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मतदाता अभियान से रिंकू सिंह की छुट्टी, फैंस में नाराज़गी

लखनऊ क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है, दरअसल, चुनाव आयोग ने भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह को मतदाता जागरूकता अभियान से बाहर कर दिया गया है। उनके नाम, फोटो और वीडियो सहित सभी प्रचार सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आखिर उन्हें चुनाव आयोग ने क्यों हटाया है। फिलहाल इस खबर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मिली जानकारी के मुताबिक यह फैसला तब आया जब हाल ही में रिंकू सिंह की समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद प्रिया सरोज से सगाई हुई। आयोग ने इस संबंध को राजनीतिक जुड़ाव मानते हुए, अभियान की निष्पक्षता को लेकर चिंता जाहिर की है। इस वजह से रिंकू सिंह को आयोग ने हटाया हो। राजनीतिक संबंध से बदल गया प्रचार का स्वरूप: आयोग चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता जागरूकता जैसे संवेदनशील और गैर-राजनीतिक अभियानों में पूर्ण निष्पक्षता जरूरी होती है। चूंकि रिंकू सिंह अब एक सक्रिय राजनीतिज्ञ से व्यक्तिगत रूप से जुड़े हैं, ऐसे में उनके प्रचार में शामिल रहने से पक्षपात की आशंका पैदा हो सकती है। इसी आधार पर आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि सभी पोस्टर, बैनर, डिजिटल विज्ञापन और वीडियो में से रिंकू की तस्वीर और नाम हटाए जाएं। लखनऊ में हुई थी सगाई, सपा के शीर्ष नेता भी हुए थे शामिल 8 जून को रिंकू सिंह और सपा सांसद प्रिया सरोज की सगाई लखनऊ के ‘द सेंट्रम’ होटल में हुई थी। इस निजी समारोह में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, डिंपल यादव, शिवपाल यादव, जया बच्चन सहित पार्टी के 20 से अधिक सांसद मौजूद थे। इस सगाई के बाद से ही अटकलें लग रही थीं कि रिंकू का नाम अब राजनीतिक संदर्भों में जुड़ सकता है, जिससे उनकी छवि पर भी असर पड़ेगा। फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रिया फैसले के बाद रिंकू सिंह के फैंस ने सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने इस कदम को “ज़रूरत से ज़्यादा सतर्कता” करार दिया है, वहीं कुछ ने कहा कि लोकप्रिय हस्तियों का राजनीतिक दुरुपयोग रोका जाना जरूरी है। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि इस तरह के निर्णय से चुनाव आयोग अपने निष्पक्ष और सख्त रवैये को सामने लाने की कोशिश कर रहा है, खासकर जब देश आगामी चुनावों की तैयारी में है। पहले भी हटाए गए हैं सार्वजनिक चेहरे यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग ने किसी पब्लिक फिगर को अभियान से हटाया हो। इससे पहले भी आयोग ने ऐसे मामलों में कार्यवाही की है जहां किसी की राजनीतिक संबद्धता से अभियान की निष्पक्षता पर सवाल उठा सकते थे। रिंकू और प्रिया की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं इस पूरे घटनाक्रम पर न तो रिंकू सिंह की तरफ से और न ही सांसद प्रिया सरोज की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने आया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।  

