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गलत दिशा में टंगा कैलेंडर रोक सकता है तरक्‍की! जानें वास्तु शास्त्र के 5 जरूरी नियम

वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु की एक निश्चित दिशा और ऊर्जा बताई गई है। कैलेंडर हर घर में होता है। लेकिन, अक्सर हम कैलेंडर को खाली दीवार देखकर कहीं भी टांग देते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कैलेंडर केवल तारीखें देखने का जरिया नहीं है। बल्कि, यह आपके समय और प्रगति का प्रतीक है? कैलेंडर आपके जीवन पर काफी हद तक असर डालता है। गलत दिशा में लगा कैलेंडर न केवल आपकी तरक्की को रोक सकता है, बल्कि घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी ला सकता है। आइए जानते हैं कैलेंडर से जुड़े वास्तु के वो 5 नियम जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं। दक्षिण दिशा है पूरी तरह वर्जित वास्तु शास्त्र के अनुसार, कैलेंडर को कभी भी दक्षिण दिशा (South) में नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण दिशा को 'ठहराव' की दिशा माना जाता है और इसके स्वामी यमराज हैं। अगर, आप यहां कैलेंडर लगाते हैं, तो यह आपके परिवार के सदस्यों की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने का काम करता है। इससे समय आपके पक्ष में नहीं रहता और घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ सकता है। तरक्की के द्वार खोलती हैं ये दिशाएं पूर्व दिशा (East): पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं, जो उदय और प्रगति के प्रतीक हैं। यहां कैलेंडर लगाने से जीवन में नए अवसर मिलते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है। लाल या गुलाबी रंग के कैलेंडर यहाँ शुभ होते हैं। उत्तर दिशा (North): यह दिशा कुबेर देव की है। यहाँ कैलेंडर लगाने से धन लाभ और करियर में उन्नति होती है। उत्तर में हरे या नीले रंग के कैलेंडर का प्रयोग करना बेहतर होता है। पश्चिम दिशा (West): अगर आप अपने रुके हुए कामों को गति देना चाहते हैं, तो पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाना लाभप्रद होता है। मुख्य दरवाजे और दरवाजे के पीछे न लगाएं अक्सर जगह बचाने के लिए लोग कैलेंडर को दरवाजे के पीछे टांग देते हैं। वास्तु के अनुसार, यह एक गंभीर दोष माना जाता है। दरवाजे के पीछे कैलेंडर होने का मतलब है कि आप समय से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह, मुख्य द्वार के सामने भी कैलेंडर नहीं होना चाहिए। क्योंकि, वहां से गुजरने वाली ऊर्जा समय चक्र से प्रभावित होकर घर में तनाव पैदा कर सकती है। पुराने कैलेंडर को तुरंत हटाएं नया साल शुरू होते ही पुराने कैलेंडर को घर से विदा कर देना चाहिए। कई लोग पुराने कैलेंडर के ऊपर ही नया कैलेंडर टांग देते हैं या पिछले साल का कैलेंडर दीवार पर लगा रहने देते हैं। वास्तु में इसे 'रुका हुआ समय' माना जाता है, जो आपकी पुरानी यादों और असफलताओं को वर्तमान से जोड़े रखता है और भविष्य के रास्ते बंद कर देता है। चित्रों का चुनाव सोच-समझकर करें कैलेंडर पर बने चित्र आपके अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। कभी भी ऐसे कैलेंडर का प्रयोग न करें जिसमें हिंसक जानवर, युद्ध के दृश्य, पतझड़ या उदास करने वाले चित्र हों। घर में हमेशा उगते हुए सूरज, हरियाली, देवी-देवता या सकारात्मक दृश्यों वाले कैलेंडर ही लगाएं।  

संकट चौथ पर गणपति को लगाएं तिल-गुड़ के लड्डू का भोग

आज देशभर में सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित माना गया है। महिलाएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ पर तिल का दान और प्रसाद के रूप में तिल-गुड़ के लड्डू का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होकर जीवन के सभी संकटों को दूर करते हैं। भगवान गणेश को समर्पित इस पावन दिन पर जब तिल और गुड़ आपस में मिलते हैं, तो वह केवल एक मिठाई नहीं बल्कि बप्पा के भक्तों के लिए सौभाग्य और आरोग्यता का आशीर्वाद बन जाते हैं। अगर आपने भी भगवान गणपति को प्रसन्न करने के लिए सकट चौथ का उपवास रखा है तो आइए जान लेते हैं क्या है इस दिन प्रसाद में चढ़ाए जाने वाले तिल-गुड़ के लड्डू की रेसिपी। तिल-गुड़ के लड्डू बनाने के लिए सामग्री -250 ग्राम सफेद तिल -1.5 कप कद्दूकस किया हुआ गुड़ -1/4 कप भुने और कुचले हुए मूंगफली के दाने -1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर -1 बड़ा चम्मच घी तिल-गुड़ के लड्डू बनाने का तरीका तिल गुड़ के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में तिल डालकर धीमी आंच पर भूनें। जब तिल फूल जाएं और चटक कर हल्का रंग बदलने लगे तो इन्हें एक प्लेट में निकाल लें। ध्यान रहे कि तिल जलने न पाएं, वरना लड्डू का स्वाद कड़वा हो जाएगा। गुड़ की चाशनी- अब लड्डू की मिठास के लिए उसी कड़ाही में 1 चम्मच घी डालकर गुड़ डाल दें। इसमें 1-2 चम्मच पानी मिलाएं ताकि गुड़ आसानी से पिघल जाए। धीमी आंच पर गुड़ के पिघलने तक पकाएं। जब गुड़ में झाग आने लगे, तो एक कटोरी पानी में गुड़ की एक बूंद डालकर देखें। अगर वह फैलने की जगह जम जाए और एक नरम गेंद बन जाए, तो चाशनी तैयार है। मिश्रण तैयार करें- अब आंच बंद करके चाशनी में भुने हुए तिल, कुचली हुई मूंगफली और इलायची पाउडर डालकर जल्दी-जल्दी अच्छी तरह मिलाएं। लड्डू बांधें- मिश्रण जब हल्का गर्म हो उसी समय हाथों पर थोड़ा पानी या घी लगाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। ठंडा होने पर यह मिश्रण सख्त हो जाएगा, इसलिए इसे जल्दी करने की कोशिश करें। आपके सकट चौथ के व्रत के लिए टेस्टी हेल्दी लड्डू बनकर तैयार हैं।

मकर संक्रांति से पहले शुक्र देवता का मकर राशि में प्रवेश, 3 राशियों के लिए खुशियों की शुरुआत

मकर संक्रांति को उत्तर भारत में बहुत ही खास और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. जिसको बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है और उन्हें गुड़, खिचड़ी, रेवड़ी अर्पित की जाती है. पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा और इससे ठीक 1 दिन पहले शुक्र देवता गोचर करेंगे.  द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को शुक्र देवता सुबह 4 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे. जो कि बहुत ही शक्तिशाली गोचर माना जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि शुक्र के गोचर से किन राशियों का अच्छा टाइम शुरू होगा.  वृषभ मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर शुक्र का राशि परिवर्तन वृषभ राशि के जातकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आ रहा है. इस राशि परिवर्तन के प्रभाव से जिन कामों में आप पूरे मन और मेहनत से जुटेंगे, उनमें सफलता मिलने की प्रबल संभावना है. लगन और समर्पण अब साफ तौर पर परिणाम देने लगेंगे. इस दौरान निजी संबंधों में भी मधुरता देखने को मिलेगी. जीवनसाथी या करीबी लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा. आपसी तालमेल पहले से बेहतर बनेगा. स्वास्थ्य को लेकर जो चिंताएं पिछले कुछ समय से परेशान कर रही थीं, उनमें भी राहत मिलने के संकेत हैं.  तुला मकर संक्रांति पर शुक्र ग्रह का गोचर तुला राशि के लोगों के लिए शुभ संकेत दे रहा है. अगर साल 2025 में आपकी कोई मनोकामना अधूरी रह गई थी, तो अब उसके पूरे होने की संभावना बन रही है. घर-परिवार के साथ रिश्ते बेहतर होंगे. आपसी रिश्ते पहले से मजबूत होंगे. जो लोग नौकरी की तलाश में हैं, वे किसी दोस्त के साथ मिलकर नया काम शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं. सेहत के लिहाज से भी यह समय सामान्य रहेगा.  मीन मीन राशि के जातकों के लिए मकर संक्रांति बहुत ही शुभ रहेगी. धन संबंधी लाभ मिलने की संभावना है. घर की कुछ पुरानी समस्याओं से राहत भी मिलेगी. जीवनसाथी के साथ समय बिताने के मौके बढ़ेंगे. आप भविष्य की योजनाओं को बनाने में सक्रिय होंगे. संपत्ति या पुराने निवेश से मुनाफा मिलने के संकेत भी हैं. स्वास्थ्य के मामले में चिंता की जरूरत नहीं है. 

क्या हर हाल में दाह संस्कार जरूरी? गरुड़ पुराण बताता है 5 निषिद्ध परिस्थितियां

सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन है. इन्हीं संस्कारों में से एक है दाह संस्कार. गुरुड़ पुराण में बताया गया है कि विधि और नियम से दाह संस्कार करने पर ही मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त होती है. हालांकि शास्त्रों के अनुसार, सभी का दाह संस्कार जरूरी नहीं माना गया है. गरुड़ पुराण में खास श्रेणियों के लोगों के लिए दाह संस्कार के बजाय थल या जल समाधि का विधान भी है. साथ ही गरुड़ पुराण में इन पांच प्रकार के लोगों का दाह संस्कार करने से मना किया गया है. आइए जानते हैं. गर्भवती महिला गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं की मृत्यु होने जाने पर उनका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. इसके पीछे की वजह व्यवहारिक और संवेदनशील है. दाह संस्कार के समय शरीर फटने की संभावना होती है. इससे गर्भ में पल रहा शिशु बाहर आ सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं की मृत्यु पर उन्हें थल या जल समाधि दी जाती है. सांप के काटने मृत्यु होने पर गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि अगर कोई व्यक्ति सांप के काटने या किसी जहर की वजह से मरता है, तो उसका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि विषैले प्रभाव की वजह से शरीर में सुक्ष्म प्राण करीब 21 दिनों तक उपस्थित रहते हैं. ऐसे व्यक्ति को पूरी तरह से मृत्यु को प्राप्त नहीं माना जाता. इसलिए ऐसे शव को जल समाधि देना सही रहता है. 11 साल से कम बच्चे गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी बालक की मृत्यु 11 साल से कम उम्र में या गर्भ में हो जाती है, तो उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. माना जाता है कि छोटी आयु में आत्मा शरीर से मोहित कम होती है. बालक के जनेऊ संस्कार न होने और बालिका का मासिक धर्म शुरू न होने की स्थिति में मृत्यु होने पर उन्हें जल समाधि दी जाती है या उसमें बहाया जाता है. संक्रामक बीमारी से मृत्यु पर अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण कोई गंभीर संक्रामक बीमारी होती है, तो उनके शव का दाह संस्कार करना वर्जित माना गया है. इस नियम के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण है. अगर ऐसे किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है, तो हवा में संक्रामक फैल सकते हैं, जिससे अन्य लोगों को बीमारी हो सकती है, इसलिए ऐसे शव के लिए थल समाधि उचित मानी गई है. साधु संत गृहस्थ जीवन का त्याग और सन्यास ले चुके लोगों का भी दाह संस्कार वर्जित होता है. ऐसे इसलिए क्योंकि साधु संतों की इंद्रियां उनके वश में होती हैं. उनको शरीर से कोई मोह नहीं रह जाता. यही कारण है कि दिव्य पुरुषों को थल या जल समाधि दी जाती है.

नए साल में आपकी राशि को लेकर क्या कहते हैं सितारे? 6 जनवरी का राशिफल देखें

मेष राशि- आज का दिन आपको धीरे लेकिन ठोस कदम उठाने की सीख देता है। मन मे जोश रहेगा और कुछ नया करने का मन भी करेगा, लेकिन अगर आप जल्दबाजी से बचेंगे तो ज्यादा फायदा होगा। कामकाज मे जिम्मेदारी बढ सकती है और लोग आपसे उम्मीद रखेंगे। गुस्से मे बोले गए शब्द नुकसान पहुंचा सकते है, इसलिए शांत रहना जरूरी है। घर के मामले मे भी समझदारी दिखाने से माहौल अच्छा रहेगा। शाम के समय किसी काम के पूरे होने से आत्मसंतोष मिलेगा। वृषभ राशि- आज आप अंदर से स्थिर और संतुलित महसूस करेंगे। बिना ज्यादा भागदौड के भी काम पूरे हो सकते है। परिवार के साथ बातचीत करने से मन हल्का होगा। पैसो को लेकर आज कोई फैसला लेना हो तो सोच समझकर लें। फालतू खर्च से बचना फायदेमंद रहेगा। आज का दिन आपको यह सिखाता है कि धैर्य और निरंतरता से भी तरक्की होती है। स्वास्थ्य के मामले मे भी आज सावधानी रखना सही रहेगा। मिथुन राशि- आज बातचीत और संपर्क आपके लिए बहुत जरूरी रहेंगे। किसी दोस्त या सहकर्मी से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो आगे काम आए। दिमाग तेज चलेगा और कई विचार आएंगे, लेकिन एक साथ बहुत सारे काम हाथ मे लेने से बचें। आज छोटे फैसले भी भविष्य मे बडा फायदा दे सकते है। बोलते समय शब्दो का चयन ध्यान से करें। सुनने की आदत आज आपको आगे ले जाएगी। कर्क राशि- आज भावनात्मक रूप से आप थोडे़ संवेदनशील रह सकते हैं। पुरानी बाते या यादे मन मे आ सकती है। किसी अपने से दिल की बात साझा करने से मन को सुकून मिलेगा। कामकाज मे गति धीमी रह सकती है लेकिन दिशा सही रहेगी। आज खुद को समय देना भी जरूरी है। ज्यादा सोचने से बचें और जो आपके हाथ मे है उसी पर ध्यान दें। शाम तक मन शांत होने लगेगा। सिंह राशि- आज आपकी मौजूदगी लोगो को साफ नजर आएगी। कामकाज मे नेतृत्व करने का मौका मिल सकता है। लोग आपकी बात मानेंगे और आपकी राय को महत्व देंगे। आत्मविश्वास अच्छा रहेगा, बस अहंकार से दूरी रखें। रिश्तो मे गर्माहट बनी रहेगी अगर आप सामने वाले को भी बोलने का मौका देंगे। आज सही समय पर कही गई बात आपकी छवि को मजबूत बनाएगी। कन्या राशि- आज मेहनत और अनुशासन आपका सबसे बडा सहारा रहेगा। कामकाज में फोकस बना रहेगा और सीनियर आपकी कोशिशो को नोटिस कर सकते है। नतीजे तुरंत न मिले लेकिन दिशा बिल्कुल सही रहेगी। परिवार की जिम्मेदारियों को भी समय देना पड़ेगा। धैर्य और लगातार प्रयास आपको आगे बढ़ाएगा। तुला राशि- आज काम का दबाव थोडा ज्यादा महसूस हो सकता है। आप हर चीज सही करना चाहते है, लेकिन खुद पर ज्यादा बोझ न डालें। प्राथमिकता के आधार पर काम करें तो दिन बेहतर रहेगा। सेहत और नींद पर ध्यान देना जरूरी है। छोटी बातो को लेकर चिंता न करें। आज यह समझना जरूरी है कि हर चीज परफेक्ट होना जरूरी नहीं होता। वृश्चिक राशि- आज आपकी अलग सोच और नजरिया काम आएगा। कोई नया विचार या योजना बन सकती है। लोग आपकी बात सुनेंगे लेकिन सबको खुश करने की कोशिश न करें। रिश्तो मे आजादी जरूरी लगेगी, फिर भी सामने वाले की भावना समझना जरूरी है। आज शांत और साफ बातचीत से काम बनेगा। धनु राशि- आज संतुलन बनाकर चलना बहुत जरूरी है। कोई पुराना मुद्दा बातचीत से सुलझ सकता है। रिश्तो मे साफ और सधी हुई बात रखने से गलतफहमी दूर होगी। खर्च सोच समझकर करें, खासकर गैर जरूरी चीजो पर। आज लिया गया कोई शांत फैसला आने वाले समय मे राहत देगा। खुद को भी उतनी ही अहमियत दें जितना दूसरो को देते हैं। मकर राशि- आज आप अंदर ही अंदर काफी कुछ सोचते रह सकते है। किसी बात की सच्चाई सामने आ सकती है जिससे नजरिया बदलेगा। हर चीज को नियंत्रित करने की कोशिश न करें। धैर्य रखें और समय को अपना काम करने दें। कामकाज मे भी आज शांत रहना फायदेमंद रहेगा। जो होना है वह धीरे धीरे साफ होता जाएगा। कुंभ राशि- आज मन हल्का और सकारात्मक रहेगा। कुछ नया सीखने या करने का विचार आ सकता है। दोस्ती और बातचीत से ऊर्जा मिलेगी। घूमने फिरने या बदलाव का मन करेगा। खर्च पर थोडा नियंत्रण रखना जरूरी है। जिम्मेदारियो से भागने के बजाय उन्हें समझदारी से निभाएंगे तो दिन संतोष देगा। मीन राशि- आज दिल नरम रहेगा और दूसरों के लिए कुछ करने का मन करेगा। किसी की मदद करने से आत्मसंतोष मिलेगा। कामकाज मे ध्यान भटक सकता है, इसलिए खुद को बार बार फोकस मे लाना होगा। भावनाओं मे बहने से बचें। खुद के लिए भी समय निकालना जरूरी है। छोटी खुशियां आज दिल को सुकून देंगी।

डायरी में छुपा था जीवन बदल देने वाला राज़, प्रेमानंद महाराज ने खुद लिखा था

वृंदावन के श्री प्रेमानंद जी महाराज अक्सर जीवन और आध्यात्म से जुड़ी कई बातें साझा करते रहते हैं। उन्होंने हाल ही में जीवन का वो गहरा रहस्य भी बताया है, जो कहीं ना कहीं हम सभी के लिए जानना बहुत जरूरी है। महाराज जी कहते हैं कि ये बात उन्हें प्रभावित कर गई कि उन्होंने इसे अपनी डायरी तक में नोट कर लिया था। महाराज जी ने डायरी में क्या लिखा प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि वो अपनी डायरी में संत महापुरुषों की बातें नोट करते हैं। एक बात उन्हें इतनी प्रभावशाली लगी कि उन्होंने तुरंत उसे लिख लिया। ये बात थी कि आप जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। आज जो भी कुछ आप अपने बारे में सोच रहे हैं, वो सब कुछ आपके लिए संभव हो सकता है। जैसा सोचोगे वैसा ही बनोगे महाराज जी कहते हैं कि वो अक्सर इसी बात को पढ़ते रहते थे कि जैसा बनना है वैसा सोचो, जैसा सोचोगे वैसा ही बनोगे। महाराज जी कहते हैं कि अगर आपने किसी चीज का प्रण कर लिया है और आपको खुद पर विश्वास है कि आप वो कर लेंगे, तो हर हाल में वो चीज संभव है। हमेशा पॉजिटिव सोच रखें महाराज जी आगे कहते हैं कि हमेशा पॉजिटिव सोच रखो। उदहारण के लिए अगर आप सोचते हैं कि इस जन्म में भगवान की प्राप्ति नामुमकिन है, तो गारंटी के साथ आप ऐसा नहीं कर पाएंगे। देर से सही, पूरा होता है संकल्प प्रेमानंद जी कहते हैं कि उदाहरण के लिए अगर आपने ठान लिया है कि भगवत प्राप्ति आपको इसी जन्म में करनी है, तो संकल्प आपके भीतर बैठ जाएगा। किसी गलती की वजह से अगर इस जन्म में आपका संकल्प पूरा ना भी हो, तो अगले जन्म में आप उसे जरूर हासिल कर लेंगे। जिंदगी में लागू होता है ये सिद्धांत प्रेमानंद जी महाराज का बताया ये छोटा सा वाक्य, अगर आप अपनी जिंदगी में लागू कर लें, तो पूरी लाइफ बदल सकता है। किसी भी चीज की शुरुआत सबसे पहले आपके मन से होती है। वो कहते हैं ना कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। सोच बनाती है जीवन आपकी सोच ही कहीं ना कहीं आपका जीवन गढ़ती है। अगर आप सोचते पॉजिटिव हैं, तो देर से ही सही आपकी लाइफ भी ऐसी ही बनेगी। इसलिए बुरे समय में भी कोशिश करें कि बेहतर सोच रखें। क्योंकि आज जो आप सोच रहे हैं वो कल आपकी हकीकत भी बन सकता है।

क्या रात में कपड़े धोने से आती है नकारात्मक ऊर्जा? वास्तु शास्त्र की चेतावनी

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में दिनचर्या से जुड़े हर कार्य के लिए एक निश्चित समय और नियम बताया गया है। अक्सर आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सुविधा के अनुसार काम करते हैं। इन्हीं में से एक है रात के समय कपड़े धोना। आजकल वर्किंग कपल्स या व्यस्त दिनचर्या वाले लोग समय बचाने के लिए रात में वॉशिंग मशीन चला देते हैं और कपड़े धोकर रात भर के लिए बाहर सुखा देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, रात में कपड़े धोना और उन्हें खुले आसमान के नीचे सुखाना आपके जीवन में गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियां ला सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वास्तु के अनुसार रात में कपड़े धोना क्यों वर्जित है और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र और नकारात्मक ऊर्जा का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद वातावरण में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। दिन के समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें वातावरण को शुद्ध करती हैं और कीटाणुओं के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश करती हैं। इसके विपरीत, रात के समय चंद्रमा की शीतलता होती है, लेकिन बाहरी वातावरण में तामसिक ऊर्जा का वास होता है। आर्थिक तंगी और दरिद्रता का वास धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी जी के आगमन का समय होता है। इस समय घर में साफ-सफाई, शांति और भक्ति का माहौल होना चाहिए। रात में कपड़े धोने से घर में 'कलह' और 'अशांति' का वातावरण बनता है, जिससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर की बरकत रुक जाती है और बेवजह के खर्चे बढ़ने लगते हैं। स्वास्थ्य पर बुरा असर वैज्ञानिक और वास्तु दोनों ही दृष्टिकोणों से रात में कपड़े सुखाना सेहत के लिए हानिकारक है। रात के समय ओस गिरती है और धूप न होने के कारण कपड़ों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु मर नहीं पाते। जब हम इन कपड़ों को पहनते हैं, तो त्वचा संबंधी रोग और सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। वास्तु के अनुसार, ऐसे कपड़ों को पहनने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होती है। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि खुले आसमान के नीचे रात भर सूखे कपड़े नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार रात में अदृश्य नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं। गीले कपड़ों में उनकी ऊर्जा जल्दी समाहित हो जाती है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, तनाव और डरावने सपने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। कपड़ों की चमक और आयु कम होना प्राकृतिक रूप से देखा जाए तो सूर्य की रोशनी कपड़ों के लिए प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम करती है। रात में कपड़े धोने से वे पूरी तरह नहीं सूख पाते और उनमें एक अजीब सी गंध रह जाती है। यह गंध और नमी आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

सकट चौथ 2026: 6 या 7 जनवरी को व्रत? यहां जानें तिथि, नियम और पूजा का सही तरीका

सनातन परंपरा में सकट चौथ एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व माना गया है, जिसे विशेष रूप से संकटों संकट निवारण और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्ति के लिए मनाया जाता है. इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा और संयम के साथ गणेशजी और सूर्यदेव की उपासना करते हैं. शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, सकट चौथ का व्रत जीवन में आने वाले कठिनाइयों, आर्थिक, स्वास्थ्य या पारिवारिक संकटों को दूर करने में सहायक होता है. साथ ही यह व्रत परिवार में सुख-शांति, मानसिक स्थिरता और संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत ही फलदायी माना गया है. कब है सकट चौथ 2026? पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 07 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी. ऐसे में सकट चौथ का पावन पर्व 06 जनवरी 2026, मंगलवार के दिन ही मनाया जाएगा. शास्त्रों में सकट चौथ पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में सकट चौथ को विशेष स्थान प्राप्त है. भागवत पुराण और ब्रह्मांड पुराण में उल्लेख है कि इस दिन की साधना संकटों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है. शास्त्रों के अनुसार, व्रत के साथ किए गए दान और सेवा से संतान सुख, घर की समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है. यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संकटमोचन साधना, आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया सकट चौथ व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, खुशहाली और आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित करता है. यह पर्व जीवन को संतुलित, संयमित और सार्थक बनाने का मार्ग भी दिखाता है. व्रत की विधि और नियम     सकट चौथ का व्रत भक्तिभाव और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है और जीवन में संकटमोचन, सुख-शांति तथा मानसिक स्थिरता लाने में सहायक होता है.     श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र धारण करते हैं, साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को पवित्र बनाते हैं. गणेशजी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर फलों, मिठाई और अन्य प्रसाद का भोग अर्पित किया जाता है. भक्त सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं.     व्रती पूरे दिन संयम का पालन करते हैं, अनावश्यक भोजन और विलासिता से दूर रहते हैं. माता-पिता, वृद्धजनों और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य कमाया जाता है.     कठोर अनुशासन और नियमों के पालन से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है. इस व्रत के परिणामस्वरूप व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ, मानसिक स्थिरता और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है. सकट चौथ का धार्मिक महत्व सकट चौथ का महत्व विशेष रूप से संकट निवारण और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्ति से जुड़ा है. शास्त्रों और पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा जीवन में आने वाले कठिन समय, आर्थिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और पारिवारिक संकटों से रक्षा करता है. भक्त विशेष रूप से गणेशजी और सूर्यदेव की उपासना करते हैं, क्योंकि इनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक स्थिरता बनी रहती है. सकट चौथ का व्रत पूरी तरह श्रद्धा और संयम पर आधारित होता है. कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ हल्का भोजन करते हैं. इस दिन पूजा में दीप जलाना, फलों और मिठाई का भोग अर्पित करना, और विशेष मंत्र जाप करना शामिल है. साथ ही, जरूरतमंदों को दान और सेवा करने से पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा कई वर्षों तक बनी रहती है.

प्रेमानंद महाराज बोलें- आसपास के लोग हमेशा आलोचना कर डिमोटिवेट करते हैं?

नई दिल्ली. आजकल का जीवन बहुत तेज है और सफलता के लिए मेहनत कर रहे लोगों को अक्सर आसपास के लोग आलोचना करके डिमोटिवेट कर देते हैं। रिश्तेदार, दोस्त या सहकर्मी नकारात्मक बातें कहकर मन को तोड़ देते हैं। ऐसे में मन उदास हो जाता है और आगे बढ़ने का जोश कम हो जाता है। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने सत्संगों में बार-बार इस समस्या का समाधान बताते हैं। महाराज जी कहते हैं कि आलोचना करने वाले लोग खुद जल रहे होते हैं, तुम्हें जलने की जरूरत नहीं। राधा नाम जपो और अपना काम करते रहो। आलोचना से डिमोटिवेट होना छोड़ दो। महाराज जी के उपदेश से जानते हैं क्या करें। आलोचना को दिल से ना लगाएं प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जो आपकी आलोचना करता है, वह आपके बारे में सोचकर अपना समय बर्बाद कर रहा है। ऐसे में आप अपना समय क्यों बर्बाद करेंगे? आलोचना करने वाले लोग अपनी कमजोरी छिपाने के लिए दूसरों को नीचा दिखाते हैं। महाराज जी सलाह देते हैं कि ऐसी बातों को दिल से ना लगाएं। मुस्कुराकर सुन लें और आगे बढ़ जाएं। अगर कोई कहे 'तुम कुछ नहीं कर पाओगे' तो मन में कहें 'राधे राधे, मैं कर लूंगा।' आलोचना को कानों से सुनकर दिल से निकाल दें। इससे मन मजबूत रहेगा और डिमोटिवेशन नहीं होगा। राधा नाम जप महाराज जी का सबसे बड़ा उपाय है राधा नाम जप। वे कहते हैं 'आलोचना से परेशान होने पर राधे-राधे जपें। राधा नाम में इतनी शक्ति है कि कोई नकारात्मक बात आपको छू नहीं सकती है।' जब कोई आलोचना करे तो मन में 'राधे राधे' जपें। इससे मन शांत रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। महाराज जी बताते हैं कि नाम जप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान की कृपा मिलती है। रोज 108 बार या जितना हो सके राधा नाम जपें। आलोचना करने वाले खुद थक जाएंगे, लेकिन आपका जोश बना रहेगा। अपना काम ईमानदारी से करते रहें प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आलोचना करने वाले को जवाब अपनी सफलता से दें। अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करते रहें। दिखावा ना करें, बस चुपचाप आगे बढ़ें। महाराज जी उदाहरण देते हैं कि जो लोग आलोचना करते हैं, वे खुद असफल होते हैं। आप सफल हो जाएंगे, तो वे खुद चुप हो जाएंगे। आलोचना से डिमोटिवेट होने की बजाय उसे प्रेरणा बनाएं। महाराज जी कहते हैं कि भगवान सब देख रहे हैं। मेहनत का फल जरूर मिलेगा। अपना फोकस काम पर रखें, तो डिमोटिवेशन नहीं होगा। भक्ति और सत्संग से मन मजबूत बनाएं महाराज जी सलाह देते हैं कि आलोचना से परेशान हो, तो रोज सत्संग सुनें और भक्ति करें। राधा-कृष्ण की भक्ति करें, हनुमान चालीसा पढ़ें। सत्संग सुनने से मन में सकारात्मकता आती है और आलोचना का असर कम होता है। महाराज जी कहते हैं कि जब मन भगवान में लग जाता है, तो दुनिया की बातें छोटी लगने लगती हैं। भक्ति से मन इतना मजबूत हो जाता है कि आलोचना छू नहीं पाती है। परिवार और भगवान पर फोकस करें, तो डिमोटिवेशन दूर हो जाएगा। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, आलोचना करने वाले खुद जल रहे हैं, आपको जलने की जरूरत नहीं है। राधा नाम जपें, मेहनत करें और मन शांत रखें। आलोचना से डिमोटिवेट होना छोड़ देंगे, तो जीवन में सफलता और सुख आएगा।

मकर संक्रांति विशेष: सूर्य देव को अर्घ्य देते समय न करें ये भूल, वरना नहीं मिलेगा शुभ फल

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘उत्तरायण’ की शुरुआत माना जाता है. इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के साथ-साथ सूर्य उपासना का विधान है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और कष्टों का निवारण होता है. लेकिन, अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है. सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर साफ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें. तांबे के लोटे का प्रयोग: सूर्य को जल देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही उपयोग करें. अन्य धातुओं (जैसे प्लास्टिक या स्टील) का उपयोग वर्जित है. जल में मिलाएं ये चीजें: लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल फूल, कुमकुम, अक्षत (सादे चावल) और थोड़ा काला तिल जरूर डालें. मकर संक्रांति पर तिल का विशेष महत्व है. अर्घ्य देने की मुद्रा: दोनों हाथों से लोटे को पकड़कर अपने सिर के ऊपर ले जाएं और धीरे-धीरे जल की धार छोड़ें. दृष्टि का ध्यान: जल गिरते समय आपकी दृष्टि जल की धार के बीच से सूर्य देव पर होनी चाहिए. इससे निकलने वाली किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं. परिक्रमा: अर्घ्य देने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर तीन बार क्लॉकवाइज (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें. भूलकर भी न करें ये गलतियां ! पैरों में जल गिरना: सबसे बड़ी गलती यह होती है कि अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर पड़ते हैं. इससे बचने के लिए किसी गमले या बड़े बर्तन में जल अर्पित करें और बाद में उसे पौधों में डाल दें. देर से अर्घ्य देना: मकर संक्रांति पर दोपहर में अर्घ्य देना लाभकारी नहीं माना जाता. कोशिश करें कि सूर्योदय के एक घंटे के भीतर ही जल अर्पित कर दें. बिना जूते-चप्पल के रहें: अर्घ्य देते समय पैर नंगे होने चाहिए. जूते या चप्पल पहनकर सूर्य देव को जल देना अपमानजनक माना जाता है. मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य उपासना, पुण्य संचय और आत्मशुद्धि का महापर्व माना जाता है. यह पर्व उस शुभ क्षण का प्रतीक है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं.धार्मिक दृष्टि से इसे देवताओं का दिन और सकारात्मक ऊर्जा का आरंभ माना गया है. भगवान सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है. इस दिन खिचड़ी का दान करना और तिल-गुड़ का सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है.