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रात के सन्नाटे में गूंजती घंटियां—मैहर माता मंदिर की अनसुनी कहानी

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर (मां शारदा धाम) आस्था, चमत्कार और रहस्यों का अनोखा संगम माना जाता है. विंध्य पर्वतमाला की त्रिकूट पहाड़ी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात है रात में अपने आप बजने वाली घंटियां. जिसका रहस्य आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है. आइए चैत्र नवरात्रि के खास मौके पर जानते हैं इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में. रात में अपने आप बजती हैं घंटियां, क्या है रहस्य? स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी रात में घंटियों के बजने की आवाज सुनाई देती है. कहा जाता है कि इस समय कोई भी इंसान मंदिर के अंदर मौजूद नहीं होता, फिर भी घंटियां बजती रहती हैं. भक्तों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि दैवीय संकेत है. माना जाता है कि रात के समय मां शारदा स्वयं मंदिर में विराजमान रहती हैं और उनकी पूजा होती है, जिसकी वजह से घंटियां बजती हैं. आल्हा-ऊदल से जुड़ी है मान्यता मैहर माता मंदिर का संबंध वीर योद्धा आल्हा-ऊदल से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं के अनुसार, आल्हा आज भी अमर हैं और वे रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले मंदिर पहुंचकर मां शारदा की पूजा करते हैं. कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के पुजारी दरवाजे खोलते हैं, तो वहां ताजे फूल और पूजा के निशान मिलते हैं, जिससे इस रहस्य को और भी गहराई मिलती है. त्रिकूट पर्वत पर बसा पवित्र धाम यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पूरे मैहर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है. भक्त पैदल सीढ़ियों से या रोपवे के जरिए भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं. यहां विराजमान मां शारदा को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है, इसलिए छात्र-छात्राएं विशेष रूप से यहां दर्शन के लिए आते हैं. नवरात्रि में उमड़ता है आस्था का सैलाब चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मैहर माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त मां से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मां को पुकारने पर हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए मैहर माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यमयी घटनाओं का केंद्र भी है. रात में बजती घंटियां, आल्हा-ऊदल की कहानी और दैवीय उपस्थिति की मान्यताएं इस मंदिर को और भी खास बनाती हैं.

किन लोगों पर भरोसा करना है खतरनाक? नित्यानंद चरण दास ने बताए 6 संकेत

जीवन में सही लोगों की संगति आपको आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति भीतर से कमजोर कर देती है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि किन 6 तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखना ही आत्मरक्षा है। जीवन हो या अध्यात्म- संगति का प्रभाव सबसे गहरा होता है। जिन लोगों के साथ हम रोज उठते-बैठते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे हमारी अपनी बन जाती हैं। अगर आपकी संगति आपको प्रेरित करने के बजाय थका रही है, आत्मविश्वास कम कर रही है या मानसिक शांति छीन रही है, तो यह एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक Nityanand Charan Das कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सही रास्ता नहीं, बल्कि सही लोग भी जरूरी होते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोगों से दूरी बनाना नकारात्मकता नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन 6 तरह के लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए- जो दूसरों की चुगली करता है जो व्यक्ति आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की बुराई करता है, वह भरोसे के काबिल नहीं होता। चुगली करने वाला इंसान रिश्तों को सच नहीं, मसाले से चलाता है। ऐसे लोग ना तो सच्चे दोस्त होते हैं और ना ही वफादार साथी। आज आप उनके सामने हैं, इसलिए आप सुरक्षित हैं- लेकिन जैसे ही आप पीछे मुड़ेंगे, वही बातें आपके बारे में कही जाएंगी। यह आदत व्यक्ति की सोच और नैतिकता को दर्शाती है। जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलता है अत्यधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात में “आप ही सबसे अच्छे हैं” कहना अक्सर किसी स्वार्थ का संकेत होता है। सच्चे रिश्तों में ईमानदारी होती है, चापलूसी नहीं। ऐसे लोग तब तक मीठे रहते हैं, जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए। काम निकलते ही उनका व्यवहार बदल जाता है। जो कभी अपनी गलती नहीं मानता जो इंसान हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करता है और दोष हमेशा दूसरों पर डालता है, वह रिश्तों में जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। ऐसे लोगों के साथ विवाद कभी सुलझते नहीं, क्योंकि वे आत्ममंथन करना ही नहीं जानते। जहां गलती मानने की क्षमता नहीं, वहां सुधार और भरोसे की भी कोई जगह नहीं। जो ताकतवर लोगों के सामने व्यवहार बदल ले जो व्यक्ति पद, पैसे या पावर देखकर झुक जाता है और आम लोगों को नजरंदाज करता है, वह स्थिर चरित्र वाला नहीं होता। ऐसे लोग रिश्तों को इंसान से नहीं, फायदे से जोड़कर देखते हैं। आज आप उपयोगी हैं, इसलिए आप महत्वपूर्ण हैं- कल कोई और ज्यादा प्रभावशाली मिला, तो आप पीछे छूट जाएंगे। जो किसी के दर्द पर हंसता है जिस इंसान में करुणा और संवेदना नहीं होती, वह कभी सच्चा सहारा नहीं बन सकता। किसी के दुख में मजाक उड़ाना या उसे कमजोरी समझना दर्शाता है कि उस व्यक्ति में समानुभूति (empathy) की कमी है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, जहां एक बार संवेदना नहीं दिखी, वहां आगे भी उम्मीद रखना व्यर्थ है। जो राज नहीं रख सकता जो व्यक्ति दूसरों की निजी बातें, रहस्य या विश्वास को हल्के में लेता है, वह भरोसे के लायक नहीं होता। अगर कोई किसी तीसरे का राज आपके साथ शेयर कर रहा है, तो याद रखें- आपका नंबर भी आएगा। विश्वास एक बार टूटा तो रिश्ते हमेशा के लिए कमजोर हो जाते हैं।  

