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चीनी के दाम में 10% तक गिरावट, त्योहार से पहले सरकार ने स्टॉक लिमिट भी बढ़ाई

इंदौर   अब त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है. दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ सामने है. ऐसे में चीनी की बढ़ी कीमत ने मन खट्टा कर रखा है. चीनी की कीमत सांतवें आसमान पर है. आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ गया है. ऐसे में सरकार लगातार चीनी की मिठास लौटाने के लिए कदम उठा रही है. जी हां, त्योहारी सीजन से पहले चीनी को लेकर राहत की खबर है. पिछले तीन हफ्तों में चीनी के खुदरा दाम करीब 10% घटकर 65 रुपये से 58.5 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने भी बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है. इससे त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।  टीओआई की खबर के मुताबिक, त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने शुक्रवार को थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा में ढील दी. अब वे मौजूदा 15 दिनों के बजाय 30 दिनों तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं. इसकी वजह है कि पिछले तीन हफ्तों में खुदरा कीमतों में लगभग 10% की कमी आई है।  क्यों अहम है यह कदम सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीनी की खुदरा कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 58.5 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई . हालांकि, त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद है. कारण कि दुर्गा पूजा से लेकर दिवाली और छठ में मिठाई और पकवानों खूब बनते हैं. इसमें चीनी का यूज होता है. ऐसे में यह तय है कि चीनी की डिमांड बढ़ेगी।  अब आपको भी कम कीमत में मिलेगी चीनी हालांकि, खाद्य विभाग ने इंडस्ट्री को बताया है कि खुदरा कीमतों में गिरावट चीनी की मिल से निकलने के बाद वाली कीमतों में हुई बड़ी कमी के मुकाबले कम है. विभाग के मुताबिक, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत करीब 25% घट चुकी है, लेकिन सप्लाई चेन के जरिए इसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है. विभाग ने थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों से तुरंत कीमतों में हुई कमी का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने को कहा है।  एक शर्त के साथ मिली छूट थोक उपभोक्ताओं में बड़ी कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां, बिस्किट निर्माता, सॉफ्ट ड्रिंक और बेवरेज कंपनियां, मिठाई विक्रेता और हलवाई शामिल हैं. अभी कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति है. विभाग ने कहा कि अब इस सीमा को बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है, लेकिन एक शर्त के साथ. पुरानी 15 दिनों की सीमा से अधिक जो भी स्टॉक रखा जाएगा, उसे टैरिफ रेट कोटा या एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत आयात की गई चीनी से ही लेना होगा।  सरकार ने क्या आदेश दिया केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है. इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत खरीदी गई निर्यात के लिए तय चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की भी अनुमति दी गई है. वहीं, घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी का स्टॉक अभी भी 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगा. सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे हर शुक्रवार को खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी दें। 

iPhone 18 का क्रेज या फीका रिस्पॉन्स? गाजियाबाद Apple Store में सुबह से खाली रहा स्टोर

