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कीमती धातुओं में भूचाल: सोना-चांदी ने रचा इतिहास, एक झटके में सिल्वर ₹2.25 लाख पार

मुंबई  खरमास के महीने एक तो धंधा मंदा चल रहा है, ऊपर से सोने-चांदी की दहाड़ से सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है। आज सोने-चांदी के भाव एक और नया इतिहास लिख चुके हैं। दोनों धातुएं आज भी ऑल टाइम हाई पर हैं। चांदी के भाव एक झटके में 7954 रुपये प्रति किलो उछकर 218954 रुपये प्रति किलो पर खुले। जबकि, सोने के भाव में 352 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 225522 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 140734 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। मंगलवार को चांदी बिना जीएसटी 211000 रुपये प्रति किलो और सोना बिना जीएसटी 136283 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। आज बिना जीएसटी सोना 136635 रुपये के ऑल टाइम हाई पर खुला। दूसरी ओर चांदी बिना जीएसटी 218954 रुपये प्रति किलो के रेट से खुली। इस साल अबतक सोना 60895 रुपये उछल चुका है। जबकि, चांदी 132937 रुपये उछल चुकी है। यह रेट आईबीजेए द्वारा जारी किए गए हैं। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। क्यों उछल रहे हैं सोने-चांदी के दाम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा तेजी का एक कारण अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। बाजार का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 में दो बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी नरम मौद्रिक नीति की वकालत कर रहे हैं। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 351 रुपये उछल कर 136088 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 140170 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 323 रुपये चढ़कर 125158 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 128912 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 264 रुपये की तेजी के साथ 102467 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 105550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 205 रुपये चढ़ा है। आज यह 79931 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 82328 रुपये पर है।

नया साल लाएगा महंगाई, जनवरी से महंगे होंगे इलेक्ट्रिक स्कूटर; अभी मिल रहा बंपर डिस्काउंट

नई दिल्ली  अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह समय आपके लिए अहम हो सकता है। देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों में शामिल एथर एनर्जी ने संकेत दिए हैं कि 1 जनवरी 2026 से उसके इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमतों में इजाफा किया जाएगा। यह बढ़ोतरी कुछ हजार रुपये तक हो सकती है, जिससे नए साल में स्कूटर खरीदना महंगा पड़ सकता है। किन मॉडल्स पर पड़ेगा असर एथर एनर्जी के मौजूदा पोर्टफोलियो में दो प्रमुख इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज शामिल हैं। इसमें परफॉर्मेंस को ध्यान में रखकर तैयार की गई Ather 450 सीरीज और परिवार के उपयोग को ध्यान में रखकर पेश की गई Ather Rizta शामिल है। वर्तमान में इन स्कूटरों की एक्स-शोरूम कीमत अलग-अलग वेरिएंट के हिसाब से करीब 1.14 लाख रुपये से शुरू होकर 1.82 लाख रुपये तक जाती है। जनवरी 2026 से इन सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कीमतें क्यों बढ़ा रही है कंपनी कंपनी की ओर से बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की बढ़ती लागत, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के महंगे होने और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इन्हीं कारणों की वजह से अब कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। दिसंबर में खरीदारी पर बड़ा फायदा हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल कंपनी की ओर से एक खास ऑफर स्कीम चलाई जा रही है। ‘इलेक्ट्रिक दिसंबर’ नाम की इस स्कीम के तहत चुनिंदा शहरों में ग्राहकों को कुल मिलाकर ₹20,000 तक का फायदा मिल सकता है। ऐसे में जो लोग दिसंबर महीने में स्कूटर खरीदते हैं, वे न सिर्फ कीमत बढ़ने से पहले वाहन ले सकते हैं, बल्कि अच्छी-खासी बचत भी कर सकते हैं। क्या अभी खरीदना सही रहेगा अगर आप पहले से ही इलेक्ट्रिक स्कूटर लेने का मन बना चुके हैं, तो मौजूदा समय आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। एक तरफ जनवरी से कीमतें बढ़ने वाली हैं, वहीं दूसरी ओर अभी सीमित समय के लिए आकर्षक ऑफर्स उपलब्ध हैं। ऐसे में अभी खरीदारी करने से भविष्य की महंगाई से बचा जा सकता है और बजट पर भी कम असर पड़ेगा।

Jim Beam का बड़ा फैसला: व्हिस्की उत्पादन बंद, बढ़ते स्टॉक और ट्रेड टेंशन के बीच कंपनी की नई दुविधा

