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रामभुआल निषाद पर कोर्ट सख्त, गैरहाजिरी पर SSP को भेजी चिट्ठी

गोरखपुर  यूपी की सुल्तानपुर सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद रामभुआल निषाद फिर मुश्किल में हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मुकदमे में गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद सांसद के उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपना लिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र कुमार की कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ ही रामभुआल को कोर्ट में पेश करने के लिए एसएसपी को पत्र भी लिखा है। बड़हलगंज क्षेत्र के दवनाडीह निवासी रामभुआल निषाद 2024 में सपा के टिकट पर सुल्तानपुर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए हैं। राम भुआल के खिलाफ आयुध लिपिक (असलहा बाबू) सुनील कुमार गुप्ता ने जिला मजिस्ट्रेट के 25 जनवरी 2020 के आदेशानुसार मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे के मुताबिक, आरोपित रामभुआल निषाद द्वारा गलत ढंग से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लाइसेंस संख्या 3912 डीबीबीएल गन का उपयोग किया जा रहा है। यह लाइसेंस 19 जुलाई 1996 को बेचू यादव पुत्र महेंद्र यादव निवासी मुंडेरा बाबू थाना बड़हलगंज के नाम से जारी हुआ है। लाइसेंसी बेचू यादव की मृत्यु हो चुकी है। इस मामले में विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया है। न्यायालय ने पिछली कई तिथियों पर आरोपित के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया। इसके बावजूद रामभुआल न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। जिसके बाद न्यायालय ने रामभुआल के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भी लिखा है। कोर्ट इससे पहले थानेदार और फिर एसपी नार्थ को भी पत्र लिख चुका है। जिलाधिकारी से दारा निषाद ने की थी शिकायत मामला तब खुला जब दारा निषाद ने रामभुआल के खिलाफ जिलाधिकारी से शिकायत की और बताया कि उनके पास मौजूद राइफल का लाइसेंस फर्जी है। वह लाइसेंस बेचू यादव के नाम से डीबीबीएल गन के लिए जारी है। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने इसकी तस्दीक कराई तो शिकायत सही मिली। इसके बाद डीएम ने असलहा बाबू को रामभुआल निषाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। 14 अगस्त को खुला था फर्जी शस्त्र का मामला गोरखपुर में 14 अगस्त 2019 को शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ था। उसी क्रम में जांच शुरू हुई रामभुआल निषाद के लाइसेंस का भी मामला सामने आया था। जांच के दौरान शस्त्र अनुभाग में काम करने वाले दो बबुओं का नाम सामने आया था। पुष्टि होने के बाद दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुआ और उन्हें जेल भेज दिया गया।  

अखिलेश यादव का BJP पर निशाना: JPNIC बर्बाद, अब बंद स्कूलों में मनाएंगे स्वतंत्रता दिवस

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जेपी एनआईसी को लेकर एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। जेपीएनआईसी और स्कूलों के मर्जर को लेकर सरकार पर निशाना साधा। सभी बंद स्कूलों में 15 अगस्त को तिरंगा फहराने का भी ऐलान किया। अखिलेश ने कहा कि समाजवाद और देश के बचाने के लिए जयप्रकाश नारायण जी बाहर निकले थे। उनके साथ पूरा देश था। संपूर्ण क्रांति आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि राजनीति में बदलाव आ गया। कई पार्टियां बन गईं। अब वही लोग जिन्होंने जेपी के नाम पर बने जेपी एनआईसी को बर्बाद कर दिया, वही लोग बिहार में जाकर वोट मांगेंगे। लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने कहा कि जेपी एनआईसी कमेटी के हम लोग मेम्बर थे। उसे भंग कर दिया गया। जय प्रकाश नारायण के नाम पर बनाया गया संस्थान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत था। सरकार इसे चला नहीं पाई। अब एलडीए को दे दिया। क्या वह चला पाएगी। हमने पहले भी कहा है कि अगर जेपीएनआईसी को बेचना ही है तो हम लोग चंदा लगाकर लेने के लिए तैयार हैं। अखिलेश ने कहा कि जेपी एनआईसी की बर्बादी मीडिया को वहां जाकर देखनी चाहिए। जेपी एनआईसी को बर्बाद कर बिहार में किस आधार पर भाजपा वाले वोट मांगेगे। अखिलेश ने कहा कि लोग राजनितिक लाभ के लिए भाषा विवाद हो रहा है। महाराष्ट्र मे गुजरात के लोगो को पीटा गया। कहा कि सरकार को जेपी एनआईसी के हर फ्लोर को एक-एक भारतीय भाषा के प्रचार के लिए आवंटित कर देना चाहिए। हिंदी समेत किसी भाषा का अपमान न हो। अखिलेश ने कहा कि भाजपा ने हारने वाले बूथ चिह्नित कर लिए हैं। उनके संबंधित स्कूल बंद किए जा रहे हैं। 15 अगस्त को सपा कार्यकर्ता बंद हो रहे 5000 स्कूलों मे जाकर स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। वहां पर तिरंगा झंडा फहराएंगे। उत्तर भारतीयों का अपमान बर्दाश्त नहीं महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के मामले में मारपीट की निंदा करते हुए अखिलेश ने कहा कि देश की सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए मगर हिंदी भाषी लोगों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महाराष्ट्र में हिंदी भाषा का विरोध सही नहीं है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है जो गलत है। भाजपा की मंशा समाज में खाई पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाना है। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को मराठी, गुजराती, कन्नड़, उर्दू और तमित समेत सभी प्रांतों की भाषाओं के उत्थान और प्रचार प्रसार के लिये बड़े बजट का प्रावधान करना चाहिये। बड़ी संख्या में लोग रोजगार और पर्यटन के लिये एक से दूसरे राज्य में जाते है। भाषा और संस्कृति की आपसी समझबूझ से देश में सदभावना का माहौल बनेगा और कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश के लाखों युवक विदेशों में रोजगार के लिए जाते हैं। हाल ही में अमेरिका से कई भारतीय जंजीरों में बांधकर वापस भेजे गये। यह सरकार की विफलता का प्रमाण है। इस अवसर पर उन्होंने लखीमपुरखीरी में 23 जून को तेंदुए से लोहा लेने वाले वीर श्रमिक और उसके परिवार का सम्मान किया।  

अयोध्या में नई पहल: सरयू स्नान के बाद श्रीराम मंदिर के पास ध्यान-योग कर सकेंगे श्रद्धालु

अयोध्या अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर को अब सरयू रिवरफ्रंट से जोड़ने की तैयारी है। सरयू नदी के तट पर बन रहा सरयू रिवरफ्रंट अयोध्या की खूबसूरती और सुविधाओं को और बढ़ाने जा रहा है। यह रिवरफ्रंट श्रीराम मंदिर से जुड़कर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगा। फिलहाल इसे मंदिर परिसर के उत्तरी गेट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। यूपी के पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 23.46 करोड़ रुपये की लागत से सरयू रिवरफ्रंट का निर्माण कराया जा रहा है। सरयू रिवरफ्रंट के निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है, जिसमें सीढ़ियों पर पत्थर लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अतिरिक्त, छतरियों के फाउंडेशन का कार्य भी प्रगति पर है, जो इस परियोजना को और भव्यता प्रदान करेगा। ये निर्माण कार्य जल्द खत्म करने के लिए काम तेजी से जारी है। सुविधाजनक स्थल के रूप में उभरकर आएगा सामने सरयू रिवरफ्रंट का निर्माण न केवल सरयू नदी के तट को सुंदर बनाने के लिए है, बल्कि यह पर्यटकों के लिए एक आधुनिक और सुविधाजनक स्थल के रूप में भी उभरेगा। इस रिवरफ्रंट पर श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान के साथ-साथ ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे। इसके अलावा, पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। डीएम, निखिल टीकाराम फुडे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि राम मंदिर से जल्द जुड़ने वाले सरयू रिवरफ्रंट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। लक्ष्य के अनुरूप इसे तैयार किया जा रहा है। जल्द ही यह पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इसमें 24 इंटरप्रिटेशन वाल, शिलालेख, साइनेज एवं 100 मीटर घाट की सीढ़ियों पर पत्थर लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। 9 नग छतरी के फाउंडेशन का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा अयोध्या में अन्य पर्यटन सुविधाओं को भी बेहतर किया जा रहा है।  

वर्ल्ड पुलिस गेम्स में जीता सिल्वर मेडल, यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल अनीसा ने अमेरिका में लहराया तिरंगा

गाजियाबाद अमेरिका में आयोजित हुई वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर की बेटी अनीसा असवाल ने ताइक्वांडो में उम्दा प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीत जिले का मान बढ़ाया है। वसुंधरा में रहने वाली अनीसा यूपी पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात हैं। अनीसा की इस उपलब्धि से जिले में खुशी की लहर है। अमेरिका के बर्मिंघम में 30 जून से एक जुलाई तक वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स का आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनियाभर के पुलिस खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसमें भारत की तरफ से गाजियाबाद जिले से कई खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसी प्रतियोगिता में वसुंधरा में रहने वाली यूपी पुलिस की अनीसा असवाल ने ताइक्वांडो खेल में अंडर 57 किलो भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीत अमेरिका में तिरंगा फहराया है। अनीसा वसुंधरा में ही स्थित एमडब्लूएस एकेडमी में अपने खेल की नियमित प्रैक्टिस करती हैं। एकेडमी के कोच संदीप चौहान ने बताया कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए अनीसा ने काफी मेहनत की थी। वह नियमित प्रैक्टिस करती थीं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में देशभर के 200 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इतने खिलाड़ियों के बीच पदक जीतना अपने आप में ही खास उपलब्धि है। अनीसा ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। अनीसा वर्तमान में सहारनपुर में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात हैं। अनीसा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेल और सेवा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अनीसा का अब अगला लक्ष्य आगे की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना है। दूसरे खिलाड़ियों ने भी पदक हासिल किया वसुंधरा स्थित एकेडमी में अनीसा के साथ अभ्यास कर रहे यूपी पुलिस के तीन अन्य खिलाड़ियों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पदक जीता है। इनमें ऋषि राय ने 68 किलो भार वर्ग में गोल्ड, तेजस मिश्रा ने अंडर-58 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा एकेडमी में ही अभ्यास करने वाले राजस्थान पुलिस के खिलाड़ी जरनैल सिंह ने अंडर-80 किलोभार वर्ग में स्वर्ण झटका।

कांवड़ यात्रा में नया नियम: दुकानों के नाम हटेंगे, क्यूआर कोड से मिलेगी पहचान

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के नियम को लागू कर दिया है। इसी को लेकर एफएसडीए ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि दुकानदारों को अपना नाम नहीं लिखना होगा। केवल दुकान का नाम ही लिखा जाएगा। हालांकि, क्यूआर कोड में दुकानदार से जुड़ी जानकारी होगी तो कांवड़ियों के लिए मददगार होगी। कहा जा रहा है कि यह निर्णय पारदर्शिता और जन कल्याण सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। निर्देश के अनुसार दुकानदार को अपनी दुकान पर क्यूआर कोड युक्त प्रपत्र लगाना होगा। इसमें क्यूआर कोड स्कैन करने पर दुकानदार का नाम, पता, लाइसेंस नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल की जानकारी मिलेगी। क्यूआर कोड स्कैन कर हिंदू संगठन पूछ रहे नाम-धर्म कांवड़ यात्रा को लेकर विहिप और हिंदू संगठन के लोगों ने हरिद्वार-दिल्ली हाइवे और कांवड़ मार्ग पर आने वाले होटलों पर सख्ती की मांग की है। खुद ही टीम बनाकर हर होटल-ढाबे पर पहुंच रहे हैं और इनके क्यूआर कोड को स्कैन करके नाम पता कर रहे हैं। साथ ही यदि होटल का नाम अन्य धर्म का लिखा हुआ है तो पुलिस-प्रशासन से शिकायत की जा रही है। हिंदू संगठन के सदस्यों ने अब कांवड़ यात्रा के दौरान तमाम कांवड़ मार्गों पर होटल पर मालिकों की पहचान उजागर करने और नाम लिखने की मांग की है। अभियान चलाया सुभारती चौकी से अभियान शुरू करके गाजियाबाद तक कार्रवाई की गई है। इस संबंध में कई वीडियो भी वायरल हो रही हैं, जिसमें हिंदू संगठन के लोग होटल पर मालिक का नाम लिखने की मांग कर रहे हैं। यदि दूसरे धर्म के लोगों द्वारा अन्य नाम से होटल संचालित किया जा रहा है, तो पुलिस प्रशासन से शिकायत की जा रही है। सभी ने यूपी सरकार को उत्तराखंड शासन के आदेश का हवाला देते हुए नाम लिखने को अनिवार्य करने की मांग की।  

सीएम योगी का बड़ा फैसला: लेखपाल की रिपोर्ट पर नहीं होगा अंतिम निर्णय

लखनऊ  यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजस्व मामलों की जांच को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इन मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय में जनता दर्शन के दौरान आने वाली शिकायतों के मद्देनजर लेखपाल स्तर की जांच पर रोक लगा दी गई है। अब राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच लेखपाल नहीं,नायब तहसीलदार करेंगे। अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा। शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार अपनी रिपोर्ट देंगे। अंतिम निर्णय और समाधान उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर होगा। जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर रूप अपनाते हुए सीएम कार्यालय ने यह निर्णय लिया है। अब किसी रिपोर्ट से नहीं सुनवाई से न्याय होगा। राजस्व मामलों की जांच की प्रक्रिया में किए गए इस महत्वपूर्ण बदलाव से उम्मीद है कि इन मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। पहले ऐसी शिकायतों की जांच लेखपाल करते थे। अब लेखपाल की बजाए नायब तहसीलदार ऐसे मामलों की जांच करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद राजस्व मामलों की जांच में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर नकेल कसना है। कहा जा रहा है कि ऐसे मामलों को लेकर आए दिन शिकायतें आ रही थीं। ऐसी कुछ शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन कार्यक्रम में भी पहुंंची थीं। ऐसी शिकायतों पर सीएम योगी ने पूर्व में भी अधिकारियों को अधिक सतर्कता बरतने और जनता की शिकायतों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से हल करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा था कि शिकायतकर्ताओं की समस्या के समाधान के बाद उनका फीडबैक भी लिया जाए। सीएम जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान अक्सर अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समाधान गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि जांच प्रक्रिया में बदलाव से जांच में जवाबदेही बढ़ेगी। इससे शिकायतों का निपटारा अधिक गुणवत्तापूर्ण ढंग से होगा।  

सम्पर्क क्रांति में बम की अफवाह बन गई 1700 यात्रियों की टेंशन, झांसी पहुंचकर खुला पूरा मामला

 झांसी  मध्य प्रदेश के झांसी में हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग जाने वाली छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस (12824) में शुक्रवार रात बम रखे होने की सूचना से हड़कंप मच गया। ट्रेन में बम रखे होने की सूचना लखनऊ कंंट्रोल रूम को मिली थी। तत्काल झांसी को इस बारे में सूचित किया गया। सूचना मिलते ही रेलवे का अमला अलर्ट हो गया और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी समेत लोकल पुलिस ने स्टेशन पर डेरा डाल लिया। ट्रेन के रेलवे स्टेशन पर आते ही पुलिस ने पूरी ट्रेन को खाली करा लिया और यात्रियों को उतारकर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया। लगभग 40 मिनट तक की गई गहन तलाशी के बाद ट्रेन में कुछ नहीं मिला, जिस पर रात लगभग 12:24 बजे ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से चलने के बाद सीधे झांसी में रुकती है। शुक्रवार की रात किसी ने लखनऊ के रेलवे कंट्रोल रूम नम्बर 139 को सूचना दी कि हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग जाने वाली छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस में बम रखा है। रेलवे को बम मिलने की सूचना की जानकारी दी गई तो तत्काल सुरक्षा बल अलर्ट हो गया। उसने स्टेशन पर मोर्चा संभाल लिया। प्लैटफॉर्म नंबर 2-3 खाली कराए गए ट्रेन के झांसी आने का समय रात 11 बजे है, लेकिन वह कुछ देर रात 11:32 बजे झांसी आई। एसपी जीआरपी विपुल श्रीवास्तव के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन पर भारी फोर्स तैनात कर दी गई। सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी सिविल पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। रेल कमांडेंट ट्रेन विवेकानंद नारायण ने बताया कि ट्रेन को झांसी आने पहले ही रेलवे पुलिस ने प्लैटफॉर्म नंबर 2 और 3 खाली कराकर यात्रियों को दूसरे प्लैटफॉर्म की ओर डायवर्ट कर दिया। ट्रेन जैसे ही झांसी रेलवे स्टेशन पर खड़ी हुई, तत्काल इंजन के बाद वाले कोच से तलाशी अभियान शुरू हो गया। ट्रेन से उतरने वाले सभी यात्रियों की तलाशी ली जाने लगी। कोच के अंदर भी तलाशी शुरू हुई। यह क्रम तब तक चला जब तक कि पूरी ट्रेन की तलाशी नहीं हो गई। पूरी ट्रेन की तलाशी के बाद ही ट्रेन को गंतव्य स्थान के लिए रवाना किया गया।

CM योगी का बयान: तकनीक के सहारे आम बागवानी में रचा गया सफलता का इतिहास

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम, अवध विहार योजना, सेक्टर 9, में तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश आम महोत्सव 2025’ का शुभारंभ किया। इस महोत्सव में देशभर के बागानों से चुनकर लाए गए 800 से अधिक किस्मों के आमों की प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि हमारे बागवानों ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों के बावजूद तकनीक का उपयोग कर शानदार प्रदर्शन किया है। ढाई से तीन किलो के आमों की किस्में देखकर आश्चर्य होता है, जो न केवल स्वाद में बेजोड़ हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी उत्तर प्रदेश की शान बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आम महोत्सव न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। आम उत्पादन को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए लखनऊ, अमरोहा, सहारनपुर और वाराणसी में चार आधुनिक पैक हाउस स्थापित किए गए हैं। इन पैक हाउसों के माध्यम से आम की गुणवत्ता, वैरायटी और एक्सपोर्ट के मानकों की जानकारी किसानों को दी जाती है। आम महोत्सव न केवल आम उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देता है, बल्कि बागवानों में औद्यानिक फसलों, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजारों के प्रति विश्वास जगाने का भी माध्यम है। सीएम योगी ने आगे कहा कि डबल इंजन सरकार की डबल इंजन नीति ने औद्यानिक फसलों के निर्यात को कई गुना बढ़ाया है। इस महोत्सव के दौरान दो देशों के लिए आमों का एयर कार्गो रवाना किया गया, जिसमें सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी ने बागवानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद की। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और लखनऊ की दशहरी, वाराणसी का लंगड़ा, गोरखपुर का गवर्जीत, बस्ती का आम्रपाली, मेरठ और बागपत का रटोल जैसी किस्मों की जानकारी ली। उन्होंने बागवानों के परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और तकनीकी नवाचार ने उत्तर प्रदेश को औद्यानिक फसलों का केंद्र बनाया है। योगी सरकार ने बागवानों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ी है। सीएम योगी ने बताया कि एक समय उत्तर प्रदेश की जीडीपी में कृषि और औद्यानिक फसलों का योगदान 25-30 प्रतिशत था। आज सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र को और सशक्त किया है। अर्जुन सहायक, बांध सागर और सरयू नहर जैसी परियोजनाओं ने बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जल की समस्या का समाधान किया है। परिणामस्वरूप, जहां पहले एक या दो फसलें होती थीं, वहां अब किसान तीन फसलें ले रहे हैं। उन्होंने हरदोई, कानपुर और औरैया के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि मक्का की खेती से किसान प्रति एकड़ 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के माध्यम से आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया है। गन्ना, मक्का और औद्यानिक फसलों में नए बीज और तकनीकों का उपयोग किसानों की आय को बढ़ा रहा है। 2017 में जहां 5 करोड़ पौधों का रोपण एक चुनौती थी, वहीं अब 9 जुलाई 2025 को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 50 करोड़ पौधों का रोपण किया जाएगा। यह उत्तर प्रदेश की प्रगति और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। महोत्सव में संगोष्ठियों, प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करने और बायर्स-सेलर्स मीट का आयोजन किया जाएगा। सीएम योगी ने सुझाव दिया कि कमिश्नरी स्तर पर भी ऐसे आयोजन होने चाहिए, ताकि स्थानीय बागवान अपनी फसलों की प्रदर्शनी और बिक्री कर सकें। उन्होंने बागवानों से हल्दी, अदरक और अन्य औद्यानिक फसलों के साथ फूड प्रोसेसिंग को अपनाने का आह्वान किया, ताकि उनकी आय को और बढ़ाया जा सके। यह महोत्सव बागवानों, किसानों और उत्तर प्रदेश की प्रगति को वैश्विक मंच पर ले जाने का एक शानदार मंच साबित होगा।

उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन देगा एक साल में एक लाख 25 हजार नौकरी, युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में मौका

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के युवाओं को देश-विदेश में रोजगार दिलाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के गठन को हरी झंडी दे दी गई. इस मिशन के जरिए प्रदेश सरकार साल भर में एक लाख युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार दिलाने और 25 से 30 हजार युवाओं को विदेशों में नौकरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है. कैबिनेट बैठक के बाद श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि अब तक प्रदेश को विदेशों में नौकरी दिलाने के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन अब इस मिशन के तहत सरकार खुद रिक्रूटिंग एजेंट (RA) का लाइसेंस प्राप्त करेगी, जिससे विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह राज्य सरकार के नियंत्रण में होगी.  अब सरकार खुद दिलाएगी विदेश में नौकरी एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि विदेशों में उत्तर प्रदेश के नर्सिंग, पैरामेडिकल, ड्राइविंग, घरेलू कार्य और कुशल श्रम के क्षेत्र में युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है. रोजगार मिशन राज्य सरकार को इन क्षेत्रों में सीधा नियोजन करने का अधिकार देगा. अब किसी तीसरी एजेंसी के जरिए नहीं, बल्कि सरकार ही युवाओं को विदेशों में काम दिलाएगी. मिशन की मुख्य विशेषताएं यह होंगी – देश और विदेश में रोजगार की मांग का सर्वे किया जाएगा.  – कंपनियों से सीधा संपर्क किया जाएगा.  – स्किल गैप पहचानकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयाेजित होगा.  – भाषा और प्री-डिपार्चर का प्रशिक्षण दिया जाएगा.  – करियर काउंसलिंग और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा होगी.  – नियुक्ति के बाद सहयोग और निगरानी भी की जाएगी.  उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह मिशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को आगे बढ़ाएगा जिसमें हर युवा को हुनर के आधार पर काम देने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा  कि 'हर हाथ को काम, हर हुनर को सम्मान' अब केवल नारा नहीं, धरातल पर उतरती योजना है. महिला सशक्तिकरण को मिली नई रफ्तार कैबिनेट बैठक में महिला श्रमिकों के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया. अब महिलाएं कुछ शर्तों के साथ उन 29 खतरनाक श्रेणियों के कारखानों में भी काम कर सकेंगी, जहां पहले उनका काम करना प्रतिबंधित था. श्रम मंत्री ने बताया कि पहले ही 12 और फिर हाल में 4 श्रेणियों में उन्हें अनुमति मिल चुकी थी, अब ये दायरा सभी 29 पर लागू होगा. मंत्री राजभर ने कहा, अब वक्त है कि हमारी बहनें भी उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दौड़ में भागीदार बनें. आउटसोर्स कर्मचार‍ियों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकास) के गठन को मंजूरी दे दी। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार का यह कदम ऐतिहासिक है। अब हर महीने की पांच तारीख तक इन कार्मिकों को वेतन (मानदेय) मिला करेगा। भर्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग व पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ अनिवार्य रूप से मिलेगा। परित्यक्ता, तलाकशुदा और निराश्रित महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित निगम का गठन कंपनी एक्ट के तहत किया जाएगा। मंत्रिपरिषद की अगली बैठक में निगम के गठन संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निदेशक मंडल होगा। एक महानिदेशक की भी नियुक्ति की जाएगी। निगम के गठन के बाद आउटसोर्स कार्मिकों का न्यूनतम मानदेय 16 से 18 हजार रुपये महीने हो सकता है। पूर्व में निगम के गठन से संबंधित बैठकों में न्यूनतम मानदेय पर भी चर्चा हुई लेकिन अब निगम के गठन के बाद मानदेय राशि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सीएम योगी ने अधि‍कार‍ियों को द‍िये न‍िर्देश आउटसोर्सिंग से भर्ती कर्मचारियों के सामाजिक व आर्थिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिया है। मंडल व जिला स्तर पर भी समितियों का गठन होगा। एजेंसियों का चयन जेम पोर्टल के माध्यम से न्यूनतम तीन वर्षों के लिए किया जाएगा। इस समय कार्यरत कार्मिकों की सेवाएं बाधित नहीं होगी और सीएम के निर्देशानुसार उन्हें नए चयन में वरीयता दी जाएगी। ईपीएफ, ईएसआइ तथा बैंकों से प्राप्त होने वाले समस्त लाभ के साथ ही इन कर्मचारियों के बैंक खाते में प्रत्येक माह की पांच तारीख तक उनकी पारिश्रमिक उपलब्ध होगी। निगम को रेगुलेटर (नियामक) की भूमिका में रखा जाएगा जो एजेंसियों की कार्यप्रणाली की निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर ब्लैकलिस्टिंग, डिबार, अर्थदंड लगाने के साथ ही वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि नियमित पदों के विरुद्ध कोई भी आउटसोर्सिंग सेवा नहीं ली जाए। चयन के बाद कोई भी कार्मिक तब तक सेवा से मुक्त न किया जाए, जब तक संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी की संस्तुति इसके लिए न हो। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) एसपी गोयल, सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव अमित घोष के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कैबिनेट में अन्य फैसले भी  कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लेते हुए योगी सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले नए ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है. करीब 49.96 किलोमीटर लंबा छह लेन का यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा. इसका निर्माण ईपीसी मॉडल पर होगा, जिस पर राज्य सरकार करीब ₹4775 करोड़ खर्च करेगी. परियोजना के फायदे: – लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर जैसे शहरों के बीच यात्रा होगी और तेज – राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक का दबाव होगा कम – लॉजिस्टिक्स और उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ – यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

उत्तर प्रदेश में अब नक्शा पास कराने की झंझट खत्म, घर के साथ आसानी से खोलिए दुकान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी निर्माण को लेकर बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब अगर आप मकान बना रहे हैं और उसके साथ दुकान भी खोलना चाहते हैं, तो नक्शा पास कराने की झंझट नहीं होगी। साथ ही छोटे भूखंडों पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराना अब अनिवार्य नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के शहरी इलाकों के लिए नई भवन निर्माण उपविधियां और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत अब बड़े शहरों में 24 मीटर और छोटे शहरों में 18 मीटर चौड़ी सड़कों पर आवासीय भवनों के साथ दुकानें बनाने की छूट दी जाएगी। मकान में ही बना सकेंगे दुकान नई व्यवस्था के तहत अब विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने के लिए लंबी प्रक्रियाओं और पैसों की वसूली पर भी लगाम लगाने की कोशिश की गई है. सरकार ने 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक प्लॉट पर नक्शा पास कराने की बाध्यता खत्म कर दी है. इन भूखंडों पर लोग सिर्फ विकास प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन कराकर निर्माण करा सकेंगे. यूपी सरकार ने पुराने नियमों को बदलते हुए ‘उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025’ लागू करने का फैसला किया है. अब बड़ी आबादी वाले शहरों में 24 मीटर और कम आबादी वाले शहरों में 18 मीटर चौड़ी सड़क पर मकान के साथ दुकान बनाने की अनुमति होगी. बिल्डिंग बनाने का नियम भी आसान सरकार ने बिल्डिंग बनाने के नियम भी आसान कर दिए हैं. 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर ऊंची इमारतें बनाने पर अब कोई एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो की सीमा नहीं होगी. वहीं, छोटे प्लॉट्स के लिए भी एफएआर बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा ग्रीन रेटेड भवनों को अतिरिक्त एफएआर का फायदा दिया जाएगा. अब 18 मीटर चौड़ी सड़कों पर शॉपिंग मॉल बनाने की भी इजाजत दी गई है. वहीं, 3000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंड पर ही अस्पताल और शॉपिंग मॉल बन सकेंगे. छोटे भूखंडों पर डॉक्टर्स, आर्किटेक्ट्स, वकीलों जैसे प्रोफेशनल्स को अपने घर का 25 फीसदी हिस्सा दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी, जिसके लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं होगी. पार्किंग के लिए नई व्यवस्था पार्किंग को लेकर भी नई व्यवस्था की गई है. 4000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर अलग से पार्किंग ब्लॉक बनाना होगा, पोडियम और मेकेनाइज्ड ट्रिपल स्टैक पार्किंग की भी अनुमति दी गई है. इसके अलावा अस्पतालों में एंबुलेंस पार्किंग और स्कूलों में बस पार्किंग और पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन बनाने के भी नए प्रावधान किए गए हैं. सरकार का दावा है कि इन बदलावों से शहरी विकास को नई रफ्तार मिलेगी और आम लोगों को राहत भी. सरकार ने नक्शा पास कराने की बाध्यता भी काफी हद तक खत्म कर दी है। अब 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों पर बिना नक्शा पास कराए निर्माण किया जा सकेगा। केवल विकास प्राधिकरण में पंजीकरण कराना जरूरी होगा। इससे आम लोगों को न केवल राहत मिलेगी बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जी वसूली पर भी लगाम लगेगी। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में ले-आउट पहले से स्वीकृत है, वहां 500 वर्ग मीटर के आवासीय और 200 वर्ग मीटर के व्यावसायिक भूखंडों के लिए नक्शा ऑनलाइन दाखिल करने के बाद उसे “ट्रस्ट बेस्ड अप्रूवल” माना जाएगा। यानी संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी पर नक्शा स्वतः स्वीकृत माना जाएगा, जिससे प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से शहरों में मिश्रित भूमि उपयोग (मल्टी यूज जोन) को बढ़ावा मिलेगा। आम नागरिक अब सरल तरीके से घर और व्यवसाय एक साथ शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम शहरी विकास को गति देगा और छोटे निवेशकों को भी प्रोत्साहित करेगा।