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अचानक बाजार में बड़ी गिरावट, Sensex 1100 अंक टूटा; निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

मुंबई  बाजार बंद के दौरान,शुक्रवार को अचानक स्‍टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई. सेंसेक्‍स-निफ्टी सभी इंडेक्‍स दबाव में रहे. दोपहर 3 बजे निफ्टी करीब 400 अंक टूटकर 23,500 पर पहुंच गया. वहीं सेंसेक्‍स 1150 अंक टूटकर 74,800 के ऊपर था. सबसे ज्‍यादा दबाव मिडकैप और स्‍मॉलकैप में दिखाई दिया, जहां सबसे ज्‍यादा मुनाफावसूली हुई।  BSE टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 4 शेयर ही मामूली तेजी पर कारोबार कर रहे थे, बाकी सभी 26 शेयर बिखर गए हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट इंडिगो, टाटा स्‍टील और पावरग्रिड जैसे शेयरों में आई है।  हालांकि कारोबार बंद होने तक, निफ्टी 360 अंक या 1.50 फीसदी गिरकर 23,547 पर था और सेंसेक्‍स 1092 अंक या 1.45 फीसदी गिरकर 74775 पर था. बैंक निफ्टी में भी 600 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई।  5.56 लाख करोड़ का नुकसान बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देखें तो बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 470.75 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 5.56 लाख करोड़ रुपये गिरकर 45.19 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों की वैल्‍यूवेशन 5.56 लाख करोड़ कम हुई है।  क्‍यों गिरा शेयर बाजार?  अमेरिका ईरान जंग: अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान गुरुवार को अपने युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक समझौते पर पहुंच गए हैं, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं किया है, और ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।  वीआईएक्‍स में तेजी: इंडिया VIX में तगड़ी बढ़ोतरी हो गई है, जो 6% बढ़कर 15.91 पर पहुंच गया है. यह एक बड़े गिरावट का संकेत देता है।  FII की सेलिंग: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं. सबसे जयादा बिकवाली साल 2026 में देखी जा रही है, जो अभी तक 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की है. बुधवार को 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए थे।  मुनाफावसूली: सबसे बड़ा कारण दो दिनों की छुट्टी के कारण बाजार में अचानक से मुनाफावसूली मानी जा रही है. ग्‍लोबल इम्‍पैक्‍ट के कारण गिरावट के साथ ज्‍यादातर सेक्‍टर में बिकवाली देखने को मिली. ऑटो से लेकर फाइनेंशियल, मेटल, ऑयल एंड गैस सेक्‍टर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट रही. हालांकि, आईटी और कंज्‍यूमर गूड्स ने थोड़ा सपोर्ट देने का प्रयास किया, लेकिन यह बड़ी गिरावट को रोकने में नाकाम रहे।  मानसून देरी से आने का अनुमान  बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह मानी जा रही है, वह मानसून के देरी से आने का अनुमान है. देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी की लहरें जारी रहने के बावजूद, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान को दीर्घकालिक औसत के 92% से घटाकर 90% कर दिया, जो इस बात का संकेत है कि जून से सितंबर के दौरान भारत में सामान्य से कम वर्षा होने का खतरा है।  हैवीवेट शेयरों में बड़ी गिरावट मार्केट में हैबीवेटज रखने वाले स्‍टॉक रिलायंस के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट रही. टीसीएस में भी 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट रही. बजाज फाइनेंस के शेयर 2.45 फीसदी, सन फार्मा के शेयर 2 फीसदी और पावरग्रिड के शेयर 4 फीसदी तक गिरे, जिसने सेंसेक्‍स को बड़ी गिरावट में बड़ा योगदान दिया। 

एयर इंडिया-इंडिगो ने घटाईं उड़ानें, ईंधन संकट और युद्ध का असर; बढ़ सकता है किराया