 नई दिल्ली अगर आप शराब के शौकीन हैं और खासतौर पर  Jim Beam Bourbon Whiskey के दीवाने हैं, तो फिर ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, जिम बीम के स्वामित्व वाली सनटोरी ग्लोबल स्पिरिट्स (Suntory Global Spirits) ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए, केंटकी स्थित प्रमुख संयंत्र में इसका प्रोडक्शन रोक दिया है. रिपोर्ट्स की मानें, तो ये सस्पेंशन एक साल के लिए किया गया है. कंपनी के इस फैसले से यहां काम करने वाले हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है.  कंपनी ने 1 साल तक उत्पादन रोका  रिपोर्ट के मुताबिक, Bourbon Whiskey बनाने वाली कंपनी जिम बीम (Jim Beam) ने अपने मुख्य डिस्टिलरी में एक साल के लिए उत्पादन को रोक दिया है. कंपनी ने केंटकी में अपने सभी स्थानों पर 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराती है. कंपनी की ओर से घोषणा की गई है कि वह अगले पूरे साल 2026 के लिए अमेरिकी स्टेट Kentucky स्थित अपने इस संयंत्र में उत्पादन नहीं करेगी. कंपनी की ओर ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जबकि अमेरिका में बॉर्बन व्हिस्की निर्माता कंपनियां ओवर स्टॉक लेवल और अनिश्चित ग्लोबल डिमांड से जूझ रही हैं. इस लिए कंपनी ने किया ऐलान Jim Beam की ओर से इस संबंध में जारी एक बयान में कहा गया है कि डिस्टिलरी 2026 के दौरान पूरी तरह से बंद रहेगी, क्योंकि कंपनी इस समय का उपयोग साइट पर सुधार कार्यों के लिए निवेश (Investment) करने की योजना बना रही है और इसके लिए समय चाहिए. हालांकि, कंपनी की ओर से ये साफ किया गया है कि इस प्रमुख संयंत्र को छोड़कर राज्य में उसके अन्य साइट सामान्य रूप काम करती रहेंगी. कंपनी ने आगे कहा कि यह निर्णय राज्य में अपने ऑपरेशन को पूरी तरह बंद करने के बजाय भविष्य की मांग (Future Demand) की समीक्षा से जुड़ा हुआ है.  कर्मचारियों का अब क्या होगा?  Bourbon Whiskey मेकर के मुताबिक, प्रोडक्शन रोके जाने के दौरान केंटकी स्थित जिम बीम विजिटर सेंटर पहले की तरह खुला रहेगा. राज्य में 1000 से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाली कंपनी इस बात की समीक्षा करने की बात भी कह रही है कि उत्पादन बंद रहने के दौरान उसके कर्मचारियों का उपयोग कैसे किया जाएगा. इसे लेकर मंथन जारी है. कंपनी की ओर से यह पुष्टि की गई है कि इस अवधि के दौरान कर्मचारियों के लिए आगे के कदमों पर निर्णय लेने के लिए श्रमिक संघ के साथ बातचीत चल रही है. बढ़ता स्टॉक और ₹6200Cr का नुकसान केंटकी में बॉर्बन बनाने वालों पर बढ़ते स्टॉक के कारण दबाव बढ़ता जा रहा है. अक्टूबर में केंटकी डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने बताया था कि राज्य भर के गोदामों में बॉर्बन का स्टॉक रिकॉर्ड 16 मिलियन बैरल से अधिक हो गया है. इन पर राज्य द्वारा Tax भी लगाया जाता है, जिससे उत्पादकों पर लागत का बोझ और बढ़ा है.  एसोसिएशन के मुताबिक, इन स्टॉक पर लगने वाले टैक्स के कारण इस वर्ष अकेले शराब बनाने वालों को लगभग 75 मिलियन डॉलर (लगभग 6,200 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है. Trump से Canada तक का असर बढ़ते स्टॉक ने पहले से ही शराब निर्माताओं के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं, उस पर वैश्विक व्यापार तनावों (Global Trade Tension) ने चुनौतियों को और भी बदतर बना दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा अप्रैल में लागू किए गए व्यापक टैरिफ (Tariff) की घोषणा के बाद अमेरिकी शराब निर्माताओं परेशानी और बढ़ी है. इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया कि कनाडा के साथ व्यापारिक तनाव ने भी बिक्री को बुरी तरह से प्रभावित किया है. साल 2025 की शुरुआत में ही ज्यादातर कनाडाई प्रांतों ने बहिष्कार के तहत अमेरिकी शराब खरीदना बंद कर दिया था.   

