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अब अंतिम समय पर कैंसिलेशन में भी 80% रिफंड, हवाई टिकट पर मेडिकल इमरजेंसी कवरेज

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई किरायों के रिफंड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई ड्राफ्ट गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर किसी यात्री को मेडिकल इमरजेंसी के कारण टिकट रद्द करनी पड़े, तो एयरलाइन को पूरा पैसा लौटाना होगा या फिर क्रेडिट नोट देना होगा। ट्रैवल एजेंट के जरिए खरीदे टिकट का रिफंड भी अब सीधे एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी। यानी ऑनलाइन पोर्टल या एजेंट से खरीदे टिकट के मामले में भी यात्री को एयरलाइन ही रिफंड देगी। इसके लिए 21 कार्यदिवस की समय सीमा तय की गई है। ड्राफ्ट नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव 30 नवंबर 2025 तक मांगे गए हैं। टिकट बदलने का समय बढ़ेगा डीजीसीए ने एक और राहत देने का प्रस्ताव रखा है, अब यात्री 48 घंटे के भीतर टिकट में बदलाव मुफ्त में कर सकेंगे, बशर्ते ये बदलाव:- घरेलू उड़ान के लिए- प्रस्थान से कम से कम पांच दिन पहले और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए- प्रस्थान से 15 दिन पहले किया जाए। पहले यह सुविधा सिर्फ 24 घंटे और सभी उड़ानों के लिए सात दिन पहले तक सीमित थी। व्हीलचेयर और सुविधा नियमों में बदलाव डीजीसीए ने दिव्यांग यात्रियों के यात्रा मानकों को भी अपडेट किया है। व्हीलचेयर अब केवल दिव्यांग यात्रियों के लिए प्राथमिकता में रहेगी। सक्षम यात्री व्हीलचेयर का उपयोग करेंगे तो उन पर शुल्क लगेगा। एयरपोर्ट पर अम्बुलिफ्ट, एरोब्रिज या टोवेबल रैंप उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। जहां इनमें से कुछ भी न हो, वहां अंतिम विकल्प के रूप में स्टेप-लैडर की अनुमति दी गई है- हालांकि इसे लेकर विकलांग अधिकार समूहों ने नाराजगी जताई है। एयरपोर्ट को दिव्यांग यात्रियों के लिए स्पष्ट साइन बोर्ड, अलग ड्रॉप-ऑफ जोन और पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना होगा। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को डिजिटल मैप भी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। हवाई टिकटों में इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी सरकार हवाई टिकटों में ऐसा इनबिल्ट इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे उड़ान से कुछ ही घंटे पहले टिकट रद्द करने पर भी 80% तक रिफंड मिल सकेगा। यह पूरी कवरेज यात्रियों से कोई अतिरिक्त शुल्क लिए बिना दी जाएगी, प्रीमियम एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की साझेदारी से भरा जाएगा। अभी की व्यवस्था के अनुसार, उड़ान के तीन घंटे के भीतर रद्द करने पर टिकट नो-शो माना जाता है और कोई रिफंड नहीं मिलता। मेडिकल इमरजेंसी साबित करने पर एयरलाइन कभी-कभी रिफंड दे देती हैं, लेकिन यह पूरी तरह उन्हीं के विवेक पर निर्भर है। कैसे काम करेगा नया प्लान? सरकार और एयरलाइंस मिलकर ऐसा मॉडल लाने जा रही हैं जिसमें लगभग ₹50 प्रति टिकट के हिसाब से बीमा लागत निकाली जा सकती है। इससे उड़ान से चार घंटे पहले तक रद्द टिकटों पर 80% रिफंड दिया जा सकेगा। कुछ एयरलाइंस पहले ही बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू कर चुकी हैं। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (ओटीए) अभी भी यात्रियों को अलग से इंश्योरेंस खरीदने का 'नज' देती हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि बेस किराए में ही सुरक्षा शामिल हो, ताकि 'पैसा डूब जाने' का डर न रहे। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव और कब लागू होगा? अथॉरिटीज के मुताबिक रिफंड से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसमें रिफंड मिलने में देरी, रिफंड राशि में कटौती, या फिर पैसा न देकर फ्यूचर क्रेडिट थमा देना – जो सीमित अवधि तक ही मान्य रहता है। इसीलिए डीजीसीए ने भी अपने रिफंड नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है ताकि यात्रियों की परेशानी कम की जा सके और प्रक्रिया पारदर्शी बने। सरकारी अधिकारी कह रहे हैं कि यह इनबिल्ट इंश्योरेंस मॉडल दो से तीन महीनों में लागू किया जा सकता है, बशर्ते एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की गणना संतुलित बैठ जाए।  

