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सिंगर हंसराज रघुवंशी को मिली धमकी: लॉरेन्स के नाम पर रंगदारी की मांग, पुलिस में शिकायत दर्ज

मुंबई 'मेरा भोला है भंडारी' भजन से मशहूर हुए सिंगर हंसराज रघुवंशी को जान से मारने की धमकी दी गई है। लॉरेंस और गोल्डी बरार गैंग से जुड़े होने का दावा करते हुए हंसराज रघुवंशी से 15 लाख रुपये की मांग की है। सिंगर की तरफ से मोहाली में इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश के एक शख्स के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई है। आरोपी हंसराज रघुवंशी की शादी में शरीक हुआ था और पहले उसने उनके परिवार का भरोसा जीता। आरोपी ने गायक और उनके परिवार से 15 लाख रुपये की मांग की और पैसे न देने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं। कहां-कब हुई हंसराज से पहली मुलाकात पुलिस ने मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी राहुल कुमार नागड़े के खिलाफ इस मामले में BNS की धारा 296, 351(2), 308(5) और आईटी एक्ट 67 के तहत एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में बताया गया है कि आरोपी की रघुवंशी से पहली मुलाकात उज्जैन के महाकाल मंदिर में हुई थी, जहां उन्होंने एक प्रोग्राम किया था। उसने पहले रघुवंशी परिवार का भरोसा जीता और फिर वह सिंगर का छोटा भाई बनकर लोगों को ठगने लगा। वह लगातार हंसराज के कार्यक्रमों में जाने लगा और खुद को उनका बड़ा भक्त बताते हुए उनसे नजदीकियां बढ़ाता गया। लोगों में फैलाया यह भ्रम, उठाया फायदा धीरे-धीरे उसने रघुवंशी के परिवार और टीम के मोबाइल नंबर हासिल कर लिए। उसने ‘राहुल रघुवंशी’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और लोगों में ऐसी इमेज बनाई कि वह गायक का सगा छोटा भाई है। उसने हंसराज से कहकर अपना अकाउंट फॉलो करवा लिया, ताकि लोगों को यकीन हो कि वह वाकई सगा भाई है। साल 2023 में हंसराज की शादी में भी वह शामिल हुआ और परिवार की और तस्वीरें और कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपने पास रख लिए। आरोपी राहुल ने लोगों को ठगना और उनसे महंगे गिफ्ट लेना शुरू कर दिया। वो ऑर्गनाइजर्स का भी फायदा उठाने लगा। वह ओडिशा की एक महिला को भी अपने साथ ले आया और उसे यकीन दिलाया कि वो हंसराज रघुवंशी का सगा भाई है। अनफॉलो किया तो आने लगीं धमकियां हंसराज और उनकी पत्नी कोमल सकलानी को जब इन घटनाओं की जानकारी मिली, तो उन्होंने आरोपी को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया। इसके बाद से ही आरोपी का व्यवहार और आक्रामक हो गया। राहुल ने फोन और व्हाट्सऐप कॉल करके हंसराज, उनकी पत्नी और परिवार को जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं। उसने दावा किया कि वह लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार गैंग से जुड़ा है और यदि पैसे नहीं दिए गए तो वह गायक और उनके परिवार को जान से मार देगा। शिकायत के मुताबिक आरोपी ने सोशल मीडिया पर गायक की छवि खराब करने वाली पोस्टें भी डालीं।

जाने भी दो यारों से साराभाई वर्सेस साराभाई तक: सतीश शाह की कहानी

मुंबई 'जाने भी दो यारों', 'मैं हूं ना', 'कल हो ना हो' और 'फना' समेत कई बॉलीवुड फिल्मों में कभी गंभीर तो कभी मजाकिया किरदार निभाकर सतीश शाह ने अपनी पहचान बनाई थी। शनिवार दोपहर टेलीविजन और फिल्मी दुनिया के इस मशहूर अभिनेता ने हमें अलविदा कह दिया। किडनी फेलियर के चलते 74 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। सतीश शाह अपनी बेहतरीन टाइमिंग और किरदारों को पर्दे पर हुबहू जीने के लिए जाने जाते थे। आपको बताते चलें कि उनका करियर सिर्फ हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें गंभीर भूमिकाओं के लिए भी पहचाना जाता था। सतीश शाह को ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ टीवी शो से सबसे ज्यादा पहचान मिली थी। जानिए उनके फिल्में और सीरियल के बारे में। 'भगवान परशुराम' से की करियर की शुरुआत सतीश ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘भगवान परशुराम’ से की थी। उन्हें पहला बड़ा रोल 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'उमराव जान' में दिलावर के रूप में मिला।  इसके बाद 1983 में रिलीज हुई ‘जाने भी दो यारों’ में कमिश्नर डिमेलो का किरदार निभाकर वो घर-घर मशहूर हो गए। सतीश आगे कई फिल्मों में काम करते रहे पर ज्यादातर चरित्र भूमिकाओं में ही नजर आते थे। 90 के दशक में निभाए कॉमेडी किरदार चाहे 'हम आपके हैं कौन' में डॉक्टर का किरदार हो या 'अकेले हम अकेले तुम' में गुलबदन कुमार का। 90 के दशक में सतीश ने ज्यादातर फिल्मों में हास्य भूमिकाएं निभाईं। इनमें 'जुड़वा', 'साजन चले ससुराल', 'घरवाली-बाहरवाली', 'अनाड़ी नंबर वन' जैसी कई फिल्में शामिल थीं। शाहरुख के साथ 'चलते-चलते', सलमान के साथ 'मुझसे शादी करोगी' और आमिर के साथ 'अकेले हम अकेले तुम'। अपने करियर में सतीश ने तीनों खान के साथ कई फिल्मों में काम किया। आखिरी बार सतीश 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हमशक्ल्स’ में नजर आए थे। टीवी से बनाई असली पहचान सतीश ने अपनी असली पहचान टेलीविजन की दुनिया से बनाई। यहां उन्होंने 'घर जमाई' और 'साराभाई वर्सेस साराभाई' जैसे टीवी शो करने के साथ ही 'कॉमेडी सर्कस' में बतौर जज भी भाग लिया। यहां वो अर्चना पूरन सिंह के साथ जज की कुर्सी पर बैठे नजर आते थे। आपको बताते चलें कि अभिनेता लगभग 11 साल से इंडस्ट्री से दूर थे। इन पुरस्कारों से नवाजे गए थे सतीश शाह सतीश शाह को उनके लंबे और प्रभावशाली करियर के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले। उन्हें 'साराभाई वर्सेस साराभाई' के लिए इंडियन टेली एकेडमी अवॉर्ड की तरफ से बेस्ट कॉमिक एक्टर का पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें इंडियन टैली अवॉर्ड भी मिला था।  

बॉलीवुड में शोक की लहर, दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का 74 वर्ष की आयु में निधन

मुंबई  बॉलीवुड और टीवी का जाना माना नाम रहे एक्टर सतीश शाह का निधन हो गया है. 25 अक्टूबर दोपहर 2.30 बजे उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली. जानकारी के मुताबिक, सतीश किडनी से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे थे. उनके मैनेजर ने इंडिया टुडे/आजतक से बातचीत में एक्टर के निधन की खबर की पुष्टि की है. सतीश शाह का अंतिम संस्कार 26 अक्टूबर को किया जाएगा. फिलहाल उनका पार्थिव शरीर अस्पताल में ही है. बॉलीवुड का जाना माना नाम थे सतीश शाह सतीस शाह ने 74 साल की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली. अभी बॉलीवुड पीयूष पांडे के निधन की खबर से उबर ही रहा था कि सतीश के अचानक जाने से इंडस्ट्री को एक और बड़ा झटका लगा है. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में मातम पसर गया है. सतीश शाह ने अपने करियर में ढेरों फिल्मों में काम किया. हालांकि उन्हें घर-घर में फेमस टीवी शो 'साराभाई वर्सेस साराभाई' में इंद्रवदन साराभाई उर्फ इंदु के रोल ने बनाया था. इस कॉमेडी शो में सतीश का काम कमाल था. आज भी इंस्टाग्राम पर शो से उनके क्लिप्स वायरल होते हैं. सतीश का जन्म गुजरात के मांडवी में हुआ था. उन्होंने जेवियर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से पढ़ाई की थी. 1972 में सतीश की शादी डिजाइनर मधु शाह से हुई थी. कोरोना काल में उन्होंने वही कोविड का सामना किया था. सतीश शाह ने अपने करियर की शुरुआत बॉलीवुड की फिल्म से की थी. उनकी पहली पिक्चर 'भगवान परशुराम' थी. इसके बाद 'अरविंद देसाई की अजीब दास्तान', 'गमन', 'उमराव जान', 'शक्ति', 'जाने भी दो यारों', 'विक्रम बेताल' जैसी फिल्मों में वो नजर आए.

भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे का निधन, प्रणव अदाणी ने कहा- हमेशा खलेगी कमी

मुंबई, भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज और ओगिल्वी इंडिया के क्रिएटिव लीडर पीयूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। 70 साल की उम्र में गुरुवार को उनका निधन हो गया। पांडे को सिर्फ एक विज्ञापन विशेषज्ञ के रूप में ही नहीं बल्कि ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाता था, जिन्होंने भारतीय विज्ञापन को उसकी अपनी भाषा और आत्मा दी। पीयूष पांडे के निधन को लेकर लेखक और कमीडियन सुहेल सेठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के निधन से मैं बेहद दुखी और स्तब्ध हूं। भारत ने विज्ञापन जगत की एक महान हस्ती ही नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और एक सज्जन इंसान को खोया है। अब जन्नत में भी गूंजेगा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा।’ अदाणी ग्रुप में एग्रो और ऑयल एंड गैस के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव अदाणी ने पीयूष पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, ”मेरे प्रिय मित्र पीयूष पांडे के निधन से स्तब्ध हूं, वह रचनात्मक प्रतिभा जिन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में आकार दिया। उनके विचार उद्योग के मानक बने। उन्होंने कई पीढ़ियों के कहानीकारों को प्रेरित किया। उनकी गर्मजोशी और बुद्धिमता की बहुत कमी खलेगी। ओम शांति।” वहीं फिल्ममेकर हंसल मेहता ने भी ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”फेविकोल का जोड़ टूट गया। विज्ञापन जगत ने आज अपनी चमक खो दी। पीयूष पांडे, आप हमेशा याद आएंगे।” पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था। उनके परिवार में नौ बच्चे थे, जिनमें सात बहनें और दो भाई शामिल थे। उनके भाई प्रसून पांडे फिल्म निर्देशक हैं, जबकि बहन ईला अरुण गायिका और अभिनेत्री थीं। उनके पिता राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में कार्यरत थे। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और 1982 में विज्ञापन जगत में कदम रखा और ओगिल्वी इंडिया में क्लाइंट सर्विसिंग एक्जीक्यूटिव के रूप में शामिल हुए। उनका पहला प्रिंट विज्ञापन सनलाइट डिटर्जेंट के लिए लिखा गया। छह साल बाद वे क्रिएटिव विभाग में आए और लूना मोपेड, फेविकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स जैसे ब्रांड्स के लिए कई प्रसिद्ध विज्ञापन बनाए। इसके बाद उन्हें क्रिएटिव डायरेक्टर और फिर राष्ट्रीय क्रिएटिव डायरेक्टर बनाया गया। 1994 में उन्हें ओगिल्वी इंडिया के निदेशक मंडल में भी स्थान मिला। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया ने लगातार 12 वर्षों तक भारत की नंबर 1 एजेंसी का दर्जा हासिल किया। पीयूष पांडे द्वारा बनाए गए विज्ञापन आज भी लोगों की यादों में बसे हुए हैं। उन्होंने एशियन पेंट्स के लिए ‘हर खुशी में रंग लाए,’ कैडबरी के लिए ‘कुछ खास है,’ फेविकोल के लिए आइकॉनिक ‘एग’ विज्ञापन और हच के पग वाले विज्ञापन जैसी रचनाएं तैयार कीं। इसके अलावा, उन्होंने 2014 में भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी नारा ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ दिया। उनका योगदान केवल व्यावसायिक विज्ञापन तक सीमित नहीं था। उन्होंने राष्ट्रीय एकता गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ लिखा और कई सामाजिक अभियान जैसे पोलियो जागरूकता और धूम्रपान विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। पांडे को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें 2016 में पद्म श्री से नवाजा गया और 2024 में एलआईए लीजेंड अवार्ड दिया गया। इसके अलावा, उन्हें क्लियो लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, मीडिया एशिया अवार्ड्स और कान्स लायंस में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया को वैश्विक स्तर पर सबसे रचनात्मक कार्यालयों में से एक माना गया। उनकी रचनात्मकता, सहजता और भारतीय विज्ञापन को दी गई दिशा उन्हें हमेशा यादगार बनाएगी।  

