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गरुड़ पुराण के अनुसार भूलकर भी न रखें मृत व्यक्ति की ये 3 चीजें अपने पास

हिंदू धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण मृत्यु, मृतात्मा और उसके बाद की यात्रा का विस्तार से वर्णन करने वाला प्रमुख ग्रंथ है। इसमें मृत व्यक्ति की वस्तुओं के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम दिए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की वस्तुओं में उसकी सूक्ष्म ऊर्जा कुछ समय तक बनी रहती है। इन्हें गलती से इस्तेमाल करने से घर में नकारात्मकता, मानसिक अशांति और बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए इन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। मृतक के कपड़ों का क्या करें? गरुड़ पुराण में सबसे सख्त नियम मृतक के कपड़ों को लेकर है। मृत व्यक्ति के कपड़े, चादर, गद्दा या बिस्तर का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों को नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से मृतक की सूक्ष्म ऊर्जा जीवित लोगों को प्रभावित करती है, जिससे डरावने सपने, उदासी, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। नियम: मृत्यु के बाद इन कपड़ों को गरीबों, ब्राह्मणों या आश्रम में दान कर देना चाहिए। इससे मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और मोह का बंधन टूटता है। गहनों और आभूषणों के नियम मृतक के गहनों को लेकर नियम थोड़े लचीले हैं, लेकिन पूरी तरह स्वतंत्र नहीं। अगर गहने सोने या चांदी के हैं और मृतक ने स्वयं किसी को उपहार स्वरूप दिए थे, तो उनका उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अगर गहनों के साथ मृतक का गहरा भावनात्मक लगाव था, तो उन्हें सीधे पहनने की बजाय गलाकर नया आभूषण बनवाएं या शुद्धिकरण पूजा करवाकर उपयोग करें। गरुड़ पुराण के अनुसार, बिना शुद्ध किए गहनों का इस्तेमाल करने से मानसिक अशांति और आर्थिक बाधाएं आ सकती हैं। मृतक की घड़ी और अन्य वस्तुओं का नियम समय का प्रतीक होने के कारण मृतक की घड़ी, पेन, चश्मा या दैनिक इस्तेमाल की अन्य चीजों को भी नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि इन चीजों में मृतक की ऊर्जा लंबे समय तक रह सकती है, जो जीवित लोगों के समय और भाग्य को प्रभावित करती है। इन चीजों को दान कर देना चाहिए। मृतक की यादों को कैसे संजोएं? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति की यादों को उनकी चीजों को संभालकर रखने में नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने और उनके नाम पर दान-पुण्य करने में है। मृत्यु के 13वें दिन या श्राद्ध के समय इन वस्तुओं का दान करें। मृतक के नाम पर ब्राह्मण भोजन कराएं। तुलसी दल, गंगाजल और दीपदान से उनकी आत्मा को शांति पहुंचाएं। गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि मृत्यु के बाद मोह त्यागना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। मोह और वस्तुओं से अलग होकर सही कर्म करने से ही आत्मा को मुक्ति मिलती है। इन नियमों का पालन करने से परिवार में शांति बनी रहती है और मृतक की आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।

रविवार का राशिफल 17 मई 2026: किसकी चमकेगी किस्मत, किसे मिलेगा नौकरी-व्यापार में फायदा

