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इस बार बदलेगा पंचांग का गणित: 12 नहीं, 13 महीनों वाला होगा हिंदू नववर्ष 2026

नई दिल्ली Adhik Maas 2026 : वर्ष 2026 आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिसके कारण साल में 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून 2026 तक की इस अतिरिक्त अवधि को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। खगोलीय विज्ञान और अधिक मास का आधार अधिक मास का सीधा संबंध सूरज और चंद्रमा की चाल के बीच के अंतर को पाटने से है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच करीब 11 दिनों का फासला रह जाता है। जब यह अंतर बढ़ते-बढ़ते 30 दिनों के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय गणना के कारण 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है।   पौराणिक कथा और पुरुषोत्तम नाम की महिमा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' देकर इसे अत्यंत पवित्र बना दिया। इसी मास का संबंध भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के वध से भी जोड़ा जाता है। चूंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे साल के 12 महीनों में से कोई नहीं मार पाएगा, इसलिए भगवान ने इस 13वें महीने का सृजन कर अधर्म का अंत किया। यह समय धर्म की स्थापना और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय पंडितों और विद्वानों का मानना है कि अधिक मास कोई अशुभ समय नहीं है बल्कि यह ईश्वर की भक्ति के लिए रिजर्व रखा गया समय है। 17 मई से 15 जून के बीच अधिक मास महात्म्य का पाठ करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है। यह अवधि हमें भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर आत्म-मंथन करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।   वर्जित कार्य और विशेष सावधानी चूंकि यह समय पूरी तरह से ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित है, इसलिए इस दौरान सांसारिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अधिक मास में निम्नलिखित कार्य टाल देने चाहिए: विवाह और सगाई के कार्यक्रम। नया व्यापार या दुकान की शुरुआत। गृह प्रवेश और भूमि पूजन। मुंडन, जनेऊ या अन्य संस्कार। दान-पुण्य और लोकहित का महत्व इस महीने में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना, हवन और गीता का पाठ करना इस समय की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। यह महीना हमें सिखाता है कि सेवा और सकारात्मक सोच ही जीवन में वास्तविक सुख और शांति लाती है।

मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए रोज जपें ये 5 हिंदू मंत्र

भले ही इस आधुनिक युग में मनुष्य कितनी भी तरक्की क्यों ना कर लें, लेकिन वो इस बात से कभी इनकार नहीं कर सकता है कि व्यक्ति एक दूसरे की ऊर्जा से निरंतर प्रभावित होता रहता है, जो एक-दूसरे के व्यवहार और भावनाओं को भी प्रभावित कर सकती है। यह एनर्जी पॉजिटिव भी हो सकती है और नेगेटिव भी। अगर आप खुद को कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद थका हुआ, कंफ्यूज और मायूस महसूस कर रहे हैं तो आप यकीनन टॉक्सिक लोगों के साथ हैं। जबकि पॉजिटिव लोग हर स्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर जीवन के प्रति आशावादी बने रहते हैं। सकारात्मकता उन्हें तनाव, चिंता और डिप्रेशन से दूर रखती है। लेकिन नेगेटिव लोग आपकी हर चीज में कमियां ढूंढकर आलोचना करते रहते हैं। ऐसे लोग किसी भी तरह के बदलाव का विरोध करते हैं और उन्हें खुश रहने वाले लोगों से जलन होती है। अगर आप खुद को रियल लाइफ में ऐसे ही टॉक्सिक लोगों के बीच घिरा हुआ महसूस करते हैं तो ये 5 हिंदू मंत्र आपके मन को शांत रखने के साथ हर तरह की नेगेटिविटी से दूर रखने में मदद करेंगे। दुर्गा मंत्र ॐ दुम् दुर्गायै नमः मंत्र माता दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है, जो बुराई और नकारात्मकता को नष्ट करती हैं। अगर आपको लगता है कि आप नेगेटिव लोगों से घिरे हुए हैं, जो आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं तो इस मंत्र का जाप आपकी ढाल बन सकता है। यह मंत्र आपको याद दिलाता है कि खुद को याद दिलाते हैं कि किसी को भी आपको मानसिक और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। गायत्री मंत्र 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्'। यह मंत्र मन को शुद्ध करके नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है। इस मंत्र के जाप से आप सत्य को भ्रम से अलग कर पाते हैं, और डर की जगह जीवन में समझदारी से निर्णय ले पाते हैं। महामृत्युंजय मंत्र 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्'। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और सभी प्रकार के भय, नकारात्मकता और बुरे प्रभावों से रक्षा करता है। हनुमान चालीसा हनुमान चालीसा का नियमित पाठ नकारात्मक ऊर्जा और बुरे प्रभावों से रक्षा करता है। यह भगवान हनुमान की भक्ति को समर्पित है, जो शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक हैं। नृसिंह मंत्र 'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु-मृत्युं नमाम्यहम्'। भगवान नृसिंह का यह मंत्र शत्रुओं और नकारात्मक लोगों से रक्षा करता है।