मनोज तिवारी का ‘छठ तोहफा’, रिलीज किया ‘हां, हम बिहारी हैं जी’ गाना

मुंबई,  भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने एक नया गाना ‘हां, हम बिहारी हैं जी’ रिलीज किया है, जो बिहार की संस्कृति, गौरव और माटी से जुड़े हर पहलू को सुंदरता से उजागर करता है। इस गाने में छठ पूजा का भी जिक्र किया गया है। गाने की लय और बोल बिहार के लोगों की मेहनत, कला और संस्कृति को प्रगति की ओर अग्रसर करने की प्रेरणा देते हैं। ‘हां, हम बिहारी हैं जी’ गाना भोजपुरी आईटी सेल के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। मनोज तिवारी ने इंस्टाग्राम पर इस गाने का एक क्लिप पोस्ट की और कैप्शन में लिखा, “सबसे ज्यादा आईएस-पीसीएस विद्यापति की रचना हैं हम। रेणु की कहानी दे दी, दिनकर की कविता हैं हम। कभी सांचे में ढल जाते हैं, कभी खुद सांचा बन जाते हैं, कभी चट्टानों से टकराकर झरना हम नया बनाते हैं। गुरु गोविंद सिंह का साहस नालंदा की क्यारी हैं जी। हां, हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी।” अपने इस पोस्ट में उन्होंने अपने फैंस से अपील की कि वे इस गाने को जरूर देखें और बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को महसूस करें। गाने की टीम की बात करें, तो गाने के बोल अतुल कुमार राय ने लिखे हैं और संगीत मधुकर आनंद ने दिया है। इसके साथ ही शैलेंद्र द्विवेदी ने गाने को कंपोज किया है। मनोज तिवारी ने हमेशा अपने गानों और फिल्मों के जरिए बिहार की पहचान को बढ़ावा दिया है। उनका यह गाना न केवल भोजपुरी संगीत प्रेमियों के लिए एक तोहफा है, बल्कि बिहार की संस्कृति को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का एक प्रयास भी है। बिहार की मेहनतकश जनता, उनकी कला और उनके गौरवशाली इतिहास को मनोज तिवारी ने पेश किया है। मनोज तिवारी का करियर हमेशा से ही बहुआयामी रहा है। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान एक अभिनेता और गायक के रूप में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘ससुरा बड़ा पैसावाला’, ‘दरोगा बाबू आई लव यू’, और ‘बंधन टूटे ना’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों में जगह बनाई। इसके अलावा उनका गाना ‘जिया हो बिहार के लाला’ आज भी लोगों का पसंदीदा है। वहीं, राजनीति में भी उनका सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे 2014 और 2019 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर दिल्ली के उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद चुने गए।  

जो जोनस का इमोशनल खुलासा – ‘तलाक आसान नहीं…’ क्या सोफी टर्नर से फिर जुड़ेंगे रिश्ता?

