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महंगाई की मार खेत तक पहुंची: कीटनाशकों के दाम 30% बढ़े, किसान परेशान

नई दिल्ली अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब सीधे भारतीय किसानों पर पड़ने लगा है। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के अनुसार, आने वाले दिनों में कीटनाशकों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में होने जा रही है जब खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और किसानों को कीटनाशकों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इससे खेती की लागत में सीधा इजाफा होगा। अप्रैल से दिखेगा असर, कंपनियों ने दी चेतावनी रूरल वॉयस के मुताबिक एग्रोकेमिकल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण नए प्रोडक्ट अब महंगे दामों पर ही बाजार में आएंगे। एक बड़ी कंपनी के अधिकारी के हवाले से रूरल वॉयस ने बताया है कि अप्रैल से कीमतों में बढ़ोतरी दिखनी शुरू हो जाएगी। साथ ही, घरेलू बाजार में उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है और निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है। कच्चा तेल महंगा, पेट्रोकेमिकल्स के दाम में उछाल युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पड़ा है। पेट्रोकेमिकल्स के दाम 25–30% तक बढ़े हैं। पैकेजिंग लागत भी 15–30% बढ़ी है।सल्फर और पेट्रोकेमिकल्स कीटनाशक बनाने में प्रमुख कच्चा माल हैं, इसलिए कंपनियों के लिए लागत बढ़ना तय है। चीन से सप्लाई पर असर, संकट और गहराया कीटनाशकों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश केमिकल्स China से आते हैं, लेकिन चीन नेकीमतें बढ़ा दी हैं और निर्यात में भी कटौती कर दी है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन में चल रही अंतरराष्ट्रीय बैठक के बाद स्थिति और साफ हो सकती है। कमजोर रुपया और महंगा आयात भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच चुका है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। इसके अलावा शिपिंग चार्ज बढ़ गए हैं। इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगे हो गए हैं। इन सभी कारणों से कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सप्लाई चेन पर खतरा, निर्यात भी प्रभावित अगर युद्ध लंबा चलता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक है और हर साल 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता है। ऐसे में यह संकट सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है। किसानों पर बढ़ेगा बोझ, राहत मुश्किल CropLife India ने भी कीटनाशकों की कीमतों में करीब 25% तक बढ़ोतरी की आशंका जताई है। चिंता की बात यह है कि फर्टिलाइजर पर सरकार सब्सिडी दे सकती है, लेकिन कीटनाशकों पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है। इसका मतलब है कि बढ़ी हुई कीमतों का बोझ सीधे किसानों पर पड़ेगा। खेती की लागत बढ़ेगी, मुनाफा घटेगा पिछले कुछ वर्षों में खेती की लागत में कीटनाशकों का हिस्सा लगातार बढ़ा है। ऐसे में फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है और अब लागत और बढ़ने वाली है। यह स्थिति किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकती है।  

डॉलर के आगे नहीं टिक पाया रुपया, 93.94 तक लुढ़का—क्या हैं इसके पीछे के कारण?

मुंबई रुपये में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 41 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। भारतीय मुद्रा (रुपया बनाम डॉलर) पर दो कारणों से दबाव बना हुआ है। पहला, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी, और दूसरा अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि सुबह के सत्र के दौरान पूंजी का लगातार बाहर जाना और घरेलू शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट ने स्थानीय मुद्रा को और कमजोर कर दिया। रुपया 93.84 पर खुला, फिर और नीचे गिरा इंटर-बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 93.84 पर खुला और उसके बाद फिसलकर 93.94 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह इसकी पिछली बंद कीमत से 41 पैसे की गिरावट दर्शाता है। शुक्रवार को रुपये ने डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 का स्तर तोड़ा था। अंततः 64 पैसे की गिरावट के साथ 93.53 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 99.66 पर रहा, जिसमें 0.02 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 112.90 डॉलर प्रति बैरल रही, जिसमें 0.60 प्रतिशत की गिरावट आई। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) शुक्रवार को शुद्ध बिकवाल रहे, जिन्होंने 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। रुपये में गिरावट के 3 मुख्य कारण केडिया एडवाइजरी के सीनियर कमोडिटी एक्सपर्ट और MD अजय केडिया के अनुसार, रुपये में और गिरावट की संभावना बनी हुई है। उनका कहना है कि मुद्रा बाजार (currency market) इस समय बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है, जहाँ कई कारक एक साथ रुपये पर दबाव डाल रहे हैं। 1 – कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड इस समय 112.90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है। 2 – विदेशी निवेशकों की बिकवाली: शुक्रवार को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार में लगभग ₹5,518.39 करोड़ के शेयर बेचे; इस कदम का रुपये की सेहत पर सीधा असर पड़ा। 3 – मजबूत होता डॉलर: ‘डॉलर इंडेक्स’, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, यह बढ़कर 99.66 पर पहुंच गया है। भारत पर इसका क्या असर होगा? रुपये के कमजोर होने और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के मेल से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल, डीजल और परिवहन की बढ़ती लागत आम आदमी की आर्थिक स्थिति पर और भी भारी बोझ डालेगी। आखिरकार, इसका असर आम नागरिक पर पड़ना तय है।

जंग का झटका: गोल्ड ₹12 हजार सस्ता, सिल्वर ₹31 हजार धड़ाम—एक साल में कितना गिरा भाव?

नई  दिल्ली अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच सोने चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 12,077 रुपए घटकर 1.35 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.47 लाख थी। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 30,864 रुपए घटकर 2.01 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.32 लाख रुपए किलो थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 24 दिन में 23,956 और चांदी 65,200 सस्ती हुई है। ईरान युद्ध के अलावा गिरावट के मुख्य कारण मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा : आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.35 लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है।     शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख     ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख (सिर्फ एक महीने में भारी उछाल)     मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक ₹41 हजार सस्ता हो चुका है। दाम बढ़ने या घटने में किन बातों का पड़ता है असर ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।

निवेशकों में हड़कंप: ट्रंप बयान से शेयर बाजार धड़ाम, निफ्टी 550 अंक टूटा

मुंबई आज शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट आई है। इसका असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स लगभग 1,800 अंकों की गिरावट के साथ 72,700 पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी भी लगभग 550 अंक गिरकर 22,650 के स्तर पर आ गया है। आज बैंकिंग, ऑटो, FMCG और IT सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर आज लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। इस गिरावट के चलते BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 7.74 लाख करोड़ कम होकर 421 लाख करोड़ रह गया है। इस बीच, शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। शुरुआती कारोबारी घंटों के दौरान, रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.1 प्रतिशत कमजोर होकर 93.83 पर आ गया। पिछले सत्र में, इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो 64 पैसे की बड़ी गिरावट थी। वैश्विक तनाव बढ़ने के बीच, विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण रुपया इस समय दबाव में है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई? सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट आई है, जबकि निफ्टी के 50 शेयरों में से 48 नीचे कारोबार कर रहे हैं। टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और JSW स्टील में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। इसके विपरीत, ONGC और HCL Tech में बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, NSE निफ्टी इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स 10 प्रतिशत बढ़कर 25.09 पर पहुँच गया। यह निवेशकों के बीच फैले डर का एक संकेत है। व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.90 प्रतिशत गिरा है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 2.18 प्रतिशत नीचे आया है। सेक्टर के हिसाब से, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है, जो लगभग 3 प्रतिशत नीचे आया है। Nifty Bank और Nifty Metal इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली है। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Brent crude $113 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जो 77 सेंट ज्यादा है। US का बेंचमार्क, WTI crude, 1.05 प्रतिशत बढ़कर $99.26 प्रति बैरल पर पहुँच गया। शेयर बाजार क्यों गिरा? US के राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर Iran 48 घंटों के भीतर Strait of Hormuz को फिर से नहीं खोलता है, तो उसके पावर प्लांट तबाह कर दिए जाएँगे। इस वजह से आज एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। South Korea का शेयर बाजार खुलते ही लगभग छह प्रतिशत तक गिर गया। Japan के शेयर बाजार में भी चार प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।

ईरान संकट के दौरान चांदी ₹15000 सस्ती, सोने में ₹8000 की गिरावट

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों के क्रैश (Gold-Silver Rate Crash) होने का सिलसिला जारी है. मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी है और ग्लोबल टेंशन चरम पर है, इसके बावजूद भी दोनों कीमती धातुएं लगातार सस्ती हो रही हैं. सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी अचानक 15,000 रुपये और सस्ती हो गई. 1 Kg Silver Price गिरकर 2,11,729 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो अब चांदी का भाव अपने हाई से 2 लाख रुपये से भी ज्यादा कम हो चुका है।  दूसरी कीमती धातु सोना भी सप्ताह के पहले दिन खुलने के साथ ही धड़ाम हो गई. एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव अपने पिछले बंद की तुलना में खुलने के साथ ही 8000 रुपये से ज्यादा गिर गया. शुरुआती वायदा कारोबार में दोनों कीमती धातुएं 5% से ज्यादा फिसलीं।  चांदी अब 2 लाख रुपये सस्ती  सोमवार को एमसीएक्स पर कारोबार की शुरुआत होने पर 5 मई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव पिछले शुक्रवार के बंद 2,26,772 रुपये प्रति किलो की तुलना में फिसलकर 2,11,729 रुपये पर आ गया. यानी एक किलो चांदी 15,043 रुपये सस्ती हो गई. वहीं 29 जनवरी के अपने हाई लेवल 4,20,048 रुपये की तुलना में अब Silver Price Crash होकर 2,08,319 रुपये प्रति किलो तक कम हो चुका है।  अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत होने के बाद से सोना-चांदी की कीमतें तेजी से गिरी हैं. अगर चांदी की बात करें, तो अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था और इससे एक दिन पहले 27 फरवरी का MCX Silver Rate 2,82,644 रुपये प्रति किलो था यानी ये अब तक 70,915 रुपये सस्ती हुई है।  सोना भी संभल नहीं पा रहा  जहां एक ओर चांदी की कीमत में तगड़ी गिरावट का सिलसिला जारी है, तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी लगातार टूटता जा रहा है. MCX Gold Rate की बात करें, तो बीते शुक्रवार को 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 24 कैरेट सोना 1,44,492 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और सोमवार को खुलने के साथ ही गिरकर 1,36,403 रुपये पर आ गया. इस तरह एक झटके में 10 Gram 24 Karat Gold 8,089 रुपये सस्ता हो गया।  हाई से 50000 रुपये सस्ता है सोना ईरान युद्ध (Iran War) की शुरुआत होने के बाद से सोने की कीमत भी लगातार क्रैश (Gold Rate Crash) नजर आई है. हमलों से पहले बीते 27 फरवरी को एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम था और वर्तमान भाव से तुलना करें, तो इस अवधि में ये 25,701 रुपये सस्ता हुआ है. वहीं Gold High से तुलना करें, तो सोने ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते 29 जनवरी को ही 1,93,096  रुपये का अपना हाई लेवल छुआ था और यहां से अब तक ये कीमती पीली धातु 56,693 रुपये गिर चुकी है।  सोना-चांदी में गिरावट की वजह आमतौर पर किसी भी आपदा या ग्लोबल टेंशन की स्थिति में सोना-चांदी की कीमतों में उछाल नजर आता रहा है, लेकिन इस बाद मामला अलग है और मिडिल ईस्ट युद्ध से बढ़ी टेंशन के बाद बावजूद Gold-Silver Rate Fall हो रहे हैं. इसके पीछे के कारण देखें, तो क्रूड ऑयल की कीमतों ने इजाफे और डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. Crude महंगा होने से महंगाई का जोखिम बढ़ा है और डॉलर में मजबूती ने जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच भी कीमती धातुओं में तेजी पर ब्रेक लगाया है. बता दें कि हाई इंटरेस्ट रेट और Strong Dollar सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट गोल्ड-सिल्वर रेट में आगे तेजी की उम्मीद जता रहे हैं।   

बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1800 अंक टूटा, निफ्टी 23,000 से नीचे फिसला

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, विदेशों से मिल रहे खराब संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का युद्ध बढ़ने और मिडिल ईस्ट में हाई पर पहुंची टेंशन के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने बाजार का सेंटीमेंट सप्ताह के पहले दिन खराब किया है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) ओपनिंग के साथ ही 1800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी खुलते के कुछ देर बाद 575 अंक के आसपास बिखर गया. इस बीच BSE लार्जकैप में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर कारोबार करते हुए नजर आए।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलती ही क्रैश शेयर मार्केट में सप्ताह के पहले दिन सोमवार को खुलने के साथ ही हड़कंप मचा हुआ नजर आया है. बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 74,532.96 की तुलना में बुरी तरह टूटकर 73,732 पर ओपन हुआ. इसके कुछ ही मिनटों में ये गिरावट और भी तेज हो गई, जिसके चलते Sensex करीब 1600 अंक गिरकर 72,977 के लेवल पर आ गया. वहीं इसके कुछ मिनटों बाद ही ये गिरावट और बढ़ गई और सेंसेक्स1800 अंक से ज्यादा फिसलकर 72,724 पर कारोबार करने लगा।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि एनएसई का निफ्टी-50 भी खुलने के साथ ही धड़ाम हो गया. ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,114 की तुलना में फिसलकर 22,824 पर ओपन हुआ था और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये मिनटों में 480 अंक की भारी गिरावट के साथ 22,634 के लेवल पर आ गया और कुछ देर के कारोबार के बाद 575 अंक टूटकर 22,538 पर ट्रेड करता दिखा। खुलते ही धड़ाम हो गए ये शेयर सोमवार को बाजार में आए भूचाल का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बीएसई लार्जकैप में शामिल सभी 30 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुए. सबसे ज्यादा गिरावट वाले स्टॉक्स को देखें, तो Tata Steel Share (4%), SBI Share (3%), Bajaj Finance Share (2.67%), HDFC Bank Share (2.60%), IndiGo Share (2.50%), Titan Share (2.50%), BEL Share (2.49%), Adani Ports Share (2.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  विदेशी बाजारों से मिले थे गिरावट के संकेत  भारतीय शेयर बाजार के लिए पहले से ही विदेशों से निगेटिव सिग्नल मिल रहे थे. सोमवार को सभी एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया. जापान का निक्केई इंडेक्स 4.10 फीसदी टूटकर 50,800 के लेवल तक गिरकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 3 फीसदी फिसलकर 24,532 पर ट्रेड करता दिखा।  यही नहीं साउथ कोरिया के कोस्पी में कारोबार की शुरुआत के बाद ही अचानक बड़ा क्रैश आ गया और ये 5.10 फीसदी टूटकर 5,409 पर आ गया. इसके अलावा DAX (2.01%), CAC (1.90%) और FTSE-100 (1.50%) टूटे हुए थे।   

FD vs KVP vs Mutual Fund: ₹1 लाख निवेश पर कौन देगा बेस्ट रिटर्न?

नई  दिल्ली  बचत बढ़ने के साथ ही निवेश को लेकर लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। मौजूदा समय में बैंक FD, पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश के सबसे लोकप्रिय विकल्प बने हुए हैं। मार्च 2026 के मौजूदा रेट्स के आधार पर अगर कोई व्यक्ति ₹1 लाख का निवेश 10 साल के लिए करता है, तो इन तीनों विकल्पों में रिटर्न का अंतर काफी बड़ा हो सकता है। बैंक FD: सुरक्षित निवेश, लेकिन सीमित कमाई State Bank of India जैसे बड़े बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।     ब्याज दर: करीब 6.05% सालाना     10 साल में ₹1 लाख — करीब ₹1.8 लाख     फायदा: गारंटीड रिटर्न, कोई मार्केट रिस्क नहीं हालांकि, इसमें रिटर्न सीमित होता है, इसलिए यह कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है। पोस्ट ऑफिस KVP: पैसा दोगुना करने का भरोसेमंद तरीका Kisan Vikas Patra एक सरकारी योजना है, जिसमें निवेश तय समय में दोगुना हो जाता है।     ब्याज दर: करीब 7.5%     मैच्योरिटी: 115 महीने (करीब 9 साल 7 महीने)     10 साल में ₹1 लाख — ₹2 लाख या उससे अधिक यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है, जो गारंटीड रिटर्न चाहते हैं और पैसा लंबे समय तक लॉक कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड: सबसे ज्यादा रिटर्न, लेकिन जोखिम के साथ Equity Mutual Fund में निवेश करने पर लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है।     औसत अनुमानित रिटर्न: करीब 12% सालाना     10 साल में ₹1 लाख — लगभग ₹3 लाख या उससे अधिक हालांकि, यह बाजार पर निर्भर करता है और इसमें उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार अगर सुरक्षा प्राथमिकता है तो FD बेहतर विकल्प है। अगर गारंटीड रिटर्न चाहिए तो KVP सही है। अगर ज्यादा मुनाफा चाहते हैं और जोखिम ले सकते हैं तो म्यूचुअल फंड चुनना फायदेमंद हो सकता है।     निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान     अपने वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट रखें     जोखिम सहने की क्षमता का आकलन करें     लंबी अवधि के लिए ही बाजार आधारित निवेश करें। ₹1 लाख का निवेश कहां करना है, यह पूरी तरह निवेशक की जरूरत और सोच पर निर्भर करता है। जहां FD सुरक्षा देती है, वहीं KVP स्थिर रिटर्न देता है और म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में अधिक कमाई का मौका प्रदान करता है।

Tata Harrier EV का नया डुअल-मोटर AWD वेरिएंट पेश, जानिए कीमत, पावर और रेंज की पूरी डिटेल

नई दिल्ली Tata Motors (टाटा मोटर्स) ने भारत में Harrier EV (हैरियर ईवी) का नया वेरिएंट लॉन्च किया है। इस नए वेरिएंट का नाम Fearless+ QWD 75 है। और इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 25 लाख रुपये से ऊपर रखी गई है। इस अपडेट के साथ अब ग्राहकों को डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव (QWD) तकनीक कम कीमत में उपलब्ध हो गई है। इस नए वेरिएंट में क्या खास है? Harrier EV का यह नया वेरिएंट टाटा मोटर्स की Acti.ev+ प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इस ईवी के अहम फीचर्स की बात करें तो इसमें ये शामिल हैं:     डुअल-मोटर सेटअप (ऑल-व्हील ड्राइव)     504 Nm टॉर्क     0-100 किमी प्रति घंटा: 6.3 सेकंड इसके साथ ही इस एसयूवी में बेहतर ड्राइविंग कंट्रोल के लिए:     6 टेरेन मोड्स     ऑफ-रोड असिस्ट     बूस्ट मोड जैसे फीचर्स दिए गए हैं। बैटरी और रेंज कितनी है? इस वेरिएंट में बड़ा 75 kWh बैटरी पैक दिया गया है।     MIDC रेंज: 627 किमी     रियल-वर्ल्ड रेंज: लगभग 480-505 किमी यह ड्राइविंग रेंज इसे अपने सेगमेंट की लंबी रेंज वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी में शामिल करता है। फीचर्स और कम्फर्ट में क्या मिलता है? Fearless+ QWD 75 वेरिएंट में कई प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं:     पावर्ड फ्रंट सीट्स (मेमोरी फंक्शन के साथ)     वेंटिलेटेड सीट्स     360-डिग्री कैमरा     10-स्पीकर JBL साउंड सिस्टम     19-इंच अलॉय व्हील्स     ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल (वॉयस सपोर्ट के साथ) अन्य फीचर्स:     एम्बिएंट लाइटिंग     रियर सनशेड्स     बेहतर कम्फर्ट के लिए रियर हेडरेस्ट   सेफ्टी और वारंटी कैसी है?     Bharat NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग     बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी (कुछ शर्तों के साथ) जो इसे एक सुरक्षित और भरोसेमंद ईवी बनाता है। Harrier EV के सभी वेरिएंट्स और कीमत क्या हैं? अब Harrier EV कुल 7 वेरिएंट्स में उपलब्ध है। जिनकी एक्स-शोरूम कीमत करीब 20 लाख रुपये से कुछ ज्यादा से शुरू होती है। और टॉप वेरिएंट की कीमत करीब 30 लाख रुपये से कम है। इसमें चार्जर और इंस्टॉलेशन की कीमत अलग है। AC फास्ट चार्जर 49,000 रुपये में उपलब्ध है। क्या नए कलर ऑप्शन भी आए हैं? हां, टाटा मोटर्स ने हैरियर ईवी के नए वेरिएंट के साथ एक नया कलर ऑप्शन पेश किया है:     सीवीड ग्रीन इसके अलावा:     प्रिस्टीन व्हाइट     प्योर ग्रे     एम्पावर्ड ऑक्साइड     नैनीताल नॉक्टर्न कम कीमत में ज्यादा खूबियां Tata Harrier EV का नया Fearless+ QWD 75 वेरिएंट उन ग्राहकों के लिए खास है जो बेहतर परफॉर्मेंस, AWD क्षमता और लंबी रेंज चाहते हैं। लेकिन पहले की तुलना में कम कीमत पर। यह लॉन्च Harrier EV को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाता है और भारतीय ईवी बाजार में इसकी पकड़ मजबूत करता है। 

शेयर बाजार में हलचल: राधाकिशन दमानी ने 100 साल पुरानी कंपनी के शेयर खरीदे, ₹1100 करोड़ लगाए

नई दिल्ली बढ़ती ब्याज दरों के दौर में जहां कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं निवेशक अब सुरक्षित और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों की तलाश में हैं। ऐसे माहौल में दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी ने एक बार फिर अपनी रणनीति से बाजार का ध्यान खींचा है। उन्होंने कर्ज-मुक्त, स्थिर मुनाफा देने वाली और मजबूत डिविडेंड वाली कंपनी VST Industries Ltd में बड़ा निवेश कर रखा है, जो मौजूदा बाजार में आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है। 100 साल पुरानी और मजबूत विरासत VST Industries Ltd की स्थापना 1930 में ‘वजीर सुल्तान टोबैको कंपनी’ के रूप में हुई थी। यह कंपनी British American Tobacco Plc की सहयोगी है और भारत के सिगरेट बाजार में तीसरी सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है। ‘टोटल’ ब्रांड इसकी पहचान है। दमानी का दशक पुराना भरोसा राधाकिशन दमानी ने मार्च 2016 से इस कंपनी में निवेश बनाए रखा है। वर्तमान में उनकी करीब 29% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू 1000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। यह उनके लॉन्ग-टर्म निवेश दृष्टिकोण को दर्शाता है। कर्ज-मुक्त कंपनी और मजबूत डिविडेंड कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘जीरो डेब्ट’ स्थिति है, जिससे ब्याज दरों का असर नहीं पड़ता। लगभग 21% ROCE और 4.5% डिविडेंड यील्ड इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है। यह इंडस्ट्री के औसत से काफी बेहतर है। गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन आकर्षक शेयर कीमत मार्च 2021 के 302 रुपये से गिरकर मार्च 2026 में करीब 222 रुपये तक आ गई है। यह अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग 56% नीचे ट्रेड कर रहा है। 17x पीई पर यह स्टॉक अपने ऐतिहासिक और इंडस्ट्री औसत से सस्ता नजर आता है।  

Skoda Kushaq Facelift लॉन्च, 10.69 लाख कीमत और मसाज सीट्स का शानदार फीचर

मुंबई  स्कोडा ऑटो इंडिया ने अपनी नई कार लॉन्च कर दी है. कंपनी ने कुशाक फेसलिफ्ट (Skoda Kushaq Facelift) को लॉन्च किया है, जो दमदार फीचर्स के साथ आती है. कार पांच वेरिएंट्स- क्लासिक प्लस, सिग्नेचर, स्पोर्टलाइन, प्रेस्टीज और मोंटे कार्लो में आती है. इसमें 1 लीटर का टीएसआई और 1.5 लीटर का टीएसआई टर्बो पेट्रोल इंजन मिलता है।  अपडेटेड कुशाक में पूरे लाइनअप में वैल्यू को बेहतर किया गया है. कुशाक फेसलिफ्ट में कंपनी ने ज्यादा फीचर्स जोड़े हैं,  बेहतर सेफ्टी इक्विपमेंट्स को इस्तेमाल किया है और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बेहतर करने पर काम किया है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और दूसरी खास बातें।  कितनी है कीमत?  नई कुशाक 10.69 लाख रुपये की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत पर आती है. इसमें आपको 1 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन मिलेगा. वहीं 1 लीटर वाले इंजन का टॉप मॉडल 16.79 लाख रुपये (एक्स शोरूम) में आता है. कार के ऑटोमेटिक वेरिएंट्स की कीमत 12.69 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू हो जाती है।  ऐसे कंज्यूमर्स जो ज्यादा वैल्यू चाहते हैं, उनके लिए कार का 1.5 लीटर टीएसआई डीएसजी वेरिएंट है. इसकी कीमत 18.79 लाख रुपये से शुरू होती है. स्कोडा कुशाक फेसलिफ्ट का टॉप वेरिएंट 18.99 लाख रुपये का है।  इंजन और पावर  कुशाक फेसलिफ्ट में पुराने ही इंजन ऑप्शन मिलते हैं. 1 लीटर वाले टीएसआई इंजन में 114 बीएचपी और 178 एनएम का टॉर्क मिलता है. ये वेरिएंट 6-स्पीड मैन्युअल या 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमेटिक गियरबॉक्स के साथ आता है. वहीं 1.5 लीटर वाला इंजन 150 बीएचपी की पावर और 250 एनएम का टॉर्क ऑफर करती है. इसमें 7-स्पीड डीएसजी गियरबॉक्स दिया गया है. बेहतर एफिशिएंसी के लिए एक्टिव सिलेंडर टेक्नोलॉजी दी गई है।  एक्सीरियर में क्या है नया  कार में आपको स्कोडा की लेटेस्ट डिजाइन लैंग्वेज नजर आएगी. कुशाक फेसलिफ्ट का फ्रंट फेस कंपनी की मॉडर्न डिजाइन लैंग्वेज को फॉलो करता है. इसमें स्लिम एलईडी हेडलैम्प्स दिए गए हैं, जो आईब्रो जैसे डीआरएलएस के साथ आते हैं. कार में एल-शेप्ड लाइट्स मिलती हैं।  बंपर को रिडिजाइन किया गया है. इसमें स्लिवर स्किड प्लेट दी गई है. मोंटे कार्लो ट्रिम में क्रोम को ग्लॉसी ब्लैक से रिप्लेस किया गया है. साथ ही दो रेड ग्रील स्ट्रिप जोड़ी गई हैं और यूनिक बैजिंग मिलती है. साइड से कार में कोई बड़ा बदलाव नहीं है. इसमें 16-इंच और 17-इंच के एलॉय का विकल्प मिलता है. रियर में एलईडी लाइट बार दिया गया है, जिसमें SKODA लिखा हुआ है।  इंटीरियर और फीचर्स  कार का इंटीरियर ब्लैक और बेज कलर थीम में है. मोंटे कार्लो एडिशन में थीम थोड़ी अलग मिलेगी. कार में अब 10.25 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और 10.1 इंच का इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन सिस्टम दिया गया है. इसमें डुअल कलर एंबिएंट लाइटिंग और पैनोरोमिक सनरूफ मिलता है।  कार में 491 लीटर का बूट स्पेस मिलता है. रियर में मजास सीट्स का फीचर दिया गया है, जो 6-वे वेंटिलेटेड पावर फ्रंट सीट के साथ आती है. इसके अलावा फ्रंट पार्किंग सेंसर, लेदर अपहोल्स्ट्री, आटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस ऐपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो, 6 स्पीकर ऑडियो सिस्टम और वायरलेस चार्जिंग पैड के साथ आता है।  सेफ्टी फीचर्स स्कोडा कुशाक फेसलिफ्ट में 6 एयरबैग्स, एबीएस, ईबीडी, ईएससी, ट्रैक्शन कंट्रोल और इलेक्ट्रिक डिफरेंशियल लॉक, हिल होल्ड असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं. बता दें कि कार के पिछले वेरिएटं को ग्लोबल एनकैप में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली थी. ये वेरिएंट भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल कर सकता है।