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कांग्रेस का हमला: ट्रंप की आलोचना के बीच मोदी खुद को किसानों का सबसे बड़ा पक्षधर बता रहे हैं

नई दिल्ली कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि ''ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति) के हमले से पस्त'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद को भारतीय किसानों के सबसे बड़े हितैषी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी को भी इस पर कोई भ्रम नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात पर भारत पर दोगुना शुल्क लगाए जाने के बाद मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि भारत अपने किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन वह इसके लिए तैयार हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पांच साल पहले एक समय ऐसा भी था जब संसद में प्रधानमंत्री ने आंदोलन कर रहे किसानों का उपहास उड़ाते हुए उन्हें 'आंदोलनजीवी' कह दिया था। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''तीन काले, किसान-विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन में 700 से ज़्यादा किसान शहीद हो गए, लेकिन प्रधानमंत्री के मुंह से उनके लिए न दर्द, न अफ़सोस और न ही सहानुभूति का एक शब्द निकला।'' उन्होंने कहा कि किसान संगठन आज भी समूचे उत्पादन की लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और ठोस कर्ज राहत की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने जगदीप धनखड़ के संदर्भ में कहा कि इन मांगों पर प्रधानमंत्री पूरी तरह से चुप हैं, जबकि इन्हीं मुद्दों को भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति ने भी उठाया था। उन्होंने दावा किया कि नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) व्यापार समझौते में भारत को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार थे, जो भारतीय किसानों और डेयरी उत्पादकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता था। रमेश ने कहा कि लेकिन कांग्रेस और किसान संगठनों के लगातार दबाव के चलते, आख़िरी वक्त पर प्रधानमंत्री मोदी को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा, ''ट्रंप के हमले से पस्त प्रधानमंत्री मोदी खुद को भारतीय किसानों के सबसे बड़े हितैषी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी को भी इस पर कोई भ्रम नहीं है।''  

ईसीआई फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया, प्रियंका गांधी ने कहा- जांच हो

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए धांधली के आरोप को लेकर चुनाव आयोग फैक्ट चेक ने जवाब दिया है। ईसीआई फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि अगर राहुल गांधी मानते हैं कि वे जो कह रहे, वह सच है तो उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के 20(3)(बी) के अनुसार घोषणा या शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करके गुरुवार शाम तक देना चाहिए। चुनाव आयोग ने इस शपथ पत्र को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पेश करना चाहिए ताकि आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सके। चुनाव आयोग की ओर से आए बयान पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिएक्ट किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका ने कहा कि वे हलफनामा क्यों मांग रहे हैं? जांच क्यों नहीं कर रहे- प्रियंका का ईसी से सवाल केरल की वायनाड सीट कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि 'याचिका के अनुसार, 30 दिनों के भीतर हलफनामा प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। वे हलफनामा क्यों मांग रहे हैं? अगर कोई जानबूझकर गलती हुई है, तो आपको इसकी जांच करनी चाहिए। आप हमें मतदाता सूची क्यों नहीं दे रहे हैं? आप जांच क्यों नहीं कर रहे हैं? उसके बजाय आप कह रहे कि हलफनामा साइन करके दो। इससे बड़ी शपथ क्या है जो हम सदन में लेते हैं। इससे बड़ी कोई शपथ है जो हमने सदन में ले रखी है।' 'राहुल गांधी इतना बड़ा खुलासा कर रहे…' प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पूरे मुद्दे की जानकारी दे रहे हैं। पब्लिक में सबकुछ कर रहे हैं। बता रहे हैं कि देखिए एक लाख से ज्यादा फर्जी वोट हैं। एक विधानसभा में अंदर इतने फर्जी वोट, जो चुनाव लड़ता है वो समझता है इस बात को। विधानसभा चुनाव में एक लाख से ज्यादा का फर्जी वोट, सोचिए जहां उन्होंने वोट कर दिया वही जीतेंगे। 'वोट चोरी' पर विपक्ष की रणनीति को लेकर क्या बोलीं प्रियंका प्रियंका गांधी से जब पूछा गया कि आगे विपक्ष की क्या रणनीति होगी। इस पर कांग्रेस नेता ने बताया कि ये इंडिया गठबंधन के नेता तय करेंगे कि आगे इस मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाएगा। लेकिन यह सभी लोग समझते हैं कि विधानसभा चुनाव में प्रत्येक मतदाता कितना महत्वपूर्ण है? लगभग 1 लाख मतदाताओं को हटाकर, वे स्पष्ट रूप से तय कर सकते हैं कि कौन जीतता है। वहीं पूरे मामले में बीजेपी नेताओं के जो जवाब आ रहे उससे सब स्पष्ट है। टीचर वाला उदाहरण देकर चुनाव आयोग को घेरा प्रियंका गांधी ने कहा कि आप टीचर के पास जाओ और कहो कि मैम चीटिंग हो रही है तो क्या टीचर आपको थप्पड़ मारेंगी? या वो बोलेंगी कि मैं चेक करती हूं क्या हो रहा। वो जांच करेंगी। यहां देखिए क्या हो रहा। जो मांग की जा रही उसकी जांच की जगह उल्टा सीधा बोला जा रहा जो शिकायत कर रहा। यही नहीं उनसे हलफनामा मांगा जा रहा। एफिडेविट साइन करने की बात कही जा रही है। इतना सब कुछ हो रहा और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।  

जहां से वोट चोरी का दावा, वहीं कांग्रेस की जीत पर केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल

नई दिल्ली  राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। इसको लेकर केंद्र सरकार उन पर हमलावर है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी पर तंज किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि वोट चोरी हुए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि राहुल गांधी ने जिन जगहों पर वोट बढ़ने की कही है कांग्रेस वहीं पर ज्यादा सीटें जीती है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर गलत सूचना फैला रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। राहुल गांधी के दावों पर सवाल गौरतलब है कि एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक के महादेवपुरा में बड़ी संख्या में वोटों में हेर-फेर हुई है। राहुल गांधी के मुताबिक यह सबकुछ भाजपा को जिताने के लिए किया गया। भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दावा है कि महाराष्ट्र में 1 करोड़ वोटर बढ़े। वहीं, चुनाव आयोग के मुताबिक केवल 40 लाख वोटर बढ़े। यह राहुल गांधी के दावे से 60 फीसदी कम है। ऐसी होती है नेता विपक्ष की भाषा? भूपेंद्र यादव ने आगे कुछ और बातों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस अधिकतर उन्हीं सीटों पर जीती है, जहां पर वोट बढ़ने की बात कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से राहुल गांधी एटम बम छोड़ने की बात कर रहे हैं। वह चुनाव आयोग कर्मचारियों के खिलाफ अशालीन भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि अगर हम सत्ता में आए तो चुनाव आयोग कर्मचारियों को सजा मिलेगी। क्या नेता विपक्ष सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल कर सकते हैं? क्या था राहुल गांधी का आरोप गौरतलब है कि गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र में पांच तरह की हेराफेरी के जरिए एक लाख से अधिक वोट चुराए गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी’ हमारे लोकतंत्र पर एक ‘एटम बम’ की तरह है। गांधी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आंकड़ों का विश्लेषण किया है।  

दोनों नेताओं की एकता से गूंजा भोपाल का सभागार, सिंधिया-दिग्विजय का ऐतिहासिक मिलन

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में एक लंबे समय बाद ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर ले जाते नजर आ रहे हैं। पांच साल बाद दोनों नेता इस तरह एक साथ दिखाई दिए, जिससे अटकलों का दौर तेज हो गया है।  यह वाकया भोपाल के रातीबड़ स्थित एक निजी स्कूल के उद्घाटन समारोह का है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंच पर बैठे थे, जबकि दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी के साथ सामने की कुर्सियों पर बैठे थे। सिंधिया की नजर जैसे ही उन पर पड़ी, वे मंच से उतरकर उनके पास गए, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और फिर हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर ले आए। इस दृश्य पर मौजूद लोग खुद को तालियां बजाने से नहीं रोक सकें।   2020 के बाद पहली बार ऐसे साथ दिखे मार्च 2020 में सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर चला था। कमलनाथ सरकार के गिरने के समय दिग्विजय सिंह और सिंधिया के रिश्ते बेहद तल्ख थे। ऐसे में उनका यह साथ बैठना पांच साल बाद की एक सियासी ‘सॉफ्ट मोमेंट’ के रूप में देखा जा रहा है। सियासी अटकलें तेज ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इस समय सिंधिया के लिए माहौल पूरी तरह सहज नहीं है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी बिना नाम लिए उन पर टिप्पणी की थी। ऐसे में अटकलें है कि ग्वालियर-चंबल में भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच गुटबाजी बहुत तेज चल रही है। वहीं, अब इस मुलाकात को लेकर चर्चा है कि क्या यह किसी नई सियासी बिसात की शुरुआत है या सिर्फ एक औपचारिक सौजन्य। दिलचस्प बात यह है कि इतिहास में राघौगढ़, जो दिग्विजय सिंह का गढ़ है, कभी ग्वालियर राजघराने के अधीन था। दिग्विजय ‘राजा साहब’ कहलाते हैं, जबकि सिंधिया को ‘महाराज’ कहा जाता है। दोनों घरानों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पुरानी है, लेकिन यह पल उस अदावत से अलग एक नई तस्वीर पेश करता है। आस्तीन के सांपों से सचेत रहें… दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके है। पिछले साल ग्वालियर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में दिग्विजय सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि आस्तीन के सांपों से सचेत रहें। इसके अलग-अलग मायने निकाले गए थे। राजनीतिक जानकारों ने बयान के मायने निकाले थे कि यह शायद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा गया। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दिग्विजय सिंह पर कहा था कि पहले वे मेरे पिता पर निशाना साधते थे और अब मुझे पर निशाना साध रहे हैं। तब दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वे अभी बच्चे हैं। दिग्विजिय सिंह की कसम टूटी दरअसल, करीब तीन माह पहले ग्वालियर में हुई संविधान बचाओ रैली में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एलान किया था कि वे अब कभी मंच पर नहीं बैठेंगे। उनका कहना था कि मंच की राजनीति खत्म होनी चाहिए और वे केवल अपनी बारी आने पर ही मंच पर जाएंगे, अन्यथा आमजनों के बीच बैठेंगे। लेकिन शुक्रवार को एक निजी कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह मंच पर बैठे नजर आए। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनकी यह “कसम” टूट गई? हालांकि दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंच पर न बैठने की बात उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों के संदर्भ में कही थी, जबकि यह कार्यक्रम निजी था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं उन्हें मंच पर ले जाते दिखाई दिए। पहले झुककर प्रणाम फिर हाथ पकड़कर ले चले सकारात्मक राजनीति का यह उदाहरण तब देखने को मिला जब भोपाल में स्कूल के लोकार्पण के कार्यक्रम में मंच पर आते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामने बैठे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास जाकर स्नेह पूर्वक अभिवादन किया। इसके बाद उनका हाथ थामा और उन्हें मंच पर साथ लेकर आए। इस दौरान पूरे सभागार में तालियां गूंज उठीं। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल से मिले सिंधिया केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भोपाल में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भेंट की। खंडेलवाल की नियुक्ति के पश्चात यह उनकी सिंधिया से दूसरी महत्वपूर्ण मुलाकात है। इससे पहले, दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में सिंधिया के आवास पर एक लंबी और रणनीतिक बैठक हो चुकी है। इसके साथ सिंधिया ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से भी भेंट की।

‘जनता का अपमान कर रहे राहुल गांधी’ — भाजपा ने किया पलटवार

नई दिल्ली  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धांधली हुई है। राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा नेताओं ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने हर बार संवैधानिक संस्था पर हमला किया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, "ऐसा पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने संवैधानिक संस्था पर हमला किया है। मगर, सवाल यह उठता है कि जब तेलंगाना, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में उनकी जीत होती है तो वह वोटर लिस्ट लेकर क्यों नहीं सबको दिखाते हैं? एक बार भी उन्होंने ऐसा काम नहीं किया है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि लोगों में उनकी पैठ नहीं है और उनकी बजाय पीएम मोदी के प्रति प्यार का स्वाभाव है और इसलिए जनता उन्हें चुनती है।" उन्होंने कहा, "राहुल गांधी को अपने सहयोगी तेजस्वी यादव के दोनों वोटर आईडी कार्ड भी दिखाने चाहिए थे और बताना चाहिए था कि उनके दो वोटर आईडी कार्ड में से एक को लिस्ट से हटा दिया गया है, लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।" भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "वह एक संवैधानिक संस्था पर एक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी कर रहे हैं और इसकी हम निंदा करते हैं। मैं इतना ही कहूंगा कि राहुल गांधी के इस चाल-चरित्र को देखते हुए जनता उन्हें और भी वोट नहीं देगी। वह देश की जनता का अपमान कर रहे हैं, जिन्होंने बार-बार पीएम मोदी को चुना है। राहुल गांधी को रोज गाली पड़ती है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन पर तीन बार टिप्पणियां की हैं। मैं राहुल गांधी के आरोपों की निंदा करता हूं। " शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राहुल गांधी बचकानी हरकत कर रहे हैं और इसलिए उनके आरोपों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है।"

