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इस दुर्गा अष्टमी पर बन रहे दो दुर्लभ संयोग, मान्यता है मिलती है खुशहाली और सफलता

हिंदू धर्म में नवरात्रि का काफी महत्व माना गया है। इसमें 9 दिनों तक माता के 9 स्वरूपों की पूजन की जाती है। नवरात्रि में महाअष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। 30 सितंबर को शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। इस दिन माता गौरी की पूजन का विशेष महत्व माना गया है। अष्टमी के दिन माता महागौरी की पूजन करने के साथ व्रत रखा जाता है। इस दिन संधि पूजन भी होती है। इस बार शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर शोभन योग सहित कई मंगलकारी योग निर्मित हो रहे हैं। इन योग में जो माता गौरी की पूजन करेगा उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। चलिए आपको इस बारे में बताते हैं। दुर्गा अष्टमी का मुहूर्त  29 सितंबर को 4:32 से शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। स्थिति का समापन 30 सितंबर शाम 6:06 पर होगा। महाष्टमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। विभिन्न संध्याकाल में पूजन का समय 5:42 से 6:30 तक का है। बन रहे कौन से योग अष्टमी तिथि पर बना रहे योग की बात करें तो इस दिन शोभन योग का निर्माण हो रहा है। यह देर रात 1:03 तक रहेगा। इसके अलावा शाम को 6:06 से शिव वास योग का निर्माण हो रहा है। यह ऐसा योग होता है जब भगवान शिव स्वयं माता पार्वती के साथ हिमालय पर वास करते हैं। इन योग में जो भी माता दुर्गा की पूजन करेगा उसे सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। ये हैं मुहूर्त इस दिन सूर्योदय का समय सुबह 6:10 और सूर्यास्त का समय शाम 6:05 है। चंद्रोदय दोपहर 1:36 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 11:51 पर है। शुभ मुहूर्त की बात करें तो 4:33 से 5:22 तक ब्रह्म मुहूर्त है। दोपहर 2:07 से 2:54 तक विजय मुहूर्त। शाम 6:05 से 6:29 तक गोधूलि मुहूर्त। रात 11:43 से 12:46 तक निशिता मुहूर्त है।