गाजियाबाद  दिल्ली और नोएडा में iPhone 18 के लिए रात के 12 बजे से ऐसी भीड़ उमड़ी कि एप्पल स्टोर के बाहर पैर रखने तक की जगह नहीं बची. कोई रातभर लाइन में खड़ा रहा तो कोई सुबह होते ही अपना नंबर आने का इंतजार करता दिखा, लेकिन गाजियाबाद में कहानी बिल्कुल उलट नजर आई. यहां एप्पल स्टोर के बाहर न लंबी कतार दिखी, न भीड़ का शोर… बस कुछ ग्राहक और खाली पड़ा स्टोर. खास बात ये है कि जिस फोन को खरीदने के लिए लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं, उसकी कीमत 1.5 लाख से भी ज्यादा पहुंच रही है. आखिर इस महंगे iPhone के लिए गाजियाबाद में दीवानगी क्यों नहीं दिखी, आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में।  मॉडल टाउन स्थित iNext स्टोर के मैनेजर जगदीप सिंह ने बताया कि स्टोर सुबह सात बजे खोला गया था. उस समय करीब 10-15 ग्राहक बाहर मौजूद थे. लॉन्चिंग का समय सुबह आठ बजे रखा गया था, जिसके बाद ग्राहक स्टोर में पहुंचे. सुबह करीब पांच-छह ग्राहकों को उनके पहले से प्री डिलीवरी फोन की डिलीवरी दी गई. इसके बाद भी ग्राहक लगातार जानकारी लेने के लिए स्टोर पहुंचते रहे. इस बार iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए गए हैं. नए मॉडल में लेटेस्ट चिपसेट के साथ कई नए फीचर्स दिए गए हैं. उन्होंने नए कलर को भी ग्राहकों के आकर्षण की बड़ी वजह बताया. खासकर Burgundy जैसे नए रंग को लेकर ग्राहकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. iPhone को लेकर ग्राहकों के बीच पहले से ही काफी क्रेज है।  गाजियाबाद में सुबह के वक्‍त कोई भीड़ नहीं दरअसल, दिल्ली और नोएडा में रात से लगी कतारों के मुकाबले गाजियाबाद में सुबह भीड़ कम रही है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. iPhone अब कई ग्राहकों के लिए सिर्फ मोबाइल नहीं बल्कि एक खास शौक और स्टेटस से जुड़ा उत्पाद भी बन चुका है।  एप्पल स्टोर पहुंचे एक ग्राहक हर्ष का कहना है कि आई फोन इस्तेमाल करना बेहद स्मूथ और आसान है. आई फोन चलाते समय कभी हैंग जैसी परेशानी महसूस नहीं हुई. कीमत को लेकर हर्ष मानते हैं कि iPhone महंगा है, लेकिन फीचर्स और इस्तेमाल के अनुभव को देखते हुए उन्हें यह कीमत वाजिब लगती है. उनका कहना है कि फोन में इतने फीचर्स हैं कि कई लोग सभी फीचर्स का इस्तेमाल भी नहीं कर पाते फिर भी यह उन्हें पूरी तरह वर्थ इट लगता है. Android से iPhone पर आने के सवाल पर हर्ष ने AppleCare+ का जिक्र किया. करीब 20 हजार रुपये एक्‍स्‍ट्रा देकर दो साल की कवरेज ली जा सकती है. चोरी को छोड़कर फोन के नुकसान की स्थिति में कवरेज मिलती है. हर्ष ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि उनका पुराना फोन गिरकर खराब हो गया था, लेकिन AppleCare+ होने के कारण करीब डेढ़ साल बाद उन्हें कंपनी से नया सीलबंद फोन मिला।  विदेश यात्रा या महंगी बाइक छोड़ पहले iPhone 18 को चुनेंगे iPhone 18 में नया क्या है? इस सवाल पर हर्ष ने कहा कि अभी वह फोन के फीचर्स देख रहे हैं और खरीदने के बाद ही पता चलेगा कि उनके लिए क्या नया और उपयोगी है. डेढ़ लाख रुपये खर्च करने के बजाय विदेश यात्रा या महंगी बाइक में से क्या चुनेंगे तो हर्ष ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह पहले iPhone खरीदेंगे. उनका कहना है कि फोन दिनभर उनके साथ रहता है और एक-दो साल तक इस्तेमाल भी किया जाएगा. हालांकि बाइक के शौक को लेकर उन्होंने हंसते हुए कहा कि बाइक भी जरूरी है, लेकिन फिलहाल फोन पहले।  एप्पल स्टोर पहुंची ग्राहक पलक लंबे समय से नए iPhone का इंतजार कर रही थीं. उन्होंने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा आकर्षण फोन के नए Burgundy और Glacier रंगों को लेकर है. डिजाइन काफी स्लीक है और कैमरा क्वालिटी भी शानदार है. नए फीचर्स के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि फोन की हर डिटेल उन्हें पसंद आई है. महंगी कीमत के सवाल पर पलक ने बताया कि उन्होंने फोन खरीदने के लिए पहले से बजट तैयार कर रखा था. उनका मानना है कि Apple हर बार कुछ नया देता है और फोन में प्रोफेशनल कैमरे जैसा अनुभव मिलता है. वहीं विदेश यात्रा या महंगी गाड़ी के बजाय iPhone चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फोन उनके लिए ज्यादा जरूरी है और यह एक-दो साल आराम से चलेगा। 

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, ₹1.50 लाख के करीब पहुंचा सोना; जानें नए रेट

इंदौर  आज सोने-चांदी के दाम में गिरावट आई है. सोने का भाव 1 फीसदी यानी 1545 रुपये फिसलकर सुबह 9 बजे MCX पर 150925 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी भी 2386 रुपये गिरकर 232400 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है. कॉमेक्स पर भी सोने-चांदी का दाम फिसल गया है. गोल्ड इंटरनेशनल मार्केट में 1.24 फीसदी फिसलकर 4332 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है और चांदी 1.19 फिसदी गिरकर 64.145 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।  बुधवार को भी सोने की कीमतों में 1% से ज्यादा की गिरावट आई थी. इस गिरावट के पीछे यूएस से आया एक बड़ा फैसला है. असल में, यूएस फेड ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की है और आगे भी कर्ज महंगा होने के संकेत दिए है. इसी के चलते आज दोनों मेटल्स में गिरावट देखी जा रही है और इसके बाद डॉलर मजबूत हुआ, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा है।  आज कितना है सोने का दाम? दिल्ली के सराफा बाजार में 24 कैरेट सोना करीब 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम बिक रहा है. 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,810 रुपये है. जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में भी सोने की कीमतें लगभग इसी दाम पर हैं. वहीं, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 1,53,450 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,40,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है. अहमदाबाद और भोपाल में 24 कैरेट का भाव करीब 1,53,500 रुपये, जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,710 रुपये प्रति 10 ग्राम है।  इसके अलावा स्थानीय टैक्स, ज्वेलरी बनाने का चार्ज और दुकान के रेट के कारण आपको कीमत अलग मिल सकती है. इसके अलावा खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा रेट और मेकिंग चार्ज जरूर देख लें।  चांदी का लेटेस्ट रेट आज दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्नई में चांदी का भाव एक जैसा है. इन सभी शहरों में 100 ग्राम चांदी की कीमत 23,168 रुपये है, जबकि 1 किलो चांदी 2,31,680 रुपये में मिल रही है।  क्या फिर हो सकता है ब्याज दरों में बदलाव? अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक अक्टूबर के आखिर में होगी. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर इकोनॉमिस्ट का मानना है कि इस बैठक में ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसके ठीक एक हफ्ते बाद अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि फेड अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। 

टाटा संस में बड़ा फैसला, चंद्रशेखरन का कार्यकाल 5 साल बढ़ा; IPO की तैयारी तेज

मुंबई  टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए। क्यों लिस्टिंग की संभावना ? टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है। अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा। जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है। शेयरधारकों में दो फाड़ टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है। टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।

IndiGo यात्रियों को झटका, बच्चों के साथ यात्रा पर बढ़ा किराया; जानें नया चार्ज

मुंबई  इंडिगो से हवाई सफर करने वालों के लिए काम की खबर है. एयरलाइन ने कई सेवाओं के चार्ज बढ़ा दिए हैं. घरेलू उड़ानों में 2 साल से कम उम्र के बच्चों का किराया अब 2,000 से बढ़कर 3,000 हो गया है. यानी बच्चे के साथ सफर करने वाले माता-पिता को हर ट्रिप पर 1,000 ज्यादा देने होंगे।  छोटे बच्चे के लिए विमान में अलग सीट नहीं मिलती है, लेकिन टिकट बुक करते समय उसकी जानकारी देना जरूरी होता है. देश में हर साल करीब 10 लाख नवजात बच्चे माता-पिता के साथ हवाई सफर करते हैं. ऐसे में किराया बढ़ने से इंडिगो की कमाई में करीब 90 करोड़ का इजाफा होने का अनुमान है।  सिर्फ नवजात बच्चों का किराया ही नहीं बढ़ा है. एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान ले जाने का चार्ज भी ₹700 से बढ़ाकर ₹800 प्रति किलो कर दिया गया है। वहीं, अकेले सफर करने वाले बच्चों की फीस ₹5,000 से बढ़कर ₹5,999 हो गई है. इंडिगो ने प्रायोरिटी चेक-इन और बोर्डिंग का चार्ज भी बढ़ाया है। अब इसके लिए यात्रियों को ₹450 की जगह ₹650 देने होंगे. ट्रैवल सर्टिफिकेट के लिए भी अब ₹200 की जगह ₹300 चुकाने होंगे।  यानी इंडिगो से सफर करने वालों के लिए टिकट के अलावा कुछ दूसरी सेवाएं भी अब महंगी हो गई हैं. खासकर नवजात बच्चे के साथ सफर करने वाले परिवारों, ज्यादा सामान ले जाने वालों और अकेले यात्रा करने वाले बच्चों के लिए खर्च पहले से बढ़ गया है।   

₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? जानें PhonePe, Paytm का नया नियम

  नई दिल्ली भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट्स् पर चार्ज लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो आने वाले 15 अक्टूबर से लागू होगा. UPI का भारत में बड़ा यूजरबेस है. बहुत से लोग मोबाइल में UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके नाम PhonePe, PayTM, GPay और कई मोबाइल ऐप्स भी UPI की सर्विस देते हैं।  अब UPI ऐप्स चलाने वाले यूजर्स के बीच में कंफ्यूजन है कि किन-किन UPI मोबाइल ऐप्स पर MDR चार्ज कटेगा? सबसे पहले बता देते हैं कि 2,000 रुपये से ऊपर की कीमत के ट्रांजैक्शन पर करने पर 0.40 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि यह चार्ज कस्टमर को नहीं देना होगा बल्कि यह चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लगेगा।  चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) सरकार की तरफ से जारी जानकारी में साफ बताया है कि चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) है. अगर कस्टमर 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट करता है तो उसे कोई चार्ज नहीं देना होगा. यह चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट पर ही लागू होगा।  MDR कैलकुलेशन कैसे होगा?  MDR की कैलकुलेशन को लेकर साफ जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से जारी सवालों के जवाब में बताया है कि ₹3,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR लागू होने पर शुल्क ₹12 होगा. यह रकम व्यापारी अपने Acquiring Bank को देगा. वहीं, ₹50,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR के हिसाब से शुल्क ₹200 होगा।  1 लाख रुपये की शॉपिंग पर 0.4 परसेंट के हिसाब से MDR 400 रुपये बनता है, लेकिन यहां 300 रुपये की सीमा तय की है।  दरअसल, NPCI ने चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन के लिए Merchant Discount Rate यानी MDR का नया सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है. नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI पेमेंट पर अधिकतम 0.4% तक MDR लगाया जा सकेगा. हालांकि, सभी ट्रांजैक्शन पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी. कुछ कैटेगरी के लिए कम दर रखी जाएगी और छोटे कारोबारियों को छूट भी मिलेगी. आम UPI यूजर्स के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य ही रहेगा।  शेयर्स में जोरदार तेजी पेटीएम के शेयर्स में आज 4 फीसदी की तेजी आई है. कंपनी के शेयर्स ने पिछले 3 महीनों में 56 फीसदी का रिटर्न और 1 साल में 40 फीसदी का मुनाफा दिया है. One MobiKwik Systems का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा उछला है.  हालांकि, कंपनी ने शेयर्स ने 1 साल में 36 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है. इसके अलावा यस बैंक के शेयर्स में भी 2 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. बैंक ने 1 साल में 9 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है।  UPI इंडस्ट्री का बढ़ेगा रेवेन्यू मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, नए MDR सिस्टम से UPI इंडस्ट्री के लिए करीब ₹20,600 करोड़ का सालाना रेवेन्यू पूल बन सकता है. यह अनुमान इस आधार पर है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 0.4% की पूरी MDR दर के दायरे में आ सकता है. वहीं, JPMorgan ने अधिकतम संभावित रेवेन्यू करीब ₹17,000 करोड़ आंका है. इसमें से लगभग ₹11,700 करोड़ बैंकों को मिल सकते हैं।  Citi का अनुमान है कि UPI इकोसिस्टम में हर साल करीब ₹16,000-17,000 करोड़ की कमाई हो सकती है. उसके मुताबिक, इस रकम का लगभग 60% हिस्सा बैंकों, 25% UPI ऐप प्रोवाइडर्स और 15% गैर-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है. Citi ने YES Bank को प्रॉफिट पाने वाली कंपनियों में बताया है, क्योंकि बैंक का UPI से जुड़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम काफी बड़ा है।  कंपनियों को मिलेगा फायदा PhonePe के फाउंडर और CEO Sameer Nigam ने इस फैसले को UPI सिस्टम की लंबे समय की स्थिरता के लिए अहम बताया है. उनके मुताबिक देश में रोज करीब 70-80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और इनमें लगभग 96% पेमेंट ₹2,000 से कम के हैं. उनका कहना है कि बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला MDR भुगतान कंपनियों को अपने ऑपरेशनल खर्च की भरपाई करने में मदद कर सकता है. पिछले कई सालों से UPI पर MDR नहीं होने के कारण पेमेंट इंडस्ट्री को लगातार लागत उठानी पड़ रही थी।  मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि Paytm ने जानकारी दी है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट पर 0.4% तक MDR लागू होने से कंपनी को मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त कमाई हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, जिन बड़े पेमेंट पर पहले कोई चार्ज नहीं लगता था, अब उनमें MDR से पेमेंट कंपनियों के लिए नए रेवेन्यू का रास्ता खुलेगा।                                  MDR चार्ज कैलकुलेटर व्यापारी को भुगतान की राशि    लागू MDR  व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला MDR ₹2,000    0%    ₹0 ₹3,000    0.40% ₹12 ₹50,000    0.40%  ₹200 ₹ 75,000 रुपये या उससे ज्यादा फिक्स ₹ 300 ₹ 300 कस्टमर पर नहीं लगेगा कोई भी चार्ज  मोबाइल में मौजूद UPI ऐप्स जैसे PhonePe, PayTM, Gpay आदि की मदद से अगर कोई पेमेंट करते हैं, तो कस्टमर के अकाउंट से कोई चार्ज पेमेंट नहीं होगी.  MDR चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट से ली जाएगी. यह रकम मर्चेंट के बैंक अकाउंट से काटी जाएगी.     