महंगी हुई लखनऊ की रियल एस्टेट! नए सर्किल रेट से खरीददारों की जेब पर असर

लखनऊ   यूपी की राजधानी लखनऊ में एक अगस्त से नया डीएम सर्किल रेट लागू हो गया है. इससे अब जमीन, मकान या दुकान खरीदने वालों को न सिर्फ ज्यादा कीमत चुकानी होगी, बल्कि अब इलाके की सड़क, प्लॉट का उपयोग और आसपास की गतिविधियों की भी अहम भूमिका होगी. 10 साल बाद सर्किल रेट में यह बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद है और साथ ही बिल्डरों की मनमानी पर भी अंकुश लगने की संभावना है.  हाई-डिमांड इलाकों में सर्किल रेट दो से तीन गुना बढ़ा लखनऊ, जो अब देश के प्रमुख मेट्रो शहरों की कतार में तेजी से खड़ा हो रहा है, उसमें यह बदलाव विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. गोमती नगर, अंसल, शहीद पथ और शालीमार वन वर्ल्ड जैसे पॉश और हाई-डिमांड इलाकों में सर्किल रेट को दो से तीन गुना तक बढ़ाया गया है. इन क्षेत्रों में हाईराइज टावर, होटल, शॉपिंग मॉल और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मांग के चलते जमीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है.  डिफेंस कॉरिडोर क्षेत्र के लिए सर्किल रेट ₹17,000 प्रति वर्ग मीटर पिछले कुछ वर्षों में आउटर रिंग रोड, किसान पथ और विभिन्न एक्सप्रेसवे के आसपास भी 20 से 30 फीसदी तक रेट बढ़ाए गए हैं. सरकार का उद्देश्य इन इलाकों में इंडस्ट्री और निवेश को प्रोत्साहन देना है. आंकड़ों की मानें तो लखनऊ में अब तक दो लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. इसी कड़ी में भटगांव स्थित डिफेंस कॉरिडोर क्षेत्र के लिए सर्किल रेट ₹17,000 प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है, ताकि उद्योगों की स्थापना आसान हो सके.  डीएम विशाख जी ने बताया कि पिछली बार 2015 में सर्किल रेट में संशोधन हुआ था. तब से अब तक शहर की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति में काफी बदलाव आया है. उन्होंने बताया कि एक जुलाई को प्रस्तावित दरों पर कुल 49 आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश में दरें बढ़ाने की मांग की गई थी.  गोमती नगर सबसे महंगा इलाका शहर की 26 प्रमुख कॉलोनियों के रेट इस बार अपडेट किए गए हैं. सबसे महंगे इलाके में गोमती नगर रहा, जहां सर्किल रेट ₹77,000 प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गया है. इसके बाद महानगर में ₹41,000 से ₹65,000 और इंदिरा नगर में ₹35,000 से ₹62,000 तक की दरें तय की गई हैं.  वहीं सबसे सस्ती कॉलोनियों में अनंतनगर ₹15,000–₹18,000 और संतुष्टि एन्क्लेव ₹7,000–₹10,000 शामिल हैं.  इस बदलाव के बाद जहां प्रॉपर्टी खरीदना थोड़ा महंगा हुआ है, वहीं रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ने और सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतरने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. साथ ही, यह कदम लखनऊ को निवेश और विकास की दृष्टि से और अधिक सशक्त बना सकता है. 

लखनऊ की वीआईपी कोठी छोड़नी पड़ेगी सपा को, मुलायम सिंह के नाम थी मंजूर

लखनऊ  मुरादाबाद में जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी को दी गई सरकारी कोठी का आवंटन रद्द कर दिया है.यह कोठी वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के नाम पर केवल 250 रुपये प्रति माह किराए पर आवंटित की गई थी.अब जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी की स्थानीय इकाई को 30 दिनों के भीतर यह कोठी खाली करने का आदेश जारी कर दिया है. सिविल लाइंस में बनी है यह कोठी यह कोठी मुरादाबाद के पॉश इलाके सिविल लाइंस क्षेत्र में ग्राम छावनी के पास स्थित है, जहां पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज समेत कई सरकारी संस्थान मौजूद हैं.लगभग 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैली इस कोठी में वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय संचालित हो रहा है.इस कोठी का स्वामित्व राज्य सरकार के पास है, और यह राजस्व अभिलेखों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज है. नामांतरण न होने से निरस्त हुआ आवंटन प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद कोठी का नामांतरण नहीं कराया गया.नियमानुसार, किसी सरकारी आवंटन के मूल लाभार्थी की मृत्यु होने पर संपत्ति का नामांतरण आवश्यक होता है.चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए प्रशासन ने आवंटन को समाप्त कर दिया. सरकारी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी अनुज सिंह की ओर से यह निर्णय राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों की जरूरतों के लिए भूमि और भवन की मांग लगातार बढ़ रही है.विशेषकर अधिकारियों के आवास के विस्तार के लिए भूमि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह कोठी वापस लेने का निर्णय लिया गया. एडीएम (वित्त) ने जारी किया नोटिस इस संबंध में एडीएम (वित्त) ने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष को नोटिस भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि कोठी को एक माह के भीतर खाली कर दिया जाए. यदि तय समयसीमा में कोठी खाली नहीं की जाती, तो प्रशासन आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी. प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक रंग इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं.कुछ लोगों का मानना है कि यह फैसला नियमों के तहत लिया गया है, जबकि कुछ इसे राजनीतिक निर्णय मानकर देख रहे हैं.हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह केवल नियमानुसार की गई एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सरकारी संपत्ति का प्रभावी और उचित उपयोग सुनिश्चित करना है.

