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कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा विश्वविद्यालय, 491 करोड़ रुपये से अधिक आएगी लागत

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में गोरखपुर में बनने वाले ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की है। 491 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह विश्वविद्यालय कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। योगी सरकार वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय के लिए इस वर्ष प्रस्तुत प्रदेश के बजट में भी 50 करोड़ रुपये पास कर चुकी है।  गोरखपुर के इस पांचवें विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए योगी सरकार और गोरखपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो जाएगी। इसके पहले सरकार ने दुनिया के पहले राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण केंद्र की स्थापना गोरखपुर में ही की है। 6 सितंबर 2024 को कैम्पियरगंज में दुनिया के पहले राजगिद्ध जटायु (रेड हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के उद्घाटन अवसर पर सीएम योगी ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही वानिकी विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। अब इसे कैबिनेट की भी मंजूरी मिल गई है। यह उत्तर भारत का पहला और पूरे देश का दूसरा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गोरखपुर वन प्रभाग ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही 50 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर प्रक्रियात्मक तैयारी तेज कर दी है।  गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव का कहना है कि वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में वानिकी के अलावा कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिक के भी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स संचालित कराने की योजना है ताकि बड़ी संख्या में युवाओं के सामने नौकरी और रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब शिलान्यास की तैयारी और तेज की जाएगी।

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों के आधार पर एलओसी, सब्सिडी और संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की संस्तुतियों को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के तहत राज्य में संचालित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कंफर्ट (LoC) जारी करने, पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति दी गई है, जिससे उद्योगों को संचालन में सहूलियत मिलेगी और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी। कैबिनेट में कुल 22 प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई।  अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष रखे गए प्रस्तावों में 6 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एक इकाई के सब्सिडी क्लेम और एक परियोजना में संशोधित एलओसी को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर में ओएफसी टेक प्रा लि (₹589 करोड़) एवं हाथरस में एजेआई केन इंडस्ट्रीज (₹1128 करोड़) को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए एलओसी जारी किए जाने की मंजूरी दी गई है। वहीं गोरखपुर स्थित इंडिया ग्लाइकोल्स लि. (₹669 करोड़) और प्रयागराज की विस्कोस इंटरनेशनल प्रा. लि. (₹269 करोड़) तथा गौतमबुद्ध नगर की इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा. लि. (₹1146 करोड़) को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इन इकाइयों की लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त मुरादाबाद में त्रिवेणी इंजीनियरिंग को पूंजीगत सब्सिडी वितरण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर स्थित आवादा इलेक्ट्रो लि. के ₹16,000 करोड़ के प्रोजेक्ट में संशोधन (LoC में बदलाव) प्रस्ताव को भी कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। ग्रीन एनर्जी पर फोकस बैठक में विशेष रूप से सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इन परियोजनाओं से सोलर उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।  स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत अंतिम बिड दस्तावेज को मंजूरी, 2000 करोड़ का प्रावधान कैबिनेट बैठक में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को निःशुल्क टैबलेट वितरण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने 25 लाख टैबलेट खरीदने हेतु जारी किए जाने वाले अंतिम बिड डॉक्यूमेंट को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है और इसका पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत प्रदेश के स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण, आईटीआई तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं को मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकें और आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी अवसरों में इसका उपयोग कर सकें। पांच वर्षों तक लागू रहने वाली यह योजना प्रदेश में डिजिटल सशक्तीकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमिधर अधिकार योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए हजारों परिवारों को भूमिधर अधिकार प्रदान करने की मंजूरी दी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पात्र परिवारों को असंक्रमणीय अधिकार दिए जाएंगे। दशकों से स्वामित्व के अभाव में ये परिवार खेती के लिए बैंक ऋण लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। अब इस निर्णय से उन्हें अपनी जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे और सम्मानजनक तरीके से अपनी फसल बेच पाएंगे। यह कदम न केवल इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा देगा, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सम्मान को भी सुनिश्चित करेगा। कानपुर देहात में बसाए जाएंगे 99 हिन्दू बंगाली परिवार, लीज रेंट व पट्टा प्रारूप को स्वीकृति पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वास से जुड़े प्रस्ताव को भी योगी कैबिनेट ने कार्योत्तर अनुमोदन दे दिया। इसके तहत जनपद मेरठ के मवाना तहसील क्षेत्र से संबंधित 99 परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में पुनर्वासित किया जाएगा। साथ ही इनके लिए लीज रेंट ₹1 निर्धारित करते हुए पट्टे के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय पूर्व में 2021 में 63 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए निर्धारित प्रावधानों के आधार पर लिया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों और प्रकरण की तात्कालिकता को देखते हुए पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही की जा चुकी थी, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इससे प्रभावित परिवारों को वैध आवासीय अधिकार मिलने के साथ उनके पुनर्वास की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी। गोरखपुर में बनेगा वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

डीबीएफओटी आधार पर शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ विकसित होंगे बस अड्डे

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों के विकास के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी गई है। इस चरण में प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से 6 अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाते हुए तथा जनपद चंदौली को शामिल करते हुए कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पीपीपी के डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर लागू की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं आएगा। 8 साल में पूरी करनी होगी परियोजना प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत बस स्टेशनों को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150% से घटाकर 100% किया गया है, वहीं परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25% निर्धारित की गई है तथा कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है। 12 माह में शुरू करना होगा काम सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना का काम शुरू करने की समय सीमा भी 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है। लीज अवधि 35 या 90 वर्ष निर्धारित की गई है और इसके समाप्त होने पर स्वामित्व स्वतः ही उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को प्राप्त हो जाएगा। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा।  ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में 23 बस स्टेशनों (लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित) को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और द्वितीय चरण के 49 बस अड्डों के साथ अब कुल 52 जनपद इस योजना से आच्छादित हो जाएंगे, जबकि शेष 23 जनपदों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा। परियोजना में ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान है (पहले चरण में लगभग ₹2500 करोड़), जिसके तहत बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करते हुए वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45% व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा।  तीन जनपदों में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी परिवहन मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में मंजूर किए गए अन्य प्रस्तावों के तहत सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस अड्डों के निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रतिदिन 15 से 23 लाख यात्री परिवहन सेवाओं का उपयोग करते हैं, जो त्योहारों के दौरान 30 से 35 लाख तक पहुंच जाते हैं, ऐसे में यह योजना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही शहरी भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगी। नरौरा में बस स्टेशन के साथ डिपो कार्यशाला स्थापित की जाएगी, जबकि तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर के निकट यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस स्टेशन का निर्माण होगा। इन बस स्टेशनों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानों और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

विवादित पोस्टर से यूपी में बवाल: अखिलेश पर तीखा वार, योगी की तारीफ—राजनीतिक घमासान तेज

 गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में चुनावी माहौल के बीच लगाए गए विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इन पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आपत्तिजनक तरीके से दर्शाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई प्रमुख स्थानों जैसे अंबेडकर चौराहा और एसपी कार्यालय के आसपास ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नामक संगठन द्वारा ये पोस्टर लगाए गए हैं। फिल्म ‘धुरंधर’ का विलेन ‘रहमान डकैत’ बताया पोस्टरों में अखिलेश यादव को फिल्म ‘धुरंधर’ के विलेन ‘रहमान डकैत’ के रूप में दिखाया गया है। उनकी एडिट की गई तस्वीर लाल टोपी और काले चश्मे के साथ लगाई गई है। इसके नीचे ‘अखिलेश का ल्यारी राज’ लिखा गया है। साथ ही, समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों से जुड़ी खबरों की कटिंग भी इसमें शामिल की गई है। योगी आदित्यनाथ की कन्या पूजन करते हुए तस्वीर वहीं, पोस्टर के दूसरे हिस्से में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कन्या पूजन करते हुए तस्वीर लगाई गई है, जिसके नीचे ‘धुरंधर सीएम’ लिखा गया है। इसके साथ ही माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित खबरों को भी दर्शाया गया है। पोस्टर में जनता से सवाल किया गया है, ‘आपको क्या चाहिए?’ इन पोस्टरों के जरिए एक ओर सपा शासन को दंगे, अराजकता और माफिया राज से जोड़ने की कोशिश की गई है, तो दूसरी ओर वर्तमान सरकार को सख्त कानून-व्यवस्था वाली सरकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष अफजल खान और पार्टी नेता बृजेश यादव ने मौके पर पहुंचकर पोस्टर हटाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा के बाद पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर जिले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।  

शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा पर मुहर लगाते हुए योगी कैबिनेट ने मंगलवार को शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2017 में ₹10,000 निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को अब बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय अप्रैल माह से लागू हो जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। यह निर्णय उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र 2026 के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय वर्ष में 11 माह के लिए देय होगा। 1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 अनुपात में प्राप्त होता था। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्रांश के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा तथा अनुमोदन प्राप्त न होने की स्थिति में बढ़े हुए मानदेय के कारण इन पर आने वाला अतिरिक्त ₹1138.12 करोड़ का व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार भी प्रदेश सरकार उठाएगी। करीब 25 हजार अनुदेशक होंगे लाभान्वित संदीप सिंह ने बताया कि इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों को भी बड़ी राहत दी गई है। वर्ष 2017 में निर्धारित ₹9,000 मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इस वृद्धि से राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में यह वृद्धि शामिल होगी।

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा: यूपी पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होंगे

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर चल रही अटकलों पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न हो पाएंगे। मंत्री के इस तर्क ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं को इससे झटका लगना भी स्वाभाविक है। संजय निषाद ने क्या गिनाएं कारण संजय निषाद ने कहा कि पंचायत चुनाव एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और बिना आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हुए चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अभी पिछड़ों और महिलाओं के आरक्षण की गिनती और व्यवस्था होनी बाकी है। मंत्री ने साफ कहा, "कोर्ट भी यही कहेगा कि बिना आरक्षण तय किए चुनाव कैसे कराया जा सकता है। इन सभी व्यवस्थाओं को पूरा करने में समय लगेगा, इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होने की संभावना न के बराबर है।" अंदरूनी कलह का डर: "अपनों से ही भिड़ जाएंगे कार्यकर्ता" मंत्री ने चुनाव टलने के पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराए जाते हैं, तो इससे पार्टी को भी नुकसान हो सकता है। संजय निषाद ने स्पष्ट किया, "पंचायत चुनाव में अक्सर एक ही गांव से भाजपा, सपा या निषाद पार्टी के ही चार-चार दावेदार आमने-सामने होते हैं। पार्टी किसके साथ खड़ी रहेगी? जो जीतेगा उसे पार्टी अपना लेगी, लेकिन बाकी तीन दावेदार पार्टी से नाराज हो जाएंगे। इससे पार्टी के भीतर ही गुटबाजी और कलह पैदा हो जाएगी। यह कलह विधानसभा चुनाव में नुकसान पहुंचाएगी।" ओपी राजभर के भी बदले सुर संजय निषाद के साथ ही सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के भी सुर बदल गए हैं। अभी तक वह समय पर ही चुनाव और बैलेट पेपर छपने की बातें कहते थे। अब उन्होंने भी गेंद हाईकोर्ट के पाले में करने की बातें कहीं हैं। राजभर ने कहा कि हाईकोर्ट में मामला है। वहां से जो निर्देश होगा, उसी के अनुसार कार्य होगा। विपक्ष पर भी पड़ेगा असर संजय निषाद के इस बयान के बाद विपक्षी दलों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार की रणनीति ग्रामीण चुनावों को टालकर पूरा ध्यान विधानसभा 2027 की तैयारियों पर केंद्रित करने की है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय उम्मीदवार जो पिछले कई महीनों से तैयारी कर रहे थे, उनके लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।

वृंदावन में संत के पैर छुए भागवत, बोले- संघ भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए डंडा लेकर खड़ा रहेगा

मथुरा  संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। संघ प्रमुख ने कहा- समाज को गो-भक्त बनाया जाए, तो गो-हत्या अपने आप रुक जाएगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके मन में भी यह बात है। वे करना चाहते हैं, लेकिन कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है। गो-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं।

योगी कैबिनेट के 22 फैसले: स्टूडेंट्स को टैबलेट, शिक्षामित्रों को मिलेगा डबल मानदेय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार (7 अप्रैल) को कैबिनेट की बैठक हुई. इस दौरान मंत्रिपरिषद द्वारा 22 प्रस्ताव पेश किए गए, इन सभी 22 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. बैठक में शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार रुपए और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।  उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का बढ़ा हुआ मानदेय 1 मई से दिया जाएगा.पिछले लंबे समय से यूपी के लाखों शिक्षा मित्र इस फैसले का इंतजार कर रहे थे. 1,42,929 शिक्षा मित्र राज्य में हैं, वहीं 24,717 अनुदेशक वर्तमान में राज्य में कार्यरत हैं।  49 नए बस अड्डों के निर्माण को मंजूरी कैबिनेट बैठक में पीपीपी मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के निर्माण को मंजूरी दी गई है. बताया जा रहा है कि ये बस अड्डे पूरी तरह एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे. योगी सरकार के इस फैसले से राज्य के 52 जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, वहीं यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।  25 लाख टैबलेट की खरीदे जाएंगे जानकारी के मुताबिक स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजनांतर्गत निःशुल्क टैबलेट हेतु अंतिम बिड हेतु प्रस्ताव को मंजूरी मंजूरी दी गई है. छात्रों को वितरित करने के लिए 25 लाख टैबलेट की खरीदे जाएंगे. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अभी तक प्रदेश में 60 लाख स्मार्ट फोन और टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं, वहीं अब 25 लाख टैबलेट और खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है।  बैठक में औद्योगिक विकास विभाग की हाई पावर कमेटी की संस्तुतियों को मंजूरी दे दी गई है. इसके तहत राज्य के 9 जिलों में ₹15,189 करोड़ से अधिक के निवेश से 12 औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी. निवेश के लिए 8 प्रस्ताव पेश किए गए।  कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में 10,000 रुपए निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाकर अब 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9,000 रूपए से बढ़ाकर 17,000 रुपए प्रतिमाह किया गया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकार के 60:40 अनुपात में प्राप्त होता रहा है। मानदेय वृद्धि के फलस्वरूप इन पर आने वाला 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूर्णतः राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार भी राज्य सरकार वहन करेगी। संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। मानदेय वृद्धि के इस निर्णय से इन अनुदेशकों को भी बड़ी राहत मिलेगी तथा इस पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों एवं अंशकालिक अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा। 6 नए प्रस्ताव     ओएफबी टेक प्रा.लिम. 589 करोड़ के निवेश के साथ शाहजहांपुर में एग्रो केमिकल्स बनाएगी.     इंडिया ग्लाइकॉन्स लिमिटेड गोरखपुर (गीडा) में एथेनाल प्रोडक्शन के लिए क्षमता विस्तार करेगी,669 करोड़ का निवेश.     सोलर सेल व मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट निर्माण हेतु 3805 करोड़ का निवेश,बुंदेलखंड व यमुना अथॉरिटी परिसर में.     बिसलेरी इंटरनेशनल प्रा.लिमिटेड,प्रयागराज में स्थापित होगा,269.31 करोड़ का निवेश.     ए.जी.आई. कैन मैन्युफैक्चरिंग के लिए हाथरस में यूपीसीडा क्षेत्र में 1128.72 करोड़ का निवेश करेगा.     इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा.लिमिटेड का सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट 1146 करोड़ का निवेश, यमुना अथॉरिटी परिसर में. कैबिनेट के अन्य फैसले     जनपद पीलीभीत व लखीमपुर खीरी,रामपुर व बिजनौर में भारत पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए परिवारों को भारतीय नागरिकता के लिए पात्रता के सम्बंध में प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है।      इनकी संख्या लखीमपुर खीरी में 2350 परिवार,पीलीभीत में 4 हजार परिवार,बिजनौर में 18 ग्रामों में 3856 परिवार,रामपुर में 16 ग्रामों में 2174 परिवार हैं.     डॉ अंबेडकर मूर्ति विकास योजना को मंजूरी. योजना के तहत अंबेडकर समेत तमाम महापुरुषों से संबंधित स्थानों पर स्थापित मूर्तियों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।      स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, हर स्थान के लिए 10 लाख खर्च किये जाएंगे.     हर विधानसभा के लिए 1 करोड़, कुल 403 करोड़ दिए जाएंगे।      सभी विधानसभा क्षेत्र में 14 अप्रैल को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और योजना की जानकरी दी जाएगी।  शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की बड़ी जीत लंबे समय से सड़क से सदन तक संघर्ष कर रहे शिक्षामित्रों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। कैबिनेट ने उनके मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 18,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वहीं, अनुदेशकों का मानदेय भी 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 2 लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को एक अप्रैल से बढ़ा हुआ मानदेय मिलेगा। मई के वेतन में जुड़कर आएगा। 25 लाख युवाओं को डिजिटल सौगात 'स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना' के तहत सरकार ने अपना अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्ष 2026-27 के लिए 25 लाख छात्र-छात्राओं को टैबलेट देने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। इसके लिए बिड की सेवा-शर्तों और खरीद प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। विस्थापितों को मिला 'भूमिधर' का हक कैबिनेट ने एक मानवीय फैसला लेते हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय आए विस्थापितों और CAA (नागरिक संशोधन अधिनियम) के तहत पात्र परिवारों को बड़ी राहत दी है। इन परिवारों को अब उनकी काबिज भूमि पर 'भूमिधर' (मालिकाना) अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही 'उत्तर … Read more