सोना-चांदी को चुनौती देगा तांबा, एक्सपर्ट के अनुसार ये धातु बना सकती है करोड़पति

 नई दिल्ली     सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में आए उछाल ने इस साल 2025 में सभी को चौंकाया है. इनकी रफ्तार अभी भी लगातार जारी है और साल खत्म होने से पहले हर रोज दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड तोड़ती हुई नजर आ रही हैं. लेकिन Gold-Silver नहीं, हकीकत में एक दूसरी धातु इस बाजार की किंग (King) बनने की ओर बढ़ रही है. जी हां, तांबे की कीमत में भारी उछाल आने वाला है, ये हम नहीं कह रहे बल्कि एक्सपर्ट खुद इसके बारे में तमाम दावे कर रहे हैं और इसके साथ ही Copper Price में बूम आने के पीछे के बड़े कारण भी बता रहे हैं.  तांबा करने वाला है कमाल! तांबे को अक्सर एक स्थिर औद्योगिक धातु के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब इसे अगले बड़े व्यापारिक स्रोत के रूप में पेश किया जा रहा है. इसकी उपयोगिता बढ़ने के साथ ही इसकी कीमतों में उछाल आने वाला है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को एक्सपर्ट RKB Ventures के फाउंडर राकेश बंसल ने तर्क दिया कि सप्लाई में बाधाएं और AI, विद्युतीकरण, EVs और एनर्जी ट्रांजिशन से बढ़ी डिमांड तांबे को एक नए दौर में धकेलने वाली साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि Copper Price में भारी उछाल आने वाला है, आपूर्ति में कमी और कई वर्षों तक इसकी कीमतों में तेजी दिखने की संभावना है.  लगातार कमी, कीमतों में लगाएगी आग रॉयटर्स की एक रिपोर्ट की मानें, तो तांबे के बाजार (Copper Market) में इस साल 1,24,000 टन और अगले साल 2026 में 1,50,000 टन की कमी होने की आशंका है. यही सबसे बड़ा कारण है कि इस धातु की कीमतों में आग लगने वाली है. बंसल ने बिजनेस टुडे के साथ खास बातचीत में अपनी बात पर जोर देते हुए इसकी कीमतों में रैली की बात कही और इसे बिजली के उपयोग में संरचनात्मक वृद्धि से जोड़ा, साथ ही वायरिंग, ग्रिड और इंडस्ट्रियल मैन्यफैक्चरिंग में तांबे की बड़ी भूमिका को उजागर किया.  एक्सपर्ट ने कहा कि एल्युमीनियम और तांबा दोनों में तेजी आई है और इनमें आने वाले दिनों में अधिक उछाल देखने को मिलेगा. इलेक्ट्रिफिकेशन से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है. भारत में भी कई एआई डेटा सेंटर स्थापित हो रहे हैं और कॉपर के बिना यह तेजी संभव नहीं है. इसकी आपूर्ति में लगातार कमी आ रही है. बंसल के मुताबिक, भारत में तांबे का एकमात्र प्रमुख उत्पादक हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) है. 'Crorepati बनाने की अब तांबे की बारी' सोना-चांदी ने 2025 में निवेशकों पर पैसों की बरसात की है और इसके रिटर्न से वे मालामाल हो गए हैं. राकेश बंसल का कहना है कि अब तांबे की बारी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'तांबा नया King है, जो धमाका करने वाला है! आपूर्ति की कमी + AI डेटा सेंटर + EVs + ग्रीन ऊर्जा में उछाल = तांबे की कीमतें अकल्पनीय रूप से बढ़ने वाली हैं. अब तांबे की बारी है करोड़पति बनाने की.' उन्होंने आगे लिखा कि AI से परे देखें तो तांबे के बिना बिजली का बुनियादी ढांचा भी संभव नहीं है. सोने और चांदी की तरह तांबा भी एक सुरक्षित निवेश ऑप्शन है, क्योंकि इसकी मांग वास्तविक है. इलेक्ट्रिक वाहनों में भी तांबे की जरूरत है, लेकिन आपूर्ति सीमित है. ग्लोबल मार्केट में तांबे का धमाल  रॉयटर्स ने अपनी 12 दिसंबर की एक रिपोर्ट में बताया था कि एआई को ताकत देने वाले डेटा सेंटर्स से बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण तांबा 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के करीब पहुंच रहा है. इसमें यह भी कहा गया है कि तांबे की कीमतें इस साल अब तक 35% बढ़ी हैं और 2009 के बाद से सबसे बड़ी वृद्धि की ओर हैं. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म मैक्वेरी का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक तांबे की डिमांड 27 मिलियन टन होगी, जो 2024 की तुलना में 2.7% अधिक है. इसमें चीन (China) में मांग में 3.7% की बढ़ोतरी शामिल है.

चेन्नई के शख्स ने सालभर में खरीदे 1 लाख रुपये के कंडोम, जानें कितनी बार किया ऑर्डर

चेन्नई  ऑनलाइन शॉपिंग ने अब सिर्फ जरूरत की चीजें ही नहीं, बल्कि लोगों की आदतें और हैरान करने वाले खर्च भी सामने ला दिए हैं. स्विगी इंस्टामार्ट की 2025 की साल के लास्ट की रिपोर्ट कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले आंकड़े लेकर आई है, जो दिखाते हैं कि भारतीयों ने इस साल क्विक कॉमर्स पर कैसे और कितनी बेझिझक खरीदारी की. स्विगी इंस्टामार्ट की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल लोगों ने दूध और सब्जियों जैसी रोजमर्रा की चीजों से लेकर सोना और आईफोन जैसी महंगी चीजों तक सब कुछ ऑनलाइन मंगाया. सबसे ज़्यादा चेन्नई का एक कस्टमर चर्चा में रहा, जिसने पूरे साल में सिर्फ कंडोम पर 1 लाख रुपये से ज़्यादा खर्च कर दिए. इस ग्राहक ने साल भर में 228 बार ऑर्डर किए और कुल बिल 1,06,398 रुपये तक पहुंच गया. इंस्टामार्ट पर हर सेकंड चार से ज्यादा पैकेट दूध ऑर्डर  रिपोर्ट बताती है कि कंडोम इंस्टामार्ट पर एक बेहद लोकप्रिय प्रोडक्ट बन गया. हर 127 ऑर्डर में से एक में कंडोम शामिल था. खासतौर पर सितंबर महीने में इसकी बिक्री में 24% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. रोजमर्रा की जरूरतों की बात करें तो दूध 2025 में भी भारत की सबसे जरूरी चीज बना रहा. आंकड़ों के अनुसार, इंस्टामार्ट पर हर सेकंड चार से ज्यादा पैकेट दूध ऑर्डर किए गए. कंपनी का दावा है कि इतना दूध 26,000 से ज्यादा ओलंपिक साइज के स्विमिंग पूल भर सकता है. जानवरों के मालिकों ने भी किया दिल खोलकर खर्च  पालतू जानवरों के मालिकों ने भी दिल खोलकर खर्च किया. चेन्नई के एक पेट लवर ने सिर्फ पालतू जानवरों के सामान पर 24.1 लाख रुपये खर्च कर दिए और उन्हें 'साल का बेस्ट पेट ओनर' कहा गया. वहीं फिटनेस के शौकीनों में नोएडा का एक यूजर सबसे आगे रहा, जिसने 1,343 प्रोटीन सप्लीमेंट्स ऑर्डर किए और पूरे साल में 28 लाख रुपये खर्च कर डाले. इसमें लग्जरी शॉपिंग भी पीछे नहीं रही. मुंबई के एक यूजर ने इंस्टामार्ट के जरिए 15.16 लाख रुपये का सोना खरीदा, जिससे साफ है कि क्विक कॉमर्स अब सिर्फ किराने तक सीमित नहीं रहा.  दूसरी तरफ, बेंगलुरु के एक यूजर ने साल का सबसे छोटा ऑर्डर किया- सिर्फ 10 रुपये का प्रिंटआउट. कुल मिलाकर, स्विगी इंस्टामार्ट की 2025 की रिपोर्ट यह दिखाती है कि आज का भारतीय ग्राहक क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि हर छोटी-बड़ी जरूरत और शौक पूरा करने के लिए कर रहा है-चाहे वह दूध हो, कंडोम हो या फिर सोना.

सोना और चांदी के प्राइस रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जानें अमेरिका से जुड़ी तीन वजहें

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) ने इस साल की शुरुआत से ही हैरान किया है और हर रोज अपने रिकॉर्ड तोड़ते नजर आए. हालांकि, बीते कुछ समय में सोना तेजी से फिसला भी, लेकिन अब साल 2025 खत्म होने से पहले ये फिर से गदर मचा रहा है. सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर Gold Rate खुलते ही करीब 1500 रुपये चढ़कर 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया. अचानक सोने के भाव में फिर से लौटी इस तेजी के पीछे की वजह के बारे में बात करें, तो इसके 3 बड़े कारण सामने आ रहे हैं और इन तीनों का ही कनेक्शन अमेरिका (US Connection Of Gold Price Hike) से है. मंगलवार को सोना रॉकेट की तरह भागा सबसे पहले बात करते हैं मंगलवार को Gold Rate Update के बारे में, तो एमसीएक्स पर लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के भाव में तूफानी तेजी आई है. कारोबार के दौरान 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले 24 Karat Gold का रेट 1519 रुपये या 1.11% की उछाल के साथ 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चल रहा था. वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमत को देखें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन सोमवार को 24 कैरेट सोना 1,33,970 रुपये पर क्लोज हुआ था और मंगलवार को खुलने के साथ ही ये 2163 रुपये रुपये महंगा होकर 1,36,133 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया.  एशियाई बाजारों में हाजिर सोने का भाव 4,445.69 डॉलर प्रति औंस के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया. चांदी तो MCX पर खुलते ही 3000 रुपये से ज्यादा की उछाल के साथ 2,16,596 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. वहीं अंतरराष्ट्री बाजार में Silver Price भी इसी रफ्तार से भागा. इसकी हाजिर कीमत 0.19% की उछाल के साथ 69.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई अचानक क्यों लौटी सोने में तेजी?  दिसंबर महीने की शुरुआत में Gold Price में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में ये फिर से रॉकेट बना नजर आने लगा है. 2025 में अब तक इसमें 70% की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इस महीने टूटने के बाद फिर खड़ा हुआ सोना लगभग 10% उछल चुका है. बात करें, अचानक गोल्ड रेट में लौटी इस तेजी के पीछे के कारणों के बारे में तो निवेशकों का फिर से सुरक्षित निवेश ठिकानों की ओर रुख करना है और इसका सीधा कनेक्शन अमेरिका से है.  पहला कारण:  भू-राजनीतिक टेंशन Gold Rate के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के पीछे पहला बड़ा कारण फिर से बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है. यह तेजी तब आई है, जब अमेरिका ने वेनेजुएला (US Vs Venezuela) के तेल ले जा रहे टैंकरों को जब्त करने के प्रयास तेज कर दिए. अमेरिका के इस एक्शन के चलते एनर्जी सप्लाई में रुकावट और भू-राजनीतिक हालातों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसके साथ ही निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले Gold की तरफ भागे हैं.  दूसरा कारण: US को सेंट्रल बैंकों का झटका सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे दूसरा बड़ा कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही Gold Buying को भी माना जा रहा है. इससे जहां Gold Rate Rise हो रहा है, तो अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट की मानें, तो 1996 के बाद करीब तीन दशक में पहली बार वैश्विक केंद्रीय बैंक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा हुई है. इसमें बताया गया था कि साल 2022 से ही केंद्रीय बैंकों ने हर साल करीब 1000 टन सोने की खरीद की है. ग्लोबल इकोनॉमिक स्थितियां बदली हैं और Trump Tariff नीतियों ने सोने में जोरदार तेजी ला दी है.  तीसरा कारण: FED Rate Cut के संकेत Gold Price Rise के पीछे तीसरा बड़ा कारण भी अमेरिका से ही जुड़ा हुआ है. दरअसल, हाल ही में US FED ने पॉलिसी रेट में कटौती की थी. वहीं बाजार अब अगले साल 2026 में भी अमेरिकी ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं. व्यापारी अगले वर्ष अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दो Rate Cut की संभावना जता रहे हैं. इसके अलावा फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं जिसने सोना जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों को समर्थन दिया है.