राहुल गांधी को चुनाव आयोग की चेतावनी– बिना साक्ष्य आरोप नहीं चलेगा

नई दिल्ली  राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगातार हमले जारी हैं। वह महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा इलेक्शन में धांधली के आरोप लगा चुके हैं। ताजा मामला कर्नाटक का है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कर्नाटक में एक लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए और इस तरह वोटों की चोरी हुई है। अब इस मामले में राहुल गांधी को कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने एफिडेविट भेजा है। उन्होंने राहुल गांधी से मांग की है कि इस हलफनामे पर साइन कर दें कि वह सही आरोप लगा रहे हैं। यदि उनके दावे गलत पाए गए तो फिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए दावों को लेकर एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए इस शपथ पत्र पर दस्तखत करने को कहा है। कर्नाटक के सीईओ के पत्र में लिखा है, "यह ज्ञात है कि आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपने मतदाता सूची में अपात्र मतदाताओं को शामिल करने और पात्र मतदाताओं को बाहर करने का जिक्र किया था। आपसे अनुरोध है कि आप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20(3)(बी) के तहत शपथ पर हस्ताक्षर करके ऐसे मतदाताओं के नाम के साथ वापस भेजें ताकि आवश्यक कार्यवाही शुरू की जा सके।" आयोग ने आरोपों को बताया है निराधार इस शपथ पत्र में आयोग ने यह भी उल्लेख किया है कि राहुल गांधी अगर इन दावों को सही साबित नहीं कर पाए तो उन पर कानूनी कार्रवाई चलाई जा सकती है। इससे पहले आयोग ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। बीते सप्ताह राहुल गांधी के चुनाव आयोग के खिलाफ सबूत होने के दावों पर चुनाव आयोग ने कहा था कि राहुल गांधी ने कभी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है और बार-बार बुलाए जाने पर भी वे आयोग के सामने पेश नहीं हुए हैं। राहुल गांधी का आया जवाब राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही एक पत्रकार ने उन्हें चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए शपथ पत्र की जानकारी दी। इसपर जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि वे सार्वजनिक रूप से यह बयान दे रहे हैं और आयोग इसे शपथ के रूप में ही देखे। राहुल गांधी ने कहा, “मैं एक राजनेता हूं। मैं जो कह रहा हूं वह सबके सामने कह रहा हूं। इसे शपथ के रूप में ही देखिए। यह हमारा डेटा नहीं है। चुनाव आयोग यह क्यों नहीं कह रही कि मैं गलत हूं। वे कह रहे हैं कि मै शपथ पत्र पर साइन करूं। इससे साफ झलकता है कि उन्हें पता है कि हमें सब पता है।” ‘सबूत’ पेश कर वोट चोरी के आरोप इससे पहले गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन का राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी में शामिल होने का आरोप लगाए हुए कई ‘सबूत’ दिखाए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस को सारे सबूत इकट्ठा करने में 6 महीने से ज्यादा का समय लगा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक की वोटर लिस्ट में कई नाम, एड्रेस फर्जी थे। उन्होंने कुछ दस्तावेजों में यह भी दिखाया कि एक ही पते पर कई लोगों का नाम दर्ज होने के साथ-साथ हजारों मतदाताओं का फर्जी पता दर्ज था।  

चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध: महाराष्ट्र चुनाव पर राहुल गांधी के गंभीर आरोप

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट वैरिफिकेशन में गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर फिर से गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि संविधान की नींव वोट है, इसलिए यह जांचना जरूरी है कि सही लोगों को ही वोट डालने का अधिकार दिया जा रहा है या नहीं। उन्होंने मतदाता सूची में फर्जी वोटर्स के शामिल होने की भी चिंता जताई है। राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के दौरान महाराष्ट्र चुनाव को लेकर आरोप लगाया कि वहां चुनाव चोरी हुआ है। उन्होंने कहा, "हम महाराष्ट्र में चुनाव हार गए, लेकिन वहां 40 लाख वोटर रहस्यमयी हैं। केवल पांच महीने के अंदर कई नए वोटर जोड़े गए हैं।" उन्होंने चुनाव आयोग से जवाब मांगा कि क्या वोटर लिस्ट सही है या उसमें गड़बड़ी है। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं प्रदान कर रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि बार-बार डेटा की मांग करने के बावजूद चुनाव आयोग ने कोई जानकारी नहीं दी और जवाब देने से इनकार कर दिया। राहुल गांधी ने फर्जी वोटिंग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट में कई लोगों के पिता के नाम के आगे कोई जानकारी नहीं है, कई मकानों के पते शून्य लिखे गए हैं और डुप्लीकेट वोटरों की संख्या बहुत अधिक है। खासतौर पर उन्होंने बताया कि लगभग 11 हजार संदिग्ध वोटर्स ऐसे हैं जिन्होंने तीन बार वोट डाला है। एक ही पते पर 46 वोटर्स दर्ज हैं, जो सवाल उठाता है कि ये लोग कहां से आ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह सब चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत का नतीजा है और देश में लोकतंत्र के लिए यह बड़ी चुनौती है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में पारदर्शिता बरतने और फर्जी वोटिंग पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।  

निकाय चुनाव पर विपक्ष का दबाव: बैलेट पेपर से चुनाव की मांग में शरद-उद्धव एकजुट

मुंबई शरद पवार की पार्टी एनसीपी-एसपी ने महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की है। पार्टी ने निकाय चुनाव में वीवीपैट वाली ईवीएम इस्तेमाल न करने के राज्य चुनाव आयोग के फैसले की निंदा की है। शरद पवार के दल का कहना है कि इससे कैसे पता चलेगा कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हुए हैं। ऐसी स्थिति में तो बैलेट पेपर से चुनाव कराना ही सही रहेगा। एनसीपी-एसपी ने कहा कि यदि वीवीपैट वाली मशीनें उपलब्ध नहीं हैं तो फिर परंपरागत बैलेट पेपर के माध्यम से ही चुनाव कराए जाएं। इससे पारदर्शिता रहेगी और जनता का भरोसा भी चुनावी व्यवस्था में कायम होगा। पार्टी नेता राहुल कलाते ने कहा कि निकाय चुनाव की तैयारी अब तेजी पर है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने निराश किया है। उसकी यह बात झटका देने वाली है कि वीवीपैट मशीनों की कमी है। इससे साफ है कि आयोग नहीं चाहता है कि पारदर्शी तरीके से चुनाव हो। ऐसी स्थिति में धांधली होने का भी डर रहेगा। राहुल कलाते ने पुणे की चिंचवाड़ विधानसभा सीट से इलेक्शन लड़ा था, लेकिन भाजपा के शंकर जगताप के मुकाबले हार गए थे। यही नहीं INDIA गठबंधन के एक और दल ने वीवीपैट न इस्तेमाल करने पर ऐतराज जताया है। उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को कहा कि यह फैसला गलत है। हमारी मांग है कि चुनाव वीवीपैट मशीनों से ही कराया जाए। वहीं एनसीपी-एसपी का कहना है कि यदि चुनाव आयोग वीवीपैट से चुनाव नहीं करा पा रहा है तो फिर बैलेट पेपर के पुराने सिस्टम पर ही वापस लौटा जाए। बता दें कि असेंबली इलेक्शन में हार के बाद राहुल कलाते ने दोबारा गिनती के लिए अर्जी डाली थी। उनका आरोप था कि काउंटिंग की प्रक्रिया में गड़बड़ी थी। इसी के खिलाफ फॉर्म 17 जमा करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग का रुख किया था। अब एक बार फिर निकाय चुनाव में उन्होंने मोर्चा खोला है। एसनीपी-एसपी का कहना है कि बिना वीवीपैट के चुनाव की कोई विश्वसनीयता नहीं रहेगी।  

