  छठ पूजा सूर्य देव और छठी मईया की आराधना का पर्व है, जिसे शुद्धता, आस्था और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन व्रती पूरी निष्ठा और संयम के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन में सुख, समृद्धि और संतानों के कल्याण की कामना करते हैं. यह पर्व प्रकृति, जल और सूर्य की उपासना से जुड़ा है, जो मानव जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता के महत्व को दर्शाता है.

कब है अक्षय नवमी — 30 या 31 अक्टूबर? जानें पूर्ण पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है. इस महीने में मनाए जाने वाले पर्वों में से एक है अक्षय नवमी, जिसे आंवला नवमी के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य या दान-पुण्य कभी खत्म नहीं होता और इसका फल ‘अक्षय’ यानी अनंत काल तक बना रहता है. इस साल यह शुभ तिथि 30 या 31 अक्टूबर को लेकर असमंजस है. आइए जानते हैं कि 2025 में अक्षय नवमी कब है, इसकी सही पूजा विधि क्या है और इसका क्या महत्व है. अक्षय नवमी 2025: सही तारीख और शुभ मुहूर्त     पंचांग के अनुसार, अक्षय नवमी हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है.     कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि प्रारंभ 30 अक्टूबर 2025, सुबह 08 बजकर 27 मिनट से.     कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि समाप्त 31 अक्टूबर 2025, सुबह 10 बजकर 03 मिनट तक. उदयातिथि के अनुसार चूंकि नवमी तिथि का सूर्योदय 31 अक्टूबर को हो रहा है और इस दिन पूजा के लिए पर्याप्त समय (सुबह 10 बजकर 03 मिनट तक) मिल रहा है, इसलिए उदयातिथि के नियमानुसार 31 अक्टूबर 2025 को अक्षय नवमी मनाई जाएगी. आंवले के पेड़ की पूजा आंवले के पेड़ के तने को जल से सींचें. पेड़ के तने के चारों ओर कच्चा सूत (कलावा) लपेटें. फल, फूल, धूप, दीप, रोली, चंदन आदि से पूजा करें. आरती करें और 108 बार परिक्रमा करें. पूजा के बाद पेड़ के नीचे बैठकर अपनी मनोकामनाएं कहें. इस दिन सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न, सोना, चांदी या फल-सब्जियों का दान करना चाहिए. दान करने से पुण्य ‘अक्षय’ हो जाता है. पूजा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराएं और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें. माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. जो लोग व्रत करते हैं, उन्हें दिन भर व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए और शाम को आंवले के पेड़ की पूजा के बाद ही फलहार करना चाहिए. अक्षय नवमी का लाभ इस दिन किए गए दान-पुण्य से जीवनभर सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इस दिन व्रत रखने से संतान की उन्नति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अक्षय नवमी का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय नवमी का महत्व अक्षय तृतीया के समान ही माना जाता है. इस दिन से ही द्वापर युग का आरंभ हुआ था. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. अक्षय पुण्य: इस दिन किए गए स्नान, दान, तर्पण, पूजा और सेवा कार्यों का पुण्य कभी खत्म नहीं होता और जन्म-जन्मांतर तक व्यक्ति के साथ रहता है. आंवले के पेड़ की पूजा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने सृष्टि को आंवले के पेड़ के रूप में स्थापित किया था. यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में निवास करते हैं. इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे हर कार्य में सफलता मिलती है. रोग मुक्ति: आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से व्यक्ति को रोग-दोष से मुक्ति मिलती है और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है. मां लक्ष्मी का आशीर्वाद: यह नवमी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है.

