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साल के अंत में मारुति वैगनआर पर भारी ऑफर, देश की नंबर-1 हैचबैक बनी और भी किफायती

मुंबई  साल के अंतिम महीने में मारुति सुजुकी ने ग्राहकों के लिए आकर्षक ऑफरों की घोषणा की है, जो खासकर उन खरीदारों के लिए बेहद लाभकारी है जो कम बजट में भरोसेमंद फैमिली कार खरीदना चाहते हैं। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर पर इस दिसंबर भारी बचत का मौका दिया है, जिसके तहत ग्राहक कार खरीदते समय कुल ₹58,100 तक की राहत पा सकते हैं। साल के अंत की यह स्कीम सीमित समय के लिए है और कंपनी के एरिना नेटवर्क पर लागू की गई है। वैगनआर पर मिल रहा अब तक का सबसे बड़ा लाभ मारुति सुजुकी की वैगनआर लंबे समय से देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली फैमिली हैचबैक में शामिल है। इस कार की लोकप्रियता कम मेंटेनेंस खर्च, बेहतर माइलेज और विशाल केबिन स्पेस के कारण लगातार बनी हुई है। कंपनी ने बताया कि इस महीने वैगनआर के सभी वैरिएंट्स पर भारी राहत लागू की गई है। ग्राहक कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर और अतिरिक्त लाभ के माध्यम से कुल मिलाकर ₹58,100 तक की बचत कर सकते हैं। यह ऑफर उन खरीदारों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा जो लंबे समय से इस मॉडल को खरीदने का प्लान बना रहे थे। कीमत और खरीदारी का आकर्षक मौका मारुति वैगनआर की कीमतें बाजार में पहले से ही किफायती मानी जाती हैं। इसका बेस मॉडल करीब ₹4.99 लाख से शुरू होता है, जबकि टॉप वैरिएंट की कीमत लगभग ₹6.95 लाख तक जाती है। ऐसे में जब इस पर ₹58,100 तक का लाभ मिल रहा हो, तो यह डील स्वभाविक रूप से और भी आकर्षक बन जाती है। कम कीमत और बेहतर फीचर्स के चलते वैगनआर शहरी तथा उपनगरीय दोनों प्रकार के ग्राहकों की पसंद में लंबे समय से बनी हुई है। माइलेज, स्पेस और फीचर्स बनाते हैं इसे खास वैगनआर अपनी मजबूत माइलेज परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती है। कंपनी ने इसे एक ऐसी फैमिली कार के रूप में विकसित किया है जो शहर और हाईवे दोनों जगह संतुलित ड्राइविंग अनुभव देती है। इसके बड़े केबिन और पर्याप्त हेडरूम की वजह से यह छोटे परिवारों के लिए आदर्श विकल्प मानी जाती है। साथ ही, मारुति का विस्तृत सर्विस नेटवर्क इसे रखरखाव के मामले में और भी सुविधाजनक बनाता है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें 6 एयरबैग शामिल किए गए हैं, जो इस सेगमेंट में बड़ी बात मानी जाती है। ऑफर की उपलब्धता और जरूरी सावधानियां कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये ऑफर हर शहर में एक समान नहीं हो सकते। डिस्काउंट की वास्तविक राशि डीलरशिप, शहर और स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर बदल सकती है। इसलिए खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे कार की बुकिंग से पहले अपने नजदीकी मारुति एरिना डीलर से ऑफर की सही स्थिति की पुष्टि अवश्य करें। स्टॉक सीमित होने की वजह से इन ऑफरों का लाभ पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर मिलेगा। फैमिली कार खरीदने का बेहतरीन समय अगर आप इस महीने किसी भरोसेमंद, किफायती और वैल्यू-फॉर-मनी फैमिली कार की तलाश में हैं, तो वैगनआर इस समय सबसे आकर्षक विकल्प बनकर सामने आई है। 34 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज, 6 एयरबैग जैसे सुरक्षा फीचर्स और ₹58,100 तक की बचत इसे साल की सबसे शानदार डील बना देते हैं। दिसंबर 2025 कार खरीददारों के लिए निश्चित रूप से एक फायदे का समय साबित हो रहा है।

फ्लाइट कैंसिलेशन पर यात्रियों में नाराज़गी, पायलटों की शिकायतें सामने आने पर DGCA सक्रिय

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने और देरी के बाद नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने सख्त रुख अपनाया है. नागर विमानन मंत्रालय MoCA के तहत आने वाले DGCA ने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर बैठक बुलाई है. यह कदम उस वक्त उठाया गया है, जब देशभर के हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द होने से अफरातफरी का माहौल बना हुआ है. इस बीच पायलट एसोसिएशन ALPA इंडिया ने भी DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइन के पास उपलब्ध पायलटों की संख्या और उनकी पर्याप्तता को भी गंभीरता से देखा जाए, खासकर हाल ही में लागू हुए फैटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) को ध्यान में रखते हुए. 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द बुधवार को इंडिगो की 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं, जबकि कई सेवाएं घंटों देरी से चलीं. सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु एयरपोर्ट से 42, दिल्ली से 38, मुंबई से 33 और हैदराबाद से 19 उड़ानें रद्द हुईं. एयरलाइन रोजाना करीब 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती है. DGCA ने एयरलाइन से मांगी रिपोर्ट DGCA ने कहा है कि वह इंडिगो की उड़ान बाधाओं की जांच कर रहा है और एयरलाइन से मौजूदा हालात के कारणों के साथ उड़ान रद्द होने और देरी को कम करने की विस्तृत योजना मांगी गई है. इंडिगो ने बयान जारी कर कहा कि पिछले दो दिनों से 'कई तरह की अचानक आई परिचालन दिक्कतों' के कारण नेटवर्क पर गंभीर असर पड़ा है. इसमें तकनीकी खामियां, सर्दियों के शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एयर ट्रैफिक में बढ़ी भीड़ और नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) व्यवस्था को जिम्मेदार बताया गया है. पायलट एसोसिएशन की अपील वहीं पायलट संघ ALPA India ने DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइंस के पास उपलब्ध पायलटों की वास्तविक संख्या को गंभीरता से देखा जाए. ALPA ने कहा कि नई FDTL व्यवस्था को जनवरी 2024 में जारी किया गया था और इसके बावजूद कई एयरलाइंस ने समय रहते तैयारी नहीं की. कुछ विमानन विशेषज्ञों का यह भी आरोप है कि लगातार रद्द हो रहीं उड़ानों और देरी को नियमों में ढील दिलाने के दबाव हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

शेयर बाजार में गिरावट पर लगा ब्रेक, चौथे कारोबारी दिन Sensex-Nifty ने दिखाई मजबूती

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में बीते कुछ दिनों से गिरावट का सिलसिला जारी था और सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भी दोनों इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुए. कुछ देर रेड जोन में कारोबार करने के बाद अचानक बाजी पलटी नजर आई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 30 शेयरों वाला Sensex गिरावट के साथ ओपन होने के बाद एकदम से 180 अंक से ज्यादा उछलकर कारोबार करने लगा, तो वहीं नेशनल स्ट़ॉक एक्सचेंज की निफ्टी-50 (Nifty) भी 50 अंक की उछाल के साथ ट्रेड कर रहा था. आईटी कंपनियों के शेयरों में आया उछाल बाजार को सपोर्ट करता नजर आया.  सेंसेक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल  गुरुवार को शेयर मार्केट में जब कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 85,106 की तुलना में 119 अंकों की गिरावट लेकर 84,987 के लेवल पर खुला और कुछ देर रेड जोन में ही कारोबार करता दिखा. लेकिन करीब आधे घंटे के कारोबार के बाद अचानक इसकी चाल बदल गई और ये इंडेक्स रेड से ग्रीन जोन में आ पहुंचा. खबर लिखे जाने तक BSE Sensex 180 अंक चढ़कर 85,297 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था.  बात एनएसई के निफ्टी इंडेक्स की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई. अपने बुधवार के बंद 25,986 के मुकाबले मामूली गिरावट लेकर 25,981 पर खुले NSE Nifty ने पहले 25,938 तक गोता लगाया, फिर अचानक से इसकी रफ्तार तेज होती चली गई और ये इंडेक्स उछलकर 26,026 के लेवल पर जा पहुंचा.  IT समेत इन Stocks ने दिखाया दम  शेयर बाजार में अचानक लौटी के तेजी सबसे बड़ा हाथ आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा, जिनमें गुरुवार को अच्छी तेजी देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी के साथ भागने वाले शेयरों में बीएसई लार्जकैप में TCS Share (1.92%), Tech Mahindra Share (1.90%), HCL Tech Share (1.60%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप सेक्शन में शामिल Petronet Share (3.70%), LTTS Share (2.61%), Coforge Share (2%) और KPI Tech Share (1.90%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. वहीं स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों में  Mukka Protine Share (14.10%), Neclife Share (13.11%) और Laxmi Dental Share (9%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे.  इन शेयरों में आई गिरावट बात गिरावट के साथ कारोबार करने वाले शेयरों की करें, तो लार्जकैप में Eternal Share (1.44%), Maruti Share करीब 1 फीसदी फिसलकर कारोबार कर रहा था. तो मिडकैप में Biocon Share (3.63%), Kaynes Share (2.81%), Power India Share (2.50%) और Ola Electric Share 1.84% की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. 

फार्मा दिग्गज Corona का IPO लॉन्च—अगले हफ्ते खुलेगा इश्यू, प्राइस बैंड नोट करें

 नई दिल्ली आईपीओ मार्केट (IPO Market) में इस साल बहार देखने को मिल रही है. एक के बाद एक कई कंपनियां अपने इश्यू लॉन्च कर रही हैं, जिनमें कई निवेशकों को ताबड़तोड़ मुनाफा भी करा रहे हैं. अब लिस्ट में एक फार्मा कंपनी भी शामिल होने वाली है, जिसका नाम है कोरोना रेमेडीज (Corona Remedies), इस इश्यू को अगले हफ्ते सब्सक्रिक्शन के लिए ओपन किया जाएगा. इसके प्राइस बैंड, लॉट साइस समेत तमाम डिटेल्स सामने आ चुकी हैं.  कब खुलेगा Corona का आईपीओ? फार्मा कंपनी कोरोना रेमेडीज, प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रिसकैपिटल से समर्थित है और इसका आईपीओ (Corona IPO) अगले हफ्ते की शुरुआत में 8 दिसंबर को ओपन होगा. निवेशक इसमें तीन दिन यानी 10 दिसंबर तक पैसे लगा सकेंगे. क्लोज होने के बाद इस आईपीओ का अलॉटमेंट (IPO Allotment) 11 दिसंबर को होगा, जबकि शेयर मार्केट (Stock Market) के दोनों इंडेक्स बीएसई और एनएसई पर Corona Share की लिस्टिंग 15 दिसंबर को होगी.  655Cr का आईपीओ, ये है प्राइस बैंड कोरोना रेमेडीज के आईपीओ के बारे में आगे की जानकारी देखें, तो ये एक बुकबिल्ड इश्यू हैं और इसके तहत ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए शेयरों की पेशकश की जाएगी. कंपनी 61,71,101 शेयर बिक्री के लिए पेश करेगी. इसके शेयरों के लिए प्राइस बैंड की बात करें, तो ये 1008-1062 रुपये तय किया गया है और इस हिसाब से इस आईपीओ का साइज 655.37 करोड़ रुपये हो जाता है.  कम से कम लगाने होंगे इतने रुपये इस आईपीओ के लॉट साइज की बात करें, तो कंपनी ने 14 शेयरों का Lot तय किया है. इसका मतलब ये होता है कि अगर कोई निवेशक इस आईपीओ में निवेश करना चाहता है, तो उसे कम से कम इतने शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अब अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो इसके लिए मिनिमम निवेश 14,868 रुपये का करना होगा. निवेशकों अधिकतम 183 शेयरों या 13 लॉट के लिए बोली लगा सकेंगे और मैक्सिमम निवेश 1,93,284 रुपये करना होगा.  तेजी से बढ़ा कंपनी का कारोबार अहमदाबाद में मुख्यालय वाली कोरोना रेमेडीज एक फार्मा कंपनी है, जो मेडिकल प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हुई है. बीते साल के अंत तक इसके कंपनी के पोर्टफोलियो में महिला स्वास्थ्य, हार्ट एंड डायबिटीज देखभाल समेत 67 मेडिसिन ब्रांड शामिल थे. रिपोर्ट्स की मानें तो घरेलू मार्केट में इसका कारोबार तेजी से ग्रोथ कर रहा है. क्रिसिल के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक ये टॉप-30 फार्मा कंपनियों में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी रही थी. 

क्रिप्टो स्टॉक क्रैश: सिर्फ आधे घंटे में American Bitcoin Corp का मूल्य आधा, अरबों का नुकसान

वाशिंगटन दुनिया को टैरिफ की धौंस देकर डराने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump क्रिप्टो प्रेमी भी माने जाते हैं, लेकिन यही क्रिप्टोकरेंसी बीते कुछ दिनों से उन्हें तगड़ा घाटा भी करा रही है. बीते कारोबारी दिन मंगलवार को उनके क्रिप्टो खजाने में जैसे सुनामी सी आ गई और बड़ा नुकसान करा दिया. दरअसल डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप द्वारा को-फाउंडेड अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प का शेयर (Americal Bitcoin Corp Share) सिर्फ 30 मिनट में ही क्रैश हो गया और 50% से ज्यादा फिसल गया.  खुलते ही 30%, फिर अचानक 50% फिसला  मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के बाद से ही ट्रंप फैमिली द्वारा समर्थित अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प का शेयर चर्चा में आ गया. दरअसल, ट्रेडिंग शुरू होते ही महज एक मिनट के भीतर American Bitcoin Corp का शेयर 30 फीसदी से ज्यादा फिसल गया और अगले आधे घंटे या 30 मिनट में इस स्टॉक की वैल्यू 50 फीसदी से ज्यादा क्रैश हो गई. कारोबार के दौरान ये 1.74 डॉलर के लो-लेवल तक टूट गया. हालांकि, मार्केट क्लोज होने पर इसमें मामूली सुधार आया फिर भी ABC Share 38.83% की बड़ी गिरावट के साथ 2.19 डॉलर पर बंद हुआ.  बेटे एरिक ट्रंप हैं कंपनी में को-फाउंडर American Bitcoin Corp के को-फाउंडर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप (Eric Trump) हैं. इस कंपनी की शुरुआत इसी साल मई महीने में की गई थी और सितंबर में ये Nasdaq पर लिस्ट हुई थी. कंपनी ने ग्रिफॉन डिजिटल माइनिंग के साथ मर्जर किया था. न सिर्फ एरिक,बल्कि डोनाल्ड ट्रंप जूनियर भी इस कंपनी में को-फाउंडर हैं. इसके शेयर की वैल्यू अपने हाई से करीब 80 फीसदी के आसपास टूट चुकी है.  Americal Bitcoin Corp का सितंबर के मध्य तक मार्केट कैपिटल 7 अरब डॉलर से ज्यादा था, जबकि उसकी बैलेंस शीट पर 28.5 करोड़ डॉलर मूल्य की क्रिप्टो करेंसी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, रेग्युलेटरी डॉक्युमेंट्स को देखें तो सितंबर के अंत तक इस कंपनी के पास 3,418 बिटकॉइन रिजर्व थे, जिनकी कीमत अब करीब 31 करोड़ डॉलर होगी. लेकिन हालिया बड़ी गिरावट के बाद अब अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प का मार्केट कैप  घटकर महज 2 अरब डॉलर से कुछ ज्यादा रह गया है. ट्रंप की संपत्ति में भूचाल, कहां-कहां नुकसान बीते कुछ दिनों से क्रिप्टो मार्केट में मचे हाहाकार का सीधा असर Trump Family Networth पर देखने को मिला है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ अक्टूबर से अब तक ट्रंप फैमिली के क्रिप्टो वेंचर्स का 1 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.  बीते दिनों आई फोर्ब्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप की कुल संपत्ति (Donald Trump Networth Fall) 6.2 अरब डॉलर दर्ज की गई है, जो इससे पहले सितंबर महीने में 7.3 अरब डॉलर थी. इसका मतलब है कि उनकी नेटवर्थ में सीधे 1.1 अरब डॉलर की गिरावट आई है. यह गिरावट उनकी कंपनी के शेयर टीएमटीजी (TMTG Stock) में तेज गिरावट के चलते आई.

सेविंग अकाउंट पर बड़ा बदलाव, RBI ने सभी बैंकों को 1 लाख तक समान ब्याज दर लागू करने के निर्देश दिए

नई दिल्ली देश में सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने वाले लाखों लोगों के लिए RBI ने एक बड़ा फैसला लिया है. कई लोग यह सोचकर परेशान रहते थे कि किस बैंक में खाता खुलवाएं, किस बैंक में ब्याज ज्यादा मिलेगा या कौन सा बैंक सुरक्षित है. अब RBI के नए नियम ने इस उलझन को काफी हद तक खत्म कर दिया है. क्योंकि अब 1 लाख रुपये तक की जमा राशि पर पूरे देश के सभी कमर्शियल बैंक एक जैसा ब्याज देंगे. यानी चाहे आपका खाता SBI में हो, कैनरा बैंक में या किसी और बैंक में अब ब्याज में फर्क नहीं पड़ेगा. RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI ने सभी कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिया है कि सेविंग अकाउंट  में 1 लाख रुपये तक जो भी रकम जमा रहेगी, उस पर सभी बैंक एक समान ब्याज दर लागू करेंगे. अब तक हर बैंक अपने हिसाब से अलग-अलग ब्याज देता था, जिसकी वजह से ग्राहकों में कन्फ्यूजन रहता था. लेकिन नए नियम के बाद इस रकम तक ब्याज दर पूरी तरह एक जैसी होगी, जिससे आम ग्राहको को सुविधा होगी. न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर ब्याज नहीं आरबीआई ने बचत, चालू बैंक खाते समेत सावधि जमा (एफडी) और ओवरड्यू एफडी समेत अन्य नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इसके मुताबिक, बैंक द्वारा तय न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। आरबीआई ने एफडी की न्यूनतम मानक अवधि सात दिन की है, लेकिन बैंक अपने मुताबिक इसे अधिक न्यूनतम अवधि तय कर सकते हैं। नए नियमों में न्यूनतम अ‌वधि पूरी होने पर एफडी तोड़ी जाती है तो बैंक आपको वही ब्याज देगा, जो उस अवधि के लिए लागू है। यानी जितने समय तक पैसा बैंक में रहा, इस अ‌वधि का ही ब्याज मिलेगा। पहले से तय तय की गई ऊंची ब्याज दर लागू नहीं होगी। यही नहीं, नए नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि अगर किसी एफडी की मेच्योरिटी पीरियड गैर-कारोबारी दिन पर पड़ती है, तो ग्राहक को उस दिन का भी ब्याज मिलेगा और बैंक अगले कार्यदिवस को भुगतान करेगा। बैंकों को स्पष्ट करने होंगे नियम नए नियमों के अनुसार, अब बैंकों को एफडी से जुड़े सभी नियम ग्राहकों को पहले से स्पष्ट रूप से बताने होंगे। मसलन, एफडी की न्यूनतम अ‌वधि की सीमा कितनी है। यदि इससे पहले एफडी तोड़ने हैं तो कितना जुर्माना लगेगा। जुर्माना की रकम बैंक खुद तय कर सकते हैं। सभी शाखाओं में एक जैसी दरें सभी शाखाओं में एफडी की दरें एक ही तरह की लागू होंगी। ग्राहकों और बैंक के बीच ब्याज दर पर कोई मोलभाव नहीं होगा। हालांकि, बड़े जमा यानी तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी पर अलग ब्याज दरें लागू हो सकती हैं। बैंक यह नहीं कर सकेंगे आरबीआई ने नए नियमों के तहत स्पष्ट किया है कि जमा कराने पर लॉटरी, इनाम, विदेश यात्रा जैसी स्कीम नहीं दे सकेंगे। जमा के बदले किसी एजेंट को अवैध कमीशन नहीं दे सकेंगे। सिर्फ कंपाउंड ब्याज दिखाकर भ्रामक विज्ञापन भी नहीं करेंगे। कुछ संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों को सेविंग अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं। ये नियम भी लागू     बैंक कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी और उनके कुछ परिजनों को सावधि जमा व बचत खाते पर एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज दिया जा सकता है।     वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक चाहे तो अलग और अधिक ब्याज दर वाली एफडी स्कीम चला सकते हैं।     टाइम डिपॉजिट (टीडी) मैच्योर होने के बाद पैसे न निकालने पर बचत खाते की ब्याज दर या टीडी की मूल ब्याज दर यानी दोनों में से कम ब्याज वहीं मिलेगा।     चालू खाते पर सामान्य रूप से कोई ब्याज नहीं मिलेगा। लेकिन खाता धारक की मृत्यु होने की स्थिति में मृत्यु की तारीख से भुगतान तक बचत खाते वाली दर से ब्याज मिलेगा।     जमा खातों पर ब्याज दर से जुड़े पुराने सभी दिशानिर्देश रद्द कर दिए गए हैं। अब बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों को लेकर एकीकृत और सरल नियमों को लागू किया गया है। एनआरई और एनआरओ सावधि खाता अनिवासी भारतीयों के लिए भी आरबीआई ने निर्देश जारी किए हैं। एनआरआई जमा पर ब्याज दर घरेलू सावधि जमा से अधिक नहीं हो सकती। एनआरआई की सावधि जमा की न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगा। जबकि एनआरओ की सात दिन होगी। एनआरआई/एनआरओ को जमाओं पर वरिष्ठ नागरिक या बैंक स्टाफ को अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलेगा। एनआरई खाता अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक प्रकार का बैंक खाता है जो उन्हें अपनी विदेशी आय को भारत में रखने और भारतीय रुपये में बदलने की सुविधा देता है। जबकि एनआरओ खाता एक अनिवासी साधारण खाता है जो अनिवासी भारतीयों को भारत में अर्जित आय जैसे कि किराया, लाभांश और पेंशन को प्रबंधित करने की अनुमति देता है। SBI हो या Canara… अब सबका ब्याज एक जैसा! RBI का यह नियम सभी बैंकों पर लागू है.भले ही  देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक SBI है या Canara बैंक बचत खाते में 1 लाख तक की राशि पर ब्याज अब सभी जगह समान मिलेगा. इससे छोटे ग्राहकों का फायदा होगा, क्योंकि  वे अब बैंक चुनने का फैसला केवल सर्विस और सुविधा देखकर ले सकेंगे, ब्याज दरों के अंतर पर नहीं. 1 लाख से ज्यादा रकम पर क्या होगा? नया नियम केवल 1 लाख रुपये तक की रकम पर लागू होगा. इस सीमा से ऊपर जमा रकम पर बैंक अपनी अलग ब्याज दर तय कर सकते हैं. यानी अगर किसी के खाते में 1 लाख से ज्यादा बैलेंस है, तो उस पर ब्याज पहले की तरह बैंक की अपनी दरों के अनुसार मिलेगा. ब्याज की गणना कैसे होगी? RBI ने यह भी साफ किया है कि ब्याज की गणना हर दिन के अंत में आपके खाते में जितनी राशि है, उसके आधार पर होगी. इससे फायदा यह है कि जिस दिन आपके खाते में बैलेंस ज्यादा होगा, उस दिन ज्यादा ब्याज मिलेगा. आपके खाते में कब आएगा ब्याज ? बैंकों को निर्देश दिया गया है कि बचत खाते का ब्याज कम से कम तीन महीने में एक बार खाते में जरूर जमा किया जाए. इससे ग्राहकों को समय-समय पर ब्याज मिल जाएगा और यह … Read more

क्रेडिट स्कोर अपडेट होंगे हर हफ्ते, RBI के नए नियम से बढ़ सकती है लोन सुविधा

नई दिल्ली. अगर आप लोन लेना चाहते हैं या EMI भरते हैं तो आरबीआई के नए प्रस्तावित नियम आपके लिए गेमचेंजर साबित होंगे. अभी तक क्रेडिट स्कोर महीने में सिर्फ दो बार अपडेट होता था, लेकिन अप्रैल 2026 से यह हर 7 दिन में अपडेट हो सकता है. इससे आपका क्रेडिट प्रोफाइल (Credit Profile), लोन ब्याज (Loan Interest Rate) और क्रेडिट कार्ड लिमिट (Credit Card Limit) सबकुछ तेजी से बदल सकेगा.  भारत में क्रेडिट स्कोर से जुड़ी व्यवस्था जल्द ही बड़े बदलाव से गुजरने वाली है. RBI ने एक महत्वपूर्ण मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अब क्रेडिट स्कोर हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा. अभी स्कोर महीने में दो बार अपडेट होता है, लेकिन अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी. इससे न सिर्फ उधारकर्ताओं के लिए लोन और क्रेडिट कार्ड लेना आसान होगा, बल्कि बैंकों को भी अधिक सटीक और अप-टू-डेट डेटा मिलेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारतीय क्रेडिट इकोसिस्टम को पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा. आरबीआई की नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस (RBI Draft Directions) के मुताबिक अब क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां महीने में 5 दिन अपडेट जारी करेंगी. यानी अगर किसी ने बकाया क्लीयर किया, क्रेडिट कार्ड बंद किया, EMI चुकाई या रिपेमेंट हिस्ट्री सुधरी, तो इसका असर उसी हफ्ते क्रेडिट स्कोर (Credit Score Update) में दिखने लगेगा. इससे लाखों उधारकर्ताओं को तेज मंजूरी, कम ब्याज और ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी. अब महीने भर नहीं, हर हफ्ते रिफ्रेश होगा आपका क्रेडिट डेटा RBI के Credit Information Reporting Amendment, 2025 के मसौदे के अनुसार, CRIF High Mark जैसी Credit Information Companies (CICs) को हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और माह के अंतिम दिन डेटा रिफ्रेश करना होगा. चाहें तो बैंक और NBFC के साथ समझौते की स्थिति में इससे ज्यादा बार भी अपडेट किया जा सकता है. बैंकों को महीने के अंत का पूरा डेटा तीन दिनों में भेजना होगा और हर साप्ताहिक अपडेट के लिए केवल नया या बदला हुआ डेटा दो दिनों के भीतर जमा करना होगा. इसमें नए खाते, बंद खाते, रिपेमेंट अपडेट, डेमोग्राफिक बदलाव और SMA जैसी क्लासिफिकेशन की सारी जानकारी शामिल होगी. समय सीमा का पालन न करने पर CICs को RBI के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करना होगा. तेज अपडेट से उधारकर्ताओं को तुरंत मिलेगा फायदा इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उधारकर्ताओं यानी Borrowers पर पड़ेगा. अभी तक क्रेडिट स्कोर में सुधार दिखने में दो हफ्ते से ज्यादा लग जाते थे, लेकिन अब साप्ताहिक अपडेट से यह सुधार जल्दी नजर आने लगेगा. कोई कर्ज चुकाया, क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरा या कोई गलती सुधारी- इनका असर स्कोर में तेजी से झलकेगा. इससे लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ेगी और ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं क्योंकि कई बैंक स्कोर-आधारित प्राइसिंग अपनाते हैं. वहीं, गलत रिपोर्टिंग या डेटा मिसमैच जैसी समस्याएं भी जल्दी पकड़ में आएंगी, जिससे विवादों और शिकायतों में कमी आ सकती है. बैंकों को मिलेगा नया टूल, जोखिम आंकना होगा आसान साप्ताहिक रिपोर्टिंग से बैंकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें ताजा और सटीक उधारकर्ता डेटा मिल सकेगा. इससे बैंक बेहतर Underwriting कर पाएंगे, यानी कौन-सा ग्राहक कितना जोखिम वाला है, इसका मूल्यांकन अधिक भरोसेमंद ढंग से हो सकेगा. नए डेटा से बैंक लोन की ब्याज दर, राशि और अवधि जैसे तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से तय कर सकेंगे. इसके अलावा ऋण गुणवत्ता पर भी बेहतर निगरानी रख पाएंगे. RBI का यह कदम भारतीय क्रेडिट सिस्टम को वास्तविक समय डेटा की दिशा में आगे बढ़ाता है, जिससे भविष्य में Daily या Real-Time Updates भी संभव हो सकते हैं.

Maruti Suzuki की शानदार बिक्री, नवंबर में 2.29 लाख से अधिक कारों की डिलीवरी

 नई दिल्ली मारुति सुजुकी के लिए बीता नवंबर बेहद ही ख़ास रहा है. कंपनी ने पिछले 30 दिनों में अब तक की सबसे ज्यादा कारों की बिक्री का रिकॉर्ड दर्ज किया है. यानी मारुति सुजुकी जब से कारों की बिक्री कर रही है तब से अब तक एक महीने में इतनी कारें नहीं बेची गई हैं. एक महीने में कुल 2.29 लाख से ज्यादा कारों की बिक्री कर मारुति सुजुकी ने इतिहास रचा है. इसके पीछे जीएसटी 2.0 रेट कट और फेस्टिव सीजन सेल ने अहम भूमिका निभाई है. इतिहास रचने वाला महीना मारुति सुज़ुकी ने नवंबर 2025 में कुल 2,29,021 यूनिट की बिक्री दर्ज की. यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा मासिक सेल्स आंकड़ा है. यह प्रदर्शन स्पष्ट संकेत देता है कि घरेलू बाजार में ब्रांड के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो की मांग जबरदस्त है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय कारों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.  घरेलू बिक्री और एक्सपोर्ट कुल बिक्री में से 1,74,593 यूनिट घरेलू बाजार में बिकीं. वहीं 8,371 यूनिट दूसरे OEMs (टोयोटा) को भेजी गईं. एक्सपोर्ट ने इस रिकॉर्ड को बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और 46,057 यूनिट के साथ अब तक का सबसे ज्यादा मंथली एक्सपोर्ट दर्ज किया गया. खासतौर पर Jimny फाइव-डोर और Baleno जैसे मॉडलों की ग्लोबल डिमांड ने इस उछाल को मजबूत किया है. एंट्री-लेवल और कॉम्पैक्ट कारें मारुति सुजुकी की एंट्री लेवल और कॉम्पैक्ट कारों की डिमांड भी लगातार बनी हुई है. इस सेग्मेंट में आने वाली ऑल्टो के10, एस-प्रेसो, बलेनो, स्विफ्ट, वैगनआर, डिजायर और सेलेरियो ने नवंबर में जबरदस्त प्रदर्शन किया है. GST 2.0 लागू होने के बाद कीमतों में आई कमी और त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीदारी ने सेल्स को स्पीड दी. मिनी और कॉम्पैक्ट सेगमेंट ने मिलकर 85,273 यूनिट की बिक्री की और पिछले साल की तुलना में मजबूत बढ़त दिखाई. यूटिलिटी व्हीकल लाइनअप ने दिखाया दम यूटिलिटी व्हीकल (UV) सेग्मेंट में मारुति सुजुकी लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है. हाल ही में कंपनी ने मिड-साइज सेग्मेंट में अपनी नई कार विक्टोरिस को लॉन्च किया है. इसके अलावा ब्रेजा, अर्टिगा, फ्रांक्स, ग्रैंड विटारा, एक्सएल6, जिम्नी और इन्विक्टो जैसी लोकप्रिय SUVs ने 72,498 यूनिट का योगदान दिया.   इकलौती वैन का दबदबा Maruti Eeco अपने सेग्मेंट की सबसे ज्यादा लोकप्रिय कार है. बीते नवंबर में इसके 13,200 यूनिट बेचे गए. इको वैन की डिमांड पहले जैसी ही बनी हुई है. जबकि लाइट कमर्शियल व्हीकल Super Carry के कुल 3,622 यूनिट की बिक्री की गई. इन दोनों के साथ कुल घरेलू आंकड़ा 1,74,593 यूनिट पर पहुंच गया. अप्रैल से नवंबर की कुल बिक्री भी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर रही है. आने वाली हैं ये दो कारें मारुति सुजुकी आज अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार Maruti e Vitara को लॉन्च करने जा रही है. इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को दो अलग-अलग बैटरी पैक के साथ पेश किया जाएगा. ये मारुति की पहली कार होगी जिसमें 7 एयरबैग मिलेगा. कंपनी का दावा है कि, सिंगल चार्ज में ये कार 500 किमी तक की रेंज देगी.  भारत में लॉन्च से पहले ही ई विटारा एक्सपोर्ट शुरू हो चुका है और अब तक इसके 7,000 यूनिट्स को दूसरे देशों में भेजा जा चुका है. दूसरी ओर Maruti Brezza के नए फेसिलिफ्ट मॉडल को लॉन्च करने की तैयारी है. हाल ही में नई मारुति ब्रेजा को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है. इस एसयूवी को भी कई महत्वपूर्ण बदलाव के साथ पेश किया जाएगा. 

संभल नहीं रहा स्टॉक मार्केट, आज भी बैंकिंग शेयरों में जोरदार गिरावट

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) संभल नहीं रहा है और बीते कारोबारी दिन सोमवार को रेड जोन में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी ने मंगलवार को भी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. ओपन होने के कुछ ही मिनटों बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला इंडेक्स Sensex 360 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी 100 अंक से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा था. इस बीच शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा गिरावट बैंकिंग शेयरों (Banking Share Fall) में देखने को मिली और HDFC Bank से लेकर ICICI Bank तक के स्टॉक गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे.  रेड जोन में ट्रेड कर रहे सेंसेक्स-निफ्टी शेयर मार्केट (Share Market)  में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. बीसएई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 85,641.90 के मुकाबले 85,325.51 पर ओपन हुआ. इसके बाद जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा Sensex फिसलते हुए कुछ ही मिनटों में 85,261 पर आ गया. इसके साथ ही अगर Nifty की चाल पर नजर डालें, तो ये अपने पिछले बंद 26,175 से टूटकर 26,087 पर खुला और फिर 26,068 तक फिसल गया.  विदेशों से मिले थे गिरावट के सिग्नल  शेयर बाजार में सुस्त कारोबार की शुरुआत के संकेत एशियाई बाजारों से पहले ही मिल रहे थे. दरअसल, गिफ्ट निफ्टी 100 अंक से ज्यादा फिसलकर ट्रेड कर रहा था. बाजार की ओपनिंग पर जहां Asian Paints, Maruti Suzuki, NTPC, SBI, Trent के शेयर निफ्टी पर सबसे ज्यादा उछाल भरने वाले शेयरों में शामिल रहे, तो वहीं HDFC Bank, ICICI Bank, Bajaj Finserv, Bajaj Finance, Reliance गिरावट के साथ लाल निशान पर खुले थे.  Bank Shares तेजी से फिसले शुरुआती कारोबार में बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली है. बीएसई के लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HDFC Bank Share (1.50%), ICICI Bank Share (1.30%) और Axis Ban Share (1.10%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. हालांकि, कुछ बैंकिंग शेयर गिरावट के बीच भी छलांग लगाते हुए नजर आए. इनमें मिडकैप सेक्शन में शामिल Yes Bank Share-IDFC First Bank Share करीब 2 फीसदी के आस-पास उछाल के साथ ट्रेड कर रहे थे.  सबसे ज्यादा टूटे ये 10 स्टॉक  शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा बिखरने वाले 10 शेयरों की लिस्ट देखें, तो स्मॉलकैप कंपनियों में शामिल VTM Share (5%), Worth Share (4.98%), Sigachi Share (4.95%), MCloud Share (4.30%) और HariOm Pipe Share (3.60%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में MFSL Share (2.05%), Nam-India Share (1.80%), NIACL Share (1.80%), UnoMinda Share (1.70%) और Emcure Share (1.60%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. 

HSBC होम लोन का खर्च होगा कम? RBI के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना

नई दिल्ली   आगे कुछ समय के लिए मुद्रास्फीति टारगेट लेवल से कम बने रहने का अनुमान है इस बीच एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की ओर से कहा गया कि आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की जाएगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का रेपो रेट को लेकर फैसला 5 दिसंबर को आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दर अभी तक मजबूत बनी हुई है, जिसे सरकारी खर्च और जीएसटी-कट लेड रिटेल खर्च से बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, नवंबर फ्लैश मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 56.6 से संकेत मिलता है कि जीएसटी के कारण वृद्धि अपने पीक पर पहुंच गई है क्योंकि कुल मिलाकर नए ऑर्डर कम आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, "अभी विकास दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन मार्च 2026 की तिमाही में इसमें नरमी आ सकती है। हमें उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक आगामी दिसंबर नीति बैठक में पॉलिसी रेट को कम करेगा।" रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत रही, जो कि जून तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और हमारे 7.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। वहीं, ग्रॉस वैल्यू एडेड वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत और नॉमिनल जीडीपी 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी। जीडीपी में वृद्धि की गति तेज रही, जिसके बहुत से कारण रहे। इनमें से एक महत्वपूर्ण कारक 22 सितंबर को लागू की गई जीएसटी दरों में कटौती रही, जिसे लेकर 15 अगस्त को घोषणा की गई थी। एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, "हमारा मानना है कि कंज्यूमर डिमांड में वृद्धि की उम्मीद से उत्पादन में वृद्धि देखी गई। हमारे हालिया शोध दर्शाता है कि कम आय वाले राज्य अब वृद्धि की राह पर आ गए हैं, यहां तक कि वे उच्च आय वाले राज्यों से भी तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।"रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत के अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद भी भारत की विकास दर तेज गति से बढ़ती रही। होम लोन हो जाएगा सस्ता? रेपो रेट में कटौती के आसार रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर तक होने वाली है। 5 दिसंबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसला सुनाएंगे। जानकारों ने अनुमान जताया है कि रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती हो सकती है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 8.2 फीसदी की GDP ग्रोथ को देखते हुए सेंट्रल बैंक रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। लिहाजा केंद्रीय बैंक ब्याज दर को स्थिर रख सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों से सरकार के तय दायरे की निचली सीमा (दो प्रतिशत) से भी कम है। अक्टूबर में तो यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजें सस्ती होने और GST में कटौती की वजह से महंगाई पर लगाम लगी है। सेंट्रल बैंक ने पिछले साल फरवरी में रेट कम करने का अपना साइकिल शुरू किया था। पॉलिसी अनाउंसमेंट में रेपो रेट को कुल मिलाकर 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया था। घटेगी EMI, सस्ते होंगे लोन RBI के इस फैसले से लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। रेपो रेट घटने पर बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज दर पर लोन मिल सकेगा। बैंक इस सस्ते कर्ज का फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाते हैं। रेपो रेट में गिरावट के बाद आमतौर पर बैंक लोन पर ब्याज दरों को घटा देते हैं। जिससे आम नागरिक के लिए भी लोन सस्ता हो जाता है। होम लोन की ईएमआई नई ब्याज दर के हिसाब से घट जाएगी और नए लोन भी कम ब्याज दर पर उपलब्ध होंगे। अगर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती होती है तो यह घटकर 5.25 फीसदी पर पहुंच सकता है। अब तक RBI ने क्या किया है? RBI फरवरी से जून के बीच रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती कर चुका है (6.5% से 5.5%)। लेकिन अगस्त और अक्टूबर की पॉलिसी में दरों को बिना बदलाव के छोड़ दिया गया था। जानिए क्या है रेपो रेट यह वह दर होती है जिस जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता है तो साफ है कि बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगी दर पर कर्ज मिलेगा। इस तरह कर्ज महंगे हो जाएंगे ।