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राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

यमुना एक्सप्रेसवे पर 5 बजे के बाद No Entry लागू, इन गाड़ियों पर लगी पाबंदी

लखनऊ घने कोहरे और बढ़ते सड़क हादसों के खतरे को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे पर रविवार से ट्रैक्टर-ट्रॉली के संचालन पर सख्त रोक लगा दी गई है। एक्सप्रेसवे प्रबंधन और ट्रैफिक पुलिस ने यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। नए नियमों के तहत रोज शाम 5 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली का एक्सप्रेसवे पर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान यदि कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली चलते हुए पाया गया, तो उसे क्रेन की मदद से एक्सप्रेसवे से उतारकर हटाया जाएगा। यमुना एक्सप्रेसवे के वरिष्ठ प्रबंधक जेके शर्मा ने बताया कि हाल ही में मथुरा क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अक्सर एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ये वाहन न केवल धीमी गति से चलते हैं, बल्कि अधिकतर मामलों में ओवरलोड भी होते हैं। इसके अलावा, ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे की ओर उचित प्रकाश व्यवस्था नहीं होती, जिससे तेज रफ्तार में आ रहे वाहन चालकों के लिए इन्हें समय पर देख पाना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण कोहरे के दौरान कई बार गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, अब शाम 5 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को किसी भी टोल बूथ से यमुना एक्सप्रेसवे पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, यदि दृश्यता 50 मीटर से कम होती है, तो वाहनों को नियंत्रित तरीके से रोककर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को घने कोहरे के दौरान एक्सप्रेसवे पर कॉनवॉय सिस्टम के तहत वाहनों को सुरक्षित रूप से गुजराया गया। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट भी तय गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर की ट्रैफिक पुलिस ने सर्दियों में कोहरे के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से जिले की प्रमुख सड़कों और यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की स्पीड लिमिट पहले ही कम कर दी है। यह नई स्पीड लिमिट 15 दिसंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। यमुना एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। प्रशासन की वाहन चालकों से अपील अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे के दौरान निर्धारित गति सीमा का पालन करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी तरह की लापरवाही से बचें, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके।

हुमायूं कबीर की नई पार्टी का ऐलान, 20% हिंदू होंगे सदस्य, जानें क्या है पार्टी का नाम

कोलकाता बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है. हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (JANATA UNNAYAN PARTY) रखा है. पार्टी के चुनाव चिन्‍ह के लिए हुमायूं कबीर ने कहा कि मेरी पहली पसंद 'टेबल' है. मेरी दूसरी पसंद 'ट्विन रोजेज' है. हुमायूं कबीर ने बताया कि वह जरूरत पड़ने पर सभी 294 सीटों पर अपने उम्‍मीवार उतारेंगे. हमारी पार्टी सिर्फ आम लोगों के विकास की बात करेगी. पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव हैं.  जल्‍द लोगों को पता चलेगा हुमायूं कबीर क्‍या है? एनडीटीवी से खास बातचीत में हुमायूं कबीर ने बताया, 'पार्टी का नाम क्‍या होगा, ये आज दोपहर तक साफ हो जाएगा. हमने जनता उन्‍नयन पार्टी नाम सोचा है. फाइनल नाम चुनाव आयोग तय करेगा. मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए सत्‍ताधारी पार्टी इस्‍तेमाल करती रही हैं. इन्‍हें काफी चीजों से वंचित रखा गया है. हम उनके हक की आवाज उठाएंगे. अभी हमें कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है, लेकिन जल्‍द ही लोगों को पता चल जाएगा कि हुमायूं कबीर क्‍या है. कुछ सीटों पर उम्‍मीदवारों का ऐलान हम आज करने जा रहे हैं. कबीर ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले एक विवाद खड़ा कर दिया था। मुर्शिदाबाद जिले में उनकी 'बाबरी मस्जिद-स्टाइल' में एक मस्जिद का नींव रखने के कारण 'मंदिर बनाम मस्जिद' विवाद शुरू हो गया था। कबीर ने यह भी कहा कि JUP के सिंबल के लिए उनकी पसंदीदा पसंद एक टेबल और दो गुलाब हैं। कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के हाशिए पर पड़े लोगों को एक मंच प्रदान करेगी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सस्पेंड MLA हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी पिछड़े तबकों के मुद्दों पर फोकस करेगी। RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कबीर ने कहा कि वह भागवत का सम्मान करते हैं। लेकिन वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि इस मुद्दे से पश्चिम बंगाल में अशांति फैल सकती है। उन्होंने कहा, "हम मोहन भागवत जी का सम्मान करते हैं। लेकिन उनका यह आकलन कि यहां दंगे वगैरह हो सकते हैं, हम ऐसा कुछ नहीं होने देंगे।" ममता पर लगाया बड़ा आरोप कबीर ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के RSS से संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में राज्य में संगठन की मौजूदगी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भागवत हाल ही में 15 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल आए थे। उन्होंने उनकी अगली यात्रा पर सवाल उठाया। कबीर ने कहा, "CM के RSS से कुछ संबंध हैं। हाल ही में मोहन भागवत जी 15 दिनों के लिए बंगाल आए थे, अब वह फिर से यहां कैसे आ गए? उन्हें यहां आने के लिए राज्य सरकार की अनुमति चाहिए।" 2016 में जब हुमायूं कबीर ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, तो उनका चुनाव चिन्ह 'टेबल' था। अपनी नई पार्टी के लिए वह फिर से चुनाव आयोग से 'टेबल' चिन्ह देने की अपील करने की योजना बना रहे हैं। अगर वह चिन्ह नहीं मिलता है, तो उनकी दूसरी पसंद 'गुलाब के फूलों का जोड़ा' होगी। खास बात यह है कि कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी एक मस्जिद बनाने का वादा किया है। इसके लिए उन्होंने पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। 294 सीटों पर लड़ सकते हैं चुनाव  टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों से अपील की कि वे एकजुट हों और अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाने के लिए गठबंधन में चुनाव लड़ें. इसका ऐलान हुमायूं कबीर ने सोमवार को अपनी नई पॉलिटिकल पार्टी की घोषणा से एक दिन पहले किया. हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं पश्चिम बंगाल में सभी एंटी-तृणमूल कांग्रेस और एंटी-भाजपा ताकतों को एक साथ आने के लिए बुला रहा हूं. आइए हम अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एक ग्रैंड अलायंस बनाकर लड़ें. हालांकि, ऐसी कोई भी ताकत खुद को सबसे ऊपर समझती है तो मेरी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. अगर जरूरत पड़ी तो मैं पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों से उम्मीदवार उतारूंगा. मेरे पास वह ताकत है.' हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मौजूदा कदम पूरी तरह से पॉलिटिकल है, इसलिए वह कोई भी फैसला करने से पहले कई बार सोचेंगे. मोहन भागवत के बयान पर कबीर ने दी प्रतिक्रिया आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कबीर ने कहा कि हालांकि वे भगवत का सम्मान करते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में अशांति फैलने के उनके आकलन से असहमत हैं। उन्होंने कहा, “हम मोहन भगवत जी का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके इस आकलन से कि यहां दंगे आदि हो सकते हैं, हम ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे।” ये भी पढ़ें: ‘मैं बंगाल का ओवैसी हूं’, बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर बोले- चुनाव में बनूंगा किंगमेकर कबीर ने सीएम बनर्जी पर लगाया RSS से मिलीभगत का आरोप कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरएसएस से संबंध होने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके कार्यकाल में राज्य में आरएसएस की उपस्थिति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भागवत ने हाल ही में 15 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और उनकी अगली यात्रा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के आरएसएस से कुछ संबंध हैं। हाल ही में मोहन भगवत जी 15 दिनों के लिए बंगाल आए थे, अब वे दोबारा यहां कैसे आ गए? उन्हें यहां आने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता है।” अगले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में कबीर का नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस नई पार्टी का चुनावी परिदृश्य पर कितना असर पड़ेगा, यह देखना अभी बाकी है।

बुलंदशहर गैंगरेप मामले में 9 साल बाद फैसला, सभी पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा

बुलंदशहर 28 जुलाई 2016 की रात लोग कभी नहीं भुला सकते. इस दिन बुलंदशहर के नेशनल हाईवे-91 गाजियाबाद के एक परिवार के साथ जो हैवानियत हुई, उससे पूरा देश कांप उठा था. हैवानों ने लूट के इरादे से कार को रोका और उसके बाद परिवार को बंधक बना लिया था. इतना ही नहीं परिवार के सामने ही पहले 14 साल की बेटी के साथ रेप किया. जब पिता ने बेटी को छोड़ने के लिए चिल्लाया और गुहार लगाई तो उसे बेरहमी से पीटा. इसके बाद किशोरी की मां के साथ भी दरिंदगी की हदें पार कर दीं. इस दौरान सैकड़ों बार डायल 100 पर कॉल किया गया पर कोई मदद नहीं पहुंची थी. मां-बेटी के साथ गैंगरेप के बाद आरोपी लूटपाट कर फरार हो गए थे. अब करीब 9 साल बाद इस केस में बड़ा अपडेट सामने आया है. बुलंदशहर की मुख्य पॉक्सो कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है. अब इस मामले में अदालत ने आज यानी 22 दिसंबर को पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. कह सकते हैं परिवार को 9 साल बाद न्याय मिला है. क्या थी पूरी घटना? 28 जुलाई की रात गाजियाबाद निवासी एक परिवार के 6 सदस्य शाहजहांपुर से तेरहवीं के कार्यकर्म में शामिल होकर लौट रहे थे. देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के निकट नेशनल हाईवे-91 पर बदमाशों ने लोहे की रॉड फेंककर कार को रुकवाया. इसके बाद आरोपियों ने किशोरी, उसके पिता, मां, ताई, ताऊ व तहेरे भाई को बंधक बनाया. आरोपी सभी को रोड के दूसरी तरफ खेत में ले गए. पहले उन्होंने सभी पुरुषों के हाथ पैर बांध दिए. इसके बाद 14 वर्षीय किशोरी व पत्नी के साथ आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया. इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी वहां से लूटपाट कर भाग निकले थे. पीड़ित पिता का आरोप है कि वारदात के बाद कई बार डायल 100 पर फोन कर मदद मांगी, लेकिन कोई नहीं पहुंचा. 17 पुलिसकर्मियों पर टूटी थी गाज वारदात के बाद स्थानीय पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई. जिसके बाद एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी की गई. इस मामले में बुलंदशहर पुलिस ने आनन-फानन में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो बाद में निर्दोष पाए गए. इसके बाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई जांच में यह बात निकलकर सामने आई कि पूरी वारदात को बावरिया गिरोह के सदस्यों ने अंजाम दिया था. इसके बाद सीबीआई की तरफ से जुबैर, सलीम और साजिद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. हरियाणा से पकड़े गए थे तीन और आरोपी इस घटना के कुछ महीनों बाद हरियाणा पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा. जांच में पता चला कि इस गिरोह के सदस्य धर्मवीर, नरेश और सुनील बुलंदशहर गैंगरेप कांड में शामिल थे. इसके बाद आरोपियों की परेड पीड़िता से करवाई गई, जिसमें उसने तीनों को पहचान लिया. इसके बाद सीबीआई ने इन तीनों के खिलाफ भी चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दिया. कोर्ट ने इन तीनों के खिलाफ 27 जुलाई 2018 को चार्ज फ्रेम कर दिया था. हाल ही में हुए थे दोषी करार सभी आरोपियों को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 394, 395, 397, 376D, 120B तथा पोक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया है. सोमवार को कोर्ट ने सजा का ऐलान भी कर दिया. दोषी करार होने के बाद जब पुलिस कस्टडी में आरोपियों को कोर्ट से बाहर ले जाया जा रहा था, तो एक आरोपी जुबेर ने मुस्कुराते हुए मीडिया कर्मियों से कहा, “ठीक से वीडियो बनाना और फेमस कर दो.” उसकी यह बेशर्मी कैमरे में कैद हो गई, जिससे कोई पछतावा न दिखने की बात सामने आई. अन्य दोषी भी बिना किसी अफसोस के नजर आए. अदालत ने पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी. अब दरिंदे पूरी जिंदगी जेल में ही रहेंगे.

यीडा डेलिगेशन का नीमराना दौरा, यूपी में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी के लिए मॉडल का किया अध्ययन

यीडा डेलिगेशन ने देश के सबसे सफल जापानी औद्योगिक क्लस्टर के मॉडल के अनुभवों को समझा रीको अधिकारियों ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क के विकास की यात्रा, योजना और संचालन ढांचे पर दी विस्तृत प्रस्तुति उत्तर प्रदेश के यीडा क्षेत्र में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा दौरा नीमराना (राजस्थान)  उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी को आकार देने की दिशा में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राजस्थान के नीमराना स्थित राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) के जापानी इंडस्ट्रियल पार्क का अध्ययन दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य देश के सबसे सफल जापानी औद्योगिक क्लस्टर माने जाने वाले नीमराना मॉडल के अनुभवों को समझना और उन्हें यीडा क्षेत्र में लागू करना है। रीको अधिकारियों ने दी विस्तृत प्रस्तुति बैठक के दौरान रीको अधिकारियों ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क के विकास की पूरी यात्रा, योजना प्रक्रिया और संचालन ढांचे पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि किस प्रकार जापानी निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि आवंटन, जोनिंग, आधारभूत ढांचे और यूटिलिटी सेवाओं को विकसित किया गया। अधिकारियों ने विशेष प्रोत्साहन नीतियों, प्रशासनिक सहूलियतों और निवेशकों के लिए तैयार किए गए अनुकूल इकोसिस्टम पर भी प्रकाश डाला। चर्चा के दौरान जापानी कंपनियों की लॉजिस्टिक जरूरतों, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं, सुचारू आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर नीति वातावरण जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। यीडा अधिकारियों ने इस मॉडल को उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी के मास्टर प्लान में समाहित करने पर जोर दिया। टीम ने प्रत्यक्ष रूप से देखा जापानी इंडस्ट्रियल पार्क तकनीकी सत्र के बाद यीडा प्रतिनिधिमंडल ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क का स्थलीय निरीक्षण भी किया और वहां मौजूद अवसंरचना, सड़क नेटवर्क और यूटिलिटी प्रबंधन को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस अवसर पर यीडा के सीईओ आर.के. सिंह ने कहा कि राजस्थान सरकार और रीको द्वारा साझा किए गए अनुभव यीडा के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि भूमि नियोजन, विशेष अवसंरचना और निवेशक-अनुकूल व्यवस्था से जुड़े इन अनुभवों के आधार पर यीडा क्षेत्र में विश्वस्तरीय जापानी इंडस्ट्रियल सिटी विकसित की जाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में आएगा। औद्योगिक क्लस्टर आधारित विकास पर केंद्रित है यीडा की योजना उन्होंने यह भी बताया कि यीडा की योजना औद्योगिक क्लस्टर आधारित विकास पर केंद्रित है, जिसमें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है। दौरे के समापन पर यीडा डेलिगेशन ने रीको और राजस्थान सरकार का आभार जताया और इसे राज्यों के बीच सहयोग का एक सशक्त उदाहरण बताया, जो देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर.के. सिंह के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेंद्र कुमार भाटिया, ईडी, ईपीसीएमडी-इंडिया सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। रीको की ओर से डीजीएम संजय बगाड़िया ने बैठक में सहभागिता की।

‘राहवीर योजना’ के तहत यूपी में सड़क दुर्घटना में घायल की मदद पर मिलेगा 25 हजार का पुरस्कार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ रही मौतों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक अहम पहल की है। सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर इलाज न मिल पाने के कारण कई जानें चली जाती हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने ‘राहवीर योजना’ को प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ आंकड़ों के मुताबिक गोंडा जिले में अब तक सड़क हादसों में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से अधिकतर लोगों की जान बचाई जा सकती थी, यदि उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया गया होता। दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है, जिसमें सही इलाज मिलने पर मरीज की जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है। सरकार लोगों को मदद के लिए प्रेरिर करना चाह रही अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करने से लोग पीछे हट जाते हैं। इसका मुख्य कारण पुलिस पूछताछ और कोर्ट-कचहरी में फंसने का डर होता है। राहवीर योजना के जरिए सरकार इस डर को दूर करने और लोगों को आगे आकर मदद के लिए प्रेरित करना चाहती है। 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी उप संभागीय परिवहन अधिकारी आर.सी. भारतीय के अनुसार, घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति यानी ‘राहवीर’ का चयन स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति अंतिम निर्णय लेगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को सम्मानित करते हुए 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि राहवीर योजना से न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आएगी, बल्कि समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।  

प्रदेश में ईको पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को मिलेगा नया आयाम, अनुपूरक बजट में रखा प्रस्ताव

