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पिछली बार मामूली अंतर से जीती गई 36 सीटें, विधानसभा चुनाव में फिर छिड़ेगी जंग

पटना पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीती गई तीन दर्जन से अधिक सीटों पर इसबार भी घमासान के आसार हैं। ये ऐसी सीटें हैं, जिन पर हार जीत का फैसला तीन हजार के करीब या उससे भी कम वोटों के अंतर से हुआ। इस श्रेणी में महागठबंधन के हिस्से की 17 सीटें हैं। एक निर्दलीय और 19 एनडीए के पास हैं। सबसे कम 12 वोटों के अंतर से हिलसा में जदयू उम्मीदवार कृष्ण मुरारी शरण की जीत हुई थी। उन्होंने राजद के शक्ति सिंह यादव को पराजित किया था। राजद ने उस समय भी धांधली का आरोप लगाया था। दो चुनावों के बीच गठबंधनों के पार्टनरों के बदलाव से भी अगला चुनाव प्रभावित होगा। सिमरी बख्तियारपुर में विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी केवल 1759 वोटों के अंतर से चुनाव हारे। राजद के चौधरी युसूफ सलाउद्दीन ने उन्हें पराजित किया था। इसी तरह सुगौली में राजद के शशिभूषण सिंह ने विकासशील इंसान पार्टी के रामचंद्र सहनी को 3447 वोटों के अंतर से पराजित किया।अब विकासशील इंसान पार्टी और राजद में दोस्ती है। दूसरे नम्बर की इन सीटों के लिए मुकेश सहनी राजद पर निर्भर हो गए हैं। कम वोटों के अंतर से जीतने वाली महागठबंधन की अन्य सीटें हैं:     सिकटा- वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता- भाकपा माले- 2302     कल्याणपुर- मनोज कुमार यादव- राजद -1197     बाजपट्टी, मुकेश यादव- राजद- 2704     किशनगंज- इजरारूल हक- कांग्रेस-1381     बखरी- सूर्यकांत पासवान-भाकपा -777     खगड़िया- छत्रपति सिंह यादव- कांग्रेस- 3000     राजापाकर- प्रतिमा दास-कांग्रेस 1746     भागलपुर- अजित शर्मा- कांग्रेस-1113     डेहरी आन सोन- फतेह बहादुर कुशवाहा- राजद -464     औरंगाबाद- आनंद शंकर सिंह- कांग्रेस-2243     अलौली- रामवृक्ष सदा- राजद- 2773     महाराजगंज- विजय शंकर दुबे- कांग्रेस-1976     सिवान- अवध बिहारी चौधरी- राजद-1973 दरभंगा ग्रामीण से राजद के ललित कुमार यादव की जीत 2141 वोटों के अंतर से हुई थी। उस समय के जदयू उम्मीदवार डॉ. फराज फातमी अब राजद में हैं। राजद उन्हें दरभंगा जिले की किसी अन्य सीट से उम्मीदवार बनाएगा। रामगढ़ का हिसाब हो गया है। वहां राजद के सुधाकर सिंह 189 वोटों के अंतर से जीते थे। वे लोकसभा के लिए चुन लिए गए। उप चुनाव में भाजपा के हिस्से में यह सीट आ गई। रामगढ़ की तरह कुड़हनी विधानसभा की सीट भी उप चुनाव में राजद के हाथ से निकल गई। 2020 में राजद के डा. अनिल सहनी 712 वोटों से जीते थे। कानूनी प्रक्रिया में उनकी सदस्यता समाप्त हुई। उप चुनाव हुआ तो भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता जीत गए। एनडीए की सीटें और वोटों का अंतर     परिहार- गायत्री देवी- भाजपा-1569     रानीगंज- अचमित सदा- जदयू-2304     प्राणपुर- निशा सिंह- भाजपा-2972     अलीनगर- मिश्रीलाल यादव- भाजपा-3101     बहादुरपुर- मदन सहनी- जदयू-2629     सकरा- अशोक चौधरी- जदयू-1537     भोरे- सुनील कुमार-जदयू-462     हाजीपुर- अवधेश सिंह-भाजपा-2990     बछवाड़ा- सुरेश मेहता-भाजपा-484     परवत्ता- संजीव कुमार- जदयू-951     मुंगेर- प्रणव कुमार दास-भाजपा-1244     बरबीघा-सुदर्शन कुमार-जदयू-113     आरा-अमरेंद्र प्रताप सिंह-भाजपा-3002     टिकारी-अनिल कुमार-हम-2630      झाझा-दामोदर राऊत-जदयू-1679। मटिहानी से लोजपा राजकुमार सिंह-333 वोटों के अंतर से जीते थे। दूसरे नम्बर पर जदयू के नरेंद्र कुमार सिंह थे। राज कुमार सिंह अभी जदयू में हैं।नरेंद्र कुमार सिंह राजद में शामिल हो गए। चकाई से सुमित कुमार सिंह ने निर्दलीय की हैसियत से राजद की सावित्री देवी को 581 वोटों के अंतर से पराजित किया था। सुमित ने नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन किया। अभी मंत्री हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भारी संख्या में आवेदन, चुनाव आयोग 30 सितंबर को लाएगा अंतिम लिस्ट

नई दिल्ली बिहार में चुनाव आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 1.98 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। आयोग ने शनिवार को बताया कि इस दौरान नाम शामिल करने के लिए लगभग 30,000 आवेदन भी आए हैं। मतदाता सूची का मसौदा एक अगस्त को प्रकाशित किया गया था और यह एक सितंबर तक व्यक्तियों तथा राजनीतिक दलों की ओर से दावों और आपत्तियों के लिए खुला रहेगा। चुनाव कानूनों के अनुसार, लोगों और दलों को उन नामों को चुनौती देने का अधिकार है, जिन्हें वे मसौदा सूची में अपात्र मानते हैं। कौन-कौन नाम शामिल करवा सकता है? इसी प्रकार, जो लोग खुद को पात्र समझते हैं लेकिन सूची से बाहर रह गए हैं, वे भी नाम शामिल करने की मांग कर सकते हैं। बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंटों(बीएलए) ने अब तक बिहार के मतदाताओं की मसौदा सूची में शामिल करने के लिए 25 और बाहर करने के लिए 103 दावे दायर किए हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य के 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 प्रतिशत ने अब तक सत्यापन के लिए अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। SC का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के इच्छुक लोगों से आधार कार्ड या सूचीबद्ध 11 दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज स्वीकार करे। निर्वाचन आयोग ने शीर्ष कोर्ट से कहा है कि वह चुनावी राज्य बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर भरोसा जताए।  

उमा भारती ने पटवारी को कहा ‘बेचारा’, राजनीति में उम्र कोई बाधा नहीं—उन्होंने बोला

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र जीतू पटवारी के बयान पर भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाटवारी खुद नहीं जानते कि वे क्या बोल रहे हैं। वे बिना सोचे-समझे बयान देते हैं। उमा भारती ने उन्हें “बेचारा” बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब मध्य प्रदेश में समाप्त हो चुकी है और पटवारी ही उसके इकलौते नेता बचे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के कई दिग्गज नेता अब राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, जबकि नई पीढ़ी के नेता भाजपा से जुड़ रहे हैं। जो कांग्रेस नेता भाजपा में जगह नहीं पा रहे वे कांग्रेस में ही छूट गए हैं। राजनीति में योगदान की कोई उम्र तय नहीं  सेवानिवृत्ति की उम्र को लेकर चल रही बहस पर भी उमा भारती ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कोई भी संगठन, राजनीतिक दल या संस्था सेवानिवृत्ति की आयु तय कर सकती है, लेकिन योगदान की उम्र तय नहीं की जा सकती। उनके अनुसार राजनीति एक ऐसा मंच है, जहां योगदान देने की क्षमता ही असली पहचान है। उमा ने कहा कि डॉक्टर, टीचर, वकील की योगदान की क्षमता कभी खत्म नहीं होती। बता दें हाल ही में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि 75 साल की उम्र में पद छोड़ देंगे या किसी को इस उम्र में रिटायर्ड हो जाना चाहिए। संघ प्रमुख की इस टिप्पणी ने उनकी कुछ दिनों पहले दी उनकी टिप्पणी पर चल रही अटकलों पर उम्र विराम लगा दिया। 