घर के मंदिर में 5 मूर्तियां और सफाई रखने से आती है सकारात्मक ऊर्जा

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए। पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है। पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है। रखें इन बातों का ध्यान घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

क्या सुबह देखे गए सपने होते हैं सच? जानिए ब्रह्म मुहूर्त से उनका गहरा संबंध

अक्सर कहा जाता है कि सुबह का सपना सच होता है. हम में से कई लोगों ने बचपन से ही बड़े-बुजुर्गों से यह बात सुनी है. लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क है या यह महज एक लोक मान्यता है? विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपनों को लेकर भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व दिया गया है. आइए स्वप्न शास्त्र के अनुसार जानते हैं सुबह के सपनों का क्या मतलब है और इनके पीछे छिपा रहस्य क्या है. क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त? हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना गया है. यह समय सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है. मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन शांत एवं निर्मल रहता है. इसलिए इस समय पूजा-पाठ, ध्यान और जप करना बेहद शुभ माना गया है. क्यों खास होते हैं सुबह के सपने? ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, रात के आखिरी पहर यानी ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपने ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं. इसके पीछे कुछ कारण बताए गए हैं. इस समय मन गहरी नींद से हल्की अवस्था में आ जाता है. अवचेतन मन सक्रिय रहता है. आसपास का वातावरण शांत और ऊर्जा से भरपूर होता है. इसी वजह से इस समय देखे गए सपने भविष्य के संकेत माने जाते हैं. शुभ सपनों के संकेत स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर ब्रह्म मुहूर्त में ये चीजें दिखें तो इसे शुभ माना जाता है.     मंदिर, देवी-देवता या भगवान का दर्शन     साफ पानी या नदी में स्नान     फूल, दीपक या उजाला     सफेद वस्त्र पहने लोग ऐसे सपने सुख, सफलता और शुभ समाचार का संकेत देते हैं. अशुभ सपनों का क्या मतलब? अगर सुबह के समय बुरे या डरावने सपने आएं, जैसे गिरना, रोना, अंधेरा या तूफान, झगड़ा तो इस तरह के सपनों को मानसिक तनाव या आने वाली चुनौती का संकेत माना जाता है. क्या हर सपना सच होता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना कुछ ही दिनों में फल दे सकता है. लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे मन की कल्पना और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखता है. इसलिए हर सपना सच हो, यह जरूरी नहीं है. क्या करें अगर सुबह सपना याद रहे?     भगवान का स्मरण करें.     सकारात्मक रहें और किसी भी डर को मन में न बसने दें.  

