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क्यों कहते हैं खाटू श्याम को ‘हारे का सहारा’? जानें उनके पूजन की दिव्य कथा

   भारत भूमि आस्था और श्रद्धा की धरोहर है. यहां प्रत्येक देवता की कथा किसी न किसी प्रेरणा से जुड़ी होती है. ऐसी ही एक अद्भुत कथा है खाटू श्याम बाबा की जिन्हें हारे का सहारा कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से श्याम बाबा का नाम लेता है, उसकी नैया पार लगती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाटू श्याम जी वास्तव में कौन हैं और क्यों भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें खुद से पहले पूजे जाने का वरदान दिया था? इस साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 1 नवंबर को खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा, तो आइए इस खास मौके पर जानते हैं बर्बरीक से खाटू श्याम बनने की कहानी. कौन थे वीर बर्बरीक? खाटू श्याम जी वास्तव में महाभारत काल के वीर बर्बरीक थे. उनका संबंध पांडव कुल से था.वे भीम के पौत्र थे. और उनके पिता घटोत्कच और माता का नाम मोरवी था.बर्बरीक बचपन से ही अत्यंत बलशाली और तेजस्वी थे. उन्हें देवी चंडिका से तीन दिव्य और अचूक बाण प्राप्त हुए थे. ये बाण पलभर में तीनों लोकों को नष्ट करने की क्षमता रखते थे और लक्ष्य को भेद कर वापस उनके पास आ जाते थे. इसी कारण उन्हें ‘तीन बाण धारी’ भी कहा जाता है. शीश दान की महान गाथा जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, तब बर्बरीक ने भी इसमें शामिल होने का निर्णय लिया. युद्ध में जाने से पहले उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वह हमेशा ‘हारे हुए पक्ष’ का साथ देंगे.भगवान श्रीकृष्ण यह जानते थे कि बर्बरीक की शक्ति इतनी अपार है कि उनके तीन बाणों के बल पर, यदि वह हारे हुए पक्ष (कौरवों) का साथ देंगे, तो युद्ध का परिणाम बदल जाएगा. युद्ध में पांडवों की जीत सुनिश्चित करने के लिए श्रीकृष्ण ने एक योजना बनाई. ब्राह्मण रूप में श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण किया और बर्बरीक को रोककर उनसे दान मांगा. बर्बरीक ने वचन दिया कि वे जो भी मांगेंगे, वह अवश्य देंगे. तब श्रीकृष्ण ने उनसे दक्षिणा के रूप में उनका शीश (सिर) मांग लिया. बर्बरीक ने बिना किसी संकोच या मोह के, अपने वचन का पालन करते हुए, अपना सिर काटकर श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया. इस महान त्याग और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया. श्रीकृष्ण ने क्यों दिया ‘श्याम’ नाम से पूजे जाने का वरदान? वीर बर्बरीक के इस अद्वितीय बलिदान से भगवान श्रीकृष्ण बहुत ही प्रसन्न हुए. साथ ही, बर्बरीक ने अपनी इच्छा व्यक्त की थी कि वह अपनी आंखों से महाभारत के पूरे युद्ध को देखना चाहते हैं. बर्बरीक ने अपने वचन और धर्म की रक्षा के लिए बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया. उनके इस महान त्याग और श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति से प्रभु भावुक हो गए. श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग के आगमन पर वह ‘श्याम’ (जो कि श्रीकृष्ण का ही एक नाम है) के नाम से जाने और पूजे जाएंगे.श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि जो भी भक्त उनके नाम का स्मरण करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे और उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी. इसके साथ ही, उन्हें यह आशीष भी दिया कि वह हमेशा हारे हुए और निराश भक्तों को सहारा देंगे.