मुंबई  भारतीय घरेलू विमानन (एविएशन) क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते ईंधन के दाम, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश की बड़ी विमानन कंपनियां भारी दबाव में हैं. इस गंभीर संकट से निपटने और खुद को वित्तीय घाटे से बचाने के लिए एयरलाइंस ने अब विस्तार की जगह 'सर्वाइवल मोड' अपना लिया है. इसके तहत जून 2026 से देश में रोजाना लगभग 250 घरेलू उड़ानों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है।  इस कटौती का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है, जिससे आगामी महीनों में हवाई सफर बेहद महंगा और सीमित हो जाएगा।  किन एयरलाइंस ने कितनी की कटौती? भारत के घरेलू विमानन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली तीन बड़ी कंपनियां—एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस—मिलकर अपनी उड़ानों में भारी कटौती कर रही हैं: एयर इंडिया: कंपनी जून और जुलाई के महीनों में अपने घरेलू परिचालन में करीब 22 प्रतिशत की कटौती करेगी. एयर इंडिया रोजाना लगभग 500 उड़ानों का संचालन करती है, जिसमें से हर दिन करीब 110 उड़ानें रद्द रहेंगी. आंकड़ों के अनुसार, जहां अप्रैल-मई में कंपनी ने 31,184 उड़ानें संचालित की थीं, वहीं जून-जुलाई के लिए केवल 22,868 उड़ानें ही शेड्यूल की गई हैं।  कितनी कटौती करेगी एयरलाइंस इंडिगो: देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो भी अपनी घरेलू क्षमता में 5 से 7 प्रतिशत की कमी कर रही है. इसके तहत कंपनी रोजाना अपनी करीब 110 उड़ानों को रोक देगी।  एयर इंडिया एक्सप्रेस: टाटा समूह की यह सहयोगी एयरलाइन भी अपने घरेलू नेटवर्क से लगभग 10 प्रतिशत उड़ानों को कम करने जा रही है।  टियर-2 और टियर-3 शहरों पर गिरेगी सबसे गाज एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इस कटौती का सबसे पहला और गंभीर असर देश के छोटे और टियर-2 शहरों पर पड़ेगा. एयरलाइंस अब केवल उन्हीं रूटों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है।  विशेषज्ञ अजय जसरा के मुताबिक, नागपुर, इंदौर, रायपुर, रांची, सूरत, वडोदरा, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों की कनेक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी. ये ऐसे रूट हैं जो मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के यात्रियों और बजट ग्राहकों पर निर्भर करते हैं, जहां प्रीमियम या बिजनेस क्लास के यात्री बहुत कम होते हैं।  प्रभावित होने वाले मुख्य रूट: नागपुर-बेंगलुरु, नागपुर-कोलकाता, इंदौर-अहमदाबाद, सूरत-हैदराबाद और विशाखापत्तनम-पुणे जैसे मार्गों पर उड़ानों की संख्या काफी कम कर दी जाएगी।  हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की आशंका उड़ानों की संख्या घटने और सीटों की उपलब्धता कम होने के कारण टिकटों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि:     मेट्रो रूट (बड़े शहर): दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के बीच किराए में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.     टियर-2 रूट (छोटे शहर): सीमित उड़ानों के कारण इन शहरों के किराए 20 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे.     लास्ट-मिनट बुकिंग: यदि कोई यात्री यात्रा से ठीक पहले या वीकेंड पर टिकट बुक करता है, तो उसे 50 से 80 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है. संकट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं? विमानन क्षेत्र के इस अचानक 'सुरक्षात्मक रवैये' के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं: एटीएफ (विमानन ईंधन) की आसमान छूती कीमतें ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है. इसके कारण घरेलू हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में 25 प्रतिशत तक का उछाल आया है।  अंतरराष्ट्रीय परिचालन का खर्च पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है. इससे विदेशी उड़ानों का ईंधन खर्च करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसका असर घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।  कैश बचाने की मजबूरी एविएशन एक्सपर्ट और एवियालाज कंसल्टेंट्स के सीईओ संजय लाजर के अनुसार, एयरलाइंस इस समय केवल नगदी (Cash) बचाने और अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, उद्योग के लिए अगली दो तिमाहियां बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली हैं।  मांग में सुस्ती गर्मियों की मुख्य छुट्टियों के बाद जून और जुलाई में वैसे भी पर्यटन यात्राएं कम हो जाती हैं. आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राओं पर खर्च करने से बच रहे हैं।  अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी लगा ब्रेक घरेलू उड़ानों के साथ-साथ एयर इंडिया ने अपने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित या कम कर दिया है. दिल्ली-शिकागो, दिल्ली-शंघाई, चेन्नई-सिंगापुर और मुंबई-ढाका जैसी उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है. इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, पेरिस और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न व सिडनी जाने वाली उड़ानों के फेरे (Frequencies) भी घटा दिए गए हैं।  आने वाले कुछ महीने भारतीय हवाई यात्रियों के लिए काफी परेशानी भरे हो सकते हैं. यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी यात्रा की योजना काफी पहले बनाएं और किसी भी असुविधा से बचने के लिए एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस लगातार चेक करते रहें। 

