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यूपी में 1900 किलोमीटर से अधिक हुआ एक्सप्रेसवे नेटवर्क

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। कभी पिछड़ेपन और विकास की धीमी रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाला यूपी आज एक्सप्रेसवे स्टेट के रूप में नई पहचान बना चुका है। गत 9 वर्षों में यूपी में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क 1900 किलोमीटर से अधिक हो गया है। यह आर्थिक बदलाव की नई कहानी को दर्शा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। गाजीपुर से दिल्ली तक का सफर अब लगभग 10 घंटे में सिमट गया है। मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे ने यात्रा समय को लगभग आधा कर दिया है। एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे औद्योगिक पार्क व क्लस्टर योगी सरकार ने खुद को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक विकास का मजबूत मॉडल तैयार किया है। सरकार सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के ट्रिपल-एस मॉडल के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे विभिन्न औद्योगिक पार्क और क्लस्टर विकसित कर रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे, जिससे लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आज डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रीढ़ बन चुका है। झांसी और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना को भी इन एक्सप्रेसवे का बड़ा लाभ मिला है। कन्नौज का इत्र, कानपुर का चर्म उद्योग और पूर्वांचल के हस्तशिल्प अब तेज़ परिवहन व्यवस्था के जरिए राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। गांव से शहर तक पहुंचा विकास का लाभ योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि एक्सप्रेसवे का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। संपर्क मार्गों और ग्रामीण सड़कों के जरिए छोटे कस्बों और गांवों को भी इससे जोड़ा गया है। किसान अब अपने कृषि और दुग्ध उत्पाद कम समय में शहरों तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद करीब 36 लाख करोड़ रुपये हो गया है। लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव यूपी को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।

महिला एवं बाल सुरक्षा पर योगी सरकार का फोकस ,त्वरित कार्रवाई से टले बाल विवाह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती और प्रशासनिक सक्रियता का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। औरैया जिले में प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई से दो बहनों का बाल विवाह समय रहते रुकवाया गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ दो बेटियों के जीवन और शिक्षा को सुरक्षित किया, बल्कि समाज में कानून के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी संदेश दिया। यह मामला औरैया जिले के थाना ऐरवाकटरा क्षेत्र के एक गांव का है। जहां संरक्षण अधिकारी रीना चौहान को 1098 हेल्पलाइन के जरिए सूचना मिली कि दो नाबालिगों का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच में सामने आई नाबालिगों की उम्र इस दौरान पता चला कि एक बहन की उम्र अभिलेखों में 18 वर्ष दर्ज है, लेकिन जिस लड़के से उसका विवाह तय था, उसकी उम्र मात्र 17 वर्ष 4 माह पाई गई। वहीं दूसरी की उम्र केवल 14 वर्ष 11 दिन निकली। इस प्रकार दोनों विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अवैध पाए गए। रेस्क्यू टीम ने परिजनों को कानून की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होना अनिवार्य है।  शिक्षा और सुरक्षा योगी सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि बाल विवाह, महिला उत्पीड़न और बाल श्रम जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। इसी का परिणाम है कि प्रशासनिक टीमें संवेदनशील मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर रही हैं। बाल विवाह रोकने की ऐसी घटनाएं समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत हैं। इससे न केवल बेटियों को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और भविष्य को भी मजबूती मिलती है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में तत्काल की जा रही कार्रवाई: निदेशक सी. इंदुमती महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलते ही औरैया जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। जांच में उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम पाई गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत निरंतर महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, इसके अलावा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ समय- समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। किसी भी सूचना पर प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयां तत्काल कार्रवाई कर रहीं हैं। हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना ही नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

बरेली जिले में आयुष्मान मरीजों के इलाज पर 682 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

लखनऊ योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में अब तक 50 लाख 40 हजार 937 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने कुल 91 लाख 87 हजार 418 बार इलाज कराया है। इन मरीजों के इलाज के लिए 15 हजार 140 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जिनमें से अब तक 13 हजार 315 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। बरेली में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने लिया योजना का लाभ साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत सबसे अधिक भुगतान बरेली जिले के लाभार्थियों के इलाज पर किया गया है। बरेली जिले में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने योजना का लाभ लिया। यहां 3 लाख 72 हजार 319 उपचार क्लेम दर्ज किए गए। इसके लिए 682 करोड़ 99 लाख 77 हजार 778 रुपये का क्लेम किया गया, जबकि 620 करोड़ 81 लाख 64 हजार 359 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही बरेली पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। गोरखपुर दूसरे स्थान पर है। यहां 1 लाख 71 हजार 492 लाभार्थियों ने योजना के तहत इलाज कराया और कुल 3 लाख 59 हजार 529 क्लेम दर्ज किए गए। इन क्लेमों के लिए 591 करोड़ 25 लाख 5 हजार 428 रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई, जबकि 539 करोड़ 56 लाख 47 हजार 285 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं मुरादाबाद तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 1 लाख 29 हजार 1 लाभार्थियों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराया। यहां 2 लाख 57 हजार 480 क्लेम दर्ज हुए, जिनके लिए 519 करोड़ 60 लाख 94 हजार 301 रुपये का क्लेम किया गया और 459 करोड़ 91 लाख 43 हजार 815 रुपये का भुगतान किया गया। बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ के लोगों ने भी प्रमुखता से लिया योजना के लाभ साचीज की सीईओ ने बताया कि बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ और कानपुर नगर के आयुष्मान कार्ड धारकों ने योजना का प्रमुखता से लाभ उठाया। इसमें बिजनौर में 486 करोड़ रुपये से अधिक, सहारनपुर में 463 करोड़ रुपये से अधिक और वाराणसी में 449 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए। वहीं लखनऊ और कानपुर नगर जैसे बड़े शहरों में भी करोड़ों रुपये का भुगतान कर मरीजों को राहत दी गई। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश के गरीबों को बड़े अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, मिर्जापुर में जिम जिहाद के अभियुक्तों के खिलाफ की गई गैंगस्टर की कार्रवाई

मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालो के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्यवाही कर रही है। मिर्ज़ापुर में जिम के माध्यम से अवैध धर्मांतरण करने के 10 अभियुक्तों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की गई है। मिर्ज़ापुर के एएसपी  नीतेश सिंह ने बताया कि सरकार के निर्देश पर  जनपद में अपराध की रोकथाम एवं अपराधियों की धरपकड़ तथा पुरस्कार घोषित/इनामियाँ/गो-तस्करी तथा धर्म परिवर्तन में संलिप्त अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं उनके विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने हेतु जनपद में निर्देश दिए गये हैं ।   इसी क्रम में  थाना कोतवाली देहात में  19 जनवरी 2026 को एक महिला  की  तहरीर पर थाना  कोतवाली देहात में धारा 74/308 (5)/352/351(2) बी0एन0एस0 व 3/5(1) उ0प्र0 धर्म परिवर्तन अधिनियम के अंतर्गत केस दर्ज किया था।   विवेचना के समय साक्ष्य संकलन के आधार पर इसमें  धारा-64(1)/ 61(2)/319(2)/318(4)/338/336(3)/340(2)/238/111 बी0एन0एस0 व 67बी आई0टी0 एक्ट भी जोड़ी गई। आरोपियों की चार्ज शीट 17 अप्रैल में कोर्ट में पेश की गई। इस मामले में विवेचना के बाद पता चला कि गैंग लीडर इमरान खान पुत्र इशरार अहमद द्वारा अपने गैंग के सदस्यों के साथ अपने व अपने साथियों के आर्थिक, भौतिक एंव अनुचित दुनियावी लाभ हेतु हिन्दू लड़कियों को जिम में ट्रेनिंग देने व उन्हे बहला-फुसला कर अपने साजिश में लेकर, उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना, उनका आपत्तिजनक फोटो व विडियो बनाकर ब्लैकमेल करना व जबदस्ती पैसा वसुलना व जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है।   इनके विरूद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही हेतु पर्याप्त आधार मौजूद  होने पर अभियुक्तों के खिलाफ  उ0प्र0 गिरोहबन्द समाज विरोधी क्रियाकलाप(निवारण) अधिनियम पंजीकृत किया गया है । अभियुक्त द्वारा इस प्रकार के अपराध से अर्जित सम्पत्ति को चिह्नित कर गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्तीकरण की भी कार्यवाही करायी जायेगी । सभी अभियुक्त वर्तमान समय में जनपद कारागार मीरजापुर में निरुद्ध है ।