आज चमकेगा इन राशियों का भाग्य, सूर्य का आशीर्वाद लाएगा तरक्की और सम्मान

मेष राशि- आज का दिन मेष राशि वालों के लिए उम्मीदों से भरा रहेगा। सुबह से ही आपका मन नया ऊर्जा और प्रेरणा से भर उठेगा। कार्यालय या व्यावसायिक क्षेत्र में आपका काम बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ेगा। सहकर्मियों और वरिष्ठों से सहयोग मिलने की संभावना प्रबल है। सामाजिक दृष्टिकोण से आप आकर्षक और संवादात्मक बने रहेंगे, जिससे नए लोग आपके संपर्क में आएँगे। हालांकि, भावनात्मक उतार-चढ़ाव से आपको सावधान रहना होगा। कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर मन चिड़चिड़ा हो सकता है। दिन के मध्य में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति आएगी। उस समय शांत दिमाग और सोच-समझ कर लेना बेहतर रहेगा। शाम तक आपकी ऊर्जा कम हो सकती है, इसलिए जरूरत पड़े तो थोड़ा आराम करना ठीक रहेगा। वृषभ राशि- वृषभ राशि के जातक आज परिवार, संपत्ति और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखेंगे। पारिवारिक मोर्चे पर सुख-शांति देखने को मिल सकती है। माता-पिता या बुजुर्गों का आशीर्वाद एवं सहयोग मिलेगा। पुराने निवेश या बचत योजनाएँ आज लाभ देने का संकेत दिखा सकती हैं। कामकाज में अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं, जिन्हें आप संभाल लेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखना आज जरूरी है, क्योंकि किसी अनचाही टिप्पणी से विवाद हो सकता है। दिन के आखिरी हिस्से में परिवार के साथ समय बिताने से मन को शांति मिल सकती है। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों की आज हालत काफी अच्छी रहेगी। आपकी चपलता और संवाद कौशल आज बड़ी भूमिका निभाएंगे। यदि आप कहीं नए प्रोजेक्ट या काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आज उसका समय अनुकूल है। सार्वजनिक और सामाजिक क्षेत्रों में आपकी भागीदारी लाभदायक रहेगी। नौकरी या व्यवसाय दोनों ही क्षेत्र में चांस मिल सकते हैं। नए क्लाइंट, नए अवसर या बढ़ोतरी का अवसर सामने आ सकता है। मन में कभी-कभी ऊंच-नीच विचार आ सकते हैं, इसलिए खुद को केंद्रित बनाए रखना महत्वपूर्ण है। शाम में मित्रों या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इस समय आप खुशमिजाज और मिलनसार रहेंगे। कर्क राशि- कर्क राशि वालों आज थोड़ा अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। आपकी भावनाएँ आज अधिक संवेदनशील होंगी। किसी करीबी संबंध में मन-मुटाव होने की संभावना हो सकती है, इसलिए शांत रहकर संवाद करना जरूरी रहेगा। आर्थिक मोर्चे पर अनियोजना या अनपेक्षित खर्च सामने आ सकते हैं — बजट को ध्यान में रखकर ही कदम उठाएं। कार्यक्षेत्र में चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन आपकी मेहनत और सतर्कता उन्हें पार कर सकती है। आधी सी दिनचर्या में बदलाव-परिवर्तन की संभावना है। हो सकता है जहां आप पहले सहज थे, वहां आज थोड़ा संघर्ष करना पड़े। शाम को किसी स्वाभाविक या प्राकृतिक स्थल पर समय बिताना आपके मन को शांति देगा। सिंह राशि- सिंह राशि के जातक आज उज्जवल और लाभदायक संकेतों से घिरे रहेंगे। आपका आत्मविश्वास दूसरों को प्रभावित करेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियाँ मिलेंगी और आप उन्हें सफलता पूर्वक निभाएँगे। सामाजिक मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की संभावना है। धन संबंधी मामले आज मजबूत दिखते हैं। किसी निवेश या सौदा में लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य के मामले में आप अच्छे महसूस करेंगे, लेकिन अधिक थकान से सावधान रहें। काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना आज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। शाम को कुछ रचनात्मक या कला-संबंधी गतिविधि आपको संतुष्टि दे सकती है। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए आज दिन संतुलन और संयम से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आप शांत और निरंतर गति से आगे बढ़ेंगे। कठिनाई आए तो धैर्य न खोएं। छोटे–छोटे कदम धीरे लेकिन निरंतर सफलता की ओर ले जाएंगे। आर्थिक मामलों में अचानक उछाल हो सकता है, पर सावधानी पूर्वक निवेश करना लाभ दायक रहेगा। घर-परिवार में हल्की-महत्वपूर्ण खटपट हो सकती है, जिसे संवाद और समझदारी से संभाला जा सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, पर अधिक थकान न लें। शाम के समय कुछ समय अपने प्रियजनों को दें।संवाद और आत्मीयता बनी रहेगी। तुला राशि- तुला राशि के जातक आज जीवन में बदलाव की बयार महसूस कर सकते हैं। पुराने दोस्त या परिचित आज अचानक संपर्क में आ सकते हैं, जिससे मन को खुशी होगी। कार्यक्षेत्र में बदलाव या चुनौती मिल सकती है। यदि आपका मन नई दिशा लेने का है, तो आज अच्छा समय है इसकी शुरुआत करने का। कई लोग आपसे राय मांगेंगे, आपकी बुद्धिमत्ता आज लोगों को प्रभावित करेगी। हालांकि, झूठे वादों से सावधान रहें। किसी भी प्रस्ताव पर पूरी तरह भरोसा करने से पहले जाँच अवश्य करें। धन-व्यय पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है। सामाजिक और पारिवारिक जीवन में ठीक-ठाक सामंजस्य रहेगा। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि के जातक आज अपने विचारों व क्षमताओं से दूसरों को प्रभावित करेंगे। कार्यक्षेत्र और सामाजिक जीवन दोनों में आपका दायरा बढ़ेगा। वरिष्ठों और सहयोगियों का समर्थन मिलेगा। यदि आप किसी साझेदारी या गठबंधन की सोच में थे, तो आज समय अनुकूल है, लेकिन साझेदार की छिपी बातों पर भी ध्यान दें। पारिवारिक माहौल मधुर रहेगा। कुछ पुरानी बातों का सुलझना संभव है। धन संबंधी फैसलों में सावधानी बरतें। जल्दबाजी न करें। मानसिक रूप से आप ऊर्जावान रहेंगे। चाहे संवाद हो, लिखाई हो या कोई कलात्मक काम हो, उसमें मन लगेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए आज का दिन तुलनात्मक रूप से अनुकूल रहेगा। धन और संपत्ति संबंधी मामलों में सफलता मिल सकती है। यदि आप व्यापार या निवेश करने की सोच रहे थे, तो आज शुभ संकेत हैं, परन्तु कदम सोच-समझ कर उठाएं। वैवाहिक जीवन और घरेलू संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। आप और आपका परिवार सुखद बातचीत और समय साझा कर सकेंगे। कार्य में बाधाएं आ सकती हैं, लेकिन आपकी धैर्य और परिश्रम उन्हें पार कर लेगी। दिन के देर शाम भागीदारी बढ़ सकती है। हो सकता है आप किसी सामाजिक या सामुदायिक कार्यक्रम से जुड़े। मकर राशि- मकर राशि वालों को आज कार्यक्षेत्र में विशेष अवसरों का सामना कर सकते हैं। विदेशों से संपर्क संभव है या दूरी यात्रा की संभावना है। शिक्षा या अनुसंधान संबंधी कामों में आपकी रुचि बढ़ सकती है। यदि आपने पिछले समय में कठोर परिश्रम किया है, तो आज उसकी सफलता दिख सकती है। बच्चों से संबंधित चिंता हो सकती है। उनकी सेहत और अध्ययन पर ध्यान देना ज़रूरी है। आर्थिक स्थिति सुधारती दिख रही है, परंतु खर्चों पर नियंत्रण आवश्यक रहेगा। सामाजिक जीवन में आप सक्रिय रहेंगे, संवाद … Read more