7 अप्रैल को सीएम योगी देंगे ‘ग्रेटर आगरा’ योजना के तहत 5142 करोड़ की सौगात

7 अप्रैल को सीएम योगी देंगे 5142 करोड़ की 'ग्रेटर आगरा' योजना की सौगात  वृंदावन में श्रीमद् जगतगुरु द्वाराचार्य मलूकनाथ जी महाराज की 452 वीं जयंती महोत्सव में भी करेंगे शिरकत  449.65 हेक्टेयर में रायपुर और रहन कलां में विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित होगा 'ग्रेटर आगरा'  विभिन्न परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण व शिलान्यास, विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री लखनऊ/आगरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 7 अप्रैल को ताजनगरी आगरा के लोगों को एक ऐतिहासिक सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री 5142 करोड़ रुपये की लागत वाली महत्वाकांक्षी 'ग्रेटर आगरा' योजना का भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वह टाउनशिप के मॉडल का अवलोकन भी करेंगे। इसके साथ ही जनपद के विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपये की अन्य विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री वृंदावन में श्रीमद् जगतगुरु द्वाराचार्य मलूकनाथ जी महाराज की 452 वीं जयंती महोत्सव में भी शिरकत करेंगे और करीब एक घंटा महोत्सव में रहेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी 'ग्रेटर आगरा' टाउनशिप योगी सरकार की 'नए शहर प्रोत्साहन योजना' और शहरी विस्तारीकरण के तहत आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा इस विशाल टाउनशिप का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम रायपुर और रहन कलां की 449.65 हेक्टेयर भूमि पर 10 अत्याधुनिक आवासीय टाउनशिप बसाई जाएंगी। 'ग्रेटर आगरा' विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा, जिसमें बेहतरीन पार्क, चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सभी आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह योजना आगरा के आवासीय स्वरूप को पूरी तरह बदल देगी। जनसभा को करेंगे संबोधित प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 7 अप्रैल को 4:25 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर एक्सप्रेसवे के समीप रायपुर रहन कलां स्थित कार्यक्रम स्थल पर उतरेगा। वहां आगरा के प्रभारी मंत्री/ पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह उनका भव्य स्वागत करेंगे। दोपहर 4:30 बजे मुख्यमंत्री 'ग्रेटर आगरा' योजना का शिलान्यास व भूमिपूजन करेंगे। इसके बाद वह करोड़ों रुपये की अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास कर एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद शाम करीब 5:25 बजे मुख्यमंत्री आगरा से प्रस्थान करेंगे। प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दी जा रही 'ग्रेटर आगरा' की यह सौगात शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। यह एक विश्वस्तरीय परियोजना है। कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए हमने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया है। सभी अधिकारियों को जनसभा, सुरक्षा, पार्किंग और हेलीपैड की व्यवस्थाओं को समय से और पूरी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लखनऊ के युवाओं ने तैयार किया ‘दिव्यास्त्र’

कभी तमंचों के लिए बदनाम रहा यूपी, अब बना ‘ड्रोन शक्ति’ का हब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लखनऊ के युवाओं ने तैयार किया ‘दिव्यास्त्र’ योगी सरकार की डिफेंस कॉरिडोर और स्टार्टअप नीति का असर, लखनऊ में निजी कंपनी का बड़ा इनोवेशन 500 किमी रेंज, एआई बेस्ड सिस्टम और कम लागत, यूपी के युवाओं का ड्रोन बनेगा सेना के लिए गेमचेंजर लखनऊ  कभी अवैध हथियारों और ‘तमंचों’ के लिए बदनाम रहा उत्तर प्रदेश अब नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। इसी बदलाव की मिसाल राजधानी लखनऊ में देखने को मिली, जहां एक प्राइवेट स्टार्टअप ने अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित की है। यह दर्शाता है कि योगी आदित्यनाथ के विजन और नीतियों का असर जमीन पर दिख रहा है, जहां कभी अपराध की पहचान थी, वहीं अब डिफेंस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स का नया युग आकार ले रहा है। तीन युवा उद्यमियों – पवन, रविंद्र पाल सिंह और सौरभ सिंह द्वारा स्थापित कंपनी हॉवरिट (Hoverit) ने “दिव्यास्त्र एमके-1” नाम का एडवांस यूएवी तैयार किया है। यह ड्रोन आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, जो निगरानी के साथ-साथ सटीक हमले करने में सक्षम है। इस ड्रोन की प्रमुख खासियत इसकी 500 किलोमीटर की रेंज, लगभग 5 घंटे की उड़ान क्षमता और एआई आधारित टारगेटिंग सिस्टम है। यह 10,000 फीट तक उड़ सकता है और करीब 15 किलोग्राम तक पेलोड ले जाकर सटीक निशाना साध सकता है। लागत के मामले में भी यह बाजार के अन्य विकल्पों से काफी सस्ता बताया जा रहा है। स्टार्टअप के संस्थापकों का कहना है कि प्रदेश में बेहतर नीतियों और डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाओं के चलते उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का मौका मिला। यही कारण है कि आज यह कंपनी भारतीय सेना के लिए ड्रोन सप्लाई करने की दिशा में काम कर रही है और उसे शुरुआती ऑर्डर भी मिल चुके हैं। आने वाले समय में कंपनी “एमके-2” वर्जन पर भी काम कर रही है, जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 80 किलोग्राम तक हो सकती है। इसके लिए यूपी डिफेंस कॉरिडोर में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जा रही है, जहां हर महीने 20 ड्रोन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यही नहीं, कंपनी ने डिफेंस सेक्टर के लिए कई तरह के ड्रोन और यूएवी विकसित किए हैं, जिनमें निगरानी के लिए “आंख” ड्रोन, 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने वाला “बाज” ड्रोन, शेल (बम) गिराने वाले ड्रोन, VTOL यूएवी (जो बिना रनवे के उड़ान भरते हैं) शामिल हैं। इसके अलावा ये कंपनी डिकॉय ड्रोन (दुश्मन को भ्रमित करने के लिए) और आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉन) यूएवी भी बना रही है, जिससे यह साफ होता है कि यह स्टार्टअप सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि निगरानी, सप्लाई और स्ट्राइक तीनों के लिए एक पूरा ड्रोन सिस्टम तैयार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि अब युद्धों में तकनीक की भूमिका निर्णायक हो गई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के युवाओं द्वारा विकसित यह इनोवेशन न सिर्फ राज्य की बदली हुई छवि को दर्शाता है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी नई मजबूती देता है।