गर्मियों में पहली बार AC चलाएं तो जरूर करें ये 5 काम

इस बार मौसम ने बहुत जल्द तेवर तीखे कर लिए हैं। आधा फरवरी खत्म ही हुआ है कि दोपहर गर्म महसूस होने लगी है। ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही दिनों में लोगों को एयर कंडीशनर शुरू करने पड़ेंगे। आप भी ऐसा करें, तो ध्यान रखें कि सीजन की शुरुआत में पहली बार AC ऑन करते समय 5 काम जरूर कर लेने चाहिए। ऐसा न करने पर स्विच ऑन करते ही एयर कंडीशनर में कोई खराबी आ सकती है और कोई न कोई बड़ा खर्चा आपके गले पड़ सकता है। पहली बार AC शुरू करने से पहले उसकी हार्ड या सॉफ्ट सर्विस, कंडेंसर और आउटडोर यूनिट की जांच, ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच, वोल्टेज और स्टेबलाइजर सेटअप करना और सही मोड का ध्यान रखना जरूरी होता है। हार्ड या कम से कम सॉफ्ट सर्विस कर लें AC को गर्मियों में पहली बार शुरू करने से पहले सर्विस जरूर करवा लें। किसी वजह से अगर हार्ड सर्विस में देरी हो रही हो तो खुद सॉफ्ट सर्विस कर लें। बता दें कि हार्ड सर्विस टेक्नीशियन जरूरी टूल्स के साथ करते हैं। वहीं सॉफ्ट सर्विस में आप फिल्टर की सफाई, एक खराब टूथब्रश और पानी से कॉइल की सफाई और संभव हो, तो तेज पानी की धार से विडों AC की पीछे से और स्पलिट एसी के आउटडोर युनिट की सफाई कर सकते हैं। कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक करें अगर आपके घर में स्पलिट एयर कंडीशनर है, तो उसके कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक कर लें। कंडेंसर आउटडोर यूनिट के पीछे मौजूद जाली को कहते हैं, तो कि लंबे समय से बंद पड़े-पड़े धूल-मिट्टी से ब्लॉक हो जाती है। उसे तेज पानी की धार से धो लें। इसके अलावा देखें कि आउटडोर यूनिट सामने या आसपास कम से कम 2-3 फीट तक कोई रुकावट न हो। AC स्विच ऑन करने के बाद गौर करें कि आउटडोर फैन या कंप्रेसर से तेज खड़कड़ाहट की आवाज तो नहीं आ रही है? ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच लंबे समय से AC बंद होता है, तो उसमें गंदगी इकट्ठा होने के चलते लीकेज की समस्या आ सकती है। ऐसे में स्प्लिट AC को पहली बार ऑन करने से पहले उसके ड्रेन पाइप को चेक कर लें। स्टेबलाइजर सेटअप करें AC को ऑन करने से पहले चेक करें कि स्टेबलाइजर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसके अलावा AC के प्लग को भी चेक करें कि कहीं भी तार कटी न हो और न ही AC का प्लग ढीला हो। अगर आप स्टेबलाइजर से जुड़ी AC की तारों को खोलकर उन्हें नए सिरे से कस दें, तो स्टेबलाइजर से जुड़ी कोई समस्या आने की गुंजाइश कम हो जाती है। शुरू में फैन मोड पर चलाएं AC AC को पहली बार शुरू करते समय उसे फैन मोड पर शुरू करें। ऐसे में हो सकता है कि AC के अंदर से कुछ गंदगी बारह आए (अगर AC हार्ड सर्वस नहीं हुआ है, तो) साथ ही अगर AC में किसी तरह की समस्या होगी, तो वह भी फैन मोड पर बिना कंप्रेसर के ऑन हुए पता चल जाएगी। जिससे कंप्रेसर तक खराबी नहीं पहुंच पाती।

