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अब सिर्फ फेस से भुगतान! UPI में नया फेस‑ऑथेंटिकेशन तरीका, बहुत आसान

नई दिल्ली NPCI (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नए डिजिटल पेमेंट फीचर्स का ऐलान किया है. नए फीचर के तहत बिना PIN के भी UPI पेमेंट की जा सकेगी. अभी तक UPI पेमेंट करने के लिए यूजर्स को पिन एंटर करना होता था, लेकिन अब यूजर्स बायोमैट्रिक्स के जरिए पेमेंट कर सकेंगे.  साथ ही स्मार्ट ग्लासेस के जरिए भी पेमेंट हो सकेगी. इससे UPI का इस्तेमाल आसान होगा. यूजर्स किसी भी पेमेंट को वेरिफाई करने के लिए अपने फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक का इस्तेमाल PIN की जगह कर सकते हैं. ये फीचर यूजर्स को मैन्युअली सेट करना होगा.  इन बातों का रखें ध्यान  शुरुआत में बायोमैट्रिक्स के जरिए UPI पेमेंट को सीमित रखा गया है. यूजर्स 5000 रुपये तक की ही पेमेंट इसके जरिए कर सकते हैं. स्मार्टफोन के जरिए होने वाले UPI पेमेंट में बायोमैट्रिक्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा. माना जा रहा है कि इससे UPI पेमेंट आसान और सुरक्षित तरीके से होंगे.  इस फीचर के आने के बाद यूजर्स को अब PIN एंटर नहीं करना होगा. हालांकि, बड़ी पेमेंट्स के लिए अभी भी बायोमैट्रिक्स की जरूरत होगी. UPI की ये सर्विस शुरू हो गई है. हालांकि, अभी ज्यादातर UPI सर्विस ऑफर करने वाले ऐप्स पर ये सुविधा नहीं मिल रही है. आइए जानते हैं आप इस सर्विस को एक्टिवेट कैसे कर सकते हैं.  कैसे इस्तेमाल कर सकेंगे बायोमैट्रिक्स ऑथेंटिकेशन?      सबसे पहले आपको UPI ऐप ओपन करना होगा. इसके बाद आपको एक नई पेमेंट शुरू करनी होगी.       इसके लिए आप किसी QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या फिर किसी कॉन्टैक्ट को चुन सकते हैं.      अब आपको पेमेंट का अमाउंट एंटर करना होगा. फिर बैंक चुनना होगा जिससे पैसे ट्रांसफर करना चाहते हैं.      जब आपसे UPI PIN एंटर करने के लिए कहा जाए, तो आपको यूज बायमैट्रिक का विकल्प चुनना होगा. हालांकि, ये विकल्प अभी ज्यादातर ऐप्स पर नहीं दिख रहा है.      आपको अपना फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेट करना होगा. इसके बाद कन्फर्मेशन मैसेज का इंतजार करना होगा. कन्फर्मेशन के बाद पेमेंट ऑटोमेटिक हो जाएगी.  