आईआईटी कानपुर के सहयोग से बिठूर के कुम्हार बना रहे नए दौर की मिट्टी की गुल्लकें

लखनऊ/कानपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति और बचत जैसे सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है। इसी क्रम में कानपुर के बिठूर की पारंपरिक माटीकला को नया स्वरूप देने की पहल शुरू हुई है, जहां अब मिट्टी की गुल्लकें आधुनिक डिजाइन और आकर्षक रंगों के साथ तैयार की जा रही हैं। इस अभियान में जिला प्रशासन के साथ आईआईटी कानपुर का भी सहयोग मिल रहा है।  भावनात्मक अभियान के रूप में विकसित करने की पहल कभी दादी-नानी के दिए सिक्कों की रखवाली करने वाली मिट्टी की गुल्लक अब नए दौर में बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। जिला प्रशासन ने इसे केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि संस्कार, परिवार और स्थानीय कला से जुड़े भावनात्मक अभियान के रूप में विकसित करने की पहल की है। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि गुल्लक बच्चों में बचत की आदत विकसित करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बढ़ते अनावश्यक खर्चों के बीच बच्चों को आर्थिक अनुशासन और बचत का संस्कार देना समय की आवश्यकता है। डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष कार्य मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने बताया कि योगी सरकार की मंशा के अनुरूप स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह प्रयास किया जा रहा है। बिठूर की माटीकला को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष कार्य हो रहा है ताकि कारीगरों को बेहतर आय और व्यापक पहचान मिल सके। कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप किया जा रहा प्रशिक्षित आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट के तहत कारीगरों को तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। परियोजना की कॉर्डिनेटर रीता सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पाद निर्माण नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और नई पीढ़ी के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना भी है। वहीं प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर शिखा तिवारी ने बताया कि कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है। सिरामिक डिजाइनर शैली संगल बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कार्टून, पशु-पक्षी और पारंपरिक आकृतियों वाली आकर्षक गुल्लकें डिजाइन कर रही हैं। सरकारी कार्यक्रमों में उपहार के रूप में भी किया जाएगा प्रोत्साहित बिठूर के कुम्हार राम रतन ने बताया कि पहले मिट्टी की गुल्लकों की मांग लगातार घट रही थी, लेकिन नए डिजाइन आने के बाद लोगों की रुचि फिर बढ़ने लगी है। इससे स्थानीय कारीगरों में नई उम्मीद जगी है। जिलाधिकारी ने बताया कि इन गुल्लकों को सरकारी कार्यक्रमों में स्मृति-चिह्न और उपहार के रूप में भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और बिठूर की पारंपरिक माटीकला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।

21 विभागों में विभिन्न पदों पर चयनित 932 अभ्यर्थियों को दिया गया नियुक्ति पत्र

लखनऊ योगी सरकार के मिशन रोजगार के अंतर्गत सोमवार को 21 विभागों में विभिन्न पदों पर 932 युवा शामिल हुए। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2024 के अंतर्गत चयनित युवाओं को सोमवार को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया। लोकभवन में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर नवचयनितों के चेहरे खिल उठे। सीएम योगी ने नवचयनित युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से संपन्न करने के लिए उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग को बधाई दी। चयनित अभ्यर्थियों की हौसला अफजाई करते हुए सीएम योगी ने कहा कि जो भी अधिकारी व कर्मचारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में यूपी के अंदर काम कर लेगा, देश-दुनिया में उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जो यूपी में सफल है, वह हर जगह सफल है, क्योंकि 25 करोड़ आबादी का यूपी अलग-अलग परिस्थितियों में काम करता है और सम-विषम परिस्थितियों में परिणाम भी देता है। आप सभी को ऐसे राज्य में कार्य करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।  आपकी सफलता प्रदेश की सफलता का आधार बनना चाहिए सीएम ने चयनित युवाओं से कहा कि यह आपके, माता-पिता, अभिभावक, पारिवारिक सदस्यों, मित्रों के लिए खुशी का पल है। आपकी सफलता प्रदेश की सफलता का आधार बनना चाहिए। जिस पारदर्शी तरीके से आपका चयन हुआ है,शासन भी सर्विस कालखंड के दौरान उसी पारदर्शी व शुचितापूर्ण कार्यपद्धति की अपेक्षा करता है। जो कार्य आज करना है, उसे आज ही करने की आदत डालनी पड़ेगी। पहले 10 वर्ष में जो मेहनत कर पाएंगे, वह आपके आगे के 30-35 वर्ष के सेवाकाल व उसके बाद के कार्यकाल के लिए भी मजबूत नींव होगी। परिश्रम व्यक्ति को सफलता की ऊंचाई तक पहुंचाता है। आपका परिश्रम ईमानदार व्यवस्था के साथ जुड़ता है तो परिणाम आता है। यही परिणाम आगे भी परिश्रम का आधार बनेगा तो वह जीवन भर सुखद अनुभूति का अहसास कराएगा।  सिफारिश और लेन-देन से चयनित व्यक्ति प्रगति नहीं, दुर्गति कराएगा मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की मंशा, व्यवस्था और कार्ययोजना क्या है। उसे इंप्लीमेंट करने के लिए भर्ती आयोग व बोर्ड की कार्यपद्धति उदाहरण बनती है। अगर भर्ती प्रक्रिया ही पारदर्शी व शुचितापूर्ण न हो तो जिन लोगों का चयन होगा, उनसे ईमानदारी से परिणाम देने, प्रदेश की गति को प्रगति व समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान देने की बात दिवास्वप्न ही होगी। गति को प्रगति की ओर वही ले जा सकता है, जिसका ईमानदारी से चयन हो और जिसने परिश्रम-मेहनत से स्थान प्राप्त किया है। सिफारिश और पैसे के लेन-देन से चयनित व्यक्ति प्रगति नहीं, दुर्गति कराएगा। 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में यही होता था।  आपने देखी है परीक्षा व परिणाम की शुचितापूर्ण व्यवस्था  सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर ईश्वर की असीम कृपा है। यह एमएसएमई का दुनिया का बेहतरीन आधार रखने वाला प्रदेश है, लेकिन सबसे बड़ी आबादी का युवा राज्य बीमारू व पहचान के लिए मोहताज हो गया था। उत्तर प्रदेश का युवा बाहर जाता था तो पहचान छिपाता था, लेकिन आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। जब प्रदेश इस व्यवस्था से निकला तो आपकी आयु 10-15 वर्ष रही होगी। आप मां-बाप, भाई-बहन की अंगुली पकड़कर स्कूल जाते होंगे। आप सौभाग्यशाली हैं कि आपको नकल विहीन परीक्षा देने का अवसर प्राप्त हुआ। आपने स्कूली शिक्षा, विश्वविद्यालय, प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम के साथ ही चयन प्रक्रिया की शुचितापूर्ण व्यवस्था भी देखी है, लेकिन 2017 से पहले यह संभव नहीं था।  अब आप ट्रेनिंग में जाएंगे, फिर राज्य के विकास के लिए कार्य करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर सीमित लोगों को ही बुलाकर नियुक्ति पत्र दिया गया। सभी 932 अधिकारी सीधे नियुक्ति पत्र पाने के अधिकारी हैं, लेकिन समय की सीमा है। हमने विभागीय मंत्रियों को प्रतिनिधि के रूप में रखा। यह वह टीम है, जो पीएम के विजन को अपने विभागों में इंप्लीमेंट करने के लिए कार्यक्रमों को लागू करती है। अब आपको मशीनरी के रूप में कार्य करना है। अभी आप ट्रेनिंग में जाएंगे, फिर राज्य के विकास के लिए कार्य करेंगे।  यदि प्रतिभा ही पलायन कर जाती तो विकास कौन कराता सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष में 9 लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। यह नौजवान नियुक्ति पत्र प्राप्त नहीं कर पाते, यदि अच्छी सरकार नहीं होती। लोकतंत्र में अच्छी सरकार का यही लाभ है। 9 लाख नौजवानों और युवा शक्ति को अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी-रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ ही हमने उनकी प्रतिभा का लाभ नहीं लिया होता तो यूपी जैसे राज्य को बीमारू राज्य की श्रेणी से उभारकर भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में प्रस्तुत नहीं कर पाते, क्योंकि जब प्रतिभा ही पलायन कर जाती और युवाओं को प्रदेश में कार्य का अवसर नहीं मिलता तो विकास कौन कराता।  राजनीतिक विजन को धरातल पर उतारने का कार्य करता है तंत्र  सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ हमारे योजना बनाने से ही परिणाम नहीं आएगा। शासन योजनाएं बनाता है, लेकिन योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने का जो तंत्र होता है, वह प्रशासन व अलग-अलग विभागों का होता है। अलग-अलग विभागों को अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य करना है, परिणाम वहां से आते हैं। परिणाम को लाने की जवाबदेही-जिम्मेदारी इसी तंत्र पर होती है, जो राजनीतिक विजन को धरातल पर उतारने का कार्य करता है। 2017 के पहले यह सपना था, इसलिए वह प्रदेश के युवाओं के सपने को धराशायी रखता था। यहां का किसान आत्महत्या, कारीगर हताश-निराश होकर घर बैठकर जहां-तहां हाथ पैर मारने को मजबूर होता था। नागरिकों के सामने पहचान का संकट था।  9 साल की यात्रा में चुनौतियां भी थीं, लेकिन हमने उनका मुकाबला किया मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 साल की शानदार यात्रा में भी चुनौतियां थीं, लेकिन हमने उनका सफलतापूर्वक मुकाबला किया और टीम भावना से परिणाम भी लाया। 9 वर्ष में यूपी की अर्थव्यवस्था व प्रति व्यक्ति आय को तिगुना करने में सफलता हासिल की। यूपी को अब कोई बीमारू नहीं कह सकता। यूपी देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर भारत के विकास में अग्रिम भूमिका के साथ खुद को खड़ा कर रहा है। हमने यूपी को बॉटम-3 से टॉप-3 राज्यों … Read more

सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) 196 व वाणिज्य कर अधिकारी पद पर 142 को मिला नियुक्ति पत्र 72 युवा बने खंड विकास अधिकारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सोमवार को बड़े पैमाने पर नियुक्ति पत्र वितरित किए गये। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2024 के अंतर्गत सोमवार को 21 विभागों में विभिन्न पदों पर चयनित 932 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिले। इसमें सर्वाधिक (258 युवा) नायब तहसीलदार बने। 196 सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) तथा 142 युवाओं को वाणिज्य कर अधिकारी पद पर नियुक्ति मिली। 72 युवा खंड विकास अधिकारी बने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लोकभवन में नियुक्ति पत्र पाकर नवचयनितों के चेहरे खिल उठे। यूपी में हुई नई नियुक्ति 👉 उप जिलाधिकारी- 37 👉 पुलिस उपाधीक्षक- 17  👉 सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर)- 196  👉 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी- 16  👉 कोषाधिकारी/लेखाधिकारी- 22 👉 जिला कमांडेंट होमगार्ड्स- 02 👉 कारागार अधीक्षक- 01 👉 सहायक आयुक्त (उद्योग)- 18  👉 कार्य अधिकारी- 23 👉 खंड विकास अधिकारी- 72 👉 जिला समाज कल्याण अधिकारी- 09 👉 जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी- 01 👉 जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी- 05 👉 वाणिज्य कर अधिकारी- 142 👉 जिला खाद्य विपणन अधिकारी-02 👉 नायब तहसीलदार- 258  👉 उप कारापाल- 60 👉 जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी- 04 👉 उप निबंधक- 40 👉 उप्र कृषि सेवा समूह ‘ख’ सेक्शन-सी, श्रेणी-2, सांख्यिकी अधिकारी-03 👉 सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान श्रेणी 2 – 01 👉 व्यवस्थापक, राज्य संपत्ति विभाग-02 👉 सहायक निदेशक, उद्योग (हथकरघा)-01 सीएम योगी के हाथों इन्हें मिला नियुक्ति पत्र  👉 नेहा पांचाल (डिप्टी कलेक्टर)- नई दिल्ली 👉 आकृति शुक्ला (पुलिस उपाधीक्षक)- प्रयागराज  👉 निधि नागर (सहायक आयुक्त, राज्यकर)- गौतमबुद्ध नगर 👉 निहारिका राय (राज्य कर अधिकारी)- शाहजहांपुर 👉 महेश विक्रम श्रीवास्तव (खंड विकास अधिकारी) मीरजापुर 👉 श्रुति शुक्ला (जिला कमांडेंट होमगार्ड) बलरामपुर  👉 पार्थ सारथी- (उपनिबंधक)- बिजनौर  👉 आशीष सिंह- (जिला खाद्य विपणन अधिकारी) लखनऊ 👉 अविनाश सागर- (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी)- अयोध्या 👉 प्रिया शर्मा- (जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी)- बाराबंकी 👉 राहुल पांडेय- (जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी)- बलिया  👉 गरिमा सिंह- (जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी)- कानपुर नगर 👉 गगन आनंद वर्मा- (लेखाधिकारी/कोषाधिकारी)- गोरखपुर  👉 प्रियंका नायक- (जिला समाज कल्याण अधिकारी)-गोरखपुर 👉 विकास चंद्र पांडेय- (सहायक आयुक्त उद्योग)- सोनभद्र 👉 साहिबा बानो- (नायब तहसीलदार)- रायबरेली 👉 प्रियंका- (उप्र कृषि सेवा समूह ‘ख’) अधिकारी-मेरठ 👉 नीलेश कुमार सिंह- (सहायक नियंत्रक विधिक माप)- बस्ती 👉 सत्यम सिंह यादव- (उप कारापाल)- कौशांबी  👉 अंकित कुमार- (कार्य अधिकारी, पंचायती राज)- अमरोहा  👉 पूजा मिश्रा- (कार्य अधिकारी, पंचायती राज)- मैनपुरी [20:43, 19/5/2026] +91 97924 14403: योगी सरकार की बड़ी पहल, कौशल प्रशिक्षण में दिव्यांगजनों को 5% आरक्षण, एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को प्राथमिकता हर प्रशिक्षण बैच में 5% सीटें दिव्यांगजनों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण में मिलेगी विशेष प्राथमिकता दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन, सभी जिलों में डीपीएमयू  को दिए गए निर्देश लखनऊ: 18 मई। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा समाज के वंचित एवं विशेष जरूरत वाले वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश में संचालित सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की गई हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया  कि भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किए जाने के दृष्टिगत उन्हें कौशल प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक एवं पात्र है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कौशल विकास केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान लौटाने का सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण एवं रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में समान अवसर एवं नई पहचान मिल सके। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का विवरण तैयार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

आईजीआरएस बना जनता की आवाज, योगी सरकार में शिकायतों का तेज निस्तारण

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां जमीनी स्तर पर असर दिखा रहीं हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल आम जनता की समस्याओं के समाधान का मजबूत माध्यम बन चुका है। डिजिटल तकनीक के जरिए शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण होने से लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर बढ़ा है। खास बात यह है कि बुजुर्ग लाभार्थी घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर उसकी प्रगति की जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं। घर बैठे दर्ज हो रहीं शिकायतें आईजीआरएस पोर्टल के जरिए लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर उसकी प्रगति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम हुए हैं और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन शिकायत प्रणाली के जरिए लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। योगी सरकार की यह व्यवस्था सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे आम जनता को सीधे राहत मिल रही है। वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति से जुड़े मामलों को मिल रही प्राथमिकता समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जा है। इससे बुजुर्गों और छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए यह योजनाएं बड़ी राहत साबित हो रही हैं। विभाग की कोशिश है कि पात्र लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी या देरी का सामना न करना पड़े।  14568 हेल्पलाइन बनी सहारा  समाज कल्याण विभाग से जुड़ी किसी भी समस्या, शिकायत या योजना संबंधी जानकारी के लिए नागरिक 14568 समाज कल्याण हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति, पारिवारिक लाभ योजना समेत विभिन्न योजनाओं से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का समाधान कराया जा सकता है।

सीएम की दो टूक- सड़कों पर अव्यवस्था व अराजकता किसी कीमत पर स्वीकार नहीं, प्यार से माने तो ठीक नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में यह राज्य कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था, जबकि आज यूपी की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निवेश डेस्टिनेशन के रूप में है। कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और सकारात्मक शासन की बदौलत प्रदेश बॉटम-2 से निकलकर टॉप-2 राज्यों में पहुंचा है। राज्य में अराजकता व अव्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस है। राह चलती बेटी से छेड़खानी करने वाले की रावण व दुर्योधन जैसी दुर्गति होगी। सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर उन्होंने दो टूक कहा कि नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। मौजूदा दौर में पत्रकारिता पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सनसनी व फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं, जबकि सकारात्मक और संवेदनशील पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत करती है। सीएम योगी सोमवार को ‘अमर उजाला’ के 78वें स्थापना दिवस पर आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की लेखनी ने आजादी को नई दिशा दी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पत्रकारिता को आंदोलन का आधार बनाया। कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को देश की स्वाधीनता और सामाजिक न्याय का आधार बनाने का कार्य किया। 1975 में जब लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास हुआ, तब मूर्धन्य संपादकों व रिपोर्टरों ने इसे नाकाम कर दिया। लोकतंत्र में केवल विधायिका, न्यायपालिका या कार्यपालिका ही नहीं, मीडिया की भी सशक्त भूमिका है। लेकिन,  डीप-फेक या फेक-न्यूज का खतरा हर जगह मंडरा रहा है। फेक-न्यूज पर कठघरे में खड़े होना पड़ता है सीएम ने कहा कि रिपोर्टिंग को सनसनी पैदा करने का आधार बनाने की बजाय संवेदनशील बनाया जाता तो बहुत सारी जगहों पर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं खड़ी होती। सनसनी फैलाने वाली न्यूज से रिपोर्टर, समाचार पत्र या मीडिया ग्रुप को तात्कालिक लाभ हो सकता है, लेकिन जब वही न्यूज फेक निकलती है, तो कठघरे में भी खड़ा होना पड़ता है। हम लोग उसके लिए अलर्ट भी रहते हैं, क्योंकि किसी गलत खबर से एक बार आग लग गई तो फिर उसे बुझाने में समय लगता है। हम नहीं चाहते कि यूपी में फिर से दंगे-कर्फ्यू का माहौल बने। यूपी में किसी को अराजकता फैलाने की छूट नहीं है। लोग पूछते हैं कि यूपी में सचमुच सड़कों पर नमाज नहीं होती? मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग पूछते हैं कि आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कि कतई नहीं होती है। आप जाकर देख लो, नहीं होती है। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा? क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का, आवागमन बाधित करने का? जहां इसका स्थल है, वहां जाकर पढ़ो। लोगों ने मुझसे कहा, कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है? हमने कहा, शिफ्ट में कर लो। घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या नियंत्रित कर लो। और, सामर्थ्य नहीं है तो क्यों संख्या बढ़ाए जा रहे? आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो नियम-कानून मानना शुरू करें। नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए। हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं। सामान्य नागरिक, बीमार व्यक्ति, कामगार, कर्मचारी सभी सड़कों पर चलते हैं, हम सड़क बाधित नहीं करने देंगे। प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। संवाद से मानेंगे तो ठीक नहीं तो संघर्ष से भी देख लें। बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया, देख ली सरकार की ताकत। सरकार हर सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है। ट्रेड यूनियन नेता सांसद, मंत्री बन गए, श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया सीएम ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र का व्यक्ति, अलग-अलग क्षेत्र में कार्य करता है, लेकिन कभी-कभी उसके स्वर ट्रेड यूनियन जैसे हो जाते हैं। ट्रेड यूनियन की प्रवृत्ति कभी सकारात्मक नहीं रही। इसने सत्यानाश ही किया है। ये चंदा वसूली और ‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम’ की तर्ज पर पूरी व्यवस्था को खोखला बनाने का काम करती हैं। ट्रेड यूनियन के नेता कोई काम नहीं करते, कंधे पर झोला लटकाए घूम-घूम कर डिस्टरबेंस फैलाते हैं। चंदा वसूली से अपना घर भरते हैं और श्रमिकों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं। कानपुर इसका स्पष्ट उदाहरण है। ट्रेड यूनियन के नेता सांसद व मंत्री बन गए, लेकिन श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया। कभी शिक्षक, चिकित्सक, व्यापारी भरते थे गुंडा टैक्स सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष पहले मैं नहीं समझ पाया कि मुझे यूपी क्यों भेजा जा रहा है क्योंकि मैं एक सांसद था। मैंने तो एमएलए का चुनाव भी नहीं लड़ा था। लेकिन मैं यूपी की समस्या जानता था, यहां हर दूसरे दिन दंगे होते हैं। हर जिले में सत्ता का समानांतर माफिया सत्ता संचालित होती है। शिक्षक, चिकित्सक या  व्यापारी, सब गुंडा टैक्स देने के लिए मजबूर थे। बेटी सुरक्षित नहीं थी। न इंफ्रास्ट्रक्चर था। सड़कों पर गड्ढे या अंधेरा दिखाई देते ही यात्री मान लेते थे कि यूपी में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बनाने के बाद हमने कानून का राज स्थापित किया। आज राह चलती बेटी के साथ छेड़खानी करने वाले की दुर्गति रावण व दुर्योधन जैसी होना तय है। विकास की महागाथा रची उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जितने भी एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें से 60 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में बने हैं। इंटरस्टेट कनेक्टिविटी अब चार लेन की हो गई है। सभी सीमाओं पर सरकार ने भारत-नेपाल मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-बिहार मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-झारखंड मैत्री द्वार आदि बनाए हैं। राज्य में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, पांच पर कार्य चल रहा है और पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो चुके हैं। भारत के सबसे बड़े नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की डोमेस्टिक सेवाएं 15 जून से शुरू हो रही हैं। देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे हाल ही में पीएम मोदी जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया है। हमने प्रदेश को बीमारू राज्यों की श्रेणी में निकाल कर रेवेन्यू सरप्लास स्टेट बनाया है। अर्थव्यवस्था को तीन … Read more

दिल्ली रोड चौड़ीकरण के लिए 70 भवनों का अधिग्रहण, 56 करोड़ मुआवजा जारी

मेरठ शहर में दिल्ली रोड पर जगदीश मंडप से ट्रांसपोर्ट नगर के गेट तक रैपिड रेल काॅरिडोर के कारण जाम की समस्या बनी है। इसके समाधान के लिए सड़क को दोनों ओर तीन-तीन मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन ने 70 भवनों और भूखंडों से भूमि का अधिग्रहण किया है। भूमि मालिकों को मुआवजा भुगतान के साथ ही अधिग्रहण का यह कार्य अब पूरा कर लिया गया है। जिसके बाद लोगों ने खुद ही भवनों के उस हिस्से को हटाना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन जल्द अधिग्रहीत की गई भूमि को एनसीआरटीसी को सौंप देगा। दिल्ली रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए ध्वस्त किया निर्माण नमो भारत (Namo Bharat) और मेरठ मेट्रो (Meerut Metro) रेल काॅरिडोर दिल्ली रोड पर जगदीश मंडप के पास भूमिगत हो रहा है। सड़क के बीचोबीच कारिडोर निर्माण के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण यहां जाम की समस्या बन गई है। जिससे शहर की जनता के साथ साथ यहां से गुजरने वाले लोग लंबे समय से परेशान हैं। इसके समाधान के लिए एनसीआरटीसी ने सड़क के दोनों ओर नालों को तीन-तीन मीटर पीछे स्थानांतरित करके सड़क का चौड़ीकरण करने की तैयारी की है। इस चौड़ीकरण के लिए दोनो और 70 दुकानों, भवनों और भूखंडों से जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जिला प्रशासन ने अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करके भूमि मालिकों के खातों में मुआवजा राशि भेज दी है। 67 भूमि मालिकों को मिले 56 करोड़ तीन भूखंडों पर विवाद सामने आया है। इनमें से ली जाने वाली भूमि की राशि को जिला प्रशासन कोर्ट में जमा कराएगा। अन्य 67 भूमि मालिकों को 56 करोड़ से ज्यादा राशि का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान मिलने के बाद भूमि मालिकों ने इस हिस्से में हुए निर्माण को हटाना भी शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि निर्माण हटने के बाद इस जमीन को अब एनसीआरटीसी को सौंप दिया जाएगा, जिसपर वह निर्माण शुरू करेगी। छूटे खसरों से होगी सीधी खरीद बीएसएनएल कार्यालय वाली साइड में चार खसरों की भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सका है। एनसीआरटीसी के प्रस्ताव में यह खसरा संख्या छूट गए थे। अब इन खसरों की जमीन की सीधी खरीद करने का दावा किया जा रहा है। चौड़ीकरण को लेकर खास तथ्य 800 मीटर लंबाई में दोनों ओर चौड़ी होगी सड़क 03 मीटर दोनों ओर होना है सड़क का चौड़ीकरण 70 दुकानों और भवनों की जमीन का हुआ अधिग्रहण 56 करोड़ रुपये बंट गया मुआवजा इन्होंने कहा…     दिल्ली रोड के जाम के समाधान के लिए भूमि अधिग्रहण कर लिया गया है। इस भूमि को जल्द एनसीआरटीसी को सौंपकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूर्ण कराया जाएगा।     -डा. वीके सिंह, जिलाधिकारी।