8th Pay Commission लागू होने पर बड़ा अपडेट: ToR के संकेतों से कर्मचारियों में बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली  सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए। हालांकि, इसके साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी और पेंशनर यूनियन का आरोप है कि ToR में उस तारीख का जिक्र ही नहीं है, जिस दिन से आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, जबकि 4th से 7th वेतन आयोग तक सभी की सिफारिशें हर 10 साल में 1 जनवरी से लागू होती रही हैं। यही कारण है कि अब आशंका जताई जा रही है कि 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की परंपरा टूट भी सकती है। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। अब तक माना जा रहा था कि 8वां वेतन आयोग स्वाभाविक रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन ToR में यह तारीख शामिल न होने से प्रश्न उठने लगे हैं। यूनियन और पेंशनर समूहों का कहना है कि भले ही सिफारिशें देरी से आई हों, लेकिन लागू होने की प्रभावी तारीख हमेशा 1 जनवरी ही रही है। इस बार तारीख का उल्लेख न होना एक संभावित नीतिगत बदलाव या देरी का संकेत माना जा रहा है। कौन कर रहा है विरोध? ToR जारी होते ही कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऐंड वर्कर्स (CCGEW) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS)। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ToR में मौजूद 'कमियों' पर आपत्ति जताई है और संशोधन की मांग की है। BPS की 7 बड़ी आपत्तियां और मांगें 17 नवंबर को भेजे गए विस्तृत पत्र में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने कई अहम मुद्दे उठाए। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं— 1. 1 जनवरी 2026 की तारीख स्पष्ट तौर पर शामिल की जाए BPS चाहता है कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी। 2. 'Unfunded Cost' शब्द हटाया जाए BPS का कहना है कि इस शब्द से लगता है कि पेंशन सरकार पर बोझ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पेंशन को पहले ही संवैधानिक अधिकार घोषित कर चुका है। 3. पेंशन समानता और संशोधन के स्पष्ट नियम सभी पेंशनरों के लिए तिथि की परवाह किए बिना संशोधन का एकसमान सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि पुराने और नए पेंशनरों का अंतर खत्म हो सके। 4. OPS–NPS–UPS की समीक्षा 2004 के बाद नियुक्त हुए 26 लाख से अधिक कर्मचारी NPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वां वेतन आयोग इन सभी प्रणालियों की समीक्षा करे और बेहतर विकल्प दे। 5. GDS और स्वायत्त निकायों को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को डाक तंत्र की रीढ़ बताते हुए BPS ने उन्हें 8th CPC में शामिल करने की मांग की। साथ ही स्वायत्त और सांविधिक निकायों को भी दायरे में लाने की अपील की। 6. 20% अंतरिम राहत महंगाई को देखते हुए BPS चाहता है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को तत्काल राहत के रूप में 20% अंतरिम राहत दी जाए। 7. CGHS में सुधार की मांग BPS ने इन सुधारों की मांग की— • CGHS को सभी स्वायत्त कर्मचारियों तक बढ़ाया जाए • जिला स्तर पर नए CGHS केंद्र खोले जाएं • इलाज कैशलेस और प्रक्रिया आसान हो • लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू हों BPS ने कहा कि ये सभी मांगें 'जनहित' में हैं। AIDEF और CCGEW: पेंशनरों को दायरे से बाहर रखने पर कड़ा विरोध AIDEF ने 4 नवंबर को वित्त मंत्री को पत्र लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30 साल सेवा दे चुके 69 लाख पेंशनर 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।” CCGEW ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा़, “ToR के कई हिस्सों में तुरंत संशोधन की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों के हित सुरक्षित रहें।” क्या सरकार 10 साल के वेतन आयोग चक्र में बदलाव की तैयारी में है? सबसे बड़ा सवाल यही है। कर्मचारी और पेंशनरों को लगता है कि तारीख का गायब होना, “Unfunded Cost” का उल्लेख और पेंशनरों को प्राथमिकता न देना…ये संकेत हो सकते हैं कि सरकार पारंपरिक 10-वर्षीय वेतन आयोग चक्र में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विरोध बढ़ता जा रहा है। इससे साफ है कि 8वें वेतन आयोग को 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी भी भ्रम बरकरार है।  

भारत का UPI जल्द यूरोप में लॉन्च: यात्रियों को मिलेगी कैशलेस और झंझट-फ्री पेमेंट सुविधा

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एनपीसीआई इंटरनेशनल ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर ऐतिहासिक पहल की है जो भविष्य में यूरोपीय देशों की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों या वहां कारोबार करने वालों को काफी सहूलियत देगी। इसके तहत अब भारत का यूपीआई जल्द ही यूरोप के इंस्टैंट पेमेंट सिस्टम टिप्स यानी टार्गेट इंस्टैंट पेमेंट सेटलमेंट से जुड़ जाएगा। दोनों पक्षों ने इसके “रियलाइजेशन फेज'' को शुरू करने पर सहमति दे दी है। इसके लागू होने के बाद फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड आदि देशों में घूमने गए भारतीय पर्यटक सीधे अपने फोन से यूपीआई स्कैन करके खरीदारी कर सकेंगे।   इन जगहों पर मिलेगी यूपीआई की सुविधा रेस्तरां, होटल, दुकानें, टैक्सी हर जगह भारतीय यूपीआई काम करेगा, बिना विदेशी क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नकदी के झंझट के। साथ ही पैसा तुरंत व बहुत ही कम फीस में ट्रांसफर होगा। साथ ही यूरोप से आने वाले लोग भी भारत में आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे छोटे-मध्यम उद्यमियों को खास तौर पर फायदा होगा क्योंकि लेन-देन सस्ता, तेज और पारदर्शी हो जाएगा। कब से चालू होगी यह सुविधा वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की बातचीत अपने अंतिम चरण में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई-टिप्स लिंकेज इस समझौते को तेजी से अमलीजामा पहनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच वित्तीय एकीकरण की जमीन पहले से ही तैयार होगी। आरबीआई और एनपीसीआई तकनीकी एकीकरण, रिस्क मैनेजमेंट और सेटलमेंट व्यवस्था पर तेजी से काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही तक यह सुविधा चालू हो जाएगी। आरबीआई की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक यह कदम जी-20 दिशानिर्देशों के तहत उठाया गया है जिसके सभी सदस्य देशों ने आपस में वित्तीय लेन-देन को सुविधाजनक बनाने की सहमति दी है।  

भारत में आई Himalayan 450 Manna Black Edition, क्या-क्या मिला है नए मॉडल में?

रॉयल एनफील्ड ने भारत में हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन लॉन्च किया है। जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 3,37,000 रुपये रखी गई है। यह नया एडिशन मोटोवर्स 2025 में पेश किया गया। और इससे पहले इसका ग्लोबल डेब्यू EICMA में हुआ था। माना ब्लैक एडिशन का मकसद हिमालयन लाइनअप में एक ऐसा मॉडल शामिल करना है जो कठिन और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर चलने वाले सवारों के लिए पहले से अधिक तैयार और सक्षम हो। बुकिंग डिटेल्स माना ब्लैक एडिशन की बुकिंग अब सभी रॉयल एनफील्ड स्टोर्स, आधिकारिक मोबाइल एप और वेबसाइट पर शुरू हो चुकी है। ग्राहक किसी भी अधिकृत डीलरशिप पर टेस्ट राइड भी शेड्यूल कर सकते हैं। शेरपा 450 इंजन पावर हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन में वही शेरपा 450 इंजन दिया गया है, जो नए-जेनरेशन हिमालयन 450 में इस्तेमाल किया गया है। यह इंजन लो-एंड टॉर्क, स्मूदनेस और हाई-एल्टीट्यूड एडैप्टेबिलिटी के संतुलन के लिए जाना जाता है। जिससे यह बाइक दैनिक सवारी और ऊंचाई वाले टूर दोनों के लिए उपयुक्त बनती है। माना पास से प्रेरित डिजाइन थीम इस एडिशन का नाम हिमालय के माना पास से लिया गया है। माना पास भारत और चीन सीमा पर स्थित एक हिमालयी दर्रा है, जो उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह दुनिया के सबसे कठिन और ऊंचाई वाले रास्तों में से एक है, जो 18,478 फीट (5,632 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। रॉयल एनफील्ड ने इस एडवेंचर-थीम को मोटरसाइकिल के डिजाइन में उतारते हुए ऑल-ब्लैक पेंट स्कीम और मैट फिनिश का इस्तेमाल किया है। ताकि उस क्षेत्र की कठोरता और सादगी को दर्शाया जा सके। फैक्ट्री-फिटेड एडवेंचर गियर माना ब्लैक एडिशन की सबसे बड़ी विशेषता है इसके स्टैंडर्ड एडवेंचर एक्सेसरीज, जो इसे सीधे शोरूम से ही ट्रेल-रेडी बनाती हैं। इस पैकेज में शामिल हैं:     ब्लैक रैली हैंड गार्ड्स     बेहतर ग्रिप और कम्फर्ट के लिए ब्लैक रैली सीट     ऑफ-रोड सतहों के लिए रैली फ्रंट मडगार्ड     ट्यूबलेस स्पोक्ड व्हील्स, जो अधिक टिकाऊ हैं और पंक्चर में आसानी से संभाले जा सकते हैं इन सभी फीचर्स के साथ यह मॉडल कठिन रास्तों पर बेहतर स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है।

नए वेज कोड का असर: हाथ में आएगी कम सैलरी, लेकिन PF-ग्रैच्युटी बढ़ेगी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने नए लेबर लॉ नोटिफाई कर दिए हैं। लेबर लॉ के लागू होने के बाद अब कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रैच्युटी में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। हालांकि, इन हैंड सैलरी में कमी आ सकती है। नए लेबर लॉ के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए या उतनी प्रतिशतता जो सरकार आगे नोटिफाई करेगी। इसका सीधा असर PF और ग्रैच्युटी पर पड़ेगा। बता दें कि पीएफ और ग्रैच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। बेसिक सैलरी बढ़ने की स्थिति में स्वाभाविक रूप से PF और ग्रैच्युटी का योगदान भी बढ़ जाएगा, जिससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स मजबूत होंगी। हालांकि, एक पहलू यह भी है कि बढ़े हुए PF और ग्रेच्युटी योगदान के चलते कर्मचारियों के हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी घट जाएगी। एक ही CTC में से बड़ी रकम PF और ग्रैच्युटी में चली जाने के कारण टेक-होम सैलरी पर दबाव बढ़ेगा। बता दें कि सरकार अगले 45 दिनों में वेज कोड के विस्तृत नियम अधिसूचित करेगी। इसके बाद कंपनियों को अपनी सैलरी संरचना में बड़े स्तर पर फेरबदल करना होगा। अभी कितना होता है PF का योगदान PF का योगदान बेसिक वेतन का 12% होता है और ग्रेच्युटी की गणना अंतिम बेसिक सैलरी और कंपनी में पूरे किए गए वर्षों के आधार पर होती है। बेसिक वेतन में बढ़ोतरी के साथ दोनों योगदान स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगे। वहीं, यह बदलाव उन कंपनियों पर रोक लगाएगा जो कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में योगदान कम करने के लिए बेसिक सैलरी को बेहद कम रखती थीं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट ईटी को इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुचिता दत्ता ने बताया कि रिटायरमेंट सुरक्षा बेहतर होगी लेकिन खर्च संतुलित करने की कोशिश के कारण कर्मचारियों की हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है। EY इंडिया के पुनीत गुप्ता के अनुसार, श्रम संहिताओं के लागू होने से ग्रेच्युटी बढ़ना तय है, क्योंकि अब ग्रेच्युटी की गणना वेजेज पर होगी, जिसमें बेसिक के साथ अधिकांश भत्ते भी शामिल होंगे, HRA और कन्वेयंस अलाउंस को छोड़कर। हालांकि, कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी घटने को लेकर चिंता बनी हुई है।  

भारत में बढ़ी iPhone मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू बाजार में बिक्री भी रही मजबूत

नई दिल्ली   दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है। एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है। कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”