रसोई में जूते-चप्पल पहनना सही या गलत? वास्तु शास्त्र की चेतावनी जानें

भारतीय संस्कृति में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। आखिर क्यों हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा रसोई में चप्पल ले जाने से मना करते थे और वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या चेतावनी देता है। किचन सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यहां धन और धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा का वास होता है। जब हम बाहर से गंदे जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाते हैं, तो हम अनजाने में देवी का अपमान कर रहे होते हैं। प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे 'वास्तु राजवल्लभ' और 'समरांगण सूत्रधार' में घर के दो हिस्सों को हमेशा सबसे शुद्ध रखने पर जोर दिया गया है- पहला पूजा घर और दूसरा रसोईघर। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों के साथ राहु और केतु (नकारात्मक ऊर्जा) का प्रभाव जुड़ा होता है। जब यह नकारात्मक ऊर्जा किचन में पहुंचती है, तो खाने के जरिए पूरे परिवार के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे घर में बीमारियां बढ़ती हैं, बेवजह के झगड़े होते हैं और घर की बरकत (धन) रुक जाती है। वैज्ञानिक नजरिया क्या है? अगर धार्मिक नजरिए से हटकर देखें, तो भी यह आदत बहुत नुकसानदायक है। हमारे जूतों में बाहर की सड़कों की गंदगी, कीटाणु और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। जब वही चप्पलें किचन में जाती हैं, तो वह गंदगी हमारे खाने तक पहुंच सकती है, जिससे परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। अगर पहनना मजबूरी हो तो क्या करें? कई बार सर्दियों के मौसम में फर्श बहुत ठंडा होता है या किसी को जोड़ों के दर्द (Medical Issue) की वजह से चप्पल पहनना जरूरी होता है। ऐसे में वास्तु का एक आसान सा उपाय है:     अपने किचन के लिए एक अलग, साफ 'कपड़े या ऊन की चप्पल' रखें।     इस चप्पल को पहनकर घर के बाहर या बाथरूम में बिल्कुल न जाएं।     किचन में देवी अन्नपूर्णा और अग्नि देव का वास होता है, अशुद्ध पैरों से वहां जाना उनका सीधा अपमान है।     बाहर की चप्पलें किचन में ले जाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) आ सकती है।  

17 मार्च 2026 राशिफल: भाग्य का साथ किसे मिलेगा, किसे रखना होगा सतर्क – जानें अपनी राशि का हाल