सबूत हमारे पास हैं – राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर निशाना, उठाए पारदर्शिता पर सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इस दौरान महाराष्ट्र और कर्नाटक की मतदाता सूची दिखाते हुए इन दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर्स का आरोप लगाया.  राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के दौरान कहा कि संविधान की नींव वोट है. ऐसे में सोचना होगा कि क्या सही लोगों को वोट डालने दिया जा रहा है? क्या मतदाता सूची में फर्जी वोटर्स जोड़े गए? महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया. हम महाराष्ट्र में चुनाव हार गए.  महाराष्ट्र में 40 लाख वोटर रहस्यमयी हैं. यहां पांच महीने में कई वोटर जोड़े गए.  राहुल ने कहा कि महाराष्ट्र में पांच साल की तुलना में पांच महीने में बड़ी संख्या में नए वोटर जुड़े. महाराष्ट्र विधानसभा में वोटिंग के दिन शाम पांच बजे के बाद वोटिंग में तेज इजाफा होता है. हमें फिर पता चला कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच एक करोड़ नए वोटर्स मतदाता सूची में जुड़े. वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग जवाब देना चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि क्या वोटर लिस्ट सही है या गलत? कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं देता? हमने आयोग से बार-बार डेटा मांगा लेकिन हमें नहीं दिया गया. यहां तक कि चुनाव आयोग ने हमें जवाब देने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि देश मे फर्जी वोटिंग हो रही है. हमें इस चोरी को पकड़ने में लंबा समय लगा. हमने अपने स्तर पर जांच की, जिसमें हमें छह महीने का समय लगा. हमने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर वोटर्स लिस्ट की पड़ताल की. महादेवपुरा सीट पर हम 32707 वोटों से हार गए थे. अकेली इसी सीट पर बीजेपी एक लाख से ज्यादा के मार्जिन से जीती थी. इसे हमें शक हुआ कि दाल में कुछ काला है. राहुल ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा की महादेवपुरा विधानसभा सीट में 6.5 लाख वोटों में से एक लाख से अधिक वोटों की चोरी की गई. हमारी इंटर्नल पड़ताल में पता चला कि इनमें से एक लाख से अधिक वोटर्स डुप्लीकेट हैं या जिनके एड्रेस गलत हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पड़ताल में वोटर्स लिस्ट में कई गड़बड़ियों का पता चला. इस वोटर लिस्ट में कई लोगों के पिता के नाम के आगे कुछ भी लिखा गया है. वोटर लिस्ट में 40 हजार मकानों के एड्रेस शून्य हैं. डुप्लीकेट वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है. 11 हजार संदिग्ध ऐसे हैं, जिन्होंने तीन बार वोट डाला. ये लोग कहां से आ रहे हैं? एक ही पते पर 46 वोटर्स हैं. एक कमरे के घर में 80 मतदाता हैं. ये चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत है.  राहुल गांधी ने बताया कि वोट चोरी पांच तरीकों से की जाती है. डुप्लीकेट वोटर्स 11,965 हैं. वोटर लिस्ट में ऐसे वोटर जिनका एड्रेस फर्जी हैं, उनकी संख्या 40 हजार के आसपास है. एक ही पते पर 10 हजार से ज्यादा वोटर्स रजिस्टर्ड हैं. 4132 वोटर्स ऐसे हैं वोटर लिस्ट में जिनकी फोटो इनवैलिड हैं.  वोट चोरी 5 तरह से होती है? – डुप्लीकेट वोटर्स (11,965) – फेक और इनवैलिड एड्रेस (40,009) – एक ही पते पर बल्क वोटर्स (10,452) – इनवैलिड फोटो (4132) – फॉर्म 6 का दुरुपयोग (30,000)  

शशि थरूर का ट्रंप को दो टूक: भारत भी लगा सकता है भारी टैक्स, धमकियों से नहीं डरेगा देश

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के फैसले को अनुचित, दोहरे मानदंड वाला और भारत-अमेरिका संबंधों के प्रति असंवेदनशील बताया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका भारत के उत्पादों पर 50% शुल्क लगाएगा, तो भारत को भी चाहिए कि अमेरिकी वस्तुओं पर उतना ही टैरिफ लगाए। उन्होंने कहा, “हमारा अमेरिका के साथ 90 अरब डॉलर का व्यापार है। अगर हर चीज 50% महंगी हो जाएगी, तो वहां के खरीदार सोचेंगे कि भारतीय वस्तुएं क्यों खरीदें?” शशि थरूर ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “अमेरिका हमें धमकाकर कुछ नहीं कर सकता। अभी हम अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 17% शुल्क लगाते हैं। तो हम वहीं क्यों रुकें? हम भी 50% टैरिफ लगा दें। अगर अमेरिका को भारत से रिश्ता नहीं चाहिए, तो भारत को भी अमेरिका की जरूरत नहीं।” आपको बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया है। यह कदम भारत के रूस से तेल खरीदने के चलते उठाया गया है। पहले ही 25% शुल्क की घोषणा हो चुकी थी। अब कुल टैरिफ 50% तक पहुंच चुका है। चीन को छूट, भारत को सजा क्यों? शशि थरूर ने अमेरिका की नीति को "दोहरे मापदंड" वाली बताते हुए कहा कि चीन रूस से भारत से भी ज्यादा तेल और सामग्रियां खरीदता है, लेकिन उसे 90 दिन की छूट दी गई है। उन्होंने कहा, “अगर चीन को राहत दी जा सकती है, तो भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? ये मित्रता नहीं, दबाव की राजनीति है।”