कच्चे तेल में गिरावट का बाजार पर असर, Sensex 76,220 के पार; Nifty भी 24,000 के ऊपर

मुंबई पश्चिम एशिया से आ रही सकारात्मक खबरों और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित युद्धविराम विस्तार के चलते आज भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल देखा जा रहा है. घरेलू संस्थागत निवेशकों और वैश्विक संकेतों के दम पर शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार कर रहे हैं।  सुबह के सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 352 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,220 के इंट्राडे हाई (उच्चतम स्तर) पर पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी करीब 100 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की मजबूती दिखाते हुए 24,002 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम होता है, तो बाजार को और अधिक मजबूती मिल सकती है।  आईटी और फार्मा सेक्टर में जोरदार खरीदारी आज के कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में देखी जा रही है. निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है. इसके अलावा टेलीकॉम, हेल्थकेयर, फार्मा (दवा), और पीएसयू (सरकारी) बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने अच्छी रुचि दिखाई है. रियल्टी, मीडिया और मेटल (धातु) से जुड़े इंडेक्स भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।  दूसरी ओर, प्रॉफिट बुकिंग और बिकवाली के दबाव के कारण केमिकल्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई. वहीं, एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के शेयर लगभग सपाट स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।  शीर्ष पर रहने वाले और घाटे वाले शेयर निफ्टी के शीर्ष घाटे वाले शेयरों में प्रमुख रूप से भारती एयरटेल, ओएनजीसी (ONGC), आयशर मोटर्स, बीईएल (BEL) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) शामिल रहे, जिनमें शुरुआती दौर में मुनाफावसूली देखी गई।  कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सबसे बड़ी राहत है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.24 प्रतिशत गिरकर $91.55 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ $87.37 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. कच्चा तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होगा और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।  वैश्विक बाजारों का हाल एशियाई बाजारों में आज चौतरफा तेजी का माहौल रहा. जापान का निक्केई (Nikkei) 2 प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 3 प्रतिशत तक की भारी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. इससे पहले अमेरिकी बाजार (वॉल स्ट्रीट) भी बढ़त के साथ बंद हुए थे, जहां एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी आई थी। 

लॉन्च तो हो गया, लेकिन डिलीवरी अभी दूर! Ultraviolette Tesseract अब 2027 में मिलेगा

