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खरमास की शुरुआत: अगले 30 दिन इन कामों से बचें, वरना पड़ सकता है नुकसान

  पंचांग के अनुसार, साल में कुछ ऐसे समय आते हैं जब मांगलिक और शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है. ऐसा ही एक विशेष समय खरमास होता है, जिसे कई जगहों पर मलमास भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से हो चुकी है, जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस पूरे एक महीने के दौरान धार्मिक रूप से कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. क्या होता है खरमास? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों यानी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बन पाता. इसलिए इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे बड़े और शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है. हालांकि खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल न माना जाता हो, लेकिन यह समय भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. खरमास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य? धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय सूर्य की गति और स्थिति ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए ग्रहों का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाता. इसी कारण से शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में नए और बड़े कार्य शुरू करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते. इसलिए परंपरा के अनुसार लोग इन कार्यों को खरमास खत्म होने के बाद ही करते हैं. खरमास में कौन-कौन से काम करने से बचें? खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है.     विवाह और सगाई     गृह प्रवेश     नए घर का निर्माण शुरू करना     नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना     मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार     बड़े शुभ आयोजन  

Ram Navami 2026: राम नवमी कब है—26 या 27 मार्च, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इंदौर हिंदू धर्म में राम नवमी का पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था. तभी से इस तिथि पर देशभर में राम नवमी का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. भगवान राम की कथा व भजन-कीर्तन किए जाते हैं. माना जाता है कि इस दिन श्रीराम की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।  राम नवमी 2026 कब है? पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा. इसका समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए वर्ष 2026 में 26 मार्च 2026 को राम नवमी का पर्व मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है. हालांकि जो लोग उदयातिथि के आधार पर पर्व मनाते हैं, वे 27 मार्च 2026 को भी राम नवमी मना सकते हैं।  26 मार्च 2026 का शुभ मुहूर्त सूर्योदय: सुबह 06:18 बजे मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:13 से दोपहर 01:40 बजे तक मध्याह्न का क्षण: दोपहर 12:26 बजे 27 मार्च 2026 का शुभ मुहूर्त सूर्योदय: सुबह 06:17 बजे     मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:12 से दोपहर 01:40 बजे तक     मध्याह्न का क्षण: दोपहर 12:26 बजे राम नवमी की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें. भगवान राम का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. गंगाजल या पंचामृत से भगवान राम,  सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाओं का अभिषेक करें.पूजा में चंदन, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. देसी घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप और राम नाम का कीर्तन करें. अंत में आरती करके भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें।   व्रत का पारण कब करें? राम नवमी के दिन व्रत रखने वाले भक्त अगले दिन नवमी तिथि समाप्त होने के बाद भगवान राम को अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण करके व्रत का पारण कर सकते हैं. मान्यता है कि राम नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान राम की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. धर्म व सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। 

