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राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर

 लखनऊ प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है। जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में पिछले 16 माह से जौनपुर टॉप फाइव जिलों में बना हुआ है।    लखनऊ में सबसे अधिक कुल 18,861 मामले निस्तारित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत सभी जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में पूरे प्रदेश में कुल 3,37,708 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 18,861 मामले निस्तारित किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज कुल 12,036 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरे, बाराबंकी 9,139 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है।  आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर प्रदेश में चौथा स्थान किया प्राप्त आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। आजमगढ़ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जनशिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रहीं हैं। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अभियान चलाकर निपटाया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि आजमगढ़ ने अप्रैल में राजस्व मामलों के निस्तारण में चौथा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह बरेली ने 8,483 मामले निस्तारित कर पांचवां और जौनपुर ने 8,274 मामलों का निस्तारण कर छठवां स्थान प्राप्त किया है।     जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने मारी बाजी, 535 मामले किए निस्तारित  जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की अप्रैल माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक के निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 535 मामलों का निस्तारण किया है। इसका अनुपात 214.00 प्रतिशत है। इसी के साथ जनपदीय न्यायालय में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि मानक 350 के सापेक्ष 370 मामलों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर सुल्तानपुर और मानक 190 के सापेक्ष 199 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर गाजीपुर है। जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित मामलों में भी जौनपुर ने मारी बाजी वहीं अप्रैल में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 70 मामलों का निस्तारण कर 233.33 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश भर में सबसे अधिक है और जौनपुर प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 70 मामले निस्तारित किए गये। वहीं, मैनपुरी के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 58 मामले निस्तारित किए गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किए गये मामलों में मऊ दूसरे और मैनपुरी तीसरे स्थान पर हैं।

सेंसर आधारित स्कैनिंग और एआई कैमरों से सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का नया दौर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जहां एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है।  निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन प्रायः निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, रूफटॉप सोलर स्थापना में देश में नंबर-1

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर स्थापना के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में अब तक 5,00,115 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।     राज्य में कुल 8,94,217 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से बड़े पैमाने पर स्वीकृति एवं स्थापना सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 1,696.68 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता सृजित हुई है तथा ₹3,038.08 करोड़ की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा एवं ₹1,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है।       इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि कुल उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग ₹5 करोड़ मूल्य की मुफ्त बिजली उत्पन्न हो रही है तथा लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में लगभग 5,000 कंपनियों के माध्यम से 65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार एवं लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। साथ ही, सौर परियोजनाओं को लोगों के छतों पर स्थापित किए जाने से प्रदेश की लगभग 6,500 एकड़ भूमि को संरक्षित करते हुए उसे कृषि एवं अन्य व्यावसायिक उपयोग हेतु सुरक्षित रखा गया है।    अप्रैल 2026 में मात्र 30 दिनों में 51,882 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर प्रदेश ने स्थापना की गति में नया मानक स्थापित किया तथा योजना प्रारंभ से अब तक किसी भी राज्य द्वारा 50,000 संयंत्रों की सर्वाधिक तीव्र स्थापना का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।     माह अप्रैल में प्रदेश की औसत दैनिक स्थापना 1,729 संयंत्र प्रति दिन रही, जो अब तक का सर्वाधिक है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उत्तर प्रदेश ने अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।     उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में औसत दैनिक स्थापना 1,700 संयंत्र प्रति दिन थी, जिसे पीछे छोड़ते हुए अप्रैल में नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ समन्वय और निरंतर निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम है।

सीएम योगी ने जिलाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई का काम करते समय सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और कार्य संपन्न होते ही खोदी गई सड़कों व गड्ढों को तत्काल भरा जाए। जिलाधिकारी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पानी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। जल जीवन मिशन के जरिए करोड़ों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकरी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करें। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करें। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम को समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। टोल फ्री नंबर पर कीजिए शिकायत जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग 18001212164 टोल फ्री नंबर पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2.50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। योगी सरकार घर-घर साफ पानी पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है।

UP में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना, पूरी योजना जानें

  लखनऊ उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि राज्य में जातीय जनगणना की तैयारी की जा रही है. शीतल वर्मा ने ये भी बताया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है।  पहले फेज में 'हाउस होल्ड लेवल' यानी घरेलू स्तर पर डेटा जुटाया जाएगा. इसमें परिवारों की बुनियादी जानकारी और मकानों की लिस्ट तैयार की जाएगी. दूसरा चरण सबसे अहम चरण होगा।  दूसरे फेज की जनगणना फरवरी में शुरू होगी जिसमें 'व्यक्तिगत डेटा' का कलेक्शन किया जाएगा. इसी दौरान लोगों से उनकी जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी।  वर्मा ने जानकारी दी कि दूसरे फेज में होने वाली ये गणना, आजादी के बाद पहली बार होगी. केंद्र सरकार की नीति के तहत इस बार जातिगत आंकड़ों को जनगणना का हिस्सा बनाया जा रहा है. अब तक जनगणना में जातियों का विवरण इस तरह व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाता था।  फरवरी 2027 में होगा दूसरा चरण इसमें जनगणना एजेंट घर-घर जाकर हर मकान की स्थिति, परिवार को मिलने वाली सुविधाएं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एक मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज करेंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। इस दौरान जनसंख्या की विस्तृत गणना की जाएगी। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह प्रक्रिया पहले चरण में जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ेगी। राज्य में जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। करीब 5.25 लाख कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस बार की जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल इनमें सभी 18 मंडल आयुक्त, 75 जिलाधिकारी, 17 नगर आयुक्त, 600 जिला स्तरीय अधिकारी, 1195 चार्ज अधिकारी, 285 मास्टर ट्रेनर, 6939 फील्ड ट्रेनर के साथ लगभग 5 लाख पर्यवेक्षक और प्रगणक शामिल हैं। इस बार की जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल होगी, जो दूसरे चरण में की जाएगी। इसे आजादी के बाद पहली बार लागू किया जा रहा है। हालांकि इसके लिए अभी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार नहीं हुई है। शीतल वर्मा ने बताया कि दूसरे चरण में केंद्र सरकार की नीति के अनुसार जातीय जनगणना होगी। पहले चरण में केवल मकानों और घरेलू जानकारी का डेटा लिया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत स्तर पर विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह जनगणना आने वाले समय में विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभी एसओपी का इंतजार भले ही जातिगत जनगणना प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां हो रही हैं, लेकिन अभी इसकी एसओपी (Standard Operating Procedure) तय होना बाकी है. जातिगत जनगणना की प्रक्रिया कैसे चलेगी और किन नियमों का पालन होगा, इसके लिए एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।  नीति और डेटा सुरक्षा शीतल वर्मा ने बताया कि जातीय जनगणना पूरी तरह से केंद्र सरकार की निर्धारित नीतियों के तहत ही पूरी होगी. व्यक्तिगत डेटा कलेक्शन के दौरान प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।  जातिगत जनगणना उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. फरवरी में होने वाले दूसरे चरण पर प्रशासन और जनता, दोनों की नजरें टिकी हुई हैं. इसके जरिए राज्य की आबादी के असल जातीय आंकड़े सामने आ पाएंगे।  जानें महत्वपूर्ण बातें     जनगणना में caste census यानी जातिगत जनगणना भी होगी यह दूसरे चरण में होगा           आजादी के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना           जातिगत जनगणना दूसरे चरण में होगी।           अभी जातिगत जनगणना की प्रक्रिया sop का बनना बाकी है।           जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा का बयान।           दूसरे फेज फरवरी में होगी जातीय जनगणना।           दूसरे फेज में केंद्र की नीति के तहत होगी जातीय जनगणना।           पहले फेज में हाउस होल्ड लेवल डाटा कलेक्शन होगा।           दूसरे फेज में व्यक्तिगत डाटा कलेक्शन होगा।           अभी जातीय जनगणना की SOP नहीं की गई तय।           दूसरे फेज में आजादी के बाद पहली बार होगी जातीय जनगणना।  

RTE दाखिला विवाद, निजी स्कूलों पर बीएसए की सख्ती बढ़ी

लखनऊ राजधानी के नामी विद्यालय शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2020 (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने राजधानी के करीब 55 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है। विभाग का स्पष्ट निर्देश है, एक सप्ताह के अंदर प्रवेश न लेने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बीएसए विपिन कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एल्डिको लखनऊ पब्लिक स्कूल की अपील को खारिज करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। राजधानी में 55 ऐसे विद्यालय हैं जो आरटीई के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। विद्यालय में चयन होने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहते हैं। इन विद्यालयों को नोटिस जारी करते हुए प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं। जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय के अनुसार, राजधानी के सिटी मॉन्टेंसरी, जयपुरिया, टीपीएस, एलपीएस, स्टडी हॉल सहित 35 से अधिक विद्यालयों को पहले से नोटिस जारी किया गया है। जबकि अन्य विद्यालयों को भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चों को प्रवेश न देने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने की भी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का ये है आदेश हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की ओर से भेजे गए सभी बच्चों को प्रवेश देना निजी विद्यालयों का कर्तव्य है। आरटीई अधिनियम के तहत प्रत्येक विद्यालय में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है। नियम का पालन न करने पर सरकार को कार्रवाई का अधिकार है। 4500 बच्चे प्रवेश के इंतजार में बीएसए कार्यालय के अनुसार, राजधानी के 1600 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत प्रवेश होने हैं। अभी तक 12,000 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की प्रक्रिया जारी है। करीब 4500 ऐसे बच्चे हैं जिनका आरटीई में चयन हुआ है लेकिन निजी विद्यालय प्रवेश देने में हीलाहवाली कर रहे हैं।  

स्टेशन पर अब नहीं करनी होगी कुली से मोलभाव, ऑनलाइन बुकिंग से तय होगा फिक्स चार्ज

प्रयागराज रेलवे स्टेशनों पर अब आपको कुली के लिए इधर-उधर भटकने या उनके साथ रेट को लेकर मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल देश में पहली बार कुलियों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इस पहल से यात्रियों को ओवर चार्जिंग की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यात्री रेलवे के अधिकृत एप या वेबसाइट के माध्यम से अपनी ट्रेन के आगमन या प्रस्थान के समय के अनुसार कुली को पहले से ही बुक कर सकेंगे। जैसे ही यात्री स्टेशन पहुंचेगा, बुक किया गया कुली निर्धारित स्थान पर मौजूद रहेगा। इस सेवा के लिए एक पारदर्शी डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे यात्रियों को पहले से पता होगा कि उन्हें कितना शुल्क देना है। मनमाना किराया वसूलने की अक्सर रहती है शिकायत अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या भीड़भाड़ के समय कुछ कुली यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे यात्रियों और कुलियों के बीच विवाद की स्थिति भी पैदा होती है। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम शुरू होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी। वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल यात्री सुविधाओं में इजाफा होगा, बल्कि कुलियों के काम में भी अनुशासन और पारदर्शिता आएगी। जंक्शन, छिवकी से होगी शुरुआत यह सुविधा शुरुआत में मंडल के प्रयागराज जंक्शन, छिवकी, कानपुर सेंट्रल, मिर्जापुर, इटावा, अलीगढ़ जैसे प्रमुख स्टेशनों पर लागू की जाएगी। इसके सफल ट्रायल के बाद इसे अन्य मंडल के स्टेशनों में विस्तार देने की योजना है। सीनियर डीसीएम हरिमोहन का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देना ही हमारा लक्ष्य है। यात्री कुलियों की ऑन लाइन बुकिंग कर सके इस दिशा में तैयारी की जा रही है।  

SCERT की नई पहल: परिषदीय विद्यालयों में शुरू होगा दैनिक गतिविधि आधारित शिक्षण ‘अरुणोदय’

लखनऊ प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 से बच्चों को हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने पूरे वर्ष के लिए दैनिक गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया है, जिसे जल्द ही सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा। यह पहल अपने आप में अनोखी मानी जा रही है। नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार इस कैलेंडर को ‘अरुणोदय’ नाम दिया गया है। इसके तहत हर दिन किसी न किसी विषय जैसे पर्यावरण, स्वास्थ्य, महापुरुषों की जयंती, नदियां, शब्द ज्ञान, कला, कहानी-कविता, देशभक्ति और स्वतंत्रता से जुड़े प्रसंग पर बच्चों को जानकारी दी जाएगी। यह गतिविधियां सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान आयोजित होंगी। संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक बच्चों को विषय की जानकारी देंगे और उससे जुड़ी गतिविधियां भी कराएंगे। खास बात यह है कि प्रत्येक विषय के साथ क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जिससे शिक्षक अतिरिक्त जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। कैलेंडर को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के अनुसार अलग-अलग तैयार किया गया है, ताकि बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप सामग्री मिल सके।   विविध विषयों से होगा सर्वांगीण विकास कैलेंडर में बच्चों से छुट्टियों के अनुभव साझा कराने से लेकर मौसमी फल-सब्जियों के लाभ, वर्णमाला, शब्द निर्माण, विलोम शब्द, कहानी-कहानी, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक सेंस, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण, पौधरोपण, बाढ़ से बचाव, संचारी रोगों की रोकथाम, विद्यालय शिष्टाचार, वाद्ययंत्र और लोकगीतों की जानकारी भी दी जाएगी। बच्चों को अच्छी आदतें, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, जीवन मूल्य, प्रकृति, आपदा प्रबंधन, ऋतुओं का ज्ञान और खेल-खेल में विज्ञान भी सिखाया जाएगा।   अखबारों से भी जोड़ने की पहल एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए बच्चों को अखबारों से भी जोड़ा जाएगा। उन्हें नए और पुराने अखबारों की उपयोगिता, समाचारों की समझ और उनसे जुड़ी चर्चाओं के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। साथ ही गणित के डर को दूर करने के लिए खेल, पहेलियां, गणित किट और भारतीय गणितज्ञों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों का बहुमुखी विकास करना है, ताकि वे विभिन्न विषयों की समग्र जानकारी प्राप्त कर सकें। इसे जल्द ही प्रदेशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा।  

यूपी पुलिस का एक्शन, आगरा धर्मांतरण गैंग के 4 सदस्य दबोचे, STF की मदद से कार्रवाई

आगरा यूपी के आगरा में सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण में शामिल गैंग के चार और सदस्यों पर आगरा पुलिस ने शिकंजा कसा है। कार्रवाई में एसटीएफ की भी मदद ली गई। दिल्ली, राजस्थान में दबिश दी गई थी। पकड़े गए आरोपियों से तीन कलीम सिद्दीकी से भी जुड़े रहे हैं। धर्मांतरण के बाद सभी कागजात तैयार कराकर दिया करते थे। वर्ष 2025 में सदर की सगी बहनें नाटकीय अंदाज में घर से लापता हुई थीं। सदर थाने में अपहरण का मुकदमा लिखा गया था। मुकदमे में एक कश्मीरी छात्रा पर शक जाहिर किया गया था। पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो पुलिस के होश उड़ गए। मामला देशभर में फैले धर्मांतरण गैंग से जुड़ा हुआ था। गैंग में महिलाएं भी शामिल थीं। छह राज्यों में दबिश देकर एक महिला सहित 14 आरोपियों को पकड़ा गया था। गैंग का मास्टरमाइंड दिल्ली का अब्दुल रहमान निकला था। पुलिस ने पिछले दिनों कनाडा में रह रहे गैंग के एक फाइनेंसर के घर भोपाल में कुर्की की कार्रवाई की थी। पिछले साल जेल भेजे गए सभी 14 आरोपित जेल में बंद हैं। सबको सौंपे गए थे अलग काम पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि मुकदमे की विवेचना प्रचलित है। पुलिस को मोबाइल और लैपटॉप का डेटा खंगालने पर कई नाम और मिले। पुलिस ने उनके बार में साक्ष्य संकलन शुरू किया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि चारों गैंग के सक्रिय सदस्य हैं। सभी की अलग-अलग भूमिका है। कोई फर्जी कागजात तैयार करता है तो कोई धन मुहैया कराता है। कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है। ब्रेनवॉश करने में मदद करता है। कोई दिल्ली में रुकने के लिए ठिकाने मुहैया कराता है। पुलिस ने साक्ष्य संकलन के बाद दिल्ली और राजस्थान में दबिश दी। चार आरोपियों को पकड़ा। कोर्ट ने रिमांड स्वीकृत करके आरोपियों को जेल भेज दिया है। धर्मांतरण गैंग को धन मुहैया कराता था परवेज आगरा में सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण में शामिल गैंग के चार और सदस्यों को आगरा पुलिस ने पकड़ा है। पकड़े गए ईस्ट दिल्ली, जामिया नगर निवासी तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर (अहाता किदारा, नॉर्थ दिल्ली), जतिन कपूर (आदर्श नगर, वेस्ट दिल्ली) व हसन मोहम्मद (डींग, भरतपुर) को जेल भेजा गया है। हसन मोहम्मद गैंग से लंबे समय से जुड़ा हुआ है। पहले कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था। अब्दुल रहमान के संपर्क में तभी से है। पुलिस का दावा है कि आरोपित निकाहनामा और धर्म परिवर्तन के कागजात तैयार किया करता था। गैंग की मांग पर भरतपुर से दिल्ली तक आता था। तलमीज उर रहमान भी अब्दुल रहमान से जुड़ा हुआ है। उसके साथ जमात में जाया करता था। परवेज अख्तर वह व्यक्ति है जो धर्म परिवर्तन के लिए किताबें तैयार कराता था। वे किताबें लोगों को ब्रेन वॉश के लिए पढ़ने के लिए दी जाती थीं। गैंग को धन भी मुहैया कराता था। जतिन कपूर गैंग को दिल्ली में ठिकाने दिया करता था।

समग्र शिक्षा 3.0 बैठक में बड़ा फैसला, KGBV शिक्षकों की सैलरी बढ़ाई गई

लखनऊ   शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के बाद अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़़ाने वाले अंशकालिक शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। इन शिक्षकों की सैलरी (मानदेय) भी जल्द ही बढ़ेगी। इन्हें 17,000 रुपये का मानदेय मिलेगा। गुरुवार को दिल्ली में हुई समग्र शिक्षा 3.0 की उच्चस्तरीय बैठक में अंशकालिक शिक्षकों के वेतन में वृद्धि का निर्णय किया गया है। वर्तमान में कस्तूरबा के अंशकालिक शिक्षकों को ईपीएफ काट प्रतिमाह 9961 रुपये मानदेय मिलते हैं, जो जल्द 17000 रुपये कर दिया जाएगा। इससे प्रदेश भर के करीब 2,000, देशभर के 5500 से अधिक अंशकालिक शिक्षक लाभांवित होंगे। इनके वेतन का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार, शेष 40 फीसदी राज्य सरकार देती है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अंशकालिक शिक्षकों को परिषदीय विद्यालयों के अनुदेशक के समकक्ष माना जाता है और वेतन भी उन्हीं के बराबर दिया जाता था। अप्रैल 2026 से योगी सरकार ने अनुदेशकों का वेतन बढ़ाकर 17000 कर दिया है। अनुदेशकों का वेतन बढ़ने पर भी अंशकालिक शिक्षकों को लाभ नहीं मिला था। उनके लिए अब गुड न्यूज आई है। शिक्षा मित्रों-अनुदेशकों की कितनी बढ़ी है सैलरी यूपी सरकार ने एक अप्रैल से शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का वेतन बढ़ा दिया है। इस संबंध में योगी कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। शिक्षा मित्रों को 10 हजार की जगह 18 हजार रुपये वेतन मिलेगा। वर्तमान में यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में 1 लाख 42 हजार 929 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आरटीई के तहत अनुदेशकों की तैनाती की गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर 24 हजार 717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। उन्हें 9 हजार रुपये महीने मानदेय दिया जाता था। इसे बढ़ाकर अब 17 हजार रुपये कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था। कस्तूरबा विद्यालयों की खासियत बता दें कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) मुख्य रूप से शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखंडों में वंचित और कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए शिक्षा और आवासीय सुविधा प्रदान करते हैं। पहले ये विद्यालय कक्षा 6 से 8 तक के लिए थे, लेकिन अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक उच्चीकृत किया जा रहा है। इन विद्यालयों में छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा, भोजन, और अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश में 746 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। सभी को 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया जा रहा है।