वृषभ राशि :- आज का दिन अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग रहेंगे। व्यापार-धंधे में आर्थिक लाभ की स्थिति रहेगी। सामाजिक कार्यों में भाग लेंगे, जिससे समाज में सम्मान बढ़ेगा। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। मांगलिक आयोजन हो सकते हैं, जिससे आनंद दोगुना हो जाएगा। नए कार्य का शुभारंभ लाभकारी रहेगा। संतान के साथ मेल-जोल अच्छा रहेगा। आय बढ़ेगी। प्रवास का आयोजन हो सकता है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मिथुन राशि :- आपका आज का दिन शुभ फलदायी है। व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी और सभी कार्य आसानी से पूरे होंगे। नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। कार्यक्षेत्र में शुभ समाचार मिलेंगे। कार्यों में सफलता से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। दिया धन वापस हो सकता है। लेन-देन से बचें। बड़े भाई एवं पिता की ओर से लाभ होगा। पारिवारिक आनंद से आप आनंदित रहेंगे। परिवार के साथ भी अच्छा समय व्यतीत होगा। स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहने सी आवश्यकता है। कर्क राशि :- आज का दिन मिला-जुला रहेगा। कारोबार मध्यम चलेगा और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र पर कामकाज की अधिकता रहेगी, जिससे थकान का अनुभव करेंगे। सहकर्मियों को किसी बात की ठेस न पहुंचे, इसका ध्यान रखें। क्रोध पर नियंत्रण एवं वाणी पर संयम रखें, अन्यथा काम बिगड़ सकते हैं। धार्मिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। मांगलिक आयोजन में शामिल हो सकते हैं। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। सेहत का ध्यान रखें। सिंह राशि :- आज का दिन सामान्य रहेगा। व्यापार-धंधा अच्छा चलेगा। कारोबार विस्तार की योजनाएं बना सकते हैं, जो लाभकारी सिद्ध होंगी। कार्यभार की अधिकता रहेगी और पूरा दिन भागदौड़ में बीतेगा। शारीरिक तथा मानसिक रूप से अस्वस्थता का अनुभव कर सकते हैं। खान-पान में सतर्कता बरतें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यात्रा पर जाने से बचें। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेगा और परिजनों-मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। ध्यान से मानसिक शांति मिलेगी। कन्या राशि :- आज का दिन अच्छा रहेगा। व्यापार-धंधे में आर्थिक लाभ और नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। कार्यों में सफलता मिलेगी। आकस्मिक धनलाभ की भी संभावना रहेगी। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और मित्रों-परिजनों के साथ मौज-मस्ती में दिन बिता पाएंगे। दाम्पत्य जीवन में सुख मिलेगा। धार्मिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में भाग लेंगे, जिससे समाज में सम्मान प्राप्त होगा। विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। तुला राशि :– आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में अनुकूल वातावरण रहेगा और कार्यों में सफलता मिलेगा। कारोबार अच्छा चलेगा और धनलाभ की स्थिति रहेगी, लेकिन कार्यभार की भी अधिकता रहेगा। परिजनों के साथ समय सुखपूर्वक बीतेगा। अनावश्यक खर्च अधिक होने की संभावना रहेगी। मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं, जिनसे बचना होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और नये कार्यों की शुरुआत करने से बचें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि :– आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। कार्यक्षेत्र में परिश्रम की अधिकता रहेगी, लेकिन अपने प्रयासों से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। सृजनात्मक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। संतान-पक्ष से शुभ समाचार मिलेंगे। धार्मिक-परोपकार के कार्य कर सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा रहेगा। आशातीत परिणाम मिलेंगे। धनु राशि :- आज का दिन मिला-जुला रहेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में छोटी-छोटी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, मेहनत से कार्यों में सफलता मिलेगी और आर्थिक लाभ की स्थिति रहेगी, लेकिन भागदौड़ अधिक करनी पड़ेगी। कई बातों को लेकर चिंतित हो सकते हैं, जिससे शारीरिक तथा मानसिक रूप से अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। परिवार के सदस्यों के साथ अनबन हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें। अनावश्यक धन खर्च के योग हैं। मकर राशि :– आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। व्यापार-धंधा अच्छा चलेगा और आकस्मिक धनलाभ के योग रहेंगे। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और सभी कार्य सफल होंगे। नौकरी में पदोन्नति भी मिल सकती है। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। किसी धार्मिक यात्रा का आयोजन हो सकता है। नए कार्य शुरू कर सकते हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। सामाजिक कार्यों में बढ़-चढकऱ हिस्सा लेंगे और परिवार के साथ समय व्यतीत कर सकेंगे। कुम्भ राशि :– आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में काम की अधिकता रहेगी और कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। कार्यों में सफलता मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन अनावश्यक खर्च की भी अधिकता रहेगी। शारीरिक और मानसिक रूप से थकान का अनुभव कर सकते हैं। क्रोध की अधिकता रहेगी। वाणी पर संयम रखने से परिवार में सुख-शांति बना पाएंगे। विचारों पर नकारात्मकता हावी न होने दें। धार्मिक कार्यों में व्यय हो सकता है। विद्यार्थियों को अधिक मेहनत करनी होगी। मीन राशि :– आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। कारोबार अच्छा चलेगा और धनलाभ की स्थिति रहेगी। नौकरी में तरक्की के योग हैं। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों की मदद से सभी कार्यों में सफलता मिलेगी और निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण होंगे। आकस्मिक धनलाभ होने की संभावना रहेगी। शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। किसी यात्रा स्थल पर प्रवास की संभावना रहेगी। स्वजनों के मिलने से मन आनंदित रहेगा। परिवार के साथ समय बीतेगा और दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा।

23 मई को खुलेंगे श्री हेमकुंड साहिब के कपाट, श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां जोरों पर

पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई 2026, शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस संबंध में हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंदवर्धन से मुलाकात कर आगामी यात्रा सीजन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मौसम की स्थिति और व्यवस्थाओं का आकलन करने के बाद दोनों पक्षों ने सहमति जताते हुए 23 मई को कपाट खोलने का निर्णय लिया। हेमकुंड साहिब यात्रा का संचालन प्रबंधन ट्रस्ट राज्य सरकार के सहयोग से करता है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, रतूड़ा, जोशीमठ, गोविंदघाट और घांघरिया जैसे प्रमुख पड़ावों पर ट्रस्ट की धर्मशालाओं में तीर्थयात्रियों के लिए नि:शुल्क ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाती है। हेमकुंड साहिब में भी लंगर की सेवा उपलब्ध रहती है लेकिन अत्यधिक ऊंचाई और सीमित सुविधाओं के कारण वहां रात में ठहरने की अनुमति नहीं दी जाती। इस वर्ष यात्रा को अपेक्षाकृत जल्दी शुरू करने का निर्णय मुख्य रूप से कम बर्फबारी के कारण लिया गया है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार हिमपात कम हुआ है, जिससे यात्रा मार्गों पर अनुकूल परिस्थितियां बनती दिख रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ों का मौसम कभी भी बदल सकता है, इसलिए यात्रा की तैयारियों में विशेष सावधानी बरती जा रही है। पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने इस बार यात्रा की शुरुआत थोड़ी पहले करने का फैसला किया है। इसी क्रम में इस वर्ष चारधाम के मंदिरों के कपाट भी अप्रैल महीने में खोलने की योजना तय की गई है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंदवर्धन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य चारधाम और हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाना है। हिमालय की सुरम्य वादियों के बीच लगभग 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। यह स्थान आध्यात्मिक शांति, ध्यान और ईश्वरीय अनुभूति की तलाश में आने वाले श्रद्धालुओं को एक दिव्य वातावरण प्रदान करता है। हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल होते हैं, जो आस्था, एकता और आध्यात्मिक नवचेतना का प्रतीक बन चुकी है।

Chaitra Navratri 2026: अमावस्या के असर में होगा चैत्र नवरात्र, जानें कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

 इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार के दिन से हो रही है. शक्ति की उपासना के यह दिन बहुत ही शुभ माने जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और यह पर्व लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए समर्पित रहता है. इस साल का चैत्र नवरात्र कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद एक अनोखा संयोग बन रहा है. दरअसल, इस दिन चैत्र नवरात्र के घटस्थापना वाले दिन पर अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। चैत्र नवरात्र पर अमावस्या का संयोग चैत्र नवरात्र पर चैत्र अमावस्या का संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है. इसलिए इस बार का पर्व धार्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि प्रतिपदा तिथि थोड़ी देर से शुरू होगी, फिर भी नवरात्र पूरे नौ दिनों तक ही मनाए जाएंगे। द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च की सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा, जिससे नवरात्र की शुरुआत मानी जाएगी. खास बात यह है कि अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियां सूर्योदय से मान्य होती हैं. इसी कारण इस बार अमावस्या के स्नान-दान और नवरात्र की घटस्थापना एक ही दिन यानी 19 मार्च को की जाएगी। चैत्र अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर स्नान कर दान-पुण्य करने की परंपरा है। चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का भी विशेष महत्व होता है. 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ समय रहेगा. यदि इस समय में स्थापना न हो पाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी कलश स्थापना की जा सकती है। इन दुर्लभ संयोगों में मनाई जाएगी नवरात्र इस साल नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च (गुरुवार) से होगी और इसका समापन 27 मार्च को होगा. पहले दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी काफी शुभ मानी जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं. इन तीनों योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  

सदी के दूसरे सबसे लंबे सूर्य ग्रहण का समय आया, सूतक टाइम नोट करें

इंदौर साल 2026 में होने वाले खगोलीय घटनाक्रमों में सूर्य ग्रहण भी खास माना जा रहा है. हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, इसलिए इस दौरान कई नियमों का पालन करने की परंपरा भी है. ग्रहण के समय पूजा-पाठ, खानपान और दैनिक कार्यों को लेकर विशेष सावधानियां बरती जाती हैं. ऐसे में लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि साल का अगला सूर्य ग्रहण कब लगेगा,  उसका प्रभाव भारत में दिखाई देगा या नहीं. दरअसल, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं दिया. अब लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर है. आइए जानते हैं यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा, इसका समय क्या रहेगा और क्या इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा।  सूर्य ग्रहण 2026: तारीख और समय साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा. इसी दिन हरियाली अमावस्या भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. यह ग्रहण रात 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा. यह 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. यह सदी का दूसरा लंबी अवधि तक दिखने वाला सूर्य ग्रहण है. हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।  सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें     सूतक काल के दौरान कोई भी नया और शुभ कार्य शुरू न करें, जैसे शादी, मुंडन या गृह प्रवेश.      ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें और बाहरी पूजा-पाठ से बचें.     इस दौरान मन ही मन गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्र का जप करें.      ग्रहण समाप्त होने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.     इसके बाद घर और मंदिर की सफाई करें.     देसी घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा-अर्चना करें.     मंदिर या जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन या अन्य वस्तुओं का दान करें.     सूतक काल शुरू होने से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखें. सूर्य ग्रहण में क्या न करें     ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ न करें.      भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें.     भोजन का सेवन न करें.     चाकू, सुई जैसी धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें.     सगाई, विवाह जैसे शुभ कार्य न करें.     तुलसी के पत्ते न तोड़ें.     किसी से वाद-विवाद न करें.     किसी के बारे में नकारात्मक विचार न रखें. सूर्य ग्रहण के समय करें इन मंत्रों का जप ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:। ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ । ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः । सूर्य ग्रहण के दौरान करें ये उपाय ग्रहण के समय भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए सूर्य मंत्र या गायत्री मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिलाकर स्नान करें. पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें. ग्रहण के बाद देसी घी का दीपक जलाकर भगवान सूर्य की पूजा करें.जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है.ग्रहण के समय तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल फूल डालें .ग्रहण समाप्त होने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें.घर के मंदिर की साफ-सफाई करें .भगवान को ताजे फूल अर्पित करें. ग्रहण के बाद मीठा भोजन बनाकर प्रसाद के रूप में बांटना भी शुभ माना जाता है.नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी लाभकारी माना जाता है.