15 मार्च 2026 का राशिफल: किसे मिलेगा भाग्य का साथ, और किसे रहना होगा सावधान

मेष कामकाज में व्यस्तता बनी रह सकती है। कुछ जिम्मेदारियां अचानक बढ़ सकती हैं, इसलिए समय को संभालकर चलना बेहतर रहेगा। किसी पुराने काम को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। पैसों से जुड़ा फैसला सोच-समझकर लें। घर के लोगों से बातचीत करने से मन हल्का रहेगा। वृषभ दिन सामान्य तरीके से आगे बढ़ सकता है। काम में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। किसी जान-पहचान वाले से मदद मिल सकती है। खर्च को लेकर थोड़ा ध्यान रखना जरूरी रहेगा। परिवार के साथ बैठकर समय बिताने से अच्छा महसूस होगा। मिथुन मन थोड़ा इधर-उधर भटक सकता है। कई बातें एक साथ दिमाग में चल सकती हैं। ऐसे में जरूरी काम पहले निपटाना बेहतर रहेगा। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। दिन के अंत में थोड़ा आराम करने का समय मिल सकता है। कर्क काम में स्थिरता बनी रह सकती है। कुछ मामलों में धैर्य रखने की जरूरत पड़ेगी। घर से जुड़ी कोई बात ध्यान मांग सकती है। किसी करीबी की सलाह काम आ सकती है। जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना बेहतर रहेगा। सिंह आत्मविश्वास बना रहेगा। काम में मेहनत करने का मन रहेगा और उसका फायदा भी धीरे-धीरे दिख सकता है। किसी नई योजना के बारे में सोच सकते हैं। दोस्तों या परिवार के साथ बातचीत अच्छी रह सकती है। कन्या काम की जिम्मेदारियां थोड़ी ज्यादा महसूस हो सकती हैं। अगर आप धैर्य से काम करेंगे तो धीरे-धीरे सब ठीक होता जाएगा। किसी करीबी की मदद मिल सकती है। सेहत को लेकर थोड़ा ध्यान रखें। तुला कुछ काम उम्मीद से धीमे चल सकते हैं। ऐसे में परेशान होने के बजाय शांत रहकर काम करना बेहतर रहेगा। छोटी बातों को ज्यादा बड़ा न बनाएं। पैसों के मामले में सावधानी रखें। घर के लोगों का साथ मिलेगा। वृश्चिक मन में कुछ नया करने की इच्छा हो सकती है। नई चीजें सीखने या समझने का मौका मिल सकता है। दोस्तों से बातचीत अच्छी रहेगी। काम में धीरे-धीरे चीजें साफ होती नजर आएंगी। धनु दिन मिलाजुला रह सकता है। कुछ काम आसानी से पूरे होंगे तो कुछ में थोड़ा समय लग सकता है। किसी पुराने मामले को सुलझाने का मौका मिल सकता है। दोस्तों के साथ बातचीत अच्छी रहेगी। मकर किसी जरूरी काम में धीरे-धीरे प्रगति हो सकती है। लंबे समय से अटका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। मन में चल रही उलझन कम हो सकती है। परिवार के साथ समय बिताने से अच्छा लगेगा। कुंभ नई योजनाओं के बारे में सोच सकते हैं। किसी काम में बदलाव करने का मन बन सकता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह फायदेमंद रह सकती है। घर का माहौल सामान्य रहेगा। मीन भावनाओं में आकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। शांत रहकर सोचेंगे तो बेहतर रास्ता मिल सकता है। काम में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। परिवार का साथ बना रहेगा और मन थोड़ा हल्का महसूस होगा।

क्यों रखा जाता है गणगौर का व्रत? माता पार्वती को मिला था यह विशेष वरदान

हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन गणगौर का व्रत रखा जाता है. इस साल 21 मार्च को ये व्रत रखा जाएगा. गणगौर दो शब्दों गण और गौर से मिलकर बना है. गण का अर्थ भगवान शिव है और गौर माता पार्वती को कहा जाता है. ये व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. सुहागिन महिलाएं गणगौर का व्रत करती हैं. प्रमुख तौर पर राजस्थान और हरियाणा समेत उत्तर भारतीय राज्यों में गणगौर व्रत किया जाता है. हिंदू मान्यता है कि गणगौर का व्रत रखने और विधि-विधान से शिव और पार्वती की पूजा करने से पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है. अविवाहित कन्याएं भी गणगौर का व्रत रखती हैं. मान्यता ये भी है कि इस व्रत को रखने से मनचाहा वर प्राप्त होता है, लेकिन आइए जानते हैं कि गणगौर का व्रत करने से माता पार्वती को कौन सा फल मिला था? साथ ही जानते हैं इस व्रत की कथा. पार्वती को शिव मिले पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने गणगौर का व्रत किया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. तप के साथ-साथ उन्होंने ये व्रत भी किया था. तभी से गणगौर व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है. माना जाता है कि गणगौर व्रत के फल स्वरूप से ही देवों के देव महादेव देवी पार्वती को पति रूप में प्राप्त हुए. गणगौर व्रत की कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नारद मुनि के साथ भ्रमण पर निकले. चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि के दिन एक गांव में पहुंचे. वहां की गरीब महिलाओं ने श्रद्धा के साथ माता पार्वती का पूजन किया. माता पार्वती ने उनकी भक्ति और पूजन से प्रसन्न होकर उनको अटल सौभाग्य का आशीर्वाद दिया. इसके बाद गांव की अमीर महिलाएं सोने-चांदी की थालियों में पकवान लेकर आईं. उस समय माता ने उन महिलाओं पर प्रसन्न होकर अपनी उंगली से रक्त की कुछ बूंदें उन पर छिड़ दीं और उनको स्वयं जैसी सौभाग्यवती बनने का आशीर्वाद दे दिया. इसके बाद पार्वती जी नदी में स्नान करने चली गईं. वहां उन्होंने बालू मिट्टी से शिव जी की प्रतिमा बनाई और पूजा की. तब शिव जी प्रकट हुए और माता पार्वती से कहा कि जो स्त्री इस दिन तुम्हारी तरह मेरा पूजन और व्रत करेगी, उसके पति की आयु लंबी होगी. पूजा करते हुए माता पार्वती को आने में देरी हो गई. जब वो शिव जी के पास पहुंची तो उन्होंने माता से देरी की वजह पूछी. इस पर माता पार्वती ने बताया कि उनको उनके भाई-भाभी मिले और दूध-भात खाने के लिए दिया, जिसमें समय लग गया. यह सुनकर शिव जी को भी वहां जाने का मन हुआ. फिरपार्वती जी ने मन ही मन भगवान शिव से उनकी लाज बचाने की प्रार्थना की. इसके बाद जब वे नदी तट पर पहुंचे, तो वहां एक मायावी महल नजर आया. वहां शिव-पार्वती का खूब आदर-सत्कार हुआ. वो तीन दिन महल में रहे. शिव जी का मन महल में ही रहने का था, लेकिन पार्वती जी चल पड़ीं तो उनको भी माता के पीछे आना पड़ा. रास्ते में भगवान शिव को याद आया कि वो महल में अपनी माला भूल आए हैं. माला लाने के लिए उन्होंने नारद जी को भेजा. नारद जी ने वहां जाकर देखा तो कोई महल नहीं था. बस पेड़ पर एक माला लटकी पड़ी थी. यह देखकर नारद जी हैरान रह गए.फिर नारद जी माला लेकर शिवजी के पास गए. माला देकर उन्होंने शिव जी से कहा कि प्रभु यह कैसी माया है जब मैं माला लेने गया तो वहां पर भवन नहीं था. इस पर शिव पार्वती मुस्कुराए और बोले कि यह सब तो देवी पार्वती की माया थी. इस पर देवी पार्वती ने कहा कि यह मेरी नहीं भोलेनाथ की माया थी. इसके बाद नारद जी ने कहा कि आप दोनों की माया को आपके अलावा को दूसरा नहीं समझ सकता. आप दोनों की जो भक्ति भाव से पूजा करेगा, उसके जीवन में भी आपकी तरह प्रेम बना रहेगा.

चैत्र नवरात्र अष्टमी 2026: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

इंदौर नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत  मानी जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी. इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. जानते हैं कि चैत्र नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे।  अष्टमी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है और यह दिन देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।  कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026 ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा। क्या है कलश स्थापना का शुभ समय  नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नौ दिनों की होगी नवरात्रि 19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा 21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा 22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा 23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5-  मां स्कंदमाता पूजा 24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा 25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा 26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। ) 27  मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )  पूजा विधि     नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।     देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं।     इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।     एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं।     इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियर चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें।     इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं।     देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।     अब आप धूप उठाकर देवी के नामों का जाप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।     देवी की परिवार संग आरती कर लें और कुछ फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।  

आज का राशिफल 14 मार्च 2026: किन राशियों के लिए शुभ दिन, किन्हें बरतनी होगी सावधानी

मेष राशि- दिन थोड़ा भागदौड़ वाला रह सकता है। काम की जिम्मेदारियां बढ़ी हुई महसूस हो सकती हैं। अगर आप एक-एक काम पर ध्यान देंगे तो सब संभल जाएगा। किसी पुराने काम को निपटाने का मौका मिल सकता है। पैसों के मामले में थोड़ा संभलकर चलें। घर के लोगों के साथ बातचीत करने से मन हल्का रहेगा और तनाव कम महसूस होगा। वृषभ राशि- कामकाज सामान्य तरीके से चलता रहेगा। धीरे-धीरे मेहनत का असर दिख सकता है। किसी दोस्त या जानने वाले से काम की बात हो सकती है, जिससे आगे फायदा भी मिल सकता है। खर्च करते समय थोड़ा सोच लें। घर का माहौल ठीक रहेगा और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिल सकता है। मिथुन राशि- मन थोड़ा उलझा हुआ महसूस कर सकता है। एक साथ कई चीजें दिमाग में चल सकती हैं। ऐसे में बेहतर रहेगा कि जरूरी काम पहले पूरे कर लें। किसी पुराने दोस्त से बातचीत हो सकती है। दिन के दूसरे हिस्से में थोड़ा आराम करने का मन कर सकता है। कर्क राशि- दिन सामान्य रहेगा। काम में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा। परिवार से जुड़ी कोई बात सामने आ सकती है, जिस पर ध्यान देना पड़ेगा। किसी करीबी की सलाह काम आ सकती है। जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचें। सिंह राशि- आत्मविश्वास बना रहेगा और काम करने का मन भी बना रहेगा। किसी नए काम या योजना के बारे में सोच सकते हैं। मेहनत करते रहेंगे तो धीरे-धीरे चीजें आपके पक्ष में आती नजर आएंगी। दोस्तों या परिवार के साथ अच्छी बातचीत हो सकती है। कन्या राशि- कुछ काम उम्मीद से थोड़ा देर से पूरे हो सकते हैं। ऐसे में धैर्य रखना जरूरी रहेगा। छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। पैसों के मामले में सावधानी रखें। घर के लोगों का साथ बना रहेगा। तुला राशि- दिन ठीक-ठाक रह सकता है। कुछ काम आसानी से पूरे होंगे तो कुछ में थोड़ा समय लग सकता है। किसी पुराने मामले को सुलझाने की कोशिश सफल हो सकती है। दोस्तों से बातचीत अच्छी रहेगी। शाम के समय थोड़ा आराम करने का मन कर सकता है। वृश्चिक राशि- किसी जरूरी काम में धीरे-धीरे प्रगति दिख सकती है। लंबे समय से अटका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। मन में चल रही चिंता थोड़ी कम महसूस हो सकती है। परिवार के साथ समय बिताने से अच्छा लगेगा। पैसों को लेकर संतुलन बनाए रखना जरूरी रहेगा। धनु राशि- कुछ नया करने का मन बना रह सकता है। किसी काम को नए तरीके से करने की सोच सकते हैं। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। घर का माहौल सामान्य रहेगा। जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना बेहतर रहेगा। मकर राशि- काम की जिम्मेदारियां थोड़ी ज्यादा लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे सब संभल जाएगा। अगर आप धैर्य से काम करेंगे तो स्थिति बेहतर होती नजर आएगी। किसी करीबी की मदद मिल सकती है। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी रखना जरूरी रहेगा। कुंभ राशि- मन थोड़ा बदलाव चाहता हुआ महसूस हो सकता है। नई चीजें सीखने या करने का मन बन सकता है। दोस्तों से बातचीत अच्छी रहेगी। कामकाज में धीरे-धीरे स्थिति साफ होती नजर आएगी। दिन सामान्य तरीके से गुजर सकता है। मीन राशि- भावनाओं में बहकर कोई फैसला लेने से बचें। शांत दिमाग से सोचेंगे तो बेहतर रास्ता मिल सकता है। कामकाज में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। परिवार का साथ बना रहेगा। किसी करीबी से बात करने से मन हल्का महसूस हो सकता है।