भाग्य बदल देंगे ये पौधे! शनि-राहु के दोष होंगे दूर

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का विशेष महत्व है। इन नौ ग्रहों में शनि, राहु और केतु को क्रूर और अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। जब इन ग्रहों का प्रभाव किसी व्यक्ति की कुंडली में प्रतिकूल होता है, तो जीवन में अनेक बाधाएं, मानसिक तनाव, बीमारियां, आर्थिक संकट और पारिवारिक क्लेश उत्पन्न होते हैं। हालांकि इन दुष्प्रभावों को कम करने के लिए वैदिक उपाय मौजूद हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत सरल, प्राकृतिक और प्रभावशाली उपाय है नीम का पौधा घर के बाहर लगाना। शनि ग्रह और नीम का संबंध: शनि ग्रह न्याय का देवता है और कर्मफल देने वाला ग्रह है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में विलंब, संघर्ष और परीक्षा लाता है। जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तब व्यक्ति असमंजस, बीमारी, आर्थिक तंगी और सामाजिक कलह का शिकार हो सकता है। नीम का पौधा शनि की क्रूरता को शांत करता है। नीम का उपयोग औषधियों में होने के कारण यह स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, जो शनि से जुड़े रोगों जैसे गठिया, त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द आदि को कम करता है। शनिवार को नीम के नीचे दीपक जलाने और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करने से शनि की शांति मानी जाती है। राहु ग्रह और नीम का प्रभाव: राहु एक छाया ग्रह है और इसका संबंध भ्रम, आकस्मिक घटनाओं, मानसिक अशांति और नकारात्मक विचारों से है। नीम की पत्तियां और वातावरण नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की क्षमता रखते हैं। राहु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नीम के पास प्रतिदिन कुछ समय बिताना लाभकारी होता है। नीम राहु के कारण उत्पन्न मनोवैज्ञानिक विकार जैसे चिंता, भय और भ्रम को शांत करता है। केतु ग्रह और नीम का संबंध: केतु भी राहु की तरह एक छाया ग्रह है और यह आत्मा, वैराग्य और अप्रत्याशित हानियों से जुड़ा होता है। जब केतु अशुभ होता है, तो जीवन में आध्यात्मिक भटकाव, रोग और निराशा देखी जाती है।  नीम के समीप ध्यान या साधना करने से केतु के प्रभाव से उपजे मानसिक विषाद में राहत मिलती है। नीम घर के वातावरण को शुद्ध करता है, जिससे मानसिक शांति आती है और केतु के प्रभाव से बचाव होता है। नीम का पौधा कहां और कैसे लगाएं ? नीम का पौधा घर के मुख्य द्वार के पास, दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना श्रेष्ठ माना गया है। शनिवार के दिन या अमावस्या तिथि को नीम का पौधा लगाना शुभ होता है। नीम के पौधे के पास कच्चा दूध और जल अर्पित करें, सरसों का तेल का दीपक जलाएं और ॐ नमः भगवते वासुदेवाय या ॐ ह्रीं कें राहवे नमः मंत्र का जाप करें।