अक्टूबर में भारत के बड़े उद्योगों की वृद्धि में कोई खास बदलाव नहीं

नई दिल्ली   वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर में आठ प्रमुख उद्योगों (आईसीआई) का संयुक्त सूचकांक 162.4 पर पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में अपरिवर्तित रहा। बीते महीने फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।    कोयले का उत्पादन अक्टूबर 2025 में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.5 प्रतिशत बढ़ा। बिग-टिकट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ती मांग के चलते अक्टूबर में स्टील के उत्पादन में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अक्टूबर अवधि के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.3 प्रतिशत बढ़ा। फर्टिलाइजर का उत्पादन अक्टूबर 2025 में अक्टूबर 2024 के मुकाबले 7.4 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, अप्रैल से अक्टूबर 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.7 प्रतिशत बढ़ा। सीमेंट का उत्पादन इस वर्ष अक्टूबर में बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत बढ़ा। जबकि इस वर्ष अप्रैल से अक्टूबर तक की अवधि में इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.3 प्रतिशत बढ़ा। इसी तरह, पेट्रोलियम रिफाइनरी का उत्पादन भी अक्टूबर 2025 में अक्टूबर 2024 के मुकाबले 4.6 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल से अक्टूबर 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि, कोयले, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और बिजली के उत्पादन में बीते महीने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमशः 8.5 प्रतिशत, 1.2 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईसीआई आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन के संयुक्त और व्यक्तिगत प्रदर्शन को मापता है, जिसमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल है। ये आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में शामिल वस्तुओं के भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। सितंबर 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की अंतिम वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि

 लंदन देश के दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने मानद उपाधि से सम्मानित किया है. इस उपाधि से नवाजे गए चार अन्य विशिष्ट व्यक्तियों में प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, सर टेरी वेट, सुज़ाना स्कोफील्ड MBE और रेवरेण्ड फिलिप गोफ के साथ वे भी इस सम्मान की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. कुमार मंगलम बिड़ला आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन हैं. यह सौ साल पुराना लीडिंग भारतीय मल्टीनेशनल ग्रुप विदेश में कदम रखने वाला पहला भारतीय बिज़नेस हाउस भी माना जाता है. आज यह समूह छह महाद्वीपों के 41 देशों में सक्रिय है, जिसकी वार्षिक कमाई लगभग 67 अरब डॉलर और मार्केट कैपिटलाइजेशन 110 अरब डॉलर से ज्यादा है. बिड़ला परिवार की छठी पीढ़ी से आने वाले कुमार मंगलम बिड़ला के परदादा जी.डी. बिड़ला महात्मा गांधी के करीबी थे और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. शिक्षा के बड़े समर्थक बिड़ला, BITS पिलानी के चांसलर हैं और IIM अहमदाबाद व IIT दिल्ली का भी नेतृत्व कर चुके हैं. वह लंदन बिजनेस स्कूल के गवर्निंग बोर्ड में भी शामिल हैं, जहां उन्होंने 15 मिलियन पाउंड की स्कॉलरशिप दी है- जो यूरोप की सबसे बड़ी स्कॉलरशिप में से एक है. इन हस्तियों को मिला सम्मान कुमार मंगलम बिड़ला को Doctor of Science (Economics) की उपाधि प्रदान की गई है. यह पुरस्कार यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की चांसलर, हर रॉयल हाइनेस द प्रिंसेस रॉयल की ओर से 19 नवंबर को लंदन स्थित सीनेट हाउस में आयोजित फाउंडेशन डे समारोह में प्रदान किया गया. फाउंडेशन डे पर जिन्हें मानद डिग्री और फेलोशिप दी गई, वे हैं- -कुमार मंगलम बिड़ला, चेयरमैन, आदित्य बिड़ला समूह- Doctor of Science (Economics) -प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक हिस्ट्री और वाइस-चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज- Doctor of Science (Social Sciences) -सर टेरी वेट KCMG CBE, ट्रिनिटी हॉल कैंब्रिज के मानद फेलो और मानवीय कार्यों से जुड़े कई चैरिटी संगठनों के संरक्षक- Doctor of Science (Social Sciences) -सुज़ाना स्कोफील्ड MBE, जिन्होंने अपने पति जॉन स्कोफील्ड (जो क्रोएशिया में रिपोर्टिंग करते समय मारे गए) की स्मृति में John Schofield Trust की स्थापना की- Doctor of Literature -रेवरेण्ड फिलिप गोफ, अकादमिक ड्रेस पर विशेषज्ञ- Honorary Fellowship 'उन्होंने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया' यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की चेयर कविता रेड्डी ने कहा, 'हमें बेहद खुशी है कि हम कुमार मंगलम बिड़ला को उद्योग और परोपकार में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डिग्री से सम्मानित कर रहे हैं. उनकी सामाजिक पहलों ने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया है. भारत और यूके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक लोगों तक पहुंचाने के उनके प्रयास यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के मूल्यों से मेल खाते हैं- दूसरों की मदद करने का जज्बा, शिक्षा का महत्व और विभाजन के बजाय एकता का संदेश.' उन्होंने कहा, 'हमारे सभी सम्मानित व्यक्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और वे इन मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं. फाउंडेशन डे पर उन्हें सम्मानित करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है.' 'यह मेरे लिए गर्व की बात है' कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा, 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से यह सम्मान पाकर मैं बेहद कृतज्ञ महसूस कर रहा हूं. विशेष रूप से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि यह सम्मान हर रॉयल हाइनेस, प्रिंसेस ऐन, द प्रिंसेस रॉयल की ओर से प्रदान किया गया. लंदन बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र के रूप में मैंने देखा है कि यह विश्वविद्यालय कैसे महत्वाकांक्षा को उपलब्धियों में बदलता है. मेरा परिवार हमेशा मानता आया है कि शिक्षा प्रगति का सबसे सशक्त साधन है, जो अवसरों का विस्तार करती है और समाज को बदलने की क्षमता रखती है. ऐसी संस्था की ओर से सम्मानित होना, जो इन मूल्यों को जीती है और नई पीढ़ियों को अप्रत्याशित दुनिया का सामना करने के लिए तैयार करती है, मेरे लिए प्रेरणादायक है.' हर साल यूनिवर्सिटी मनाती है फाउंडेशन डे हर साल यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन फाउंडेशन डे मनाती है. यह दिन विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो 28 नवंबर 1836 को किंग विलियम IV की ओर से दिए गए संस्थान के पहले रॉयल चार्टर की याद दिलाती है. इस समारोह का मुख्य हिस्सा मानद उपाधियों और फैलोशिप प्रदान करना होता है. इस परंपरा की शुरुआत 1903 में हुई थी. इसके शुरुआती सम्मानित व्यक्तियों में वेल्स के प्रिंस और प्रिंसेस (जो बाद में किंग जॉर्ज V और क्वीन मैरी बने) शामिल थे. फाउंडेशन डे 2025 के कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के छात्र और स्टाफ, इसकी 17 फेडरेशन मेंबर संस्थाओं के प्रतिनिधि, दुनिया भर में बने इसके रीजनल टीचिंग सेंटर्स के सदस्य और विश्वविद्यालय से लंबे समय से जुड़े लोग शामिल हुए.

ग्राहकों के फोन नंबर रेस्टोरेंट को देगा Zomato, नई डेटा शेयरिंग पॉलिसी पर विवाद

 नई दिल्ली फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने रेस्टोरेंट उद्योग के साथ चल रही वर्षों पुरानी खींचतान को खत्म करते हुए, ग्राहकों का डेटा (फोन नंबर) रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने का फैसला किया है. इस कदम से ग्राहकों के इनबॉक्स में जल्द ही प्रचार संदेशों (जैसे 'कोड XXX का उपयोग करें और ₹200 की छूट पाएं') की बाढ़ आ सकती है. इस कदम ने डेटा प्राइवेसी और ग्राहक सूचना के संभावित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक और उद्योग विशेषज्ञों के बीच हंगामा खड़ा कर दिया है. Zomato, 5 लाख से ज़्यादा रेस्टोरेंट्स की संयुक्त संस्था, नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (NRAI) के साथ ग्राहकों का डेटा रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने के लिए बातचीत कर रहा है.रिपोर्ट के अनुसार, Zomato के प्रतिद्वंद्वी Swiggy के साथ भी इसी तरह की बातचीत चल रही है. Zomato क्या कर रहा है? वर्तमान में, डिलीवरी प्लेटफॉर्म ग्राहक डेटा को मास्क करते हैं, यानी रेस्टोरेंट्स के पास फोन नंबर या अन्य व्यक्तिगत विवरण की जानकारी नहीं होती है. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर Zomato ने ग्राहकों को पॉप-अप भेजना शुरू कर दिया है, जिसमें उन्हें मार्केटिंग और प्रचार संदेशों के लिए रेस्टोरेंट्स के साथ अपना फोन नंबर साझा करने की अनुमति मांगी जा रही है. पॉप-अप में स्पष्ट है कि एक बार जानकारी साझा करने के बाद, यूजर इसे वापस नहीं ले सकता. संदेश में लिखा है, "मैं रेस्टोरेंट को प्रमोशनल गतिविधियों के लिए मुझसे संपर्क करने की अनुमति देता हूं." रेस्टोरेंट्स क्यों चाहते हैं डेटा? रेस्टोरेंट्स लंबे समय से यह शिकायत कर रहे थे कि डेटा मास्किंग उन्हें ग्राहकों के साथ सीधे जुड़ने से रोकती है. NRAI ने इस मुद्दे पर Zomato और Swiggy के खिलाफ CCI (भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग) में "प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं" के लिए शिकायत भी दर्ज कराई थी. रेस्टोरेंट्स का कहना है कि यह उन्हें उपभोग पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने, मार्केटिंग लागत को सही ढंग से चैनलाइज़ करने और ग्राहकों के लिए सेवाओं को पर्सनलाइज़ करने में मदद करेगा.उदाहरण के लिए, यदि भोजन के ऑर्डर में कोई समस्या हो या वे किसी प्राथमिकता की पुष्टि करना चाहें तो रेस्तरां सीधे उपयोगकर्ता को कॉल कर सकते हैं. गोपनीयता जोखिम और राजनीतिक विरोध इस कदम ने तत्काल एक गोपनीयता विवाद को जन्म दिया है, क्योंकि सोशल मीडिया यूजर्स इसे स्पैम मैसेजेज के लिए गेट खोलने वाला बता रहे हैं.शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'ज़ोमैटो भले ही इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम समझती हो, लेकिन एक ग्राहक के लिए यह डेटा गोपनीयता का उल्लंघन है.  अगर ज़ोमैटो और ऐप्स एकतरफ़ा ऐसा रुख़ अपनाते हैं, तो आईटी पर स्थायी समिति की सदस्य होने के नाते मैं डेटा गोपनीयता क़ानूनों के उल्लंघन की जांच करने का अनुरोध करूंगी.' मिलिंद देवड़ा (राज्यसभा सांसद), ने कहा,  "ज़ोमैटो और स्विगी ग्राहकों के मोबाइल नंबर रेस्टोरेंट के साथ साझा करने की योजना बना रहे हैं. इससे निजता के जोखिम और बेहतर सेवा की आड़ में स्पैम बढ़ने का खतरा है. हमें नए डीपीडीपी नियमों के अनुरूप स्पष्ट और स्पष्ट ऑप्ट-इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता है, ताकि उपभोक्ताओं के डेटा का सम्मान किया जा सके." मार्केटिंग विशेषज्ञ और व्यवसायी सुहेल सेठ ने कहा कि ऐसा कदम "पूरी तरह अस्वीकार्य" है. सेठ ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि सरकार इसकी बिल्कुल भी इजाज़त नहीं देगी. आगे चलकर, वे हमारी खान-पान की आदतों को सबके साथ साझा करेंगे!" विवाद के बीच, ज़ोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने चिंताओं को कम करने की कोशिश की है. उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा, "अगर सहमति मिल जाती है, तो रेस्टोरेंट के साथ सिर्फ़ फ़ोन नंबर ही साझा किया जाएगा. कोई और जानकारी साझा नहीं की जाएगी."