कब होती है सिंदूर खेला की शुरुआत? पूरी परंपरा जानें

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का विशेष महत्व होता है. मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना से लेकर विजयदशमी तक भक्त देवी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं. दुर्गा पूजा का समापन विजयदशमी के दिन होता है. इसी दिन बंगाल और अन्य जगहों पर एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जिसे सिंदूर खेला कहा जाता है. विवाहित महिलाएं इस दिन मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उनके अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं. सिंदूर खेला 2025 कब है? साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार से हो चुकी है और दुर्गा पूजा का समापन 2 अक्टूबर, गुरुवार को विजयदशमी के दिन होगा. इसी दिन सिंदूर खेला का आयोजन किया जाएगा. सिंदूर खेला की परंपरा     सिंदूर खेला केवल विवाहित महिलाएं करती हैं.     सबसे पहले वे मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं.     इसके बाद वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगती हैं.     इसे महिलाओं का भाईचारे और शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है. धार्मिक महत्व सिंदूर खेला को मां दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर माना जाता है. इस परंपरा से स्त्रियों के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और वैवाहिक सुख बना रहता है. यह दिन मां दुर्गा की विदाई का होता है, इसलिए महिलाएं उन्हें विदा करते समय अपने परिवार और पति की लंबी उम्र के लिए वर मांगती हैं. आजकल यह परंपरा केवल बंगाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश और विदेश में जहां भी बंगाली समाज है वहां सिंदूर खेला का आयोजन धूमधाम से किया जाता है.

वास्तु मंत्र: दशहरा 2025 पर अपने घर में लाएँ समृद्धि और सफलता

सनातन धर्म में दशहरे के पर्व को बहुत शुभ और खास माना जाता है। दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। पूरे देश में दशहरे के पर्व को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा या विजयदशमी का पर्व असत्य पर सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई के प्रतीक है। दशहरे का दिन धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वास्तु और ज्योतिष की दृष्टि से भी बहुत शुभ माना जाता है। दशहरे के अवसर पर किए गए कुछ विशेष वास्तु उपाय न केवल धन की वृद्धि करते हैं, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि को भी स्थायी बनाते हैं। तो आइए जानते हैं  दशहरे के पावन अवसर पर कौन से वास्तु उपायों का पालन करना चाहिए। घर में झाड़ू और तिजोरी की पूजा दशहरे के दिन झाड़ू और तिजोरी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा स्थान पर झाड़ू की पूजा करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और वहीं तिजो पर हल्दी, कुमकुम और चावल से स्वस्तिक बनाकर दीपक जलाने पैसों से जुड़ी समस्या दूर होती है और कारोबार में मनचाही सफलता मिलती है। शमी के पेड़ की पूजा दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन शमी के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने और जल चढ़ाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन में वृद्धि होती है। घर के मुख्य द्वार पर विशेष सजावट वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। दशहरे के दिन दरवाजे पर आम्रपल्लव, गेंदे के फूल और स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लक्ष्मी माता का वास बना रहता है।

