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मंगलवार के भौम प्रदोष की कथा: क्यों कहा जाता है कर्ज से छुटकारे का दिन?

हर महीने की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को बेहद प्रिय मानी गई है, क्योंकि इस तिथि पर प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. त्रयोदशी तिथि पर और प्रदोष काल में ही देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक और स्तुति की थी, जब भोलेनाथ ने समुद्र मंथन से निकले विष को अपने गले में धारण किया था. इसी वजह इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है. आज 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत है और मंगलवार पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ किए बिना पूजा पूर्ण नहीं माना जाता है. ऐसे में आइए भौम प्रदोष व्रत की कथा पाठ करते हैं. भौम प्रदोष व्रत महत्व भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा की जाती है. यह व्रत रखने से भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से जीवन की बाधाएं और दुख-दर्द दूर होते हैं. भौम प्रदोष व्रत करने से मंगल ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत को करने से आर्थिक तंगी दूर होती है, सुख-समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है. साथ ही, यह संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. भौम प्रदोष व्रत कथा 2025 भौम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा एक वृद्धा की कहानी से जुड़ी है जो हनुमान जी की भक्त थी. एक नगर में एक वृद्धा रहती थी जिसका एक पुत्र था. वह वृद्धा हनुमान जी की बहुत बड़ी भक्त थी और हर मंगलवार को उनका व्रत किया करती थी. एक बार हनुमान जी ने उसकी भक्ति की परीक्षा लेने का फैसला किया. हनुमान जी एक साधु के वेश में वृद्धा के घर आए और भोजन मांगा. साधु बनकर हनुमान जी ने उस वृद्धा से कहा कि वह जमीन लीपे, लेकिन वृद्धा ने मना कर दिया और कोई दूसरा काम करने को कहें. फिर साधु ने उस वृद्धा से कहा कि वह अपने पुत्र को बुलाए, क्योंकि वह उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाना चाहते हैं. यह सुनकर वृद्धा दुविधा में पड़ गई, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण उसने अपने बेटे को साधु को सौंप दिया. फिर वृद्धा के हाथों से उसके बेटे की पीठ पर आग जलाई गई और वृद्धा दुखी मन से घर में चली गई. जब भोजन के बाद साधु ने वृद्धा को अपने पुत्र को बुलाने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया. लेकिन जब साधु नहीं माने, तो वृद्धा ने अपने बेटे को पुकारा. जब वृद्धा ने अपने पुत्र को जीवित देखा तो उसे देखकर बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. तब हनुमान जी ने अपने असली रूप में आकर वृद्धा को आशीर्वाद दिया.

पूजा में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा: जानें मंदिर की सही दिशा और वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा का पालन करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और जीवन में कोई संकट नहीं आता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की शुभ दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में मंदिर के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि मंदिर से जुड़े नियम के बारे में। किस दिशा में होना चाहिए मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के लिए पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व-उत्तर दिशा को भी मंदिर के लिए उत्तम माना जाता है। इससे पूजा सफल होती है। कैसा होना चाहिए मंदिर घर में मंदिर बनवाने के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जहां बाथरूम पास न हो और स्वच्छता के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवा सकते हैं। कहां नहीं होना चाहिए मंदिर वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, मंदिर को भूलकर भी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से जातक को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में क्‍लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मंदिर को बेडरूम में भी नहीं बनवाना चाहिए। किस रंग का बनवाएं मंदिर मंदिर के रंग का विशेष ध्यान रखें। मंदिर सफेद, पीला या लाल रंग का होना चाहिए। इन रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान पूजा के दौरान भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ समय के बाद फूल सुख जाते हैं। सूखे हुए फूलों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में सूखे फूल रखने से जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फूल सुख जाने पर किसी बहते हुए पवित्र नदी में बहा दें या फर किसी पौधे में ड़ाल दें। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा को विराजमान करने से पहले उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर प्रतिमा को स्थापित करें।  

