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आर्थिक समीक्षा में ग्राम विकास क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए योगी सरकार ने ग्रामीण विकास पर खर्च लगातार बढ़ाया है। वर्ष 2017-18 में जहां ग्राम विकास पर 10,508 करोड़ रुपये व्यय हुए थे,  जो 2025-26 में बढ़कर 20,081 करोड़ रुपये हो गया। बीते आठ वर्षों में ग्राम विकास कार्यों में व्यय में 8.43 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई है। मानव दिवस सृजन में देश में पहला स्थान वर्ष 2017-18 के 1814.34 लाख मानव दिवसों की तुलना में 2024-25 में 85.41 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3363.97 लाख मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे यूपी को देश में प्रथम स्थान मिला। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 1805 लाख से अधिक मानव रोजगार दिवस सृजित हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संवर्धन के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के कार्य तेजी से कराए गए। योजना के अंतर्गत 266 प्रकार के सामुदायिक और व्यक्तिगत लाभार्थीपरक कार्यों को लागू किया गया। तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार का असर बुंदेलखंड की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अभिनव पहल करते हुए ललितपुर के बिरधा विकास खंड में विलुप्त शहजाद नदी के 1500 मीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया, जिससे 9859 मानव दिवसों का सृजन हुआ और भूजल व सिंचाई संसाधनों को मजबूती मिली। कार्यों में पारदर्शिता के लिए ई-एमबी मॉड्यूल, त्रि-स्तरीय जियो टैगिंग, ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, आधार आधारित मजदूरी भुगतान, नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप, एरिया ऑफिसर ऐप और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया गया। 2024-25 में 65.26 लाख परिवारों के 75.83 लाख श्रमिकों को रोजगार मिला। जबकि 6.16 लाख परिवारों को पूर्ण 100 दिन का काम दिया गया। 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 47 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। तमिलनाडु के बाद यूपी दूसरा सबसे अधिक परिवारों को रोजगार देने वाला राज्य है। पर्यावरण, खेल और सामाजिक सहभागिता वीबी-जी राम जी योजना के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 2024-25 में 13.54 करोड़ और 2025-26 में 13.23 करोड़ पौधरोपण किया गया। वहीं, नवंबर 2025 तक 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार कर यूपी देश में अग्रणी रहा। इसके साथ ही 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 3550 खेल मैदान और 1706 आंगनबाड़ियों का निर्माण पूरा किया गया। महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 42 फीसदी पहुंची वीबी-जी राम जी के तहत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। यह 2018-19 में 35 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, सोशल ऑडिट के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 2024-25 में 55,991 ग्राम पंचायतों में और 2025-26 में दिसंबर तक 51,648 ग्राम पंचायतों में ऑडिट पूरा किया गया।

2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था 2024–25 में पहुंची ₹30.25 लाख करोड़ के पार

लखनऊ.  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर प्रस्तुत की। समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और क्षेत्रीय योगदान को विस्तार से सामने रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में ऐतिहासिक विस्तार किया है। वर्ष 2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹30.25 लाख करोड़ पार कर चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करती है। राज्य की प्रगति, जन-आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि आज हम सब एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं, जब उत्तर प्रदेश भी भारत सरकार की तरह अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, उत्तर प्रदेश आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहा है। निवेशकों का बदला नजरिया, ₹50 लाख करोड़ से अधिक के मिले निवेश प्रस्ताव वित्त मंत्री ने कहा कि एक समय निवेशकों की प्राथमिकता सूची में न रहने वाला उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड) की गारंटी के चलते प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश वातावरण में आए निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा उत्तर प्रदेश का योगदान आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्ष 2016–17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वृद्धि प्रदेश की आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय विकास में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक बदलाव समीक्षा में बताया गया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश ने प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के लंबे रुझान को पलटा है। वर्ष 2016–17 में ₹54,564 रही प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निवल उत्पाद) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,09,844 हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी प्रति व्यक्ति आय अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2014-15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई थी, जबकि 2024-25 में गिरावट के रुख में बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया।  कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्र में संतुलित विकास आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2024–25 में प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि आधारित न रहकर बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर अग्रसर है। बजट आकार में अभूतपूर्व वृद्धि वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में भी विगत 9 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016–17 में ₹3.47 लाख करोड़ का बजट अब बढ़कर वर्ष 2025–26 में ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। समीक्षा में बताया गया कि यह वृद्धि 4.86 लाख करोड़) पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। 2008-09 से 2016-17 (8 वर्ष) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ थी। पूंजीगत व्यय से विकास को गति उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में दो गुने से अधिक वृद्धि की गई है। वर्ष 2016–17 में पूंजीगत व्यय ₹69.79 हजार करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया है। इसका सीधा असर अवसंरचना, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर पड़ा है। वित्तीय अनुशासन की मिसाल बना उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीसडीपी अनुपात वर्ष 2016–17 के 29.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024–25 में 28.0 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से काफी कम है। यह प्रदेश की मजबूत वित्तीय प्रबंधन नीति को दर्शाता है। कर राजस्व में ढाई गुना वृद्धि प्रदेश का अपना कर राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2016–17 में ₹0.86 लाख करोड़ रहा स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू वर्ष 2024–25 में लगभग ढाई गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा में इसे कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।

बॉटलनेक से ब्रेक-थ्रू स्टेट तक, राज्यपाल ने दिखाई यूपी के विकास की तस्वीर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा। यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है। जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं। मजबूत हुए संस्थान राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है। उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 6 वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर … Read more

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया सुदृढ़ कानून व्यवस्था का खाका

आर्थिक सर्वे 2025-26 प्रदेश में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई से अपराध दर में आई गिरावट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया सुदृढ़ कानून व्यवस्था का खाका   बोले, आधुनिक तकनीक से सशक्त हुई पुलिसिंग,सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था से बढ़ा जनविश्वास महिला पुलिस बीट, एंटी-रोमियो स्क्वॉड और सेफ सिटी परियोजना से सुरक्षित हुई सार्वजनिक स्थल लखनऊ  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया गया। इस दौरान उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि प्रदेश में अपराध दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता के साथ-साथ निवेशकों का भी विश्वास बढ़ा है। महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी और एंटी रोमियो स्क्वायड ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देकर पुलिस सुधारों को नई दिशा दी गई है। सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से पुलिस की कार्यक्षमता और जवाबदेही में वृद्धि हुई है। इससे जनता में निर्भीक होकर शिकायत दर्ज कराने का वातावरण तैयार हुआ है और अपराध नियंत्रण को मजबूती मिली है। महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है। सेफ सिटी परियोजना के तहत महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स की तैनाती से सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही उत्तर प्रदेश फैक्ट्री अधिनियम (संशोधित) 2025 के माध्यम से महिलाओं को औद्योगिक कार्यों, विशेषकर नाइट शिफ्ट में, समान अवसर प्रदान किए गए हैं। मिशन शक्ति से सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली मिशन शक्ति के तहत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं के एकीकरण से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली है। वहीं न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और ई-कोर्ट्स की स्थापना की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख है कि जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से छोटे प्रक्रियात्मक अपराधों का अपराधीकरण समाप्त कर पारदर्शिता आधारित शासन मॉडल को मजबूती दी गई है। कुल मिलाकर, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और न्यायिक सुधारों के क्षेत्र में सरकार के इन कदमों ने उत्तर प्रदेश को सुरक्षित और निवेश के अनुकूल राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

किसानों के लिए अब खुशी का माध्यम बनी कृषि

कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन किसानों के लिए अब खुशी का माध्यम बनी कृषि  विधान मंडल के बजट सत्र में योगी सरकार ने प्रस्तुत किया आर्थिक सर्वेक्षण   विकसित उत्तर प्रदेश 2047- कृषि को आधुनिक व किसानों को समृद्ध बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित  लखनऊ,  योगी सरकार ने विधान मंडल के बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। योगी सरकार ने प्रदेश के विकास में कृषि व किसान को प्राथमिकता में रखा। लागत कम और उत्पादन अधिक पर जोर देकर योगी सरकार ने अन्नदाता किसानों को समृद्ध किया। योगी सरकार ने कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन में आर्थिक सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश की सफलतम कहानी का जिक्र किया।  कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़कर हुआ 24.9 प्रतिशत  आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2017-18 के सापेक्ष 2024-25 में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान 24 प्रतिशत से बढ़कर 24.9 प्रतिशत हो गया। 2024-25 में 737.4 लाख मीट्रिक टन के साथ खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। 2017-18 से 2024-25 की अवधि में कुल खाद्यान्न उत्पादन में 28.5 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ प्रदेश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का देश में योगदान 18.1 प्रतिशत से बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गया। फसलों का प्रति हेक्टेयर सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.98 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 1.73 लाख प्रति हेक्टेयर हो गया है। 2023-24 व 2024-25 में खरीफ, रबी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में काफी परिवर्तन हुआ। राज्य के कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में धान की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत है। धान के क्षेत्रफल में 19.4 प्रतिशत, उत्पादन में 23.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2024-25 में 29.4 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। रबी फसलों की बात करें तो 2023-24 व 2024-25 में प्रदेश की क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। रबी फसल गेहूं की कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में 18.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके क्षेत्रफल में 2.6 प्रतिशत, उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.5 प्रतिशत बढ़कर 41.2 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। राज्य सरकार की नीतियों (दलहन-तिलहन मिशन, बागवानी विकास कार्यक्रम, एमएसपी और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं ने फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया है। 2017-18 से 2024-25 के बीच दलहन का क्षेत्रफल 22.64 से बढ़कर 25.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। तिलहन का क्षेत्रफल 10.87 से बढ़कर 28.8 लाख हेक्टेयर (लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि) हो गया।  कृषि विकास के लिए संचालित की जा रहीं महत्वपूर्ण योजनाएं व कार्यक्रम  उर्वरक वितरण: 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 806.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया। कृषि रक्षा रसायनः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 1,52,960.11 मीट्रिक टन/किलोलीटर कृषि रक्षा रसायन वितरित किए गए। फसली ऋण वितरणः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल रु.1,34,2978.3 करोड़ फसली ऋण वितरित किया गया। पीएम-किसान सम्मान निधि : वर्ष 2018-19 से माह नवम्बर 2025 तक कुल 21 किस्तों में 3.12 करोड़ किसानों को कुल रु० 94,668.58 करोड़ की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गयी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाः वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक कुल 61.98 लाख बीमित किसानों को रु० 5110.23 करोड़ धनराशि की क्षतिपूर्ति दी गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के माह नवम्बर तक कुल 2.03 लाख कृषकों को रु० 138.89 करोड़ की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है। खेत तालाब योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 32,732 खेत तालाब का निर्माण कराया गया। एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान-2025- इसके तहत 24 लाख सदस्य बनाये गए। 43 करोड़ की राशि एकत्र एवं जिला सहकारी बैंक में 2 लाख से अधिक खाते खोले गए एवं 550 करोड़ रुपये जमा किए गए। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक किसानों के प्रक्षेत्रों पर कुल 86,128 सोलर पम्प की स्थापना की गई।  भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा उत्तर प्रदेश  सीड पार्क- उत्तर प्रदेश में बीज पार्कों की स्थापना : कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक-एक उन्नत बीज पार्क की स्थापना की जा रही है। यह निर्णय प्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। पहला पार्क लखनऊ के अटारी क्षेत्र में 130.63 एकड़ भूमि पर 266.70 करोड़ के निवेश से बनेगा, जहाँ बीज प्रसंस्करण, स्पीड ब्रीडिंग, हाइब्रिड बीज विकास की सुविधा होगी। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी उत्पन्न होंगे। *सीड पार्कों की स्थापना से बाहर से बीज आयात पर निर्भरता घटने के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे बेहतर उत्पादन होगा और आय में वृद्धि होगी। यह कदम उत्तर प्रदेश को कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेगा तथा आने वाले वर्षों में प्रदेश भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा। बागवानी फसलों के संवर्धन हेतु संचालित योजनाएं एवं कार्यक्रम प्रदेश में 2024-25 में कुल बागवानी का क्षेत्रफल 2566.4 हेक्टेयर व उत्पादन 60339.8 मीट्रिक टन है। आम, आलू, मटर, सब्जी, शहद के उत्पादन में यूपी देश का अग्रणी राज्य है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पर ड्राप मोर क्राप योजना तथा फल पट्टियों के विकास हेतु अनेक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरी की स्थापना, टिश्यू कल्चर से केला, पपीता जैसे फलदार बागों के रोपण, मशरूम उत्पादन, पोली हाउस व शेडनेट हाउस की स्थापना, मधुमक्खी पालन, शीत गृहों की स्थापना एवं क्षमता विस्तार हेतु अनुदान भी दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-पर ड्राप मोर क्रॉप माइक्रोइरीगेशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2022-23 से पर ड्राप मोर क्राप माइक्रोइरीगेशन उपघटक के रूप में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत समस्त जनपदों में संचालित की जा रही है। वर्ष 2023-24 के 18,257 हे० की तुलना में 2024-25 के 37,627 हे० तथा ड्रिप सिंचाई में 42,450 हे० के सापेक्ष 64,711 हे० माइक्रोइरीगेशन किया गया। आलू बीज उत्पादन एवं वितरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त आलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए आलू उत्पादकों को उच्चकोटि के रोग रहित आलू बीज उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय आलू अनुसंधान … Read more

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका

प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों से बढ़े डॉक्टर्स, चिकित्सा शिक्षा को मिला विस्तार वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका  बोले, पिछले नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2017 के 36 से बढ़कर 2025 में 81 हुए मेडिकल कॉलेज ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हुई मजबूत, 54 जनपदों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट से 2.05 करोड़ मरीजों का हुआ उपचार लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर सभी का ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से किए गए प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और आधुनिक तकनीक आधारित टेली मेडिसिन सेवाएं इसकी प्रमुख मिसाल हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या में बढ़ोत्तरी से स्वास्थ्य सेवाएं हुईं बेहतर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 तक कुल 36 मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जिनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। पिछले कई वर्षों में प्रदेश सरकार ने मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की। वर्ष 2025 के अंत तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इस निरंतर वृद्धि से न केवल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है, बल्कि हर वर्ष बड़ी संख्या में नए डॉक्टरों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। 22 लाख से अधिक लोगों ने ई संजीवनी टेली परामर्श सेवा का उठाया लाभ वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल और डेंटल शिक्षा के पाठ्यक्रमों तथा परीक्षाओं के स्तर में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। प्रदेश के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं उनके द्वार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा की शुरुआत की है। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में कुल 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए अब तक कुल 2.05 करोड़ रोगियों का उपचार किया जा चुका है। यह सेवा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है, जिन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। प्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में टेली मेडिसिन सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 11 मई 2021 से ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवाएं प्रारंभ की गईं। वर्तमान में प्रदेश के 26 मेडिकल कॉलेजों में यह सेवा संचालित हैं, जिसके माध्यम से अब तक 22,53,320 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं। इससे मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने की सुविधा मिली है।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया संबोधित

राज्यपाल अभिभाषण-Copy 2 उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल लखनऊ विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ तक पहुंच गई है। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, चीनी उद्योग को नई मजबूती राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को ₹3,04,321 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान ₹2,13,519 करोड़ से ₹90,802 करोड़ अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा ₹76.88 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। गो-कल्याण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती राज्यपाल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन ₹50 की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक ₹1,484 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है। जनभागीदारी से मजबूत हुआ पर्यावरण संरक्षण राज्यपाल ने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है। पारदर्शी खनन से बढ़ा राजस्व राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को ₹28,920 करोड़ का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र ₹7,712 करोड़ था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है। -सार्वजनिक परिवहन को नई गति* उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने ₹3,810.63 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो … Read more

बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले मीडियाकर्मियों से बात की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है सरकारः मुख्यमंत्री बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले मीडियाकर्मियों से बात की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमारी सरकार का यह 10वां बजट, 20 फरवरी तक चलेगा सदनः सीएम योगी  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पहली बार किसी राज्य सरकार द्वारा उठाया गया कदमः मुख्यमंत्री   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत की। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल आज से बजट सत्र प्रारंभ कर रहा है। यह हमारी सरकार का 10वां बजट है। सीएम ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो कार्यवाही बाधित करने के बजाय संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत  सीएम योगी ने कहा कि संसदीय परंपराओं के अनुरूप इसकी शुरुआत राज्यपाल जी के अभिभाषण से होगी। बजट सत्र में दो महत्वपूर्ण एजेंडे होते हैं। पहला- माननीय राज्यपाल का अभिभाषण और दूसरा- सामान्य बजट। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों व भारी कार्ययोजना का दस्तावेज होता है, जिसे उनके द्वारा सदन के माध्यम से जनता जनार्दन को समर्पित किया जाता है। सभी सदस्य इस पर चर्चा करते हैं। आज राज्यपाल द्वारा समवेत सदन को संबोधन के माध्यम से अपना अभिभाषण दिया जाएगा।  20 फरवरी तक चलेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि 2026-27 का सामान्य बजट 11 फरवरी को प्रस्तुत होगा। इसके उपरांत इस पर चर्चा होगी। बजट सत्र 9 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा।  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा  सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन के पटल पर उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा। पहली बार कोई राज्य सरकार अपनी आर्थिक उपलब्धियों को लेकर यह कदम उठाएगी। हमने यूपी को बीमारूपन से उबारकर भारत की इकॉनमी के ब्रेकथ्रू के रूप में स्थापित किया है। इन सभी कारकों और यूपी के आर्थिक उन्नयन की इस यात्रा को जानने का अधिकार जनप्रतिनिधियों व जनता जनार्दन को भी होना चाहिए। हमने कितना आर्थिक उन्नयन किया है, यूपी में प्रति व्यक्ति आय में क्या वृद्धि हुई है, रोजगार सृजन की स्थिति क्या है, वित्तीय प्रबंधन में कैसे हमने विषम परिस्थितियों से उबार कर पिछले पांच वर्षों से लगातार यूपी को रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित किया है। इन सभी बिंदुओं को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत होगी। सदस्यों के लिए डेटा प्रस्तुत करने और चर्चा के लिए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करेगी सरकार  सीएम योगी ने कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। यह कार्यवाही को बाधित करके नहीं, बल्कि संवाद से चलता है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करने के साथ ही सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य के हित में आवश्यक कदम उठाने को सदैव तत्पर है। सीएम ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि कार्यवाही को बाधित न किया जाए, अनावश्यक शोरगुल से बचा जाए।  यूपी के विकास की गति को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि पिछले 9 वर्षों के दौरान विधानमंडल में कार्यवाही के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। बजट सत्र पर प्रदेश-देश की निगाहें होंगी। माननीय सदस्यों द्वारा यह अपने महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाने का मंच बनेगा। बजट सत्र उत्तर प्रदेश के विकास की इस स्पीड को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। सीएम ने सभी पक्षों के सदस्यों से अपील की कि विधायिका के सर्वोच्च मंच पर जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाएं। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह व राकेश सचान, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ‘जनता दर्शन’

जनता दर्शन  हर नागरिक की सेवा, सुरक्षा को प्रतिबद्ध है सरकारः मुख्यमंत्री शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ‘जनता दर्शन’  हापुड़ से आए सैनिक ने जमीन कब्जे की शिकायत की, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर कार्रवाई का दिया निर्देश  सीएम ने बच्चों को दी सीख- मन लगाकर पढ़ाई करो, मोबाइल से दूर रहो  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। उन्होंने यहां आए प्रत्येक नागरिक से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। हापुड़ से आए दो सैनिकों ने मुख्यमंत्री से जमीन पर कब्जे की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सेवा व सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने बच्चों को सीख दी कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो और मोबाइल से दूर रहो। सैनिकों ने की जमीन पर कब्जे की शिकायत  हापुड़ से आए दो सैनिक भी ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे। एक सैनिक ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की। बताया कि वह और उनके भाई सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। उनके पिता नेत्रहीन हैं। उनकी जमीन ताऊ के लड़कों ने कब्जा कर ली है, जिनकी आपराधिक छवि है। ताऊ के लड़के हथियार के बल पर धमकी भी देते हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका प्रार्थना पत्र लेते हुए हापुड़ प्रशासन को निर्देश दिया कि पूरे मामले की तत्काल जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।  आप एस्टिमेट दीजिए, सरकार इलाज कराएगी  मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि आप हॉस्पिटल से एस्टिमेट बनवाकर दें, सरकार इलाज में हरसंभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि आप मरीज के स्वास्थ्य की चिंता कीजिए, इलाज की चिंता सरकार की जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त बिजली, नगर निगम, राजस्व आदि से जुड़े मामले भी आए, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उचित निस्तारण का निर्देश दिया।  सीएम ने बच्चों को दुलारा और सीख भी दी  'जनता दर्शन' में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से समस्याएं जानीं तो बच्चों का हालचाल पूछा। उनकी पढ़ाई के बारे में भी जाना। फिर कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करना और मोबाइल से दूर रहना। सीएम ने इन बच्चों पर स्नेह बरसाने के साथ उन्हें चॉकलेट भी दी।

रायबरेली में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार कार की चपेट में आए 8 लोग, चार की मौत

  रायबरेली रायबरेली जिले में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर एक तेज रफ्तार कार ने आठ लोगों को टक्कर मार दी. इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि यह हादसा जगतपुर पुलिस थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर जनौली गांव के पास तब हुआ, जब कोडर गांव के निवासी चुली गांव में आयोजित सामुदायिक भोज से लौट रहे थे. दो महिलाओं की मौके पर ही मौत पुलिस के मुताबिक ये लोग एक्सप्रेसवे से होकर गुजर रहे थे तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी. पुलिस ने बताया कि हिमांशी (23) और शालिनी (22) नाम की दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में रश्मी (14) और आसमा (22) ने बाद में दम तोड़ दिया. घायल जिला अस्पताल में भर्ती पुलिस के मुताबिक हादसे में रिया पटेल (14), प्रिया पटेल (12), साधना (नौ), मीना (22) और रेशमा (14) घायल हुई हैं. उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया है. पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद चालक कार छोड़कर मौके से फरार हो गया. उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. ड्राइवर को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी घटना की जानकारी होने पर जिलाधिकारी हर्षिता माथुर तथा पुलिस अधीक्षक रवि कुमार जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह दुर्घटना निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार कार के कारण हुई. गाड़ी को को जब्त कर लिया गया है और ड्राइवर को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं.