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भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते पर अभी मुहर नहीं, सरकार ने कहा– बातचीत जारी

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक डील को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सोमवार को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि भारत और अमेरिका के बीच हुई डील पर अभी मुहर नहीं लगी है। यह डील तब अपने मूर्त रूप में आएगी, जब अमेरिका में नए टैरिफ ढांचे लागू हो जाएंगे। बता दें, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों को रद्द कर दिया था, जिसके बाद कई देशों ने अमेरिका के साथ हुई अपनी डील को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। सोमवार को व्यापारिक आंकड़ों पर ब्रीफिंग देते समय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि नई डील पर हस्ताक्षर नए टैरिफ ढांचे के लागू हो जाने के बाद ही होंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अग्रवाल ने कहा कि कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन इस समय व्यापार समझौते के विवरणों पर बातचीत कर रहे हैं। क्या है मामला? दरअसल, लंबी बातचीत और तमाम उठापटक के बाद भारत और अमेरिका के बीच में एक व्यापारिक डील पर सहमति बनी थी। इस पर दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने दावे किए थे। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही अमेरिकी सुप्रीम कोकर्ट ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित करके रद्द कर दिया। हालांकि, इसके कुछ घंटो बाद ही ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश जारी करते हुए अमेरिका में आने वाले सामान पर सार्वभौमिक रूप से 10 फीसदी टैरिफ की घोषणा कर दी। बाद में उन्होंने इसे 15 फीसदी तक बढ़ा दिया। लेकिन इसके साथ समस्या यह है कि यह टैरिफ एक निश्चित समय के लिए ही लागू होगा। इस वजह से भारत जैसे देशों ने अमेरिका के साथ हुई अपनी डील को अभी फाइनल करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना ज्यादा सही समझा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इन देशों पर दबाव बनाने के लिए कई कदम उठाने की कोशिश भी की है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लगे झटके के बाद ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ दबाव फिर से बनाने की कोशिश की। हाल ही में उन्होंने भारत और 15 अन्य देशों के खिलाफ "अनफेयर मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस" की जांच करने की घोषणा की है। यह कदम ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत की जाने वाली जांच कहलाता है। अमेरिकी संविधान के मुताबिक अगर कोई देश अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त पाया जाता है, तो अमेरिकी सरकार उन पर नए टैरिफ लगाने, आयात रोकने और व्यापार समझौते में दी गई रियायतों को निलंबति करने की शक्ति हासिल कर लेती है।  

India-US Trade Deal: फाइनल एग्रीमेंट का इंतजार, किन देशों को मिलेगा फायदा?

नई दिल्ली वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच मार्च में अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, जिसे अप्रैल से लागू किया जाएगा। इसके अलावा अप्रैल में यूके और ओमान के साथ भी FTA लागू होने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक 'अंतरिम व्यापार समझौते' पर इस साल मार्च में हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है और इसे अप्रैल के महीने से पूरी तरह लागू (ऑपरेशनल) कर दिया जाएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस समझौते के कानूनी मसौदे (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से अमेरिका में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक शुरू होने जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि इस अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पहले ही तय कर ली गई है। समझौते की प्रमुख शर्तों में कहा गया है कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं एवं अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। साथ ही भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। 'समृद्ध भविष्य की राह' शीर्षक वाले खंड में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ा रहे हैं। साथ ही आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं को कम कर रहे हैं। इसमें कहा गया- भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क बनाए रखे हैं, जहां कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क है। भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी गैर-शुल्क बाधाएं लगाने का भी रहा है जिनके कारण अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे हैं।' दस्तावेज के अनुसार- आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में अंतरिम समझौते पर काम करेंगे।' ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन (UK) और ओमान के साथ भी भारत के बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) अप्रैल महीने में लागू होने की पूरी उम्मीद है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता: इसके अलावा, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले व्यापार समझौते के भी इसी साल सितंबर महीने तक लागू होने की संभावना जताई गई है। इन सभी व्यापारिक समझौतों के लागू होने से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नई गति मिलने और निर्यात के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

US को अब भारत ही होगा भरोसेमंद साथी, अमेरिकी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनेगा देश में

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है. दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’ भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. इससे क्या फायदा होगा? इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी. भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.' सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है? फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.' भारत पर अब कितना टैरिफ है? भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

इकोनॉमिक सर्वे का संकेत: US डील पर जल्द फैसला संभव, टैरिफ को लेकर राहत की खबर

नई दिल्ली अमेरिका के साथ ट्रेड डील (Trade Deal) का आर्थिक सर्वेक्षण (Economy Survey) में जिक्र किया गया है. वैसे तो दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन आर्थिक सर्वे में इस डील पर साल 2026 में मोहर लगने का अनुमान लगाया गया है.  सबसे अच्छी खबर अर्थव्यवस्था को लेकर है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अमेरिकी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग पर पड़ने के बावजूद ग्रोथ की रफ्तार बनी रही. क्योंकि सरकार की ओर से लगातार टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. यानी अमेरिकी टैरिफ, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक गति पर मामूली असर पड़ा है. जीडीपी में मजबूती के पीछे ये कारण      दरअसल, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया गया है. सर्वे के मुताबिक, FY26 के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रही, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग के मजबूत बने रहने का नतीजा है. आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में विस्तार और फिस्कल अनुशासन में सुधार की वजह से भारत की ग्रोथ टिकाऊ बनी हुई है. FY26 में राजकोषीय घाटा 4.8% रह सकता है, जो कि GDP लक्ष्य के भीतर है.   आर्थिक सर्वे के मुताबिक, घरेलू मांग भारत की विकास कहानी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है. ग्रामीण और शहरी मांग में संतुलन दिख रहा है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगातार निवेश से रोजगार और आय के अवसर बढ़े हैं. सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के बढ़ते खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है.  वैश्विक दबाव के बावजूद जोरदार प्रदर्शन  सर्वे की मानें तो वैश्विक स्तर पर डाउनसाइड रिस्क बने हुए हैं. हालांकि, यह भी कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के लिए तत्काल मैक्रो-इकोनॉमिक संकट पैदा नहीं करते. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और नीति विश्वसनीयता भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं.  सरकार का निर्यात पर फोकस आर्थिक सर्वे के अनुसार, करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर निर्भरता के कारण रुपया कुछ हद तक अंडरवैल्यूड है. अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. लेकिन मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी होगा. खासतौर पर वैल्यू-एडेड और टेक्नोलॉजी आधारित निर्यात पर जोर देने की सिफारिश की गई है.  इसी कड़ी में पहली बार आर्थिक सर्वे में AI को लेकर एक अलग चैप्टर है, यानी नई टेक्नोलॉजी पर आने वाले दिनों में सरकार को पूरा फोकस रहने वाला है. इसके साथ सोने-चांदी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर भी सरकार की नजरें हैं. कीमतों धातुओं में तेजी के पीछे ग्लोबल कारण बताए गए हैं.  आर्थिक सर्वे का मानना है कि अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, निर्यात में बढ़ावा और राजकोषीय अनुशासन इसी तरह बनाए रखे गए, तो भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच भी तेज और संतुलित विकास की राह पर बना रह सकता है.  इस बीच आर्थिक सर्वे में राज्यों को सलाह दी गई है कि वे कैश ट्रांसफर के बजाय पूंजीगत खर्च (Capex) को प्राथमिकता दें, ताकि अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को पीछे धकेलने यानी क्राउडिंग आउट का खतरा न बढ़े.

ट्रेड, एनर्जी और डिफेंस पर गहन चर्चा: मोदी–ट्रंप बातचीत से India-US रिश्तों में नई गति

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के मुद्दे पर बात हुई। पीएम मोदी ने एक्स पर बताया, "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।" अधिकारियों ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।उन्होंने कहा कि दोनों नेता साझा चुनौतियों से निपटने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील सकारात्मक मोड़ पर अमेरिकी प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील सकारात्मक मोड़ पर है। भारत ने अमेरिका को अब तक का बेस्ट प्रस्ताव दिया है। किन फसलों को मिलेगी भारत में एंट्री? ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी ज्वार और सोयाबीन जैसे उत्पादों के लिए भारत अपना बाजार खोलने के लिए तैयार हो गया है। USTR की एक टीम अभी भारत में ही है और वे कृषि क्षेत्र में आई बाधाओं को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत को एथेनॉल बेचना चाहता है अमेरिका ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी मक्के और सोयाबीन से निकलने वाले एथेनॉल को भी भारत खरीद सकता है। कई अन्य देशों ने भी अमेरिकी एथेनॉल के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं।  

इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल स्टेज पर, टैरिफ में बड़ी कटौती की उम्मीद

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है, और अब बस इसकी घोषणा का इंतजार है। यह वही समझौता है जिसके तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए 50% तक के भारी शुल्क को दोबारा से रिव्यू किया जा सकता है। क्या भारत को आखिरकार राहत मिलने वाली है? अभी अमेरिका ने भारत पर कितना ट्रैफिक लगा रखा है? पिछले कुछ सालों में अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पर भारी शुल्क लगने से व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है। रूसी तेल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव के बाद अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 25% पारस्परिक शुल्क और 25% अतिरिक्त पेनल्टी लगा दी थी। इससे भारत के निर्यात की प्रतिस्पर्धा काफी कम हो गई थी। लेकिन अब ऐसी खबरें हैं कि भारत और अमेरिका दोनों इस टैरिफ मुद्दे को हल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि, “ट्रेड डील का पहला पैकेज लगभग अंतिम चरण में है। यह पैकेज पारस्परिक शुल्कों को संबोधित करेगा।” इसका मतलब साफ है कि इस डील का पहला चरण भारी शुल्कों में बड़ी राहत दे सकता है, जो भारतीय उद्योग और किसानों के लिए बड़ी खबर है। क्या ट्रंप के भारी टैरिफ अब हट जाएंगे? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका भारत पर लगाए गए भारी जुर्माने (25% पेनल्टी) को वापस लेगा? अधिकारी का कहना है कि “अगर यह 25% पेनल्टी नहीं हटती, तो इस समझौते का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।” यानी भारत साफ संकेत दे चुका है कि बिना टैरिफ रिलीफ के वह यह डील आगे नहीं बढ़ाएगा। कृषि उत्पादकों को क्या मिलेगा बड़ा फायदा? अमेरिका ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए चाय, कॉफी, मसाले, कोको, उष्णकटिबंधीय फल, जूस, टमाटर, केले, संतरे और बीफ़ जैसे उत्पादों पर से पारस्परिक शुल्क हटा दिए हैं। भारत इन वस्तुओं का 1 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है। यानि इस फैसले से भारतीय किसानों और कृषि निर्यातक कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है। क्या अमेरिका 500% टैरिफ लगाने की तैयारी में है? यहीं कहानी और रोचक हो जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि “अगर कोई देश रूस के साथ व्यापार करता है, तो अमेरिका 500% तक टैरिफ लगाने में हिचकेगा नहीं।” यानी अमेरिका अब एक नया कड़ा कानून लाने पर विचार कर रहा है, जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी प्रतिबंध होंगे। यहां सवाल उठता है-     क्या भारत भी इस नीति की चपेट में आ सकता है?     क्या इस वजह से भारत-अमेरिका व्यापार डील और तेज की जा रही है? इस मुद्दे ने पूरी चर्चा को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया है। क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील रिश्तों में बड़ा मोड़ साबित होगी? भारत और अमेरिका लंबे समय से व्यापारिक मतभेदों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर पहला चरण सफल होता है, तो आने वाले महीनों में और भी कई पैकेज लाए जा सकते हैं। यह डील न सिर्फ भारतीय उद्योगों को फायदा देगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।

US से आ रही है बड़ी डील: सीनियर अधिकारी के मुताबिक बातचीत में कई पॉजिटिव डेवलपमेंट

नई दिल्‍ली भारत और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में व्‍यापार डील जल्‍द होने जा रही है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने संकेत दिया है कि भारत के साथ लंबे समय से पेंडिंग व्‍यापार समझौते पर बातचीत तेजी से बढ़ी है. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच हालिया चर्चा में काफी पॉजिटिव डेवलपमेंट हुए हैं.  अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर अपने पहले के टकराव वाले रुख से पीछे हटते हुए, महीनों के टकराव और रुकी हुई वार्ता के बाद व्यापार पर रचनात्मक रूप से जुड़ने की इच्छा का संकेत दिया है.  गुरुवार को सीनियर अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ दो 2 समानांतर मुद्दों पर काम कर रहा है. पहला- एक पारस्‍परिक व्‍यापार समझौता और दूसरा- भारत द्वारा रूसी तेल के आयात पर जारी चिंताएं. ANI के मुताबिक, सीनियर अधिकारी ने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका के साथ हमारी कई साकारात्‍मक तेजी हुई है. उनके साथ हमारी दो बातें चल रही हैं. बेशक हम एक पारस्‍परिक व्‍यापार वार्ता कर रहे हैं, लेकिन रूसी तेल का मुद्दा भी हमारे सामने है, जिसपर हमने बाजार में सुधार देखा है. अभी डील को लेकर बहुत काम बाकी अधिकारी ने आगे कहा कि चर्चाओं से साल के अंत से पहले नतीजे मिल सकते हैं, हालांकि अभी बहुत काम बाकी है. उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि हम थोड़ा आराम कर सकते हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. पारस्‍परि व्‍यापार समझौते से टैरिफ में संतुलन स्‍थापित होगा और दोनों अर्थव्‍यवस्थाओं के बीच बाजार पहुंच बढ़ेगा.  अमेरिका और  भारत के बीच डील से सुलझेंगे ये मसले अधिकारी ने कहा कि इस डील से अमेरिकी एग्रीकल्‍चर और इंडस्‍ट्रीज वस्‍तुओं पर टैरिफ, भारत के लिए बड़ा व्‍यापार मार्केट और अमेरिका में भारतीय कारोबारियों के लिए अधिक पहुंच संबंधी कई समाधान होंगे. ध्‍यान देने वाली बात है कि यह खबर ऐसे समय में आई है, जब व्हाइट हाउस ने चार लैटिन अमेरिकी देशों – अर्जेंटीना, अल सल्वाडोर, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला के साथ शुरुआती व्‍यापार समझौतों का ऐलान किया है. यह अमेरिका में उपलब्‍ध न होने वाली वस्‍तुओं पर टैरिफ में की की पेशकश करेंगे.  कई अन्‍य देशों से भी व्यापार को लेकर पॉजिटिव बातचीत अधिकारी ने वियतनाम, इंडोनेशिया और स्विट्ज़रलैंड के साथ हाल के सहयोग का भी जिक्र किया, जो व्यापक बहुपक्षीय व्यापार ढांचों के बजाय लक्षित समझौतों की ओर बदलाव का संकेत देता है. अधिकारी ने कहा कि हम कई क्षेत्रों में काफी पॉजिटिव बातचीत कर रहे हैं. नए दूत गोर व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाएंगे यह नई गति तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी सर्जियो गोर ने भारत में नए राजदूत का पदभार संभाला है. सोमवार को गोर के शपथ ग्रहण समारोह में ट्रंप ने संकेत दिया कि भारतीय आयातों पर टैरिफ में कटौती आगामी व्यापार सफलता का हिस्सा हो सकती है. ट्रंप ने कहा कि हम ऐसी चीज के बहुत करीब हैं जो वास्तविक अंतर ला सकती है.   

