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कांग्रेस में संविधान नहीं, परिवारवाद चलता है – शहजाद पूनावाला की तीखी टिप्पणी

नई दिल्ली  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी परिवारवाद को संविधान और लोकतंत्र से ऊपर मानते हैं। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का असल मुद्दा भारत का चुनाव आयोग नहीं है, बल्कि 'ईएमआई' है। उन्होंने कहा कि ये ईएमआई वो नहीं जो भरी जाती है। इस ईएमआई का मतलब इंदिरा की आपातकालीन मानसिकता और इंदिरा के पोते की हकदारी वाली मानसिकता को बनाए रखना। गांधी परिवार मानता है कि परिवार तंत्र, लोकतंत्र से ऊपर है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी देवकांत बरुआ ने कहा था कि भारत इंदिरा है, इंदिरा भारत है', यह परिवार आज भी उसी सोच को अपनाए हुए है, जो संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से ऊपर परिवारवाद को रखता है। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को लगता है कि परिवार तंत्र संविधान तंत्र से ऊपर है। इसलिए अगर वे चुनाव हार जाते हैं तो चुनाव आयोग खराब हो जाता है। अगर कोर्ट में केस हार जाते हैं तो न्यायपालिका खराब है, लेकिन जब तेलंगाना में कांग्रेस चुनाव जीतती है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। झारखंड के चुनाव परिणाम के बाद भी राहुल गांधी को कोई शिकायत नहीं होती। जम्मू-कश्मीर में भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। पूनावाला ने आगे कहा कि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को 'निराधार' करार दिया। उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस के शासन को 'खटाखट गड्ढा मॉडल' करार देते हुए इसे 'लूट, झूठ और फूट' का मॉडल बताया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में कांग्रेस का 'लूट, झूठ और फूट मॉडल' साफ दिखता है। 'लूट' का उदाहरण है मुडा, शराब, आवास और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें। उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया आपस में कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं और कुर्सी की लड़ाई में इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

बिहार NDA में सीट बंटवारे पर सहमति, जल्द होगा औपचारिक ऐलान

नई दिल्ली  बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय नई हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। शाह उसी दिन पटना में आयोजित अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की तैयारियों का हिस्सा है। आपको बता दें कि इस मुलाकात के दौरान बिहार भाजपा के नेताओं के अलावा नीतीश कुमार के दो खास सिपहसालार संजय झा और विजय चौधरी भी इस बैठक में शामिल हुए। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU)के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती खाका तैयार हो चुका है। अब इसे लेकर लोजपा (LJP), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) जैसे सहयोगी दलों से भी बातचीत चल रही है। गठबंधन के भीतर सभी दलों को संतुलित हिस्सेदारी देने का प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला नवरात्र के पावन पर्व के दौरान घोषित किया जा सकता है, जिसकी शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। पटना के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि NDA इस अवसर को शुभ मानते हुए एकजुटता का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहता है। यह वही समय होगा जब से आम लोगों को जीएसटी की नई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। दुर्गा पूजा के बाद कभी भी इसका ऐलन हो सकता है। इस साल छठ के बाद वोटिंग की संभावना है। 2020 के चुनावों में जेडीयू की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही थी, जबकि बीजेपी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन हाल के दिनों में नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने के बाद समीकरण फिर बदल गए हैं। बीजेपी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गठबंधन की एकता बनी रहे और विपक्षी गठबंधन INDIA को चुनौती दी जा सके। वहीं, नीतीश कुमार भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सतर्क हैं और चाहते हैं कि उन्हें गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले।  

कंगना रनौत ने राहुल गांधी को घेरा, बयान को बताया गैरजिम्मेदाराना

कुल्लू  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोपों पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी लगातार देश को शर्मसार करने वाले बयान दे रहे हैं। उनकी करतूतें ही ऐसी हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी की हरकत और बयान से यह पता चलता है कि उनको कुछ पता नहीं रहता है। वे चुनाव आयोग पर भी झूठा आरोप लगा रहे हैं। जनता को सब पता चल गया है। जनता गुमराह नहीं होने वाली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जेन-जी वाले पोस्ट पर रनौत ने कहा कि राहुल गांधी को कुछ पता नहीं रहता है। वह कभी भी कुछ भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर देते हैं। पहले उनको जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी इस सोशल मीडिया पोस्ट से देश की छवि खराब हो रही है। उनको इसकी चिंता कभी नहीं रहती है। वह कभी भी कुछ भी बयान दे देते हैं। सांसद ने कहा कि राहुल गांधी पहले भी विदेश जाकर भारत के खिलाफ बयान दे चुके हैं। मुझे लगता है यह उनके लिए कोई नई बात नहीं होगी। वे समय-समय पर इस तरह के बयान देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अमेरिका जाकर कहा था कि हमारे देश को बचाओ। अब भी उनकी यही सोच जारी है। यह दुखद है कि वे ऐसे बयान देने से बाज नहीं आ रहे। लगता है कि जैसे वे सुबह उठकर सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट कर देते हैं। कंगना ने आगे कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि नेपाल में जेन-जी ने नेपोटिज्म सरकार को गिराया है। शायद उनको कुछ पता नहीं है कि देश में क्या चल रहा है। नेपाल में वंशवादी नेताओं को हटाया गया। वहां उन्होंने अपनी सरकार खुद चुनी और लोकतंत्र स्थापित किया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी इसी तरह के बयान देते रहेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब उन्हें ही भारत से निकाला जा सकता है।

UP के डिप्टी सीएम का वार – राहुल गांधी और सपा पर बोला करारा प्रहार

जौनपुर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को जिले के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जौनपुर कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में प्रदेश में नंबर वन बने। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि सभी प्रोजेक्ट गुणवत्तापूर्ण ढंग से और समय पर पूरे किए जाएं। राहुल गांधी पर लगाए कई आरोप इसके साथ ही उन्होंने मीडिया बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सत्ता पाने के लिए राहुल गांधी तड़प रहे हैं। मतदाता सूची पर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग निष्पक्षता से कार्य कर रहा है, लेकिन जब विपक्ष के लोग चुनाव जीतते हैं तो प्रशंसा करते हैं व संभावित हार को देखकर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से लिखित में शिकायत मांगी जा रही है, लेकिन इसे देने की बजाय कांग्रेस पार्टी जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी को निशाने पर लेते हुए हुए उन्होंने कहा कि समाजवादियों का नारा ही था कि खाली प्लॉट हमारा है। सपा पर साधा निशाना उनके राज में बेटियां घर से निकलने तक से घबराती थीं, लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में वही गुंडे-माफिया प्रदेश से पलायन कर चुके हैं। कहा कि समाजवादी पार्टी अपराधियों को पराश्रय देती है व इंडी गठब़ंधन की सच्चाई जनता समझ चुकी है।

राजनीति की सलाह: दीपांकर ने कहा—कांग्रेस कम लड़े, ज्यादा जीते

पटना  बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) दोनों में सबसे बड़े दोनों दलों के बीच ही सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए सहयोगी दल भी परेशान हैं। एनडीए की सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की कोशिश में गुरुवार को पटना में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बड़े नेताओं की मौजूदगी में चर्चा हुई। इस बीच महागठबंधन के सबसे बड़े वामंपथी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनिवादी (CPI-ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो औकात से ज्यादा सीट ना मांगे और इसकी चिंता करे कि भले सीटें कम लड़नी पड़े, लेकिन कैसे ज्यादा जीती जाए। भाकपा-माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस द्वारा 2020 की तरह फिर 70 सीटों की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर कहा- “कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा लगभग 70 सीटों की मांग की खबरें मैंने देखी हैं। लेकिन पिछली बार वो 70 सीटों पर लड़े और जीत सिर्फ सीट 19 ही पाए। 2015 में कांग्रेस 40 सीट लड़ी और 27 जीती थी। वो अच्छा स्ट्राइक रेट था। लेकिन 2020 में वो 70 सीट लड़ी… जो उनकी औकात (लड़ने की क्षमता) से ज्यादा थी। इसलिए मुझे लगता है कि इन सबके बीच संतुलन होना चाहिए।” याद दिला दें कि 2020 के चुनाव में मात्र 12 सीटों के अंतर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। राजद के कई नेता इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेवार मानते हैं जो 70 सीटों पर लड़ी लेकिन सिर्फ 19 जीतकर आई। सीपीआई-माले मात्र 19 सीट लड़ी और 12 जीत गई। राजद ने 144 लड़कर 75 सीट निकाली थी। उस चुनाव में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 27 फीसदी रहा, जबकि राजद का 52 परसेंट, सीपीआई-माले का 63 परसेंट, सीपीएम का 50 परसेंट और सीपीआई का 33 फीसदी रहा था।  

