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अचानक बाजार में आई जोरदार रैली, जानें ये 5 कारण जिन्होंने इसे प्रेरित किया

मुंबई  अचानक सोमवार को शेयर बाजार ने सबको हैरान कर दिया है. सुबह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी. लेकिन दोपहर 12.30 बजे मार्केट ने पलटी मार दी, और धीरे-धीरे बाजार अब मजबूती के संकेत दे रहे हैं।  दोपहर ढाई बजे सेंसेक्स 641.81 अंक चढ़कर 73,950 पर कारोबार रहा था. वहीं निफ्टी 190 अंक चढ़कर 22,906 पर कारोबार कर रहा था. एक्सपर्ट्स की मानें तो बाजार में इस अचानक आए उछाल के पीछे वैश्विक के साथ-साथ घरेलू कारण भी हैं. अब निवशेक धीरे-धीरे बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया अपना रहे हैं।  कारोबार के दौरान Trent के शेयर में 7 फीसदी, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस के शेयर में करीब 4 फीसदी, टाइटन के शेयर में 3.50 फीसदी, एक्सिस बैंक के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. मिडकैप कैटेगरी में कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में 6.30 फीसदी की जोरदार तेजी है।  शेयर बाजार में इस तेजी के मुख्य तौर पर 5 कारण हैं. 1. मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत अमेरिका और ईरान में सुलह के संकेत से बाजार को बल मिला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 45 दिनों के युद्धविराम के लिए चर्चा कर रहे हैं. इस खबर ने बाजार में छाई अनिश्चितता को कम किया है. ईरान द्वारा ओमान के साथ मिलकर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'में आवाजाही के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने की घोषणा से भी निवेशकों ने राहत की सांस ली, क्योंकि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का डर कम हुआ।  2. आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है. बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी ब्याज दरों (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रख सकता है. महंगाई पर नियंत्रण और विकास दर को संतुलित रखने के आरबीआई के प्रयासों ने निवेशकों को भरोसा दिया है।  3. नए वित्त वर्ष से निवेश का आगाज इसके अलावा अप्रैल का महीना नए वित्त वर्ष की शुरुआत का समय होता है. पिछले महीने (मार्च) में भारी बिकवाली और सुधार के बाद, कई शेयरों के वैल्युएशन (Valuation) काफी आकर्षक हो गए थे. संस्थागत निवेशकों और रिटेल निवेशकों ने नए वित्त वर्ष के लिए नए सिरे से पूंजी निवेश शुरू कर दिया है. जिसे बाजार की तेजी का एक तकनीकी कारण माना जा रहा है।  4. आईटी और बैंकिंग सेक्टर में शानदार खरीदारी HDFC और Axis बैंक ने चौथी तिमाही के रिजल्ट से पहले अपडेट दिया है, जो कि बाजार को पसंद आया है. यही कारण है कि बाजार की इस रिकवरी को लीड बैंकिंग, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों ने किया है. बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखी गई. इसके अलावा, आईटी सेक्टर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्थिर संकेतों के कारण सकारात्मक रुख बना रहा।  5. घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का समर्थन भले ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) बिकवाली कर रहे थे, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा है. एलआईसी (LIC) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स की ओर से की गई खरीदारी ने बाजार को बड़े क्रैश से बचाया है और सोमवार को रिकवरी का आधार तैयार किया। 

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: खुलते ही चांदी ₹2800 सस्ती, सोना भी हुआ सस्ता