श्री सोरों और श्री कल्कि धाम में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य पुरातत्व निदेशालय छतर मंजिल, कैसरबाग, लखनऊ के रेस्टोरेशन के लिए 3 करोड़ 44 लाख रुपये की मांग लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट में पर्यटन, कला, संस्कृति को बढ़ावा देने और धार्मिक स्थलों का विकास करने पर विशेष ध्यान दिया है। वित्त मंत्री ने आज विधान सभा में अनुपूरक बजट पेश करते हुए यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के लिए 1 करोड़ रुपये तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं का विकास करने के लिए 5 करोड़ रुपये की मांग की गई है। साथ ही श्री सोरों और श्री कल्कि धाम व अन्य तीर्थ स्थलों में विकास कार्यों को गति देने के लिए 10 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रस्ताव रखा है। लोक कलाकारों को वाद्ययंत्रों की खरीद के लिए 5 करोड़ रुपये और राज्य पुरातत्व निदेशालय छतर मंजिल, लखनऊ के रेस्टोरेशन के लिए 3 करोड़ 44 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।   ईको पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष जोर विधान सभा में आज पेश किए गए अनुपूरक बजट में ईको पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए 10 लाख रुपये और प्राकृतिक स्थलों, वन क्षेत्रों और ग्रामीण पर्यटन में सुविधाओं का विकास करने के लिए, उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड को 1 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पर्यटन, यात्री सुविधा एवं संस्थागत विकास से जुड़े कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये की आवश्यकता व्यक्त की गई है। श्री सोरों तीर्थ, कासगंज और श्री कल्कि धाम, संभल क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों में पर्यटन संबंधी अवसंरचना सुविधाओं के विकास करने के लिए विशेष रूप से 10 करोड़ रुपये अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है। इस राशि से तीर्थ क्षेत्रों में सड़क, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केंद्र, शौचालय, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही जनपद, ब्लाक मुख्यालयों पर हेलीपैड की सुविधा का विकास करने के लिए 10 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा गया है। सार्वजनिक रामलीला स्थल और लोक कलाकारों के लिए अनुपूरक मांग प्रदेश में कला, संस्कृति के विकास के लिए भी अनुपूरक मांगे रखी गई हैं। इसके तहत लोक कलाकारों को सहयोग और वाद्ययंत्रों की खरीद के लिए 5 करोड़ रुपये, साथ ही सार्वजनिक रामलीला स्थलों के रख-रखाव के लिए प्रतीकात्मक रूप से 1 लाख रुपये की मांग की गई है। वहीं प्रदेश में संग्रहालयों के संरक्षण और क्यूरेशन के लिए 1 लाख रुपये और राज्य पुरातत्व निदेशालय छतर मंजिल, लखनऊ के रेस्टोरेशन के लिए 3 करोड़ 44 लाख रुपये की मांग की गई है। साथ ही संजीवनी माध्यमिक विद्यालय की स्थापना के लिए आवास निर्माण कार्य हेतु 1 लाख रुपये की मांग की गई है। सरकार के ये प्रयास प्रदेश में पर्यटन, ईको टूरिज्म को नया आयाम प्रदान करेंगे साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।

अनुपूरक बजट 2025-2026, पंचायत चुनावों के लिए 200 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान

अनुपूरक बजट में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने पर योगी सरकार का फोकस पंचायतों से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ करने का खाका तैयार अनुपूरक बजट के जरिए ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति लखनऊ, योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के अनुपूरक बजट में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के सफल और सुचारु आयोजन के लिए 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि का प्रस्ताव किया है। पंचायती राज विभाग से जुड़े इस प्रस्ताव का उद्देश्य चुनावी तैयारियों को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। योगी सरकार के इस कदम को ग्रामीण लोकतंत्र को सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने न केवल चुनावी प्रक्रिया बल्कि पंचायतों से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने का खाका तैयार किया है। इस तरह मजबूत बनाई जाएंगी पंचायतें सीएम योगी के निर्देश पर पंचायतों के सशक्तिकरण पर सरकार विशेष जोर दे रही है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए अनुपूरक बजट 2025-2026 के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय भवन निर्माण के लिए 24.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्से में पंचायत उत्सव भवन प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्से में पंचायत उत्सव भवन या बारात घर के निर्माण पर योगी सरकार का विशेष ध्यान है। इसके लिए प्रतीकात्मक राशि के तहत एक लाख रुपये का प्रावधान किया जा रहा है। आवश्यक धनराशि बचत मद से वहन की जाएगी। वहीं, जिला पंचायत शाहजहांपुर में भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। योगी सरकार की कोशिश है कि इन प्रावधानों से पंचायत स्तर पर प्रशासनिक क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक गतिविधियों को स्थान मिलेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ होगी। अनुपूरक बजट से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की बड़ी रकम

अनुपूरक बजट 2025-26 योगी सरकार ने चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को दिये 423.80 करोड़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की बड़ी रकम  अनुपूरक बजट से सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मिलेगा विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ेगी गुणवत्ता लखनऊ  योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश अनुपूरक बजट में चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को बड़ी प्राथमिकता दी है। प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से कुल 423.80 करोड़ रुपये की धनराशि का आवंटन किया गया है। यह बजट आवंटन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। एसजीपीजीआई लखनऊ को दिये 120 करोड़ योगी सरकार ने अनुपूरक बजट में प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को वेतन अनुदान, गैर-वेतन अनुदान, व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं तथा विभिन्न मदों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी गई है। सीतापुर स्थित नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी एंड रिसर्च को वेतन अनुदान के लिए 1.74 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया है। वहीं कैंसर संस्थान लखनऊ को विभिन्न मदों के लिए 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया है। लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों पर भी सरकार का विशेष फोकस रहा है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) लखनऊ को विभिन्न मदों के लिए अलग-अलग प्रस्तावों के तहत 120 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को बजट में शामिल किया गया है। इसके अलावा, सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च, लखनऊ को वेतन अनुदान के लिए 1 करोड़ रुपये दिए गए हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, गोमतीनगर को भी वेतन अनुदान के लिए 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU)को वेतन अनुदान के लिए 25 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मेरठ, झांसी, गोरखपुर और प्रयागराज मेडिकल कॉलेज को भी आवंटित की धनराशि  योगी सरकार ने सरकार ने गंभीर और दीर्घकालिक रोगों के उपचार पर भी ध्यान दिया है। हीमोफीलिया रोग की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा के तहत औषधि और रसायनों की खरीद के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, जिससे हजारों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेजों को भी बड़ी धनराशि आवंटित की गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़ को व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं के लिए 50 लाख रुपये, बांदा मेडिकल कॉलेज को 2.18 करोड़ रुपये, सैफई (इटावा) स्थित रूरल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को गैर-वेतन अनुदान के लिए 73.09 लाख रुपये दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज आगरा को 9.5 करोड़, गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक मेडिकल कॉलेज, कानपुर को 8.75 करोड़ और मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज को 6 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता के तहत बजट मिला है। इसी क्रम में मेडिकल कॉलेज, मेरठ को 10.65 करोड़, झांसी को 3.85 करोड़, गोरखपुर को 5.07 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक मेडिकल कॉलेज में स्थापित कार्डियोलॉजिकल इंस्टिट्यूट को व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं के लिए 5 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए स्थापित नर्सिंग कॉलेजों को भी 8.97 लाख रुपये दिए गए हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों में एटा को वेतन अनुदान के लिए 2 करोड़, हरदोई को गैर-वेतन अनुदान के लिए 7.5 करोड़, प्रतापगढ़ को 15 करोड़, फतेहपुर को 5.5 करोड़, सिद्धार्थनगर को 15.5 करोड़, देवरिया को 6 करोड़, गाजीपुर को 15.5 करोड़ और मीरजापुर को गैर-वेतन अनुदान के लिए 5.5 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जेके इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलॉजी एंड कैंसर रिसर्च में विशेष सेवाओं पर फोकस योगी सरकार ने नोएडा में सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं पोस्ट ग्रेजुएट शैक्षणिक संस्थान की स्थापना के लिए वेतन अनुदान के लिए 2 करोड़ रुपये तथा ग्रेटर नोएडा में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 7 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बदायूं, फिरोजाबाद, बस्ती, अयोध्या, बहराइच और शाहजहांपुर के मेडिकल कॉलेजों को भी विभिन्न मदों के लिए करोड़ों रुपये की अतिरिक्त धनराशि दी गई है। फेज-थ्री के तहत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के संचालन के लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही जेके इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलॉजी एंड कैंसर रिसर्च, कानपुर को भी विशेष सेवाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि दी गई है। प्रदेश के कई जिलों जैसे एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, गाजीपुर, मीरजापुर सहित अन्य जिलों में नए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए प्रतीक रूप में राज्यांश की व्यवस्था की गई है।