न उमर, न महबूबा… जम्मू-कश्मीर में हर जगह दिख रहे एकनाथ शिंदे के पोस्टर

श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हों यो पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, इन दिनों जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर इनकी तस्वीर जितनी नहीं दिखती है उससे कहीं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की दिख रही है। सीमावर्ती राज्य में शिवसेना अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास एक होटल में आयोजित बैठक में करीब 700 लोग शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता खुद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने की। शिवसेना के स्थानीय नेता याक़ूब कुलगाम के रहने वाले हैं और पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) में थे। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि बैठक से पहले एक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा, “हमने बहुत सारे होर्डिंग्स लगाए ताकि लोग जान सकें कि शिवसेना कश्मीर में आ गई है। इन होर्डिंग्स के लिए हमने कोई भुगतान नहीं किया। हमारा मकसद था कि लोग इन्हें देखें और चर्चा करें।” कश्मीर में शिंदे की सक्रियता याक़ूब ने कहा कि एकनाथ शिंदे अक्सर घाटी का दौरा करते रहते हैं और यहां पार्टी को मजबूत करने के लिए गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि, “पहले शिवसेना को लेकर कश्मीर में कई भ्रांतियां थीं, लेकिन शिंदे जी के लगातार दौरों के कारण लोग अब पार्टी को सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।” जून 2023 में शिंदे ने श्रीनगर में शिवसेना के 15 राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। यह महाराष्ट्र से बाहर शिवसेना की पहली बड़ी बैठक थी। नवंबर 2023 में शिंदे ने LoC के नजदीक कुपवाड़ा में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया था। शिवसेना कश्मीर के अध्यक्ष मोहम्मद शफी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि शिंदे अगले महीने एक बार फिर कश्मीर दौरे पर आएंगे। उन्होंने बताया, “आदिल शाह के परिवार का घर लगभग पूरा हो गया है। शिंदे जी उसे देखना चाहेंगे।” गौरतलब है कि आदिल शाह पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों में शामिल थे।

1991 फ्रॉड वाले बयान पर कांग्रेस बैकफुट, BJP को मिला बड़ा मौका

बेंगलुरु  एक तरफ कांग्रेस यह आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरी है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर वोट चोरी कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने ऐसा बयान दिया है, जिससे उनकी पार्टी पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार कहा कि 1991 के लोकसभा चुनाव में फ्रॉड के चलते हार का सामना करना पड़ा था। अब उनके इस बयान पर विवाद हो रहा है क्योंकि तब कांग्रेस की ही सरकार थी और सिद्धारमैया तब जनता दल सेक्युलर के कैंडिडेट थे। वह कोप्पल सीट से चुनाव में उतरे थे। लेकिन उन्हें बसवराज पाटिल के मुकाबले 11,200 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जो कांग्रेस के कैंडिडेट थे। बसवराज पाटिल को कुल 2.41 लाख वोट मिले थे, जबकि सिद्धारमैया को 2 लाख 30 हजार मत ही मिले थे। उस चुनाव के नतीजे के बाद सिद्धारमैया ने हाई कोर्ट में केस भी दाखिल किया था और आयोग की तरफ से 22,243 वोट खारिज करने पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि यदि इन वोटों को अवैध न घोषित किया जाता तो वह खुद बड़े अंतर से जीत हासिल करते। उनका यह भी कहना था कि बसवराज पाटिल की उम्मीदवारी ही अवैध थी क्योंकि उन्हें लोकसभा स्पीकर ने दलबदल के चलते अयोग्य घोषित किया था। उनका कहना था कि बसवराज पाटिल को हमेशा के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। ऐसे में वह फिर से चुनाव कैसे लड़ सकते हैं। उन्होंने कर्नाटक के पूर्व एडवोकेट जनरल रवि वर्मा कुमार के सम्मान समारोह में कहा, 'मैं रवि वर्मा से उस समय लीगल सलाह मांगी थी, जब मुझे कानूनी समस्याएं झेलनी पड़ी थीं। मैंने 1991 का चुनाव लड़ा था और फ्रॉड से हरा दिया गया। तब रवि वर्मा कुमार ने मुझे मदद की थी।' उनके इस बयान को भाजपा ने हाथोंहाथ लिया है और इसके बहाने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने कहा कि यह वीडियो प्रूफ है कि कैसे कांग्रेस वोट चोरी करती रही है। आज यही लोग वोट अधिकार रैली निकाल रहे हैं। आखिर यह कितनी बड़ी विडंबना है। यही नहीं उन्होंने लिखा कि सिद्धारमैया तो तब बैलेट पेपर से हुई वोट चोरी में हार गए थे। इसी बैलेट पेपर की व्यवस्था को लाने की बात राहुल गांधी करते हैं। कर्नाटक के नेता विपक्ष आर. अशोक ने भी इस बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इसी पार्टी ने सिद्धारमैया को 1991 में चुनाव हरवा दिया था।  

आम आदमी पार्टी को गुजरात में बड़ा झटका, रावल ने छोड़ी पार्टी

अहमदाबाद गुजरात में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता चेतन रावल ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। रावल ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, लेकिन वास्तविक वजहों को लेकर अटकलों को दौर शुरू हो गया है। गुजरात में पार्टी के मुखिया इशुदान गढ़वी को भेजे इस्तीफे में रावल ने कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों की वजह से तत्काल प्रभाव से आम आदमी पार्टी से से इस्तीफा दे दिया है। चेतन रावल पूर्व टीवी एक्टर हैं और गुजरात के अहमदाबाद में प्रमुख राजनीतिक शख्सियत हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर 'आप' का दामन थाम लिया था। वह अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य महासचिव भी रह चुके हैं। वह असारवा और खाडिया सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। गौरतलब है कि रावल के पिता प्रबोध रावल भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और गुजरात गृह मंत्री भी रह चुके हैं। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह कांग्रेस में सक्रिय हुए और अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष बने। बाद में खुद को दरकिनार बताते हुए वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अब तीन साल बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली पार्टी छोड़ दी है। रावल का अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है।  

स्वागत समारोह में पीएम मोदी को दी गई गाली, वायरल हुआ वीडियो

पटना/ नई दिल्ली  राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बुधवार को दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड में एक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई है। इसका वीडियो वायरल है जिसकी पुष्टि हिन्दुस्तान नहीं कर रहा हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के मंच पर ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन उनके मंच से कुछ दूर टिकट के एक दावेदार के मंच पर इस बदतमीजी की बात बताई जा रही है। वायरल वीडियो जाले विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट मांग रहे मोहम्मद नौशाद के समर्थन में अलग से बनाए गए मंच का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि अपशब्द का प्रयोग होने के बाद एक आदमी इसे गलत बताते हुए माइक लेता है और नौशाद के समर्थन में नारे लगवाने लगता देता है। पीएम मोदी को दिवंगत मां की गाली देने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता उबल पड़े हैं। भाजपा ने कहा कि राजनीति में ऐसी नीचता पहले कभी नहीं देखी गई। यह यात्रा अपमान, घृणा और स्तरहीनता की सारी हदें पार कर चुकी है। पार्टी ने कहा है कि यह ऐसी गलती है कि राहुल और तेजस्वी अगर हजार बार कान पकड़कर उठक-बैठक करके भी माफी मांगें, तब भी बिहार की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। भाजपा मुख्यालय में संबित पात्रा ने इसको लेकर पीसी की है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत भाजपा के कई नेताओं ने अपशब्द कहने की भर्त्सना की है। इस मसले पर अभी तक राहुल गांधी या तेजस्वी यादव का कोई बयान नहीं आया है। वायरल वीडियो के संबंध में कांग्रेस से टिकट के दावेदार जाले इलाके के नेता मोहम्मद नौशाद से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके मंच का यह वीडियो एडिट किया हुआ हो सकता है। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के काफिले में मुजफ्फरपुर की ओर जा रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करने की बात करते हुए नौशाद ने कहा कि यह घटना उनके समर्थकों ने नहीं की है। इसकी जांच होनी चाहिए। सिंहवाड़ा प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष रेयाज अहमद डेजी ने बताया कि पार्टी की तरफ से अतरबेल में एक होटल के पास गठबंधन का मंच बना था। वहां सभी दलों के नेता-कार्यकर्ता झंडा-बैनर के साथ जुटे थे। रेयाज ने इसकी निंदा की और कहा कि कांग्रेस के मंच पर यह घटना नहीं हुई है। कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी मेराज अली ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने जो मंच बनाया था, वहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव कुछ सेकंड के लिए रुके भी थे, लेकिन आगे बनाए गए नौशाद के मंच के सामने उनका काफिला रुका तक नहीं था। सिमरी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी उन्हें नहीं मिली है और ना ही कहीं से कोई शिकायत मिली है। इसकी शिकायत मिलने पर नियमानुकूल कारवाई की जाएगी। प्रखंड प्रमुख पुष्पा झा, मुखिया संघ के अध्यक्ष पप्पू चौधरी, समाजसेवी गणेश चौबे, निर्भय कुमार, संजय कुमार, शंभू ठाकुर समेत कई संघ-संगठनों के लोगों ने मोदी को अपशब्द कहने की तीखी निंदा की है। क्या है वायरल वीडियो में वायरल वीडियो में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारे लगाती साधारण कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ मंच पर दिख रही है। राहुल, प्रियंका या तेजस्वी की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें मंच पर इस तरह की भीड़ और इस तरह के लोग चढ़ नहीं पाते। इसी नारेबाजी के दौरान एक आदमी की आवाज आती है जो पीएम मोदी की मां को लेकर अपशब्द कहता है। मंच पर तभी एक आदमी की यह आवाज आती है कि गलत है, गलत है और फिर सामान्य नारेबाजी शुरू हो जाती है।  

भाजपा पर बरसीं ममता, बोलीं- जब तक जिंदा हूं वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहेगा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को TMC छात्र परिषद की रैली में भाजपा पर जोरदार हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा 500 लोगों की टीम ले कर बंगाल आई है और लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन उनके होते हुए किसी भी बंगाली के मतदान के अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘भाषाई आतंकवाद’ का भी जिक्र किया है। CM ममता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाषाई आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोलकाता में छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या हटा दिया गया है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।" ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। उन्होंने दावा किया, "चुनाव आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है। आयोग का अधिकार क्षेत्र चुनाव के दौरान केवल तीन महीनों तक ही है, पूरे साल नहीं।" बंगालियों की भूमिका भुलाने की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया। CM ममता ने दावा किया कि TMC सरकार ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार' और भाई-भतीजावाद है। वे देश को लूट रहे हैं, जबकि हम महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।"  