बाजार में सकारात्मक रुख: सेंसेक्स और निफ्टी ने नए सिरे से बढ़त दर्ज की

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर से रिकवरी मोड में है। सप्ताह के चौथे दिन यानी गुरुवार को सेंसेक्स 398.44 अंक की छलांग के साथ 82,172.10 अंक पर और निफ्टी 135.65 अंक के लाभ से 25,181.80 अंक पर बंद हुआ। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अब 268 अंक ऊपर 82042 पर पहुंच गया है। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अभी 98 अंक उछलकर 25144 पर है। एनएसई पर 3085 स्टॉक्स ट्रेड कर रहे हैं। इनमें 1476 हरे और 1521 लाल निशान पर हैं। 87 में अपर और 50 में लोअर सर्किट लगा है। कुल 78 शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई पर और 82 लो पर हैं। शेयर मार्केट की चाल एक बार फिर बदल गई है। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शतकीय शुरुआत के बाद अब 293 अंक ऊपर 82067 पर पहुंच गया है। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अभी 105 अंक उछलकर 25151 पर है। एनएसई पर जिंदल फोटो 20 पर्सेंट की छलांग लगा कर अपर सर्किट पर है। नागरिका कैपिटल एंड इन्फ्रा में भी 20 पर्सेंट की तेजी है। शेयर मार्केट की चाल एक बार फिर बदल गई है। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अब 140 अंक ऊपर 81914 पर पहुंच गया है। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अभी 62 अंक ऊपर 25108 पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स की लिस्ट में टाटा स्टील, डॉक्टर रेड्डी, एचसीएल टेक, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंडिगो के शेयर हैं। शेयर मार्केट अच्छी शुरुआत के बाद लड़खड़ा गया है। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शतकीय शुरुआत के बाद अब 96 अंक नीचे 81677 पर आ गया है। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अभी 4 अंक ऊपर 25042 पर है। शेयर मार्केट की शुरुआत आज शानदार रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स ने शतकीय शुरुआत की। आज गुरुवार को 126 अंकों की बढ़त के साथ सेंसेक्स 81900 पर खुला। जबकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 28 अंक ऊपर 25074 के लेवल पर खुलने में कामयाब रहा। गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए इजरायल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते के लिए सहमत होने के बाद मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बीच वैश्विक बाजारों में तेजी के बाद घरेलू शेयर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के गुरुवार को तेजी से खुलने की उम्मीद है। एशियाई बाजारों में रौनक रही, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार तेजी के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने ऑल टाइम हाई पर बंद हुए। आज के लिए क्या हैं ग्लोबल संकेत वॉल स्ट्रीट पर रात भर में तेजी के बाद एशियाई बाजारों में गुरुवार को बढ़त रही। जापान के निक्केई 225 इंडेक्स में 1.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स 0.36 प्रतिशत बढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने उच्च शुरुआत का संकेत दिया, जबकि दक्षिण कोरियाई बाजार छुट्टी के लिए बंद हैं। गिफ्ट निफ्टी टुडे गिफ्ट निफ्टी 25,150 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 30 अंक का प्रीमियम था। यह भारतीय शेयर बाजार के सूचकांकों के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है। वॉल स्ट्रीट का हाल अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को ज्यादातर उच्च स्तर पर बंद हुए। टेक शेयरों के नेतृत्व में एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने ऑल टाइम हाई क्लोजिंग देखा। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज महज 1.20 अंक या 0.00 प्रतिशत गिरकर 46,601.78 पर आ गया, जबकि एसएंडपी 500 39.13 अंक या 0.58 प्रतिशत बढ़कर 6,753.72 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 255.02 अंक या 1.12 प्रतिशत बढ़कर 23,043.38 पर बंद हुआ। इजरायल-हमास युद्ध अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस्राइल और हमास लड़ाई रोकने और कम से कम कुछ बंधकों और कैदियों को रिहा करने की अपनी शांति योजना के 'पहले चरण' पर सहमत हो गए हैं। एएफपी ने बताया कि गाजा में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते के पहले चरण पर गुरुवार को मिस्र में हस्ताक्षर किए जाएंगे। सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आई है। पिछले सत्र में 0.7 प्रतिशत अधिक बंद होने के बाद बुलियन 0.7 प्रतिशत गिरकर लगभग 4,015 डॉलर प्रति औंस हो गया।  

US की राहत: फार्मा सेक्टर पर टैरिफ नहीं, बाजार में चमक सकते हैं फार्मा शेयर

वाशिंगटन अमेरिका से गुरुवार को एक गुड न्यूज आई है. तमाम रिपोर्ट्स में ऐसा संकेत दिया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फार्मा प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ ऐलान से जेनेरिक दवाओं को दूर रख सकते हैं. US में बिकने वाली ज्यादातर दवाओं पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर महीनों की बहस के बाद, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह विदेशी देशों से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर शुल्क लगाने की योजना नहीं बना रहा है. बता दें ये भारत के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि देश से भारी मात्रा में ऐसे दवाओं का निर्यात अमेरिका को किया जाता है. इसके साथ ही इन रिपोर्ट्स के बाद फार्मा स्टॉक्स भी फोकस में हैं.  जेनेरिक दवाओं रह सकती हैं टैरिफ से दूर! वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए हैं कि ट्रंप प्रशासन आने वाले हफ्तों में फार्मा टैरिफ को लेकर अपने रुख में बदलाव कर सकता है. इसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ से अलग रख सकता है. बता दें कि ट्रंप द्वारा ब्रांडेड और पेटेंटेड विदेशी फार्मा प्रोडक्ट्स 100% टैरिफ लगाए जाने के ऐलान के बाद से ही जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ को लेकर काफी आशंकाएं और अटकलें चल रही हैं. रिपोर्ट के बाद शेयर बाजार में कारोबार के दौरान फार्मा स्टॉक्स में हरियाली भी देखने को मिल रही है.  भारत को कहा जाता है ‘दुनिया की फार्मेसी’ आईक्यूवीआईए (IQVIA) नामक वैश्विक चिकित्सा डेटा एनालिटिक्स कंपनी के अनुसार, अमेरिका में फार्मेसियों में बेची जाने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से 47 प्रतिशत दवाएं भारत से आती हैं। अमेरिका के घरेलू निर्माता करीब 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि बाकी हिस्सा अन्य देशों से आता है। जिसमें भारत की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। यही वजह है कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। वाइट हाउस का यू-टर्न वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा चल रही दवाओं पर टैरिफ जांच के दायरे को सीमित करता है। अप्रैल में शुरू हुई इस जांच में पहले कहा गया था कि “जेनेरिक और नॉन-जेनेरिक दोनों प्रकार की तैयार दवाओं” के साथ-साथ दवा निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल (ड्रग इंग्रेडिएंट्स) को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। लेकिन वाइट हाउस के भीतर इस पर भारी खींचतान देखने को मिली। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) गुट के कठोरपंथी सदस्य चाहते थे कि दवा निर्माण को वापस अमेरिका में लाया जाए और इसके लिए विदेशी दवाओं पर भारी टैरिफ लगाया जाए। उनका तर्क था कि यह “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा मामला है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप की घरेलू नीति परिषद के कुछ सदस्य इस फैसले के खिलाफ थे। उन्होंने दलील दी कि यदि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया गया, तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी और दवाओं की कमी भी हो सकती है। साथ ही, जेनेरिक दवाओं का उत्पादन भारत जैसे देशों में इतना सस्ता है कि भारी टैरिफ लगाने के बाद भी अमेरिकी उत्पादन आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा। ट्रंप की ‘टैरिफ पॉलिसी’ पर फिर सवाल ट्रंप प्रशासन पहले भी अपने टैरिफ युद्धों के कारण आलोचनाओं में रहा है। चीन पर लगाए गए टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर सोयाबीन की खरीद बंद कर दी, जिससे अमेरिकी किसान बुरी तरह प्रभावित हुए। अब अमेरिकी सरकार को किसानों की मदद के लिए 16 अरब डॉलर की सब्सिडी देनी पड़ रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन सब्सिडियों का असली बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ता पर ही पड़ेगा। एक किसान ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “सरकार हमसे पैसा वसूल रही है और वही पैसा हमें वापस दे रही है।” ऐसे में, ट्रंप प्रशासन ने शायद यह महसूस किया कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाकर जनता को एक और “कड़वी दवा” नहीं दी जा सकती। भारतीय दवाओं से अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को मिली भारी बचत अनुमानों के अनुसार, साल 2022 में भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को करीब 219 अरब डॉलर की बचत कराई। पिछले एक दशक में यह बचत 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय कंपनियों की अहम भूमिका टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में सिप्ला, सन फार्मास्युटिकल्स और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अवसाद, अल्सर और नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर जैसी प्रमुख बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं में आधे से अधिक प्रिस्क्रिप्शन सप्लाई किए। इनमें मेटफॉर्मिन (डायबिटीज), एटोरवास्टेटिन (कोलेस्ट्रॉल), लोसार्टन (ब्लड प्रेशर), और आम एंटीबायोटिक्स (एमॉक्सिसिलिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन) जैसी दवाएं शामिल हैं, जो अमेरिकी मरीजों के इलाज में रोजाना उपयोग की जाती हैं।

डिजिटल पेमेंट में नया खिलाड़ी: Zoho ने लॉन्च की अपनी पेमेंट सर्विस

 नई दिल्ली     स्वदेशी कंपनी Zoho इन दिनों सुर्खियों में है. हाल ही में कंपनी का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप Arattai काफी पॉपुलर हुआ है और सरकार भी इसे प्रोमोट कर रही है. अब कंपनी हार्डवेयर स्पेस के लिए बड़ी तैयारी में दिख रही है.  Zoho ने अब पॉइंट ऑफ सेल डिवाइसेज यानी POS मशीन बेचना शुरू कर दिया है. इसमें इंटीग्रेटेड QR डिवाइसेज और साउंड बॉक्स शामिल हैं. भारत में फिलहाल Paytm और PhonePay के POS डिवाइसेज पॉपुलर हैं और ज्यादर रिटेल स्टोर्स पर यही पेमेंट ऑप्शन देखने को मिलता है. Zoho Payments के तहत लॉन्च किया गया ये POD डिवाइस पेटीएम और फोनपे सहित गूगल पे को कड़ी टक्कर दे सकता है. कंपनी के स्मार्ट POS डिवाइस में टच स्क्रीन इंटरफेस के साथ इनबिल्ट प्रिंटर भी है जो तुरंत रीसीट को प्रिंट कर देता है. Zoho का पेमेंट टर्मिनल 4G, WiFi और ब्लूटूथ सपोर्ट करता है. इस मशीन के जरिए मर्चेंट्स चिप कार्ड्स, UPI और QR कोड से पेमेंट ले सकते हैं. Zoho Payment के सीईओ ने कहा है कि ये कंपनी का नेचुरल एक्सपैंशन है जो 2024 में शुरू किया गया था. हालांकि तब सॉफ्टवेयर बेस्ड पेमेंट सल्यूशन था. कंपनी तब से किसी भी डिवाइसेज में ऑनलाइन पेमेंट सपोर्ट देती थी. अब कंपनी ने हार्डवेयर भी पेश कर दिया है. चूंकि Zoho के पास छोटे बिजनेस मैनेज करने के सभी टूल्स हैं, इसलिए पेमेंट टर्मिनल में भी उनका सपोर्ट देखने को मिलेगा. यानी मर्चेंट्स रियल टाइम पेमेंट ट्रैकिंग से लेकर पूरा लेखा जोखा एक जगह पर पा सकेंगे. बिजनेसेज के लिए युनिफाइड डैशबोर्ड भी है जहां से पेमेंट्स और बिलिंग की तमाम जानकारी रिटेलर्स और मर्चेंट्स को आसानी से मिल सकेगी. एडवांस्ड सिक्योरिटी के लिए Zoho ने PCI DSS सर्टिफाइड रखा है. अरट्टई हो रहा है पॉपुलर WhatsApp भारत में सबसे ज्यादा यूज किया जाने वाला इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है. लेकिन अब Zoho का Arattai ऐप आ चुका है जो स्वदेशी है. इस ऐप पर चैटिंग के अलावा कॉलिंग और मीटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. अब तक चैटिंग में Arattai ने एंड टू एंड एन्क्रिप्शन नहीं दिया है, लेकिन कंपनी ने कहा है कि जल्द ही Arattai के चैट्स में एंड टू एंड एन्क्रिप्शन दिया जाएगा. गौरतलब है कि एंड टू एंड एन्क्रिप्शन को चैटिंग प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है. इस एन्क्रिप्शन के आ जाने के बाद Arattai पर की गई चैटिंग का डेटा कोई भी ऐक्सेस नहीं कर पाएगा. बिना एन्क्रिप्शन चैटिंग के साथ मुश्किल ये है कि पर्सनल डेटा हैकर्स या खुद कंपनी ऐक्सेस कर सकती है. WhatsApp में काफी पहले से एंड टू एंड एन्क्रिप्शन है जिसे इंडिपेंडेट सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने कई बार ऑडिट भी किया है. देखना दिलचस्प होगा कि स्वदेशी Arattai कैसे WhatsApp को टक्कर देता है.

डिजिटल रेवोल्यूशन में भारत की बड़ी छलांग, 6G टेक्नोलॉजी के लिए पूरी तरह तैयार

मुंबई  नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 2025 एशिया का सबसे बड़ा टेक इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) शुरू हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया और भाषण में उन्होंने भारत की अपनी टेक्नोलॉजी की बड़ी उपलब्धि देश की होमग्रोन 4G स्टैक का ज़िक्र किया. उन्होंने इसे भारत की इंडिजिनस (स्वदेशी) तकनीक के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है. पीएम मोदी ने कहा कि यह नई 4G प्रणाली न सिर्फ तेज़ इंटरनेट स्पीड और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, बल्कि सेवाओं को भी ज्यादा भरोसेमंद बनाएगी. उन्होंने बताया कि देश में 1 लाख 4G टावर लगाए जा चुके हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है. इसके अलावा, यह Made-in-India 4G स्टैक अब निर्यात के लिए तैयार है, जो भारत की तकनीकी क्षमताओं को दुनिया के सामने पेश करता है. उन्होंने पिछले दशक के अनुभव को देखते हुए कहा कि देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करने के लिए एक आधुनिक कानूनी ढांचा भी जरूरी है. इस अवसर पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा केवल 5G तक सीमित नहीं है. भारत का लक्ष्य 6G में 10% वैश्विक पेटेंट हासिल करना है. उन्होंने यह भी बताया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन का बाजार 2033 तक तीन गुना बढ़कर लगभग 15 अरब डॉलर का हो जाएगा. सिंधिया ने कहा कि सैटकॉम आज जमीन से लेकर समुद्र और अंतरिक्ष तक कनेक्टिविटी बढ़ा रहा है. उन्होंने जोर दिया कि इस पूरी तकनीकी क्रांति के पीछे सबसे बड़ी ताकत भारत के लोग हैं. आने वाले समय में भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल रूप से सक्षम ताकत बन जाएगा. ग्लोबल लेवल पर लीडर बना भारत सिंधिया ने भारत की डिजिटल नेतृत्व की दिशा की भी बात की और कहा कि देश अब तकनीक में पीछे रहने वाला नहीं बल्कि ग्लोबल लेवल पर डिजिटल पर अग्रणी बन गया है. उन्होंने कहा, ‘वो दिन दूर नहीं जब लोग कहेंगे कि दुनिया भारत पर निर्भर है. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि यहां डिज़ाइन करें, यहां समाधान करें और उसे हर जगह स्केल करें. भारत नवाचार करता है, और दुनिया बदलती है.’ उन्होंने ये भी बताया कि भारत अब सिर्फ सेवा राष्ट्र (Service Nation) नहीं बल्कि उत्पादक राष्ट्र (Product Nation) बन गया है. प्रधानमंत्री के PLI (Production-Linked Incentive) योजना के जरिए अब तक लगभग 91,000 करोड़ रुपये का नया उत्पादन हुआ है, 18,000 करोड़ रुपये का निर्यात बढ़ा है और 30,000 नए रोजगार पैदा हुए हैं. इवेंट में पीएम मोदी ने कहा, ‘आज देश में 1GB वायरलेस डेटा की कीमत एक कप चाय से भी कम है,’ जो बताता है कि डिजिटल सेवाएं अब हर आम आदमी की पहुंच में हैं. उन्होंने ये भी ज़ोर देकर कहा कि देश में अब साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए कानून को और मज़बूत किया गया है और ग्रिवेंस रिड्रेसल सिस्टम भी बेहतर हुआ है.’ कुल मिलाकर, इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 ने भारत की तकनीकी उपलब्धियों और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं को उजागर किया. 4G और 5G नेटवर्क के विस्तार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, 6G के लिए तैयारी और डिजिटल कौशल में निवेश भारत को विश्व स्तर पर एक मजबूत तकनीकी ताकत बना रहा है.  