चित्त की आज़ादी: बंधनों से मुक्ति का मार्ग

मनुष्य के मन पर शब्दों का बोझ है। यही बोझ उसकी मानसिक गुलामी का कारण भी है। जब तक यह दीवार टूट नहीं जाती, तब तक न सत्य जाना जा सकता है, न आनंद, न आत्मा। जीवन की असली खोज सत्य की खोज है और उसकी पहली शर्त है स्वतंत्रता। जिसके मन का स्वभाव दासता से बंधा है, उसके लिए परमात्मा तक पहुंचने की संभावना भी समाप्त हो जाती है। केवल वही आत्माएं सत्य को जान पाती हैं, जिन्होंने अपने मन को हर बंधन से मुक्त कर लिया हो। इस विषय पर एक मित्र ने प्रश्न किया-यदि हम शब्दों से मौन हो जाएं, मन शून्य हो जाए, तो संसार का व्यवहार कैसे चलेगा? यह भ्रम है कि अशांत मन ही जीवन को चलाता है। यह वैसा ही प्रश्न है, जैसे बीमार पूछें-यदि हम स्वस्थ हो जाएं, तो जीवन कैसे चलेगा? या पागल पूछें-यदि हम सामान्य हो जाएं, तो व्यवहार कैसे संभव होगा? वास्तविकता यह है कि संसार का अधिकतर कष्ट और अराजकता अशांत मन के कारण है। फिर भी यदि अशांति के बीच जीवन चल रहा है, तो यह आश्चर्य है। दरअसल शांत और स्थिर मन समाज को बाधित नहीं करता, बल्कि उसे स्वर्ग में बदलने की क्षमता रखता है। जितना मन शब्दों से मुक्त होकर शांत होता है, उतनी ही गहरी दृष्टि विकसित होती है। जीवन का क्रम चलते रहेगा-मनुष्य बोलेगा, चलेगा, कार्य करेगा-परंतु वह सब एक नई गुणवत्ता से भरा होगा। ऐसे व्यक्ति का जीवन दूसरों में अशांति पैदा नहीं करेगा, और दूसरे की अशांति उसकी शांति को भंग नहीं कर पाएगी। यहां तक कि अप्रिय व्यवहार भी उसे फूल के समान प्रतीत होगा, और वह स्वयं किसी पर विष की वर्षा करने में असमर्थ रहेगा। समस्या यह है कि मानव समाज ने सामूहिक रूप से मन को शांत करने का मार्ग नहीं अपनाया। इसी कारण हमें स्वर्ग आकाश में कल्पना करना पड़ा, जबकि यह धरती भी पूर्णत: स्वर्ग बन सकती है। स्वर्ग का असल अर्थ है-जहां शांत और भले लोग हों। सुकरात से मृत्यु से पहले एक प्रश्न पूछा गया कि क्या वे स्वर्ग में जाना चाहेंगे या नरक में। उन्होंने उत्तर दिया-"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुझे कहां भेजा जाएगा, क्योंकि मैं जहां भी रहूंगा, अपना स्वर्ग अपने साथ ले जाऊंगा।"  

सूर्य की चमक से नहाएगा भाग्य! 27 सितंबर को इन राशियों की किस्मत देगी साथ

मेष राशि- रिश्तों में थोड़ी खटास आ सकती है, खासकर दूर के रिश्तों में। लेकिन लव लाइफ अच्छी रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है। व्यापारी नए आइडिया पर काम शुरू करेंगे। धन की आवक बनी रहेगी और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। हाँ, निवेश सोच-समझकर करें ताकि नुकसान से बचें। वृषभ राशि- आज आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा। कामकाज में नए मौके मिलेंगे। प्रोफेशनल लाइफ़ में स्ट्रेस कम रखें और खुद पर भरोसा करें। खर्च पर कंट्रोल रखें और भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक प्लान बनाएं। मिथुन राशि- जीवन में नए लोग आ सकते हैं। किसी खास के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है, प्रपोज करने का भी सही समय है। नवविवाहित दंपत्ति दिन अच्छा बिताएंगे। धन की स्थिति मजबूत है, कुछ लोग वाहन खरीद सकते हैं या निवेश कर सकते हैं। कर्क राशि- लव लाइफ में मिठास बढ़ेगी। कार्यस्थल पर बदलाव होंगे जो आगे चलकर तरक्की देंगे। अचानक धन प्राप्ति के योग हैं। मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और नए अवसर खोजें। सिंह राशि- रोमांस से जुड़ी उलझनें पॉजिटिविटी से सुलझाएं। रिश्तों में बदलाव आएगा। दिन के दूसरे हिस्से में शादी तय करने के लिए शुभ समय है। इंटरव्यू देने वालों को सफलता मिल सकती है। कन्या राशि- आज नए लोगों से मुलाकात हो सकती है। कार्यस्थल की चुनौतियों को संभालना होगा। आज निवेश के लिए अच्छा दिन है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कई स्रोतों से धन लाभ संभव है। तुला राशि- लव लाइफ में धैर्य रखें। ऑफिस पॉलिटिक्स से बचें। किसी से गॉसिप न शेयर करें। कुछ लोगों को फंड जुटाने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन बिज़नेस करने वालों को पार्टनर का सहयोग मिलेगा। निवेश के लिए समय अच्छा है। स्वास्थ्य में सीने या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। वृश्चिक राशि- काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी रखें। सोना-चांदी में निवेश फायदेमंद हो सकता है। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। धनु राशि- रिश्तों की दिक्कतें हल करने की कोशिश करें। धन और स्वास्थ्य में सावधानी बरतें। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। पैसों की हल्की तंगी हो सकती है या परिवार के किसी सदस्य की दवा पर खर्च करना पड़ सकता है। मकर राशि- सिंगल लोग किसी आकर्षक व्यक्ति की ओर खिंच सकते हैं। रिलेशनशिप में नई गहराई आएगी। अपने सपने साझा करें। कार्यस्थल पर सकारात्मक बदलाव होंगे। निवेश खुद सोच-समझकर करें। कुंभ राशि- आज का दिन अपनी प्रतिभा दिखाने का है। आत्मविश्वास रखें। अप्रत्याशित मौके मिल सकते हैं। आर्थिक रूप से तरक्की होगी। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए मेडिटेशन या डायरी लिखने जैसी आदतें अपनाएं। मीन राशि- आज किसी खास से मुलाकात या प्रपोज करने का मौका मिल सकता है। प्रोफेशनल लाइफ में ऊर्जा और उत्साह रहेगा। नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और आप उन्हें समय पर पूरा करेंगे। आय के कई रास्तों से धन लाभ होगा।

पूजा में सफलता के लिए वास्तु के सही तरीके से जलाएं दीपक

पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाना काफी शुभ होता है, जिसके बिना पूजा अधूरी होती है। प्रत्येक देवी-देवता की पूजा में अलग-अलग तरह के दीपक जलाएं जाते हैं, जिससे साधक पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पूजा के दौरान दीपक जलाते समय आपको किन वास्तु नियमों का ध्यान रखना चाहिए। इस तरह जलाये दीपक वास्तु शास्त्र में माना गया है कि देवी-देवताओं के ठीक सामने दीपक नहीं जलाना चाहिए। आप इसे मूर्ति या चित्र के थोड़ा बाईं ओर करेक जला सकते हैं। इसके साथ ही देवी-देवताओं के बिल्कुल पास भी दीपक को नहीं रखना चाहिए, इसे थोड़ा-सा दूरी पर रखें। वास्तु शास्त्र में दीपक जलाने के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि इस दिशा में देवी-देवताओं का वास होता है। इसके साथ ही दीपक को भी दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर नहीं रखना चाहिए। पूजा के दौरान दीपक जलाते समय इस बात का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए कि आपकी दीपक एकदम साफ हो। इसके साथ ही पूजा के दीपक को सीधा नीचे न रखें, इसके लिए पूजा थाली का इस्तेमाल करें। दीपक कहीं से भी खंडित नहीं होना चाहिए। इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा इससे आपको पूजा के अच्छे परिणाम नहीं मिलते। कर सकते हैं ये काम वास्तु शास्त्र में माना गया है कि आप मंदिर के साथ-साथ घर के कुछ खास स्थानों पर रोजाना दीपक जला सकते हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और अच्छे परिणाम मिलते हैं। इसके लिए रोजाना शाम के समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास भी दीपक जरूर जलाना चािहए। इस बात का ध्यान रखें कि घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाते समय उसकी लौ उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।  

छठे दिन की पूजा: मां कात्यायनी को अर्पित करें प्रिय भोग व पुष्प, जानें संपूर्ण विधि

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस बार 9 नहीं बल्कि 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। मान्यता है कि नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनवांछित फल मिलता है। मां भगवती के इस स्वरूप को सफलता व यश का प्रतीक माना जाता है। जानें मां कात्यायनी का स्वरूप, प्रिय भोग, पुष्प, शुभ रंग, मंत्र, आरती व पूजा विधि। मां कात्यायनी का स्वरूप: मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं। मां की चार भुजाएं हैं। दो भुजाओं में मां भगवती कमल और तलवार धारण करती हैं। एक भुजा वर मुद्रा और दूसरा भुजा अभय मुद्रा में हैं। मां कात्यायनी पूजा विधि: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें। अब मां दुर्गा की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद मां को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। मां भगवती को रोली, चंदन, कुमकुम, इलायची, श्रृंगार का सामान, फल व मिठाई अर्पित करें। मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं। इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती उतारें। मां कात्यायनी का प्रिय पुष्प: मान्यता है कि मां कात्यायनी को लाल रंग के पुष्प अतिप्रिय हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा को लाल गुलाब या लाल गुड़हल को अर्पित करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां कात्यायनी का भोग: मां कात्यायनी को शहद का भोग अतिप्रिय है। मान्यता है कि नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा को शहद का भोग लगाने से उनका आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा मां को मिठाई, हलवा, गुड़ या मीठे पान का भोग भी लगाया जा सकता है। नवरात्रि के छठे दिन का शुभ रंग: मां कात्यायनी को पीला रंग अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां कात्यायनी की पूजा करते समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ होता है। मां कात्यायनी मंत्र: मां कात्यायनी के मंत्र इस प्रकार हैं: मुख्य मंत्र: कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।। स्तुति के लिए मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। मां कात्यायनी जी की आरती- जय जय अंबे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥ बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥ कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥ हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥ हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भगत है कहते॥ कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥ झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥ बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥ हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥ जो भी मां को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥  

दिवाली की असली तारीख पता करें: 20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर?

भारत में हर साल धूमधाम से मनाया जाने वाला दिवाली पर्व बस आने ही वाला है. इस खास दिन माता लक्ष्मी और गणपति जी की पूजा और परिवार में खुशहाली व समृद्धि की कामना की जाती है. लेकिन हर साल लोग दिवाली की तिथि को लेकर कंफ्यूज रहते हैं, क्योंकि कार्तिक अमावस्या की शुरुआत और समापन दोनों ही दिन अलग-अलग होते हैं. आइए, आपके इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं और जानते हैं दिवाली 2025 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कुछ खास उपायों के बारे में. दिवाली 2025 की तिथि और समय द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या की शुरुआत 20 अक्टूबर 2025 को सुबह 3 बजकर 44 मिनट पर होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर 2025 को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर होगा. इसलिए, दिवाली 2025 का मुख्य पर्व 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा. दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की सही विधि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने से पहले पूरे घर की सफाई करें और प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं. मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाएं. पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर जी की प्रतिमाएं स्थापित करें. आचमन करके हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प करें. फिर सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें. उन्हें स्नान कराकर वस्त्र, चंदन, फूल और दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद मां लक्ष्मी का पूजन करें. उन्हें कमल का फूल, सिंदूर, अक्षत (चावल), रोली, इत्र, मिठाई और फल अर्पित करें. इस दिन नए बही-खातों, तिजोरी और धन-संपत्ति की भी पूजा की जाती है. पूजा के दौरान 11, 21 या 51 दीपक जलाएं. सबसे आखिर में पूरे परिवार के साथ लक्ष्मी-गणेश की आरती गाएं और सभी में प्रसाद वितरित करें. दिवाली पर किए जाने वाले उपाय!     दिवाली की शाम को तुलसी के पौधे के पास नौ घी के दीपक जलाएं. मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.     दिवाली की रात एक पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं और पीछे मुड़कर देखे बिना घर वापस आ जाएं. ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है.     दिवाली की पूजा के दौरान सफेद या पीले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.     अगर घर में किसी प्रकार का कर्ज है, तो दिवाली पर नया आर्थिक योजना बनाना शुभ होता है. दिवाली का महत्व दिवाली, अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इसे धन की देवी माता लक्ष्मी और बुद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा के लिए मनाया जाता है. इस दिन का महत्व इस बात में है कि घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे. इस दिन माता लक्ष्मी का स्वागत कर परिवार में सुख-समृद्धि आती है. दीप जलाकर अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जाता है. दिवाली का त्योहार रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है.

मंगल दोष की चिंता छोड़ें! स्कंद षष्ठी पर अपनाएं ये असरदार उपाय

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का पर्व भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है. हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह विशेष तिथि मनाई जाती है. यह दिन न केवल भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा के लिए खास है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है जो अपनी कुंडली में मंगल दोष से पीड़ित हैं. मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों और उससे होने वाले कष्टों को दूर करने के लिए स्कंद षष्ठी का दिन किसी वरदान से कम नहीं है. स्कंद षष्ठी का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 27 सितंबर 2025, शनिवार को दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से होगा. उदया तिथि के चलते, स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजन 27 सितंबर 2025, शनिवार को ही किया जाएगा. इस शुभ तिथि पर किए गए उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं. क्यों खास है स्कंद षष्ठी और मंगल दोष का संबंध? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति कहा जाता है और इन्हें मंगल ग्रह का कारक देव माना जाता है. यानी मंगल ग्रह का सीधा संबंध भगवान स्कंद से है.जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके विवाह में बाधाएं आती हैं, वैवाहिक जीवन में कलह, कर्ज और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं. ऐसे में, भगवान कार्तिकेय की विधि-विधान से पूजा और उनसे संबंधित उपाय करने से मंगल के दोष शांत होते हैं और जीवन से कष्ट दूर होते हैं. भगवान कार्तिकेय की विशेष पूजा     विधि: स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें, विशेषकर गुलाब का फूल.     अर्घ्य: पूजा में उन्हें कपूर, सिंदूर, और रोली चढ़ाएं.     भोग: भोग में खीर या मिष्ठान्न का भोग लगाएं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में वितरित करें. ‘स्कंद षष्ठी स्तोत्र’ का पाठ     महत्व: मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन ‘स्कंद षष्ठी स्तोत्र’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है. पूरे भक्तिभाव से इस स्तोत्र का पाठ करने से मंगल जनित सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं.     मंत्र जाप: इसके अलावा, भगवान कार्तिकेय के ‘ओम तत्पुरुषाय विद्महे महासेनाय धीमहि तन्नो स्कन्दः प्रचोदयात्’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. लाल वस्तुओं का दान दान: मंगल ग्रह का रंग लाल है. इसलिए, इस दिन लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबा, और लाल वस्त्र का दान किसी गरीब या जरूरतमंद को करें. इससे मंगल शांत होता है और दोष का प्रभाव कम होता है. जल में गुड़ मिलाकर करें अभिषेक अभिषेक: यदि संभव हो तो, भगवान कार्तिकेय का जल में गुड़ मिलाकर अभिषेक करें. यह उपाय जमीन-जायदाद संबंधी विवादों और कर्ज की समस्या को दूर करने में भी सहायक माना जाता है, जो कि मंगल दोष के कारण उत्पन्न हो सकते हैं. मान्यता है कि स्कंद षष्ठी के दिन किए गए ये सभी उपाय मंगल दोष के कारण उत्पन्न होने वाली सभी बाधाओं, खासकर विवाह और वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं.