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सोना और चांदी में उलझन: चांदी 2.5 लाख पार, सोना महंगा होने के बाद अचानक गिरावट

इंदौर  चांदी के बाजार में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है और एमसीएक्स पर इसकी कीमत पहली बार 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (Silver Price Today) के पार पहुंच गई है. पिछले हफ्ते चांदी में 31,348 रुपये यानी 15.04 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी. इस दौरान बाजार में आक्रामक खरीदारी देखी गई और उतार-चढ़ाव के बीच चांदी नई ऊंचाई पर पहुंच गई. चांदी की कीमतों में लगातार तेज़ी देखने को मिल रही है और यह नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. इसकी बड़ी वजह इंडस्ट्रियल में बढ़ती मांग, अगले साल अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, और वैश्विक सप्लाई में रुकावट को लेकर चिंता है. इसके अलावा जियो पॉलिटिकल टेंशन भी चांदी की कीमतों को समर्थन दे रहा है. पिछले हफ्ते ही चांदी की कीमतों में करीब 15% की तेज उछाल देखने को मिला था और इसकी मुख्य वजह ग्लोबल सप्लाई का सख्त होना, खासतौर पर चीन में, जहां चांदी की मांग सबसे ज्यादा है. चीन सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़ा निर्माता है, और इन सेक्टर्स में बढ़ती मांग ने चांदी की कीमतों को और ऊपर कर दिया है. थमने का नाम नहीं ले रही चांदी चांदी की कीमतें (Silver Price) थमने का नाम नहीं ले रही हैं. बीते सप्ताह के चार कारोबारी दिनों में ही सिल्वर रेट 32000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा चढ़ गया था. तो वहीं सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही Silver Rate अपने पिछले बंद 2,39,787 रुपये की तुलना में उछलकर 2,54,174 रुपये के नए हाई लेवल पर पहुंच गया. इस हिसाब से देखें, तो ओपनिंग के साथ ही ये कीमती धातु 14,387 रुपये महंगी हो गई.  खुलते ही सस्ता हो गया सोना एक ओर जहां चांदी की कीमत और इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है, तो वहीं दूसरी ओर सोने में सोमवार को सुस्ती देखने को मिली है. खुलने के साथ ही 5 फरवरी की एक्सपायरी वाला MCX Gold Rate 1,39,501 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया, जो इसके पिछले बंद भाव 1,39,873 रुपये की तुलना में 372 रुपये की गिरावट (Gold Price Fall) है. हालांकि, जिस तेजी से सोने का भाव बढ़ा है, उसकी तुलना में ये गिरावट मामूली ही है, लेकिन राहत भरी कही जा सकती है.   चांदी में 175 फीसदी का उछाल कैलेंडर वर्ष के दौरान चांदी ने 1,52,554 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की है. 31 दिसंबर 2024 को 87,233 रुपये प्रति किलो का भाव था जो अब बढ़कर लगभग 175 फीसदी के उछाल के साथ नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. चांदी ने इस तेजी के साथ निवेशकों को साल भर में जोरदार रिटर्न (MCX Silver Price) दिया है. क्यों बढ़ती जा रही है चांदी की कीमत? मेहता इक्विटीज के वीपी कमोडिटी Rahul Kalantri के अनुसार चांदी अब सिर्फ सोने जैसी कीमती धातु के रूप में ट्रेड नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि हाई-परफॉर्मेंस टेक्नोलॉजी में इसकी बढ़ती जरूरत, भंडार की कमी और उद्योगों की मांग इसकी बुनियाद बदल रही है. राहुल के मुताबिक चांदी सोने से अलग होती दिख रही है और 2026 में यह बेहतर निवेश अवसर दे सकती है. Silver में तेजी का China कनेक्शन  बात करें चांदी की कीमत में इस जोरदार तेजी (Silver Price Rise Reason) के बारे में, तो इसके एक नहीं बल्कि कई कारण नजर आते हैं. अमेरिका डॉलर के कमजोर होने और फेड रेट ट की उम्मीदों ने निवेशकों को फिर से सुरक्षित ठिकाने के तौर कीमती धातुओं की ओर मोड़ा है. चांदी की बात करें, तो खासतौर पर इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड (Silver Demand) लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई नहीं हो पा रही है. इलेक्ट्रिक व्हीकल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स तक सभी में सिल्वर का यूज है और इससे इसकी डिमांड का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर चीन की चांदी पर सख्ती (China On Silver) की खबरों ने इसे और रफ्तार देने का काम किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उत्पादक चीन नए साल की पहली तारीख यानी 1 जनवरी 2026 से Silver Export पर सख्ती करने की तैयारी में है. जिनपिंग सरकार इसका एक्सपोर्ट लाइसेंस को लेकर नियम लागू कर सकता है, जिससे इसका निर्यात सीमित हो सकता है. दुनिया के सबसे अमीर इंसान (World's Richest Person) और इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने भी चांदी की कीमतों पर चिंता जताई है. दि गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने एक ट्विटर (अब X) पोस्ट में लिखा है कि, 'यह अच्छा नहीं है, कई इंडस्ट्रियल प्रक्रियाओं में चांदी की आवश्यकता होती है.' चांदी पर चीन का बड़ा फैसला कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि चीन (China News) में सप्लाई टाइट होने और वैश्विक मार्केट में उपलब्धता कम होने से यह तेजी देखने को मिली है. चीन चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन में इसकी प्रमुख भूमिका है. विश्लेषकों के अनुसार बीजिंग 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर नियंत्रण लागू करेगा जिसके लिए लाइसेंस जरूरी होगा. यह व्यवस्था 2027 तक जारी रहने की संभावना है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा. 2026 में भी महंगा हो सकता है Gold Silver विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी में 2026 में भी बढ़त देखी जा सकती है. इसका कारण ग्लोबल रेट कट की उम्मीद, सेफ हेवन डिमांड और मजबूती वाली इंडस्ट्रियल जरूरतें बताई जा रही हैं. हालांकि ट्रेडर्स के लिए यह भी कहा गया है कि 2025 की असाधारण रैली के बाद तेजी की रफ्तार मध्यम हो सकती है. चांदी के रेट में क्यों देखने को मिल रही है तेजी? चांदी की मांग- चांदी के भाव में तेजी आने के पीछे कुछ अहम वजहें शामिल है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस सिक्योरिटीज़ के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने बताया है कि चांदी कई सालों से सप्लाई की कमी में है. दुनिया भर में खानों से निकलने वाली चांदी की मात्रा मांग को पूरा नहीं कर पा रही और स्टॉक्स भी लगातार घट रहे हैं. अगर यह कमी और बढ़ती है, तो चांदी की कीमतें और अधिक ऊंची हो सकती हैं. इसी तरह, अक्षा कांबोज़, जो भारत बुलियन … Read more

यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: इंडिगो ने 130 उड़ानें रद्द की, 94 रूट्स प्रभावित

नई दिल्ली केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सख्त निर्देशों के बाद इंडिगो (IndiGo) ने अपनी घरेलू उड़ानों में कटौती कर दी है. इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो ने अपने दैनिक शेड्यूल में लगभग 10 फीसदी की कटौती करते हुए 94 अलग-अलग रूट्स पर अपनी करीब 130 फ्लाइट्स को रोक दिया है. इंडिगो ने दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु और मुंबई-बेंगलुरु जैसे व्यस्‍त रूटों पर उड़ानों की संख्या में कोई कटौती नहीं की है. वहीं देश प्रमख हवाई अड्डों में बेंगलुरु से सबसे ज्‍यादा उड़ानों में कटौती की गई है. इंडिगो अब प्रतिदिन कुल 2,200 उड़ानों (घरेलू + अंतरराष्ट्रीय) के स्तर पर खुद को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है. पहले यह संख्या 2,300 के पार थी. सूत्रों का कहना है कि यह न्‍यू नॉर्मल मार्च 2026 तक जारी रह सकता है. दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो ने जो शेड्यूल फाइल किया था और 29 दिसंबर के लिए जो संशोधित शेड्यूल सामने आया, उनमें जमीन-आसमान का अंतर है. दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो ने 29 दिसंबर के लिए 2,008 घरेलू उड़ानों की योजना बनाई थी, लेकिन नए अपडेटेड चार्ट में यह संख्या घटकर 1,878 रह गई है. इंडिगो के इस नए शेड्यूल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि एयरलाइन ने अपने ‘कैश काउ’ यानी सबसे ज्यादा कमाई कराने वाले और व्यस्ततम रूट्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. यह कटौती दिसंबर की शुरुआत में आए बड़े ऑपरेशनल व्यवधान के बाद की गई, जिसके चलते कुछ ही दिनों में हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं. दिल्‍ली से इंडिगो ने नहीं की फ्लाइट कम इंडिगो के सबसे बड़े बेस दिल्ली से एक भी उड़ान कम नहीं की गई है. वहीं, सपनों के शहर मुंबई में केवल दो उड़ानों (एक आने वाली और एक जाने वाली) की कटौती हुई है. दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु और मुंबई-बेंगलुरु जैसे हाई-ट्रैफिक रूट्स पर उड़ानों की संख्या जस की तस बनी हुई है. दिल्ली-मुंबई रूट पर आज भी 20-20 उड़ानें शान से उड़ान भर रही हैं. इस कटौती की सबसे ज्यादा मार कम दूरी वाले यानी शॉर्ट-हॉल रूट्स पर पड़ी है. इसमें एक ही राज्य के भीतर चलने वाली या पड़ोसी राज्यों के शहरों को जोड़ने वाली उड़ानें शामिल हैं. किस एयरपोर्ट पर हुई सबसे ज्‍यादा कटौती बेंगलुरु में सबसे अधिक परिचालन संबंधी बदलाव देखे गए हैं. 29 दिसंबर के शेड्यूल में बेंगलुरु से जुड़ी 52 उड़ानों (26 प्रस्थान और 26 आगमन) को हटा दिया गया है.     बेंगलुरु: 52 उड़ानें कम     हैदराबाद: 34 उड़ानें कम     चेन्नई: 32 उड़ानें कम     कोलकाता: 22 फ्लाइट्स कम     अहमदाबाद : 22 उड़ानें कम इस रूट पर सबसे ज्‍यादा कटौती इंडिगो ने इस छंटनी को बहुत ही सूक्ष्म तरीके से अंजाम दिया है. चेन्नई-मदुरै और मदुरै-चेन्नई रूट पर सबसे बड़ी कटौती हुई है, जहां 8 उड़ानों की जगह अब केवल 3 उड़ानें रह गई हैं. गोवा-सूरत और चेन्नई-दुर्गापुर जैसे कुछ रूट्स ऐसे भी हैं, जहां चलने वाली इकलौती फ्लाइट को भी हटा दिया गया है, जिससे फिलहाल इन शहरों के बीच इंडिगो का संपर्क टूट गया है. कटौती के बीच इंडिगो ने दिल्ली-नागपुर और दिल्ली-हैदराबाद जैसे कुछ महत्वपूर्ण रूट्स पर एक-एक अतिरिक्त उड़ान जोड़ी भी है, ताकि हाई-डिमांड वाले क्षेत्रों में पकड़ बनी रहे. क्या यह 10% कटौती के आदेश का पालन है? तकनीकी रूप से देखें तो 2,008 से 1,878 उड़ानों पर आना करीब 6.5% की कमी है. हालांकि, विमानन सूत्रों का कहना है कि इंडिगो पूरी तरह नियमों का पालन कर रही है. दरअसल, DGCA की 10% कटौती एयरलाइन के ‘स्वीकृत विंटर शेड्यूल’ पर लागू होती है, जो लगभग 2,145 दैनिक उड़ानों का था. इस आधार पर अनुमत उड़ानों की संख्या 1,930 के करीब आती है. चूंकि इंडिगो अभी 1,878 उड़ानें ही संचालित कर रहा है, इसलिए वह निर्धारित सीमा के भीतर ही है. एयरलाइंस अक्सर परिचालन में लचीलापन रखने के लिए स्वीकृत कोटा से कम उड़ानें ही चलाती हैं. अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कटौती से बेअसर राहत की बात यह है कि DGCA का यह आदेश केवल घरेलू उड़ानों के लिए था. इंडिगो का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, जो प्रतिदिन 300 से अधिक उड़ानों का है, इस कटौती से पूरी तरह अछूता है. एयरलाइन विदेशों के लिए अपनी सेवाओं को उसी आक्रामकता और फ्रीक्वेंसी के साथ जारी रखे हुए है. क्रू की उपलब्धता और नेटवर्क मैनेजमेंट एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कटौती केवल नियामक के दबाव में नहीं है, बल्कि यह एयरलाइन के लिए ‘आत्मनिरीक्षण’ का समय भी है. पिछले कुछ हफ्तों में भारी ऑपरेशनल व्यवधान और हजारों उड़ानों के रद्द होने से इंडिगो की साख पर सवाल उठे थे. अब, रूट्स की दूरी और क्रू की उपलब्धता के आधार पर शेड्यूल को दोबारा सेट किया गया है ताकि भविष्य में अचानक उड़ानें रद्द करने की नौबत न आए.  

चांदी में रिकॉर्ड उछाल: 24 घंटे में ₹19,700 महंगी हुई सिल्वर, कीमतों ने तोड़ा स्तर

नई दिल्ली  पिछले कुछ दिनों में चांदी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया है। कीमतों में ऐसी ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है, जो अब तक दुर्लभ मानी जाती थी। शनिवार, 27 दिसंबर को इंदौर के सर्राफा बाजार में चांदी एक ही दिन में 19,700 रुपये उछलकर 2.53 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। MCX के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक चांदी 150 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसका भाव 75 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है। खास बात यह है कि यह तेजी किसी डर या सट्टेबाजी की वजह से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी कारणों से आई है। सप्लाई से ज्यादा मांग चांदी लंबे समय से स्ट्रक्चरल डेफिसिट में है, यानी इसकी मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा है। उद्योग रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में वैश्विक बाजार में 100 मिलियन औंस से अधिक की कमी रह सकती है। चूंकि चांदी मुख्य रूप से कॉपर, जिंक और लेड की खदानों से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलती है, इसलिए इसकी सप्लाई तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। गोदामों में घट रहा स्टॉक COMEX, लंदन और शंघाई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वॉल्ट्स में चांदी का स्टॉक लगातार घटता जा रहा है। जैसे-जैसे इन्वेंट्री कम हो रही है, वैसे-वैसे फिजिकल चांदी की उपलब्धता और तंग होती जा रही है। इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। इंडस्ट्रियल डिमांड ने बढ़ाया दबाव आज चांदी की 50-60 फीसदी मांग इंडस्ट्रियल सेक्टर से आती है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल सेक्टर में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है। ग्रीन एनर्जी पर बढ़ता फोकस इस मांग को और मजबूत बना रहा है। चीन फैक्टर से बाजार में हलचल चर्चा है कि चीन 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर सख्ती कर सकता है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस आशंका ने ही निवेशकों को फिजिकल चांदी खरीदने के लिए प्रेरित कर दिया है। आगे क्या करें निवेशक? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी ठोस आधार पर टिकी है। हालांकि चांदी स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाली धातु है, इसलिए शॉर्ट टर्म में हल्की गिरावट संभव है। लंबी अवधि में, खासकर 2026 तक, इसके दाम 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकते हैं।

कार खरीदारों को लगेगा ब्रेक! 2026 की शुरुआत में बढ़ेंगे गाड़ियों के दाम

नई दिल्ली  भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए साल की शुरुआत के साथ ही कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। कई प्रमुख कार निर्माता कंपनियों ने जनवरी 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफा, लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत और संचालन व्यय में वृद्धि इस कदम के प्रमुख कारण हैं। यह बदलाव मास मार्केट कारों, इलेक्ट्रिक वाहनों और लग्जरी मॉडलों सभी पर लागू होगा। आइए जानते हैं कौन-कौन सी कंपनियां कीमत में बढ़ोतरी करने वाली हैं। मर्सिडीज-बेंज इंडिया मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने अपनी पूरी रेंज की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि इनपुट कॉस्ट और मुद्रा विनिमय संबंधी दबाव इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण हैं। यह बढ़ोतरी एंट्री-लेवल सेडान, SUVs और हाई-परफॉर्मेंस मॉडल सभी को प्रभावित करेगी। यदि आप अभी इस कंपनी की कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो साल के अंत तक बुकिंग कर सकते हैं। निसान मोटर इंडिया निसान मोटर इंडिया ने जनवरी 2026 से अपनी पूरी लाइनअप में लगभग 3% तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसमें Magnite जैसे लोकप्रिय मॉडल भी शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि निर्माण और सप्लाई चेन की लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, कुछ प्रभाव को आंतरिक रूप से कम करने की कोशिश की गई है। होंडा कार्स इंडिया होंडा इंडिया ने भी अपनी सभी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। कंपनी ने इनपुट और संचालन लागत में बढ़ोतरी को इस कदम का मुख्य कारण बताया है। हालांकि, होंडा ने अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी की सटीक दर का खुलासा नहीं किया है।   एमजी मोटर इंडिया एमजी मोटर इंडिया कुछ चुनिंदा मॉडलों, जैसे कि Comet EV, Windsor EV और Hector रेंज, की कीमतों में लगभग 2% तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने कहा कि कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत उत्पादन खर्च को प्रभावित कर रही है, जिसके चलते कीमतों में यह समायोजन किया जा रहा है। BYD इंडिया BYD इंडिया ने Sealion 7 इलेक्ट्रिक SUV की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। हालांकि पूरे लाइनअप में समान बढ़ोतरी नहीं की गई है। कंपनी ने कहा कि बैटरी सोर्सिंग और इंपोर्ट से जुड़ी लागतों में इजाफा इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण हैं।  

उड़ान भरता भारत: नवंबर में घरेलू हवाई यात्रियों ने छुआ डेढ़ करोड़ का आंकड़ा

नई दिल्ली  घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या इस साल नवंबर में सालाना आधार पर 6.92 प्रतिशत बढ़कर एक करोड़ 52 लाख 38 हजार पर पहुंच गई। यह पहली बार है जब किसी एक महीने में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों ने हवाई यात्रा की है। इससे पहले अधिकतम आंकड़ा दिसंबर 2024 में दर्ज किया गया था जब एक करोड़ 49 लाख 28 हजार लोगों ने हवाई यात्रा की थी। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से नवंबर तक 11 महीने में कुल 15 करोड़ 26 लाख 35 हजार लोगों ने हवाई यात्रा की है। यह पिछले साल की समान अवधि से 4.26 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि नवंबर में यह रिकॉर्ड तब बना है जब इस साल दीपावली और छठ के पर्व अक्टूबर में ही समाप्त हो चुके थे, जब अमूमन मांग काफी अधिक होती है। आंकड़ों के अनुसार, भरी सीटों का अनुपात (पीएलएफ) के मामले अकासा एयर 93.8 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रही। इंडिगो 88.7 प्रतिशत के साथ दूसरे और स्पाइसजेट 87.7 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रही। एयर इंडिया समूह का पीएलएफ 87.5 प्रतिशत और इंडियावन एयर का 82.7 प्रतिशत रहा। यात्री संख्या के मामले में नवंबर में इंडिगो और अकासा की बाजार हिस्सेदारी घट गयी जबकि एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) और स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि हुई। इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी अक्टूबर के 65.6 प्रतिशत के कम होकर 63.6 प्रतिशत रह गयी। एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत, अकासा की 4.7 प्रतिशत और स्पाइसजेट की 3.7 प्रतिशत रही। देश के छह मेट्रो शहरों दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में समय पर उड़ान भरने के मामले में अकासा एयर 72.2 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रही। एयर इंडिया समूह की 69.1 प्रतिशत उड़ानें, इंडिगो की 69 प्रतिशत, अलायंस एयर की 59 प्रतिशत और स्पाइसजेट की 48.4 प्रतिशत समय पर रवाना हुईं। समय पर उड़ानों को रवाना करने के मामले में 86.4 प्रतिशत के साथ चेन्नई एयरपोर्ट पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्रमशः बेंगलुरु एयरपोर्ट से 78.6 प्रतिशत, हैदराबाद से 75.5 प्रतिशत, कोलकाता से 74.4 प्रतिशत, दिल्ली से 62.2 प्रतिशत और मुंबई से 50.1 प्रतिशत उड़ानें समय पर रवाना हुईं।  

कीमती धातुओं के दाम बेकाबू, सोना और चांदी में हुई तेज़ी, 17000 रुपये महंगी हुई रजत

 नई दिल्‍ली  चांदी की कीमत में तेजी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। हफ्ते के अंतिम दिन यह नए रेकॉर्ड पर पहुंच गई। एमसीएक्स पर इसकी कीमत में 17,000 रुपये से अधिक तेजी आई। कारोबार के दौरान यह 2,42,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी और अंत में 2,40,935 रुपये पर बंद हुई। कॉमेक्स पर इसका भाव $79.70 प्रति औंस के नए रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही चांदी दुनिया की दूसरे सबसे वैल्यूएबल एसेट बनने के करीब पहुंच चुकी है। इसका मार्केट कैप 4.4 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है और यह एनवीडिया की वैल्यू को पार करने से मात्र 4.5% दूर है। अगर यह एनवीडिया को पछाड़ती है तो सोने के बाद दुनिया की दूसरी बड़ी एसेट बन जाएगी। शुक्रवार के बंद भाव पर एनवीडिया का मार्केट कैप 4.638 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी है। सोना और चांदी के दाम बेकाबू हो चुके हैं. हर दिन इनकी कीमत तेजी से चढ़ जाती है. रिटेल से लेकर बड़े निवेश भी अब खुलकर इसपर दाव लगा रहे हैं. इस तेजी के साथ ही बड़े-बड़े एक्‍सपर्ट भी ये मान रहे हैं कि सोने-चांदी के दाम (Gold-Silver Rates)  लॉन्‍ग टर्म में ऊपर की ओर जाएंगे. कीमती धातुओं के दाम रुकने वाले नहीं हैं. आए दिन ये धातुएं अपने रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच रही हैं.  अब कल यानी शुक्रवार को ही देखें तो एमसीएक्‍स पर चांदी के भाव में गजब की तेजी रही. कमोडिटी मार्केट में कारोबार बंद होने तक 5 मार्च वायदा के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 17145 रुपये चढ़कर 2,40,935 रुपये पर थी. हालांकि चांदी दिन के कारोबार के दौरान 19,000 रुपये चढ़कर 2 लाख 42 हजार रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जो इसका ऑल टाइम हाई लेवल है.  वहीं सोने की कीमत में भी तेज उछाल देखने को मिली थी. MCX पर कल 5 फरवरी वायदा के लिए 10 ग्राम सोने का भाव 70 रुपये चढ़कर 139940 रुपये पर पहुंच गई, जबकि दिन के कारोबार के दौरान सोने के भाव में करीब 1200 रुपये की उछाल आई थी. सोने ने भी कल अपना ऑल टाइम हाई लेवल टच किया था.  एक सप्‍ताह में ही सोने-चांदी के दाम बेकाबू पिछले एक हफ्ते में ही सोने-चांदी के दाम में गजब की उछाल आई है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर की चीज हो चुकी है. 19 दिसबंर को 10 ग्राम सोने का भाव 1,34,196 रुपये था और आज इसकी कीमत  1.40 लाख रुपये के करीब है. यानी एक सप्‍ताह में ही इसकी कीमत में 6000 रुपये की तेजी आई है. इससे भी ज्‍यादा तेजी चांदी की कीमत में आई है. 19 दिसंबर को चांदी की कीमत 2 लाख 8 हजार रुपये प्रति किलो पर थी, लेकिन इसकी कीमत 2 लाख 40 हजार रुपये हो चुकी है. एक सप्‍ताह में ही इसके दाम में 32 हजार रुपये की उछाल आई है.  क्यों बढ़ रही है डिमांड? चांदी ने 52 सप्ताह के निचले स्तर $27.545 प्रति औंस से लगभग 190% की बढ़ोतरी है। जानकारों का कहना है कि अल्पावधि से मध्यावधि में चांदी की कीमत $100 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है। सेफ हेवन की बढ़ती मांग बढ़ती औद्योगिक खपत और लगातार आपूर्ति की कमी के कारण चांदी की कीमत में उछाल आई है। साथ ही सॉलिड-स्टेट बैटरी की मांग भी बढ़ रही है जिसमें चांदी एक मुख्य कच्चा माल है। यह बैटरी केवल 10 मिनट में सेल फोन को पूरी तरह चार्ज कर सकती है। जानकारों का कहना है कि दुनिया में अभी चांदी का उत्पादन करीब 850 मिलियन औंस है जबकि इसकी मांग लगभग 1.16 बिलियन औंस है। सॉलिड-स्टेट बैटरी के अलावा ईवी और सोलर एनर्जी में भी चांदी की डिमांड बढ़ रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव ने चांदी के पारंपरिक कैरिबियन शिपिंग मार्ग को बाधित कर दिया है। इससे दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर पेरू से चांदी का निर्यात प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में चांदी की कीमत में और तेजी आने की उम्मीद है। सोने और चांदी के भाव में क्‍यों आ रही इतनी तेजी?      इंटरनेशनल लेवल पर सोने और चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच चुकी है. जिस कारण घरेलू बाजार में भी सोने और चांदी के दाम लगातार उछाल पर है.       गोल्‍ड और सिल्‍वर ETF में निवेशकों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है. मार्केट में गिरावट के बीच लोग सोने और चांदी ईटीएफ के माध्‍यम से सेफ निवेश की ओर बढ़ रहे हैं.      डॉलर कमजोर हुआ है और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्‍याज दर में कटौती की उम्‍मीदें बढ़ी है, जिस कारण सोने और चांदी के लिए मांग बढ़ रही है.     इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे सेक्‍टर्स में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा है और निवेशक इसकी तेजी में भाग ले रहे हैं.       राजनीतिक तनाव, तेल बाजार और संघर्ष के कारण निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोना-चांदी ज्‍यादा मात्रा में खरीद रहे हैं.     केंद्रीय बैंकों द्वारा भी कीमती धातुएं ज्‍यादा मात्रा में खरीदी जा रही हैं, जिससे इसकी मांग बनी हुई है और दाम ऊपर की ओर चढ़ रहे हैं.  क्‍या करना चाहिए?  एक्सपर्टस का कहना है कि सोने और चांदी की मांग बनी रहेगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसमें मुनाफावसूली देखी जा सकती है और गिरावट आ सकती है. ऐसे में निवेशकों को सावधानी से पैसे लगाने चाहिए. उनका कहना है कि गोल्‍ड और सिल्‍वर फिजिकल नहीं खरीदकर, ETF के माध्‍यम से हर हफ्ते या महीने में खरीद सकते हैं और धीरे-धीरे करके मोटा पैसा लगा सकते हैं. लॉन्‍ग टर्म में ये आपको ज्‍यादा मुनाफा करा सकता है.   

नई Kawasaki Ninja 1100SX भारत में उपलब्ध, 2026 मॉडल की कीमत और खासियतें

मुंबई  मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Kawasaki India ने 2026 मॉडल ईयर के लिए अपने पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है, और इसी क्रम में कंपनी ने अपनी लेटेस्ट बाइक Kawasaki Ninja 1100SX का अपडेटेड वर्जन बाजार में उतारा है. यह बड़ी Ninja पहले जैसी ही है और इसकी कीमत भी पहले जितनी ही 14.42 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है. एकमात्र बदलाव इसमें एक नया कलर ऑप्शन दिया गया है, जो ब्लैक और गोल्ड है, जिसने इस बाइक के सिग्नेचर ब्लैक और ग्रीन कलर की जगह ली है. 2026 Kawasaki Ninja 1100SX का इंजन Ninja 1100SX में मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें वही 1,099cc, चार-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन है, जो पहले की तरह ही 136hp की पावर और 113Nm का अधिकतम टॉर्क देता है. ज़्यादातर इनलाइन चार इंजनों के उलट, यह इंजन बाइक के कैरेक्टर के हिसाब से पीकी टॉप-एंड रश देने के बजाय, असल दुनिया में इस्तेमाल होने वाली मिड-रेंज ग्रंट देने पर ज़्यादा फोकस करता है. यह इंजन लेटेस्ट सरकारी नियमों के अनुसार पूरी तरह से E20-कम्प्लायंट भी है. इस इंजन को एक एल्यूमीनियम फ्रेम में फिट किया गया है और दोनों तरफ पूरी तरह से एडजस्टेबल शोवा सस्पेंशन लगे हैं. ब्रेकिंग के लिए मोटरसाइकिल में टोकिगो के ब्रेक लगाए गए हैं, जो Kawasaki के हैं और इसमें डुअल-चैनल ABS मिलता है. 2026 Kawasaki Ninja 1100SX के फीचर्स राइडर एड्स के सूट के तौर पर इस बाइक में चार राइडिंग मोड – रेन, रोड, स्पोर्ट और राइडर शामिल हैं, जिनमें ट्रैक्शन कंट्रोल इंटरवेंशन, थ्रॉटल सेंसिटिविटी और पावर डिलीवरी पर असर पड़ता है, जैसे-जैसे आप इन्हें बदलते हैं. राइडर मोड पूरी तरह से कस्टमाइज़ेबल है, और जब Ninja इस मोड में होती है तो 4.3-इंच TFT का लेआउट थोड़ा अलग होता है. इसके अलावा, मोटरसाइकिल में एक बिडायरेक्शनल क्विकशिफ्टर राइडिंग एड्स के सूट को पूरा करता है, जिसे सिक्स-एक्सिस IMU (इनर्टियल मेज़रमेंट यूनिट) से मदद मिलती है. यह सब 2025 मॉडल जैसा ही है, और 2026 Kawasaki Ninja 1100SX को 2025 मॉडल से अलग पहचानने का एकमात्र तरीका इसका नया कलर ऑप्शन है. Kawasaki Ninja 1100SX भारतीय सड़कों पर सच में इस्तेमाल करने लायक और आरामदायक लीटर-क्लास मशीन है, और इसकी 14.42 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, इंडिया) कीमत पर इसके जैसी दूसरी कोई बाइक ज़्यादा नहीं है.

इलेक्ट्रिक वाहनों में क्रांति की तैयारी: सैमसंग बना रही फास्ट-चार्जिंग बैटरी, ज्यादा रेंज का दावा

नई दिल्ली इलेक्‍ट्रि‍क गाड़‍ियों के मार्केट में नई क्रांति आ सकती है। ग्राहकों की सबसे बड़ी उलझन सुझल सकती है। जिस रेंज और चार्जिंग स्‍पीड को लेकर लोग सबसे ज्‍यादा फ‍िक्र करते हैं और इलेक्‍ट्र‍िक गाड़‍ियां खरीदने से बचते हैं, उसका हल न‍िकालने पर काम शुरू हो गया है। साउथ कोरियाई दिग्‍गज कंपनी सैमसंग ( Samsung ) सिलिकॉन-कार्बन (Si-C) एनोड बैटरी को बनाने जा रही है। एक र‍िपोर्ट के अनुसार, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की बैटरी बनाने वाली कंपनी सैमसंग SDI ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए बैटरी पैक टेक्नोलॉजी को मिलकर विकसित करने के लिए KG Mobility के साथ एक साझेदारी की घोषणा की है। केजी मोब‍िलिटी, साउथ कोरिया की प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरर है। किस तकनीक का इस्‍तेमाल करती है नई बैटरी? सैममोबाइल की रिपोर्ट (ref.) के अनुसार, इस सिलिकॉन-कार्बन (Si-C) एनोड बैटरी में सैमसंग SDI के 46-सीरीज की सिलिंड्रिकल सेल का इस्तेमाल किया जाएगा। दावा है कि जब यह बैटरी इलेक्‍ट्र‍िक गाड़‍ियों में लगने लगेगी तो उनकी रेंज और चार्जिंग स्‍पीड में जबरदस्‍त सुधार होगा। ऐसी उम्‍मीद की जा रही है कि भविष्‍य में इस तकनीक को स्‍मार्टफोन्‍स में भी लाया जाएगा। ऐसा होता है तो हम लंबी बैटरी लाइफ वाले स्‍मार्टफोन्‍स को भी लॉन्‍च होता हुआ देखेंगे। बैटरी फूलने की समस्‍या होगी कम, बढ़ेगी लाइफ रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग SDI ने KG Mobility के साथ एक एक एमओयू साइन किया है। अब दोनों कंपनियां मिलकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए इस बैटरी पैक टेक्नोलॉजी पर काम करेंगी। बताया जा रहा है कि सैमसंग SDI की नई बैटरी में हाई-निकेल NCA कैथोड और खास सिलिकॉन कार्बन नैनोकम्पोजिट एनोड का इस्तेमाल किया गया है। दावा है कि नई तकनीक से बैटरियों के फूलने की शिकायत में कमी आएगी और उनकी लाइफ बढ़ेगी। डिजाइन ऐसा, जिससे मिलेगी फास्‍ट चार्जिंग रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग ने बैटरी के डिजाइन पर खास ध्‍यान दिया है। उसने बैटरी को इस तरह तैयार किया है कि वह अंदरूनी तौर पर कम रेजिस्‍ट होती है, जिससे बैटरी में करंट का फ्लो अच्‍छा बना रहता है। इससे बैटरी में पावर आउटपुट बढ़ता है और वह तेजी से चार्ज भी हो पाती है। बताया जाता है कि बैटरी में गर्मी को कंट्रोल करने की प्रक्र‍िया को भी सुधारा गया है। यह पहले डेवलप की गई बैटरियों से ज्‍यादा भरोसेमंद और सुरक्ष‍ित है। किन कारों में लगेगी ये बैटरी अभी तक आई जानकारी के अनुसार, नए बैटरी पैक KG Mobility की नेक्‍स्‍ट जेन इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि ऐसी उम्‍मीद की जानी चाहिए कि भविष्‍य में ये बैटरी अन्‍य कार कंपनियों को भी पावर देगी। वहीं, यह उम्‍मीद भी है कि भविष्‍य में सैमसंग की यह तकनीक उसकी गैलेक्‍सी सीरीज के स्‍मार्टफोन्‍स में भी आएगी।

फ्री ट्रेड डील के बाद भी भारत के लिए जरूरी काम, रिपोर्ट में मिली अहम जानकारी

नई दिल्‍ली भारत ने एक के बाद एक दूसरे देशों से 18 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्‍ताक्षर किया है, लेकिन एक्‍सपोर्ट में उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि नए समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बजाय मौजूदा समझौतों से निर्यात में ठोस लाभ सुनिश्चित करने पर फोकस करना चाहिए. खासकर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, इंजीनियरिंग और टेक्‍सटाइल्‍स सेक्‍टर में, जहां से ज्‍यादा लाभ मिल सकता है.  रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 के दौरान इसमें मामूली इजाफा हुआ है और यह करीब 850 अरब अमेरिकी डॉलर तक होने का अनुमान है. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के असर कारण इसमें ज्‍यादा इजाफा नहीं हुआ है.   कमजोर इंटरनेशलन डिमांड और बढ़ते सेफ उपायों के कारण माल निर्यात में कोई खास बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, जबकि सर्विस सेक्‍टर एक्‍सपोर्ट 400 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकता है. यह भारत के समग्र व्यापार प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकता है.  भारत ने की 18 एफटीए डील GTRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं और साल 2026 में और भी हस्ताक्षर होने की संभावना है. ऐसे में भारत की प्राथमिकता समझौतों पर हस्ताक्षर करने से हटकर मुक्त व्यापार समझौतों से वास्तविक निर्यात लाभ प्राप्त करने की ओर होनी चाहिए.  GTRI ने इस बात पर फोकस किया है कि भारत पिछले कई सालों में सबसे कठिन ग्‍लोबल ट्रेड सिचुएशन के साथ 2026 में एंट्री ल रहा है. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद, वैश्विक मांग में मंदी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई व्यापार बाधाएं भारत के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खा रही हैं. इससे बाजार में विस्‍तार के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखने पर ज्‍यादा फोकस हो रहा है.  टैरिफ सबसे बड़ा दबाव  संयुक्त राज्य अमेरिका एक महत्वपूर्ण दबाव के तौर पर उभरा है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों को दरकिनार करते हुए एकतरफा भारी टैरिफ लागू किया है. मई और नवंबर 2025 के बीच मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 21 प्रतिशत गिर गया.  निर्यात में और गिरावट आ सकती है जीटीआरआई ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को वापस नहीं लेता या कोई व्यापार समझौता नहीं करता, भारत के सबसे बड़े बाजार को निर्यात में और गिरावट आ सकती है.  भारत के लिए यूरोप से भी चुनौती यूरोप एक अलग चुनौती पेश कर रहा है. यूरोपीय संघ 1 जनवरी, 2026 से अपना कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करेगा, जिसके तहत आयात पर कार्बन टैक्‍स लाया जाएगा. अभी ये टैक्‍स लागू होने से पहले ही यूरोपीय संघ को भारत के इस्पात निर्यात में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है.  हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में लचीलेपन के संकेत मिले हैं. अमेरिका को निर्यात में गिरावट के बावजूद अन्‍य ग्‍लोबल मार्केट को शिपमेंट में करीब 5.5 फीसदी की तेजी है. जीटीआरआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक भू-राजनीति पर सीमित प्रभाव के साथ, भारत को अपने देश पर फोकस करना चाहिए. 

Gold और Silver की कीमतों में जबरदस्त उछाल, सोना ₹1,287 बढ़कर रिकॉर्ड पर, चांदी ₹2.32 लाख पार

इंदौर  सोने-चांदी की दहाड़ से सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है। आज सोने-चांदी के भाव एक और नया इतिहास लिख चुके हैं। दोनों धातुएं आज भी एक नए ऑल टाइम हाई पर हैं। चांदी के भाव एक झटके में 13117 रुपये प्रति किलो उछकर 232100 रुपये प्रति किलो पर खुले। जबकि, सोने के भाव में 1287 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 239063 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 142051 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। MCX पर दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से बुलियन सेगमेंट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर सोना 1.39 लाख के पार, बना नया रिकॉर्ड मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना तेज उछाल के साथ नया इतिहास रच गया। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,39,290 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया, जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।दोपहर के कारोबार में भी सोना मजबूती बनाए हुए नजर आया और करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड करता दिखा। निवेशकों का रुझान साफ तौर पर सोने की ओर बढ़ा है। चांदी की रफ्तार और तेज, 2.33 लाख रुपये के पार सोने के साथ-साथ चांदी ने भी बाजार में तूफान ला दिया। MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 2,33,183 रुपये प्रति किलो का स्तर छूकर नया ऑल-टाइम हाई बना दिया।दिनभर के कारोबार में चांदी में हजारों रुपये की तेजी देखने को मिली, जिसने इसे निवेशकों का सबसे पसंदीदा एसेट बना दिया। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 1282 रुपये उछल कर 137362 रुपयेकै प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 141482 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1179 रुपये चढ़कर 126329 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 130118 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 966 रुपये की तेजी के साथ 103436 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 106539 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 753 रुपये चढ़ा है। आज यह 80680 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 83100 रुपये पर है। 2025 में सोना-चांदी ने दिया जबरदस्त रिटर्न इस साल की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, वहीं चांदी ने तो उम्मीद से कहीं ज्यादा कमाई कराई है। यही वजह है कि मौजूदा समय में बुलियन मार्केट को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चमक, डॉलर के मुकाबले मजबूती वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा, जबकि चांदी ने भी नया उच्चतम स्तर छू लिया।अमेरिकी बाजारों में निवेशकों की बढ़ती मांग और आर्थिक अनिश्चितता ने इस तेजी को और बल दिया। आखिर क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक तनाव, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और डॉलर में उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश बनकर उभरे हैं। आगे क्या रहेगा ट्रेंड, निवेशकों को क्या करना चाहिए? मौजूदा हालात में बुलियन बाजार का ट्रेंड मजबूत नजर आ रहा है। हालांकि, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होती हैं, तो मुनाफावसूली का जोखिम भी बढ़ जाता है।निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें और बाजार की दिशा को समझते हुए ही निवेश करें। इस साल सोना ₹61,752 और चांदी ₹1,46,083 महंगी हुई     इस साल अब तक सोने की कीमत 61,752 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,37,914 रुपए हो गया है।     चांदी का भाव भी इस दौरान 1,46,083 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 2,32,100 रुपए प्रति किलो हो गई है। गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण     डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।     जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।     रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण     इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।     ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।     मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल के आखिर तक चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में अगले साल तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है। वहीं इस साल के आखिर तक इसकी कीमत 1.40 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड … Read more