दिवाली पर HDFC बैंक का तोहफा, लोन की ब्याज दरों में की कटौती – जानें कितना होगा फायदा

मुंबई  देश में मार्केट वैल्यू के हिसाब से सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने दिवाली से पहले ही लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ा तोहफा दे दिया है. दरअसल, बैंक की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है, जिसके तहत कर्ज की ब्याज दरों में कटौती की गई है. इसका सीधा असर लोन लेने वालों की मासिक ईएमआई (Loan EMI) पर देखने को मिल सकता है और ये कम हो सकती है. MCLR घटाने से कर्जदारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं.  कर्ज लेने वालों को मिलेगी राहत प्राइवेट सेक्टर का एचडीएफसी बैंक करीब 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मार्केट वैल्यू के साथ जहां सबसे बड़ा बैंक है, तो वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद टॉप-10 वैल्यूएबल कंपनियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है. बैंक की ओर से अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर में कटौती की घोषणा की गई है, इससे कई लोग लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई कम हो सकती है और कर्ज की इस दर से जुड़े अलग-अलग टेन्योर के लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है. कटौती के बाद ये हैं नई ब्याज दरें  बैंक ने चुनिंदा टेन्योर पर अपने एमसीएलआर में 15 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की है. इस बदलाव के बाद अब HDFC Bank MCLR कर्ज की अवधि के आधार पर 8.40% से 8.65% के बीच होगा. इससे पहले ये8.55% से 8.75% के बीच था. रेट चेंज की बात करें, तो बैंक की ओर से ओवरनाइट एमसीएलआर 8.55% से घटाकर 8.45% कर दिया गया है, जबकि एक महीने की दर अब घटकर 8.40% हो गई है. अन्य टेन्योर के लोन के लिए एमसीएलआर में कटौती करते हुए तीन महीने की दर 15 बेसिस पॉइंटकम करके 8.45% की गई है. छह महीने और एक साल दोनों अवधि के लिए एमसीएलआर दरें अब 10 बीपीएस कम होकर 8.55% पर आ गई हैं. वहीं लॉन्ग टर्म की बात करें, तो दो साल की दर 8.60% और तीन साल की दर 8.65% रखी गई है.  क्या होता है एमसीएलआर?  यहां पर समझ लेना जरूरी है कि आखिर ये एमसीएलआर होता क्या है? तो बता दें कि ये वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जो कोई बैंक किसी कर्ज पर ले सकता है. ज्यादातर ये दर होम लोन, पर्सनल लोन और कॉमर्शियल ऋणों के लिए आधार के रूप में कार्य करती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा साल 2016 में शुरू की गई MCLR यह सुनिश्चित करतने का काम करती है कि उधारकर्ताओं से इससे कम ब्याज न लिया जाए. लोन लेने वालों पर कैसे असर?  एमसीएलआर सीधे लोन की ब्याज दर होती है और इससे जुड़े होम लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को इस संशोधन का सीधा असर होता है. इसमें की जाने वाली कटौती सीधे उनकी हर महीने कटने वाली ईएमआई में कमी ला सकती है. एचडीएफसी बैंक की होम लोन दरें फिलहाल 7.90% से लेकर 13.20% के बीच हैं, जो कर्ज लेने वालों की प्रोफाइल और लोन के प्रकार पर निर्भर करती हैं. MCLR Cut से एचडीएफसी बैंक ने खासतौर पर फ्लोटिंग लोन लेने वाले अपने ग्राहकों पर ईएमआई का बोझ कम करने के लिए कदम उठाया है. इससे होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई कम हो सकती है. इस लेंडिंग रेट को तय करने के लिए कई अहम फैक्टर्स पर फोकस दिया जाता है. इसमें बैंक की डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट और कैश रिजर्व रेशो को बनाए रखने का खर्च शामिल होता है. रेपो रेट और रिजर्व रेपो रेट में बदलाव का भी इसपर असर होता है. 