सीएम मान पर तरुण चुघ का तंज – पंजाब संकट में, नेता विदेश यात्राओं में व्यस्त

चंडीगढ़  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) नेतृत्व पर बुधवार को हमला बोला। भाजपा नेता ने कहा कि जब पंजाब बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री मान सुर्खियां बटोरने के लिए तमिलनाडु घूम रहे हैं और दिल्ली के उनके आकाओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया रोजाना पंजाब को लूटने में लगे हैं। चुघ ने कहा, “जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था, आज वही दृश्य पंजाब में दोहराया जा रहा है। हजारों परिवार पानी में फंसे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री मान जनता के साथ खड़े होने के बजाय बाहरी दौरों में मशगूल हैं। वहीं, उनके मालिक पंजाब के संसाधनों पर ऐश कर रहे हैं।” तमिलनाडु में सीएम मान द्वारा ‘ब्रेकफास्ट योजना’ की घोषणा पर चुघ ने सवाल उठाते हुए कहा, “झूठे वादों की बजाय मान को जवाब देना चाहिए कि किसानों की कर्जमाफी कब होगी? एमएसपी टॉप-अप कब मिलेगा? पंजाब की महिलाओं को 1000 रुपए प्रति माह का वादा किए 40 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कोई वादा पूरा नहीं हुआ।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीते चार वर्षों में आप सरकार ने पंजाब पर 1 लाख करोड़ रुपये का नया कर्ज लाद दिया, केंद्र की योजनाओं जैसे पीएम पोषण योजना को अपने नाम से पेश किया और फिर भी मूल वादे पूरे नहीं किए। चुघ ने कहा, “आज पंजाब के 20 लाख से अधिक बच्चे और पूरे देश में 11.5 करोड़ से ज्यादा बच्चे पोषण केवल पीएम पोषण योजना से पा रहे हैं।” सीएम मान की नाकामी को पंजाब की दुर्दशा का कारण बताते हुए चुघ ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था ध्वस्त है, अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है और नशा युवाओं को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने आप नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल-सिसोदिया गैंग ने पंजाब को अपनी विलासिता की कॉलोनी बना रखा है और रोजाना राज्य को लूटने की साज़िश रचते हैं।”

4300 करोड़ के गुमनाम चंदे पर राहुल गांधी का हमला, चुनाव आयोग से की जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर हमला बोला है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से सवाल किए हैं। राहुल गांधी ने जिस मीडिया रिपोर्ट को साझा किया है, उसमें दावा किया गया है कि गुजरात में कुछ 'अनाम दलों' को 2019-20 और 2023-24 के बीच 4,300 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। राहुल गांधी ने आयोग पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या चुनाव आयोग इसकी जांच करेगा या हलफनामा मांगेगा। राहुल गांधी ने उठाये सवाल लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इसमें दावा किया गया है कि इन दलों ने तीन चुनावों  2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 43 उम्मीदवार उतारे थे, जिन्हें मिलकर सिर्फ 54,069 वोट मिले। वहीं, इनकी चुनाव रिपोर्ट में इन पार्टियों का खर्च 39.02 लाख रुपये दर्ज है, जबकि ऑडिट रिपोर्ट में 3,500 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब दिखाया गया है। क्या कानून बदल देगा चुनाव आयोग एक्स पर हिंदी में लिखे पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि गुजरात में कुछ गुमनाम पार्टियां हैं जिनके नाम किसी ने नहीं सुने हैं, लेकिन उन्हें 4,300 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि इन पार्टियों ने बहुत कम मौकों पर चुनाव लड़ा है या उन पर पैसा खर्च किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आगे चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए पूछा कि ये हजारों करोड़ रुपये कहां से आए? इन्हें कौन चला रहा है? यह पैसा कहां गया? क्या चुनाव आयोग इसकी जांच करेगा या यहां भी हलफनामा मांगेगा? या फिर वह कानून ही बदल देगा, ताकि यह डेटा भी छिपाया जा सके? राहुल गांधी से चुनाव आयोग ने मांगा था हलफनामा गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उस पर 17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कांग्रेस नेता या तो शपथपत्र देकर प्रमाण पेश करें या फिर देश से माफी मांगें।