7-सीटर किआ कैरेंस की GST कटौती से कीमतों में राहत, बेस मॉडल अब 14.32 लाख रुपए में

मुंबई  किआ की पॉपुलर 7-सीटर कैरेंस की कीमतों में भी नए GST से कटौती हुई है। इसके एंट्री से लेकर टॉप वैरिएंट तक सभी को खरीदना सस्ता हुआ है। यही वजह है कि एक्स-शोरूम कीमतें कम होने का असर आर्मी कैंटीन पर मिलने वाली कारों पर भी पड़ा है। कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट यानी CSD पर जवानों से 18% की जगह सिर्फ 14% GST ही लिया जाता है। Cars24 के मुताबिक, किआ कैरेंस की CSD पर शुरुआती कीमत सिर्फ 14.32 लाख रुपए है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 12.77 लाख रुपए है। वैरिएंट के आधार पर कैरेंस पर करीब 2 लाख रुपए का टैक्स बच रहा है। भारत में इसका सीधा मुकाबला मारुति अर्टिगा, टोयोटा इनोवा जैसे मॉडल से होता है। कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) पर स्विफ्ट की कीमतों के बारे में जानने से पहले CSD के बारे में समझते हैं। दरअसल, CSD रक्षा मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एकमात्र स्वामित्व वाला उद्यम है। भारत में अहमदाबाद, बागडोगरा, दिल्ली, जयपुर, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में 34 CSD डिपो हैं। यह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित है। भारतीय आबादी के एक चुनिंदा हिस्से को भोजन, चिकित्सा वस्तुओं, घरेलू आवश्यकताओं और यहां तक ​​कि कारों को अफॉर्डेबल कीमतों के साथ बेचते हैं। CSD से कार खरीदने के लिए एलिजेबल ग्राहकों में सर्विंग और रिटायर्ड सशस्त्र बल कर्मी, सैन्य कर्मियों की विधवाएं और भूतपूर्व सैनिक और डिफेंस सिविलियन शामिल हैं। किआ कैरेंस की CSD और एक्स-शोरूम कीमतें वैरिएंट                                                                          CSD प्राइस कैरेंस डी1.5 सीआरडीआई वीजीटी प्रीमियम विकल्प एमटी    ₹10.94 लाख कैरेंस डी1.5 सीआरडीआई वीजीटी प्रेस्टीज आईएमटी            ₹13.11 लाख कैरेंस डी1.5 प्रेस्टीज एमटी 7 सीटर                                    ₹14.32 लाख किआ कैरेंस क्लाविस के फीचर्स, स्पेसिफिकेशंस और सेफ्टी इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ जोड़े गए 6MT ट्रांसमिशन अलग से मिलेगा। अन्य 6iMT और 7DCT के ट्रांसमिशन ऑप्शन कैरेंस के समान ही हैं। 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन 160 PS और 253 Nm जनरेट करता है। अन्य इंजन विकल्प, 115 PS, 1.5-लीटर NA पेट्रोल (6MT) और 116 PS, 1.5-लीटर डीजल (6MT / 6AT) कैरेंस के समान ही हैं। बात करें इसके वैरिएंट की तो इसमें 7 ऑप्शन मिलेंगे, जिसमें HTE, HTE(O), HTK, HTK+, HTK+(O), HTX और HTX(O) शामिल हैं। इसमें 6-सीट और 7-सीट लेआउट में खरीद पाएंगे। 7-सीट केवल टॉप-स्पेक HTX(O) वैरिएंट में उपलब्ध होगा। कैरेंस क्लाविस के डीजल वैरिएंट की सबसे अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी होगी, जिसमें 6-स्पीड मैनुअल वर्जन 19.54kpl पर रेंज का सबसे अधिक माइलेज देता है। उसके बाद, 6-स्पीड ऑटोमैटिक 17.50kpl पर दूसरे स्थान पर है। कैरेंस क्लाविस की फ्यूल एफिशिएंसी स्पोर्टियर 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन का है, जो अपने 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक के लिए 16.66kpl का माइलेज देता है। जबकि, इसके 6-स्पीड मैनुअल और iMT ट्रांसमिशन दोनों 15.95kpl पर बराबर हैं। एंट्री-लेवल नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन अपने एकमात्र 6-स्पीड मैनुअल कॉन्फ़िगरेशन के लिए 15.34kpl माइलेज के साथ तीसरे स्थान पर है। हालांकि, इसका माइलेज मारुति अर्टिगा और मारुति XL6 से कम हैं। इसके फ्रंट फेसिया को स्लीक स्टार मैप LED DRLs के साथ इंटीग्रेटेड टर्न सिग्नल के साथ अपडेट किया गया है। साथ ही, आइस-क्यूब MFR LED हेडलैंप दिए हैं। कैरेंस क्लाविस में सैटिन क्रोम फिनिश में मजबूत फ्रंट और रियर स्किड प्लेट भी हैं। R17 क्रिस्टल कट डुअल-टोन एलॉय व्हील्स के साथ रोड प्रेजेंस को और भी बेहतर बनाया गया है। इसकी तुलना में कैरेंस MPV में R16 एलॉय व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है। पीछे की तरफ, किआ क्लाविस में स्टार मैप LED कनेक्टेड टेल लैंप्स मिलते हैं। इंटीरियर की बात करें तो किआ क्लाविस में इंफोटेनमेंट और इंस्ट्रूमेंट कंसोल के लिए 26.62-इंच का डुअल पैनोरमिक डिस्प्ले पैनल मिलता है। इसकी तुलना में किआ कैरेंस 10.25-इंच टचस्क्रीन और उसी आकार के फुली डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर से लैस है। क्लाविस में एक और एक्स्ट्रा 4-वे पावर्ड ड्राइवर सीट है। किआ कनेक्ट सूट को रिमोट विंडो कंट्रोल, सराउंड व्यू मॉनिटर और मल्टीलिंगुअल VR कमांड के साथ फाइंड माई कार के साथ अपडेट किया गया है। किआ क्लाविस को 7DCT वैरिएंट के साथ 20 ऑटोनॉमस फीचर्स के साथ ADAS लेवल 2 मिलता है। इसमें ब्लाइंड स्पॉट कोलिजन वार्निंग, ब्लाइंड स्पॉट कोलिजन अवॉइडेंस असिस्ट, क्लस्टर में ब्लाइंड व्यू मॉनिटर, 360 डिग्री कैमरा, स्टॉप एंड गो के साथ स्मार्ट क्रूज कंट्रोल और ड्राइवर अटेंशन वॉर्निंग शामिल हैं। इसके अलावा, फ्रंट कोलिजन वार्निंग, फ्रंट कोलिजन अवॉइडेंस असिस्ट, लेन कीपिंग असिस्ट, लेन डिपार्चर वार्निंग, लेन फॉलोइंग असिस्ट, हाई बीम असिस्ट, रियर क्रॉस ट्रैफिक कोलिजन वार्निंग और अवॉइडेंस असिस्ट और सेफ एग्जिट वार्निंग भी शामिल हैं। इसमें 6-एयरबैग, ESC, VSM, BAS, HAC, DBC और ABS, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, ऑल व्हील डिस्क ब्रेक और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं।

IndiGo को बड़ा झटका: तुर्की से लीज पर लिए 5 विमानों की उड़ान पर DGCA ने एक्सटेंशन से किया इनकार