सोना खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, हॉलमार्किंग चार्ज ₹45 से बढ़कर ₹75 हुआ

मुंबई  त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी। नए सिस्टम के तहत अब गोल्ड ज्वेलरी के हर आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चुकाने होंगे। सोने के भाव पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं और अब हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए ज्वेलर्स अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं। कब से लागू हुई नई हॉलमार्किंग फीस? BIS ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) रेगुलेशन, 2026 में रिवीजन किया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया गया और नई फीस आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गई है। नए नियमों के मुताबिक ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) पर गोल्ड के हर एक आर्टिकल के लिए 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम चार्ज 200 रुपये होगा। वहीं, चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये तय की गई है। सिल्वर आर्टिकल के एक कंसाइनमेंट पर कम से कम 150 रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अलावा भी लगेगा चार्ज नोटिफिकेशन के मुताबिक हॉलमार्किंग सेंट की ओर से बीआईएस के लिए भी एक शुल्क लिया जाएगा। गोल्ड आर्टिकल पर यह 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 20 रुपये देने होंगे। सिल्वर के मामले में यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट होगा। लागू टैक्स इसके एक्स्ट्रा होंगे। ज्वेलरी पर कितना लगता है GST? कीमती मेटल की ज्वेलरी पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। राज्य के अंदर सेल होने पर इसमें 1.5 फीसदी CGST और 1.5 फीसदी SGST शामिल है, जबकि इंटर-स्टेट खरीद पर 3 फीसदी IGST लगता है। गोल्ड की प्योरिटी अलग होने पर भी जीएसटी की यह दर नहीं बदलती। सितंबर से ज्वेलरी मार्केट में फेस्टिव डिमांड की तैयारियां तेज होने लगती हैं। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और फिर वेडिंग सीजन आता है। ऐसे में हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ज्वेलर्स की लागत में एक और फैक्टर जोड़ सकता है। ये ऐसे समय में किया गया है जब देश में पहले ही 10 ग्राम सोने का भाव 1,51,894 रुपये है। हल्की ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ेगा असर फीस बढ़ने का असर खासतौर पर हल्की और कम कीमत वाली ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि हॉलमार्किंग शुल्क वजन के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लगाया जाता है। यानी 1 ग्राम की ज्वेलरी और ज्यादा वजन वाले आर्टिकल पर भी 75 रुपये का समान शुल्क लगेगा। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी का कहना है कि सोने की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में प्रति आर्टिकल तय शुल्क बढ़ने से छोटे और मास-मार्केट ग्राहकों के लिए लागत का असर ज्यादा हो सकता है। ज्वैलर्स एसोसिएशन कर रही हैं विरोध ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए या समीक्षा करनी चाहिए। GJC का कहना है कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य है, तो इसकी लागत बढ़ाने के बजाय सिस्टम में मौजूद फर्जी हॉलमार्किंग और दूसरी गड़बड़ियों पर पहले सख्ती होनी चाहिए। जीजेसी ने कहा कि वह हॉलमार्किंग के खिलाफ नहीं है। संगठन इसे सोने की शुद्धता, पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे के लिए जरूरी मानता है। लेकिन करीब 67 फीसदी की सीधे बढ़ोतरी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं। 60 करोड़ से ज्यादा ज्वेलरी हो चुकी हॉलमार्क जीजेसी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से ज्यादा सोने के आर्टिकल HUID के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं। वहीं, मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था। हॉलमार्किंग फीस में कितना बदलाव हुआ? आभूषण    पुरानी फीस    नई फीस सोना    ₹45 प्रति आर्टिकल    ₹75 प्रति आर्टिकल चांदी    ₹35 प्रति आर्टिकल    ₹35 प्रति आर्टिकल BIS के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल होता है, न कि आभूषण के वजन के हिसाब से।  ग्राहक के लिए हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है? हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता को लेकर ग्राहक को भरोसा देना है. BIS के अनुसार हॉलमार्क यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ग्राहक को बताई गई शुद्धता के अनुरूप सोना मिले. सोने का गहना खरीदते समय ग्राहक BIS मार्क, शुद्धता और HUID जरूर जांच सकता है. BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी भी सत्यापित की जा सकती है।  हाल में BIS ने चेन्नई में बिना हॉलमार्क के बिक्री के लिए रखे गए करीब 804 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए थे. इससे त्योहारों के सीजन में गहने खरीदते समय हॉलमार्क और बिल की जांच करने की अहमियत भी बढ़ जाती है।  सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान ग्राहक गहना खरीदने से पहले उसका वजन, शुद्धता, HUID और BIS हॉलमार्क जरूर जांचें. साथ ही ज्वेलर से पूरा और वैध बिल लें।  ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की? GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक जब हॉलमार्किंग का कारोबार और वॉल्यूम लगातार बढ़ा है, तो इससे AHCs को बड़े स्तर पर काम करने का फायदा और लागत में कमी लानी चाहिए थी। ऐसे में फीस बढ़ाने से पहले इसकी वास्तविक लागत को ट्रांसपेरेंट बनाने की जरूरी है। राजेश रोकड़े ने कहा कि इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन लागत में करीब 67 फीसदी बढ़ोतरी करने से पहले समीक्षा होनी चाहिए। जीजेसी ने हॉलमार्किंग सिस्टम में मौजूद कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक बीआईएस की कार्रवाई में फर्जी हॉलमार्किंग, बिना अनुमति चल रहे सेंटर और वैध HUID के बिना ज्वेलरी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। GJC का कहना है कि ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।

क्रैश के बाद बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी ने तूफानी तेजी से किया आगाज

मुंबई  शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ा क्रैश देखने को मिला था, लेकिन बुधवार को कारोबार ओपन होते ही सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गदर मचाए हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही अपने पिछले बंद के मुकाबले 500 अंक से ज्यादा चढ़ गया, तो वहीं इसके कदम से कदम मिलाकर चलते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी छलांग लगाकर 23,200 के पार निकल गया. इस तेजी के बीच ITC, HCL, BEL समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला।  सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार शुरुआत बुधवार को शेयर मार्केट में कारोबार ओपन होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,003 की तुलना में उछलकर 74,249 पर खुला और फिर इसके अपनी रफ्तार तेज करते हुए 500 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 75,505 का लेवल छू लिया. बात निफ्टी की करें, तो एनएसई का ये इंडेक्स भी अपने पिछले बंद 23,118 की तुलना में बढ़त के साथ 23,201 पर ओपन हुआ और फिर एक झटके में 23,281 पर जा पहुंचा।  कल क्रैश हो गया था शेयर बाजार पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को तगड़ा नुकसान कराया था और बीते कारोबारी दिन मंगलवार को तो शेयर मार्केट में भूचाल आ गया था. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स ने शुरुआत तो जोरदार की थी, लेकिन फिर कुछ देर के कारोबार के बाद देखते ही देखते ये बिखर गए थे. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर बीएसई का Sensex 777 अंकों की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ था, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट थी. वहीं NSE Nifty 279 अंक की गिरावट लेकर 23,118 पर बंद हुआ था और ये इंडेक्स अपने दिन के हाई से 474 अंक फिसला था।  सबसे तेज ये 10 शेयर  सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में आई इस तूफानी तेजी के बीच सबसे ज्यादा रफ्तार से भागते हुए शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल M&M Share, ITC Share, Reliance Share, HUL Share करीब 2 फीसदी के आसपास बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए. वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों की लिस्ट में Yes Bank Share (3.20%), Colpal Share (1.50%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में Appolo Tyre Share, MSUMI, HSCL Share ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए। 

‘सबसे बड़ा क्रैश शुरू हो चुका है’, Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की चेतावनी

  नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव और हमलों का सिलसिला जारी है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है. ग्लोबल टेंशन का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. इस बीच मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' (Rich Dad Poor Dad) के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर इतिहास के सबसे बड़े क्रैश को लेकर चेतावनी (Biggest Crash In History Warning) दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपने नए पोस्ट के जरिए ये वॉर्निंग दी है, जो तेजी से वायरल (Social Media Viral Post) हो रहा है।  'सबसे बड़े क्रैश की शुरुआत…' रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी वायरल एक्स पोस्ट में कहा कि इतिहास की सबसे बड़ा क्रैश शुरू हो चुका है. लेखक के मुताबिक, उन्होंने पहले ही इसकी भविष्यवाणी कर दी है. उन्होंने लिखा,'2002 में मैंने 'रिच डैड्स प्रोफेसी' (Rich Dad's Prophecy) किताब जारी की थी, जो लोगों को इतिहास की सबसे बड़ी स्टॉक और बॉन्ड मार्केट गिरावट से फायदा उठाने और उसका शिकार न बनने के लिए तैयार करने के मकसद से लिखी गई थी, एक ऐसी गिरावट जो आने वाली थी.' कियोसाकी ने आगे लिखा कि 2026 में वह गिरावट यूरोप और जापान में शुरू हुई, लेकिन अब ये क्रैश पूरी दुनिया में फैल रहा है।  क्रैश के पीछे आखिर वजह क्या?  इतिहास के सबसे बड़े क्रैश की अपनी वॉर्निंग को दोहराते हुए रॉबर्ट कियोसाकी ने इसे पीछे के बड़े कारणों के बारे में भी बताया है. उनके मुताबिक, AI का क्रेज़, ईरान में युद्ध, बहुत ज्यादा कर्ज, और रिटायर हो रही 'बेबी बूम' पीढ़ी इसकी वजह है. उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा कि अगर आपके पास 401k, IRA, सुपरएनुएशन या RRSP (एक तरह की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम) है, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं, खासकर अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा हो चुकी है।  अभी भी समय है संभल जाएं रिच डैड पुअर डैड के लेखक के मुताबिक, पिछली मंदी 1929 से 1954 तक यानी 25 साल तक चली थी. लेकिन इस क्रैश के दौरान भी जो लोग तैयार थे (उदाहरण के लिए कैनेडी परिवार), उनके लिए 'ग्रेट डिप्रेशन' (महामंदी) जीवन का सबसे खुशहाल समय साबित हुआ था. Robert Kiyosaki ने कहा कि आप इतिहास के इस सबसे बड़े क्रैश का शिकार न बनें, अभी भी थोड़ा समय है, इससे पहले कि आम लोग जागें और घबराहट में बैंकों से पैसे निकालने की होड़ शुरू कर दें।  मैं तो ये कर रहा… आप क्या?  सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहने वाले रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि, 'सालों से मैं लोगों को ये बताता आ रहा हूं कि मैं तैयारी के लिए क्या कर रहा हूं. अपना बिजनेस, कमाई देने वाली रियल एस्टेट, तेल के कुओं में निवेश और कैश के बजाय सोना-चांदी (Gold-Silver) और बिटकॉइन जमा करना, क्योंकि मुझे पता था कि नकली पैसे छापने का काम शुरू होगा।  कियोसाकी ने बताया कि मैंने पहले भी मिकी मैनी की लिखी 'द एंट्रोपी ट्रैप' (The Entropy Trap) किताब की सलाह दी है, जो इसी साल 2026 में छपी है और हो सकता है कि यह इस साल आपके पढ़ने के लिए सबसे जरूरी किताब हो. कृपया इसे पढ़ें, यह आज आपका सबसे अच्छा निवेश साबित हो सकता है. अपना ख्याल रखें। 

नई Tata Nexon जल्द होगी लॉन्च? टेस्टिंग के दौरान दिखी SUV, डिजाइन से फीचर्स तक होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली टाटा मोटर्स की नेक्सॉन (Tata Nexon) को लोग काफी पसंद करते हैं. इस कार के नए वर्जन पर कंपनी काम कर रही है. पिछले कुछ दिनों में कार के अपडेटेड अवतार को कई बार टेस्ट करते हुए देखा गया है. टेस्टिंग के वक्त कार कैमोफ्लॉज से ढकी हुई थी. पहले भी कार की कुछ तस्वीरे सामने आई थीं, जिसमें इसके लुक की काफी जानकारी मिली थी।  लेटेस्ट स्पाई शॉट्स में कार के एक्सटीरियर प्रोफाइल का क्लियर व्यू नजर आता है. खासकर रियर सेक्शन जिसे रिडिजाइन किया गया है. टाटा ने नेक्सॉन को 2017 में लॉन्च किया था. तब से अब तक कार को मल्टीपल अपडेट्स मिले है, जिसमें बहुत कुछ बदला है।  भले ही कार की स्टाइलिंग और फीचर्स में बीते 9 सालों में कई अपडेट्स हुए हों, लेकिन कार का बेसिक स्ट्रक्चर लगभग वैसा ही रहा है. नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में हमें बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. टाटा कार के बॉडी स्ट्रक्चर और प्रोपोर्शन में कई बदलाव कर सकती है। क्या होगा कार में नया?  भले ही ये कार कैमोफ्लॉग से ढकी हो, लेकिन इसके डिजाइन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. नेक्सॉन में ज्यादा अपराइट और स्कॉयर ऑफ लुक मिलेगा. मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले इसकी रूफलाइन ज्यादा फ्लैट होगी. वहीं रियर सेक्शन एक कूपे जैसे डिजाइन में आ सकता है।  नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में टाटा रियर सीट्स पर हेडरूम को बेहतर कर सकती है. साइड प्रोफाइल से भी ये एसयूवी कूपे जैसी शेप में नजर आती है. इसके अलावा डोर और ग्लासहाउस को भी रिडिजाइन किया जा सकता है. टेलगेट भी मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले ज्यादा ऊंचा लग रहा है. रियर विंड स्क्रीन बड़ी दिख रही है और इसके साथ वाइपर भी है।  टेस्टिंग के दौरान कार पर रूफ स्पॉयलर भी देखा जा सकता है. स्पाई शॉट्स में एक और महत्वपूर्ण चीज नजर आई है और वो है कार में फ्यूल फिलर कैप की लोकेशन. नेक्सॉन में फ्यूर कैप डोर हैंडल के बराबर में आ गया है, जबकि मौजूदा में ये डोर हैंडल से नीचे मिलता है. नई रूफ लाइन, अपराइट रियर प्रोफाइल और ऑल्टर बॉडी प्रोपोर्शन दिखाता है कि टाटा सिर्फ फेसलिफ्ट वाले बदलाव नहीं कर रही है।  इंटीरियर और इंजन  स्पाई शॉट्स में कार के इंटीरियर की झलक भी दिखती है. कार में स्टीयरिंग व्हील, इंफोटेनमेंट सिस्टम और क्लाइमेट कंट्रोल जैसे बहुत से कंपोनेंट मौजूदा नेक्सॉन वाले ही मिल सकते हैं. प्रोडक्शन के नजदीक आने पर इससे जुड़ी दूसरी डिटेल्स भी देखने को मिल सकती हैं।  पावरट्रेन की बात करें, तो इसमें 1.2 लीटर का टर्बो पेट्रोल और 1.5 लीटर का डीजल इंजन ही मिलेगा, जो मौजूदा नेक्सॉन में आता है. सीएनजी भी कार का हिस्सा बन रहेगा. वहीं नेक्सॉन ईवी में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ये कार अगले साल यानी 2027 में लॉन्च होगी।