19 या 20 मार्च: कब है गुड़ी पड़वा? जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में गुड़ी पड़वा को नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। खासकर महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में यह त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से हिंदू नववर्ष और चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है, वहीं कई जगहों पर चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुड़ी पड़वा का पर्व नई शुरुआत, उम्मीद और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से इस दिन लोग अपने घरों में पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि व खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। आइए, जानते हैं इस साल गुड़ी पड़वा की तारीख, शुभ मुहूर्त और इसके महत्व के बारे में विस्तार से – गुड़ी पड़वा 2026 कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 20 मार्च 2026, शुक्रवार को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में, उदया तिथि के अनुसार इस साल गुड़ी पड़वा 19 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन से चैत्र मास का आरंभ माना जाता है और कई स्थानों पर इसी तिथि से चैत्र नवरात्र भी शुरू होते हैं। इसलिए गुड़ी पड़वा को हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। गुड़ी (विजय पताका) फहराने का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक विजय मुहूर्त – दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:29 से 6:53 बजे तक निशिता मुहूर्त – सुबह 12:05 से 12:52 बजे तक गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुड़ी पड़वा का दिन बेहद शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी तिथि से सृष्टि की रचना की शुरुआत हुई थी। इसी कारण यह पर्व नई शुरुआत, सुख-समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में लोग अपने घर के बाहर गुड़ी लगाकर भगवान से परिवार की खुशहाली और समृद्ध जीवन की कामना करते हैं। गुड़ी पड़वा कैसे मनाया जाता है? गुड़ी पड़वा का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ या नए वस्त्र पहनते हैं। इसके बाद घर की सफाई की जाती है और पूजा की तैयारी शुरू होती है। इस अवसर पर घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास एक डंडे पर रंगीन या रेशमी कपड़ा बांधा जाता है। इसके साथ फूलों की माला, नीम की पत्तियां और ऊपर कलश लगाकर गुड़ी तैयार की जाती है। इस गुड़ी को घर के बाहर ऊंचाई पर लगाया जाता है, जिसे शुभता और विजय का प्रतीक माना जाता है। गुड़ी की पूजा करने के बाद परिवार के लोग नीम की पत्तियां और गुड़ या मिश्री का प्रसाद ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। दिन भर लोग एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं और घरों में पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं।

16 मार्च 2026 का राशिफल: किस राशि का होगा दिन शुभ, और कौन रहे सतर्क, जानें पूरी जानकारी

मेष राशि मेष राशि वालों को रिअल एस्टेट में निवेश करने से लाभ मिल सकता है. निवेश से लाभ होने से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. आप जीवनसाथी के साथ बातचीत कर सकते हैं. वृषभ राशि किसी अटके हुए काम और धन खर्च के कारण आपका मूड खराब हो सकता है. अपने साथी की छोटी-मोटी गलती को माफ करें. व्यर्थ में बहस न करें. वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा. मिथुन राशि आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं ऐसा संभव नहीं हो सकेगा. आपका किसी प्रिय के कारण मूड खराब हो सकता है. भागदौड़ के कारण जीवनसाथी को समय न देने से रिश्ते में तनाव हो सकता है. कर्क राशि कर्क राशि वाले लोग अपना समय शौक को पूरा करने में लगा सकते हैं. आप किसी करीबी रिश्तेदार की मदद ले सकते हैं. आपको आर्थिक लाभ हो सकता है. पार्टनर के साथ समय बिता सकते हैं. सिंह राशि आप मौज-मस्ती के लिए मनपसंद काम कर सकते हैं इससे आपका दिन अच्छा बीतेगा. निवेश करने से लाभ हो सकता है. रिश्तों को अहमियत दें. कन्या राशि कन्या राशि वालों को किसी से उपहार मिल सकता है. किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं तो किसी की सलाह अवश्य लें. जीवनसाथी के सुस्त होने के कारण काम असफल हो सकते हैं. तुला राशि आप लोन लेने का सोच रहे हैं तो आपको लोन मिल सकता है. पैसे मिलने से अटके काम पूरे होंगे. कोई नया काम करने का सोच रहे हैं तो अच्छे से विचार लें. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए आमदनी के नए स्त्रोत बनेंगे. आपके कामकाज के स्तर में सुधार होगा. आप अपना समय जीवनसाथी के साथ बिता सकते हैं. धनु राशि आप धन की बचत करने का सोच रहे हैं तो ऐसा कर सकते हैं. धन की बचत करना भविष्य में काम आएगा. किसी गलती की वजह से परिवार के साथ तनाव हो सकता है. स्थिति को बातचीत से संभालें. मकर राशि मकर राशि वालों को धनलाभ हो सकता है. धनलाभ होने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. दोस्तों या परिवार की परेशानियों के कारण तनाव हो सकता है. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोग परिवार के सदस्यों के साथ अच्छे पल बिता सकते हैं. आप पुरानों दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं. वैवाहिक जीवन में निजता का ध्यान रखें. मीन राशि मीन राशि वालों का बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो सकता है. इससे आपको नुकसान होगा. वैवाहिक लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा. (All Photo Credit- Social Media) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

कौन सी मंजिल बनाती है घर को भाग्यशाली? वास्तु के अनुसार जानिए कीमती चीजें रखने की सही जगह

वास्तुशास्त्र के प्राचीन विज्ञान में केवल दिशाओं का ही नहीं, बल्कि ऊंचाई और धरातल का भी विशेष महत्व बताया गया है। जब हम बहुमंजिला इमारतों की बात करते हैं, तो अक्सर मन में यह सवाल आता है कि कौन सा फ्लोर हमारे लिए सौभाग्य लेकर आएगा और किस मंजिल पर अपनी गाढ़ी कमाई या कीमती सामान रखना सुरक्षित और समृद्धशाली होगा। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, पृथ्वी की ऊर्जा और चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव हर मंजिल पर अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं मंजिलों का रहस्य और कीमती सामान रखने की सही जगह। कौन सी मंजिल है सबसे भाग्यशाली ? वास्तुशास्त्र में धरातल और प्रथम तल को सबसे अधिक ऊर्जावान माना गया है। इसका कारण यह है कि ये मंजिलें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण बल के सबसे करीब होती हैं। पृथ्वी से मिलने वाली धैर्य और स्थिरता की ऊर्जा यहां रहने वालों को मानसिक शांति और आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। हालांकि, आधुनिक वास्तु के अनुसार, यदि आप किसी ऊंची इमारत में रह रहे हैं, तो चौथी, नौवीं और ग्यारहवीं मंजिल को भी शुभ माना जाता है। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि आप जिस भी फ्लोर पर रहें, वहां की ढलान और दिशाओं का संतुलन सही होना चाहिए। यदि आप ऊंचे फ्लोर पर रहते हैं, तो आपको अपने घर में अधिक से अधिक प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रबंधन करना चाहिए क्योंकि ऊंचाई पर वायु तत्व प्रधान हो जाता है, जिससे कभी-कभी स्वभाव में अस्थिरता आ सकती है। कीमती सामान और धन रखने का वास्तु रहस्य दक्षिण-पश्चिम कोना अपनी कीमती ज्वेलरी, जमीन के कागजात और नकदी रखने के लिए घर का दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) हिस्सा सबसे उपयुक्त होता है। यह कोना पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्थिरता देता है। इस दिशा में रखी गई संपत्ति में फिजूलखर्ची कम होती है और संचय बढ़ता है। उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है। यदि आप अपनी तिजोरी या अलमारी को उत्तर दिशा की दीवार से सटाकर रखते हैं और उसका मुख उत्तर की ओर ही खुलता है, तो यह धन के नए अवसर पैदा करता है। ध्यान रखें कि तिजोरी के सामने कोई शीशा न हो और वह सीधे मुख्य द्वार के सामने न दिखाई दे। किस फ्लोर पर क्या रखने से बचेगा पैसा  ? यदि आप ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं, तो अपनी तिजोरी को फर्श से थोड़ा ऊपर स्टैंड पर रखें। जमीन से सीधे सटाकर धन रखना ऊर्जा को 'ग्राउंड' कर सकता है, जिससे पैसा टिकता नहीं है। यदि आप ऊपरी मंजिलों पर रहते हैं, तो वहां आकाश तत्व की अधिकता होती है। यहां धन को सुरक्षित रखने के लिए भारी लकड़ी की अलमारी का उपयोग करना चाहिए। भारीपन स्थिरता का प्रतीक है जो ऊपरी मंजिलों की चंचलता को संतुलित करता है। भूलकर भी न करें ये गलतियां सीढ़ियों के नीचे का स्थान: कई लोग जगह बचाने के लिए सीढ़ियों के नीचे स्टोर रूम या अलमारी बना देते हैं। वास्तु के अनुसार, यहाँ कीमती सामान रखने से कर्ज बढ़ता है और व्यापार में घाटा हो सकता है। अंधेरा कोना: जहां आप धन रखते हैं, वहां कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। वहां एक छोटा सा बल्ब या रोशनी की व्यवस्था अवश्य रखें ताकि लक्ष्मी का आगमन स्पष्ट हो सके।