साढ़ेसाती-ढैय्या का असर हुआ कम, शनिदेव के अस्त होने से इन राशियों की बल्ले-बल्ले

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास आ जाता है, तो सूर्य की तेज रोशनी में उसकी चमक छिप जाती है. इसे ही ग्रहों का ‘अस्त’ होना कहते हैं. शनि देव, जो हमारे जीवन में अनुशासन और कर्मों का हिसाब रखते हैं, अब मीन राशि में अस्त हो गए हैं. शनि का इस तरह शांत होना एक बड़ी बात है, क्योंकि वे ही हमारे जीवन में स्थिरता लाते हैं. जब शनि देव अस्त होते हैं, तो उनकी सख्ती थोड़ी कम हो जाती है, जिससे हमें पुराने तनावों से राहत तो मिलती है, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर अधिक सावधान रहने की जरूरत भी पड़ती है. शनि के अस्त होने से साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित लोगों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है, खासकर उन लोगों के लिए जो विशेषकर मेष, सिंह, धनु, कुंभ और मीन राशि से ताल्लुक रखते हैं. दरअसल, अस्त शनि के कारण शनि की क्रूरता कम हो जाती है, जिससे रुके हुए काम बनते हैं, मानसिक तनाव कम होता है, और स्वास्थ्य में सुधार के साथ अचानक धन लाभ की संभावना बनती है। आने वाले लगभग चालीस दिनों का यह समय हम सभी के लिए खुद को समझने और भविष्य की योजनाएं बनाने का एक अच्छा मौका है. चलिए जानते हैं कि शनि की इस बदलती स्थिति का आपके जीवन के संचालन पर कैसा असर होगा. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना एक तरह से ‘आराम के पल’ लेकर आया है. काफी समय से आप जिस भागदौड़ और दिमागी तनाव से गुजर रहे थे, अब उसमें कमी आएगी. यह समय दुनिया की उलझनों में फंसने के बजाय अपने मन की शांति पर ध्यान देने का है. आपके लिए मेडिटेशन करना बहुत अच्छा रहेगा. पुरानी चिंताएं धीरे-धीरे दूर होंगी, जिससे आप अपने आने वाले कल के लक्ष्यों को एक नए और शांत नजरिए से देख पाएंगे. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए यह समय अपनी बड़ी इच्छाओं और मेल-जोल को समझने का है. हो सकता है कि आपके कुछ रुके हुए कामों में थोड़ा और वक्त लगे, लेकिन धीरज रखेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी. आप अपने व्यवसाय में एक नई ऊर्जा महसूस करेंगे. यह समय यह सोचने का है कि आपके लिए सबसे जरूरी क्या है. दोस्तों और करीबियों का साथ आपको आगे बढ़ने का हौसला देगा. मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए कामकाज के मामले में यह राहत भरा समय है. ऑफिस या कार्यक्षेत्र में आप जो भारी दबाव महसूस कर रहे थे, वह अब कम होने लगेगा. हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी जिम्मेदारियों में ढील दें. बड़े अधिकारियों की सलाह से आपको तरक्की के अच्छे मौके मिल सकते हैं. अपनी काबिलियत को और निखारने की कोशिश करें, इससे आपके करियर का संचालन बहुत शानदार तरीके से होगा. कर्क राशि कर्क राशि वालों को इस दौरान पढ़ाई या कानूनी कागजों से जुड़े कामों में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. कुछ कामों में देरी होने की आशंका है, जिससे मन थोड़ा परेशान हो सकता है. इस समय को कुछ नया सीखने के मौके की तरह देखें. जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें, वरना नुकसान हो सकता है. पूरी योजना बनाकर ही कदम आगे बढ़ाना आपके लिए समझदारी होगी. सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक अनुशासन का है. निवेश से जुड़े मामलों में पूरी सावधानी बरतें. किसी भी प्रकार के जोखिम भरे व्यवसाय या निवेश से दूर रहना ही आपके हित में होगा. यह दौर आपके भीतर कुछ भावनात्मक बदलाव भी ला सकता है. अपनी निजी जरूरतों को समझें और शांत रहकर अपने आर्थिक पक्ष का संचालन करें. कन्या राशि कन्या राशि वालों को अपने रिश्तों में सहजता अपनानी होगी. जीवनसाथी या पार्टनर्स के साथ छोटी-मोटी बातों पर अनबन होने की आशंका है. अपनी बात कहने में सावधानी रखें और दूसरों की सोच को भी समझने की कोशिश करें. यह समय आपके रिश्तों को और भी ज्यादा गहरा और मजबूत बनाने का है. अगर आप अपने व्यवहार में थोड़ा लचीलापन और विनम्रता रखेंगे, तो आप अपने सामाजिक जीवन का बहुत अच्छी तरह संचालन कर पाएंगे और इससे आपको मन की शांति भी मिलेगी. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए शनि देव का अस्त होना एक अच्छा संकेत है. आपकी रोज की दिनचर्या अब पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो जाएगी और सेहत से जुड़ी पुरानी दिक्कतों में सुधार होने की अच्छी संभावना है. काम का भारी बोझ कम होने से आपको खुद के लिए और अपनी निजी योजनाओं के लिए समय मिल पाएगा. अपनी छोटी-बड़ी आदतों में थोड़े अच्छे बदलाव करें, जो आने वाले समय में आपको बहुत बढ़िया और सुखद परिणाम देंगे. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों को अपने रचनात्मक कामों और प्रेम संबंधों में थोड़ा धीरज रखने की सलाह दी जाती है. हो सकता है कि आपकी कुछ योजनाएं उम्मीद से थोड़ी धीमी चलें, जिससे मन में चिड़चिड़ापन आ सकता है. ऐसे में भावुक होकर परेशान होने के बजाय सहजता से काम लें. आपकी लगातार की गई मेहनत ही आपको मंजिल तक पहुंचाएगी. अपने मन को भटकने न दें और अपने लक्ष्यों पर ध्यान टिकाए रखें, सफलता जरूर मिलेगी. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए यह समय घर-परिवार को समर्पित करने का है. आप अपनों के करीब आएंगे और पारिवारिक सुख-शांति के लिए प्रयास करेंगे. परिवार के प्रति नई जिम्मेदारियां आपके आपसी स्नेह को और गहरा करेंगी. घर का माहौल सकारात्मक बनाए रखने में आपकी भूमिका मुख्य होगी. यह समय आपके मन में सुरक्षा और संतोष का भाव पैदा करेगा. मकर राशि मकर राशि के स्वामी शनि देव स्वयं हैं, इसलिए उनका अस्त होना आपके लिए आत्म-निरीक्षण का समय है. आप नए निर्णयों को लेकर थोड़े असमंजस में रह सकते हैं. किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने या नई योजना शुरू करने से पहले बारीकियों को समझें. वाणी में मधुरता और सोच में स्पष्टता रखने से आप कठिन स्थितियों का भी कुशलता से संचालन कर पाएंगे. कुंभ राशि कुंभ राशि वालों को अपने बजट और संचित धन पर ध्यान देना होगा. कुछ अनचाहे खर्चों के आने की आशंका है, इसलिए अपनी वित्तीय स्थिति का संचालन बहुत समझदारी से करें. यह समय आपको भविष्य के … Read more

वास्तु चेतावनी: भूलकर भी इस दिशा में न रखें कामधेनु गाय, वरना घर में आ सकती हैं परेशानियाँ

वास्तु शास्त्र में गाय को सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि साक्षात देवी का स्वरूप माना गया है। घर में कामधेनु गाय की मूर्ति रखना सुख-समृद्धि और चमत्कारी बदलाव ला सकता है। अगर आप भी अपने घर में बरकत चाहते हैं, तो इस मूर्ति को सही दिशा में रखना जरूरी है। हिंदू धर्म में गाय को 'गौमाता' कहा गया है, जिनके भीतर 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। वास्तु के हिसाब से, कामधेनु गाय की मूर्ति घर के कई दोषों को खत्म कर देती है। यह मूर्ति सिर्फ एक सजावट का सामान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। सही दिशा का चयन     वास्तु के अनुसार, कामधेनु गाय की मूर्ति रखने के लिए सबसे शुभ जगह उत्तर-पूर्व दिशा है, जिसे ईशान कोण कहा जाता है।     चूंकि, ईशान कोण को देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए यहां मूर्ति रखने से घर में दैवीय कृपा बनी रहती है।     इस सही दिशा में मूर्ति स्थापित करने से परिवार के सदस्यों का मानसिक और शारीरिक कल्याण होता है और घर में सुख-शांति आती है।     अगर उत्तर-पूर्व कोने में जगह उपलब्ध न हो, तो आप मूर्ति को अपने घर के पूजा स्थल (मंदिर) में भी रख सकते हैं।     मंदिर के अलावा, आप इसे घर की पूर्व दिशा में भी स्थापित कर सकते हैं, जिसे वास्तु में उन्नति और समृद्धि की दिशा माना गया है। कैसी मूर्ति है सबसे शुभ? हमेशा ऐसी मूर्ति लाएं जिसमें गाय के साथ उसका बछड़ा (calf) भी हो। मां और बछड़े की यह जोड़ी ममता और प्रेम का प्रतीक है। माना जाता है कि ऐसी मूर्ति से घर के बच्चों की उन्नति होती है। मूर्ति अगर सफेद पत्थर, पीतल (brass) या चांदी की हो, तो इसे बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। मूर्ति रखने के फायदे आर्थिक मजबूती: कामधेनु गाय 'मनोकामना पूरी करने वाली' मानी जाती है। इसे सही दिशा में रखने से पैसे की तंगी दूर होती है। मानसिक शांति: अगर घर में हमेशा तनाव या क्लेश रहता है, तो गाय की मूर्ति से मन को शांति मिलती है। बच्चों का करियर: पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए बच्चों के स्टडी रूम में भी छोटी सी मूर्ति रखी जा सकती है। घर में गाय की महिमा और उसकी स्थापना का विवरण हमारे प्राचीन 'मत्स्य पुराण' और 'वास्तु शास्त्र' के ग्रंथों में मिलता है। इनमें गाय को 'सर्व देवमयी' (सभी देवताओं का स्वरूप) बताया गया है। दिशाओं के नियम 'वास्तु विद्या' के आधार पर तय किए गए हैं।  

रुकावटों से परेशान हैं? पान के पत्तों का यह उपाय बदल सकता है आपकी किस्मत

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में कई ऐसी साधारण चीजें हैं जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में देखते तो हैं, लेकिन उनके चमत्कारिक गुणों से अनजान होते हैं। इन्हीं में से एक है पान का पत्ता। भारतीय संस्कृति में पान के पत्ते का उपयोग केवल मुख शुद्धि के लिए नहीं, बल्कि देवी-देवताओं को प्रसन्न करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए भी किया जाता है। यदि आपके जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं, बनते काम बिगड़ रहे हैं, या घर में अशांति है, तो पान के पत्ते के ये वास्तु उपाय आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। पान का आध्यात्मिक और वास्तु महत्व हिंदू धर्म में पान के पत्ते को शुभता का प्रतीक माना गया है। पूजा-पाठ, विवाह और शुभ अनुष्ठानों में पान का पत्ता अनिवार्य है। ऐसा माना जाता है कि पान के पत्ते में समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए, इसका प्रयोग तंत्र-मंत्र और वास्तु दोषों को मिटाने में भी किया जाता है। आइए जानते हैं कि पान के पत्तों का उपयोग करके आप अपने जीवन की रुकावटों को कैसे दूर कर सकते हैं। आर्थिक तंगी और दरिद्रता दूर करने के लिए यदि आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और मेहनत के बाद भी पैसा टिक नहीं रहा है, तो मंगलवार या शनिवार के दिन एक साबुत और साफ पान का पत्ता लें। इस पत्ते पर सिंदूर से 'श्रीं' या 'राम' लिखें। अब इस पत्ते को हनुमान जी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित कर दें। यह उपाय लगातार 5 मंगलवार या शनिवार तक करने से आर्थिक मार्ग खुलने लगते हैं और धन से जुड़ी रुकावटें दूर हो जाती हैं। बनते कामों में आ रही बाधा को रोकने के लिए अक्सर ऐसा होता है कि हम महत्वपूर्ण काम के लिए निकलते हैं और ऐन मौके पर काम रुक जाता है। ऐसी स्थिति में घर से निकलते समय अपने पास एक साबुत पान का पत्ता रखें। संभव हो तो इस पत्ते पर थोड़ी सी मिश्री या एक इलायची रखकर उसे अपने दाहिने हाथ में लेकर इष्ट देव का स्मरण करें। इसके बाद इसे अपने पर्स या जेब में रखकर घर से बाहर निकलें। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और काम में सफलता की संभावना को बढ़ा देता है। नजर दोष और नकारात्मकता से बचाव घर में यदि कलह बढ़ गई है या परिवार के किसी सदस्य को बुरी नजर लग गई है, तो एक पान के पत्ते पर गुलाब की कुछ पंखुड़ियां रखें। अब इसे अपने सिर के ऊपर से सात बार घुमाएं और किसी सुनसान जगह पर रख दें या बहते जल में प्रवाहित कर दें। यह उपाय घर से नकारात्मकता को दूर करता है और आपसी प्रेम बढ़ाता है। राहु-केतु के दोष को शांत करने के लिए ज्योतिष में राहु और केतु को बाधाओं का कारक माना गया है। यदि आपकी कुंडली में ये ग्रह भारी हैं, तो पान का पत्ता एक अचूक उपाय है। बुधवार के दिन पान के पत्ते पर थोड़ा सा शहद लगाकर दुर्गा मां के चरणों में अर्पित करें। यह उपाय न केवल राहु के दुष्प्रभाव को कम करता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता भी प्रदान करता है।  करियर और नौकरी की रुकावटें यदि आपको नौकरी पाने में या प्रमोशन मिलने में लगातार अड़चनें आ रही हैं, तो रविवार के दिन एक पान का पत्ता अपने तकिए के नीचे रखकर सोएं। अगले दिन सुबह उठकर उस पत्ते को किसी गाय को खिला दें। यह प्रक्रिया कुछ हफ्तों तक दोहराने से करियर से जुड़ी बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। पूजा-अर्चना में पान का विशेष महत्व वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान गणेश को पान का पत्ता अत्यंत प्रिय है। यदि आप बुधवार के दिन भगवान गणेश को पान के पत्ते पर सुपारी और लौंग रखकर अर्पित करते हैं, तो आपके घर के वास्तु दोषों का शमन होता है। यह घर के मुख्य द्वार पर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। सावधानियां पत्ता कटा-फटा न हो: उपाय के लिए हमेशा साबुत, हरा और ताजा पत्ता ही लें। कटा हुआ या सूखा पत्ता अशुभ माना जाता है। स्वच्छता: जिस स्थान पर आप पान का पत्ता रखें या अर्पित करें, वहां सफाई का विशेष ध्यान रखें। श्रद्धा: कोई भी वास्तु उपाय बिना श्रद्धा और विश्वास के सफल नहीं होता। इसलिए मन में अटूट विश्वास रखकर ही ये प्रयोग करें।

नवरात्रि 2026: घर में न रखें ये चीजें, नहीं तो नाराज हो सकती हैं मां दुर्गा

चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की आराधना और शुद्धि का समय माना जाता है। शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां दुर्गा का आगमन उन्हीं घरों में होता है जहां स्वच्छता और सकारात्मकता का वास हो। यदि आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाली वस्तुएं मौजूद हैं, तो मां दुर्गा की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है। नवरात्रि के पवित्र दिनों से पहले घर की शुद्धि करना अत्यंत आवश्यक है। यहाँ उन प्रमुख चीजों की सूची दी गई है जिन्हें आपको नवरात्रि से पहले घर से हटा देना चाहिए ताकि मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त हो सके: टूटी-फूटी वस्तुएं और खंडित सामान वास्तु शास्त्र में टूटी हुई वस्तुओं को नकारात्मकता का मुख्य स्रोत माना गया है। घर में पड़े हुए टूटे हुए कांच, बर्तन, फर्नीचर, या इलेक्ट्रॉनिक सामान को नवरात्रि शुरू होने से पहले ही घर से बाहर कर दें। माना जाता है कि ये वस्तुएँ घर में आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव पैदा करती हैं। यदि कोई वस्तु उपयोग में नहीं है और टूटी हुई है, तो उसे सुधारें या तुरंत हटा दें। पुरानी और रद्दी सामग्री अक्सर हम घर के कोनों में, अलमारियों के पीछे या स्टोर रूम में पुरानी रद्दी, अखबारों के ढेर, पुरानी पत्रिकाएं और अनावश्यक कागज जमा कर लेते हैं। ये चीजें अटका हुआ ऊर्जा का प्रतीक हैं। गंदगी और धूल जमा होने से वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, जो देवी के स्वागत में बाधक बनती है। इन्हें हटाकर घर को व्यवस्थित करें। पुराने और फटे-पुराने कपड़े यदि घर में ऐसे कपड़े हैं जिन्हें आप काफी समय से नहीं पहन रहे हैं या जो फट गए हैं, तो उन्हें नवरात्रि से पहले दान कर देना चाहिए या हटा देना चाहिए। अनावश्यक कपड़े घर में ऊर्जा के प्रवाह को रोकते हैं। पुराने कपड़े हटाने से घर में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूखे पौधे और मुरझाए फूल घर की बालकनी या पूजा घर के आसपास यदि आपने गमले रखे हैं और उनमें लगे पौधे सूख गए हैं या फूल मुरझा गए हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें। सूखे पौधे घर में उदासी और नकारात्मकता का संकेत देते हैं। नवरात्रि के आगमन पर घर में ताजे और हरे-भरे पौधे या ताजे फूलों की सजावट करना शुभ माना जाता है।  बंद घड़ियां वास्तु के अनुसार, बंद घड़ियां प्रगति में रुकावट का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि घर में कोई घड़ी बंद पड़ी है, तो या तो उसे ठीक करवाएं या उसे घर से हटा दें। समय का सही चलना घर में निरंतरता और सफलता को दर्शाता है। खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण घर में खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जैसे- बंद पड़े मोबाइल फोन, खराब चार्जर, या अन्य बिजली के उपकरण, जो अब काम नहीं करते, उन्हें घर से हटा देना बेहतर है। ये चीजें राहु के दोष को बढ़ाती हैं, जिससे घर में मानसिक उलझनें पैदा होती हैं। पूजा घर की शुद्धि नवरात्रि के लिए पूजा घर सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यहां किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति या फटी हुई धार्मिक पुस्तकें नहीं होनी चाहिए। यदि आपके मंदिर में ऐसी कोई वस्तु है, तो उसे सम्मानपूर्वक किसी जल में प्रवाहित करें या विसर्जित करें। इसके अलावा, पिछले उत्सवों की बची हुई सूखी सामग्री या राख को हटाकर पूरे मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें। नवरात्रि के लिए कुछ विशेष वास्तु सुझाव गंगाजल का छिड़काव: पूरे घर में, खासकर कोनों और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। इससे घर की ऊर्जा शुद्ध होती है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक: नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर या कुमकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। यह सुख-समृद्धि का द्वार खोलता है। आम के पत्तों का तोरण: मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना बहुत शुभ माना जाता है, यह देवी लक्ष्मी और दुर्गा का स्वागत करने का संकेत है। साफ-सफाई का महत्व: घर का कोना-कोना साफ रखें। जिस घर में धूल-मिट्टी नहीं होती, वहां देवी का वास स्थाई रूप से होता है।