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24K और 22K के बाद अब 9 कैरेट गोल्ड की एंट्री, जानें क्या होगा कीमतों पर असर

नई दिल्ली सोने की कीमतों में लगातार उछाल के चलते अब 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के गहने आम लोगों के बजट से बाहर होते जा रहे हैं। ऐसे में 9 कैरेट गोल्ड, जिसमें केवल 37.5% शुद्ध सोना होता है, धीरे-धीरे ज्वैलरी मार्केट में किफायती और फैशनेबल विकल्प के रूप में उभर रहा है। सरकार ने हाल ही में 9 कैरेट गोल्ड को हॉलमार्किंग की मंजूरी दे दी है, जिससे यह औपचारिक रूप से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक के तहत आता है। इसका मतलब है कि अब उपभोक्ताओं को इस गोल्ड की शुद्धता और गुणवत्ता की आधिकारिक गारंटी मिलती है। हर हॉलमार्क वाले गहने पर BIS का लोगो, सोने की शुद्धता का ग्रेड (375) और 6 अंकों का यूनिक HUID कोड अंकित होगा, जिससे मिलावट की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। आज 9 कैरेट गोल्ड का भाव प्रति ग्राम ₹4,332.79 दर्ज किया गया, जो पिछले स्तर की तुलना में ₹57.75 (1.35%) की बढ़त को दर्शाता है। 9 कैरेट गोल्ड की खासियत: इस गोल्ड में शेष 62.5% मिश्र धातुएं—जैसे तांबा और चांदी—इसे मजबूत और टिकाऊ बनाती हैं। हल्का होने के कारण यह रोजमर्रा पहनने के लिए सुरक्षित और आरामदायक है। युवा वर्ग और फैशन-प्रेमी अब इसे ट्रेंडी हार, पेंडेंट, ब्रेसलेट और इयररिंग्स में प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार पर असर: हॉलमार्किंग की मंजूरी से 9 कैरेट गोल्ड की विश्वसनीयता बढ़ी है। ज्वैलरी उद्योग में नए ग्राहक आकर्षित होंगे, खासकर पहली बार गोल्ड खरीदने वाले और हल्की, मॉडर्न ज्वैलरी पसंद करने वाले लोग। साथ ही यह भारतीय ज्वैलरी को निर्यात बाजार में भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के बढ़ते दामों और युवा वर्ग के हल्के गहनों की बढ़ती मांग के बीच 9 कैरेट गोल्ड एक सस्ता, सुरक्षित और स्टाइलिश विकल्प साबित होगा।  

अब बच्चों के सपने होंगे पूरे, LIC की नई स्कीम देगी सुरक्षित भविष्य

हर माता-पिता की यही इच्छा होती है कि वे अपने बच्चों के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा तैयार करें ताकि भविष्य में उनकी पढ़ाई, करियर या शादी जैसी जरूरतें पैसों की कमी से प्रभावित न हों। आमतौर पर लोग इसके लिए बैंक की एफडी या आरडी  का सहारा लेते हैं, लेकिन इन पर मिलने वाला ब्याज अब पहले जैसा आकर्षक नहीं रह गया है। ऐसे में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की नई स्कीम ‘अमृत बाल’ बच्चों के लिए एक बेहतर निवेश विकल्प बनकर उभर रही है। क्या है LIC अमृत बाल स्कीम? LIC अमृत बाल एक नॉन-लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी है, जिसे खासतौर पर बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस स्कीम में माता-पिता अपने बच्चे के नाम पर निवेश कर सकते हैं, जिससे उन्हें एक साथ बीमा सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का फायदा मिलता है। इस पॉलिसी के तहत बच्चे की उम्र निवेश के समय कम से कम 30 दिन और अधिकतम 13 वर्ष होनी चाहिए। यह पॉलिसी तब मैच्योर होती है जब बच्चा 18 से 25 वर्ष की उम्र तक पहुंचता है, जिससे उस समय उसकी पढ़ाई, करियर या उच्च शिक्षा की जरूरतें आसानी से पूरी की जा सकें। प्रीमियम भुगतान के लचीले विकल्प LIC अमृत बाल स्कीम में निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक रूप से प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा सिंगल प्रीमियम या सीमित अवधि (5, 6 या 7 साल) तक प्रीमियम जमा करने का विकल्प भी उपलब्ध है। इस स्कीम के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹2 लाख रखी गई है, जबकि अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। अगर पॉलिसी ऑनलाइन खरीदी जाती है, तो ग्राहकों को प्रीमियम पर डिस्काउंट भी मिलता है। गारंटीड बेनिफिट और बंपर रिटर्न इस पॉलिसी की खासियत यह है कि इसमें हर साल के अंत में पॉलिसीधारक को ₹80 प्रति हजार मूल बीमा राशि के हिसाब से गारंटीड अतिरिक्त लाभ  मिलता है, बशर्ते पॉलिसी सक्रिय हो। अगर बच्चे की उम्र पॉलिसी लेते समय 8 साल से कम है, तो जोखिम कवर पॉलिसी लेने के दो साल बाद या उसकी सालगिरह से शुरू होता है। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि माता-पिता के साथ किसी भी अनहोनी की स्थिति में भी बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे। अन्य सुविधाएं और फायदे LIC अमृत बाल में प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर का विकल्प दिया गया है। यानी अगर माता-पिता किसी कारणवश प्रीमियम नहीं भर पाते, तो भी बच्चे की पॉलिसी चालू रहती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर लोन की सुविधा भी मिलती है। क्यों है यह बच्चों के लिए बेस्ट स्कीम? LIC अमृत बाल स्कीम उन माता-पिता के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। यह न केवल एक लाइफ इंश्योरेंस सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि साथ ही बचत और निवेश का भरोसेमंद विकल्प भी देती है। जहां बैंक एफडी या आरडी जैसी पारंपरिक योजनाओं में रिटर्न सीमित होता है, वहीं LIC अमृत बाल स्कीम में गारंटीड एडिशन के साथ बेहतर रिटर्न और सुरक्षा दोनों मिलते हैं। यही कारण है कि यह योजना बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का एक संतुलित और सुरक्षित विकल्प मानी जा रही है।  

PF निकासी में बदलाव: नए नियम जानें, कर्मचारियों को अब होंगे ये लाभ

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकासी और ब्याज से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब नौकरी छोड़ने के बाद 75% राशि तुरंत निकाली जा सकती है, जबकि शेष राशि निकालने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा। इसके साथ ही EPF खाता नौकरी छोड़ने के बाद भी सक्रिय रहता है और तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। क्या नौकरी छोड़ने के बाद EPF खाता बंद होता है? EPFO के नियमों के अनुसार, एक बार सदस्य बनने के बाद आपकी सदस्यता समाप्त नहीं होती। यानी नौकरी छोड़ने के बाद भी आपकी EPF सदस्यता जारी रहती है और आपका खाता निष्क्रिय नहीं होता। केवल योगदान बंद हो जाता है। तीन साल तक ब्याज यदि नौकरी छोड़ने के बाद खाते में कोई योगदान नहीं हो रहा है, तो खाते पर तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। लगातार तीन साल तक कोई योगदान न होने पर खाता “निष्क्रिय” माना जाएगा और उसके बाद ब्याज मिलना बंद हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी जून 2022 में नौकरी छोड़ देता है और उसके बाद कोई योगदान नहीं होता, तो जून 2025 तक खाते पर ब्याज मिलेगा। EPFO के नियमों के अनुसार, ब्याज मिलने पर रोक का मतलब यह नहीं कि आपका पैसा समाप्त हो गया है। आपका मूलधन और पूर्व में जमा ब्याज सुरक्षित रहेगा और आप जब चाहें ऑनलाइन दावा दायर करके इसे निकाल सकते हैं। नई नौकरी में जुड़ने पर क्या होगा? यदि आप नई नौकरी शुरू करते हैं और नया EPF खाता खोलते हैं, तो आपका पुराना PF खाता UAN के माध्यम से नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। ट्रांसफर के बाद आपकी सदस्यता और योगदान फिर से सक्रिय हो जाएंगे, जिससे न केवल आपकी सेवा अवधि निरंतर मानी जाएगी बल्कि खाते पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

ATM कार्ड भूल गए? कोई दिक्कत नहीं, अब ऐसे मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  बैंकिंग सिस्टम तेज़ी से डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है। पहले लोग ATM से पैसे निकालते थे, लेकिन अब डेबिट कार्ड या ATM कार्ड की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। देश के कई बैंकों ने मोबाइल और UPI-बेस्ड कैश विड्रॉल शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि अब आप सिर्फ़ अपने मोबाइल फ़ोन और UPI ऐप का इस्तेमाल करके ATM से कैश निकाल सकते हैं। यह सर्विस उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जो अक्सर अपने कार्ड भूल जाते हैं या कार्ड खो जाने पर भी कैश निकालना चाहते हैं।   कार्डलेस कैश विड्रॉल एक नई बैंकिंग सुविधा है जो कस्टमर्स को बिना ATM कार्ड के ATM से पैसे निकालने की सुविधा देती है। यह फ़ीचर UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस) प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है और देश के ज़्यादातर बड़े बैंकों के ATM पर उपलब्ध है। कस्टमर अपने UPI ऐप, जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay, या BHIM को स्कैन करके कैश निकाल सकते हैं। यह तरीका पूरी तरह से सुरक्षित और सुविधाजनक है क्योंकि इसमें कार्ड या PIN शेयर करने की ज़रूरत नहीं होती।  अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके ATM से पैसे निकालना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने नज़दीकी ATM पर जाएं। स्क्रीन पर दिखाए गए ऑप्शन में से QR कैश या स्कैन टू विड्रॉ चुनें। इसके बाद, अपने मोबाइल में कोई भी UPI ऐप खोलें और ATM स्क्रीन पर दिखाए गए QR कोड को स्कैन करें। अपने UPI ऐप में वह अमाउंट डालें जो आप निकालना चाहते हैं। फिर, अपना UPI PIN डालकर ट्रांज़ैक्शन कन्फर्म करें। आपका कैश कुछ ही सेकंड में ATM से निकल जाएगा। यह प्रोसेस पारंपरिक कार्ड ट्रांज़ैक्शन से ज़्यादा तेज़ और आसान है। 

सोने की कीमतों का उछाल: अगले 3 वर्षों में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1.62–1.82 लाख तक पहुँच सकता है

मुंबई  अगर आप भी निवेश के मकसद से गोल्ड खरीदने का सोच रहे हैं, तो ये जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है. फेस्टिव सीजन में सोने (Gold) और चांदी (Silver) की डिमांड सबसे अधिक रहती है. जैसे ही फेस्टिव सीजन खत्म होता है अक्सर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है. हालांकि, पिछले दो दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिली है. लेकिन सवाल ये है कि क्या अगले साल तक सोने की कीमतें इतनी ही रहेंगी या कम होंगी? आइए जानते हैं कमोडिटी एक्सपर्ट्स ने अगले साल की सोने की कीमतों को लेकर क्या भविष्यवाणी की है. 25%–40%​ बढ़ सकती है सोने की कीमत गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के मुताबिक, सोने की कीमत अगले साल के मध्य तक 25% बढ़ सकती है. 2025 में गोल्ड की कीमतें 40% से अधिक बढ़ चुकी है और ये लगातार तीसरे साल डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज करने की राह पर है. गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की विश्लेषक लीना थॉमस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमत अगले साल के मध्य तक $4,000 प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंचने की संभावना है.  हाल ही में, दिवाली 2025 के दौरान, 24 कैरेट सोने की कीमत 17 अक्टूबर 2025 को ₹13,277 प्रति ग्राम तक पहुँच गई थी. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगली वित्तीय मंदी के दौरान यह धातु फिर से तेजी दिखा सकती है, ठीक वैसे ही जैसे पिछली मंदी में सोने की कीमत में लगभग 50% की छलांग देखी गई थी. बाबा वेंगा का प्रेडिक्शन  विश्लेषकों के मुताबिक, दिवाली 2026 तक सोने की कीमत 25%–40% तक बढ़ सकती है, जिससे 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.62 लाख से ₹1.82 लाख के बीच पहुंच सकती है. इसके पीछे वैश्विक व्यापार तनाव, महंगाई और बैंकिंग अस्थिरता को मुख्य कारण माना जा रहा है. बुल्गारिया की मशहूर बाबा वेंगा ने कथित तौर पर 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट की चेतावनी दी है. उनकी भविष्यवाणी के अनुसार इस संकट के चलते सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. 

स्किपर लिमिटेड ने FY26 की दूसरी तिमाही में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया

भोपाल  कंपनी का राजस्व ₹12,618 मिलियन रहा, जो 14% साल-दर-साल वृद्धि दर्शाता है, जबकि EBITDA ₹1,307 मिलियन (मार्जिन 10.4%) और अपवादात्मक मदों से पूर्व PAT 32% बढ़कर ₹449 मिलियन हुआ। H1 FY26 में राजस्व ₹25,156 मिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जिसमें EBITDA मार्जिन 10.3% और PAT ₹895 मिलियन रहा। कंपनी की ऑर्डर बुक ₹88,204 मिलियन तक पहुंची (89% घरेलू, 11% निर्यात), जिसमें PGCIL सहित प्रमुख EPC प्रोजेक्ट शामिल हैं। H1 में नए ऑर्डर ₹32,205 मिलियन रहे, जो 33% वृद्धि दर्शाते हैं। स्किपर ने नई 75,000 MTPA उत्पादन क्षमता चालू की है और FY28 तक कुल 6 लाख MTPA क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी IIT खड़गपुर के साथ गैल्वनाइजिंग व प्रेडिक्टिव मॉडलिंग पर शोध कर रही है तथा FY26 में 25% राजस्व CAGR की उम्मीद कर रही है।

कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट – सोने में ₹10,000 और चांदी में ₹21,000 की कमी दर्ज

 नई दिल्ली सोना और चांदी की कीमत में गिरावट (Gold-Silver Price) का सिलसिला जारी है. बीते 14 कारोबारी दिनों में एक-दो दिन की बढ़त को छोड़ दें, तो दोनों कीमती धातुओं के दाम फिसले ही हैं. अपने हाई लेवल से गोल्ड और सिल्वर प्राइस बुरी तरह क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो चुके हैं. जहां एमसीएक्स पर ये गिरे हैं, तो घरेलू मार्केट में बीते 17 अक्टूबर के भाव के मुकाबले गोल्ड 10000 रुपये से ज्यादा सस्ता, जबकि चांदी 21000 रुपये के आस-पास सस्ती मिल रही है.  10774 रुपये सस्ता हो गया Gold घरेलू मार्केट में शुक्रवार को भी सोने का भाव टूटकर (Gold Rate Fall) 1,20,100 रुपये पर आ गया. पिछले बंद भाव के मुकाबले ये 570 रुपये सस्ता हुआ. वहीं पिछले 14 कारोबारी दिनों में आए चेंज को देखें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट बीते 17 अक्टूबर की सुबह 1,30,874 रुपये था और इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो पीली धातु इस हाई लेवल से 10,774 रुपये तक सस्ती मिल रही है.  मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के भाव में आए बदलाव (MCX Gold Rate) पर नजर डालें, 17 अक्टूबर को 5 दिसंबर की एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने की वायदा कीमत 1,27,008 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो कि 7 अक्टूबर शुक्रवार को गिरकर 1,21,038 रुपये रह गया. यानी 10 Gram Gold Rate में इस दौरान  5,970 रुपये की कमी आई है.  चांदी का दाम तो क्रैश हो गया  बात दूसरी कीमती धातु चांदी की करें, तो घरेलू मार्केट में 14 दिनों में Silver Rate करीब 21000 रुपये प्रति किलो तक कम हुआ है. दरअसल, आईबीजीए की वेबासाइट पर मौजूद रेट्स को देखें, तो 17 अक्तूबर की शाम को 1 किलोग्राम चांदी का भाव 1,69,230 रुपये था, जो कि बीते शुक्रवार को गिरकर 1,48,275 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से सिल्वर प्राइस में 20,955 रुपये की गिरावट आई है.  एमसीएक्स पर भी चांदी का भाव टूटा है और इसमें गिरावट लगातार जारी है. 14 कारोबारी दिन पहले इसका वायदा भाव 1,56,604 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था और अब तक इसमें 8,815 रुपये की गिरावट आ चुकी है. वहीं अगर Gold-Silver के हाई वायदा भाव से तुलना करें, तो चांदी 1,70,415 रुपये से 22,626 रुपये, जबकि सोना 11,256 रुपये तक सस्ता हो चुका है.  घरेलू मार्केट में GST+ मेकिंग चार्ज  बता दें कि इंडियन बुलियन की वेबसाइट पर अपडेट होने वाले Gold-Silver Rates देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब आप ज्वेलरी शॉप पर आभूषण खरीदने के लिए जाते हैं, तो फिर आपको 3 फीसदी जीएसटी के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जिससे इसकी कीमत में इजाफा हो जाता है. एक और बात ध्यान रखें कि जो Gold Jewellery आप खरीदें, उस पर दर्ज हॉलमार्क के जरिए उसकी क्वालिटी की पहचान जरूर कर लें.  

पब्लिक सेक्टर बैंकों ने दिया शानदार रिटर्न, 27% मुनाफे के साथ सुधारों की नई शुरुआत

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश के सरकारी के बैंकों (पीएसबी) ने शानदार प्रदर्शन किया है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में 12 सरकारी बैंकों ने जुलाई–सितंबर तिमाही में मिलकर 49,456 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 9% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है. एसबीआई बना सबसे बड़ा योगदानकर्ता सभी बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सबसे अधिक मुनाफा दर्ज करते हुए इस संयुक्त लाभ में 40% का योगदान दिया. बैंक ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 20,160 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10% अधिक है. एसबीआई का यह प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता और खुदरा ऋण वृद्धि के संकेत देता है. पिछले साल की सितंबर तिमाही यानी FY25 Q2 में सभी 12 सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा ₹45,547 करोड़ था. इस बार बैंकों ने ₹3,909 करोड़ ज्यादा कमाए हैं. ऐसे में इन बैंकों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. तो किस बैंक ने की सबसे ज्‍यादा कमाई और किसके शेयर में दिख रहा ज्‍यादा दम, आइए नजर डालते हैं. SBI बना मुनाफे का बादशाह बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी SBI मुनाफे की रेस में सबसे आगे रहा. इस सरकारी बैंक ने अकेले ही कुल मुनाफे का 40% हिस्सा अपने नाम किया. बैंक ने दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में ₹20,160 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है. शेयरों का प्रदर्शन स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर की वर्तमान कीमत 957.60 रुपये है. 3 महीने में इसके शेयर 19.56 फीसदी बढ़े हैं. वहीं 3 साल में ये 56 फीसदी उछला है. 5 साल में इसने 337 फीसदी का रिटर्न दिया है. Indian Overseas Bank और Central Bank भी चमके चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का भी प्रदर्शन जबरदस्‍त रहा. IOB का मुनाफा 58% बढ़कर ₹1,226 करोड़ पर पहुंच गया. वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का ने 33% की बढ़त के साथ ₹1,213 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया. शेयरों का प्रदर्शन Indian Overseas Bank के शेयर की कीमत अभी 39.55 रुपये है. साल भर का इसका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा है. इसने 27 पर्सेंट का नेगेटिव रिटर्न दिया है. जबकि 3 साल में ये 76 फीसदी उछला है. वहीं 5 साल में इसने 289 फीसदी रिटर्न दिया है. इन बैंकों की कमाई घटी सरकारी बैंकों में ज्‍यादातर ने बेहतर प्रदर्शन किया है. हालंकि दो बैंक ऐसे भी रहे, जिनका मुनाफा इस बार घटा है. इनमें Bank of Baroda और Union Bank शामिल हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 8% गिरकर ₹4,809 करोड़ रह गया, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 10% घटकर ₹4,249 करोड़ पर आ गया. 6 महीनों में तोड़ा रिकॉर्ड सितंबर 2025 तक के पहले छह महीनों में सभी 12 सरकारी बैंकों का संयुक्त मुनाफा ₹93,674 करोड़ तक पहुंच गया है. यह अब तक का सबसे ज्यादा है और पिछले साल के ₹85,520 करोड़ की तुलना में करीब 10% की बढ़ोतरी दर्शाता है. बाकी बैंकों का प्रदर्शन भी दमदार बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 23% की बढ़त दर्ज की. जबकि केनरा बैंक ने 19%, पंजाब नेशनल बैंक ने 14% और इंडियन बैंक ने 12% की वृद्धि दर्ज की. वहीं सिंगल डिजिट में बढ़त रिकॉर्ड करने वालों में बैंक ऑफ इंडिया 8% और यूको बैंक 3% पर हैं. शेयरों का प्रदर्शन Bank of Maharashtra के शेयर 58.44 रुपये पर मिल रहे हैं. 3 साल में इसने 154 फीसदी और 5 साल में 424 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. पंजाब एंड सिंध बैंक के शेयर की कीमत 31.14 रुपये है. 3 साल में ये 62 फीसदी और 5 साल में 188 फीसदी बढ़ा है. वहीं पंजाब नेशनल बैंक के शेयर की कीमत 123 रुपये है. सालभर में ये 16 पर्सेंट उछला है. 3 साल में इसने 187 फीसदी और 5 साल में 344 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. छोटे बैंकों का शानदार प्रदर्शन इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने सभी बैंकों में सबसे अधिक 58% की बढ़ोतरी दर्ज की और 1,226 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 33% की वृद्धि के साथ 1,213 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. इन बैंकों का बेहतर प्रदर्शन ऋण विस्तार, एनपीए में कमी और बेहतर ब्याज मार्जिन की वजह से संभव हुआ है. कुछ बैंकों के मुनाफे में गिरावट जहां अधिकतर सरकारी बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को दूसरी तिमाही में झटका लगा. बैंक ऑफ बड़ौदा का शुद्ध लाभ 8% घटकर 4,809 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5,238 करोड़ रुपये था. वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 10% घटकर 4,249 करोड़ रुपये रह गया. इन बैंकों के मुनाफे में कमी का कारण ऋण लागत में वृद्धि और निवेश पर कम रिटर्न बताया जा रहा है. फिलहाल, सरकारी बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी बहुत कम है। यह सबसे ज्यादा केनरा बैंक (11.88 फीसदी) में है, उसके बाद एसबीआई (9.56 फीसदी), बैंक ऑफ बड़ौदा (8.71 फीसदी) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (7.86 फीसदी) का स्थान है। बाकी बैंकों में यह 5 फीसदी से भी कम है; और कम से कम तीन बैंकों में तो यह कुछ ही आधार अंक है। सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कितनी रही है? न्यूनतम सीमा 51 फीसदी है, लेकिन कम से कम तीन बैंकों में यह 90 फीसदी से ज्यादा है। एसबीआई में यह 55.5 फीसदी है। बाकी बैंकों में यह 62.93 फीसदी से 89.27 फीसदी के बीच है। क्या सरकार अपनी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को बेचेगी? नहीं। मेरा अनुमान है कि सरकारी बैंक पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) और अन्य माध्यमों से नई पूंजी जुटाएंगे। चूंकि ये बैंक मजबूत और लाभ कमाने वाले हैं, इसलिए इनके लिए कई खरीदार होंगे। हालांकि इसे सफल बनाने के लिए सरकार को इन बैंकों के संचालन के तरीके पर पुनर्विचार करना चाहिए। बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी की सीमा हटाने से हालात बदलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बैंकों को व्यावसायिक संस्थाओं की तरह ही माना जाना चाहिए। दूसरे बैंकों ने भी … Read more

बाइक को भूल जाइए, Hero ने लॉन्च की जोरदार टू-सीटर कार

नई दिल्ली Hero MotoCorp: ये यह बहुत बड़ी खबर है! Hero MotoCorp ने EICMA 2025 में अपनी इलेक्ट्रिक सब्सिडीएरी कंपनी VIDA के माध्यम से अपने पारंपरिक दोपहिया वाहन निर्माता की पहचान से हटकर Hero MotoCorp ने 'Novus' रेंज के तहत इंटेलिजेंट, सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मोबिलिटी सॉल्यूशंस का एक पोर्टफोलियो पेश किया, जो दिखाता है कि कंपनी सिर्फ़ बाइक और स्कूटर तक ही सीमित नहीं रहना चाहती. NEX 3: माइक्रो इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर पहला 4-व्हीलर प्रयास: NEX 3, Hero का पहला कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहन है, जिसे कंपनी ने माइक्रो इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर के रूप में पेश किया है. इसमें टैंडम सीटिंग (एक के पीछे एक) अरेंजमेंट है, जिससे यह दो यात्रियों को अजस्ट करता है. इसे "ऑल-वेदर पर्सनल EV" के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो चार पहियों की सुरक्षा और आराम के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण दोनों यात्राओं के लिए पेरफेक्ट है.  NEX 1 और NEX 2: माइक्रो-मोबिलिटी डिवाइस NEX 1: यह एक पोर्टेबल, पहनने योग्य (Wearable) माइक्रो मोबिलिटी डिवाइस है, जो बेहद कॉम्पैक्ट और व्यक्तिगत यात्राओं के लिए डिज़ाइन किया गया है. NEX 2: यह एक इलेक्ट्रिक ट्राइक (Trike) है, यानी तीन पहियों वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर, जो शहरी आवागमन के लिए स्टेबिलिटी और स्पीड का मिश्रण प्रदान करता है. अन्य प्रमुख ऐलान  VIDA ने दोपहिया सेगमेंट में भी अपने वैश्विक विस्तार और प्रदर्शन पर जोर दिया: अंतर्राष्ट्रीय लॉन्च: VIDA VX2 अर्बन स्कूटर को यूरोपीय बाजार में लॉन्च करने की घोषणा की गई. ग्लोबल इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल कॉन्सेप्ट्स: VIDA Concept Ubex: VIDA की पहली ग्लोबल इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का कॉन्सेप्ट. VIDA Project VxZ: Zero Motorcycles USA के सहयोग से विकसित किया गया कॉन्सेप्ट, जो हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक सेगमेंट में Hero की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है. ऑफ-रोड सेगमेंट (DIRT.E Series): DIRT.E K3: 4 से 10 वर्ष के बच्चों के लिए डिज़ाइन की गई इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड मोटरसाइकिल. DIRT.E MX7 Racing Concept: एक हाई-परफॉर्मेंस, चुस्त इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड रेसिंग मोटरसाइकिल कॉन्सेप्ट. यह स्पष्ट है कि Hero MotoCorp अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्पेस में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बनने की राह पर है. 

बंदूक और गांजा सहित आपत्तिजनक ऐड्स को लेकर Flipkart फिर चर्चा में

 नई दिल्ली अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट की स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart पर आपत्तिजनक विज्ञापन चलाने के आरोप लग रहे हैं. कुछ स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं जिनमे आपत्तिजनक फ़ोटोज़ दिख रही हैं.  Reddit पर कई यूजर्स लगातार Flipkart के सोशल मीडिया ऐंड कैंपेन की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं. इन तस्वीरों में मॉडल्स की न्यूड तस्वीरें, गांजा , बंदूक़ और नेकेड मैनिक्यून्स दिख रहे हैं.  लोगों कि शिकायत ये भी है कि सोशल मीडिया पर अचानक से फ्लिपकार्ट के आपत्तिजनक ऐड्स दिख जाते हैं. लेकिन लिंक पर क्लिक करते ही कुछ दूसरे प्रोडक्ट्स दिखने लगते हैं सवाल ये है कि आख़िर Flipkart इस तरह के आपत्तिजनक ऐड्स क्यों दिखाता है? एक्स्पर्ट्स का मानना है कि ये एक तरह के क्लिकबेट होते हैं. इनमे लिस्ट किए गए प्रोडक्ट असली होते हैं और आपत्तिजनक नहीं होते, लेकिन ऐड कैंपेन में आपत्तिजनक तस्वीरें होती हैं, ताकि यूजर्स उन पर क्लिक करके वेबसाइट तक आ जाएं.  उदाहरण के तौर पर ऐड कैंपेन में दिखाई गई गन 100% असली लगती है. लेकिन आप जैसे लिंक पर जाते हैं तो वेबसाइट पर टॉय गन दिखती है. ज़ाहिर है भारत में किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बंदूक़ की खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती है.  इसी तरह दूसरे प्रोडक्ट्स जैसे फोटो में दिख रहा गांजे की जगह ड्राई फ्लावर्स ओपन होते हैं, इसी तरह न्यूड फ़ोटोज़ में कुछ दूसरे प्रोडक्ट्स खुलते हैं. इस तरह के स्क्रीनशॉट्स Reditt पर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं.  Reditt पर कुछ यूजर्स ने ये भी लिखा है कि इस तरह के ऐड्स सिर्फ उन्हें ही दिखते हैं जो ऐसे कीवर्ड्स यूज करते हैं. लेकिन सच्चाई ये नहीं है, क्योंकि यहां कुछ ऐसे यूजर्स भी इन ऐड्स के स्क्रीनशॉट्स पोस्ट कर रहे हैं जिन्होंने साइनअप तक नहीं किया है.  इससे पहले भी सोशल मीडिया पर फ्लिपकार्ट की तरफ से चलाए जाने वाले आपत्तिजनक ऐड्स की शिकायत यूजर्स कर चुके हैं. लेकिन फ्लिपकार्ट की तरफ से इसे लेकर चुप्पी ये दर्शाती है कि कंपनी को ये पता है, लेकिन क्लिकबेट के चक्कर में कुछ नहीं कहती है.  हमने Flipkart से इस बारे में पूछना चाहा तो कंपनी की तरफ़ से क्वेरी ईमेल करने के लिए कहा गया. हमने Flipkart को उन स्क्रीनशॉट्स के साथ ईमेल किया है. लेकिन दो दिन से कंपनी का कोई रिएक्शन नहीं आया है.