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए दिन ठीक रहेगा। पुराने रुके काम धीरे-धीरे पूरे हो सकते हैं। घर का माहौल अच्छा रहेगा। नौकरी में मेहनत का फायदा मिलेगा। कारोबार में भी थोड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। पैसों की स्थिति पहले से बेहतर रहेगी। सेहत को लेकर ज्यादा चिंता की बात नहीं है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के खर्च बढ़े रह सकते हैं। घर और परिवार के कामों में पैसा लग सकता है। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में भी फायदा होने के योग हैं। पार्टनर के साथ रिश्ता अच्छा रहेगा। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए समय राहत देने वाला रह सकता है। कई पुराने काम पूरे हो सकते हैं। परिवार का साथ मिलेगा। नौकरी और कारोबार में फायदा मिलने के संकेत हैं। खर्च भी बने रहेंगे। थकान महसूस हो सकती है। कर्क राशि- कर्क राशि वालों को कामकाज में अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। पुराने तनाव कम होंगे। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी। सेहत पहले से बेहतर महसूस होगी। सिंह राशि- सिंह राशि वालों को जल्दबाजी से बचना होगा। काम का दबाव बढ़ सकता है। पैसों के मामलों में सावधानी रखें। परिवार का सहयोग मिलेगा। रिश्तों में छोटी बातों को लेकर बहस हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए दिन अच्छा रह सकता है। मेहनत का फायदा मिलेगा। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। परिवार में खुशी बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। तुला राशि- तुला राशि वालों के रुके काम पूरे हो सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। परिवार और पार्टनर का साथ मिलेगा। व्यापार में फायदा होने के योग हैं। सेहत सामान्य रहेगी। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को धैर्य के साथ काम लेना होगा। कुछ कामों में देरी हो सकती है। नौकरी में मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है। पैसों को लेकर सोच-समझकर फैसला लें। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए समय अच्छा रह सकता है। नौकरी और कारोबार में फायदा मिलने के संकेत हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। मानसिक तनाव कम होगा। मकर राशि- मकर राशि वालों का दिन सामान्य रहेगा। कामकाज में व्यस्तता बनी रहेगी। नौकरी में मेहनत का फायदा धीरे-धीरे मिलेगा। परिवार का साथ रहेगा। खर्च सोच-समझकर करें। सेहत को लेकर सावधानी रखें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए समय धीरे-धीरे बेहतर होगा। मेहनत का फल मिलने लगेगा। नौकरी और कारोबार में फायदा होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा। मीन राशि- मीन राशि वालों को थोड़ा धैर्य रखना होगा। काम पूरे होने में समय लग सकता है। रिश्तों में गलतफहमी से बचें। नौकरी में दबाव महसूस हो सकता है। पैसों के मामलों में सावधानी रखें। सेहत का ध्यान रखना जरूरी रहेगा।

चाणक्य ज्ञान,अकेलापन कभी दुख नहीं, असली शांति की पहचान

आज के समय में आपको दो तरह के लोग सबसे ज्यादा देखने को मिलेंगे, पहले वे जो भीड़ में रहकर भी हर समय दुखी महसूस करते हैं और दूसरे वो जो अकेले रहते हुए भी काफी ज्यादा शांत और खुश नजर आते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार उनकी ये खुशी बाहरी नहीं होती हैं, बल्कि उनकी सोच और कॉन्फिडेंस में छिपी हुई होती है. उनके अनुसार जो भी लोग खुद को अच्छे से समझ लेते हैं, उन्हें हर समय किसी के साथ की जरूरत नहीं पड़ती है. चाणक्य कहते हैं कि अकेले रहना कभी भी दुख की निशानी नहीं होती है, कई बार ये एक इंसान को खुद को और भी बेहतर तरीके से समझने का मौका देती है. आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं कि आखिर क्यों कुछ लोग पूरी तरह से अकेले रहने के बावजूद भी दूसरों से ज्यादा खुश रहते हैं. चलिए जानते हैं इसके पीछे छिपे हुए कारण. खुद से प्यार करना जानते हैं ये लोग आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति खुद की कद्र करना सीख जाता है, उसे कभी भी अकेलेपन से परेशानी नहीं होती है. इस तरह के लोग अपनी कमियों और खूबियों को पूरी तरह से स्वीकार कर चुके होते हैं. इस तरह के लोगों को कभी भी दूसरों की तारीफ या फिर अटेंशन की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके अलावा ये लोग अपने समय का भी इस्तेमाल सही तरीके से करना जानते हैं. इन्हें आकर आप किताबें पढ़ते हुए, नयी चीजें सीखते हुए या फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम करते हुए ही देख पाएंगे. उनकी यही आदत उन्हें अंदर से खुश और सेटिस्फाइड बनाती है. हर रिश्ते से उम्मीद नहीं रखते ये लोग कई बार आपको जीवन में दुख इसलिए भी मिलता है क्योंकि आप दूसरों से ज्यादा ही उम्मीदें रखने लगते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार एक समझदार व्यक्ति कभी भी हर किसी से उम्मीदें नहीं रखता है. उसे इस बात का अंदाजा होता है कि हर इंसान जीवनभर कभी भी साथ नहीं रहता है. चाणक्य के अनुसार जो भी लोग अकेले खुश रहते हैं, वे रिश्तों की कीमत समझते हैं लेकिन अपनी खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं. अगर कोई उनका साथ दे रहा है तो भी अच्छी बात है और अगर न दे तो भी वे मायूस होकर टूटते नहीं है. उनकी यही सोच उन्हें अकेलेपन में भी खुश रहने में मदद करती है. मन को शांत रखना जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार एक शांत मन वाला व्यक्ति हर हालात में खुद को संभालकर रख पाता है. अकेले रहने वाले लोग जीवन में होने वाले बेकार के बहस, तुलना और दिखावे से पूरी तरह से दूर रहते हैं. चाणक्य कहते हैं कि ये लोग अपनी जिंदगी को दूसरों की नजरों से नहीं, बल्कि अपनी समझदारी से जीते हैं. इस तरह के लोग कभी दूसरों के दबाव में आकर खुद को कमजोर नहीं समझते हैं. उन्हें इस बात का अंदाजा काफी अच्छे से होता है कि असली खुशी अंदर से आती है, भीड़ या फिर दिखावे से बिलकुल भी नहीं.

सांप वाली अंगूठी पहनने से क्या होता है? जानिए ज्योतिष में इसका महत्व

आपने कुछ लोगों को उंगली में सांप के डिजाइन वाली अंगूठी या रिंग पहने जरूर देखा होगा. इसे देखकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इसे पहनने का फायदा क्या है. कुछ लोग इसे सिर्फ फैशन या ट्रेंड का हिस्सा मान सकते हैं. जबकि ज्योतिषविदों के अनुसार, इसे पहनने से कई तरह के लाभ मिलते हैं. उनका यह भी मानना है कि सांप की आकृति वाली रिंग हर किसी को धारण नहीं करनी चाहिए. जरा सी गलती से इसका असर उल्टा भी हो सकता है. यह फायदा पहुंचाने के बजाए नुकसान भी दे सकती है. सुख-संपन्नता सांप के आकार वाली अंगूठी को ज्योतिष में शुभता का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि इसे धारण करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता बनी रहती है. ऐसे लोग जीवन में सुख-संपन्नता का भरपूर आनंद लेते हैं. ऐसे लोगों के जीवन में कभी धनधान्य की कमी नहीं रहती है. उनके जीवन में आने वाली बाधाएं अपने आप अपना रास्ता बदल लेती हैं. नजर दोष से बचाव ज्योतिषविद कहते हैं सर्प की आकृति वाली अंगूठी ज्योतिषीय परामर्श पर पूरे विधि-विधान से पहनी जाए तो नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से आदमी का बचाव होता है. ऐसे व्यक्ति के सुखी जीवन, धन-संपत्ति और उन्नति पर कभी किसी घरेलू या बाहरी व्यक्ति की बुरी नजर का असर नहीं होता है. ग्रहण दोष बेअसर जिन लोगों की कुंडली में ग्रहण दोष होता है, उनके जीवन में अक्सर कोई न कोई परेशान लगी रहती है. ऐसे लोगों को ज्योतिषविदों की सलाह के बाद सांप वाली अंगूठी पहननी चाहिए. ऐसा कहते हैं कि इससे ग्रहण दोष का प्रभाव बेअसर हो जाता है. दाएं हाथ की मिडिल फिंगर (मध्यमा उंगली) में यह अंगूठी धारण करने से ग्रहण दोष का प्रभाव कम हो सकता है. स्वास्थ्य संबंधी लाभ कई बार कुंडली में ग्रहों की उठापटक के चलते इंसान की सेहत में गिरावट आने लगती है. इंसान हर समय बीमार या अस्वस्थ महसूस करता है. ऐसे लोगों के लिए भी सांप वाली अंगूठी किसी राहत से कम नहीं मानी जाती है. लेकिन ध्यान रहे कि इसे सिर्फ ज्योतिषविदों से सलाह लेकर ही पहनना चाहिए. इससे जीवन में मानसिक और भावनात्मक संतुलन बना रहता है. किस धातु की होनी चाहिए अंगूठी? सांप की आकृति वाली अंगूठी के लिए चांदी का उपयोग सबसे उत्तम माना जाता है. हालांकि कुछ मामलों में ज्योतिषविद लोगों को कांसे या ताम्बे स बनी सांप की अंगूठी पहनने की सलाह भी दे सकते हैं. इसे पहनने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

शनिदेव को प्रसन्न करने का आसान उपाय, जानें दीपक जलाने की सही दिशा

आज शनि जयंती की शाम पीपल के पेड़ के नीचे दीया जरूर जलाएं। इसी के साथ शनिदेव के एक खास मंत्र का भी जाप करें। हिंदू धर्म में शनिवार के दिन शनि भगवान की पूजा का विशेष महत्व होता है और शनि जयंती है तो आज का दिन और भी खास बन चुका है। बता दें कि लंबे इंतजार के बाद ऐसा संयोग बना है कि शनिवार के दिन ही शनि जयंती पड़ रही हो। आज न्याय और कर्मों के देवता कहने जाने वाले शनिदेव की पूजा करने से जिंदगी के कई कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं और शनिदेव की कृपा मिल सकती है। शनि जयंती की शाम बहुत ही शक्तिशाली और विशेष मानी जाती है। आज शाम दीया जलाकर शनिदेव से सुख-शांति की कामाना करने से उनकी कृपा जरूर मिलती है। वहीं अगर दीए को सही दिशा और सही मंत्र के साथ जला लिया जाए तो पूजा का महत्व और भी बढ़ जाएगा। शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त शनिदेव की पूजा का एक मुहूर्त निकल चुका है। अब शाम का एक मुहूर्त बचा है जोकि विशेष है। आम तौर पर शनिदेव मंदिर में भक्तों की भीड़ शाम में ही नजर आती है। दरअसल शनिदेव की पूजा के लिए शाम का समय ही सबसे शुभ माना जाता है। आज शनि जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से शुरु होकर रात 08:23 बजे तक होगा। दीया जलाते समय पढ़ें ये मंत्र शनिदेव के नाम का दीया पीपल के पेड़ नीचे जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और साथ ही मन को शांति मिलती है। ॐ शं शनैश्चराय नमः माना जाता है कि इस मंत्र के जाप का शांत मन से जाप किया जाए तो शनिदेव प्रसन्न होकर सारे दुख हर लेते हैं। इस मंत्र का जाप 11, 21 या फिर 108 बार किया जा सकता है। आज का दिन विशेष है तो कोशिश करें कि इस मंत्र का जाप 108 बार ही किया जाए। इस दिशा में जलाएं शनि जयंती का दीया वास्तु शास्त्र की मान्यता के हिसाब से शनिदेव की पूजा करते समय पश्चिम दिशा शुभ मानी जाती है। इसी दिशा की ओर मुंह करके ही दीया जलाना चाहिए। मान्यता है कि आज शाम को चार जगह दीया जलाना चाहिए। शनि मंदिर और पीपल के पेड़ के नीचे तो दीया जरूर ही जलाएं। साथ ही हनुमान मंदिर और घर के मुख्य द्वार पर भी सरसों के तेल का दीया जलाकर भगवान शनिदेव को मन ही मन याद करें और ऊपर बताए गए मंत्र का जाप करें।

बिजनेस में छाई मंदी होगी दूर, घर की इस जगह लगाएं उगते सूरज की फोटो

 सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का खास महत्व है। इसमें घर की दीवारों पर लगाई जाने वाली तस्वीरों का लोगों के जीवन पर पड़ने वाला खास प्रभाव बताया गया है। लोग अपने घर और ऑफिस में उगते हुए सूरज की तस्वीर लगाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में उगते हुए सूर्य की फोटो लगाना अधिक शुभ माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर और ऑफिस में उगते हुए सूर्य की फोटो क्यों लगाई जाती है। अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं इसकी खास वजह और नियम के बारे में। करियर में होगी खूब उन्नति- सूर्य देव को मान-सम्मान, सफलता तेज और यश का कारक माना जाता है। इसलिए घर में उगते हुए सूरज की फोटो लगाने से जॉब और बिजनेस में खूब तरक्की होती है और काम से आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिलती है। सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार- वास्तु के मुताबिक, घर में उगते हुए सूर्य की फोटो लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। परिवार के सदस्यों के मन में नए विचार आते हैं। सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। मान-सम्मान में होती है वृद्धि- अगर आपके बनते काम बिगड़ रहे हैं, तो घर में उगते हुए सूर्य की फोटो लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इस फोटो को घर में लगाने से सभी कामों में सफलता मिलती है और कार्यक्षेत्र में आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। किस दिशा में लगाएं फोटो- पूर्व दिशा से सूर्य उदित होते हैं। इसलिए इस दिशा में उगते हुए सूर्य की फोटो को लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इससे शुभ परिणाम मिलते हैं। इसके अलावा आप उत्तर-पूर्व दिशा में भी उगते हुए सूर्य की फोटो लगा सकते हैं। इन दिशाओं में भूलकर भी न लगाएं फोटो- अगर आप घर में उगते हुए सूर्य की फोटो लगाना चाहते हैं, तो पश्चिम या दक्षिण दिशा की दीवार पर भूलकर भी न लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में फोटो को लगाने से परिवार के सदस्यों को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही ध्यान रखें कि फोटो में सूर्य की किरणें सुनहरी होनी चाहिए। अधिक ज्यादा लाल वाले भाव वाली तस्वीरें लगाने से बचें।  

वास्तु शास्त्र: बाथरूम में खाली बाल्टी क्यों मानी जाती है अशुभ, जानें इसका असर

 अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग हमें टोकते हैं कि बाथरूम में बाल्टी को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए. कई लोग इसे पुराने जमाने की बात या अंधविश्वास मानकर छोड़ देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में इसके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे हैं? आइए समझते हैं कि खाली बाल्टी आपके जीवन पर क्या असर डाल सकती है. 1. पैसों की तंगी और फिजूलखर्ची वास्तु के अनुसार, पानी का सीधा संबंध धन (पैसे) से होता है. जैसे बहता पानी रुकता नहीं, वैसे ही खाली बाल्टी अभाव यानी कमी को दिखाती है. माना जाता है कि अगर बाल्टी खाली है, तो घर में पैसा टिकता नहीं है और बेवजह के खर्चे बढ़ जाते हैं. वहीं भरी हुई बाल्टी घर में बरकत और खुशहाली का संकेत है. 2. घर में बढ़ता है तनाव बाथरूम एक ऐसी जगह है जहां सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) पैदा हो सकती है. वास्तु एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाली बाल्टी इस नकारात्मकता को अपनी ओर खींचती है. इससे घर के लोगों के मन में चिड़चिड़ापन, तनाव और आपस में झगड़े होने की संभावना बढ़ जाती है. 3. ग्रहों का खेल (शनि और चंद्रमा) ज्योतिष में पानी का नाता चंद्रमा से है और सफाई का नाता शनि देव से. अगर बाल्टी गंदी या खाली पड़ी है, तो शनि और चंद्रमा का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे आपके बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं,  किस्मत साथ नहीं देती. 4. अनुशासन और शांति अगर हम विज्ञान या मनोविज्ञान की बात करें, तो साफ-सुथरा और व्यवस्थित बाथरूम आपके दिमाग को शांति देता है. भरी हुई बाल्टी इस बात का प्रतीक है कि आप अपने संसाधनों का सही प्रबंधन कर रहे हैं. बिखरा हुआ बाथरूम और खाली बाल्टी आलस और अनुशासन की कमी को दर्शाती है. ये 3 छोटे बदलाव बदल देंगे आपकी किस्मत: रात को बाल्टी भरकर सोएं: रात में सोने से पहले बाल्टी को साफ पानी से भर दें. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. नीले रंग की बाल्टी: वास्तु में नीला रंग बहुत शुभ माना गया है. अगर संभव हो तो बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी और टब का इस्तेमाल करें, यह पैसों की तंगी दूर करने में मदद करता है. खाली बाल्टी को उल्टा रखें: अगर आपको बाल्टी खाली रखनी ही है, तो उसे सीधा न छोड़ें. हमेशा धोकर उल्टा करके रखें.

अधिकमास क्या है और क्यों खास माना जाता है?

 अधिकमास इस बार 17 मई यानी कल से शुरू हो रहा है और इसका समापन 15 जून तक रहेगा. यह अतिरिक्त महीना हर साल नहीं आता, बल्कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसे खास तौर पर हमारे कैलेंडर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. दरअसल, चंद्र कैलेंडर लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर कैलेंडर 365 दिनों का. ऐसे में दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए अधिकमास रखा जाता है, ताकि हमारे त्योहार सही मौसम में ही आएं. लेकिन यह सिर्फ कैलेंडर ठीक करने के लिए ही नहीं है. धार्मिक दृष्टि से यह महीना बहुत खास माना जाता है. इसे भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए पूजा-पाठ, दान और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए इसे एक तरह से पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी कहा जाता है. अधिकमास में क्या करें (पुण्य कर्म) अधिकमास को पुण्य कमाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. यह एक ऐसा मौका है जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए. इस पूरे महीने में ध्यान अच्छे और निस्वार्थ कामों पर रखना चाहिए, जिससे मन और आत्मा शुद्ध होती है. 1. भगवान विष्णु की पूजा करें यह महीना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित होता है, इसलिए उनकी पूजा सबसे जरूरी मानी जाती है. आप रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं. सत्यनारायण व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत शुभ होता है. यहां बड़ी पूजा नहीं, बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. 2. दान करें अधिकमास में किया गया दान कई गुना फल देता है. यह सिर्फ पैसे का दान नहीं है, बल्कि भावना सबसे जरूरी होती है. आप अन्न दान, वस्त्र दान या दीप दान कर सकते हैं. जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने का सबसे सीधा और असरदार उपाय माना जाता है. 3. जप और तप करें इस महीने में मंत्र जाप और व्रत रखना बहुत लाभदायक होता है. 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का रोज जाप करें, अगर संभव हो तो तुलसी की माला से 108 बार जप करें. व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और ध्यान भगवान में लगता है. 4. धार्मिक ग्रंथ पढ़ें इस समय आप भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत पुराण या रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ पढ़ सकते हैं. इससे ज्ञान बढ़ता है और जीवन को सही दिशा मिलती है. सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसकी बातों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें. अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए शुभ कार्य न करें: जैसे शादी (विवाह), मुंडन और गृह प्रवेश बड़ी खरीदारी से बचें: नया घर, गाड़ी या महंगे गहने न खरीदें नई शुरुआत न करें: नया बिजनेस शुरू करना, घर बनवाना या किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत करना टालें क्यों टालें ये काम? क्योंकि ये सभी काम हमारी इच्छाओं और भौतिक सुखों से जुड़े होते हैं. अधिकमास हमें सिखाता है कि थोड़े समय के लिए इन चीजों से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा और अध्यात्म पर ध्यान दें. पूरे महीने का व्रत और नियम जो लोग अधिकमास में अपनी भक्ति को और गहरा बनाना चाहते हैं, वे पूरे महीने व्रत रख सकते हैं. यह एक कठिन लेकिन बहुत ही फलदायी साधना मानी जाती है. अगर आप यह व्रत करते हैं, तो आपको एक सही दिनचर्या अपनानी होती है. इस दौरान आपका भोजन बहुत साधारण और सात्विक होना चाहिए. दिन में सिर्फ एक बार खाना खाएं और उसमें प्याज, लहसुन, अनाज और मांसाहार से पूरी तरह परहेज करें. फल, दूध और व्रत में खाए जाने वाले आहार जैसे साबूदाना आदि का सेवन करें. आपकी दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) उठकर स्नान और पूजा से शुरू होनी चाहिए. यह व्रत शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत करने और भगवान की भक्ति में लगाने के लिए किया जाता है. अधिकमास की कथा अधिकमास से जुड़ी यह कथा बहुत सुंदर और भावुक है. पहले इस अतिरिक्त महीने का कोई देवता नहीं था, इसलिए इसे मलमास कहा जाता था, यानी ऐसा महीना जिसे अशुभ या बेकार माना जाता था. इस महीने में कोई त्योहार या शुभ काम नहीं किए जाते थे, इसलिए यह खुद को उपेक्षित और दुखी महसूस करता था. यह कथा हमें उस भावना से जोड़ती है, जब कोई खुद को महत्वहीन समझने लगता है. अपनी परेशानी लेकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया. पद्म पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने जब इस महीने की परेशानी सुनी तो उन्होंने इसे अपना लिया. उन्होंने न सिर्फ इसे महत्व दिया, बल्कि अपना ही एक नाम पुरुषोत्तम भी इसे दे दिया. तभी से यह महीना पुरुषोत्तम मास कहलाने लगा. भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि जो भक्त इस महीने में बिना किसी स्वार्थ के पूजा-पाठ, दान और अच्छे कर्म करेगा, उसे उनका विशेष आशीर्वाद मिलेगा और उसका पुण्य कई गुना बढ़ेगा. इस तरह जो महीना पहले उपेक्षित था, वही सबसे पवित्र और खास बन गया.

वास्तु शास्त्र: घर की सीढ़ियों पर क्यों नहीं बैठना चाहिए? जानें इसके पीछे की मान्यताएं और असर

हमारे वास्तु शास्त्र में घर की हर एक चीज का काफी खास महत्व बताया गया है. चाहे हमारे घर का मुख्य दरवाजा हो, किचन हो या फिर घर की सीढ़ियां ही क्यों न हों. जब आप इसमें बताया गए नियमों का सही से पालन करने लगते हैं तो आपकी जिंदगी काफी सुखद और समृद्धि से भरी हुई हो जाती है. वहीं, इन नियमों को नजरअंदाज करने से जीवन में परेशानियों के बढ़ने का भी खतरा रहता है. हमारे वास्तु शास्त्र में घर की सीढ़ियों को लेकर भी कुछ खास नियम बताये गए हैं, जिनमें आपको इस सवाल का जवाब भी मिल जाता है कि आखिर आपको क्यों घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए. आज हम आपको इसी सवाल का जवाब इस आर्टिकल में देने वाले हैं. जब आप इस आर्टिकल को पढ़ लेंगे तो दोबारा कभी भी घर की सीढ़ियों पर बैठने की गलती नहीं करेंगे. सीढ़ियों पर बैठने से रुकती है पॉजिटिव एनर्जी वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके घर में जो भी एनर्जी होती है वह लगातार एक जगह से दूर जगह घूमती रहती है. आपकी घर की सीढ़ियां ही इस एनर्जी के ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जाने का रास्ता मानी जाती है. ऐसे में जब कोई भी आकर सीढ़ियों पर बैठ जाता है, तो वह एनर्जी के फ्लो में रुकावट बन जाता है. मान्यताओं के अनुसार जब आप ऐसा करते हैं तो घर में पॉजिटिव एनर्जी घटने लगती है और साथ ही स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ने लग जाती है. फिनांशियल प्रॉब्लम्स से भी जोड़ा जाता है इसे वास्तु शास्त्र में हमारी घर की सीढ़ियों को ही जीवन में तरक्की करने का और आगे बढ़ने का संकेत माना गया है. ऐसे में अगर आप घर की सीढ़ियों में बैठते हैं या फिर लंबे समय तक खड़ा रहते हैं, तो हो सकता है कि आपकी तरक्की में रुकावट आ जाए. मान्यताओं के अनुसार आपकी यह गलती पैसों से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ा सकती है. कई बार इसकी वजह से आपको मेहनत का भी पूरा फल नहीं मिलता है. परिवार के रिश्तों पर भी पड़ सकता है असर आपके घर का माहौल कैसा है और वहां की एनर्जी कैसी है इस बात का असर पारिवारिक रिश्तों पर भी काफी गहरा पड़ता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर की एनर्जी बैलेंस्ड न रहे, तो छोटी से छोटी बातों पर भी स्ट्रेस और झगड़े बढ़ने लग जाते हैं. इसके अलावा जब आप सीढ़ियों पर बैठे रहते हैं या फिर उसे गंदा करके रखते हैं तो पूरे घर का माहौल भारी लगने लगता है. कई बार इसकी वजह से परिवार में झगड़े और बहस भी बढ़ जाते हैं. हेल्थ पर भी पड़ सकता है निगेटिव असर वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको इसलिए भी घर की सीढ़ियों पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा आपके घर में आने-जाने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार सीढ़ियों के आसपास धूल जमा हो जाती है, जिस वजह से इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है.  

वट सावित्री व्रत 2026: परिक्रमा के दौरान इस मंत्र से मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

आज यानी 16 मई को देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रख रही हैं.  इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का सबसे ज्यादा महत्व होता है.  शास्त्रों के अनुसार, अगर आज परिक्रमा करते समय एक विशेष मंत्र का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. आज पूजा का सबसे उत्तम समय अगर आप आज पूजा करने जा रही हैं, तो समय का खास ख्याल रखें. ज्योतिषियों के मुताबिक, आज पूजा का सबसे महाशुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है.  इस 54 मिनट के दौरान पूजा और परिक्रमा करना बेहद फलदायी माना गया है. परिक्रमा करते समय इस मंत्र का करें जाप बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए महिलाओं को कम से कम 7 या 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए.  परिक्रमा के दौरान मन ही मन इस पौराणिक मंत्र का जाप करना चाहिए: "यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे-पदे।।" इसका आसान अर्थ क्या है? इस मंत्र का मतलब है कि जाने-अनजाने में हमारे इस जन्म या पिछले जन्मों के जो भी पाप या कमियां रही हों, इस पवित्र वृक्ष की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) के हर एक कदम के साथ वे सभी नष्ट हो जाएं और हमारे परिवार में सुख-शांति आए. बरगद की पूजा क्यों है इतनी खास? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं (डालियों) में साक्षात शिव जी का वास होता है. इसके साथ ही, सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे.  यही वजह है कि आज के दिन इस पेड़ की पूजा करने से तीनों देवों के साथ माता सावित्री का भी आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है.