ट्रंप का बड़ा बयान: भारत-अमेरिका के बीच खत्म होगी ‘टैरिफ जंग’, नई ट्रेड डील पर बनी सहमति

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका में जारी तनाव जल्द खत्म होने के आसार हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत के साथ ट्रेड डील करने वाले हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि अमेरिका टैरिफ घटाकर 16 प्रतिशत करने का फैसला किया था। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। दक्षिण कोरिया पहुंचे ट्रंप ने बुधवार को कहा, '…अगर आप भारत और पाकिस्तान को देखें, तो मैं भारत के साथ ट्रेड डील करने वाला हूं। मेरे मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत प्यार और सम्मान है…। हमारा रिश्ता बहुत मजबूत है।' ट्रंप के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो सकता है। अमेरिका रूसी तेल की खरीद के मुद्दे पर भारत पर निशाना साधता रहा है। बीते हफ्ते खबरें आई थीं कि भारत और अमेरिका के बीच तीन में से दो मुद्दों पर सहमति बन गई है। वहीं, खबरें ये भी थीं कि भारत ने अमेरिका को भारतीय कृषि बाजार में एंट्री की अनुमति नहीं दी थी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर थम गया था। कहा जा रहा था कि रूसी तेल की खरीद में कमी पर भारत की सहमति के बाद अमेरिका ने टैरिफ 16 प्रतिशत पर करने के लिए तैयार हुआ था। खास बात है कि ये अटकलें पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद लगाई जा रही थीं। पूरी तरह से कटौती का दावा ट्रंप ने शनिवार को एक बार फिर दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से' कटौती कर रहा है, जबकि चीन 'काफी हद तक' कटौती करेगा। शनिवार को मलेशिया जाते समय विशेष विमान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से कटौती' कर रहा है। ट्रंप और उनकी टीम लगातार आरोप लगाती रही है कि भारत रूसी तेल की खरीद से मुनाफाखोरी कर रहा है। साथ ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तेल की खरीद के जरिए वित्तीय सहयोग कर रहा है। अमेरिका ने भारत पर शुरुआत में 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाया था। इसके बाद भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया।  

‘नमस्ते नहीं, नापसंद’: भारत ने ठुकराया F-35 ऑफर, कहा– भरोसा है अपने साथी पर

भारत की दमदार चाल से बौखलाए अमेरिका, ट्रंप बोले– ये पुष्पा स्टाइल नहीं चलेगी! ‘नमस्ते नहीं, नापसंद’: भारत ने ठुकराया F-35 ऑफर, कहा– भरोसा है अपने साथी पर नई दिल्ली अमेरिका की सत्ता में जब डोनाल्ड ट्रंप ने वापसी की तो उन्होंने पूरी दुनिया को टैरिफ की धमकी दी थी. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में उनसे मुलाकात की थी. साथ ही भारत शुरू से ट्रेड डील पर बात कर रहा था. लेकिन अब अमेरिका ने यह जगजाहिर कर दिया है कि रूस और भारत की दोस्ती से वह नाराज रहा है. इसके अलावा भारत ट्रेड डील से जुड़ी बातचीत में अमेरिका के सामने झुका नहीं जो ट्रंप प्रशासन के कुंठा का बड़ा कारण बना. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने न्यूयॉर्क में CNBC को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘भारत को लेकर ट्रंप और पूरी ट्रेड टीम बहुत हताश हो गई है. बातचीत की शुरुआत भारत ने की थी लेकिन फिर चीजें खींचती चली गईं.’ वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद से यूक्रेन में मास्को के युद्ध प्रयासों को बनाए रखने में मदद मिल रही है और यह निश्चित रूप से वाशिंगटन के साथ नई दिल्ली के संबंधों में ‘चिढ़ का विषय’ है. यह दोनों बयान तब आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अचानक ऐलान कर दिया कि 1 अगस्त से भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. किस बात पर तैयार नहीं भारत रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ट्रेड डील के लिए तैयार है. लेकिन उसने एक रेड लाइन खींच दी है, जिसे वह अमेरिका को पार करने नहीं देगा. यह रेडलाइन देश के किसानों को बचाने के लिएबनाई गई है. दरअसल भारत मक्का, सोयाबीन, डेयरी और बादाम के आयात को छूट देने के लिए तैयार नहीं है, जो व्यापार वार्ता में एक प्रमुख अड़चन साबित हुआ. भारतीय वार्ताकारों ने भारतीय बाजारों में बेरोकटोक पहुँच की अनुमति देने की अमेरिकी मांगों पर स्पष्ट रूप से लाइन तैयार कर दी है. किसान संघों ने भी अमेरिका के साथ ऐसे किसी भी समझौते को लेकर सरकार को बार-बार चेतावनी दी थी, जिससे आयात की अनुमति मिलती हो. भारत पर अमेरिका ने लगाया टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया मोड़ आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अचानक ऐलान कर दिया कि 1 अगस्त से भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल और सैन्य उपकरण खरीदने पर भी एक अलग ‘पेनल्टी’ लगाने की बात कही गई है. इस फैसले के ठीक एक दिन बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने न्यूयॉर्क में CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘भारत को लेकर ट्रंप और पूरी ट्रेड टीम बहुत हताश हो गई है.’ स्कॉट बेसेन्ट ने सीधे तौर पर भारत की रूस से तेल खरीद को अमेरिका के लिए बड़ी चिंता बताया. उन्होंने कहा, ‘भारत बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित रूसी तेल खरीद रहा है और फिर उसे रिफाइन कर बेचता है. ऐसे में वह एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी नहीं माना जा सकता.’ अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्या कहा? विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, ‘भारत हमारा रणनीतिक साझेदार है, लेकिन हर मसले पर 100% सहमति होना संभव नहीं.’ उन्होंने माना कि भारत की ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं और रूस से तेल खरीदना उसकी आर्थिक मजबूरी भी है क्योंकि वहां से तेल सस्ता मिल रहा है. उन्होंने आगे कहा, ‘ निराशाजनक है कि जब दुनिया में तेल के इतने विकल्प हैं, तब भी भारत रूस से इतनी बड़ी मात्रा में खरीदारी करता है. इससे रूस को युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है.’. ‘नमस्ते नहीं, नापसंद’: भारत ने ठुकराया F-35 ऑफर, कहा– भरोसा है अपने साथी पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 25 फीसद टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. भारतीय उत्‍पादों के लिए अमेरिका बहुत बड़ा बाजार है, ऐसे में ट्रंप की घोषणा का कारोबार पर असर पड़ने की पूरी संभावना है. हालांकि, अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने इस मसले पर बातचीत की मंशा भी जाहिर की है. इन सबके बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट को खरीदने से इनकार कर दिया है. नई दिल्‍ली ने अपना पक्ष स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि वह ज्‍वाइंट वेंचर के तौर पर 5th जेनरेशन का लड़ाकू विमान डेवपल करना चाहता है. बता दें कि भारत के ऑल वेदर फ्रेंड रूस ने भी पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट मुहैय कराने का ऑफर दिया है. कुछ रिपोर्ट की मानें तो रूस ने टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्‍त रूप से पांचवीं पीढ़ी का विमान डेवलप करने का प्रस्‍ताव दिया है. F-35 फाइटर जेट पर भारत के रुख के बाद ऐसा माना जा रहा है कि रूस का Su-57 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट डील में फ्रंट रनर हो सकता है. ‘ब्‍लूमबर्ग’ की र‍िपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिकी F-35 फाइटर जेट खरीदने को लेकर इच्‍छुक नहीं है. रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस बाबत भारत ने अमेरिका को सूचित कर दिया है कि वह F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने का इच्छुक नहीं है. फ़रवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत को ये महंगे लड़ाकू विमान बेचने की पेशकश की थी. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि मोदी सरकार घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के संयुक्त डिज़ाइन और निर्माण पर केंद्रित साझेदारी में ज़्यादा रुचि रखती है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि भारत ज्‍वाइंट और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर के आधार पर डिफेंस डील करना चाहता है. बता दें कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एफ-35 लड़ाकू विमान तकनीकी दिक्‍कतों के चलते केरल में तकरीबन 37 दिनों तक अटका रहा. इसके अलावा कैलिफोर्निया में एफ-35 जेट क्रैश भी हुआ है. इन दोनों घटनाओं से F-35 की एफिशिएंसी पर गंभीर सवाल उठे हैं. ट्रंप के टैरिफ वॉर से निपटने का तरीका रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका से आयात बढ़ाकर हालात को संतुलित करने की कोशिश कर सकता है. इसमें खास तौर पर प्राकृतिक गैस, कम्‍यूनिकेशन … Read more