24 अक्टूबर 2025 राशिफल: मकर राशि के लिए भाग्यशाली दिन, देखें आपकी राशि का फल

मेष आज के दिन बात-चीत में भाग लें और अपनी पर्सनालिटी को सामने लाएं। जल्दबाजी में डीसीजन लेने से बचें और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए तैयार रहें। हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखें। वृषभ आज के दिन चीजों के कंट्रोल से बाहर जाने से पहले ही प्यार से जुड़ी हर समस्या को सॉल्व करें। आधिकारिक चुनौतियों के बावजूद, आप पेशेवर रूप से सफल होंगे। वित्तीय मामलों पर नजर रखें। मिथुन आज के दिन किसी भी नकारात्मक विचार को त्याग दें और सोल्यूशन की मानसिकता के साथ अपना पक्ष रखें। आपके लिए परीक्षाओं का दिन हो सकता है। अपने शब्दों का प्रयोग सावधानी से और शांत एवं क्लियर लहजे में करें। कर्क आज के दिन नया प्यार दिन का मुख्य आकर्षण है। फीलिंग्स को शेयर करने के लिए प्रेमी के साथ अधिक वक्त बिताएं। नई जिम्मेदारियां कार्यालय में आपके दरवाजे पर दस्तक देंगी। सिंह आज के दिन आपकी पेशेवर कमिटमेंट आपको काम पर चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। धन और स्वास्थ्य दोनों ही आपके लिए एकदम सही और लाभकारी साबित होंगे। तनाव कम लें। कन्या आज के दिन पॉजिटिव नोट पर प्यार से संबंधित मुद्दों का ध्यान रखें। आपका आधिकारिक प्रदर्शन शानदार होगा और इससे आपके करियर में अधिक अवसरों को बढ़ने का रास्ता मिलेगा। तुला आज के दिन बिजनेस करने वाले नए व्यावसायिक आइडिया को लॉन्च कर सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ वित्तीय स्टेबिलिटी भी आपके पक्ष में रहेगी। सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्यार से संबंधित समस्याओं को तुरंत सॉल्व करें। वृश्चिक आज के दिन आर्थिक रूप से आप आज अच्छे हैं। कोई बड़ी बीमारी आपको परेशान नहीं करेगी। जब प्यार से संबंधित मुद्दों की बात आती है तो सकारात्मक रहें। पेशेवर जीवन को लगन से संभालें। धनु आज के दिन अपने रिश्ते में ईमानदार रहें और इससे आपको खुशी मिलेगी। व्यावसायिक रूप से आप सफलता का स्वाद लेंगे। मामूली मौद्रिक मुद्दे हो सकते हैं। मकर आज के दिन आप व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों जीवन में सफलता को गले लगाएं। एक समृद्ध दिन होता है, जब आप महत्वपूर्ण निवेश निर्णय लेते हैं। आपका स्वास्थ्य भी सकारात्मक रहेगा। कुंभ आज के दिन समृद्धि आपके पास आएगी। स्वास्थ्य सामान्य रहने वाला है। कार्यालय में आपका प्रदर्शन नए पदों को प्राप्त करने में मदद करेगा। आज प्रमुख निवेशों के लिए दिन अच्छा है लेकिन अपने स्वास्थ्य के बारे में सावधान रहें। मीन आज के दिन पैसों को सही तरीके से मैनेज किया जाए। आज स्वास्थ्य भी अच्छा है। नौकरी खोजने के विकल्प खुले रखें, क्योंकि हो सकता है कि आपको कुछ बेहतर पाने का मौका मिले।