नई दिल्ली इंडिगो (IndiGo) की फ्लाइट कैंसिलेशन की वजह से बीते दिनों पूरे देश में हड़कंप का माहौल बना रहा था. अब इंडिगो का परिचालन कुछ हद तक सामान्य जरूर हुआ है, लेकिन विमानन नियामक की पैनी नजर उस पर बनी हुई है. सोमवार को इंडिगो द्वारा तुर्की से लिए गए एयरक्राफ्ट (Turkey Planes) के लीज ड्यूरेशन के बारे में एक सफाई दी गई, जिस पर DGCA ने एयरलाइन को इन प्लेन का इस्तेमाल करने के लिए मार्च 2026 तक का समय दिया है, लेकिन इसके साथ ही दो-टूक कह दिया है कि इसके बाद कोई एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा.  5 विमानों को मार्च तक उड़ाने की इजाजत पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एविएशन रेगुलेटर DGCA ने IndiGo को तुर्की से लीज पर लिए गए 5 नैरो बॉडी प्लेन B737 सिर्फ मार्च 2026 तक संचालित करने की इजाजत दी है. नियामक ने साफ किया है कि इन एयरक्राफ्ट का आखिरी एक्सटेंशन मार्च 2026 तक ही वैलिड है और एक सनसेट क्लॉज भी है कि इसे लेकर कोई भी एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा. एविएशन रेगुलेटर के अनुसार, तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस से लिए गए 5 बोइंग 737 प्लेन की लीज 31 मार्च 2026 को खत्म हो रही है. DGCA के एक सीनियर ऑफिशियल ने जानकारी देते हुए बताया है कि यह इस मामले में इंडिगो एयरलाइंस द्वारा दिए गए अंडरटेकिंग पर आधारित है, जिसमें उन्होंने आखिरी बार एक्सटेंशन मांगा था. इसके पीछे वजह ये थी कि उनके लॉन्ग रेंज एयरक्राफ्ट (A321-XLR) फरवरी 2026 तक डिलीवर होने वाले हैं. 15 विदेशी एयरक्राफ्ट, तुर्की के 7 IndiGo Airlines फिलहाल वेट/डैम्प लीज के आधार पर 15 विदेशी एयरक्राफ्ट संचालित करती है, जिनमें से 7 तुर्की के एयरक्राफ्ट शामिल हैं. इस साल अगस्त 2025 में DGCA ने इंडिगो को कुछ शर्तों के साथ टर्किश एयरलाइंस से लीज पर लिए गए दो बोइंग 777 एयरक्राफ्ट चलाने के लिए फरवरी 2026 तक छह महीने का एक्सटेंशन दिया था. यह कदम DGCA द्वारा मई में दिए गए तीन महीने से भी कम समय के बाद आया था. इंडिगो को टर्किश एयरलाइंस के एयरक्राफ्ट चलाने के लिए 31 अगस्त तक तीन महीने का एक बार का आखिरी एक्सटेंशन दिया गया था और कैरियर से आगे कोई एक्सटेंशन न मांगने के लिए भी कहा गया था. सबसे खास बात ये है कि यह फैसला तब आया जब तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया था और मई में पड़ोसी देश में आतंकी कैंपों पर भारत के हमलों की निंदा की थी. 'वेट लीजिंग एक आम बात…' न सिर्फ इंडिगो, बल्कि SpiceJet जैसी एयरलाइंस के 17 विदेशी प्लेन ऑपरेशन में हैं, जिन्हें वेट/डैम्प लीज पर लिया गया है. DGCA के अधिकारी की मानें, तो ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री में एयरक्राफ्ट की वेट लीजिंग एक आम बात है. उन्होंने कहा कि इंजन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से एयरक्राफ्ट के ग्राउंडिंग और OEMs से ऑर्डर के हिसाब से एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी की वजह से कई भारतीय कैरियर यात्रियों को सर्विस देने के लिए एक स्टॉप गैप अरेंजमेंट के तौर पर विदेशी कंपनियों से वेट लीज का सहारा ले रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह लीजिंग दूसरे देशों के साथ बाइलेटरल सर्विस एग्रीमेंट के तहत भारतीय कैरियर को दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए की जाती है.  

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में कदम, एफटीए की प्रक्रिया में तेजी, पीयूष गोयल बोले

नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) फाइनल होते ही भारत अब फुल फॉर्म में दिख रहा है. भारत ने अगला बड़ा दांव अमेरिका की ओर बढ़ा दिया है. वॉशिंगटन के साथ ट्रेड डील को लेकर चर्चाएं तेज हैं और संकेत साफ हैं कि मामला सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहा.  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब कागजों से निकलकर हकीकत की तरफ बढ़ रही है. सवाल बस इतना है कि क्या अगला बड़ा FTA अमेरिका के नाम होगा? गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है और दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से मजबूती आ रही है. नई दिल्ली में मीडिया को ब्रीफ करते हुए गोयल ने बताया कि भारत अब खुद को ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इससे पहले वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच शुरुआती फ्रेमवर्क डील लगभग तय होने के करीब है. हो चुकी है 6 दौर की बातचीत अग्रवाल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अब तक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है. इसमें बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) और ऊंचे टैरिफ को कम करने के लिए अंतरिम समझौते पर चर्चा हुई है. उम्मीद है कि इससे ज्यादातर भारतीय निर्यात पर लगने वाले भारी टैरिफ घटाए जा सकेंगे. रीजनल ट्रेड को मिलेगी नई रफ्तार इस बीच भारत इंडो-पैसिफिक रीजन में भी अपनी आर्थिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है. गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से रीजनल ट्रेड को नई रफ्तार मिलेगी. यह फाइव आइज देशों के साथ भारत का तीसरा FTA है, इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ समझौता हो चुका है. भारत को मिलेगा 100% मार्केट एक्सेस न्यूजीलैंड FTA के तहत भारत को 100% मार्केट एक्सेस मिलेगा. आईटी, टूरिज्म, टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन और ऑडियो-विजुअल जैसे 118 सर्विस सेक्टर्स खुलेंगे. दोनों देशों को उम्मीद है कि अगले 5 साल में बाइलेटरल ट्रेड दोगुना हो सकता है. फार्मा कंपनियों को भी बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल और मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स की आपसी मान्यता पर सहमति बनी है.

टाटा सिएरा ईवी जल्द होगी लॉन्च, टेस्टिंग में आई पहली बार नजर

नई दिल्ली टाटा मोटर्स ने हाल ही में भारत में बहुप्रतीक्षित सिएरा एसयूवी लॉन्च की है, जिसकी कीमत 11.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. इसी रफ्तार को आगे बढ़ाते हुए कंपनी अब इसके इलेक्ट्रिक वर्जन, टाटा सिएरा ईवी की लॉन्चिंग की तैयारी कर रही है. सिएरा ईवी का टेस्ट म्यूल भारतीय सड़कों पर देखा जा चुका है, जिससे ग्राहकों को इसकी झलक मिल गई है. स्पाई शॉट्स में कई मैकेनिकल अपग्रेड्स और डिजाइन में बदलाव नजर आ रहे हैं, जो इसे इसके पेट्रोल-डीजल वेरिएंट से अलग बनाते हैं. यह टाटा के सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में अगला बड़ा कदम है. टाटा सिएरा ईवी टाटा सिएरा ईवी में बैटरी पैक के विकल्प हैरियर ईवी से लिए जा सकते हैं, जिसमें 65kWh और 75kWh की कॉन्फिगरेशन मिल सकती है. इसमें टू-व्हील-ड्राइव और ऑल-व्हील-ड्राइव दोनों वेरिएंट्स आने की संभावना है, जैसा कि हैरियर ईवी में देखने को मिलता है. हालांकि, टाटा सिएरा ईवी की पावर फिगर्स को इसके बड़े भाई से थोड़ा कम रख सकता है, ताकि दोनों प्रोडक्ट्स में फर्क साफ रहे. इससे एफिशिएंसी भी बेहतर होगी और ड्राइविंग रेंज को प्राथमिकता दी जाएगी. इन बदलावों से टाटा की रणनीति साफ नजर आती है, जिसमें क्षमता, प्रैक्टिकलिटी और पोर्टफोलियो में सही जगह का संतुलन रखा गया है. स्पाई शॉट्स आए सामने टाटा सिएरा ईवी की हालिया स्पाई शॉट्स इसकी इलेक्ट्रिक पहचान को पुख्ता करती हैं, जिसमें एग्जॉस्ट पाइप की गैरमौजूदगी पावरट्रेन में बदलाव को साफ दिखाती है. सबसे अहम बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिएरा ईवी में इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन सेटअप मिलेगा, जो इस सेगमेंट में आमतौर पर मिलने वाले बीम एक्सल अरेंजमेंट से काफी बेहतर है. यह एडवांस्ड सस्पेंशन न सिर्फ महंगा है, बल्कि कई फायदे भी देता है. इससे कार्नरिंग के दौरान बॉडी रोल कम होता है और उबड़-खाबड़ रास्तों पर व्हील आर्टिकुलेशन बेहतर होती है, जिससे स्टेबिलिटी, कम्फर्ट और कैपेबिलिटी बढ़ती है. इससे सिएरा ईवी एक ज्यादा एडवांस और वर्सेटाइल एसयूवी बन जाती है. इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन टाटा मोटर्स का सिएरा ईवी में इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन देना मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट के किफायती मानकों से अलग सोच को दर्शाता है. जहां ज्यादातर प्रतिद्वंद्वी सिंपल और सस्ते सेटअप पर निर्भर करते हैं, वहीं यह एडवांस डिजाइन ड्राइविंग डायनामिक्स और कम्फर्ट को बेहतर बनाता है. इससे सिएरा ईवी को एक प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जा सकता है, जिससे इसकी कीमत टाटा के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो में ज्यादा हो सकती है. इंटीरियर स्पेसिफिकेशन्स हालांकि टाटा मोटर्स ने सिएरा ईवी के इंटीरियर स्पेसिफिकेशन्स की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि एसयूवी में ब्रांड के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो के मुताबिक कई कॉस्मेटिक और फंक्शनल अपग्रेड्स मिलेंगे. इसमें Arcade.ev ऐप सूट के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी, एयरोडायनामिक्स के लिए क्लोज्ड-ऑफ ग्रिल, खास .ev बैजिंग और ड्रैग कम करने के लिए एयरो-ऑप्टिमाइज्ड अलॉय व्हील्स शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, टाटा सिएरा ईवी में डिजिटल इंटीरियर रियर-व्यू मिरर भी दिया जा सकता है, जैसा कि हैरियर ईवी में मिलता है, जिसमें रियर-माउंटेड कैमरा से क्लियर और बिना रुकावट वाला व्यू मिलता है.