जानिए वास्तु शास्त्र में बेड के पास पानी की बोतल न रखने की वजह

वास्तु शास्त्र में कई ऐसे नियम हैं जिन्हें अपनाने से जिंदगी की मुश्किलें थोड़ी कम हो सकती हैं। रोजमर्रा की भागदौड़ भरी लाइफ में हर एक चीज को परफेक्ट तरीके से करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन कुछ छोटी-छोटी चीजों को अमल में लाकर अपनी चीजों को ठीक किया जा सकता है। जहां कई लोग इन नियमों को जानते हैं और उसे अपनी रोजाना की जिंदगी में अपनाते भी हैं। बता दें कि ये नियम कठिन नहीं होते हैं। कुछ ऐसी चीजें हैं जो हम जाने-अनजाने में करते रहते हैं लेकिन उसका सीधा ताल्लुक घर के वास्तु से जुड़ा होता है। आम तौर पर आपने देखा होगा कि लोग सोते समय पानी की बोतल अपने साथ लेकर सोते हैं। उसे या तो बगल के ड्रॉवर पर रख दिया जाता है और या तो नीचे जमीन पर ताकि बीच रात में जरूरत पड़ने पर पानी पिया जा सकते लेकिन क्या ये सही तरीका है? जानते हैं कि आखिर ऐसा करना सही है या नहीं? लगता है चंद्र दोष शास्त्र की मानें तो ऐसा करना सही नहीं है। वैसे देखा जाए तो आम तौर पर लोगों की आदत है कि सोने से पहले बेड के पास पानी रखने की लेकिन ये सही तरीका नहीं है। शास्त्र के हिसाब से सिर के नीचे या आसपास पानी रखने से चंद्र दोष लगता है। इसके चलते मानसिक तनाव और नींद ना आने जैसी समस्या होने लगती है। साथ ही जिंदगी में धीरे-धीरे नकारात्मकता जगह बनाने लगती है। चंद्र दोष के चलते घर में कलेश होने शुरू हो जाते हैं। इस वजह से बेड के आसपास कभी भी पानी नहीं रखना चाहिए। ऐसे खत्म करें चंद्र दोष अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है तो आप इसे आसान तरीके से दूर भी कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से चंद्र दोष के प्रभाव को कम करने के लिए हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। उन्हें गाय का दूध अर्पित करने से फायदे मिलेंगे। साथ ही इस दिन सफेद रंग की चीजों का दान करने से भी लाभ मिलेंगे। इस दिन चीनी, चावल, सफेद मिठाई या फिर सफेद कपड़ों को दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धीरे-धीरे चंद्रदोष खत्म होता है।  

1 नवम्बर 2025 राशिफल: मकर राशि वालों को मिलेगा भाग्य का साथ, बाकी राशियों पर कैसा रहेगा असर

मेष राशि- आज दिन की शुरुआत ऊर्जा से भरपूर रहेगी। कुछ पुराने काम आज पूरे होंगे और राहत मिलेगी। बस जल्दबाजी में काम न करें, वरना ग़लती हो सकती है। किसी करीबी से दिल की बात कहने का मौका मिलेगा। पैसे को लेकर राहत की खबर भी मिल सकती है। शाम को मन शांति चाहेगा, तो खुद को थोड़ा वक्त दें। वृषभ राशि- आज काम में फोकस बनाए रखना जरूरी है। छोटे-छोटे कदम भी बड़ी सफलता दिला सकते हैं। परिवार में माहौल खुशनुमा रहेगा, लेकिन रिश्तों में इगो न आने दें। अगर मन बेचैन है तो थोड़ी देर टहल आएं- सब ठीक लगेगा। धन के मामले स्थिर हैं, बस अनावश्यक खर्च से बचें। मिथुन राशि- आज दिमाग तेज चलेगा और शब्दों में जादू रहेगा। लोगों को समझाने या अपने पक्ष में करने का दिन है। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है जो दिल को सुकून देगी। काम के दबाव से तनाव हो सकता है, लेकिन थोड़ी सी योजना सब संभाल लेगी। शाम हंसी-मजाक में बीतेगी। कर्क राशि- आज भावनाएं ज्यादा हावी रह सकती हैं। किसी बात को दिल पर न लें। ऑफिस या घर में छोटी बात पर बहस से बचें। अगर किसी पुराने रिश्ते से जुड़ी बात सामने आए तो धैर्य रखें। हर जवाब आज नहीं मिलता। शाम को परिवार के साथ समय बिताना मन को सुकून देगा। सिंह राशि- आत्मविश्वास आज आपका सबसे बड़ा हथियार रहेगा। जो ठान लोगे, वो करके दिखाओगे। काम में सफलता मिलेगी और तारीफ भी। दोस्तों से सहयोग मिलेगा। प्रेम जीवन में मिठास बढ़ेगी। बस ध्यान रखें- ओवरकॉन्फिडेंस नुकसान कर सकता है। शाम को किसी शुभ खबर की उम्मीद है। कन्या राशि- आज जिम्मेदारियां थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन आप संभाल लोगे। किसी प्रोजेक्ट या परिवार से जुड़ा बड़ा निर्णय ले सकते हैं। सहयोगियों से तालमेल बढ़ेगा। धन की स्थिति में सुधार होगा। शाम तक मन हल्का रहेगा। शरीर पर थकान हावी हो सकती है।आराम जरूर करें। तुला राशि- आज दिन व्यवस्थित काम करने का है। योजनाएं बनाएं और उसी पर टिके रहें। ऑफिस में मेहनत रंग लाएगी। घर में कोई छोटी खुशखबरी मिल सकती है। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। पेट या पाचन पर ध्यान दें। किसी बुजुर्ग की सलाह आज काम आएगी। वृश्चिक राशि- आज रचनात्मकता और नई सोच के साथ कार्य करेंगे। किसी दोस्त या सहकर्मी से प्रेरणा मिलेगी। काम के लिए दिन अच्छा है, लेकिन आलस्य से बचना होगा। मन में भावनाएं गहरी रहेंगी। लेखन, संगीत या ध्यान में मन लग सकता है। प्रेम जीवन में कोई नई शुरुआत संभव है। धनु राशि- आज संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है- चाहे काम में हो या रिश्तों में। किसी करीबी से मुलाकात मन को खुशी देगी। पैसों के लेन-देन में सावधानी जरूरी है। प्रेम जीवन में किसी छोटी बात पर नाराजगी हो सकती है, लेकिन प्यार से बात कर लोगे तो सब ठीक रहेगा। मकर राशि- आज अपने भीतर की ऊर्जा को सही दिशा दें। किसी महत्वपूर्ण निर्णय का समय है- दिमाग और दिल दोनों से सोचें। पैसों को लेकर कोई राहत मिल सकती है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन मानसिक थकान महसूस होगी। ध्यान या शांत संगीत मदद करेगा। किसी दोस्त से बातचीत राहत देगी। कुंभ राशि- आज का दिन उम्मीदों भरा रहेगा। कोई पुराना काम जो अटका था, अब गति पकड़ सकता है। करियर में नए अवसर दिखेंगे। यात्रा के योग भी हैं। प्रेम संबंधों में उत्साह बढ़ेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। बस खर्च सोच-समझकर करें, वरना बजट गड़बड़ा सकता है। मीन राशि- आज दिल और दिमाग दोनों में थोड़ा खींचतान रहेगा। कोई पुरानी बात मन को परेशान कर सकती है, लेकिन शाम तक सब ठीक हो जाएगा। करियर में सुधार के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। किसी करीबी की सलाह अमूल्य साबित हो सकती है। आज शांति से काम लें। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।

घर के बेडरूम की लाइट बदलेगी रिश्तों की मिठास, ये रंग करेगा कमाल

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारे जीवन की ऊर्जा और मनोभावों को प्रभावित करता है। खासतौर पर बेडरूम, जो पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और सुकून से जुड़ा होता है। अगर आप अपने रिश्ते में प्यार और सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं, तो बेडरूम की लाइट का रंग बेहद महत्वपूर्ण होता है। सही रंग की रोशनी न सिर्फ माहौल को सुखद बनाती है बल्कि जीवनसाथी के बीच अपनापन और मधुरता भी बढ़ाती है। तो आइए जानते हैं कि कौन-सी लाइट आपके रिश्ते में प्रेम का जादू भर सकती है। क्यों फायदेमंद है इस रंग की लाइट गुलाबी रंग लाइट गुलाबी रंग की रोशनी प्रेम, कोमलता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है। यह माहौल को रोमांटिक और सुकून भरा बनाती है। वॉर्म येलो लाइट वॉर्म येलो लाइट घर में गर्मजोशी और स्थिरता लाती है। इससे मन शांत रहता है और रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। बहुत ज्यादा चमकीली या सफेद लाइट से बचना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक तनाव और बेचैनी पैदा कर सकती है। वास्तु के अनुसार सही दिशा बेडरूम का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा स्थायित्व और भरोसे का प्रतीक है, जो रिश्ते को मजबूत बनाती है।

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, भगवान शिव देंगे हर संकट से मुक्ति

  देवउठनी एकादशी बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से उठते हैं और फिर से सृष्टि का कार्यभार संभाल लेते हैं. भगवान विष्णु के उठने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह समेत तमाम मांगलिक काम फिर से शुरू कर दिए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है. प्रभु की कृपा से जीवन में सुख-शांति रहती है. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की अराधना के साथ-साथ शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से कष्टों से छुटकारा मिलता है. जीवन में खुशहाली आती है. देवउठनी एकादशी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत 01 नवंबर को रखा जाएगा. देवउठनी एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें     देवउठनी के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से मानसिक तनाव की समस्या से मुक्ति मिलती है. जीवन में खुख-शांति रहती है.     इस दिन शिवलिंग पर दही और शहद चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर शमी के फूल चढ़ाने चाहिए. ऐसा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं.     इस दिन शिवलिंग पर चावल चढ़ाने चाहिए. साथ ही शिव मंत्रों का जप करना चाहिए. ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.  

कल है देवउठनी एकादशी: जानें आपकी राशि के लिए कौन सा उपाय खोलेगा भाग्य के द्वार!

सनातन धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है. इसे देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है. चार महीने की योगनिद्रा के बाद, इस दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जागृत होते हैं और इसी के साथ सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि फिर से शुरू हो जाते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी, तुलसी माता और भगवान शालिग्राम की पूजा का विशेष महत्व होता है. यह दिन अक्षय पुण्य कमाने और अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. पंचांग के अनुसार, साल 2025 में देवउठनी एकादशी का व्रत 1 नवंबर, शनिवार को रखा जाएगा. आइए जानते हैं साल के इस पावन दिन राशि अनुसार कौन- कौन से उपाय करने चहिए. देवउठनी एकादशी पर राशि अनुसार करें ये विशेष उपाय! मान्यता के अनुसार, इस पावन अवसर पर अपनी राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय करने से भगवान श्रीहरि विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. मेष शाम को तुलसी जी को लाल फूल और लाल चंदन अर्पित करें. भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 11 बार जाप करें. वृषभ तुलसी माता को दूध-चावल की खीर का भोग लगाएं. शालिग्राम भगवान को दूध से स्नान कराएं. शाम को दीपक जलाकर ‘ॐ ह्रीं लक्ष्म्यै नमः’ का जाप करें. मिथुन हरी मूंग दाल का दान करें. माता तुलसी का पूजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. साथ ही ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें. कर्क भगवान विष्णु का दूध से अभिषेक करें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. हल्दी की गांठें अर्पित करें. सिंह भगवान को गुड़ और गन्ने का भोग लगाएं. सूर्यदेव को जल अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. कन्या गरीब और जरूरतमंदों को हरे वस्त्र या फल दान करें. तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं. तुला मां लक्ष्मी और श्रीहरि को मिश्री और सफेद मिठाई का भोग लगाएं. तुलसी के पौधे पर लाल कलावा बांधें. वृश्चिक विष्णु मंदिर में जाकर पीले रंग के वस्त्र और फल दान करें. तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और विष्णु चालीसा का पाठ करें. धनु भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और चने की दाल अर्पित करें. ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करें. मकर भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं. पूजा में नीले रंग के आसन का प्रयोग करें. ‘ॐ महात्मने नमः और ऊँ लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जप करें. कुंभ पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. गरीबों को तिल या ऊनी वस्त्र दान करें. ‘ॐ महाकायाय नमः और ऊँ वसुधायै नमः’ मंत्र का जप करें. मीन भगवान विष्णु को केले और हल्दी अर्पित करें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. ‘ॐ निर्गुणाय नमः और ऊँ कमलायै नमः’ मंत्र का जप करें. देवउठनी एकादशी पर इन कार्यों को करना न भूलें! तुलसी विवाह: इस दिन भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह संपन्न कराया जाता है, जो कन्यादान के समान पुण्यकारी माना जाता है. देवों को जगाना: शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर श्रीहरि विष्णु और अन्य देवों को उनकी योगनिद्रा से जगाएं और उनसे शुभ कार्यों को पुनः आरंभ करने की प्रार्थना करें. दान-पुण्य: इस दिन अन्न, धन, वस्त्र, ऋतुफल (गन्ना, सिंघाड़ा आदि) का दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है और दरिद्रता दूर होती है. दीपदान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाएं. इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में वास करती हैं.