दीपक कहाँ जलाएँ? वास्तु के हिसाब से सही जगह जानें और पाएँ सकारात्मक ऊर्जा

दीपक (दीया) को घर में जलाना न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुख-शांति लाने का एक सशक्त उपाय है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दीपक जलाना सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने का एक शक्तिशाली उपाय है। सही दिशा, सही समय और सही प्रकार का दीपक जलाकर आप अपने घर और परिवार को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रख सकते हैं। दीपक और सकारात्मक ऊर्जा वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि दीपक घर में सकारात्मक ऊर्जा (प्राण ऊर्जा) का संचार करता है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार या पूजा स्थान में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा, रोग और तनाव दूर होते हैं। दीपक की लौ सकारात्मक कंपन पैदा करती है, जिससे परिवार में खुशहाली और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। घर में दीपक जलाने का सही स्थान उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु अनुसार, घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। यह धन, सफलता और उन्नति को आकर्षित करता है। पूजा स्थान: मंदिर या पूजा स्थल में दीपक जलाना सर्वोत्तम माना गया है। मुख्य द्वार के पास: घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। दीपक के प्रकार और उनका महत्व तिल का दीपक: समृद्धि और आर्थिक स्थिरता लाता है। घी का दीपक: स्वास्थ्य, मानसिक शांति और परिवार में सौहार्द बढ़ाता है। मिट्टी का दीपक: साधारण घरों में शुभता और सकारात्मक वातावरण के लिए उत्तम। दीपक जलाने का समय सुबह और संध्या: घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक सुबह और संध्या के समय जलाना शुभ होता है। त्योहार और व्रत: देव दिवाली, कार्तिक पूर्णिमा या किसी भी धार्मिक अवसर पर दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। वास्तु और आध्यात्मिक लाभ घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य बढ़ता है। परिवार में सकारात्मक संबंध और मन की शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।

जिनके पास होती हैं ये 5 आदतें, उनसे टकराना आसान नहीं होता

दुनिया में हर इंसान की अपनी अलग पहचान होती है। लेकिन इनमें से कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों पर अपना कुछ खास इंप्रेशन छोड़ जाते हैं। उनका व्यक्तित्व ऐसा होता है जिससे लोग ना सिर्फ प्रभावित होते हैं, बल्कि उनसे पंगा लेने में भी कतराते हैं। दरअसल ऐसे इंसान के अंदर होती हैं कुछ ऐसी अनोखी खूबियाँ जो उन्हें बाकी सबसे अलग बनाती हैं। ये गुण ना केवल उन्हें आत्मविश्वासी बनाते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को इतना दमदार बना देते है कि लोग उन्हें चुनौती देने से कतराते हैं। चाहे बात मानसिक मजबूती की हो या खुद पर भरोसे की; ये खूबियाँ उन्हें एक ताकतवर इंसान के रूप में रिप्रेजेंट करती हैं। आइए जानते हैं स्ट्रॉन्ग पर्सनेलिटी वाले व्यक्तियों की इन्हीं क्वालिटीज के बारे में। जो इंसान आत्मविश्वास से भरा हो कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्वास वह गुण है जो किसी भी व्यक्ति को भीड़ में सबसे अलग बनाता है। जो लोग खुद पर भरोसा करते हैं और अपने फैसलों को लेकर कॉन्फिडेंट होते हैं, वो लोग डंके की चोट पर अपने विचारों को दूसरों के सामने रखते है। ऐसे लोगों को अपनी क्षमता पर पूरा यकीन होता है, जिससे सामने वाला खुद-ब-खुद शांत हो जाता है। जो व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा होता है, वो हमेशा राजा की तरह आगे बढ़ता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की कॉन्फिडेंस और ओवर कॉन्फिडेंस में पतले धागे सा अंतर होता है। इसलिए कॉन्फिडेंट बनें लेकिन ओवर कॉन्फिडेंट ना हों। जो व्यक्ति होता है इमोशनली स्ट्रॉन्ग एक इंप्रेसिव पर्सनालिटी बनाने के लिए इमोशनली स्ट्रॉन्ग होना बहुत जरूरी है। जो लोग भावनाओं पर काबू रखना जानते हैं, मुश्किल हालात में भी घबराने के बजाय सजगता से आगे बढ़ते हैं, गुस्से या दुख में भी संतुलन बनाए रखते हैं; उन्हें मानसिक रूप से कभी कोई भी तोड़ नहीं सकता। ऐसे लोग दूसरों के इरादों को पहचानने में भी काफी तेज होते हैं। ऐसे व्यक्तित्व वाले लोगों को उनके रास्ते से भटकाना आसान नहीं होता। जिनमें होती है सही डिसीजन लेने की कैपेबिलिटी ऐसे लोग जो हर सिचुएशन में सही डिसीजन लेने की कैपेबिलिटी रखते हैं, उनका व्यक्तित्व भी बहुत ही प्रभावशाली होता है। ऐसे लोगों को अपने लक्ष्य और रास्तों के बारे में साफ समझ होती है। इस तरह के लोग कभी जल्दबाजी में फैसले नहीं लेते, बल्कि सोच-समझकर ही हर कदम उठाते हैं। यही कारण है कि लोग इन्हें हल्के में लेने की भूल नहीं करते। इनकी रणनीतिक सोच इन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की काबिलियत देती है। जिनमें हो आत्म-संयम और अनुशासन इंपैक्टफुल पर्सनैलिटी बनाने के लिए व्यक्ति के अंदर आत्म-संयम और अनुशासन का होना बहुत जरूरी है। अनुशासित जीवन जीने वाले लोग जीवन के हर मोड़ पर नियंत्रित रहते हैं और अपनी सारी एनर्जी जीवन की सही दिशा में लगाते हैं। ये कभी जीवन के गलत रास्ते पर नहीं चलते और इनका जीवन जीने का ये पॉजिटिव तरीका ही लोगों के लिए मिसाल बन जाता है। ऐसे लोग हमेशा दूसरों के लिए आदर्श बनते है और कोई कभी भी इनका विरोध नहीं करता। जो खुद का और दूसरों का करें सम्मान यकीनन हर इंसान को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। लेकिन सम्मान पाने के लिए पहले खुद का सम्मान करना भी जरूरी है। जो लोग अपना सम्मान करते हैं और जब बात उनके आत्मसम्मान पर आती है, तो किसी के सामने भी नहीं झुकते नहीं, किसी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते हैं; ऐसी पर्सनैलिटी के इंसान से भी जल्दी कोई पंगा नहीं लेता है।  