बच्चों के खराब या टूटे खिलौने रखना हो सकता है अशुभ, दान करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। बच्चों के खिलौने, जो उनके बचपन का अहम हिस्सा होते हैं और जिनसे उनकी भावनाएं जुड़ी होती हैं, वास्तु की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं। अक्सर हम बच्चों के पुराने या टूटे हुए खिलौनों को स्टोर रूम में भर देते हैं या बिना सोचे-समझे किसी को दान कर देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि खिलौनों का सही रखरखाव न केवल बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि घर की सुख-शांति पर भी असर डालता है। आइए जानते हैं टूटे हुए खिलौनों से जुड़े वास्तु नियम और दान करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें। वास्तु शास्त्र में कबाड़ या टूटी हुई वस्तुओं को राहु और शनि की नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। विकास में बाधा: टूटे हुए खिलौने बच्चे की रचनात्मकता और विकास में अवरोध पैदा करते हैं। यह उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी ला सकते हैं। मानसिक तनाव: खिलौने खुशी का प्रतीक हैं। जब वे टूट जाते हैं, तो वे खंडित ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है। दुर्घटना का भय: वास्तु के अलावा, सुरक्षा की दृष्टि से भी टूटे खिलौने खतरनाक होते हैं। इनके नुकीले हिस्से बच्चे को चोट पहुंचा सकते हैं। क्या करें टूटे हुए खिलौनों का ? यदि खिलौना थोड़ा बहुत टूटा है और उसे ठीक किया जा सकता है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। यदि वह ठीक होने की स्थिति में नहीं है, तो उसे घर से बाहर निकाल देना ही बेहतर है। अक्सर लोग टूटे खिलौनों को यह सोचकर स्टोर रूम या पलंग के नीचे रख देते हैं कि 'बाद में देखेंगे'। यह घर में भारीपन और नकारात्मकता लाता है।  टूटे हुए रिमोट कंट्रोल कार या रोबोट वास्तु में दोष पैदा करते हैं। इन्हें कबाड़ में दे देना चाहिए या रीसायकल करना चाहिए।

क्रोध नहीं, संयम है ताकत: हर मेहनती इंसान के लिए 5 जीवन मंत्र

अगर आपको छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है और आप लोगों पर गुस्सा उतारने के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगते हैं तो जरा रुकिए, यह किसी सफल व्यक्ति के गुण बिल्कुल नहीं हैं। दुनिया को जीतने का हौसला रखने वाला एक सफल व्यक्ति अपनी कुछ आदतों में एक आम व्यक्ति से बिल्कुल अलग होता है। यही वो खासियत होती हैं, जो उसे आम से खास बनाकर सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद करती हैं। याद रखें, शांत रहना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि खुद पर काबू पाने का वो आसान तरीका है, जो बिना लड़े ही आधी जंग जीत लेता है। अगर आप भी जीवन में खामोश कदमों से बड़ी सफलता हासिल करना चाहते हैं तो ये 5 टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं। प्रतिक्रिया देने में जल्दबाजी न करें जब कोई आपको उकसाए या अपमान करे, तो तुरंत जवाब देने की जगह 2 सेकंड रुकें। आपकी चुप्पी सामने वाले के गुस्से को बेअसर कर देती है और आपको स्थिति जीतने का मौका देती है। कम बोलने और ज्यादा सुनने की आदत डालें जीतने वाले व्यक्ति हमेशा कम बोलते हैं और ज्यादा सुनते का गुण रखते हैं। जब आप किसी दूसरे व्यक्ति को सुन रहे होते हैं, तो आप उससे मिली जानकारी इकट्ठा कर रहे होते हैं। जितना कम आप अपने पत्ते खोलेंगे, याद रखें लोग आपकी अगली चाल को लेकर उतने ही उत्सुक और सतर्क बने रहेंगे। अपनी एनर्जी को बचाए रखें हर बहस जीतने के लिए नहीं होती। मूर्खों से उलझना अपनी मानसिक शांति को खराब करना होता है। 'आप सही कह रहे हैं' कहकर आगे बढ़ जाना सबसे बड़ी कूटनीति है, जो सफलता का रास्ता जल्दी तय करने में मदद करती है। दिन में कम से कम 15 मिनट पूरी तरह मौन रहें। यह अभ्यास आपके दिमाग के 'शोर' को कम करता है और आपकी निर्णय लेने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। परिणाम पर नहीं, प्रक्रिया पर ध्यान दें दुनिया को जीतने का हौसला वही रखते हैं, जिनका मन भविष्य की चिंता या अतीत के पछतावे में नहीं उलझा रहता है। अपने आज में जीने से आपको असली मानसिक शांति मिलेगी। अपनी कमियों को स्वीकारें एक सफल व्यक्ति को ना तो अपनी तारीफ से और ना ही बुराई से कोई फर्क पड़ता है। जब आप खुद को पूरी तरह स्वीकार कर लेते हैं, तो दूसरो की कोई भी दिल दुखाने वाली बात, आपको चोट नहीं पहुंचा सकती है। अहंकार हमेशा अशांति पैदा करता है। विनम्र व्यक्ति पानी की तरह सरल होने के साथ अपना रास्ता खुद बनाने का हुनर भी जानता है। इसलिए हमेशा विनम्रता का गुण बनाए रखें।  

खरमास 2026: मार्च में कब से कब तक रहेगा, शादी के कितने मुहूर्त हैं उपलब्ध?

सनातन धर्म में खरमास अशुभ समय माना जाता है. ये एक माह की अवधि होती है. अशुभ माने जाने की वजह से इस अवधि में कोई शुभ काम नहीं किया जाता है. एक साल में दो बार खरमास लगता है. पहला खरमास मार्च या अप्रैल में लगता है, तो दूसरा खरमास नवंबर या दिसंबर में लगता है. पंचांग के आधार पर ग्रहों के राजा सूर्य देव के गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करने पर खरमास लगता है. खरमास के दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह आदि शुभ काम सब रोक दिए जाते हैं. मान्यता है कि जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के प्रभावों में कमी आ जाती है. वहीं गुरु के शुभ प्रभाव भी कम हो जाते हैं. शुभ कामों विशेषकर विवाह के लिए सूर्य और गुरु की शुभता आवश्क मानी जाती है. मार्च के माह में खरमास लगने वाला है. ऐसे में आइए जानते हैं कि खरमास से पहले मार्च के महीने में कितने विवाह मुहूर्त हैं. मार्च में कब लग रहा है खरमास? अभी सूर्य देव श​नि की राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं. पंचांग के अनुसार, सूर्य मीन राशि में 15 मार्च दिन रविवार को 1 बजकर 8 मिनट पर प्रवेश करेंगे. उस समय सूर्य की मीन संक्रांति होगी. उसके साथ ही मार्च के खरमास का प्रारंभ हो जाएगा. ये खरमास एक माह तक रहेगा. इसके बाद सूर्य का मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल को सुबह में 9 बजकर 38 मिनट पर होगा. इसी दिन खरमास का समापन होगा. मार्च 2026 में विवाह मुहूर्त 2 मार्च- सोमवार, 3 मार्च- मंगलवार, 4 मार्च- बुधवार, 7 मार्च- शनिवार, 8 मार्च- रविवार, 9 मार्च- सोमवार, 11 मार्च- बुधवार, 12 मार्च- गुरुवार. विवाह मुहूर्त तय करते समय रखें इन बातों ध्यान     अभिजीत मुहूर्त और गोधूलि बेला विवाह के लिए अत्यंत शुभ कही जाती है.     शुभ करण: किस्तुघ्न, बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज     विवाह के लिए शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी, त्रयोदशी     विवाह के लिए शुभ वार:सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त को सबसे सात्विक और सकारात्मक ऊर्जा वाला होता है. यही कारण है कि प्राचीन काल में विवाह प्रातःकाल या सूर्यास्त के समय होते थे.  