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में जारी गिरावट (Gold-Silver Rates) का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर वायदा कारोबार ओपन होने के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. चांदी एक झटके में अपने पिछले बंद के मुकाबले 2800 रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई, तो वहीं सोने का भाव 1300 रुपये से ज्यादा कम हो गया।  इस गिरावट के बाद अब 1 Kg Silver Price अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से क्रैश (Silver Crash From High) होते हुए 2.09 लाख रुपये सस्ती हो गई है. अगर आप सोना-चांदी में निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो फिर खरीदारी से पहले इनके लेटेस्ट रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है. हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट के दोनों कीमती धातुएं रिकवरी मोड में भी नजर आईं।  चांदी की कीमत में फिर गिरावट एमसीएक्स पर सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही चांदी की कीमत धड़ाम हो गई. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन गुरुवार को वायदा चांदी 2,32,495 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और जब लॉन्ग वीकेंड के बाद कमोडिटी मार्केट ओपन हुआ, तो Silver Price फिसलकर 2,29,651 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो चांदी अचानक 2844 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई।  सोमवार को आई इस शुरुआती गिरावट के बाद अब चांदी अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा कम कीमत पर मिल रही है. MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इस कीमती धातु का लाइफ टाइम हाई लेवल 4,39,337 रुपये प्रति किलोग्राम है और ताजा भाव से तुलना करें, तो अब 1 Kg Silver Price 2,09,686 रुपये तक कम है।  सोने का भी चांदी जैसा हाल  न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि सोने की कीमत में भी सप्ताह के पहले कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है. बीते गुरुवार को सोने का वायदा भाव 1,49,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और सोमवार को ये गिरावट के साथ 1,48,298 रुपये पर ओपन हुआ. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1382 रुपये कम हो गया।   सोना भी अपने हाई लेवल से अब काफी सस्ता हो चुका है. गोल्ड का लाइफ टाइम एमसीएक्स हाई 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है और ताजा भाव इस हाई के मुकाबले 54,686 रुपये सस्ता है।  ग्लोबल टेंशन, फिर भी टूटे सोना-चांदी  मिडिल ईस्ट युद्ध से ग्लोबल टेंशन चरम पर है और ट्रंप की ईरान को लेकर नई धमकियों ने इसे बढ़ाने का काम किया है. इन हालातों में भी सोना-चांदी की कीमतों में ये गिरावट चौंकाने वाली है, क्योंकि अक्सर किसी आपदा या जियो-पॉलिटिकल तनाव की स्थिति में कीमती धातुओं के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं।  वर्तमान हालात में सोना-चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल के दाम में तेजी के चलते महंगाई के जोखिम ने दबाव बढ़ाया है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. लोग अपने हाथ में कैश रखने को ज्यादा उचित मान रहे हैं. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी सोना-चांदी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। 

लखनऊ में बनेगा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, J Kumar Infra को मिला 1184 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

नई दिल्ली वैश्विक बाजार में मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता के बीच भारतीय घरेलू मार्केट में 6 अप्रैल से शुरू हो रहे ट्रेडिंग सेशन में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कुछ कंपनियां निवेशकों के रडार पर रह सकती हैं. हाल ही में इन कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर से उनके बिजनेस की आगे की संभावनाएं मजबूत बनती दिख रही हैं. J Kumar Infraprojects को मिला बड़ा प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की J Kumar Infraprojects Limited को हाल ही में एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ है. जिससे कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत हुई है. यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लखनऊ में वृंदावन योजना, सेक्टर-15 में 10,000 लोगों की क्षमता वाले इंटरनेशनल एग्जीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से जुड़ा है. कंपनी को इसके लिए 1,184 करोड़ रुपये देने की बात सामने आई है. निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय तय किया गया है. RVNL को मिला नया रेलवे प्रोजेक्ट साउथ सेंट्रल रेलवे ने Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) को 242 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. जिसके तहत ओंगोल से गुडूर सेक्शन में काम किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट विजयवाड़ा डिवीजन में आता है. कंपनी को इस काम के लिए 24 महीने का समय दिया गया है.   इस प्रोजेक्ट में मौजूदा 1×25 kV सिस्टम को अपग्रेड कर 2×25 kV AT फीडिंग सिस्टम में बदला जाएगा. साथ ही इस डील में ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) का डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसे काम भी शामिल हैं. GR Infraprojects को मिला बड़ा EPC कॉन्ट्रैक्ट GR Infraprojects Limited ने वेस्ट सेंट्रल रेलवे के साथ 1,898 करोड़ रुपये का बड़ा EPC एग्रीमेंट किया है. इस डील से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत हुई है. लगातार मिल रहे प्रोजेक्ट यह संकेत दे रहे हैं कि अलग-अलग सेगमेंट में कंपनी का ऑर्डर फ्लो स्थिर बना हुआ है. जो आगे की ग्रोथ के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है.

रियल एस्टेट में निवेश का सुनहरा मौका, नए टैक्स कानून से बढ़ेगी होम बायर्स की बचत और घटेगी कागजी कार्रवाई

नई दिल्ली 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ ने घर खरीदारों और इन्वेस्टर्स के लिए खुशियों का रास्ता खोल दिया है. इस नए कानून का सीधा मकसद लोगों की जेब में ज्यादा पैसा बचाना और प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस को सरल बनाना है. आइए समझते हैं कि यह आपकी प्रॉपर्टी प्लानिंग को कैसे बदलेगा. क्या आपकी जेब में अब ज्यादा पैसा बचेगा? बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नए टैक्स कानून की सबसे बड़ी खूबी 12 लाख रुपये की नई छूट सीमा (Exemption Threshold) है. इसका सीधा मतलब है कि अब नौकरीपेशा लोगों के पास घर ले जाने के लिए ज्यादा सैलरी (Disposable Income) बचेगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब हाथ में पैसा ज्यादा होगा, तो लोग आसानी से होम लोन की EMI चुका पाएंगे. इससे न सिर्फ पहली बार घर खरीदने वालों को हिम्मत मिलेगी, बल्कि पुराने इन्वेस्टर्स भी बिना कर्ज के बोझ के नई प्रॉपर्टी में पैसा लगा सकेंगे. क्या कागजी कार्यवाही अब कम होगी? अक्सर लोग प्रॉपर्टी खरीदने से इसलिए कतराते थे क्योंकि कागजी काम और टैक्स (TCS) के नियम बहुत उलझे हुए थे. नए कानून ने PAN आधारित नियमों को आसान बना दिया है. खास तौर पर NRI (अनिवासी भारतीयों) के लिए अब भारत में घर खरीदना पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुरक्षित हो जाएगा. जब कागजी काम कम होगा, तो सौदे जल्दी पूरे होंगे और मार्केट में पैसा तेजी से घूमेगा. क्या मिडिल क्लास को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? जी हां, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर मिडिल क्लास और किफायती घरों (Mid-income housing) पर दिखेगा. कम टैक्स और ज्यादा बचत के कारण अब लोग किराए के बजाय अपना घर खरीदने की तरफ तेजी से बढ़ेंगे. जानकारों का कहना है कि अब शहरों में लोग अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 10% तक बढ़ा सकते हैं. साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी घरों की मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है. क्या युवाओं के लिए यह सही समय है? आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) ट्रांसपेरेंसी और आसान इनवेस्टमेंट पसंद करती है. नया टैक्स ढांचा ट्रांसपेरेंट है, जिससे युवाओं के लिए रियल एस्टेट को एक लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखना आसान हो गया है. कुल मिलाकर, यह नया कानून रियल एस्टेट को केवल जरूरत नहीं, बल्कि कमाई का एक मजबूत जरिया बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

Oracle के को-फाउंडर की नेटवर्थ में भारी गिरावट, 17,94,485Cr साफ, एलन मस्क से भी थे ज्यादा अमीर

नई दिल्‍ली ओरेकल इन दिनों खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, क्‍योंकि कंपनी ने बड़ी छटनी का फैसला लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओरेकल ने ओरेकल ने 31 मार्च को ग्‍लोबल स्‍तर पर 20 से 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यह एक बड़ी छंटनी है, क्‍योंकि कंपनी ने अपने कुल वर्कफोर्स में से 18 फीसदी कर्मचारियों को निकाला है।  कई कर्मचारियों को बिना फोन और मीटिंग या पहले से जानकारी दिए बगैर ही सिर्फ एक ईमेल के जरिए नौकरी से निकाल दिया. कर्मचारियों को सुबह-सुबह ईमेल के माध्यम से जानकारी दी गई कि ओरेकल की वर्तमान व्यावसायिक आवश्यकताओं पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, हमने एक व्यापक संगठनात्मक परिवर्तन के हिस्से के रूप में आपकी भूमिका को समाप्त करने का फैसला लिया है।  इस बीच, खबर है कि ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन की नेटवर्थ 193 अरब डॉलर (लगभग 17,94,485 करोड़ रुपये) से ज्‍यादा कम हो गए हैं. संपत्ति में इतनी बड़ी गिरावट सिर्फ 6 महीने में ही हुई है. इस गिरावट से पहले ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन कुछ समय के लिए दुनिया के सबसे अमीर व्‍यक्ति थे।  एलन मस्‍क को भी छोड़ा था पीछे  साल 2025 में लैरी एलिसन ने मौजूदा सबसे अमीर व्‍यक्ति एलन मस्‍क को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन फिर नेटवर्थ में गिरावट होते ही लैरी एिलसन ने नंबर वन का ताज खो दिया. अभी एलन मस्‍क की कुल संपत्ति 636 अरब डॉलर है और लैरी एलिसन की नेटवर्थ 195 अरब डॉलर रह गई है।  ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एलिसन की कुल संपत्ति 22 सितंबर, 2025 तक 388 बिलियन डॉलर से घटकर 3 अप्रैल, 2026 तक 195 बिलियन डॉलर हो गई. लगभग 200 बिलियन डॉलर की इस गिरावट ने वैश्विक रैंकिंग में भी फेरबदल किया है, जिससे वह छठे स्थान पर खिसक गए हैं।  लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी गिरावट क्‍यों आई?  अब सबसे बड़ा सवाल है कि लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी बड़ी गिरावट क्‍यों आई है? दरअसल, प‍िछले कुछ समय से ओरेकल की वित्तीय स्थिति में गिरावट आई है, जिसका असर कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया है और कंपनी के शेयर तेजी से नीचे आए हैं. शेयरों के गिरावट के साथ ही लैरी एलिसन की नेटवर्थ भी गिरी है।  इसके शेयर सितंबर 2025 में $345.72 के उच्चतम स्तर से शेयरों में लगभग 58% की गिरावट आई है और 2 अप्रैल, 2026 को यह $146.38 पर बंद हुआ. एलिसन की ओरेकल में करीब 41% हिस्सेदारी है, इसी कारण कंपनी के बाजार प्रदर्शन से काफी हद तक प्रभावित हैं। 

टाटा की Safari EV: 600Km रेंज और ऑल व्हील ड्राइव, कब आएगी?

मुंबई  टाटा मोटर्स देश की एक प्रमुख इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी है. कंपनी की पंच ईवी उन चुनिंदा कार्स में से एक है, जिन पर वेटिंग चल रही है. ऐसे में कंपनी ने एक नई इलेक्ट्रिक कार लाने पर विचार कर रही है, जो साइज में बड़ी और लुक्स में दमदार होगी. हम बात कर रहे हैं टाटा सफारी की, जो ईवी अवतार में आ रही है।  अभी तक ब्रांड की फ्लैगशिप ईवी हैरियर है, लेकिन जल्द ही ये ताज हैरियर की बड़ी बहन सफारी को मिल जाएगा. कंपनी इस साल ही अपनी सफारी ईवी को लॉन्च करने पर विचार कर रही है. ये कार 7-सीटर अवतार में आएगी. इसका सीधा मुकाबला महिंद्रा एक्सईवी 9एस (Mahindra XEV 9S) और विनफास्ट वीएफ एमपीवी 7 (Vinfast VF MPV 7) से होगा।  कब लॉन्च होगी कार? टाटा मोटर्स इस कार को फेस्टिव सीजन में लॉन्च कर सकती है. उम्मीद है कि कंपनी इस कार को दीवाली पर लॉन्च कर सकती है. जहां हैरियर 5-सीटर सेटअप में आती है. वहीं सफारी को कंपनी 7 सीटर सेटअप में लॉन्च कर सकती है. लॉन्च होने के बाद ये कंपनी की पहली थ्री रो इलेक्ट्रिक व्हीकल होगी।  इस कार का प्रोडक्शन अगस्त 2026 में शुरू हो सकता है. इंटरनली इस कार को Tayrona कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि कंपनी इस कार को उसी प्लेटफॉर्म पर तैयार कर सकती है, जिस पर टाटा हैरियर ईवी को डेवलप किया गया है. कार का डिजाइन भी हैरियर ईवी की तरह ही रहेगा.  क्या कुछ मिल सकता है?  टाटा सफारी ईवी में भी हैरियर ईवी वाला ही बैटरी पैक और मोटर सेटअप मिल सकता है. ये कार 65kWh और 75kWh बैटरी पैक के साथ आ सकती है. रियर व्हील ड्राइव कॉन्फिग्रेशन में एक सिंगल मोटर मिलेगी, जो रियर साइड में लगी होगी. वहीं ऑल व्हील ड्राइव में डुअल मोटर सेटअप दिया जा सकता है।  रेंज की बात करें, तो हैरियर ईवी 75kWh बैटरी के साथ रियर व्हील ड्राइव वेरिएंट में 627 किलोमीटर की रेंज क्लेम करती है. वहीं ऑल व्हील ड्राइव वेरिएंट में रेंज घटकर 622 किलोमीटर हो जाती है. बात करें, 65kWh वाले मॉडल की तो इसमें 538 किलोमीटर की रेंज मिलती है. सफारी में कंपनी 100 किलोवॉट का डीसी चार्जिंग सपोर्ट दे सकती है। 

चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोना ₹53,000 घटा, जानें ताजे भाव

मुंबई  सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) बीते सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी बढ़त में रहीं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ, तो वहीं चांदी का भीव 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इन रेट्स की तुलना दोनों कीमती धातुओं के हाई लेवल से करें, तो ये अभी भी क्रैश (Gold-Silver Price Crash From High) नजर आ रही हैं. जी हां, चांदी जहां हाई से 2 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना 53000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है।        हाई छूने के बाद क्रैश होती गई चांदी  चांदी की कीमत एमसीएक्स पर अपने हाई को छूने के बाद से संभली नजर नहीं आई है. इस साल जनवरी महीने में इतिहास में पहली बार 1 Kg Silver Price 4 लाख रुपये के पार पहुंचा था और 4,39,337 रुपये के लेवल छू लिया था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि, बीच-बीच में उछाल भी आया, लेकिन वर्तमान 2,32,600 रुपये प्रति किलो के भाव के आधार पर कैलकुलेशन करें, तो चांदी 2,06,737 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी फिर न छू सका हाई न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी अपने लाइफ टाइम हाई को फिर से नहीं छू सका. चांदी की तरह ही जनवरी महीने में Gold Rate ने एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये का लेवल पार किया था और रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था. वहीं बीते गुरुवार को ये गिरावट के साथ 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ. ऐसे में अपने हाई से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 53,334 रुपये कम हो गया है।          बीते हफ्ते ऐसा था हाल  बात सिर्फ बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए चेंज की करें, तो एमसीएक्स पर 2 अप्रैल को  5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,49,650 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि 27 मार्च को ये 1,47,255 रुपये था. यानी हफ्तेभर में ये कीमती पीली धातु 2395 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगी हुई है. चांदी का भाव देखें, तो ये 2,27,954 रुपये से चढ़कर बीते सप्ताह 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई यानी इसमें 4646 रुपये की तेजी आई।                   घरेलू मार्केट में सोना-चांदी  MCX के बाद घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों को देखें, तो पिछले सप्ताह महज तीन कारोबार दिन में ट्रेड हुआ. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 24 कैरेट सोना 27  मार्च को 24 कैरेट सोना 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 2 अप्रैल को ये 1,46,608 रुपये पर क्लोज हुआ यानी यहां भी Gold Rate में 3666 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया. चांदी को देखें, तो घरेलू मार्केट में ये कीमती धातु 2,21,647 रुपये से बढ़कर 2,27,813 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी 1 किलो चांदी की कीमत 6166 रुपये बढ़ गई।             घरेलू मार्केट में GST+Making Charge गौरतलब है कि आईबीजेए द्वारा अपडेट किए जाने वाले गोल्ड-सिल्वर रेट्स देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब सर्राफा दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर तय 3 फीसदी जीएसटी के साथ मेकिंग चार्ज भी देना होता है. ये मेकिंग चार्ज विभिन्न शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से सोना-चांदी की कीमत बढ़ जाती है।  विदेशों में भी सोना-चांदी सस्ता, ये हैं कारण इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है. COMEX पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4317 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गया, तो चांदी की कीमत गिरकर 66.89 डॉलर प्रति औंस पर नजर आई।   Gold-Silver Rates में जारी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा लोगों को सता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा बीते सप्ताह ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर जारी अनिश्चितता ने भी इस गिरावट को रफ्तार देने का काम किया है. इसके अलावा मंगलवार को भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसका दबाव सोना-चांदी पर पड़ा। 

महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स का धमाल, 1 साल में बेचीं हजारों यूनिट्स, कंपनी ने हासिल किया नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स मार्केट में बेहतरीन परफॉर्म कर रही है. खासकर कंपनी की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स. यहां परफॉर्मेंस की बात सड़कों पर नहीं बल्कि नंबर्स के मामले में हो रही है. कंपनी ने अपने सभी इलेक्ट्रिक मॉडल्स की कुल 50 हजार यूनिट्स को बेच दिया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में मन में जो सवाल रहते हैं उसे देखते हुए ये नंबर बेहतरीन हैं।  सेल्स की ये संख्या महिंद्रा की बीई6, एक्सईवी 9ई और एक्सईवी 9एस की हैं. ये सभी गाड़ियां कंपनी की इलेक्ट्रिक कार्स के प्लेटफॉर्म INGLO पर बेस्ड हैं. इन गाड़ियों की ये संख्या एक अलग कहानी कह रही है. कंपनी को 30 हजार यूनिट्स बेचने में लगभग 7 महीनों का वक्त लगा था।  कैसा रहा इलेक्ट्रिक कार्स का सफर? नवंबर 2025 में महिंद्रा की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स की सेल 30 हजार पार पहुंची थी. वहीं फरवरी 2026 तक कंपनी 41 हजार के सेल्स नंबर तक पहुंच गई थी, जबकि 41 हजार से 50 हजार का सफर तय करने में कंपनी को सिर्फ 6 हफ्तों का वक्त लगा है. साल 2025 में कंपनी औसतन हर महीने 5 हजार इलेक्ट्रिक कार्स बनाई हैं।  मार्च 2026 से उस लिमिट को बढ़ाकर 8000 यूनिट किया गया है. ये एक्सपेंशन बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो दिखाता है कि कंपनी कितनी जल्दी अपनी वेटिंग लिस्ट को क्लियर करेगी. जिन लोगों ने महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स को महीनों पहले ऑर्डर किया था, उन्हें अब इसकी डिलीवरी जल्दी मिलेगी।  कितनी है कीमतें? सिर्फ मार्च 2026 की बात करें, तो कंपनी ने 5,217 बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स को बेचा है, जो पिछले साल की मार्च के मुकाबले 141 परसेंट ज्यादा है. ब्रांड की सबसे सस्ती बॉर्न इलेक्ट्रिक कार बीई6 है, जिसकी कीमत 18.90 लाख रुपये से शुरू होती है. वहीं एक्सईवी 9एस की कीमत 19.95 लाख रुपये से शुरू होती है. जबकि एक्सईवी 9ई की कीमत 21.90 लाख रुपये से शुरू होती है।  ये तीनों ही गाड़ियां INGLO स्टेकबोर्ड आर्किटेक्चर पर बेस्ड हैं. इनमें 59 kWh या 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है. 79 kWh वाले बैटरी पैक की रेंज 650 किलोमीटर से ज्यादा है. कंपनी की मानें, तो इन गाड़ियों में हायर बैटरी पैक की डिमांड ज्यादा है. कुल प्रीऑर्डर में से 73 परसेंट प्रीऑर्डर हायर बैटरी पैक का है।     

Maruti, Tata और Mahindra के बाद इन कंपनियों ने छेड़ी सफलता की धारा, Toyota टॉप-5 से बाहर, मार्च 2026 सेल्स रिपोर्ट देखें

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता है. सितंबर 2025 में हुए बड़े GST Cut के बाद इंडस्ट्री में एकदम से बड़ा बूस्ट आया है. इंडियन कार कंपनियों ने घटे हुए टैक्स का फायदा उठाते हुए पिछले महीने भी दनादन सेल की हैं।  हमेशा की तरह पिछले महीने भी Maruti Suzuki देश की सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी रही. वहीं, Tata और Mahindra ने भी धमाकेदार बढ़ोतरी दर्ज की है. इसके अलावा, Skoda-VW, Mercedes और JLR जैसी कंपनियों ने सेल के मामले में गिरावट देखी है. आइए, कंपनी-वाइज सेल्स रिपोर्ट पर एक नज़र डालते हैं।  सेल के मामले में पहले नंबर पर मारुति है. पिछले महीने इस कार कंपनी को कुल 1,72,919 नए ग्राहक मिले हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 1,34,784 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  बिक्री के मामले में दूसरे नंबर पर टाटा मोटर्स है. पिछले महीने इनकी कुल 67,268 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 51,237 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  लिस्ट में तीसरे नंबर पर महिंद्रा है. मार्च 2026 में इनकी कुल 61,032 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में सेल की गईं महिंद्रा की कुल 49,428 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल के मामले में चौथे नंबर पर हुंडई ने पैर जमा रखे हैं. पिछले महीने इनको कुल 48,623 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी हुंडई की कुल 43,969 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल में बढ़ोतरी के दम पर किआ ने टॉप-5 कंपनियों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है. पिछले महीने इसको कुल 27,987 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 22,820 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 18.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  ऊपर बताई गई मार्च 2025 की टॉप-5 कंपनियों के अलावा पिछले महीने Toyota की 27,479 यूनिट, Skoda VW की 8,676 यूनिट, MG की 6,233 यूनिट, Honda की 5,507 यूनिट, Renault की 3,588 यूनिट, Nissan की 2,538 यूनिट, BMW की 1,559 यूनिट, Mercedes-Benz की 1,320 यूनिट, Citroen की 758 यूनिट, VinFast की 688 यूनिट, JLR की 430 यूनिट, BYD की 413 यूनिट, Jeep की 210 यूनिट, Volvo की 122 यूनिट, Isuzu की 72 यूनिट और Tesla की मात्र 49 यूनिट बिकी हैं। 

Rupee vs Dollar: RBI का बड़ा फैसला, रुपये में आई 12 साल की सबसे बड़ी तेजी

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिस कारण रुपये में गिरावट सिर्फ थमी ही नहीं, बल्कि बड़ी उछाल आई है. RBI द्वारा करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्‍त उपाय पेश करने के लिए एक दिन बाद यह तेजी आई है।  2 अप्रैल को डॉलर की तुलना में रुपये में 12 सालों से ज्‍यादा समय में सबसे अधिक तेजी देखी गई है, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करना जारी रखे हुए थे. करेंसी मार्केट खुलने के बाद करेंसी ट्रेड फिर से शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत तक बढ़कर 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्‍यादा है।  क्‍यों आई इतनी बड़ी तेजी?  1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्‍स मार्केट के नियम को कड़ा किया है. आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंस और नॉन-रेजिडेंस कस्‍टमर्स को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड (एक तरह का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) जारी करने से रोक दिया. नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड एक तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट है, जो  फ्यूचर में रुपया का स्‍तर क्‍या होगा? उस आधार पर खरीदारी करने की अनुमति देता है. एक तरह से आप इसे करेंसी में डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कह सकते हैं. बस इसी कॉन्‍ट्रैक्‍ट को जारी करने से आरबीआई ने रोक लगा दी है. आरबीआई ने यह भी कहा कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट को दोबारा बुक नहीं कर सकतीं।  रुपये में गिरावट के कई कारण  सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है. मार्च महीने में ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग कर डाली थी. इसके साथ ही जंग के शुरू होने से दुन‍िया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. साथ ही होमुर्ज के रास्‍ते के बंद होने की वजह से कच्‍चे तेल के दाम में लगातार तेजी रही है, जिस कारण रुपये में लगातार गिरावट रही है।  वहीं रुपये पर बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के लिए आरबीआई द्वारा कदम उठाए जाने के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी में 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. हालांकि, ट्रंप के ईरान वॉर को लेकर दिए गए संबोधन के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।   कच्‍चे तेल के भाव में उछाल  ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान जंग को लेकर अपने लक्ष्‍यों को लगभग हासिल कर ही लिया है. 2 से 3 हफ्तों के दौरान हम एक बड़ा कदम उठाएंगे. हालांकि उन्‍होंने जंग को समाप्‍त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिस कारण कच्‍चे तेल के भाव में तगड़ी उछाल देखने को मिली और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया।