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बेबी रानी मौर्य का बयान: यूपी में महिला सशक्तिकरण अब नारा नहीं, जमीनी हकीकत है

नव निर्माण के 9 वर्ष  यूपी में महिला सशक्तिकरण अब नारा नहीं, जमीनी हकीकत है: बेबी रानी मौर्य महिला अपराधों में भारी कमी, यूपी-112 का रिस्पांस टाइम घटकर हुआ मात्र 6 मिनट 18 लाख से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', नाइट शिफ्ट से खुले रोजगार के द्वार मातृ-शिशु मृत्यु दर और कुपोषण में आई भारी गिरावट, 60 लाख माताओं को मिला लाभ कन्या सुमंगला से 26 लाख बेटियों को लाभ, 5.20 लाख का हुआ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह आगरा  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के सफल 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज आगरा में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने अपने विभाग की 9 साल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा पेश करते हुए कहा कि योगी सरकार ने महिलाओं और बच्चों के विकास को केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा है। अब यह सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय का एक व्यापक मॉडल बन चुका है। कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि यूपी में महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी हकीकत बन गया है। अब प्रदेश की महिलाएं केवल नौकरी नहीं ढूंढ रहीं, बल्कि नए अवसर पैदा कर रही हैं। बेटी के जन्म से लेकर स्वावलंबन तक की मजबूत व्यवस्था कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने बताया कि योगी सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसके शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होने तक की पूरी व्यवस्था खड़ी की है। कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 26.81 लाख बेटियों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड व सामान्य) के माध्यम से 1 लाख 5 हजार से अधिक बेसहारा बच्चों को संरक्षण दिया गया। वहीं मिशन वात्सल्य के तहत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके बिछड़े परिवारों से मिलाया गया है। यह साबित करता है कि सरकार बच्चों को सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य के नागरिक के रूप में देखती है। मातृ स्वास्थ्य और पोषण के मोर्चे पर अभूतपूर्व सुधार उन्होंने बताया कि पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगी सरकार के काम के परिणाम अब स्पष्ट नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पर ₹1400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1000 की सहायता दी जा रही है। संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 84 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। प्रदेश में 0 से 5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग (ठिगनापन) की दर में 6.6% और अंडरवेट दर में 7.5% का सुधार हुआ है। 2 करोड़ 12 लाख बच्चों और महिलाओं को अनुपूरक पुष्टाहार मिल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में 'संभव अभियान' के तहत तकनीक (पोषण ट्रैकर) का इस्तेमाल कर कुपोषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। महिला सुरक्षा: अपराधों में भारी कमी और सख्त कानून व्यवस्था कैबिनेट मंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के नतीजे सामने हैं। 2016 में यूपी-112 का जो रिस्पॉन्स टाइम 1 घंटा 5 मिनट था, वह 2025 में घटकर मात्र 06 मिनट 41 सेकंड रह गया है। प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं और महिला अपराधों के ग्राफ में भारी गिरावट आई है। बलात्कार की घटनाओं में 33.92%, अपहरण में 17.03% और घरेलू हिंसा में 9.54% की कमी दर्ज की गई है। यूपी पुलिस में महिलाओं के लिए 20% पद आरक्षित किए गए हैं, जिसके फलस्वरूप आज 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा हैं। 3 नई महिला P.A.C. बटालियन का गठन और हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड की तैनाती की गई है। लखपति दीदी से लेकर महिला उद्यमी तक कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने स्पष्ट किया कि असली सशक्तिकरण आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही आता है। यूपी में 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हैं। 'लखपति दीदी योजना' के तहत 18.55 लाख से अधिक महिलाएं लखपति की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। 39,885 बीसी सखियों ने ₹42,711 करोड़ का लेनदेन कर ₹116 करोड़ का लाभांश कमाया है। वहीं 15,409 विद्युत सखियों ने करोड़ों का बिल कलेक्शन कर कमीशन अर्जित किया है। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट (रात की पाली) में काम करने की अनुमति दी गई है। 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी सिर्फ 13% थी, वह अब बढ़कर 36% हो गई है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिला सम्मान प्रेस वार्ता के अंत में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि योगी सरकार ने जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं का मानदेय अप्रैल 2026 से बढ़ाने का निर्णय किया है। इसके अलावा उन्हें जीवन ज्योति और सुरक्षा बीमा योजनाओं से भी जोड़ा गया है। 1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को अब प्री- स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख बेटियों के हाथ पीले कराए गए हैं। योगी सरकार की स्पष्ट नीयत, पारदर्शी नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन ने यूपी में आधी आबादी की तस्वीर बदल दी है। "सुरक्षित नारी, सक्षम नारी, स्वावलंबी नारी" – यही आज के नए और समृद्ध उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला है।

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की दिशा, आत्मनिर्भर बनकर समाज में पाया सम्मान

संघर्ष से समृद्धि तक : बैंक से ऋण मिला तो सुनीता के कारोबार ने भरी उड़ान  स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की दिशा, आत्मनिर्भर बनकर समाज में पाया सम्मान योगी सरकार की नीतियों से मिला लाभ, खड़ा किया सफल व्यवसाय, 4 अन्य लोगों को भी दिया रोजगार लखनऊ  अमेठी जनपद के संग्रामपुर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत उत्तरगांव पुरवा डिहवा की रहने वाली 41 वर्षीय सुनीता देवी का जीवन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। उनके पति मुरलीधर दूसरे शहर में सिलाई का काम करते थे, लेकिन रहने-खाने का खर्च निकालने के बाद परिवार के लिए बहुत कम पैसा बच पाता था। परिवार के पास न तो खेती थी और न ही स्थायी आय का कोई साधन। घर के नाम पर केवल एक छोटी-सी कच्ची कोठरी थी, जिसमें पूरे परिवार का गुजारा करना बेहद कठिन था। कभी काम मिलता तो कुछ आय हो जाती थी, और कभी-कभी वह भी नहीं। ऐसे में भविष्य अंधकारमय लगने लगा था, लेकिन सुनीता देवी ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। स्वयं सहायता समूह के साथ मिली नई दिशा सुनीता देवी ने गांव में संचालित सहारा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली बल्कि सही मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने समूह से 10,000 रुपये का पहला ऋण लेकर अपने घर पर ही सिलाई मशीन से कपड़े बनाने का काम शुरू किया और तैयार कपड़ों को गांव-गांव फेरी लगाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और आय बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा। कुछ समय बाद उन्होंने समूह से 50,000 रुपये का ऋण और लिया और अमेठी में किराये पर एक कमरा लिया। उसके बाद किराये पर “शिवम स्पोर्ट्स” के नाम से एक दुकान खोली। इसमें वह ट्रैक सूट, टी-शर्ट आदि की सिलाई कर बेचते हैं। बाद में उन्होंने अमेठी में अपनी खुद की दुकान खोल ली। योगी सरकार की मदद से बदली तकदीर, ऋण से व्यवसाय को मिली ताकत  समय के साथ सुनीता देवी ने लगातार मेहनत की और अगस्त 2025 में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से उन्हें सीसीएल के तहत 3 लाख का ऋण मिला। इस पूंजी का उपयोग करके उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। उनकी दुकान “शिवम स्पोर्ट्स” की आज अमेठी क्षेत्र में एक पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स वियर की मांग बढ़ने से उनकी आय दोगुनी तक हो जाती है। आज उनकी मासिक आय लगभग 90,000 रुपये से अधिक हो चुकी है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद की दुकान और पक्का घर भी बनवा लिया है। उनके बच्चों की पढ़ाई भी इसी वजह से पूरी हो पाई है। जो ऋण उन्हें बैंक से मिला है उसे चुकाने के लिए वह हर महीने किस्त बैंक में जमा करतीं हैं। सुनीता ने 4 लोगों को भी रोजगार भी दिया है। कारखाना और दुकान चलाने में उनके पति और बेटा सहयोग करते हैं। आत्मनिर्भरता से समाज में मिला सम्मान आज सुनीता देवी अपने गांव में एक सशक्त महिला की पहचान बना चुकीं हैं। जो कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं, वह आज अपने परिश्रम से न केवल अपने परिवार को समृद्ध बना चुकीं हैं बल्कि दूसरों को भी रोजगार और प्रेरणा दे रहीं है। सुनीता मानतीं हैं कि स्वयं सहायता समूह और योगी सरकार ने उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव किया है, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। आज गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर समूह से जुड़ रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। सुनीता की कहानी यह संदेश देती है कि जब आत्मविश्वास के साथ-साथ सरकार का सहयोग मिल जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी से बड़ी कठिनाई को हल किया जा सकता है। उन्होंने अपने व्यवसाय को और बढ़ाने के लिए जमीन भी ले ली है। यदि उन्हें सरकार से और ऋण मिलेगा तो वह जल्द ही अमेठी में दूसरी दुकान शुरू करेंगी।

लाभार्थी से लीडर बनीं प्रदेश की महिलाएं, सशक्तिकरण की नई मिसाल

लाभार्थी से लीडर की भूमिका में पहुंचीं प्रदेश की महिलाएं नारी शक्ति के दम पर बदली यूपी की तस्वीर लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नौ वर्षों का कार्यकाल महिला सशक्तीकरण के समग्र व प्रभावशाली रूप में सामने आया है। सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, इन चार स्तंभों पर खड़ी नीतियों ने नारी शक्ति को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा में ला खड़ा किया। मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के जरिए आज उत्तर प्रदेश की महिलाएं ‘लाभार्थी’ से ‘लीडर’ की भूमिका में पहुंच चुकी हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत उत्तर प्रदेश में आर्थिक मोर्चे पर भी महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 9.43 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। यही महिलाएं आज गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियों की नई धुरी बन रही हैं। इसके अलावा, लखपति दीदी योजना के तहत 35 लाख महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह अपने आप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। राशन वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहीं महिलाएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाते हुए 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया है। समूहों से जुड़ी महिलाएं ड्राई राशन वितरण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे पारदर्शिता के साथ-साथ महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। बीसी सखी मॉडल लागू होने से ग्रामीण बैंकिंग में अभूतपूर्व वृद्धि वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बीसी सखी मॉडल ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन महिलाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन कर 120 करोड़ रुपये का कमीशन अर्जित किया है। यह आंकड़ा जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है, जिससे बीसी सखियों की आय में भी खासी बढ़ोतरी होगी। ग्रामीण बैंकिंग में यह तेजी पहली बार देखने को मिली है, जिसमें प्रयागराज, बरेली और शाहजहांपुर जैसे जिले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं की आय और सामाजिक स्थिति दोनों में सुधार इसके साथ ही दुग्ध व्यवसाय में भी महिलाओं ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। प्रदेश की 3.5 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों का अंग बनकर दुग्ध व्यवसाय़ से आत्मनिर्भर बनी हैं और उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे महिलाओं की आय और सामाजिक स्थिति दोनों में सुधार हुआ है। योगी सरकार के प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखता है। प्रदेश में जहां एक ओर 26.81 लाख निराश्रित महिलाओं को पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा मिली, वहीं 26.81 लाख बेटियां मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित होकर शिक्षा व सशक्त भविष्य की ओर बढ़ रही हैं। 60 लाख से अधिक माताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ मिला है, जबकि 1.05 लाख बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत सहायता मिली है। मिशन वात्सल्य के जरिए एक लाख से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से जोड़कर सामाजिक पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली। यह पूरा तंत्र इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार ने महिला सशक्तीकरण को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे में रखा है। नारी शक्ति ही ‘नव निर्माण’ की सबसे बड़ी ताकत योगी सरकार के इस दिशा में तमाम प्रयासों का संयुक्त प्रभाव यह है कि उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण अब किसी एक योजना तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। सुरक्षा से लेकर स्वरोजगार, तक हर स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। नौ वर्षों में सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों, तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन ने महिलाओं के लिए ईज ऑफ लिविंग को मजबूती दी है। आज नारी शक्ति ही ‘नव निर्माण’ के इस दौर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और यही विकसित उत्तर प्रदेश की नींव है।

खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री

देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हम सबके लिए सम्मान का विषय – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो – मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ और मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से किया सम्मानित उत्तर प्रदेश को मिला ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार, राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए मिला सम्मान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के इस सम्मान समारोह में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और इससे भी अधिक प्रसन्नता इस बात की है कि इस सम्मान समारोह का आयोजन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान समारोह के कारण देश के इन प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। यह हम सबके लिए सम्मान का विषय तो है ही, साथ ही यह प्रदेश की नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में अचीवमेंट्स हासिल करने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा। स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह का आयोजन एक निजी मीडिया समूह ने किया था, जिसमें देशभर के दिग्गज खिलाड़ियों और खेल हस्तियों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है। खेल भावना व्यक्ति को मजबूत बनाती है, विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस देती है और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में खेलों के विकास के लिए कई सार्थक प्रयास किए हैं।  उन्होंने बताया कि 2017 के बाद से हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल को मुहिम की तरह आगे बढ़ाया। यही नहीं, वर्तमान में हमारी सरकार प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में एक खेल मैदान, हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम और हर जिले में एक स्टेडियम विकसित कर रही है। वाराणसी में बीसीसीआई के एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हुआ है, गोरखपुर में भी इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही पिछले वर्ष मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। साथ ही हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाए, जहां हमारे खेल क्षेत्र के दिग्गज खिलाड़ियों और अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से स्थानीय युवकों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए ट्रेनिंग दी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और जॉब सिक्योरिटी देने के लिए हमारी सरकार ने खेल पॉलिसी में बदलाव लाकर खिलाड़ियों को राज्य में सरकारी नौकरियां देने की नीति लागू की है, जिससे वे निश्चिंत होकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमारी सरकार ने 500 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी प्रदान की है। इनमें से कई वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए मीडिया समूह और आयोजक टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को सम्मान देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा सहित कार्यक्रम में शामिल हुई खेल जगत की हस्तियों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेनिस जगत में देश का नाम रोशन करने वाले लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया, जबकि हॉकी के दिग्गज पी. आर. श्रीजेश को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में ‘टीम ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारत की महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम को दिया गया, जबकि ‘फेडरेशन ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को मिला। समारोह में बताया गया कि इस वर्ष मीडिया समूह की ओर से खेल की 45 श्रेणियों में 100 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से देश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में ऊंचा किया है। कार्यक्रम में फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया, बीसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला,  क्रिकेटर कुलदीप यादव, महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा, हरलीन देवल आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

नदियों की निर्मलता के लिए सीएम योगी ने पूर्व सरकार से 10 गुना अधिक काम किया

नदियों की निर्मलता के लिए पूर्व की सरकार की तुलना में सीएम योगी ने किया 10 गुना काम नमामि गंगे : 2017 से पहले केवल 5 एसटीपी किए जा सके इंस्टॉल 9 साल में नमामि गंगे योजना के तहत 10 गुना बढ़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 2017 के बाद योगी सरकार ने 50 एसटीपी किए इंस्टॉल प्रदेश में लगभग पांच हजार मिलियन लीटर प्रतिदिन वेस्ट वाटर किया जा रहा साफ वर्तमान में प्रदेश भर में 160 एसटीपी किए जा चुके इंस्टॉल लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों की निर्मलता और गंदे पानी के शोधन के काम में योगी सरकार ने नौ वर्षों में रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के तहत सिर्फ 5 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इंस्टॉल हो पाए थे, वहीं 2017 के बाद पिछले 9 साल में ऐसे 50 से अधिक एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, यानी इस अवधि में क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है। प्रदेश में लगभग 160 एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मिलियन लीटर (एमएलडी) वेस्ट वाटर को शुद्ध कर नदियों में जाने से रोका जा रहा है। पूर्व की सरकारों की तुलना में मौजूदा योगी सरकार में सीवर शोधन ढांचे के विस्तार की रफ्तार लगभग दस गुना तक बढ़ी है। नमामि गंगे : 9 साल में 10 गुना बढ़े एसटीपी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संरचना तैयार की जा रही है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के अंतर्गत केवल 5 एसटीपी इंस्टॉल हो सके थे, वहीं योगी सरकार में 50 से अधिक नए एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं। लखनऊ में 9 संचालित एसटीपी, 624.50 एमएलडी की क्षमता राजधानी लखनऊ में इस समय कुल 09 सीवेज शोधन संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल शोधन क्षमता 624.50 एमएलडी है। इन संयंत्रों के जरिए गोमती एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले पानी को पहले ही शुद्ध किया जा रहा है। संचालित एसटीपी भरवारा, दौलतगंज (शहरी), दौलतगंज (ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी आदि स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों से निकला ट्रीटेड वॉटर एक ओर नदियों को स्वच्छ रखने में मदद कर रहा है, वहीं चरणबद्ध तरीके से इसके पुन: उपयोग (रीयूज) की योजना भी तैयार की जा रही है। लखनऊ में 3 निर्माणाधीन और 4 प्रस्तावित एसटीपी लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा कुल 03 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता पहुंचेगी 1000 एमएलडी के पार इसके अलावा लखनऊ में 4 नए एसटीपी बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी। इन संयंत्रों के तैयार हो जाने के बाद राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है। 2017 से पहले नदियों की निर्मलता कागजों तक सीमित रही 2017 से पहले नदियों की निर्मलता की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और एसटीपी निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त थी। वहीं, योगी सरकार में नए प्लांटों के साथ-साथ पुराने संयंत्रों के उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

खनिज एवं उपखनिज खनन से राजस्व में वृद्धि, सोनभद्र का योगदान सबसे अधिक

खनिज एवं उपखनिज खनन से हुई राजस्व प्राप्ति में वृद्धि, सोनभद्र का रहा सर्वाधिक योगदान सोनभद्र जनपद से सर्वाधिक 678.28 करोड़ रुपये की हुई राजस्व प्राप्ति, महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन रहे अन्य प्रमुख जनपद राजस्व प्राप्ति के साथ अवैध खनन पर रोक और पर्यावरणीय मानकों के पालन को सुनिश्चित कर रहा है प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग लखनऊ  उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप खनिज संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक योगदान का सतत प्रयास कर रहा है। इस संबंध में विभाग की ओर से हाल ही में संपन्न हुई मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में फरवरी माह के राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी किए गए। जिसके अनुसार प्रदेश के खनिज संपदा से संपन्न प्रमुख दस जनपदों से लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। जिसमें सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है, इसी क्रम में महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन जनपद खनन आधारित राजस्व प्राप्ति में प्रमुख रहे। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग प्रदेश में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए राजस्व संग्रह में वृद्धि सुनिश्चित कर रहा है। इस क्रम में खनिज एवं उपखनिज के खनन से फरवरी माह में सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है। सोनभद्र जनपद ने मुख्य खनिजों के खनन से 402.79 करोड़ रुपये, जबकि उपखनिजों के खनन से 275.49 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं महोबा ने 394.9 करोड़ रुपये, हमीरपुर ने 389.61 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया। जबकि झांसी से 215.83 करोड़ रुपये, जालौन से 225.62 करोड़ तथा सहारनपुर से 227.58 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति दर्ज की गई। इस क्रम में अन्य प्रमुख जनपदों में बांदा ने 209.98 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जबकि प्रयागराज से 136.9 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। फतेहपुर और कौशांबी जैसे जनपदों से क्रमशः 40.31 करोड़ रुपये और 24.41 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया। समीक्षा बैठक में विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के दस प्रमुख खनिज संपन्न जिलों से फरवरी माह में लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विभागीय प्रयासों और सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।  विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विभाग की ओर से प्रदेश में खनन गतिविधियों की सतत निगरानी एवं खनन पट्टों के आवंटन और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है।

सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार

चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में गूंजेंगे गीत-भजन सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार  देवी गायन-दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन, कलाकारों का किया गया चयन  महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए योगी सरकार चला रही ‘मिशन शक्ति’  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चैत्र नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) को देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में देवीगीत, भजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संस्कृति विभाग इसके भव्य आयोजन की तैयारी में जुट गया है। आयोजन के लिए कलाकारों का चयन कर लिया गया है। जनपदों में स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यह आयोजन होगा। बता दें कि प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए विशेष अभियान "मिशन शक्ति" चलाया जा रहा है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा महिलाओं व बालिकाओं की सहभागिता के साथ प्रदेश में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित किए गये हैं। इन शक्तिपीठों- देवी मंदिरों में होंगे आयोजन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संस्कृति विभाग की तरफ से प्रदेश के देवी मंदिर व शक्तिपीठों में इसकी तैयारी कर ली गई है। सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि पर मां विंध्यवासिनी देवी (विंध्याचल मीरजापुर), ज्वाला देवी सोनभद्र, सीता समाहित स्थल भदोही, अलोपी देवी प्रयागराज, कड़ावासिनी कौशांबी, पाटेश्वरी देवी (देवीपाटन-बलरामपुर), ललिता देवी (नैमिषारण्य-सीतापुर), शाकुम्भरी देवी सहारनपुर, कात्यायनी देवी मथुरा, मां शीतला चौकिया धाम जौनपुर, बेल्हा देवी प्रतापगढ़, चंडिका देवी उन्नाव, विशालाक्षी देवी वाराणसी, देवकाली मंदिर औरैया, मां तरकुलहा देवी धाम गोरखपुर, मां शीतला स्थल मऊ, ललिता देवी प्रयागराज, मां शिवानी देवी चित्रकूट, गायत्री शक्तिपीठ हमीरपुर, बैरागढ़ माता जालौन, कुष्मांडा देवी घाटमपुर कानपुर देहात, शीतला माता मंदिर मैनपुरी, चामुंडा माता मंदिर फिरोजाबाद, बीहड़ माता मंदिर फिरोजाबाद, चंद्रिका देवी मंदिर व संकटा देवी मंदिर लखनऊ समेत अन्य देवी मंदिरों- शक्तिपीठों में आयोजन होंगे।  जनसहभागिता से होंगे आयोजन, प्रशासन के सहयोग से तय समय पर पूरी कर ली जाएं व्यवस्थाएं   योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि इस आध्यात्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता विशेष रूप से सुनिश्चित हो। इससे जुड़ी व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पुलिस, नगर निगम आदि के माध्यम से ससमय पूरी कर ली जाएं। प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान "मिशन शक्ति" से भी इसे जोड़ा जाए। देवी मंदिरों, शक्तिपीठों में लोक कलाकारों, भजन मंडलियों, कीर्तन मंडलियों का चयन भी किया जा चुका है।   साफ-सफाई व श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर  देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, शाकम्भरी देवी मंदिर सहारनपुर, विंध्यवासिनी देवी धाम मीरजापुर समेत सभी देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित होने चाहिए। कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो। सभी देवालयों में पेयजल व छाजन की भी पुख्ता व्यवस्था हो। रही। योगी सरकार ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया है कि जनपदों में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रत्येक आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि, प्रकाश एवं दरी-बिछावन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करा ली जाए। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सफाई कर्मी भी लगाकर स्वच्छता रखी जाए।

योगी सरकार का द शैडो एप: बेटियों की सुरक्षा में परछाईं की तरह होगा साथी

योगी सरकार का द शैडो एप परछाईं की तरह करेगा बेटियों की सुरक्षा  सीएम योगी की मंशा के अनुरुप यूपीएसआईएफएस ने लांच किया ‘द शैडो’ एप, बेटियों की सुरक्षा की दिशा में बड़ी पहल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को देखते यूपी सरकार ने आधी आबादी को सम्मानजनक व सुरक्षित वातावरण देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी क्रम में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) ने एक अनूठी पहल की है। संस्थान के बीटेक स्टूडेंट्स द्वारा विकसित “द शैडो” (यूपीएसआईएफएस एप) एप स्टूडेंट्स, विशेषकर बेटियों की सुरक्षा व शैक्षणिक प्रबंधन को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह एप एक समग्र सुरक्षा-आधारित डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जो हर स्टूडेंट के साथ उसकी “परछाईं” की तरह जुड़ा रहेगा। यह तकनीक बेटियों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास है। ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल’ से बेटियों की सुरक्षा को नई मजबूती यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि “द शैडो” इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स द्वारा ही विकसित किया गया है। इस एप की खासियत केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्टूडेंट्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनके हर मूवमेंट को अधिकृत तरीके से ट्रैक करता है। कैंपस में प्रवेश, निकास, अवकाश अनुरोध और अन्य गतिविधियों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे संस्थान प्रशासन को रियल-टाइम जानकारी मिलती रहती है। इसमें अटेंडेंस, असाइनमेंट, परीक्षा प्रदर्शन और अकादमिक प्रगति का पूरा डेटा भी उपलब्ध रहता है, जिससे स्टूडेंट्स, पैरेंट्स व टीचर तीनों एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि स्ट्डेंट्स की जिम्मेदारी भी तय होगी। एप में दिया गया ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ इसे और खास बनाता है। इसके तहत किसी भी छात्रा के कैंपस से बाहर जाने या विशेष अनुमति से जुड़े अनुरोध पर सबसे पहले अभिभावकों की मंजूरी अनिवार्य है। इससे बेटियों की सुरक्षा को एक अतिरिक्त परत मिलती है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। इससे छात्राओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित होगा।  एसओएस इमरजेंसी सिस्टम से मिलेगी तुरंत मदद, रहेगी हर खतरे पर नजर “द शैडो” एप का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी कॉल सिस्टम है। यदि कोई छात्रा किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में आती है, तो एक बटन दबाते ही संस्थान प्रशासन और अभिभावकों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकता है। इसके साथ ही क्यूआर-कोड आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे कैंपस में अनधिकृत प्रवेश और अवांछनीय गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके। इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में इस एप को बीटेक छात्र हर्ष व आदित्य मिश्रा ने विकसित किया है। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि “द शैडो” एप बेटियों की सुरक्षा को लेकर तकनीकी नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है, जो सरकारी प्रयासों को संस्थागत स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाता है। यह ऐप दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त किया जा सकता है। यह स्टूडेंट्स के लिए एक “डिजिटल साथी” की तरह है, जो हर पल उनकी सुरक्षा, निगरानी और शैक्षणिक प्रगति का ध्यान रखेगा।

योगी सरकार की अभ्युदय योजना से यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने किया परचम लहराना

नारी तू नारायणी योगी सरकार की अभ्युदय योजना का मिला लाभ, यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने लहराया परचम मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से यूपी की बेटियों को लगे ‘पंख’, अब तक ढाई सौ से अधिक ने पाई सफलता एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अब तक कराया रजिस्ट्रेशन 2025 में योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं यूपी की बेटियां ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए बन रहीं हैं प्रेरणा लखनऊ उत्तर प्रदेश की बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें साकार भी कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना इनके लिए ऐसे ‘पंख’ बनकर उभरी है, जिसके सहारे वे देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही हैं। संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खास बात ये है कि इस योजना के जरिए अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियां सफलता हासिल कर चुकीं हैं और अधिकारी बनकर यूपी को दिशा दिखा रहीं हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है।  महंगी कोचिंग के बिना भी बड़ी सफलता 2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को जोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत मंच दिया है। खास बात यह है कि बेटियां इस योजना के जरिए महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं हैं। ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं। मानसी : सेल्फ स्टडी से 444वीं रैंक तक का सफर गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। प्राइवेट जॉब करने वाले पिता समेत परिवार में पांच सदस्य हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से सफलता हासिल की। अदिति सिंह: पढ़ाई के साथ दूसरों का भी किया मार्गदर्शन झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। खास बात यह रही कि वह स्वयं भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद करती रहीं। तनीषा सिंह : घर से पढ़ाई, बड़ा मुकाम आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी मां के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की सहायता से सफलता प्राप्त की। कीर्तिका सिंह : डिप्टी एसपी बन मिसाल बनीं लखनऊ की रहने वाली कीर्तिका सिंह 2022 में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी बनीं। एटा में तैनात कीर्तिका किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी की और अभ्युदय योजना का लाभ उठाया। बदलती तस्वीर : गांव-शहर हर जगह जल रही शिक्षा की लौ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। संदेश है साफ : अवसर मिला तो बेटियां उड़ान भरेंगी इन सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सही दिशा और संसाधन मिलें, तो प्रदेश की बेटियां देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उन लाखों सपनों को आकार दे रही है, जो कभी संसाधनों के अभाव में अधूरे रह जाते थे।

नवरात्रि में मुख्यमंत्री की ओर से बेटियों को नियुक्ति पत्र मिलने को लेकर सकारात्मक संदेश

नवरात्र में बेटियों को बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र मिलना सकारात्मक संकेत: मुख्यमंत्री  -लोकभवन में नव चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किया संबोधित  1097 महिला और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र – सीएम ने नव चयनित नर्सिंग अधिकारियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र, बोले- नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग व पैरामेडिकल सीटों में हुआ भारी इजाफा – सुपर स्पेशलिटी संस्थानों ने बढ़ाई प्रदेश की पहचान, नर्सिंग के साथ भाषा कौशल से मिलेगा वैश्विक अवसर लखनऊ आज नर्सिंग प्रोफेशनल्स की मांग केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। जापान और जर्मनी यात्रा के दौरान भी नर्सिंग प्रोफेशनल्स की डिमांड की गई। वहां भारत के नर्सिंग प्रोफेशनल्स के बारे में लोगों के मन में आदर का भाव है। यह सौभाग्य हमारे नर्सिंग प्रोफेशनल्स को प्राप्त है। ऐसे में नर्सिंग कोर्स के साथ एक लैंग्वेज में डिप्लोमा कर अपना भविष्य को और बेहतर बना सकते हैं। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन के सभागार में आयोजित निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कही। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किया। इससे पहले नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स ने मुख्यमंत्री के सामने अपने विचार साझा किए और उन्हें धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में 1097 महिलाओं और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र पहले की सरकारों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल थीं कोई सुध लेने वाला नहीं था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति के लिए जाना जाता था। हालात इतने खराब थे कि हजारों लोगों की मौतें होती थीं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियां हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान ले लेतीं थीं। इसके अलावा अन्य कई संक्रामक रोगों से भी लगातार मौतें होती रहतीं थीं, जिससे यह क्षेत्र स्वास्थ्य संकट का केंद्र बना हुआ था। इन चुनौतियों के बीच प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए गए। वर्षों से बंद पड़े एएनएम और जेएनएम प्रशिक्षण संस्थानों को फिर से शुरू किया गया। प्रदेश में 35 ऐसे एएनएम प्रशिक्षण केंद्र, जो पूर्व में बंद हो चुके थे, उन्हें पुनः संचालित किया गया है। इसके साथ ही 31 नए नर्सिंग कॉलेजों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं, बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों की भी समान रूप से अहम भूमिका होती है। यदि डॉक्टर स्वास्थ्य प्रणाली का नेतृत्व करता है, तो नर्सिंग स्टाफ उसकी रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दिए जाने का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले प्रदेश राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे था, वहीं अब उत्तर प्रदेश इन मानकों पर राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच रहा है। 976 सीएचसी पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत प्रदेश में लगभग 9.25 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इसके अलावा डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा आईडी) के रूप में 14 करोड़ 28 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो नागरिकों को एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में रियल टाइम डिजीज ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल रही है। प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्यवस्था और बाहरी हस्तक्षेप की शिकायतें रहती थीं, वहीं अब “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। मेडिकल शिक्षा को एकरूपता देने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के माध्यम से सभी मेडिकल कॉलेजों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। अब सहारनपुर, आजमगढ़, चंदौली और बिजनौर जैसे विभिन्न जिलों के मेडिकल कॉलेज एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के तहत संचालित हो रहे हैं। 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अंदर मेडिकल कॉलेजेस की संख्या बढ़ी है। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स अच्छे ढंग से संचालित हो चुका है। पीपीपी मोड पर भी हमने कुछ मेडिकल कॉलेज संचालित किए हैं, जो सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। महाराजगंज, संभल और शामली जैसे जिलों में यह मॉडल अब “पब्लिक ट्रस्ट पार्टनरशिप” के रूप में विकसित हो रहा है, जहां सरकार के प्रति बढ़े विश्वास के चलते आम जनता भी स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आ रही है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। नर्सिंग में 7000 सीटें और पैरामेडिकल में 2000 सीटों की वृद्धि की गई है। एमबीबीएस (यूजी) सीटें, जो पहले 5390 थीं, अब बढ़कर 12700 हो गई हैं। वहीं, पीजी सीटों की संख्या 1221 से बढ़कर 5056 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई संचालित हो रही है, जबकि 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ इन संस्थानों में भी नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विकास में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्थान में डायबिटीज और किडनी रोगियों के लिए एडवांस्ड डायबिटीज सेंटर स्थापित किया गया है, जहां एक ही छत के नीचे दोनों बीमारियों का … Read more