  नई दिल्ली 15 महीने पहले अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर टेसेरैक्ट (Tesseract) को लॉन्च किया था. इस स्कूटर की लॉन्चिंग के वक्त कंपनी ने बताया था कि इसकी डिलीवरी 2026 की पहली तिमाही में शुरू होगी. बाद में इस तारीख को आगे बढ़ाकर 2026 की दूसरी तिमाही कर दिया गया। हालांकि, अब कंपनी ने एक बार फिर अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट की उपलब्धता की तारीख को आगे बढ़ा दिया है. ये उन लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो इस स्कूटर को बुक कर डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं. अब कंपनी ने इस स्कूटर की नई तारीख 2027 की पहली तिमाही रख दी है कितनी है कीमत? अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट को कंपनी ने मार्च 2025 में लॉन्च किया था. उस वक्त कंपनी ने इसकी इंट्रोडक्टरी कीमत 1.2 लाख रुपये एक्स शोरूम रखी थी. एक साल से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी ये स्कूटर लोगों तक पहुंच नहीं पाया है. इसकी वजह स्कूटर का डिजाइन है। अल्ट्रावायलेट अपने पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर बनाने के लिए उसमें कई बदलाव कर रही है. लॉन्चिंग के बाद कंपनी इस स्कूटर लोगों के फीडबैक के लिए कई शहरों में लेकर गई. उसके बाद कंपनी ने इसमें बदलाव करने शुरू किए है, जिससे स्कूटर को सभी के लिए एक बेहतर प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जा सके। मिलेंगे दमदार फीचर्स कंपनी ने बताया है कि स्कूटर ज्यादा यूजर फ्रेंडली और प्रैक्टिकल होगा. अल्ट्रावायलेट का कहना है कि जनवरी 2027 में जब इसकी डिलीवरी शुरू होगी, तो लोगों को एक बेहतर प्रोडक्ट मिलेगा. रिवाइज्ड अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट 100V आर्किटेक्चर के साथ आएगा. ये इस फीचर के साथ आने वाला भारत पर पहला स्कूटर होगा। इस स्कूटर में 15kW का मोटर मिलेगा, जो 20.11 बीएचपी की पावर प्रदान करेगा. स्कूटर 6kWh तक की बैटरी के साथ आएगा, जो 261 किलोमीटर तक की रेंज सिंगल चार्ज में देगा. कंपनी की मानें तो ये स्कूटर 125Km प्रति घंटे की टॉप स्पीड पर दौड़ सकेगा. इसमें 30 लीटर का बूट स्पेस और 7-इंच का टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलेगा।

निवेशकों की लगी लॉटरी! ₹10 हजार महीने जमा कर बना डाला ₹51 लाख का फंड

मुंबई अगर निवेश पैटर्न को देखें तो बीते कुछ समय से निवेशकों का रुझान म्यूचुअल फंड की ओर बढ़ा है। कई ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो निवशकों को चौंकाने वाला रिटर्न दे रहे हैं। ऐसा ही एक 13 साल पुराना म्यूचुअल फंड पराग पारिख फ्लेक्सी कैप (PPFAS) है। यह एसेट्स के आधार पर सबसे बड़ा एक्टिव फंड और फ्लेक्सी कैप फंड है। ETMutualFunds के विश्लेषण के अनुसार शुरुआती दिनों में इस फंड में अगर किसी निवेशक ने हर महीने 10,000 रुपये का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP शुरू किया होता तो आज उसकी निवेश राशि बढ़कर लगभग 51 लाख रुपये हो जाती। वहीं, अगर किसी निवेशक ने 10 साल पहले इस फंड में 10,000 रुपये की SIP की होती तो आज इस निवेश की वैल्यू 29.25 लाख रुपये होती, जिसमें एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (XIRR) 17.02% होता। इसी तरह का निवेश अगर पांच साल पहले किया गया होता तो उसकी वैल्यू 8.21 लाख रुपये होती, जिसमें XIRR 12.61% होता।पिछले तीन सालों में इस निवेश की वैल्यू 4.05 लाख रुपये रही होगी। इसका XIRR 8.04% था। 1.40 लाख करोड़ रुपये है फंड का AUM इस फ्लेक्सीकैप फंड को वैल्यू रिसर्च और Morningstar, दोनों ने 5-स्टार रेटिंग दी है। अप्रैल 2026 तक इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो मार्च में 1.28 लाख करोड़ रुपये था। PPFAS म्यूचुअल फंड के अनुसार इस स्कीम का निवेश का मकसद एक एक्टिवली मैनेज्ड पोर्टफोलियो से लंबे समय में कैपिटल ग्रोथ हासिल करना है, जिसमें मुख्य रूप से इक्विटी और इक्विटी से जुड़ी सिक्योरिटीज शामिल होती हैं। यह योजना भारतीय और विदेशी शेयरों में निवेश करती है और उन कंपनियों को चुनती है जो मजबूत बिजनेस मॉडल और उचित वैल्यूएशन पर उपलब्ध हों। फंड मैनेजर और रिसर्च हेड रौनक ओंकार ने कहा कि उनकी रणनीति लंबी अवधि के लिए गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में निवेश करना है। यदि बाजार में उचित अवसर नहीं मिलते तो फंड कैश भी होल्ड करता है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर राजेश मिनोचा ने ETMutualFunds को बताया कि PPFAS एसेट मैनेजमेंट के इस फंड ने पिछले 13 सालों में मजबूत और लगातार प्रदर्शन किया है। इस दौरान SIP ने लगभग 17% का XIRR दिया है, जो अनुशासित लंबी अवधि के निवेश और अच्छी क्वालिटी के स्टॉक चुनने के फायदों को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह फंड वैल्यू-ओरिएंटेड अप्रोच अपनाता है। यह विदेशी स्टॉक्स के जरिए ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन शामिल करता है। 10 साल के रिटर्न के आधार पर, इस फंड ने 2018 और 2022 में नेगेटिव रिटर्न दिया है। फंड को 2018 में 0.43% और 2022 में 7.23% का नुकसान हुआ। पिछले 10 कैलेंडर साल में सबसे ज्यादा रिटर्न की बात करें तो फंड ने 2021 में इस मुकाम को हासिल किया। इस साल फंड ने सबसे ज्यादा लगभग 45.51% का रिटर्न दिया।

सस्ती हुई Tata Tiago EV, कम कीमत और लाइफटाइम बैटरी वारंटी के साथ मचा सकती है धूम

 नई दिल्ली Tata ने अपनी एंट्री लेवल कार Tiago का अपडेट जारी किया कर दिया है. कंपनी ने इस कार को पेट्रोल, सीएनजी और ईवी तीनों ही अवतार में लॉन्च किया है. टाटा टियागो ईवी (Tata Tiago EV) की कीमतें 6.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत इस लिए खास है क्योंकि कंपनी ने कार की कीमत को पहले से कम किया है। पहले ये कार 7.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर आती थी. इतना ही नहीं टाटा ने इस कार को BaaS (बैटरी एज सर्विस) के तहत भी लॉन्च किया है, जिसके बाद ये कार और भी सस्ती हो जाती है। अगर आप इस कार को बैटरी एज सर्विस के तहत खरीदते हैं, तो कीमत पेट्रोल वेरिएंट के बराबर पहुंच जाती है. यानी Tata Tiago EV BaaS की कीमतें 4.69 लाख रुपये से शुरू होती है. टियागो ईवी में कंपनी ने कई बदलाव किए हैं. कार डुअल टोन इंटीरियर, बेहतर सेफ्टी और अपडेटेड चार्जिंग क्षमता के साथ आती है। रेंज और चार्जिंग टाटा टियागो ईवी दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है. कार में 19.2kWh और 24kWh की बैटरी मिलती है. छोटी बैटरी वाला वर्जन 62 एचपी की पावर और 110 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. वहीं बड़ी बैटरी पैक के साथ 75 एचपी की पावर और 114 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है। 24kWh की क्लेम्ड रेंज 285 किलोमीटर की है. पहले इस बैटरी पैक के साथ कंपनी 293 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती थी. वहीं 19.2kWh बैटरी पैक वाले वेरिएंट की रेंज 226 किलोमीटर है. कंपनी की मानें तो रियल वर्ल्ड में छोटी बैटरी पैक में 160 से 170 किलोमीटर की रेंज मिलेगी, जबकि बड़े बैटरी पैक के साथ 200 से ज्यादा किलोमीटर की रेंज मिलेगी। टाटा की मानें, तो ये कार 40 परसेंट तेजी से चार्ज होगी. सिर्फ 18 मिनट चार्ज करने पर कार 100 किलोमीटर तक चल सकेगी. इसमें डीसी फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा. कार 3.3kW और 7.2kW के एसी चार्जर के साथ आएगी. इसमें जनरेटिव ब्रेकिंग मिलेगी। कंपनी का दावा है कि कार सिर्फ 5.7 सेकंड में 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. 24kWh वाले वेरिएंट पर कंपनी लाइफटाइम वारंटी दे रही है, जबकि 19.2kWh वाले वेरिएंट पर 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक वारंटी मिलेगी। एक्सटीरियर में क्या है नया? कार अब नए लुक के साथ आती है. इसमें आपको नया फ्रंट और रियर फेस मिलता है. हालांकि, साइड से कार अभी भी पहले की तरह ही लगती है. इसमें पतले एलईडी हेडलैम्प्स दिए गए हैं. कार में आई-ब्रो जैसे डीआरएल्स मिलते हैं, जो एलईडी हैं. इसमें 15 इंच के व्हील्स मिलते हैं। रियर में कंपनी ने एलईडी कनेक्टेड टेललैम्प्स दिए हैं. कार डुअल टोन ब्लैक रूफ के साथ आती है. टियागो में शार्क फिन एंटीना और डोर हैंडल पर क्रोम फिनिश दी गई है. कार में सेफ्टी को भी बेहतर किया गया है. अब टियागो ईवी में 6 एयरबैग स्टैंडर्ड मिलते हैं। टाटा टियागो ईवी 2026 में नया डैशबोर्ड मिलेगा. इसमें 10.25 इंच का फ्रीस्टैंड टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. इसका टीएफटी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर ब्लूटूथ सपोर्ट के साथ आता है. कार में वायरलेस चार्जिंग, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कारप्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, रियर एसी वेंट समेत कई फीचर्स मिलते हैं।

भारतीय आमों पर जापान का बैन, सिंगापुर में खरीदने की मची होड़; आते ही खाली हो रहे शेल्फ

नई दिल्ली भारत को दुनिया में आमों का राजा माना जाता है, और उत्पादन से लेकर निर्यात तक में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। लेकिन हाल ही में भारतीय आमों को लेकर एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। दरअसल, जापान के प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन (कीटाणुशोधन) और सुरक्षा उपायों में कमियों का हवाला देते हुए भारत की प्रीमियम आम किस्मों के आयात पर रोक लगा दी थी। इस रोक में केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी टॉप क्लास किस्में शामिल थीं। जापान की इस रोक के बावजूद भारतीय आमों की वैश्विक साख पर कोई असर नहीं पड़ा। अब यही आम सिंगापुर के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी दी कि वहां भारतीय आमों का जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे ये प्रीमियम आम सुपरमार्केट्स में आते ही फटाफट बिक हो रहे हैं। भारत है दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। पीआईबी (PIB) के अनुसार, साल 2024-25 के दौरान देश में रिकॉर्ड 228.37 लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। भारत से अल्फांसो, तोतापुरी, केसर, नीलम और मल्लिका जैसी किस्में विदेशों में खूब निर्यात की जाती हैं। खासतौर पर खाड़ी देशों और अमेरिका-ब्रिटेन में भारतीय आमों की भारी डिमांड है। APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, केवल साल 2024 में भारत ने अकेले यूएई (UAE) को 20 मिलियन डॉलर मूल्य के 12,897 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए थे। इसके अलावा नेपाल, कतर और कुवैत में भी इसकी भारी मांग है। भारत में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश मुख्य आम उत्पादक राज्य हैं, जिनके स्वाद का जादू आज पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है।

महंगाई की मार: रेलवे स्टेशन पर खाने-पीने की चीजें 1 जून से होंगी महंगी

नई दिल्ली ट्रेन से सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका है, जहां रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाला खान-पान अब और महंगा होने जा रहा है। सेंट्रल रेलवे ने 1 जून 2026 से खान-पान की विभिन्न वस्तुओं की दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह बढ़ोतरी तेल और गैस की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे के कारण की गई है। इन चीजों के बढ़े दाम नई दरों के मुताबिक, सबसे लोकप्रिय स्नैक वड़ा पाव की कीमत में लगभग 54% की भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले 13 रुपये में मिलने वाला वड़ा पाव अब 20 रुपये में मिलेगा, जिसमें 50 ग्राम आलू वड़ा 15 रुपये और पाव 5 रुपये प्रति पीस तय किया गया है। इसके अलावा वेज समोसा, वेज पफ और साबूदाना वड़ा भी अब 20 रुपये प्रति पीस की दर से मिलेंगे। वहीं, पाव भाजी और वेज पिज्जा के शौकीनों को अब 50 रुपये प्रति पीस चुकाने होंगे। कौन-कौन सी चीजें कितने में मिलेगी, पूरी लिस्ट? क्रमांक खाद्य पदार्थ कीमत 1 आलू वड़ा 15 रुपये 2 रगड़ा/उसल प्लेट + 1 पाव 25 रुपये 3 वेज समोसा 20 रुपये 4 पाव 5 रुपये 5 वेज सैंडविच + सॉस 35 रुपये 6 वेज चीज सैंडविच + सॉस 45 रुपये 7 वेज पफ/पेटिस 20 रुपये 8 साबूदाना वड़ा 20 रुपये 9 ढोकला 25 रुपये 10 सभी प्रकार के लड्डू 20 रुपये 11 वेज फ्रेंकी 30 रुपये 12 वेज चीज फ्रेंकी 45 रुपये 13 सूखा भेल 25 रुपये 14 चटनी भेल 30 रुपये 15 पोहा नमकीन 20 रुपये 16 सादा डोसा + चटनी + सांभर 25 रुपये 17 मसाला डोसा + चटनी + सांभर 35 रुपये 18 प्याज डोसा/उत्तपम + चटनी/सांभर 30 रुपये 19 रवा डोसा/मसाला उत्तपम + चटनी + सांभर 35 रुपये 20 रवा इडली + चटनी + सांभर (2 नग) 35 रुपये 21 पाव भाजी (2 पाव) 50 रुपये 22 दही वड़ा (2 नग) 35 रुपये 23 वेज कटलेट (2 नग) + सॉस/चटनी 35 रुपये 24 छोले पूरी (5 पूरी + छोले) 40 रुपये 25 मेदु वड़ा + चटनी/सांभर (2 नग) 35 रुपये 26 इडली सांभर/चटनी (2 नग) 30 रुपये 27 चना दाल वड़ा + चटनी (2 नग) 35 रुपये 28 ब्रेड पकोड़ा 25 रुपये 29 प्याज के पकोड़े/मिली-जुली भजिया 25 रुपये 30 मूंग भजिया 30 रुपये 31 वेज Roll 30 रुपये 32 वेज पिज्जा 50 रुपये 33 टमाटर का सूप 20 रुपये गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश मूल्य वृद्धि को मंजूरी देने के साथ ही रेलवे ने सभी लाइसेंसधारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि दरों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुधार के रूप में दिखना चाहिए। इसके अलावा, नए टैरिफ लागू होने के 6 महीने बाद बिक्री का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर लाइसेंस शुल्क की समीक्षा होगी। राहत की बात यह है कि कचौड़ी, गुलाब जामुन, ताजे जूस, मिसल पाव और वेज नूडल्स समेत 16 लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, जूस और सोडा उत्पादों के दाम भी पहले की तरह ही बने रहेंगे।

Gold Price Today: सोना हुआ सस्ता, 2 महीने के लो लेवल पर पहुंचा भाव, चांदी में भी भारी गिरावट

मुंबई  इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को सोने की कीमतों में 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और स्पॉट गोल्ड 4,406.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह दो महीने का सबसे निचला स्तर है। स्पॉट सिल्वर भी 1.7% टूटकर 73.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इसकी वजह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए हमले हैं, जिससे क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर अनिश्चितता और गहरा गई है। अमेरिकी हमलों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर नए हमले किए हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बताया गया था। यह घटना तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए समझौता हो गया है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की एक वजह डॉलर भी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है, जिससे डॉलर में मूल्यवान सोना अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो गया है। अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो प्लैटिनम: 0.5% गिरकर 1,909.15 डॉलर और पैलेडियम 0.7% कमजोर होकर 1,381.64 डॉलर पर आ गया। फेड अधिकारियों के बयान से बढ़ी बेचैनी फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक ने कहा कि केंद्रीय बैंक को फिलहाल कम अवधि के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ, ईरान संघर्ष और एआई से जुड़े निवेश से दबाव बढ़ रहा है, और जरूरत पड़ने पर दरों में बढ़ोतरी संभव है। वहीं, फेड के फिलिप जेफर्सन ने कहा कि महंगाई के जोखिमों को देखते हुए मौजूदा मौद्रिक नीति उपयुक्त है। बाजार अब आज देर शाम जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा का इंतजार कर रहा है, जो Fed की आगे की नीति दिशा का संकेत देगा। गोल्ड की रेंज और अहम सपोर्ट कमोडिटी एक्सपर्ट और एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फिलहाल 4,500–4,540 डॉलर के दायरे में सिमट रहा है। उन्होंने बताया गोल्ड के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 4,560–4,600 डॉलर है। इसके ऊपर सस्टेन होने पर तेजी आ सकती है और कीमतें 4,660–4,700 डॉलर तक जा सकती हैं। दूसरी ओर गोल्ड पर तत्काल सपोर्ट 4,500–4,460 डॉलर प्रति औंस है और इस स्तर के नीचे जाने पर गिरावट बढ़कर 4,400–4,350 डॉलर तक आ सकती है। 

Gift Nifty के संकेत ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता, क्या भारतीय बाजार में आने वाली है बड़ी गिरावट?

नई दिल्ली  भारत का शेयर बाजार शुक्रवार 29 मई को भारी दबाव के साथ खुल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स करीब 2% टूटकर 23,580 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। गुरुवार को बकरीद के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक बाजारों में आई तेज हलचल का असर अब शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखाई देने की संभावना है। दरअसल, हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों के आसपास तनाव काफी बढ़ गया है। कुवैत में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है। इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है। एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% गिरा, दक्षिण कोरिया का KOSPI 1% टूटा और जापान का निक्केई भी लाल निशान में बंद हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, भारतीय बाजार ने बुधवार को अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 142 अंक गिरकर 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली 7 अंक टूटकर 23,907 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि India VIX यानी बाजार का डर सूचकांक 6% गिरा, जिससे यह संकेत मिला कि अभी घबराहट पूरी तरह हावी नहीं हुई है। लेकिन अब ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद बाजार का मूड बदल सकता है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,835–23,922 का स्तर बेहद अहम रहेगा। अगर बाजार इस दायरे के नीचे फिसलता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिकता है, तो आने वाले दिनों में 24,200–24,300 तक की तेजी भी संभव है। अब निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल-ईस्ट (Middle East) के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेंगी। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।