कठिन समय में काम आएंगी चाणक्य की ये 4 नीतियां, जीवन में लौटेगी समृद्धि और सौभाग्य

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं।  

इन तीन वस्तुओं का दान संध्या के समय माना जाता है अशुभ, जानें वजह

वास्तु शास्त्र में धन और संपत्ति की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए समय और अवसर का सही चयन बहुत जरूरी होता है। खासकर दान देने के समय की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि आप शाम के समय कुछ खास चीजें दान करते हैं, तो यह आपके आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। तो आइए जानते हैं कि शाम के समय कौन सी तीन चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सिक्के या छोटे पैसे का दान शाम के समय छोटे-मोटे पैसे या सिक्कों का दान करने से घर में धन की ऊर्जा कमजोर हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह आपके आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकता है। टूटे या पुराने बर्तन का दान पुराने या टूटे बर्तनों का दान करने से भी धन हानि की संभावना बढ़ सकती है। शाम के समय यह करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और संपत्ति की वृद्धि रुक सकती है। बिना जरूरत की चीजों का दान शाम के समय ऐसा दान करना जिसमें आपकी जरूरत की वस्तुएं शामिल हों या बिना योजना का दान हो, यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे न केवल संपत्ति पर असर पड़ता है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।

तुलसी और शालिग्राम का रहस्य: कैसे श्राप बना भक्तिभाव का प्रतीक?

हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी और भगवान विष्णु की कथा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना गया है. यह कथा भक्ति, निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है. तुलसी विवाह का पर्व इसी दिव्य मिलन का प्रतीक है, जब माता तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) का पुनर्मिलन होता है. यह कथा यह भी बताती है कि ईश्वर अपने भक्त के प्रेम से इतने बंधे होते हैं कि श्राप को भी आशीर्वाद बना देते हैं. तुलसी और विष्णु का यह संबंध सिखाता है कि सच्ची भक्ति और पवित्र प्रेम सभी विपरीत परिस्थितियों को मंगलमय बना देते हैं. पुराणों के अनुसार, तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था. वह दैत्यराज जलंधर की पत्नी थीं, जो भगवान विष्णु के वरदान के कारण एक अपराजित दैत्य था. जलंधर की भक्ति और पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे. जब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, तो भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए. वृंदा को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके साथ छल हुआ है, तो उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया. इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में सामने आए. वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर रूप में तो परिवर्तित हुए, किंतु उन्होंने वृंदा की भक्ति और पतिव्रता को प्रणाम करते हुए उन्हें वर दिया कि तुम धरती पर तुलसी के रूप में जन्म लोगी और मेरा शालिग्राम रूप सदा तुम्हारे साथ पूजा जाएगा. वृंदा के शरीर से ही गंडकी नदी का उद्भव हुआ जो कि नेपाल में स्थित है. जहां से आज भी शालिग्राम पत्थर प्राप्त होता हैं. इसलिए आज भी तुलसी-दल से शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है. किसका अवतार माना जाता है तुलसी का पौधा? धर्मग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है. लक्ष्मी जी जिस प्रकार सौभाग्य, समृद्धि और शुद्धता की देवी हैं, उसी प्रकार तुलसी भी सात्त्विकता और पवित्रता का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के प्रति तुलसी की अखंड भक्ति के कारण उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया. कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं लक्ष्मी जी का वास होता है. तुलसी-दल के बिना विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है. तुलसी का पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह घर में शांति, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी स्थिर करता है.