अपने क्षेत्र में 51वीं बार पहुंचेंगे पीएम मोदी, वाराणसी को मिलेंगी बड़ी सौगातें

वाराणसी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के 51वें दौरे पर आ रहे हैं. अपने इस एक दिवसीय दौरे में प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में लगभग 2 घंटे बिताएंगे. इस दौरान वो जनसभा को भी संबोधित करेंगे. उनकी जनसभा सेवापुरी ब्लाक के कालिकाधाम (बलौनी) में होनी है. इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.  गौरतलब है कि जब कभी प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र में आते हैं, तो अक्सर कुछ बड़ा ऐलान करते हैं और परियोजनाओं की बड़ी सौगात भी देते हैं. इस बार भी वह 2183.45 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 52 परियोजनाओं की सौगात काशीवासियों को देंगे.  इस दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी जाने वाली परियोजनाओं का लाभ न केवल वाराणसी, बल्कि पूर्वांचल की जनता को भी मिलेगा. इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त के रूप में 9.7 करोड़ किसानों के लिए  20 हजार 500 करोड़ रुपये की किस्त भी जारी करेंगे.  प्रधानमंत्री मोदी 2 अगस्त को सुबह लगभग 10 बजकर 25 मिनट पर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वायुसेना के विशेष विमान से पहुंचेंगे, जहां से वे सीधे जनसभा स्थल हेलीकॉप्टर से पहुंच जाएंगे. वहीं, भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत काम करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एलिम्को की ओर से प्रधानमंत्री चुनिंदा कुछ दिव्यांगजनों और वयोश्री योजना के तहत अपने हाथों से उपकरण बाटेंगे. इसके बाद 2025 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी बांटा जाएगा. इसमें वाराणसी के सेवापुरी, आराजीलाइन और बड़ागांव के लाभार्थी शामिल किए गए हैं. तैयारियों जोरों पर, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जनसभा स्थल और तैयारियों की बात करें तो प्रशासनिक स्तर पर लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मानसून के मौसम में खासकर बारिश के मद्देनजर सभी तैयारी है. जनसभा स्थल पर 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, लिहाजा जर्मन हैंगर के अलावा पूरे पंडाल को वाटरप्रूफ रखने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर एसपीजी भी पहुंचकर सुरक्षा जांच में जुट गई है. प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के मद्देनजर न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी पूरे जोर-शोर से लग गई है, जिसके तहत पूरे वाराणसी में स्वच्छता अभियान भी चलाया जा रहा है. शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों, महापुरुषों की प्रतिमाओं एवं मठ-मंदिरों के आसपास स्वच्छता की जा रही है. इसमें मंत्री, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं. प्रधानमंत्री की जनसभा की व्यवस्था में लगे कार्यकर्ताओं की बैठक भी संपन्न हुई है, जिसमें जनसभा स्थल को 20 ब्लॉकों में बांटा गया है और चाक-चौबंद व्यवस्था के लिए प्रत्येक ब्लॉक के इंचार्ज भी बनाए गए हैं. पीएम मोदी के हाथों लोकार्पित और शिलान्यास होने वाली प्रमुख परियोजनाएं : * 565.35 करोड़ की लोकार्पित होने वाली 14 परियोजनाएं- वाराणसी-भदोही फोरलेन मार्ग (269.10 करोड़), मोहनसराय अदलपुरा रोड पर आरओबी (42.22 करोड़), होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में मशीनें व यूनिट (73.30 करोड़), जल जीवन मिशन की 47 परियोजनाएं (129.97 करोड़) आदि. * 1618.10 करोड़ की 38 परियोजनाओं का होगा शिलान्यास- होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल (85.72 करोड़), दालमंडी रोड का चौड़ीकरण (215.88 करोड़), बिजली के तारों का अंडर ग्राउंड कार्य (881.56 करोड़), अस्सी घाट पर मल्टीलेवल पार्किंग (9.84 करोड़) आदि.

यूपी में पंचायत चुनाव टलने के संकेत, सरकार ने आयोग को लिखा पत्र

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होने की पूरी संभावना है, क्योंकि शासन स्तर पर चल रही कवायदों के बीच संकेत मिल रहे हैं कि नगरीय क्षेत्रों की सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन के चलते पंचायत चुनाव को फिलहाल टालने की तैयारी चल रही है। दरअसल, नगर विकास विभाग द्वारा 97 नए नगरीय निकायों के गठन और 107 निकायों के सीमा विस्तार की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसको लेकर पंचायतीराज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बीच वार्डों का पुनर्गठन किया जाए या इस पर फिलहाल रोक लगाई जाए। 22 जुलाई को भेजे गए इस पत्र पर अभी तक आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य फिलहाल नहीं रोका है। सभी जिलों में अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें जारी हैं। सूत्रों की मानें तो अंतिम निर्णय शासन स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन यह बैठक अभी तक नहीं हुई है। इससे पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बीच प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले साल दिसंबर में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एमएलसी चुनाव के लिए मतदान केंद्रों के चयन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के निर्देश जारी कर दिए हैं। जहां एक ओर एमएलसी चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं, तो वहीं पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर फिलहाल धुंधली है। सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन की प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनाव आगे खिसकने के पूरे आसार बनते जा रहे हैं।

यूपी में पंचायत चुनाव टलने के संकेत, सरकार ने आयोग को लिखा पत्र

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होने की पूरी संभावना है, क्योंकि शासन स्तर पर चल रही कवायदों के बीच संकेत मिल रहे हैं कि नगरीय क्षेत्रों की सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन के चलते पंचायत चुनाव को फिलहाल टालने की तैयारी चल रही है। दरअसल, नगर विकास विभाग द्वारा 97 नए नगरीय निकायों के गठन और 107 निकायों के सीमा विस्तार की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसको लेकर पंचायतीराज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बीच वार्डों का पुनर्गठन किया जाए या इस पर फिलहाल रोक लगाई जाए। 22 जुलाई को भेजे गए इस पत्र पर अभी तक आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य फिलहाल नहीं रोका है। सभी जिलों में अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें जारी हैं। सूत्रों की मानें तो अंतिम निर्णय शासन स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन यह बैठक अभी तक नहीं हुई है। इससे पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बीच प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले साल दिसंबर में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एमएलसी चुनाव के लिए मतदान केंद्रों के चयन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के निर्देश जारी कर दिए हैं। जहां एक ओर एमएलसी चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं, तो वहीं पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर फिलहाल धुंधली है। सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन की प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनाव आगे खिसकने के पूरे आसार बनते जा रहे हैं।

यात्रियों को बड़ी सौगात: 3 अगस्त से कानपुर से झारखंड और राजस्थान के लिए नई ट्रेन

कानपुर रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। अब कानपुर से झारखंड और राजस्थान का सफर पहले से ज्यादा सुगम होगा। रेलवे ने एक नई साप्ताहिक ट्रेन सेवा शुरू करने का फैसला लिया है, जो गोविंदपुरी, फतेहपुर और इटावा जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी। यह ट्रेन 3 अगस्त से नियमित रूप से दौड़ेगी, जबकि 26 जुलाई को इसका उद्घाटन होगा। भारतीय रेलवे ने उत्तर प्रदेश, झारखंड और राजस्थान के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। कानपुर से झारखंड और राजस्थान के बीच अब एक नई साप्ताहिक ट्रेन सेवा शुरू की जा रही है। यह ट्रेन गोड्डा (झारखंड) से दौराई (राजस्थान) तक चलाई जाएगी और गोविंदपुरी, फतेहपुर व इटावा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर इसका ठहराव रहेगा। इस ट्रेन का उद्घाटन 26 जुलाई को किया जाएगा, जब यह एक विशेष उद्घाटन रेलगाड़ी के रूप में गोड्डा से दौराई की ओर चलेगी। इसके बाद इसका नियमित संचालन 3 अगस्त से शुरू होगा। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, इस साप्ताहिक गाड़ी का नंबर 19603/19604 होगा और इसका नाम गोड्डा-दौराई साप्ताहिक एक्सप्रेस रहेगा। ट्रेन में कुल 22 डिब्बे होंगे, जिनमें-     2 द्वितीय एसी कोच     3 तृतीय एसी कोच     3 इकोनॉमी कोच     1 पैंट्रीकार     7 स्लीपर कोच     4 सामान्य कोच     1 एसएलआर और 1 एसएलआरडी कोच शामिल हैं। यह ट्रेन झारखंड और राजस्थान को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए बीच के यात्रियों के लिए भी एक नया विकल्प बनेगी। इससे खासकर उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से इस रूट पर सीधी ट्रेनों की कमी का सामना कर रहे थे। साथ ही, रेलवे ने एक और खुशखबरी दी है। अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद अजीमाबाद एक्सप्रेस, जो सप्ताह में दो दिन सेंट्रल स्टेशन के रास्ते गुजरती है, अब राजगीर स्टेशन तक चलेगी। यह विस्तार 25 जुलाई (राजगीर से) और 28 जुलाई (अहमदाबाद से) लागू होगा।

OBC मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा मायावती ने, बोलीं- भरोसे के लायक नहीं रही पार्टी

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस ओबीसी समाज की विश्वासपात्र पार्टी नहीं है। कांग्रेस के दिल में कुछ है जुबान पर कुछ है। उन्होंने कहा कि एनडीए का भी ओबीसी के प्रति यही हाल है। मायावती के बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान के संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता में रहते हुए जाति जनगणना न करवाना कांग्रेस की गलती थी। आगे उन्होंने ये भी कहा था कि जो काम ओबीसी के लिए अब तक नहीं कर पाया उसे दोगुनी स्पीड से करूंगा। मायावती ने बयान दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज्यादा लगती है।  वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगजाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्मसम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी बनानी पड़ी है। कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है। उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आजादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है। इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों के बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियां हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं। जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बसपा के नेतृत्व में रही सरकार में सर्वसमाज के गरीबों, मजलूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जानमाल व मजहब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारंटी रही है। अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बीएसपी की आयरन गारंटी में ही निहित है। अतः खासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग खासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है। 

यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए तैयार लिस्ट, 6 नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री भी शामिल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व को छह नामों की एक सूची भेजी है। इनमें दो ब्राह्मण, दो पिछड़े समुदाय से और दो दलित समुदाय से हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य इकाई के अगले प्रमुख का चयन और ऐलान हो जाएगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने  यह जानकारी दी। सुझाए गए नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी (दोनों ब्राह्मण), उत्तर प्रदेश के वर्तमान मंत्री धर्मपाल सिंह और वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (दोनों ओबीसी), और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया और वर्तमान एमएलसी विद्या सागर सोनकर (दोनों दलित) शामिल हैं। नेता ने कहा, ‘हमने अपनी ओर से केंद्रीय नेतृत्व को उपयुक्त नाम सुझाए हैं जिन पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए विचार किया जा सकता है और नेतृत्व सक्रिय रूप से उनका मूल्यांकन कर रहा है। अगले दो हफ़्तों में, संभवतः उससे भी पहले, कोई निर्णय होने की संभावना है।’ भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं और राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भाजपा, यूपी में पिछले लोकसभा चुनाव की अपनी हार को पलटने और प्रदेश में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। भाजपा ने पहले ही 37 संगठनात्मक इकाइयों में से 25 से अधिक में राज्य प्रमुखों का चयन कर लिया है। अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की भी तैयारी कर रही है। वर्तमान में यूपी भाजपा की कमान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता भूपेन्द्र सिंह चौधरी संभाल रहे हैं। नए अध्यक्ष उनकी जगह लेंगे। लिस्ट में शामिल नामों की खासियत अपनी स्वच्छ छवि और शैक्षणिक योग्यता के लिए जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (ब्राह्मण) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शीर्ष नेतृत्व का विश्वास प्राप्त है। हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण हैं और अपने साथ संसदीय अनुभव लेकर आते हैं। वे बस्ती से सांसद और पार्टी में राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं। धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा दोनों ही प्रभावशाली लोध समुदाय से हैं। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री सिंह को विधायी और मंत्री पद का दशकों का अनुभव है। वर्मा, जो वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, एक अनुशासित और साधारण संगठनकर्ता माने जाते हैं जिनके आरएसएस से गहरे संबंध हैं। संगठन के भीतर उन्हें विश्वास प्राप्त है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष कठेरिया हिंदुत्व और दलित पहचान के अपने आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। एमएलसी सोनकर एक साधारण लेकिन वफादार पार्टी कार्यकर्ता हैं जिनका पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा, "हमने आलाकमान को अपने विचारों से अवगत करा दिया है। अब, केंद्रीय नेतृत्व को राज्य के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करनी है और हमें उम्मीद है कि यह बहुत जल्द हो जाएगा।"

बीजेपी-कांग्रेस पर बरसीं मायावती: OBC आरक्षण पर दोनों की नीयत पर उठाए सवाल

  लखनऊ बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा और कांग्रेस ओबीसी वर्ग के लोगों को लेकर की जा रही राजनीति पर करारा हमला किया है. मायावती ने दोनों पार्टियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक ही थाली के चट्टे-बट्टे बताया है. मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए भाजपा-कांग्रेस पर निशाना साधा है. मायावती ने एक्स पर लिखा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज़्यादा लगती है. आगे मायावती ने ये भी कहा, वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगज़ाहिर है, जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी-एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) यहाँ बनानी पड़ी है. आगे मायावती ने कहा, कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है, जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है. वैसे भी एससी-एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आज़ादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है. आगे मायावती ने कहा, इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है. इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों इन बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियाँ हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं, जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बी.एस.पी. के नेतृत्व रही सरकार में सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़लूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारंटी रही है. अर्थात देश के बहुजनों का हित केवल बी.एस.पी. की आयरन गारंटी में ही निहित है. ख़ासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग ख़ासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें, यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि के लिए बेहतर है.