भाई दूज 4 या 5 मार्च को? भ्रम दूर करें—जानें सही तारीख, तिलक का शुभ समय और पूजा विधि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाया जाता है और हर का अपना-अपना महत्व है। पहला भाई दूज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और दूसरा कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ने वाले भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाने के साथ सुख-समृद्धि, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इस साल द्वितीया तिथि दो दिन होने के कारण भाई दूज की सही तिथि को लेकर काफी असमंजस स्थिति बनी हुई है। जानें होली भाई दूज की सही तिथि, तिलक लगाने का सही समय से लेकर विधि तक…. कब है होली भाई दूज 2026? चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि आरंभ- 4 मार्च को शाम 4 बजकर 48 मिनट से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त- 5 मार्च को शाम 05:03 बजे होली भाई दूज 2026 तिथि– 5 मार्च 2026, गुरुवार होली भाई दूज 2026 भाई को तिलक करने का मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि सुबह से लेकर शाम 5:03 तक है। इस दौरान बहनें भाई को तिलक लगा सकती है। लेकिन राहुकाल का अवश्य ध्यान रखें। होली भाई दूज 2026 राहुकाल का समय द्रिक पंचांग के अनुसार, दोपहर 2:05 से दोपहर 3:33 तक राहुकाल है। होली भाई दूज का चौघड़ियां मुहूर्त शुभ – उत्तम- 06:42 ए एम से 08:10 ए एम लाभ – उन्नति- 12:33 पी एम से 02:00 पी एम अमृत – सर्वोत्तम- 02:00 पी एम से 03:28 पी एम शुभ-उत्तम- 04:56 पी एम से 06:23 होली भाई दूज पर बहनें ऐसे करें तिलक द्वितीया तिथि को शुभ मुहूर्त पर एक थाली में सिंदूर, चंदन, अक्षत, मिठाई, गुझिया और घी का दीपक रख लें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के बाद भाई को एक लकड़ी की चौकी या फिर ऊंचेे स्थान में बैठाएं। इसके बाद उसके सिर पर कपड़ा या रुमाल रखें। फिर माथे पर तिलक और अक्षत लगाएं और मिठाई खिलाएं। फिर घी के दीपक से उसकी आरती उतार लें। अंत में भाई अपनी बहन के पैर छूकर सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद लें और कुछ उपहार दें।

होली के पावन दिन करें यह छोटा उपाय, धन-वैभव से भर जाएगा पूरा साल

हिंदू धर्म में होली का त्योहार न केवल रंगों और खुशियों का प्रतीक है, बल्कि यह नकारात्मकता को मिटाकर जीवन में सकारात्मकता लाने का भी एक विशेष अवसर होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली के दिन किए गए कुछ खास उपाय व्यक्ति की सोई हुई किस्मत को चमका सकते हैं. इस साल होलिका दहन 3 मार्च को है और रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को खेली जाएगी. दिवाली की तरह ही होली की सुबह भी मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि को आकर्षित करने के लिए बेहद शुभ मानी जाती है. आइए जानते हैं उन अचूक उपायों के बारे में जिन्हें होली की सुबह करने से आपके घर में पूरे साल धन-धान्य की कमी नहीं होगी. सूर्योदय से पहले स्नान कर करें पूजा होली की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या हल्दी मिला लें. इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अपने इष्टदेव का पूजन करें. मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पूरे साल घर में खुशहाली बनी रहती है. पीपल या तुलसी में जल अर्पित करें होली की सुबह स्नान के बाद पीपल या तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं. जल में थोड़ा सा दूध और अक्षत (चावल) मिला सकते हैं. तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है, इसलिए यह उपाय आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है. घर के मुख्य द्वार पर लगाएं गुलाल का तिलक होली के दिन सुबह घर के मुख्य दरवाजे पर हल्दी या गुलाल से स्वस्तिक बनाएं. साथ ही घर के सदस्यों के माथे पर चंदन या गुलाल का तिलक लगाएं. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और आपसी प्रेम बढ़ता है. धन वृद्धि के लिए करें ये सरल उपाय एक लाल कपड़े में थोड़ी सी हल्दी, 5 कौड़ियां और चांदी का सिक्का बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने की जगह पर रख दें. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, यह उपाय आर्थिक संकट दूर करने और धन वृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है. होलिका दहन की राख का करें प्रयोग 3 मार्च को होने वाले होलिका दहन के बाद उसकी थोड़ी सी राख घर लाकर सुरक्षित रखें. होली की सुबह उस राख का तिलक लगाने से बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है. यह उपाय विशेष रूप से परिवार की सुरक्षा और उन्नति के लिए शुभ माना गया है. जरूरतमंदों को रंग और मिठाई दान करें होली के दिन सुबह किसी जरूरतमंद को रंग, मिठाई या वस्त्र दान करें. दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है.