लॉस एंजिल्स प्रियंका चोपड़ा के जेठ यानी निक जोनस के बड़े भाई जो जोनस ने आखिरकार तलाक पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। वो और उनकी वाइफ सोफी टर्नर का रिश्ता टूट चुका है। जो ने 'गेम ऑफ थ्रोन्स' की एक्ट्रेस के साथ अपने बच्चों विला और डेल्फिन की साथ में परवरिश पर भी बात की। तलाक के दौरान अपने भाइयों केविन जोनस और निक के साथ रहने के बारे में भी चर्चा की। प्रियंका चोपड़ा के जेठ जो जोनस ने 'एस्क्वायर' से बात करते हुए कहा, 'तलाक मुश्किल होता है। ये किसी के लिए भी आसान नहीं होता। लोग बहुत जल्दी अनुमान लगा लेते हैं। और मैं बस आभारी हूं कि मेरे पास ये लोग हैं, और मेरा एक अद्भुत परिवार और दोस्त हैं।' लोगों का ध्यान भटका सकते हैं जो जोनस जो जोनस ने आगे कहा, 'लोग बहुत सी परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और यह फैक्ट कि मैं परफॉर्म करने जा सकता हूं और लोगों को कुछ महसूस करा सकता हूं और शायद उनका ध्यान उन परिस्थितियों से हटा सकता हूं जिनसे वे गुजर रहे हैं, या उनके तलाक से, दो घंटे के लिए जब वे एक म्यूजिक कॉन्सर्ट देखने आते हैं, इससे मुझे बहुत उद्देश्य मिला।' बच्चों की खातिर सबकुछ कर सकते हैं जो इसी बातचीत में सिंगर ने खुलासा किया कि वो अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, यहां तक कि अपनी को-पैरेंट सोफी के साथ रिश्ता भी बना सकते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं लगभग दो साल बाद इस दुनिया से बाहर आ सकता हूं और अपनी को-पैरेंट सोफी के साथ रिश्ता बना सकता हूं, आपको एहसास होगा कि आप अपने बच्चों के लिए कुछ भी करते हैं। मैं उनके लिए कुछ भी करूंगा और इसके लिए बहुत कुछ करना होगा।' 'हमारा सुंदर रिश्ता था' बता दें कि साल 2023 में जो जोनस ने शादी के 4 साल बाद मियामी में तलाक की अर्जी दी थी। उन्होंने ज्वॉइंट स्टेटमेंट दिया था कि उन्होंने 'आपसी सहमति' से अलग होने का फैसला लिया है। साल 2024 में जो ने 'हार्पर बाजार' को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'हमारा एक सुंदर रिश्ता था और ये मुश्किल था।'

किचन में उतरे गौरव खन्ना! अभिषेक बजाज ने किया सरप्राइज़, मालती ने दी वाहवाही

मुंबई 'अनुपमा' के अनुज कपाड़िया उर्फ गौरव खन्ना इस वक्त सलमान खान के रियलिटी शो 'बिग बॉस 19' में नजर आ रहे हैं। उन्होंने 'सेलिब्रिटी मास्टरशेफ' जीता था लेकिन इस शो के किचन में कभी कदम नहीं रखा। लेकिन अब अभिषेक बजाज की चाल ने उनके हाथ में बेलन पकड़वा दिए हैं, जिससे एक्टर खफा भी हो गए हैं और बाकी लोग बेहद खुश। मालती चाहर भी जीके को खाना पकाते देख खुशी से झूम उठी हैं। 'बिग बॉस 19' के नए कैप्टन मृदुल तिवारी बने हैं। और जैसे ही कोई नया कप्तान बनता है, डाइनिंग टेबल पर सबको बैठाकर उनको ड्यूटी असाइन की जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। दो महीनों से जहां गौरव खन्ना किचन ड्यूटी से बच रहे थे। वही अभिषेक बजाज के कहने पर उन्हें रोटी बनानी ही पड़ गई, जिससे एक्टर चिढ़ भी गए। अभिषेक बजाज ने गौरव को पहुंचाया किचन लेटेस्ट प्रोमो में अभिषेक बजाज कहते हैं, 'गौरव भाई अगर खाना न बनाएं तो मजा नहीं आएगा यार…।' ये सुनते ही एक्टर बिदक जाते हैं और फिर अभिषेक से कहते हैं, 'आगे से मेरे से पूछ लिया कर ये सब समझे।' इसके बाद वह प्रणित को रोटी बेलकर दिखाते हैं। तो मालती कहती हैं, 'अरे वाह जीके किचन में।' इधर अभिषेक गार्डन में अशनूर से कहते हैं, 'यही मौका था उन्हें…।' प्रणित ने बजाज से कहा, 'अरे वो ट्रिगर हो गए न अब।' गौरव को खाना बनाता देख अभिषेक बोले- मजा आ गया अभिषेक ने प्रणित से कहा, 'किचन में डालना था मुझे। 10 हफ्ते से वो अवॉइड कर रहे हैं किचन।' इधर, जब गौरव रोटी बना रहे होते हैं तो मृदुल कैमरे पर देखकर कहते हैं, 'दोस्तों, बखूबी अपना काम कर रहे हैं किचन में। क्या आप पहचान रहे हैं, इस खूबसूरत से चेहरे को?' अभिषेक बजाज कहते हैं, 'मजा आ गया।'

‘स्‍त्री 2’ के म्‍यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी पर यौन शोषण के आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

मुंबई बॉलीवुड सिंगर और संगीतकार सचिन सांघवी गिरफ्तार हो गए हैं। एक महिला को म्यूजिक एल्बम में मौका देने और शादी का वादा करके उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने शुक्रवार को एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि 'स्त्री 2' और 'भेड़िया' जैसे हिट गानों के लिए मशहूर सचिन सांघवी को गुरुवार को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने बताया कि 20 साल की उम्र की शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वह फरवरी 2024 में सांघवी के संपर्क में आई थी और उन्होंने उसे इंस्टाग्राम पर एक मैसेज भेजा था। अधिकारी ने बताया कि गायक-संगीतकार ने कथित तौर पर उसे अपने म्यूजिक एल्बम में मौका देने का वादा किया था और उन्होंने फोन नंबर एक्सचेंज किए। महिला ने लगाया ये आरोप महिला ने आरोप लगाया है कि सचिन सांघवी ने उसे अपने स्टूडियो में बुलाया, जहां उन्होंने पहले शादी का प्रस्ताव रखा और कई मौकों पर उसका यौन शोषण किया। उन्होंने बताया कि जांच के बाद कंपोजर को गिरफ्तार कर लिया गया। सचिन-जिगर की जोड़ी हिट रही सचिन सांघवी, बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री में अपने काम के लिए मशहूर लोकप्रिय संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर के सदस्य हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रीतम के सहायक के रूप में की थी और फिर जिगर सरैया के साथ मिलकर अपनी खुद की संगीतकार जोड़ी बनाई। साथ में, सचिन-जिगर ने 'जीने लगा हूं' (रमैया वस्तावैया), 'सुन साथिया' (एबीसीडी 2), 'चुनर' (एबीसीडी 2), 'अपना बना ले' (भेड़िया), और 'माना के हम यार नहीं' (मेरी प्यारी बिंदु) जैसे चार्टबस्टर्स बनाए हैं। सचिन सांघवी काम के लिए मशहूर उनका संगीत कई जॉनर, रोमांटिक, डांस ट्रैक और भक्ति गीतों में फैला हुआ है और उन्होंने वेब सीरीज, गुजराती फिल्मों और सिंगल गानों के लिए भी संगीत तैयार किया है। सचिन सांघवी और उनके साथी जिगर को उनकी आवाज, ताजा ट्रैक और इमोशनल ट्यूनिंग के लिए सराहा गया है, जिससे वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे अधिक मांग वाली संगीतकार जोड़ियों में से एक बन गए हैं।

तापसी पन्नू की नई जिंदगी: भारत छोड़ डेनमार्क में क्यों रही बताई वजह

डेनमार्क तापसी पन्नूी उन सेलेब में से एक हैं अपने से जुड़े किसी भी अफवाह पर तुरंत रिएक्ट करती हैं। अब ऐसी खबरें आ रही थीं कि तापसी ने भारत को छोड़कर विदेश में शिफ्ट हो गई हैं अपने पति के साथ। इन अफवाहों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए तापसी ने फेक खबरें देने वालों को लताड़ा भी है। उन्होंने कहा थोड़ा रिसर्च कर लिया करो। तापसी ने क्या कहा तापसी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'क्या इससे ज्यादा कम झूठी और कम सेंसेशनल हेडलाइन हो सकती है? या फिर हेडलाइन गलत हो या सही, आप तक आएगी सबसे तेज पोर्टल। थोड़ा स्लो हो जाओ और थोड़ी रिसर्च करो।' तापसी ने आगे बताया कि वह मुंबई में अपने घर पर हैं। उन्होंने लिखा, मुंबई की सुबह में डोसा खाते हुए ये सब पढ़ रही हूं। क्या बोला था तापसी ने दरअसल, हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए तापसी ने बताया था कि डेनमार्क की लाइफ कैसी होती गै। उन्होंने कहा था, ‘भारत में जो कॉमन है और डेनमार्क में जो अजीब है वो ये कि मैथियाज(तापसी के पति) के पैरेंट्स हमारे साथ रहते हैं। उनका अपना स्पेस है ग्राउंड फ्लोक में, उनका अपना बेडरूम, लिविंग रूम, डाइनिंग रूम एरिया है। मुझे काफी समय लगा था उन्हें ये मनाने में कि वे हमारे साथ रहें क्योंकि डैनिश कल्चर में बड़े बच्चों के साथ रहना कॉमन नहीं है।’ 2 देशों में कैसे करती हैं एडजस्ट दोनों देशों में वह कैसे सब मैनेज करती हैं तो तापसी ने कहा, 'ये सब काम पर निर्भर करता है। अच्छी बात यह है कि कई शूट भारत में सर्दी के मौसम में होते गैं। गर्मियों और बारिश में कम शूट होते हैं तो डेनमार्क हम गर्मियों में रहते हैं। वहीं बाकी फिर हम इंडिया रहते हैं।'

एड इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान: पीयूष पांडेय का निधन, उनके क्रिएटिव कैंपेन ने दिया कई यादगार विज्ञापन

नई दिल्ली इंडियन एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के मशहूर नाम पीयूष पांडे का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने चार दशकों से ज्यादा वक्त तक ओगिल्वी इंडिया के साथ काम किया. पीयूष पांडे 1982 में ओगिल्वी से जुड़े थे. उन्होंने 27 साल की उम्र में अंग्रेजी-प्रभुत्व वाले विज्ञापन उद्योग में प्रवेश किया और इसे हमेशा के लिए बदल दिया.  बिजनेसमेन सोहेल सेठ ने पीयूष पांडे के निधन पर सोशल मीडिया अकाउंट पर शोक जताया. उन्होंने लिखा, "मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे जीनियस के खोने से मैं बहुत ज़्यादा दुखी और टूट गया हूं. भारत ने सिर्फ़ एक महान एडवरटाइजिंग माइंड ही नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और एक बहुत अच्छे इंसान को खो दिया है." विज्ञापन की दुनिया में नए रंग भरे थे और उनके कई कैंपेन तो बेहद चर्चित रहे और घर-घर में ब्रांड्स की पहचान बनी। जैसे उन्होंने एशियन पेंट्स का कैंपेन स्लोगन लिखा था- हर खुशी में रंग लाए। इसके अलावा कैडबरी का ऐड 'कुछ खास है' भी उनकी कलम से निकला था। लंबे समय तक भारत की विविधता में एकता को दिखाने वाले गीत 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' के लेखक भी वही थे। यह गाना तो दूरदर्शन का थीम सॉन्ग बन गया था। फिर इंटरनेट के प्रसार होने पर लोग यूट्यूब आदि पर जाकर भी इस गीत को सुनते रहे। उन्होंने फेविकोल, हच जैसी कंपनियों के लिए भी कई सफल ऐड कैंपेन को लीड किया था। वह 70 साल के थे। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रचार का नारा भी उन्होंने दिया था, जो काफी चर्चित रहा। यह नारा था- अबकी बार, मोदी सरकार। पीयूष पांडेय को भारत की विज्ञापन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने नामी ऐड कंपनी ओगिल्वी इंडिया के साथ करीब 4 दशकों तक काम किया था। यह कंपनी देश में ऐडवर्टाइजमेंट की दुनिया का पर्याय बनी रही और इसमें अहम भूमिका पीयूष पांडेय की भी मानी जाती है। उनकी निधन के साथ ही विज्ञापन की दुनिया का एक युग समाप्त हो गया है। उनकी शानदार मूंछें और हंसमुख चेहरा हमेशा याद किया जाएगा। उन्हें भारतीय समाज की भाषा, परंपरा की गहरी समझ थी। यही कारण था कि उनके कई कैंपेन तो ऐसे थे, जो लोगों के दिलों को छू गए। प्रोडक्ट लोकप्रिय हुए तो उनके बनाए विज्ञापनों ने भी खूब चर्चा बटोरी और लोग पूरी दिलचस्पी से विज्ञापन देखते रहे। पीयूष पांडेय ने 1982 में ओगिल्वी इंडिया को जॉइन किया था। इससे पहले वह एक क्रिकेटर रहे थे। इसके अलावा चाय बागान में उन्होंने काम किया था और निर्माण क्षेत्र में भी काम कर चुके थे। उन्होंने 27 साल की उम्र में इस इंडस्ट्री में एंट्री ली और अंग्रेजी भाषा के प्रभुत्व वाली विज्ञापन की दुनिया का कलेवर ही बदल डाला। एशियन पेंट्स, कैडबरी समेत कई कंपनियों के कैंपेन्स को उन्होंने नई ऊंचाइयां दी थीं। सोहेल सेठ ने आगे कहा कि अब स्वर्ग में 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' पर डांस होगा." फिल्ममेकर हंसल मेहता ने लिखा, "फेविकोल का जोड़ टूट गया. आज एड वर्ल्ड ने अपना ग्लू खो दिया. पियूष पांडे, आप अच्छे से जाएं." 'हमेशा याद रहने वाली कहानियां…' केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "पद्म श्री पीयूष पांडे के निधन पर अपनी उदासी ज़ाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. एडवरटाइजिंग की दुनिया में एक महान हस्ती, उनकी क्रिएटिव जीनियस ने कहानी कहने के तरीके को फिर से परिभाषित किया और हमें यादगार और हमेशा याद रहने वाली कहानियां दीं." उन्होंने आगे कहा कि मेरे लिए, वह एक ऐसे दोस्त थे, जिनकी चमक उनकी सच्चाई, गर्मजोशी और हाज़िरजवाबी में दिखती थी. मैं हमेशा उनके साथ हुई अपनी दिलचस्प बातचीत को याद रखूंगा. वह अपने पीछे एक गहरा खालीपन छोड़ गए हैं, जिसे भरना मुश्किल होगा. उनके परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. विज्ञापन जगत की दिग्गज शख्सियत पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर के एक परिवार में हुआ था. उनके नौ भाई-बहन थे, जिनमें सात बहनें और दो भाई शामिल थे. पीयूष पांडे के पिता एक बैंक में काम करते थे. पांडे ने कई सालों तक क्रिकेट भी खेला था. उन्होंने एशियन पेंट्स के लिए 'हर खुशी में रंग लाए', कैडबरी के लिए 'कुछ खास है' और फेविकोल और हच जैसे ब्रांडों के लिए विज्ञापन बनाए.