छठ पूजा में पूजित छठी मैया: संतानों की सुख-समृद्धि की देवी की कथा

लोक आस्था का महापर्व ‘छठ पूजा’ जल्द ही शुरू होने वाला है. यह चार दिनों का त्योहार विशेष रूप से सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है. यह पर्व संतान के स्वास्थ्य, सफलता और लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिनकी पूजा इस महापर्व में की जाती है, वह छठी मैया कौन हैं और संतान की रक्षा करने वाली इस देवी का महत्व क्या है? आइए जानते हैं. कौन हैं छठी मैया? छठी मैया को देवी षष्ठी कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, ये भगवान सूर्यदेव की बहन हैं और बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुरक्षा की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं. छठी मैया का नाम षष्ठी इसलिए पड़ा क्योंकि इनकी पूजा शिशु जन्म के छठे दिन की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तब उन्होंने संतानों की रक्षा और वृद्धि के लिए देवी षष्ठी को सृजित किया. तभी से माता षष्ठी को हर नवजात की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाने लगा. छठ पूजा और छठी मैया का संबंध छठ पूजा में सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की भी आराधना की जाती है. व्रती महिलाएं उपवास रखकर जल, फल और अर्घ्य अर्पित करती हैं. उनका मानना है कि छठी मैया की कृपा से संतानें निरोगी, दीर्घायु और भाग्यशाली बनती हैं. इस पर्व के दौरान सूर्य की ऊर्जा और प्रकृति के तत्वों की शुद्धता का संगम होता है, जो जीवन को नवचेतना देता है. छठ पूजा के चार पवित्र दिन     नहाय-खाय (25 अक्टूबर) व्रती सबसे पहले स्नान कर घर की शुद्धि करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं.     खरना (26 अक्टूबर) दिनभर उपवास रखकर शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर छठी मैया को अर्पित किया जाता है.     संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर) व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना करती हैं.     उषा अर्घ्य (28 अक्टूबर) अंतिम दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का समापन होता है.  

काम पूरा होने से पहले भूलकर भी न बताएं ये 6 बातें, वरना बिगड़ सकता है सब कुछ

हमारी जिंदगी में ऐसा बहुत कुछ होता है, जो हम दूसरों से शेयर करना चाहते हैं। खासतौर से जिन्हें हम अपना समझते हैं। लेकिन कई बार आपने नोटिस किया होगा कि आपका काम सिर्फ बातों तक ही रह जाता है, वो कभी पूरा हो ही नहीं पाता। इसके पीछे एक वजह है लोगों की बुरी नजर लगना। जब आप अपनी हर बात लोगों से शेयर कर देते हैं, तो जाहिर है लोगों के मन में जलन और नेगेटिविटी की भावना पैदा होती है। ऐसे में कई बार इविल आई यानी बुरी नजर लगने की वजह से आपका काम ही ठप हो जाता है। तो आइए जानते हैं वो कौन से बातें हैं, जो आपको लोगों से बिल्कुल शेयर नहीं करनी हैं। खासतौर से जबतक वो पूरी ना हो जाएं। अपनी सक्सेस को प्राइवेट रखें अपनी सक्सेस के बारे में ज्यादा लोगों के आगे गुणगान करने से बचना चाहिए। ऐसा कर के आप जाने-अनजाने लोगों की नेगेटिविटी, जलन की भावना अपनी तरफ अट्रैक्ट करते हैं। किसी चीज की तैयारी भी कर रहे हैं, तो पहले से ढिंढोरा ना पीटें। मेहनत में लगे रहें, काम जब होगा तब दुनिया खुद जान जाएगी। अपनी लव लाइफ अपनी लव लाइफ को जितना प्राइवेट हो सके रखना चाहिए। आजकल लोग रिलेशनशिप शुरू होते ही सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट डालना शुरू कर देते हैं। रिजल्ट होता है, कुछ दिनों बाद ही ब्रेकअप। इसलिए बेहतर है कि उसे प्राइवेट रखें, जब तक वो परमानेंट ना हो जाए। अपनी प्लानिंग और स्ट्रैटजी आप अपने करियर, लाइफ या किसी भी जरूरी चीज में आगे क्या प्लान कर रहे हैं, ये भी हर किसी से बताना जरूरी नहीं है। ऐसा करने से भी आप लोगों की जजमेंट और बुरी नजर के शिकार बन सकते हैं। अपने प्लान खुद तक सीमित रखें और उनपर काम करें। जब वो हो जाएंगे तो लोग खुद-ब-खुद देख ही लेंगे। अपनी इनकम और उसके सोर्स हर किसी के सामने अपनी इनकम के बारे में बताने से भी परहेज करें। कई लोग बढ़-चढ़कर बताते हैं कि वो कितना पैसा कमा रहे हैं, कहां-कहां से कितना पैसा आ रहा है। ये सब आपके जीवन में लोगों की बुरी नजर अट्रैक्ट करता है। अपनी खुशियां सोशल मीडिया पर हर कोई आजकल अपने स्पेशल मूमेंट्स साझा करने में लगा हुआ रहता है। कुछ हद तक ये ठीक है लेकिन लोगों के साथ हर स्पेशल मूमेंट शेयर करने से बचें। कुछ खुशियां आपकी पर्सनल होती हैं, जिन्हें हर किसी के साथ शेयर करना ठीक नहीं है। लोगों की जलन और नेगेटिविटी को फालतू में भला अपनी लाइफ में क्यों अट्रैक्ट करना। अपने ट्रैवल प्लान कोई ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो पूरी दुनिया को बताने की जरूरत नहीं है। आप जाएंगे तो वो देख ही लेंगे। बहुत से लोग यही करते हैं, फिर कहीं जा ही नहीं पाते। जब आप पहले ही बखान कर देते हैं, तो लोगों के दस ओपिनियन सुनते हैं, जजमेंट सुनते हैं और जेलेसी भी अट्रैक्ट करते हैं।

वास्तु शास्त्र की चेतावनी: शाम को इन वस्तुओं का उधार देना बढ़ा सकता है आर्थिक और पारिवारिक संकट

वास्तु शास्त्र में ऐसे कई नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखने पर व्यक्ति को जीवन में अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको वास्तु के अनुसार,  किन चीजों को शाम के समय किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए, चाहे वह आपका कितना ही करीबी क्यों न हो।  चलिए जानते हैं इस बारे में। इन चीजों का न करें दान वास्तु शास्त्र में शाम के नियमों के अनुसार, सूर्योदय के बाद आपको किसी सफेद वस्तु जैसे नमक, दही, चीनी आदि किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए। शाम के समय दही का दान करने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति कमजोर हो सकती है। जिससे घर में सुख और वैभव की कमी हो सकती है। वहीं अगर शाम के समय किसी को नमक दिया जाए, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा असर शाम के समय आपको किसी को हल्दी भी दान के रूप में नहीं देनी चाहिए। इससे कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है और आपकी सुख-समृद्धि पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही पूजनीय माना गया है। ऐसे में अगर आप शाम के समय किसी को तुलसी के पौधे का दान करते हैं, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मां लक्ष्मी हो सकती है नाराज वास्तु शास्त्र में शाम के समय किसी को पैसे उधार देना शुभ नहीं माना गया और न ही इस समय में पैसों से जुड़ा लेन-देन करना शुभ माना जाता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ऐसे में अगर आप इस समय पैसों से जुड़ा लेन-देन या दान करते हैं, तो लक्ष्मी जी घर से जा सकती हैं। जिससे आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ सकती हैं परेशानियां कभी-कभी जरूरत पड़ने पर हम शाम के समय किसी से सुई आदि मांग लेते हैं या फिर किसी और को जरूरत पड़ने पर हम भी शाम के समय सुई आदि दे देते हैं। लेकिन वास्त शास्त्र की मानें, तो ऐसा करने से आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  

इस छठ पर खास ज्योतिषीय संयोग, सूर्य देव देंगे भरपूर आशीर्वाद

दिवाली खत्‍म ही छठ का इंतजार शुरू हो जाता है. छठ महापर्व कार्तिक शुक्‍ल की षष्‍ठी तिथि को मनाते हैं, इस दिन सूर्य देव को अर्घ्‍य दिया जाता है. लेकिन यह पर्व कुल 4 दिनों तक चलता है. नहाय खाय से शुरुआत के बाद खरना और फिर ढलते और उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ-साथ यह पर्व समाप्‍त होता है. इन 4 दिनों में बिहार राज्‍य में छठ की जबरदस्‍त धूम देखने को मिलती है. कई दिन पहले से छठ पर्व मनाने के लिए तैयारियां की जाती हैं. इसके अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ नेपाल में भी छठ मनाया जाता है. इस साल छठ कब है और इस दौरान कौन-कौनसे शुभ योग बन रहे हैं, आइए जानते हैं.  साल 2025 में छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर से हो रही है और 28 अक्‍टूबर को समापन होगा. सबसे पहले 25 अक्टूबर को नहाय-खाय होगा, इसके अगले दिन 26 अक्टूबर को खरना होगा. फिर तीसरे दिन 27 अक्टूबर को अस्ताचलगामी यानी डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. फिर 28 अक्‍टूबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाएगा. छठ में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करने का विधान है.  छठ पर शुभ योग  इस साल छठ पर्व पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिसमें रवि योग का बनना अत्‍यंत शुभफलदायी माना जा रहा है. ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी छठ पूजा पर रवि योग और सुकर्मा योग बन रहे हैं. सूर्य का ही एक नाम रवि योग है. ऐसे में सूर्य की आराधना के पर्व छठ पर रवि योग का बनना व्रतियों को पूजा का कई गुना ज्‍यादा फल देगा.  27 अक्‍टूबर को रवि योग का संयोग देर रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. वहीं सुकर्मा योग का संयोग पूरी रात रहेगा. व्रती रवि योग में सूर्य देव को जल का अर्घ्य देंगे. इस योग में सूर्य देव की उपासना करने से आरोग्यता का वरदान मिलेगा. साथ ही सुख और समृद्धि में बढ़ती है. इसके अलावा छठ पूजा के दिन कौलव और तैतिल करण का भी संयोग निर्मित हो रहा है. इन योगों को भी शुभ माना गया है.