बाजार में तेजी की बहार, Titan-TCS छाए, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है और बुधवार को लगातार पांचवें कारोबारी दिन सेंसेक्स-निफ्टी ग्रीन जोन में ओपन हुए. ओपनिंग के साथ ही जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा चढ़कर 82,200 के पार निकल गया, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद की तुलना में बढ़त के साथ खुला. शुरुआती कारोबार में टाटा ग्रुप की Titan कंपनी का शेयर रॉकेट की रफ्तार से भागता हुआ नजर आया, तो वहीं TCS, Infosys से लेकर HCL Tech तक के स्टॉक्स में भी शानदार तेजी दिखी.  82200 के पार निकला सेंसेक्स शेयर मार्केट में ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स 81,899.51 पर ओपन हुआ औऱ कुछ ही देर में ये 300 अकों से ज्यादा की उछाल के साथ 82,257.74 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा. कुछ ऐसी ही चाल एनएसई के निफ्टी की भी रही. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले मामूली सुस्ती लेकर 25,079.75 पर खुला और फिर सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर 25,192.50 के स्तर तक चढ़ गया. 1307 शेयरों ने की तेज शुरुआत बाजार में तेजी के बीच बुधवार को करीब 1307 कंपनियों के स्टॉक्स ने अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी लेकर कारोबार की शुरुआत की. इसके साथ ही बाजार में मौजूद 1073 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जिनकी ओपनिंग गिरावट के साथ रेड जोन में हुई. वहीं करीब 140 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. शुरुआती कारोबारी में Titan Company, Asian Paints, Bajaj Finance, Tata Steel और Max Healthcare के शेयर सबसे ज्यादा भागने वाले स्टॉक्स की लिस्ट में आगे रहे. कल आई थी जोरदार तेजी इससे पहले बीते कारोबारी दिन मंगलवार को भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन मार्केट क्लोज होने पर इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ी थी. हालांकि, इसके बावजूद दोनों इंडेक्स ग्रीन जोन में बंद हुए थे. सेंसेक्स कारोबार के दौरान 400 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेने के बाद अंत में 136.63 अंक चढ़कर 81,926.75 पर क्लोज हुआ था. तो वहीं निफ्टी ने महज 30 अंकों की बढ़त के साथ 25,108.30 पर क्लोजिंग की थी.  टाइटन का धमाल, ये शेयर भी कमाल सबसे तेज भागने वाले शेयरों की टॉप-10 लिस्ट पर नजर डालें, तो टाटा ग्रुप की कंपनी Titan का शेयर अव्वल रहा और ये 4.20% की तेजी लेकर 3559.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसके बाद लार्जकैप में शामिल अन्य स्टॉक्स में Infosys (2.50%), Tech Mahindra (2.10%), TCS (2.10%) और HCL Tech Share (1.60%) की तेजी लेकर कारोबार करता नजर आया.  इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों में Escorts Share (4.68%), Relaxo Share (2.84%) और Tata Elxsi (2.70%) की बढ़त लेकर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कंपनियों में सबसे तेज उछाल ITI Share में आया और ये 11 फीसदी से ज्यादा की बढ़त लेकर ट्रेड कर रहा था.

1 लाख का सोना आज खरीदें तो 2050 में कीमत कितनी होगी? गणना के साथ समझें

मुंबई  आज के रेट्स के हिसाब से देखें तो भारत में 24 कैरेट सोना करीब 1,23,100 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है. अलग-अलग शहरों में मामूली फर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल यही बाजार की औसत दर है.सोने की कीमतों में लगातार उछाल की कई वजहें हैं. सबसे पहले तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और यूरोप की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है. दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का समीकरण. जब डॉलर महंगा होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमत अपने आप ऊपर चली जाती है क्योंकि भारत ज्यादातर सोना आयात करता है.त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसके दाम और उछलते हैं. साथ ही, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं ताकि अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रख सकें. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमतों में इजाफा हो रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आप आज 1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो 2050 तक उसकी कीमत कितनी होगी? इसका सीधा जवाब तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पिछले 25 सालों के आंकड़ों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है.साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4,400 रुपये के आसपास था, जबकि आज वही लगभग 1,23,100 के आसपास पहुंच गया है. यानी 25 साल में करीब 25 गुना बढ़ोतरी हुई.अगर आने वाले 25 सालों तक सोना औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहा, तो 1,00,000 का सोना 2050 तक लगभग 11-12 लाख के आसपास हो सकता है. अगर वृद्धि दर 8% रही तो ये मूल्य करीब 7 लाख और अगर 12% रही तो 15 लाख से ऊपर पहुंच सकता है. एक किलो सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें नफा-नुकसान  सोना हमेशा से इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन माना गया है. इसका आकर्षण केवल इसकी कीमत में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं के समय यह एक भरोसेमंद साथी भी होता है. ऐसे में अगर आप आज एक किलो सोना खरीदते हैं, तो सवाल उठता है कि 2050 तक इसकी कीमत कितनी हो सकती है और निवेश से कितना लाभ या नुकसान हो सकता है. आइए, वर्तमान रेट और ऐतिहासिक ट्रेंड के आधार पर इसकी कीमतों का आंकलन करते हैं. वर्तमान सोने की कीमत  अक्टूबर 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 11,942 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. इसका मतलब है कि एक किलो यानि 1000 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,19,42,000 रुपये तक हो सकती है. यह दाम अलग-अलग शहरों और बाजारों में थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन तकरीबन यही मूल्य देखा गया है. 2050 तक सोने की कीमत एक साधारण गणना के आधार पर देखा जाए तो यदि सोने की कीमतों में वर्तमान दर से औसतन 8% वार्षिक बढ़ोतरी होती है, तो 2050 तक सोने की कीमत में लगभग 25 गुना वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि 2050 में एक किलो सोने की कीमत लगभग 30-35 करोड़ तक पहुंच सकती है. लेकिन अगर सोने की कीमतें 10% वार्षिक दर से बढ़े तो यह 45-50 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल ट्रेंड और औसत वृद्धि दर पर आधारित है. भविष्य में इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. नफा-नुकसान का आंकलन पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है. सोना इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में सुरक्षित होता है. सोने की कीमतें आमतौर पर इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती हैं, जिससे यह इन्फ्लेशन से सुरक्षा देता है. क्या हो सकता है नुकसान? एक किलो सोने को सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टोरेज और सुरक्षा की जरूरत होती है, जो इसके लिए एक्स्ट्रा खर्च का कारण बन सकता है. सोने को तुरंत नकदी में परिवर्तित करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, खासकर बड़े दाम में. ऐसे में इसके फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. 

अब UPI ट्रांजैक्शन फिंगरप्रिंट या चेहरे से! 8 अक्टूबर से लागू होगा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करोड़ों भारतीयों द्वारा हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से भुगतान करने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला है. अब आपको पेमेंट करते समय 4 या 6 अंकों का पिन याद रखने और उसे डालने की जरूरत नहीं होगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर से उपयोगकर्ता अपने चेहरे (फेशियल रिकग्निशन) और फिंगरप्रिंट के जरिए UPI पेमेंट को मंजूरी दे सकेंगे. यह कदम न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित भी बना सकता है. जानकारों का कहना है कि यह भारत के डिजिटल सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां आपकी पहचान ही आपका पासवर्ड बन जाएगी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), जो UPI नेटवर्क का संचालन करता है, इस अत्याधुनिक सुविधा को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. हालांकि, NPCI ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस नई तकनीक को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. क्या है डिटेल NPCI (जो UPI का संचालन करती है) इस फीचर को ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल, मुंबई में प्रदर्शित करने जा रही है। इससे डिजिटल पेमेंट्स और तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई सुविधा में पेमेंट की ऑथेंटिकेशन (वेरिफिकेशन) भारत सरकार की आधार प्रणाली में दर्ज बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से की जाएगी। यानी, यूजर्स का चेहरा या फिंगरप्रिंट उनके आधार डेटा से मैच किया जाएगा, जिससे पेमेंट की अनुमति मिल जाएगी। RBI के नए दिशानिर्देशों बता दें कि यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डिजिटल ट्रांजैक्शनों के लिए वैकल्पिक ऑथेंटिकेशन तरीकों की अनुमति दी गई थी। इससे डिजिटल पेमेंट्स में सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव — दोनों को बेहतर बनाने की उम्मीद है। UPI अनुभव होगा और आसान वर्तमान में, हर UPI ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को 4 या 6 अंकों का PIN दर्ज करना होता है। नई सुविधा लागू होने के बाद, फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट सेंसर के जरिए पेमेंट तुरंत ऑथेंटिकेट हो जाएगा। इससे ट्रांजैक्शन समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, और यूजर अनुभव और सहज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी, क्योंकि चेहरा या फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कॉपी करना मुश्किल है। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए NPCI और UIDAI के बीच मजबूत तकनीकी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। कैसे काम करेगी यह नई तकनीक? यह नई बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली पूरी तरह से भारत सरकार की विशिष्ट पहचान प्रणाली ‘आधार’ पर आधारित होगी. सूत्रों में से एक ने स्पष्ट किया कि जब कोई उपयोगकर्ता भुगतान के लिए अपने चेहरे या फिंगरप्रिंट का उपयोग करेगा, तो उसका सत्यापन आधार के साथ संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा से किया जाएगा. इसका मतलब है कि केवल वही व्यक्ति भुगतान को मंजूरी दे पाएगा, जिसका बैंक खाता और UPI आईडी उसके आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है. यह प्रक्रिया बेहद सरल होगी. भुगतान करते समय, उपयोगकर्ता को पिन डालने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट स्कैनर सक्रिय हो जाएगा. एक सफल स्कैन के बाद, डेटा को सुरक्षित रूप से आधार सर्वर से मिलान के लिए भेजा जाएगा और मिलान होते ही भुगतान तुरंत सफल हो जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे भुगतान का अनुभव सहज और बाधा रहित हो जाएगा. यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिन्हें अपना पिन याद रखने में कठिनाई होती है या जो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं. क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? UPI में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को शामिल करने का यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा परिणाम है. RBI ने भुगतान प्रणालियों में सुरक्षा और नवीनता को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी थी. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपना सकें. मौजूदा पिन-आधारित प्रणाली, हालांकि काफी हद तक सुरक्षित है, फिर भी इसमें कुछ कमजोरियां हैं, जैसे कि कोई आपका पिन देख सकता है या फिशिंग के जरिए उसे चुरा सकता है. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इन जोखिमों को लगभग समाप्त कर देता है, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट और चेहरा अलग होता है.  