राहुल की यात्रा में दिखी एकता, पर तेजस्वी की चुप्पी के पीछे क्या है गठबंधन की गांठ?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा दोनों गठबंधनों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. एनडीए में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अधिकाधिक सीटें हासिल करने के लिए लंबे समय से बवेला मचाए हुए हैं. मांझी अब 20 सीटों के लिए अड़े हुए हैं. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर (LJP-R) को न सिर्फ सीटें चाहिए, बल्कि अब सीएम पद की रेस में भी उन्हें शामिल कर दिया है. चिराग के बहनोई सांसद अरुण पासवान की नजर में चिराग सीएम पद के लिए फिट कैंडिडेट हैं. मांझी ने अधिक सीटें मांगने के पीछे के कारण भी उजागर कर दिए हैं. उनका कहना है कि पार्टी को सदन में मान्यता के लिए कम से कम 8सीटों पर जीतना जरूरी है. और, यह तभी संभव होगा, जब उनकी पार्टी को 20 या इससे अदिक सीटें मिलें. एनडीए का तो रिकार्ड ही रहा है कि टिकट बंटवारे से पहले खूब चिल्ल-पों मचती है, लेकिन जिसे जितनी सीटें मिलती हैं, वे उससे ही संतुष्ट हो जाते हैं. सबसे मुश्किल हालात 8 विपक्षी दलों के महागठबंधन में पैदा हो गए हैं. कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे की शर्तों को लेकर घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस ने कसी RJD की नकेल महागठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तलवारें तन गई हैं. अव्वल तो कांग्रेस तेजस्वी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने को तैयार नहीं, जबकि तेजस्वी खुद को सीएम फेस बताते रहे हैं. बिहार अधिकार पर निकले तेजस्वी कांग्रेस की चुप्पी के बावजूद अपने को भावी सीएम के रूप में पेश कर रहे हैं. पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं. राहुल के साथ वोटर अधिकार यात्रा के दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि राहुल को पीएम और उन्हें सीएम बनाने के लिए वोट कीजिए. जहां तक सीटों का सवाल है तो कांग्रेस 2020 की तरह मनपसंद 70 सीटें तो चाहती ही है, साथ ही अब उप मुख्यमंत्री का पद भी मांगने लगी है. दोनों दलों के बीच तनातनी का आलम यह है कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर 15 सितंबर को होने वाली महागठबंधन की बैठक टालनी पड़ गई. अब तेजस्वी यादव ने भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. खींचतान से महागठबंधन में दिख रही दरार अगर टूट की बुनियाद बन जाए तो आश्चर्य नहीं. बिहार की वह सीट, जिसे लेकर RJD-कांग्रेस में खींच गई तलवार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग का मसला गरमा गया है. खासकर कुटुंबा (SC) विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच खींचतान तेज हो गई है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक आरजेडी ने इस सीट से पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का नाम आगे कर दिया है. इससे कांग्रेस नेताओं में नाराजगी है. कांग्रेस का आरोप है कि आरजेडी जानबूझकर दबाव की राजनीति कर रही है और कुटुंबा में उनकी मजबूत स्थिति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, कुटुंबा सीट पर कांग्रेस का लगातार दबदबा रहा है. मौजूदा विधायक राजेश कुमार और उनके पिता सात बार से इस सीट पर कब्जा बनाए हुए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में भी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. उन्हें 50,822 वोट मिले थे, जबकि रनर-अप हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार शर्वन भुइंया को 34,169 वोट ही मिले. कांग्रेस ने तब 16,653 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम की थी. साल 2020 के नतीजे कैंडिडेट    कुल वोट     वोट शेयर राजेश कुमार    50,822    36.61% शर्वन भुइंया    34,169    24.61% कहां फंसा है मामला? यही वजह है कि कांग्रेस मानती है कि इस सीट पर उनकी स्थिति बेहद मजबूत है और आरजेडी का नया चेहरा थोपना केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार आरजेडी की मोहताज नहीं है और बदली हुई परिस्थितियों में बेहतर तरीके से चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राजेश राम को डिप्टी सीएम का चेहरा सामने न लाने के लिए भी अंदरखाने राजनीति हो रही है. यानी, महागठबंधन के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. 76 सीटों पर दावेदारी इसी बीच, खबर है कि कांग्रेस ने इस बार बिहार की 76 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है. इनमें से 38 सीटों पर जल्द ही उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इन सीटों पर आरजेडी के ग्रीन सिग्नल का इंतजार नहीं करेगी. यानी, पार्टी अब अपनी रणनीति खुद बनाने के मूड में है. आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक भी होने वाली है, जिसमें बिहार कांग्रेस के कई नेता शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने रुख को और स्पष्ट करेगी. अब देखना यह है कि यह खींचतान सीट शेयरिंग फॉर्मूले को कितना प्रभावित करती है और क्या महागठबंधन एकजुट रहकर मैदान में उतर पाता है. कांग्रेस की आक्रामक दावेदारी सीटों की संख्या के लिए आरजेडी के सामने कांग्रेस ने 2020 को आधार बनाने की शर्त रखी है. तब कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं. कांग्रेस का कहना है कि उसे जो सीटें दी गईं, उसमें आधी से अधिक कमजोर सीटें थीं. इसलिए उसने टिकट बंटवारे में अच्छी-बुरी सीटों में संतुलन बनाने की दूसरी शर्त रखी है. कांग्रेस केवल 19 सीटें जीत पाई थी. उसके खराब स्ट्राइक रेट को महागठबंधन की हार का एक मुख्य कारण माना गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसे आधी से अधिक वैसी कमजोर सीटें मिली थीं, जिसकी वजह से उसका स्ट्राइक रेट खराब रहा. कांग्रेस ने अपने लिए उप मुख्यमंत्री पद की तीसरी शर्त रखी है. महागठबंधन में शामिल वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी डिप्टी सीएम पद के लिए पहले से ही हाय-तौबा मचाए हुए हैं. सहनी तो यहां तक कहते हैं कि अगर तेजस्वी सीएम बनेंगे तो उनका डिप्टी सीएम बनना पक्का है. कांग्रेस की शर्तों से यह साफ है कि काग्रेस अब बिहार में अपने को आरजेडी का पिछलग्गू बनाए रखने से बचना चाहती हैं. राहुल की वोटर अधिकार … Read more

राहुल गांधी के Gen-Z बयान पर विश्वास सारंग ने कसा तगड़ा जवाब

भोपाल   मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जेन ज़ी (युवा पीढ़ी) ने देश को बचाने का काम किया है और यही कारण है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को बार-बार देश का प्रधानमंत्री चुना. सारंग ने राहुल गांधी पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठ और भ्रामक बातों के सहारे लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं. उनकी राजनीति देश और उनके लिए हितकारी नहीं है. सारंग ने राहुल के रवैये को बचकाना बताया और कहा कि वह गंभीर मुद्दों को समझने में असमर्थ हैं. सारंग ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है, वह सिर्फ दबाव बनाएंगे. सारंग ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया और कहा कि राहुल गांधी की नकारात्मक सोच के कारण ही जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है. उन्होंने वोट चोरी के मुद्दे पर भी राहुल को आड़े हाथों लिया. सारंग ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर कोई शिकायत है, तो उसे लिखित शपथपत्र के साथ दर्ज करना होगा. लेकिन राहुल गांधी बिना सबूत के बयानबाजी करते हैं. सारंग ने जोर देकर कहा कि देश का हर वर्ग, खासकर जेन ज़ी, नरेंद्र मोदी के साथ है. युवाओं में मोदी के प्रति विशेष आकर्षण है और वह उनके लिए हीरो हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं के लिए कई कदम उठा रही है, जिससे देश 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में बढ़ रहा है. यह सपना जेन ज़ी ही साकार करेगी. सारंग ने कहा कि नकारात्मक राजनीति का कोई भविष्य नहीं है. देश का लोकतंत्र मजबूत है और जनता ने बार-बार मोदी को चुनकर यह साबित किया है. राहुल गांधी की गैर-जिम्मेदाराना बातें और भ्रामक बयानबाजी उनकी हार का कारण बनी हैं. जनता ने उनकी नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

सैम पित्रोदा का बयान फिर बना बहस का मुद्दा, कहा – पाकिस्तान-बांग्लादेश घर जैसे, युवा पीढ़ी से की खास अपील

नई दिल्ली इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा एक बार फिर अपने विवादों से चर्चा में आ गए हैं. उन्होंने पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया है.पित्रोदा ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में घर जैसा महसूस होता है. इतना ही नहीं उन्होंने भारत की विदेश नीति को लेकर कहा कि देश की फॉरेन पॉलिसी का फोकस पड़ोसी देशों पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरे अनुसार हमारी फॉरेन पॉलिसी का फोकस हमारे पड़ोसी देशों पर होना चाहिए. क्या हम पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों में सुधार कर सकते हैं? मैं पाकिस्तान रहा हूं और आपको बताना चाहूंगा कि मुझे वहां घर जैसा लगता है. मैं बांग्लादेश में भी रहा हूं और नेपाल में भी और मुझे वहां भी घर जैसा लगता है. मुझे इन देशों में जाकर नहीं लगता कि किसी विदेशी धरती पर हूं.  राहुल गांधी की Gen-Z से अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने कहा कि मैं देश के युवाओं से अनुरोध करना चाहता हूं कि वे राहुल गांधी के साथ खड़े हों. उनकी आवाज के साथ अपनी आवाज मिलाएं. दरअसल राहुल गांधी ने Gen-Z से अपील की थी कि वे आगे आएं और देश के लोकतंत्र की रक्षा करे. बता दें कि पित्रोदा अपने विवादित बायनों की वजह से निशाने पर रहते हैं. उन्होंने पिछले साल भारत की विविधता को लेकर बयान दिया था, जिस पर खूब बवाल हुआ था. उन्होंने कहा था कि भारत एक अत्यंत विविधता भरा देश है, जहां पूर्वी भारत में रहने वाले लोग चीन के लोगों जैसे, पश्चिम में रहने वाले अरब जैसे, उत्तर भारत में रहने वाले श्वेतों की तरह और दक्षिण में रहने वाले अफ्रीकी लोगों की तरह दिखते हैं. लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता.  उन्होंने कहा था कि हम अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और रीति-रिवाजों का सम्मान करते हैं. ये वही भारत है, जिस पर मेरा भरोसा है, जहां हर किसी का सम्मान है और हर कोई थोड़ा-बहुत समझौता करता है. उनके इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.  इससे पहले सैम पित्रोदा के विरासत टैक्स को दिए बयान पर विवाद हो गया था. उन्होंने ये बयान राहुल गांधी की उस टिप्पणी के जवाब में दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस सरकार में आई तो एक सर्वे कराया जाएगा और पता लगाया जाएगा कि किसके पास कितनी संपत्ति है. उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने अमेरिका में लगने वाले विरासत टैक्स का जिक्र किया था.

वोटर अधिकार बनाम घुसपैठिया बचाओ यात्रा: अमित शाह ने राहुल गांधी को घेरा

रोहतास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर निशाना साधा और उनकी बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा को घुसपैठिया बचाओ यात्रा बताया। रोहतास जिले के डेहरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए, शाह ने कांग्रेस पार्टी पर विकास के मुद्दों की अनदेखी करने और इसके बजाय बांग्लादेश से आए अवैध घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया। अमित शाह ने डेहरी में सभा को संबोधित करते हुए कहा, “वे (कांग्रेस) हर बार झूठा प्रचार करते हैं। राहुल गांधी ने यात्रा की। उनकी यात्रा का विषय वोट चोरी नहीं था। मुद्दा अच्छी शिक्षा, रोजगार, बिजली, सड़कें नहीं थीं। उनकी यात्रा का मुद्दा बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को बचाना था। क्या आपमें से किसी ने अपना वोट खोया है? यह राहुल गांधी की 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' थी।” कांग्रेस की यात्रा की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए शाह ने पूछा, "क्या घुसपैठियों को वोट का अधिकार होना चाहिए? क्या घुसपैठियों को नौकरी, घर, 5 लाख रुपये तक का इलाज और मुफ्त राशन मिलना चाहिए? ये राहुल बाबा एंड कंपनी वोट बैंक के लिए हमारे युवाओं की बजाय घुसपैठियों को नौकरी दे रही है।" अमित शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के सत्ता में आने पर कथित खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह करते हुए कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम घर-घर जाएं और लोगों को बताएं कि अगर गलती से भी उनकी (महागठबंधन) सरकार बन गई, तो बिहार के हर जिले में सिर्फ घुसपैठिए होंगे।” यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में अपने चुनावी अभियान तेज कर दिए हैं। बिहार में अगले महीने विधानसभा चुनाव की घोषणा संभव है।  

अनुराग ठाकुर का कटाक्ष: हाइड्रोजन बम फोड़ने वाले थे, फुलझड़ी से काम चला राहुल गांधी ने

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। इसे लेकर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार चुनावी हार और जनता द्वारा खारिज किए जाने से हताश और निराश हैं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 'आरोपों की राजनीति' को अपना आभूषण बना लिया है, लेकिन जब इन्हीं आरोपों को साबित करने की बात आती है तो पीठ दिखाकर भाग जाते हैं।   झूठे आरोप लगाने की आदत: अनुराग ठाकुर अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी की आदत गलत और निराधार आरोप लगाने की बन गई है। उन्होंने दावा किया कि जब चुनाव आयोग उनके आरोपों को सत्यापित करने के लिए कहता है, तो वह पीछे हट जाते हैं। इसके अलावा, जब उन्हें शपथ पत्र देने के लिए कहा जाता है, तो वह मुकर जाते हैं। ठाकुर ने आगे कहा, "आरोप लगाने के बाद माफी मांगने और कोर्ट से फटकार खाने का काम राहुल गांधी का हो गया है। हर मामले में उनको फटकार ही लगी है।" हाइड्रोजन बम की जगह फुलझड़ी राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस पर तंज कसते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस में हाइड्रोजन बम फोड़ने वाले थे, फुलझड़ी से काम चलाना पड़ा। "राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 90 चुनाव हारी है" अनुराग ठाकुर ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी लगभग 90 चुनाव हारी है, जिससे उनकी हताशा और निराशा दिन व दिन बढ़ती जा रही है।   रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और झूठ बोलते हैं: अमित साटम मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने कहा, "राहुल गांधी हमेशा ऐसे बयान देकर देश को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें तकनीकी और संवैधानिक तौर पर जो करने को कहा है, वो वो नहीं करते। वो रोज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और झूठ बोलते हैं। मुझे लगता है कि अगर वो थोड़ा आत्मचिंतन करें कि उन्हें इतने कम वोट क्यों मिले और वो क्यों हारे, तो शायद वो ज़िंदगी में थोड़ा आगे बढ़ जाएं, क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति आत्मचिंतन करता है, तो उसे अपनी गलतियां समझ आती हैं और उन्हें सुधारने का मौका मिलता है। मुझे लगता है कि देश उन पर ध्यान नहीं दे रहा है और अगर उनके पास कोई सही आरोप है, तो उन्हें संवैधानिक, तकनीकी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। वो प्रक्रिया का पालन इसलिए नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका झूठ उजागर होने वाला है।" ये दिवालियापन है: संजय सेठ केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा, "ये दिवालियापन है। आप नेता प्रतिपक्ष हैं। आप संवैधानिक संस्था पर आरोप लगा रहे हैं। आपको ना ED पर विश्वास ना CBI, ना चुनाव आयोग, ना EVM, ना जनता पर विश्वास, कभी-कभी आप सिंदूर पर प्रश्न चिन्ह खड़े करते हैं… क्या हो गया है? देश की जनता इसलिए आपको सीरियस नहीं लेती है। आपको तीसरी बार किनारे बिठा दिया तो आप अपना खीझपन चुनाव आयोग पर निकाल रहे हैं। देश की जनता फिर आपको किनारे बिठाएगी, बिहार में भी किनारे बिठाएगी।"