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शिक्षक भर्ती विवाद सुप्रीम कोर्ट में, अभ्यर्थियों का सवाल: कब मिलेगा हक?

लखनऊ  एक दिन पूर्व प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास का घेराव किये जाने के बाद 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को यानी आज (19 अगस्त) उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में करते हुए प्रदर्शनकारियों को इको गाडर्न भेज दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि 69000 शिक्षक भर्ती में व्यापक स्तर पर अनियमितता हुई है। इससे आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी नौकरी पाने से वंचित हो गए। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी सरकार की लापरवाही, सुप्रीम कोर्ट में फंसा मामला सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके पक्ष में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से फैसला आने के बाद भी सरकार की लापरवाही के कारण उसका पालन नहीं हो सका और अब यह मामला उच्चतम न्यायालय में है। अभ्यर्थियों का कहना था कि उनकी मजबूत पैरवी की मांग के बावजूद सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी पक्ष रखने से पीछे हट रही है। अभ्यर्थियों ने बताया कि कोर्ट में 20 से अधिक तारीख लगी लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अमरेंद्र पटेल ने कहा- 2018 भर्ती में आरक्षित वर्ग के साथ व्यापक अन्याय धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। अभ्यर्थियों की याचिका पर 13 अगस्त 2024 को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया और नियमों का पालन करते हुए 3 महीने के अंदर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। पटेल ने कहा कि उन्होंने 2 सितंबर को भी केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था तब उन्होंने तुरंत न्याय किए जाने की बात कही थी और हम अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी। लेकिन उनकी बात को भी अधिकारियों ने नहीं माना अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। 

हनी ट्रैप में फंसी महिला, मुरादाबाद में यूपी पुलिस सिपाही समेत 3 लोगों को हिरासत में लिया गया

मुरादाबाद  उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने हनी ट्रैप गैंग का पर्दाफाश किया है। इस गैंग में शामिल लोगों में से एक यूपी पुलिस का सिपाही, एक महिला और उसका साथी शामिल हैं। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि चौथा आरोपी फरार है जिसकी तलाश जारी है। क्या है मामला? पुलिस के मुताबिक, यह गैंग पहले लोगों को जाल में फंसाता था, फिर महिला के साथ आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था। इसी तरह का मामला संभल जिले के रहने वाले एक युवक के साथ हुआ। पीड़ित युवक ने बताया कि गैंग ने महिला के जरिए उसे फंसाया, फिर उसकी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड की गई। इसके बाद गैंग ने धमकी देना शुरू कर दिया कि अगर पैसे नहीं दिए तो वीडियो को वायरल कर देंगे या फर्जी रेप केस में फंसा देंगे। ₹35,000 वसूल चुके थे, मांगे थे और 5 लाख ब्लैकमेलिंग के दौरान आरोपियों ने पीड़ित से अब तक ₹35,000 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए थे। इसके बाद वे 5 लाख रुपए की और डिमांड कर रहे थे और लगातार धमकियां दे रहे थे। तीन गिरफ्तार, एक फरार पीड़ित की शिकायत के बाद कटघर थाना पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों के नाम हैं रिजवान — यूपी पुलिस का कांस्टेबल, जो यूपी-112 सेवा में तैनात था। फैजल — आरोपी का साथी। एक महिला — जो गैंग का मुख्य मोहरा थी, लोगों को फंसाने के लिए इस्तेमाल होती थी। चौथा आरोपी फरार है, जिसे पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।   पुलिस ने क्या कहा? एसपी सिटी मुरादाबाद कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें एक सिस्टम के अंदर का आदमी यानी पुलिसकर्मी भी शामिल था। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और अब इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है।  

बारिश ने बदला मौसम, नोएडा में सुहानी राहत

नोएडा  नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मंगलवार की सुबह से ही झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे मौसम सुहावना हो गया है। बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिली है। सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी हुई थी और देखते ही देखते कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई। अचानक मौसम में आए इस बदलाव से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, बारिश के कारण नोएडा के सेक्टर-18, सेक्टर-62, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, परी चौक और दादरी रोड जैसे इलाकों में सड़कों पर पानी भरने की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, हल्की ट्रैफिक दिक्कतों के बावजूद लोग मौसम का खूब आनंद ले रहे हैं। पार्कों और खुले मैदानों में बच्चे बारिश का लुत्फ उठाते नजर आए। वहीं दफ्तर जाने वाले कई लोगों को थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा, क्योंकि अचानक हुई बारिश में कई लोग इसमें फंस गए। मौसम विभाग ने पहले ही इस हफ्ते एनसीआर और आसपास के इलाकों में बारिश की संभावना जताई थी। विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा और बीच-बीच में हल्की से तेज बारिश जारी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश से जहां किसानों को फायदा मिलेगा, वहीं लगातार बनी हुई उमस से भी निजात मिलेगी। लोगों का कहना है कि बीते कई दिनों से गर्मी और नमी के चलते हालत खराब हो गई थी। घरों के अंदर भी पंखे और कूलर बेअसर साबित हो रहे थे। लेकिन मंगलवार को हुई झमाझम बारिश ने पूरे माहौल को बदल दिया। मौसम ठंडा हो गया और हवा में ताजगी का अहसास होने लगा। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही बना रहेगा।  

टोल प्लाजा पर सैनिक की पिटाई महंगी पड़ी, 20 लाख जुर्माना ठोका गया, लाइसेंस भी गया

मेरठ मेरठ जिले में ड्यूटी पर जा रहे सेना के एक जवान से टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने कथित तौर पर मारपीट कर दी। यह घटना रविवार को सरूरपुर इलाके के भूनी टोल प्लाजा पर उस वक्त हुई, जब गोटका गांव के निवासी कपिल छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौट रहे थे।टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार थी और जल्दी निकलने को लेकर कपिल की टोलकर्मियों से कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर टोलकर्मियों ने कपिल से मारपीट शुरू कर दी। इस मारपीट के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सैकड़ों लोगों ने टोल प्लाजा पर हंगामा करना शुरू कर दिया, तोड़फोड़ और नारेबाजी कर दी। अब इस मामले में टोल का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया गया है।  लोगों ने किया जमकर हंगामा  बता दें कि इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। मामले में सैकड़ों लोगों ने सोमवार को टोल प्लाजा पर हंगामा करना शुरू कर दिया, तोड़फोड़ और नारेबाजी कर दी। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों शांत कराने की कोशिश की। लेकिन, गांव वाले मानने को भी तैयार नहीं थे। हंगामा कर रहे ग्रामीण टोल वसूली एजेंसी को बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान के साथ इस तरह मारपीट होना बेहद शर्मनाक है। टोल प्लाजा पर 20 लाख रुपए का जुर्माना  आरोप है कि टोलकर्मियों ने जवान का आईडी कार्ड छीन लिया और लाठी-डंडों से उसकी पिटाई कर दी। जवान घायल हुआ और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज जारी है। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वहीं, मामले में कार्रवाई करते हुए टोल का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही उस पर टोल प्लाजा पर 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा है। 

23 अगस्त को हमीरपुर में सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर पदों के लिए इंटरव्यू

हमीरपुर एसआईएस इंडिया लिमिटेड आरटीए हमीरपुर द्वारा सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर के 70 पदों पर भर्ती के लिए 23 अगस्त को सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक जिला रोजगार कार्यालय हमीरपुर में साक्षात्कार लिए जाएंगे। जिला रोजगार अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि इन पदों के लिए 19 वर्ष से 40 वर्ष तक के पुरुष उम्मीदवार भर्ती किए जाएंगे। दसवीं फेल या दसवीं पास अथवा इससे अधिक शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवार, जिनकी लंबाई कम से कम 168 सेंटीमीटर और वजन 54 से 95 किलोग्राम के बीच हो, इन पदों के लिए पात्र हैं। चयनित उम्मीदवारों को मौके पर ही ऑफर लैटर प्रदान किए जाएंगे तथा उन्हें 17,500 रुपये से लेकर 22 हजार रुपये तक मासिक वेतन एवं अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।   जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि अगर कोई युवा उपरोक्त योग्यता रखता है और उसका नाम किसी भी रोजगार कार्यालय में पंजीकृत है तो वह अपने मूल प्रमाण पत्रों तथा हिमाचली प्रमाण पत्र के साथ साक्षात्कार में भाग ले सकता है। भर्ती के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय के दूरभाष नंबर 01972-222318 या कंपनी के मोबाइल नंबर 85580-62252 पर भी संपर्क किया जा सकता है। 

योगी सरकार का डिजिटल अभियान: एआई के जरिए लागू होंगी कल्याण योजनाएं

लखनऊ  योगी सरकार ने समाज कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और गड़बड़ी-मुक्त बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की शक्ति का उपयोग करने की तैयारी में है। समाज कल्याण विभाग वृद्धावस्था पेंशन, पारिवारिक लाभ, छात्रवृत्ति और सामूहिक विवाह जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की निगरानी को तकनीकी रूप से सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य न केवल योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, तेज और जवाबदेह बनाना भी है। योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितताओं से निपटने के लिए समाज कल्याण विभाग एआई-आधारित निगरानी तंत्र को अपनाने पर विचार कर रहा है। पिछले दिनों समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की मौजूदगी में 'एआई का समाज कल्याण की योजनाओं में उपयोग' विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। इस तकनीक के माध्यम से डाटा सत्यापन, लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं के कार्यान्वयन में सटीकता सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हकदारों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचेगा। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, वृद्धा पेंशन जैसी योजनाओं में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए पहले ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग को मजबूत किया गया है। छात्रवृत्ति योजना में विद्यार्थियों को बार-बार पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा, क्योंकि विभाग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन नंबर की व्यवस्था लागू की है। यह नई प्रणाली न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि पात्रों को बिना किसी रुकावट के योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करेगी। एआई के उपयोग से इस प्रक्रिया में और अधिक सटीकता आएगी, जिससे फर्जी आवेदनों पर लगाम लगेगी और पात्रों को त्वरित लाभ मिलेगा। यही नहीं, डाटा विश्लेषण के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वास्तविक लाभार्थी ही योजना का लाभ उठा सकें। एआई-आधारित सत्यापन प्रणाली से आवेदनों की जांच तेजी से होगी और फर्जी आवेदनों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। योगी सरकार की इस पहल से समाज कल्याण विभाग की योजनाएं डिजिटल युग में एक नया मुकाम हासिल करेंगी। पेपरलेस कार्यप्रणाली को अपनाने से न केवल कागजी कार्रवाई कम होगी, बल्कि योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आएगी। एआई तकनीक के उपयोग से डाटा प्रबंधन, लाभार्थी सत्यापन और योजना निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुगम होंगी, बल्कि जनता का विश्वास भी सरकार पर बढ़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। एआई-आधारित निगरानी तंत्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। समाज कल्याण विभाग जल्द ही इसकी विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप देगा।

ड्यूटी से नदारद डॉक्टरों पर सख्ती, 13 पर गिरी गाज, 20 अगस्त आखिरी मौका

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बिना किसी सूचना के लगातार गैरहाजिर रहने व पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही व अनुशासनहीनता बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस बाबत लखनऊ के सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने ऐसे डॉक्टरों को नोटिस जारी करते हुए 20 अगस्त को समिति के समक्ष स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राजधानी के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन संविदा पर डॉक्टर और कर्मचारी तैनात हैं। इन डॉक्टरों की तैनाती आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर की गई है। इनमें 11 चिकित्सक और दो कर्मचारियों पर अनुपस्थित रहने और अभद्रता करने के आरोप लगे हैं। जिसकी जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई है। जांच के दौरान आरोप सिद्ध होने पर इनकी बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। 13 डॉक्टर-कर्मचारी गायब, नोटिस जारी कर 20 अगस्त तक तलब फिलहाल, जिन डॉक्टरों को नोटिस जारी की गई है उनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर दसौली की डॉ. शीतल सोनकर (एमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर आदर्श नगर के डॉ. अभय नारापन यादव (एमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर अमराईगांव के डॉ. अभिषेक सिंह (एमओ), पीएचसी तोप दरवाजा डॉ. सुभाष प्रसाद (एमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर कल्लन खेड़ा की डॉ. कीर्ति राय (एमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर चौपटिया के डॉ. मोहसिन रजा (एमओ), लोकबंधु अस्पताल की डॉ. नीलम गंगवार (ईएमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर कटरा विजनबेग के डॉ. मुस्तकुल आफरीन कुरैशी (एमओ), पीएचसी निलमथा की डॉ. शिल्पी गुप्ता (एमओ), आयुष्मान आरोग्य मंदिर मुबारकपुर के डॉ. देवांश सिंह (एमओ), जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय की डाटा इन्ट्री आपरेटर सरिता कुमारी, सीएचसी माल में तैनात विवेक नवल मिश्रा (बीसीपीएम), केजीएमयू में तैनात डॉ. जिगनेश मिश्रा (ईएमओ) शामिल हैं। पहले भी 4 डॉक्टर बर्खास्त, कार्रवाई का सिलसिला जारी गौरतलब है कि बिना सूचना के ड्यूटी से लगातार गैरहाजिर चल रहे 4 डॉक्टर्स को अभी बीते पहली अगस्त को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर बर्खास्त किया गया था। इनमें स्वास्थ्य विभाग के 3 डॉक्टर सहित कन्नौज मेडिकल कॉलेज में हड्डी रोग विभाग के सहायक आचार्य भी शामिल हैं। 

जेल से बाहर आने के बाद पति ने पत्नी की हत्या, चाकू से किया गला रेतने का प्रयास

ग़ाज़ियाबाद  उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में लोनी के अंकुर बिहार थाना क्षेत्र में सोमवार रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां रहने वाले सुमित गुप्ता ने घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी कविता गुप्ता (30) की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। दो महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था आरोपी बता दें कि सुमित गुप्ता का विवाह करीब दो साल पहले राम पार्क एक्सटेंशन की रहने वाली कविता गुप्ता से हुआ था। विवाह के कुछ ही महीनों बाद सुमित को हरियाणा में गोली मारने के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। करीब दो वर्ष तक जेल में रहने के बाद वह दो महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था। बाहर आने के बाद सुमित ऑटो चलाकर गुजर-बसर करने लगा। अवैध संबंधों का शक जताकर आए दिन होता था झगड़ा  परिजनों और पड़ोसियों का कहना है कि जेल से आने के बाद से ही सुमित पत्नी पर अवैध संबंधों का शक जताकर आए दिन झगड़ा करता था। सोमवार शाम भी इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में सुमित ने घर की रसोई से चाकू उठाया और पत्नी का गला काट दिया। कविता की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जहां वह खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना पाकर एसीपी ज्ञान प्रकाश राय समेत पुलिस बल मौके पर पहुंचा। आरोपी सुमित गिरफ्तार पुलिस ने आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है। SHO अंकुर बिहार ने बताया कि मृतका के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।  

साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम

विश्व में हो रहे डिजिटल खतरे को कम कर सकता है साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट  साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम  सेमिनार में सीएम योगी द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना हुई  योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ अपनाया गया कड़ा रुख, साइबर अपराध में आई कमी लखनऊ  साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि पूरे विश्व में डिजिटल खतरे का लगातार सामना कर रहा है। ऐसे में हमे साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इसके लिए विश्व के विभिन्न देशों से टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बहुत महत्व रखता है। यह मंथन यूपीएसआईएफएस द्वारा आयोजित डिजिटल ऑडिट, साइबर इंश्योरेंस, सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे विभिन्न पहलुओं को सराहा गया।  साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में मजबूत कैरियर की संभावनाएं यूपीएसआईएफएस के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने बताया कि योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए भारत के डीपीडीपी अधिनियम और जीडीपीआर जैसी नीतियों की जानकारी दी। साथ ही टीमवर्क और निरंतर शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सेमिनार में साइबर सुरक्षा के लिए लगातार शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक स्पष्टता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ कैरियर की संभावना है, बशर्ते सही कौशल, कानूनी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन प्रयासों को और भी सशक्त बनाया गया है, जो भारतीय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना जरूरी सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यूएसए के पवन शर्मा ने कहा कि डिजिटल ऑडिट किसी संगठन के जोखिम को समझने के लिए एक नींव का काम करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऑडिट के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उसे लागू करने की क्षमता आज के समय में साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। साइबर इंश्योरेंस के लिए ऑडिट रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और उसे सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। सिस्को के प्रतिनिधि ने यह बताया कि अब पारंपरिक वार्षिक ऑडिट की बजाय संगठन लगातार, जोखिम-आधारित मूल्यांकन कर रहे हैं, जो वास्तविक समय के मापदंडों और अनुपालन ढांचे से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमेशन और साइबर जोखिम मॉडलिंग जैसे कौशल अब करियर की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जेड-स्केलर के प्रतिनिधि ने कंपनियों में आंतरिक अपस्किलिंग के महत्व को बताया और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता को प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र जैसे कि CompTIA Security+ और CISSP की सिफारिश की। इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से युवाओं को अपने करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यूपीएसआईएफएस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार राय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना आवश्यक है। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे महत्वपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया कि लगातार मूल्यांकन से ही सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के मद्देनज़र वैश्विक दृष्टिकोण की अहमियत को उजागर किया।      

सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा

न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित कर रहे डिजिटल साक्ष्य सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा  बोले एक्सपर्ट, न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम, यह तब और बढ़ जाती है जब कोई विटनेस नहीं होता  सीएम योगी के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में तैयार किया जा रहा आवश्यक ढांचा   लखनऊ  न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका बहुत अहम होती है। यह भूमिका तब और बढ़ जाती है जब डिजिटल साक्ष्य के आलावा कोई विटनेस नहीं होता है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी कसाब के मामले में इंटरनेट ट्रांस्क्रिप्ट्स का उपयोग दोषसिद्धि में काफी महत्वपूर्ण था। वर्तमान डिजिटल साक्ष्य न केवल न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये बातें सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपीएसआईएफएस के डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में कही।   डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया गया सेमिनार में जस्टिस सिंह ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में न्यायपालिका को तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत किया जा रहा है और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को और भी सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, ताकि न्यायिक कार्यवाही तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। यह सेमिनार इसका प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सुधारों में अपने कदम तेजी से बढ़ा रहा है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने डिजिटल साक्ष्य को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह सभी डेटा होते हैं, जो डिजिटल रूप में जन्म और एक जगह एकत्रित होते हैं। उन्होंने इसे बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि अब यह लगभग हर जांच का अभिन्न हिस्सा बन गया है। चाहे मामला चोरी, लूट या साइबर अपराध का हो। मेरा मानना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अभियोजन की ताकत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार से दोषसिद्धि में मदद करते हैं। गवाहों के बयान में वीडियो कांफ्रेंसिंग वैध तरीका बना जस्टिस सिंह ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)के नये नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अधिनियम डिजिटल साक्ष्य की स्वीकृति को आसान बनाता है, जिसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दर्ज मौखिक बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC)की धारा 273 का उदाहरण देते हुए बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग अब एक वैध तरीका बन गया है, जिसके द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे स्कैन किए गए पीडीएफ, सीसीटीवी फुटेज) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, एसएमएस, सर्वर लॉग्स) दो अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि डिवाइस नियमित रूप से इस्तेमाल में हो, डेटा सामान्य रूप से दर्ज किया गया हो और डिवाइस की कार्यशीलता सही हो।