रुपया बचाने को एक्टिव हुआ RBI, गिरावट थामने के लिए बनाया रणनीतिक ब्लूप्रिंट

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप (Buy/Sell Swap) के जरिए विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) में दखल दिया. इस कार्रवाई के बाद रुपये की कीमत 88.77 प्रति डॉलर पर टिकी रही, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर 88.80 के बेहद करीब थी. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI ने एक साथ स्पॉट मार्केट और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर डॉलर की उपलब्धता और रुपये की स्थिरता दोनों को नियंत्रित करने की कोशिश की. जानिए आखिर ये ‘बाय/सेल स्वैप’ होता क्या है और इससे कैसे रुकती है रुपये की गिरावट. क्या होता है RBI का ‘डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप’ ‘बाय/सेल स्वैप’ एक ऐसा सौदा होता है जिसमें RBI अभी के समय में (स्पॉट मार्केट में) डॉलर खरीदता है, लेकिन साथ ही यह तय कर लेता है कि भविष्य की किसी तारीख पर (फॉरवर्ड मार्केट में) वही डॉलर वापस बेच देगा. सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह का टेंपरेरी ट्रांजेक्शन होता है, जिसका मकसद बाजार में अचानक आई डॉलर की मांग को पूरा करना और रुपये पर दबाव को कम करना होता है. इस प्रक्रिया में RBI न तो स्थायी रूप से डॉलर जमा करता है और न ही अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव लाता है. बस इतना सुनिश्चित करता है कि डॉलर की कमी से रुपया कमजोर न पड़े. इससे रुपये की गिरावट कैसे रुकती है जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल कंपनियां, इंपोर्टर्स या फॉरेन इन्वेस्टर्स एक साथ डॉलर खरीदने लगते हैं, तो डॉलर की कीमत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. ऐसे समय में RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर डॉलर की कीमत को स्थिर रखता है. अगर RBI डॉलर बेचता है तो बाजार में डॉलर की भरमार हो जाती है और रुपया संभल जाता है. अगर RBI ‘बाय/सेल स्वैप’ करता है, तो वह अस्थायी तौर पर डॉलर खरीदता है लेकिन भविष्य में बेचने का वादा करता है. इससे बाजार में भरोसा बनता है कि RBI रुपया कमजोर नहीं होने देगा, जिससे ट्रेडर्स रुपये पर सट्टा लगाना कम कर देते हैं. फॉरवर्ड प्रीमियम क्यों घटा RBI की इस स्वैप कार्रवाई के बाद डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम यानी भविष्य के सौदों पर ब्याज दरें कम हो गईं. 1-वर्षीय इम्प्लाइड यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 2.23% पर आ गई, जो एक महीने में सबसे निचला स्तर है. यह संकेत देता है कि बाजार को भरोसा है कि RBI स्थिति पर नियंत्रण रखेगा और आने वाले समय में रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. क्यों जरूरी है RBI की ये दखलअंदाजी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और डॉलर पर निर्भरता काफी ज्यादा है. ऐसे में डॉलर का महंगा होना सीधा असर महंगाई और आयात लागत पर डालता है. RBI के समय रहते कदम उठाने से एक ओर रुपये की स्थिरता बनी रहती है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों को भी भरोसा मिलता है कि भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी सीमित रहेगी.