दिसंबर में शादी के 3 शुभ दिन तय, साथ ही देखें नामकरण व गृह प्रवेश मुहूर्त

हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखने के बाद ही किए जाते हैं। क्योंकि यह माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य शुभ परिणाम देते हैं। साल 2025 के आखिरी माह यानी दिसंबर में विवाह  के लिए केवल 3 ही दिन शुभ बताए जा रहे हैं। विवाह मुहूर्त – दिसंबर में विवाह के लिए बस 3 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जो 4, 5 और 6 दिसंबर को रहने वाले हैं। गृह प्रवेश मुहूर्त – हिंदू पंचांग के अनुसार गृह प्रवेश के लिए 1, 5 और 6 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। नामकरण संस्कार मुहूर्त – दिसंबर में नामकरण संस्कार के लिए 4, 8, 13, 14, 17, 22, 24, और 28 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। प्रॉपर्टी खरीद के लिए शुभ मुहूर्त – दिसंबर में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 5, 11, 18, 19, और 26 दिसंबर की तिथियां शुभ मानी जा रही हैं। नया काम शुरू करने का मुहूर्त – अगर आप दिसंबर में नया काम शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए 3, 11, 17, 21, 26 और 27 दिसंबर का दिन शुभ रहेगा। इन दिन से बंद हो जाएंगे शुभ काम 16 दिसंबर 2025 को सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिससे खरमास की शुरुआत हो जाएगी। वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को होने जा रहा है। ऐसे माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में देवगुरु बृहस्पति और सूर्य देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, जिससे उस कार्य से शुभ परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि जैसे कार्य करने की मनाही होती है।  

आज का राशिफल 2 दिसंबर: सभी 12 राशियों के लिए दिन कैसा रहेगा, पढ़ें पूरी भविष्यवाणी

मेष 2 दिसंबर के दिन आज किसी भी अवसर को हाथ से न जाने दें। अपने करियर के बेहतरीन पलों पर फोकस रखें। पैसों के मामले में आप महत्वपूर्ण डिसीजन लेने में अच्छे हैं। जो लोग किसी रिलेशन में हैं, उनके लिए आज की एनर्जी पार्टनर के साथ आपके रिश्ते में फिर से रोमांस जगा सकती है। वृषभ 2 दिसंबर के दिन ऑफिस में खुशनुमा और उत्पादक जीवन जिएं। वित्तीय समृद्धि आज के दिन की विशेषता रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा है। अगर आप आज डेट पर नहीं जा रहे हैं तो ज्यादा स्ट्रेस न लें। मेंटल हेल्थ पर गौर करें। मिथुन 2 दिसंबर के दिन प्रोफेशनल सफलता भी मिल सकती है। समृद्धि के कारण आप समझदारी से फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। आज स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। रिश्ते में प्यार के नए पहलू तलाशें। कर्क 2 दिसंबर के दिन बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। वित्तीय स्थिति अच्छी है और निवेश पर विचार कर सकते हैं। अपने पार्टनर की गुड क्वालिटीज पर फोकस करें, जिससे आपका रिलेशन मजबूत बना रहेगा। सिंह 2 दिसंबर के दिन पैसों का मैनेजमेंट समझदारी से करें। आज कोई बड़ी बीमारी भी आपको परेशान नहीं करेगी। आपको परेशानियां पसंद हैं क्योंकि वे आपको मजबूत बनाती हैं। प्रेम-संबंधी समस्याओं को सुलझाएं। कन्या 2 दिसंबर के दिन मुश्किल परिस्थितियों पर गौर करें। छिपी हुई जानकारी खोजने में आपका कौशल इस समय विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा। उन पदों के बारे में सोचें, जिनके लिए रिसर्च, योजना या अन्य लोगों के साथ काम करने की आवश्यकता होती है। तुला 2 दिसंबर के दिन आपका प्रेम जीवन अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसी नौकरी के बारे में सोचें, जिनमें समस्या-समाधान, प्रोडक्ट या स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता होती है।सिंगल लोग दफ्तर या जिम में अपनी डेट से मिल सकते हैं। वृश्चिक 2 दिसंबर के दिन समृद्धि के कारण आप समझदारी भरे पैसों से जुड़े डिसीजन ले सकते हैं। आज आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आप अपने साथी को संतुष्ट और खुश रखने के लिए प्रेम संबंधों में समस्याओं का समाधान करेंगे। धनु 2 दिसंबर के दिन सफल पेशेवर जीवन का आनंद लें। वित्तीय स्थिति भी अच्छी रहेगी। लव के मामले में आज आपको अपने पार्टनर की अच्छे से केयर करनी चाहिए। प्रोफेशनल रूप से अपनी योग्यता साबित करने के लिए ऑफिस में चुनौतियों पर विजय पाएं। मकर 2 दिसंबर के दिन आर्थिक रूप से निवेश के अवसर मिल सकते हैं। अपने जीवन की वास्तविकता पर ध्यान केंद्रित करें। अपने काम की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ठोस बदलाव करें। कपल्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे एक हेल्दी लाइफस्टाइल पाने की दिशा में काम करें। कुंभ 2 दिसंबर के दिन अपने पाचन और सामान्य स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान दें। अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए दफ्तर में अवसरों का लाभ उठाएं। अपने पार्टनर के साथ टाइम बिताते हुए प्रेमी को खुश रखें। मीन 2 दिसंबर के दिन सिंगल लोग ऑफिस पर संभावित पार्टनर से मिल सकते हैं। पेशेवर जीवन के दबाव से बचने बचने के लिए जरूरी एक्टिविटी करें। आज इमोशनल संतुलन को प्रभावित करने वाले पिछले मुद्दों से निपटने का एक अच्छा समय है।

रविवार को करें सूर्यदेव का व्रत एवं पूजन और पायें शुभ फल

जो लोग अच्छेे स्वावसथ्यज और घर में सुख समृद्धि की कामना करते हैं उन्हें  पूरी श्रद्धा के साथ रविवार का व्रत एवं पूजन करना चाहिए। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है। इसलिए नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें। सूर्य के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें, और आदित्य हृदय का पाठ करें। पूजा के बाद भगवान सूर्यदेव का स्मंरण करते हुए व्रत का संकल्प् लें। इस व्रत में बिना तेल और नमक के भोजन करना चाहिये। मान्यनता है कि एक वर्ष तक नियमित रूप से उपवास रखने के पश्चात व्रत का उद्यापन करने वाला जीवन में सभी सुखों को भोगता है और मृत्यु बाद मोक्ष को पाता है। इस दिन संध्या के समय भी सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करना उत्ताम होता है। कहते हैं कि रविवार को सूर्यदेव के नाम का उपवास कर उनकी आराधना करने वाले की सारी द्ररिद्रता दूर हो जाती है। रविवार के व्रत की कथा इस प्रकार है। रविवार को सूर्योदय से पहले शुद्ध होकर स्नान आदि करने के बाद इस कथा का श्रवण करना चाहिए। इस प्रकार है रविवार व्रत कथा रविवार की कथा में बताया गया है कि एक बुढ़िया हर रविवार प्रात:काल उठकर नहा धोकर अपने घर आंगन को गाय के गोबर से लीपती फिर सूर्य देव की पूजा करती और उन्हें भोग लगाकर ही भोजन करती थी। बुढ़िया के पास गाय नहीं इसलिये पड़ोसियों के यहां से गाय का गोबर लाती। उसकी इस आस्ज्ञाु    से उस पर सूर्यदेव के अनुग्रह से उसका घर धन धान्य से संपन्न रहने लगा। बुढ़िया के दिन फिरते देख उसकी पड़ोसन जलने लगी। उसने अपनी गाय को सामने से हटा दिया जिससे बुढ़िया को गोबर नहीं मिला और घर की लिपाई नहीं हुई और बुढ़िया ने कुछ नहीं खाया और निराहार रही। सपने में सूर्य देव ने उससे पूछा कि आज आपने मुझे भोग क्यों नहीं लगाया। बुढ़िया ने कहा कि उसके पास गाय नहीं है और वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर लिपाई करती थी। पड़ोसन ने अपनी गाय अंदर बांध ली जिस कारण वह घर की लिपाई नहीं कर सकी और इसीलिए ना भोजन बना पाई ना भोग लगा सकी। इस पर सूर्य देव ने कहा वे उनकी श्रद्धा व भक्ति से बहुत प्रसन्न है और उसे एक इच्छास पूर्ण करने वाली गाय दी। बुढ़िया बड़ी श्रद्धा के साथ गाय की सेवा करने लगी। पड़ोसन की ईष्याक तब और बढ़ गई जब उसने देखा कि गाय सोने का गोबर कर रही है। बुढ़िया के वहां ना होने का फायदा उठा कर वो सोने का गोबर उठा लाई और सामान्या गोबर उसके स्थाुन पर रख दिया। अब वो रोज ही ऐसा करती और सोने की मदद से अमीर होती गई। तब सूर्य देव ने सोचा कि उन्हें ही कुछ करना पड़ेगा। उन्होंने शाम को तेज आंधी चलवा दी, आंधी के कारण बुढिया ने गाय को अंदर बांध दिया सुबह उसने देखा कि गाय तो सोने का गोबर करती है। फिर वह हर रोज गाय को अंदर बांधने लगी। जब पड़ोसन को सोना नहीं मिलार तो जल कर उसने नगर के राजा को बता दिया कि बुढ़िया के पास सोने का गोबर करने वाली गाय है। राजा ने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया के यहां से गाय लाने का हुक्म दिया। सैनिक गाय ले आये। देखते ही देखते गोबर से सारा महल भर गया, और बदबू फैल गई। राजा को सपने में सूर्य देव ने दर्शन दे कर कहा कि मूर्ख यह गाय उस वृद्धा के लिये ही है। वह हर रविवार नियम पूर्वक व्रत रखती है। इस गाय को वापस लौटाने में ही तुम्हारी भलाई। राजा ने बुढ़िया को बुलाकर बहुत सारा धन दिया और क्षमा मांगते हुए सम्मान पूर्वक वापस भेजा। साथ पड़ोसन को दंडित किया। इसके अलावा उसने पूरे राज्य में घोषणा करवाई की आज से सारी प्रजा रविवार के दिन उपवास रखेगी व सूर्य देव की पूजा करेगी। उसके प्रताप से राजा का राज्य भी धन्य धान्य से संपन्न हुआ और प्रजा में सुख शांति रहने लगी।  

ऑफिस में कभी न बताएं ये 3 बातें, वरना होगा बड़ा नुकसान

काफी सारे लोगों को शिकायत होती है कि उनके ऑफिस में लोग एक दूसरे की चुगली और गॉसिप करते हैं। जिसका असर कई बार उनके करियर पर भी पड़ता है। अगर आप ऑफिस में होने वाली गॉसिप का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं और करियर में ग्रोथ चाहते हैं, तो भूलकर भी इन 3 बातों को कलीग्स या सीनियर के साथ शेयर ना करें। ना शेयर करें अपनी पर्सनल प्रॉब्लम पर्सनल रिलेशनशिप में, फाइनेंशियल या फिर करियर से जुड़ी किसी भी तरह की प्रॉब्लम्स को भूलकर भी अपने कलीग्स या फिर सीनियर्स के साथ शेयर नहीं करना चाहिए। ऐसा करना सबसे बड़ी भूल है क्योंकि ज्यादातर काम करने वाली जगहों पर लोगों की किसी ना किसी कमजोरी का फायदा उठाकर हैरेस किया जाता है। ना करें किसी की बुराई अपने काम करने वाली जगह पर भूलकर भी किसी सीनियर, जूनियर या फिर कलीग्स की बुराई नहीं करनी चाहिए। ऑफिस में हो रही गॉसिप का हिस्सा भूलकर भी नहीं बनना चाहिए और ना हीं उन्हें सपोर्ट करना चाहिए। हमेशा काम की जगह पर न्यूट्रल रहना चाहिए। इस्तीफा देते वक्त ना करें संस्थान की बुराई जब भी आप किसी संस्थान से इस्तीफा दे रहे हैं तो करियर की ग्रोथ के लिए भूलकर भी उस संस्थान या एचआर, सीनियर की बुराई लिखित में ना करें। ऐसा करने से करियर की ग्रोथ पर निगेटिव असर पड़ता है क्योंकि फ्यूचर में हो सकता है आपको वापस उसी काम की जगह पर आना पड़े। किसी भी तरह की खराब सिचुएशन से बचने के लिए भूलकर भी बुराई ना करें।  

दिसंबर 2025 के शुभ विवाह मुहूर्त: कब-कब बजेंगी शहनाइयां?

दिसंबर 2025, वर्ष का अंतिम महीना, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए बहुत ही शुभ और विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय मौसम भी अनुकूल रहता है और त्योहारों का उत्साह भी रहता है। हालांकि, दिसंबर में विवाह के लिए शुभ मुहूर्तों की संख्या अन्य महीनों की तुलना में कम हो सकती है क्योंकि महीने के मध्य में खरमास शुरू होने की संभावना होती है। हिंदू पंचांग और ज्योतिष गणना के आधार पर, यहां जानें दिसंबर 2025 में विवाह की शुभ तिथियां और मुहूर्त- दिसंबर में विवाह के लिए शुभ तिथियां पंचांग के अनुसार, दिसंबर 2025 में विवाह के लिए निम्नलिखित तिथियां अत्यंत शुभ और मांगलिक मानी जा रही हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार केवल 3 मुहूर्त हैं- तिथियां 4 दिसंबर 2025    गुरुवार 5 दिसंबर 2025    शुक्रवार 6 दिसंबर 2025    शनिवार मुहूर्त का महत्व हिंदू धर्म में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता है और इसका सफल होना बहुत हद तक सही मुहूर्त पर निर्भर करता है। विवाह मुहूर्त के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण आदि का विशेष ध्यान रखा जाता है। सर्वमान्य शुभ मुहूर्त (4, 5, और 6 दिसंबर): दिसंबर के पहले सप्ताह में पड़ने वाले ये तीन दिन विवाह के लिए सबसे शुभ और दोषरहित माने जा रहे हैं। इन तिथियों पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है, जो वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अटूट प्रेम लाता है। 4 दिसंबर (गुरुवार): इस दिन का मुहूर्त विवाह के लिए अत्यंत शुभ है। 5 दिसंबर (शुक्रवार): शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह और दांपत्य सुख का कारक माना जाता है। शुक्रवार का दिन होने के कारण यह मुहूर्त और भी मंगलकारी हो जाता है। 6 दिसंबर (शनिवार): शनिवार का दिन भी शुभ नक्षत्रों के संयोग से विवाह के लिए उपयुक्त है।

सफलता और समृद्धि के लिए दिसंबर 2025 की सफला एकादशी का सही समय और पूजा

साल 2025 की समाप्ति से पहले आने वाली सफला एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, सफला एकादशी व्रत को जीवन में हर तरह की सफलता और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। यह पावन व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी से छुटकारा मिलता है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। तो आइए जानते हैं सफला एकदाशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में- सफला एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त सफला एकादशी तिथि का आरंभ 14 दिसंबर 2025 को रात 08 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और एकादशी तिथि का समापन 15 दिसंबर 2025 को रात 10 बजकर 09 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, सफला एकादशी व्रत की तिथि  सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। सफला एकादशी 2025 पूजा विधि सफला एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। पूजा स्थल को साफ कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान को पंचामृत, धूप, दीप, पीले फूल, फल, नारियल, सुपारी और तुलसी दल अर्पित करें। इस व्रत में रात भर जागकर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करने का विशेष महत्व है। दिनभर और रात्रि जागरण के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें। अंत में भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं और प्रसाद सभी में वितरित कर दें। व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर ही स्वयं पारण करें।