Yamaha Jog E: नया इलेक्ट्रिक स्कूटर, एक बार चार्ज करें तो चले 53 किलोमीटर

टोक्यो  जापान के बाज़ार में Yamaha मोटरसाइकिल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी नई इलेक्ट्रिक स्कूटर Yamaha Jog E को पेश किया है. यह इलेक्ट्रिक स्कूटर खासतौर पर शहरी आवागमनकी ज़रूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, जो कॉम्पैक्ट और किफायती है. यह नया इलेक्ट्रिक मॉडल, Yamaha की लोकप्रिय ICE पावर्ड 'Jog' स्कूटर की लेगसी को आगे बढ़ाएगा और शहरी ग्राहकों को एक हाइटेक और ईको-फ्रेंडली ऑप्शन करेगा. स्वैपेबल बैटरी सिस्टम Yamaha Jog E में स्वैपेबल बैटरी सिस्टम दिया गया है, इस टेक्नोलॉजी को Honda, Suzuki, Yamaha और Kawasaki ने मिलकर तैयार किया है. Jog E में 1.5 kWh का सिंगल स्वैपेबल बैटरी पैक लगाया गया है. हालांकि, इसकी रेंज थोड़ी कम है; फुल चार्ज होने पर यह मात्र 53 किमी की रेंज (30 किमी/घंटा की स्थिर गति पर) प्रदान करती है. इसमें AC सिंक्रोनस मोटर लगी हुई है, जो 2.3 PS की मैक्सिमम पावर और दमदार 90 Nm का टॉर्क जनरेट करती है. यह टॉर्क इसे शहर के ट्रैफिक में तेज़ी से पिक-अप देने में मददगार होगा. डिज़ाइन और फीचर्स Yamaha Jog E का डिज़ाइन काफी सिम्पल, क्लीन और हाइटेक है. इसे दो आकर्षक रंगों – डार्क ग्रे मैटेलिक और लाइट ग्रे – में पेश किया गया है. इसके डिज़ाइन में ऑल-LED लाइटिंग, पॉलीगोनल हेडलैंप, सर्कुलर मिरर्स और फ्लैट बॉडी पैनल जैसे फीचर्स शामिल हैं. सुविधाओं की बात करें तो, इसमें 500 ml का फ्रंट यूटिलिटी पॉकेट, एक USB Type-A चार्जिंग स्लॉट, सामान टाँगने के लिए बड़ा हुक, सीट के नीचे स्टोरेज और एक उल्टी (Inverted) LCD इंस्ट्रूमेंट स्क्रीन दी गई है. राइडिंग को बेहतर बनाने के लिए इसमें तीन अलग-अलग राइडिंग मोड्स भी दिए गए हैं. व्हील, ब्रेक और सस्पेंशन का सेटअप सवारी को आरामदायक और नियंत्रित बनाने के लिए Jog E में उचित सेटअप दिया गया है. इसके अगले पहिये का साइज़ 12-इंच है, जबकि पिछले पहिये का साइज़ 10-इंच रखा गया है. ब्रेकिंग सिस्टम में आगे की तरफ डिस्क ब्रेक और पीछे की तरफ ड्रम ब्रेक दिया गया है, जो कॉम्बी ब्रेक सिस्टम (CBS) के साथ आता है. सस्पेंशन के लिए, स्कूटर में आगे की तरफ टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे की तरफ डुअल शॉक एब्जॉर्बर का इस्तेमाल किया गया है, जो शहर की सड़कों पर झटकों को प्रभावी ढंग से झेलने में मदद करेंगे. कॉम्पैक्ट डिजाइन  Jog E को कॉम्पैक्ट बनाने पर जोर दिया गया है, जिसकी कुल लंबाई 1795 मिमी, चौड़ाई 680 मिमी और ऊँचाई 1140 मिमी है, जबकि इसका व्हीलबेस 1300 मिमी है. इसकी सीट की ऊँचाई 740 मिमी है, जो इसे छोटे कद के राइडर्स के लिए भी सुविधाजनक बनाती है. बैटरी सहित इसका कुल वज़न मात्र 93 किग्रा है, जो इसे हैंडल करने में बहुत हल्का बनाता है. हालांकि, यह स्कूटर सिर्फ़ एक यात्री (Single Rider) की क्षमता के साथ आती है, जो इसकी कॉम्पैक्ट शहरी प्रकृति को दर्शाता है. इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 135 मिमी है. कीमत  Yamaha Jog E इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 10% कंज्यूमर टैक्स सहित 159,500 जापानी येन रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹90,000 के आसपास है. यह कीमत केवल स्कूटर के लिए है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को बैटरी पैक और स्वैपिंग सर्विस का खर्च अलग से वहन करना होगा. यह स्वैपेबल बैटरी मॉडल उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लंबे चार्जिंग टाइम से बचना चाहते हैं.