आज का राशिफल 1 दिसंबर: किस्मत किस पर होगी मेहरबान? पढ़ें 12 राशियों का पूरा भविष्यफल

मेष: 1 दिसंबर के दिन उत्पादक बनने के लिए पेशेवर चुनौतियों का समाधान करें। प्रेमी को खुश रखें। आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन का उपयोग करें। वित्तीय सफलता मिलेगी। टीम प्रोजेक्ट में अहंकार को हावी न होने दें। ऐसी एक्टिविटी करने से बचें, जो तनाव पैदा करती हैं। वृषभ: 1 दिसंबर के दिन प्रेमी के साथ अधिक समय बिताने पर विचार करें। धन आपके पक्ष में रहेगा। स्वास्थ्य भी अच्छा है। काम पर चुनौतियों को मात देने के सर्वोत्तम संभव तरीकों पर विचार करें। करियर में सफलता पाने के लिए आधिकारिक दबाव को संभालें। मिथुन: 1 दिसंबर के दिन आपकी सफल वित्तीय स्थिति आपको महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगी। ऑफिस में प्रदर्शन आपका प्रोडक्रटिव हेगा और आप काम पर अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल होंगे। कर्क: 1 दिसंबर के दिन आज ऑफिस पर ऐसे नए काम हाथ में लें, जो आपकी पेशेवर क्षमता को परखें। आज ऑफिस और निजी जीवन दोनों ही उत्पादक हैं। स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सिंह: 1 दिसंबर के दिन प्यार का जश्न मनाएं। भविष्य के बारे में भी सोचें। प्रोफेशनल चुनौतियों का सामना होगा। स्मार्ट इन्वेस्टमेंट से लाइफ में खुशहाली आएगी। आज आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कन्या: 1 दिसंबर के दिन सेहत से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कतें आ सकती हैं। आपकी लव लाइफ में कोई परेशानी नहीं है। आप ऑफिस में अच्छा परफॉर्म करेंगे। आज के दिन हेल्थ पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। तुला: 1 दिसंबर के दिन माता-पिता के सपोर्ट से प्यार से जुड़े फैसले लें। कोई बड़ी प्रोफेशनल चुनौती आपको परेशान नहीं करेगी। जबकि फाइनेंशियल सफलता एक और खासियत रहेगी। आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी। वृश्चिक: 1 दिसंबर के दिन आर्थिक रूप से आप सही डिसीजन लेने में अच्छे हैं। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कुछ छोटी-मोटी अनबन रिश्ते को तोड़ नहीं सकतीं, बल्कि यह और मजबूत होता है। प्रोफेशनल सफलता आपके साथ रहेगी। धनु: 1 दिसंबर के दिन रिश्ते में रोमांस की दिक्कतों को ठीक करें और एक क्रिएटिव लव लाइफ की तलाश करें। प्रोफेशनली आप अच्छे हैं, और आपकी हेल्थ एकदम सही है। पूरे दिन खुश रहें। मकर: 1 दिसंबर के दिन रिश्ते में छोटी-मोटी दिक्कतें होंगी। पक्का करें कि आप उन्हें सॉल्व कर लें। वर्कप्लेस पर प्रोडक्टिव बने रहने के लिए प्रोफेशनल चुनौतियों को सुलझाएं। पैसा और हेल्थ दोनों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कुंभ: 1 दिसंबर के दिन फाइनेंशियली आपकी लाइफ स्टेबल रहेगी। पॉजिटिव सोच के साथ रिश्ते को बचाएं। प्रोफेशनल मामलों को सुलझाने पर काम करें। खर्च पर कंट्रोल रखें, जबकि आपकी हेल्थ में दिक्कतें हो सकती हैं। मीन: 1 दिसंबर के दिन आज प्रेम जीवन में हर मुद्दे को सुलझाएं। ध्यान रखें कि आपका रिश्ता मजबूत बना रहे। दफ्तर में कमिटमेंट दिखाएं, जिससे आपकी पेशेवर क्षमता साबित होगी। आसान प्लान और दोस्ताना सलाह पर भरोसा करें।

रिलेशनशिप बिगाड़ देते हैं ये 5 पति-संकेत, चाणक्य नीति से जानें सच्चाई

व्यक्ति के जीवन में सुख-दुख मौसम की तरह आते-जाते रहते हैं। जिनसे निपटने के लिए कई बार जीवनशैली तो कभी व्यक्ति के स्वभाव में बदलाव जरूरी हो जाता है। जीवन से जुड़े ऐसे ही कई बदलाव और व्यक्ति के स्वभाव के बारे में चाणक्य नीति में कई बातें कही गईं हैं। जीवन पर आधारित चाणक्य के सूत्र आज भी उतने ही कारगर हैं जितने तब हुआ करते थे। खास बात यह है कि चाणक्य के ये सूत्र चाणक्य नीति के तौर पर हमारे पास मौजूद हैं। चाणक्य नीति में बहुत सी ऐसी बातें दर्ज हैं जिन्हें अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति खुशहाल और सफल जीवन जी सकता है। आचार्य चाणक्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'चाणक्य नीति' में ऐसे पुरुषों के बारे में भी बताया है, जो विवाह के बाद अपनी पत्नी का जीवन खराब कर देते हैं। ऐसे खराब पतियों को पहचानने के लिए 'चाणक्य नीति' में 5 निशानियां बताई गईं हैं। आलसी पुरुष चाणक्य नीति के अनुसार शादी से पहले मर्दों के कंधों पर घर की कोई खास जिम्मेदारी नही होती है। लेकिन शादी के बाद उन्हें परिवार के साथ पत्नी और बच्चों के खर्च भी उठाने पड़ते हैं। लेकिन जो मर्द आलसी होता है और अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से नहीं उठाता है, शादी के बाद परिवार पर बोझ बन जाता है। ऐसे पुरुष काम करने से या तो हमेशा बचते रहते हैं या फिर उसे कल पर टालते रहते हैं। ऐसे मर्द शादी के बाद घर की जिम्मेदारियां नहीं निभाने की वजह से अपनी पत्नी के लिए मानसिक और आर्थिक परेशानी का कारण बनते हैं। कमजोर आर्थिक स्थिति आचार्य चाणक्य का कहना था कि जो पुरुष घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कोशिश नहीं करते, वो शादी के बाद हमेशा अपने खर्च और घर की जरूरतों के लिए पत्नी पर ही निर्भर रहते हैं। जिसकी वजह से धीरे-धीरे उनके रिश्तों में तनाव और खटास पैदा होने लगती है। जो शादीशुदा जीवन की डोर को कमजोर बनाती है। नशे के आदी पुरुष चाणक्य नीति के अनुसार नशे की लत में डूबे पुरुष ना सिर्फ अपनी सेहत बल्कि परिवार की शांति, रिश्तों में बचे प्यार और परिवार की इज्जत, हर चीज को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे पुरुषों की यह आदत शादी के बाद पत्नी के लिए बोझ औ दुख का कारण बन जाती हैं। गुस्सैल स्वभाव वाले पुरुष आचार्य चाणक्य के अनुसार अत्यधिक गुस्सा करने वाले पुरुष अपने स्वभाव की वजह से पत्नी के साथ अपने रिश्ते को कमजोर बना देते हैं। ऐसे पुरुष पत्नी को असुरक्षित महसूस करवाकर पूरे परिवार के लिए तनाव और डर का कारण बन जाते हैं। जिम्मेदारी से भागने वाले पुरुष शादी के बाद जो मर्द अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने से पीछे भागते हैं, पत्नी के लिए तनाव और चिंता का कारण बनने लगते हैं।