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योग और नृत्य का अद्भुत संगम: सारंगढ़ में बच्चों ने संगीत की धुन पर योग मुद्राओं से मोहा मन

​रायपुर. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सारंगढ़ के कृषि उपज मंडी परिसर में जिला स्तरीय वृहद योग कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस वर्ष "योगा 365 डेज एम्ब्रेस योगा" और "बढ़ते उम्र के स्वास्थ्य के लिए योग" की थीम पर आधारित इस शिविर में प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गरिमा के साथ भगवान श्री धनवंतरि और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस आयोजन में प्रशासनिक और राजनीतिक अमला एक मंच पर नजर आया। मुख्य अतिथि टंकराम वर्मा के साथ कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व विधायक केराबाई मनहर, बरमकेला जनपद अध्यक्ष सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पत्रकारों और स्कूली बच्चों समेत लगभग 1,000 नागरिकों ने एक साथ बैठकर योग की विभिन्न विधाओं व प्राणायाम का अभ्यास किया। ​पीएम मोदी के संदेश का वाचन और हस्ताक्षर अभियान कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ राष्ट्र' बनाने के संदेश का वाचन किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बधाई देते हुए जीवन में नियमित योग अपनाने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर योग के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें मंत्री, कलेक्टर, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने अपने हस्ताक्षर किए। ​योग और नृत्य का अद्भुत संगम ​इस जिला स्तरीय योग दिवस का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा नृत्य शैली में किया गया योग प्रदर्शन रहा। मुख्य सत्र के बाद, योग शिक्षिका (व्यायाम शिक्षिका) ममता साहू के मार्गदर्शन में सिम्मी योगा एंड फिटनेस सेंटर, योगाचार्य सुभाष पटेल की टीम और सरिया की योगिनी अकादमी के बच्चों ने 'श्रीरामचंद्र' सहित अन्य भक्ति गीतों पर सामूहिक योग मुद्राओं का विहंगम प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, साक्षी पटेल ने एकल गीत पर योग की अत्यंत कठिन मुद्राओं को सहजता से प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि और उपस्थित जनसमुदाय की खूब वाहवाही बटोरी। अनुशासित भागीदारी और प्रेरक पल आयोजन को सफल बनाने में भारत स्काउट, जूनियर रेडक्रॉस और एनएसएस (NSS) के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्कूल और कॉलेज के इन छात्र-छात्राओं की अनुशासित और ऊर्जावान भागीदारी ने योग के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया। कार्यक्रम में एक भावुक और प्रेरक पल तब देखने को मिला जब मंच से हजार से अधिक नागरिकों को योग का अभ्यास करा रहीं मुख्य योग शिक्षिका ममता साहू के माता-पिता और रिश्तेदार भी इस शिविर में शामिल हुए। अपनी बेटी के इस बेहतरीन नेतृत्व और राज्य स्तर पर मिल रहे सम्मान को देखकर उनके माता-पिता भावविभोर हो उठे। यह अनूठा आयोजन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य और एकजुटता का एक अमूल्य संदेश दे गया।

झिझक से सम्मान तक का सफर, गधहाभाटा अब कहलाएगा सोनपुर

कवर्धा. कबीरधाम जिले का एक ऐसा गांव, जहां के लोग वर्षों तक अपने ही गांव का नाम बताने में झिझक महसूस करते थे, लोगों को उपहास का सामना करना पड़ता था, क्योंकि गांव का नाम गधहाभाटा था। अब गांव का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर सोनपुर करने से ग्रामीणों की यह पीड़ा खत्म हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इसका राजपत्र में प्रकाशन भी किया जा चुका है। इसी खुशी के मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ग्राम सोनपुर पहुंचे और ग्रामीणों को राजपत्र की प्रति सौंपकर नई पहचान के लिए बधाई दी। इस दौरान उन्होंने गांव के विकास के लिए 7 लाख 50 हजार रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की घोषणा भी की। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सिर्फ गांव का नाम ही नहीं बदला, बल्कि अब सोनपुर की तस्वीर भी बदल रही है। गांव में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने गांव का नाम परिवर्तन होने पर उपमुख्यमंत्री का आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गधहाभाटा नाम होने के कारण उन्हें कई जगह शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती थी। लोग मजाक उड़ाते थे, जिसका असर सामाजिक रिश्तों और बच्चों के विवाह संबंधों पर भी पड़ता था। अब गांव का नाम सोनपुर होने से ग्रामीण गर्व के साथ अपनी पहचान बता सकेंगे।

​मानसून की दस्तक से पहले अबूझमाड़ में मुकम्मल इंतजाम

​रायपुर  बस्तर के दुर्गम और धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ इलाके में भारी बारिश के दौरान भी ग्रामीणों को राशन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान पहुंचविहीन होने वाले क्षेत्रों के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की है। जिले की सभी 39 पहुंचविहीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों में तीन महीने का खाद्यान्न (राशन) एडवांस में भंडारित कर दिया गया है। राशन की बोरियों का हो रहा है भौतिक सत्यापन कलेक्टर  ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के मौसम में खाद्यान्न वितरण किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस पूरी व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन केवल राशन भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि तैनात किए गए नोडल अधिकारी खुद नदी-नाले पार कर इन सुदूर केंद्रों में पहुंच रहे हैं और राशन की बोरियों की गिनती (भौतिक सत्यापन) कर रहे हैं। ​ग्राउंड जीरो पर पहुंचे अफसर, व्यवस्थाएं मिलीं चाक-चौबंद   ​ कलेक्टर के निर्देशानुसार, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक व नोडल अधिकारी ने ओरछा विकासखंड के बेहद संवेदनशील और अंदरूनी ग्राम पंचायत हांदावाड़ा के बेड़मापारा राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। अधिकारी ने मौके पर जाकर तीन माह के लिए सुरक्षित रखे गए खाद्यान्न के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। सुरक्षा मानकों और भंडारण व्यवस्था को बारीकी से देखने के बाद वितरण प्रक्रिया की जानकारी ली गई।  दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में राशन का शत प्रतिशत अग्रिम भंडारण     खाद्य विभाग के मुताबिक, जिले की सभी 39 दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में 100 प्रतिशत अग्रिम भंडारण का काम समय से पहले पूरा कर लिया गया है। भंडारण और वितरण व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए जिला स्तर के अधिकारियों की दुकानवार ड्यूटी लगाई गई है, जो लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। भौगोलिक रूप से बेहद कठिन इस क्षेत्र में बारिश के दिनों में कई नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे संपर्क टूट जाता है। इस अग्रिम कदम से अब अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के राशन पहुंचेगा।      ​ प्रशासन की इस मुस्तैदी से अबूझमाड़ के आश्रित गांवों के हजारों राशन कार्डधारियों ने राहत की सांस ली है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भौगोलिक चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों का हक उन तक हर हाल में पहुंचेगा।

नॉन-डीबीटी पेंशनधारियों के आधार व बैंक खातों का हुआ संकलन

​रायपुर  भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। जिले के सुदूर व अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत पीडियाकोट में आयोजित विशेष पेंशन भुगतान शिविर महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुशासन और सामाजिक सुधार का एक जीवंत उदाहरण बन गया। इस अनूठे शिविर ने जहाँ एक ओर वृद्धजनों और जरूरतमंदों के चेहरों पर डिजिटल सुरक्षा की मुस्कान बिखेरी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को एक स्वस्थ और नशामुक्त समाज की नई दिशा भी दिखाई। ​पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम: 'नॉन-डीबीटी' से 'डीबीटी' का सफर      ​ पीडियाकोट में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना था। वनांचल क्षेत्र होने के कारण कई हितग्राही अब भी नॉन- डीबीटी (Non-DBT) श्रेणी में थे, जिन्हें सीधे बैंक खातों में राशि प्राप्त करने में कठिनाई आ रही थी। शिविर में मुस्तैद अधिकारियों और पंचायत कर्मियों ने​ हितग्राहियों के आवश्यक दस्तावेजों का संकलन किया। ​प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के महत्व को सरल भाषा में समझाया। सुरक्षित और त्वरित पेंशन भुगतान के लिए बैंक खातों से क्रेडेंशियल्स को लिंक करने तथा ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूर्ण करने की अनिवार्यता बताई। निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी कराए ​ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपनी निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी का कार्य पूरा कराएं ताकि भविष्य में मिलने वाली पेंशन राशि बिना किसी मध्यस्थ या रुकावट के सीधे उनके खातों में हस्तांतरित हो सके। ​समस्याओं का मौके पर ही समाधान      ​पेंशनधारियों ने इस पहल का स्वागत पूरे उत्साह के साथ किया। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दूरियों की परवाह न करते हुए बड़ी संख्या में बुजुर्ग, दिव्यांग और कल्याणी बहनें शिविर स्थल पर पहुँचे। पंचायत स्तर पर ही प्रशासन को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा। अधिकारियों ने न केवल दस्तावेज जमा किए, बल्कि पेंशन से जुड़ी अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं को सुनकर उनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास किया। साथ ही, राज्य शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। गूंजी नशामुक्ति की शपथ       ​ पीडियाकोट का यह शिविर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल साक्षरता के इस मंच को 'नशा मुक्त भारत अभियान' के साथ जोड़कर एक बेहतरीन सामाजिक संदेश दिया गया। ​उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे के कारण टूटने वाले परिवारों, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर एक भावुक और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला, जब शिविर में मौजूद सभी पेंशनर्स, युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हाथ उठाकर नशामुक्ति की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं को व्यसनों से दूर रखेंगे और अपने समाज को भी इस सामाजिक बुराई से मुक्त कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।  शिविर आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव एक मिसाल बना पीडियाकोट ​दूरस्थ अंचलों में इस तरह के शिविरों का आयोजन यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो विकास और जागरूकता की किरण राज्य के अंतिम कोने तक आसानी से पहुँच सकती है। पीडियाकोट का यह सफल आयोजन न केवल पेंशनधारियों के डिजिटल सशक्तिकरण का जरिया बना, बल्कि इसने एक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव भी रख दी है।

राज्यपाल रमेन डेका से आज रोटरी क्लब ग्रेटर रायपुर के सदस्यों ने लोक भवन में सौजन्य मुलाकात एवं चर्चा की। राज्यपाल ने उन्हें समाज हित से जुडे़ विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

रायपुर चर्चा के दौरान राज्यपाल ने रोटरी क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक संगठित और सेवा भावना से कार्य करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास और जनकल्याण के लिए सभी संस्थाओं और नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि रायपुर शहर में पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट और टाइल्स का घेरा बना दिया गया है, जिससे उनकी जड़ों तक पर्याप्त पानी और हवा नहीं पहुंच पाती। उन्होंने रोटेरियन से ऐसे घेरों को हटाने और पेड़ों को पुनर्जीवन देने के लिए सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राज्य को संभावित गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए अभी से जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने रोटरी क्लब से इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने का आग्रह किया। राज्यपाल ने महिलाओं में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रोटेरियन इस दिशा में जनजागरूकता अभियान चलाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और विकास में भी रोटरी क्लब के सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की संस्कृति छत्तीसगढ़ की मूल पहचान और धरोहर है, जिसे संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने रोटेरियन से विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य करने का आग्रह किया।  राज्यपाल ने कहा कि रोटरी क्लब सामूहिक रूप से तो उत्कृष्ट कार्य करते है, लेकिन प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत स्तर पर भी ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनमें लेने की अपेक्षा देने की भावना हो। इससे जीवन में आत्मिक संतोष और आनंद प्राप्त होता है तथा समाज का भी कल्याण होता है। राज्यपाल ने कहा कि समाज में अनेक ऐसे अनसंग हीरो और हीरोइन हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों को सामने लाकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में रोटरी क्लब महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में वहां के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा अच्छे कार्य किए जा रहे है। इसकी जानकारी देने और इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने में रोटेरियन सहयोग कर सकते हैं। बैठक में रोटरी क्लब के अध्यक्ष  रितेश जिंदल ने राज्यपाल  डेका का स्वागत किया। क्लब की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।  इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, रोटरी क्लब ग्रेटर रायपुर के सचिव  प्रकाश अग्रवाल, क्लब के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

​अंधाधुंध रासायनिक खाद से बढ़ रहा कैंसर का खतरा

रायपुर  किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करने तथा टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को सारंगढ़ के कृषि उपज मंडी प्रांगण में 'प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला' तथा 'खेती बचाओ अभियान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। साथ ही उन्होंने ‘गौ ग्राम जनजागरण वाहन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ​उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन पैसा जा रहा अस्पताल: राजस्व मंत्री   ​ राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले लोग नाममात्र का रासायनिक खाद उपयोग करते थे और खुद से तैयार गोबर व केंचुआ खाद खेतों में डालते थे। आज उत्पादन बढ़ाने की होड़ में प्रति एकड़ उत्पादन 8-9 क्विंटल से बढ़कर 35 से 40 क्विंटल तक पहुंच गया है, लेकिन हम अनाज के साथ जहर (रसायन और कीटनाशक) भी खा रहे हैं। यही कारण है कि आज अस्पतालों और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हम जो पैसा मेहनत करके कमा रहे हैं, वह घूम-फिरकर अस्पतालों में जा रहा है। ​पंजाब की 'कैंसर ट्रेन' का दिया हवाला      मंत्री  वर्मा ने  कहा कि पंजाब में फसल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, लेकिन आज देश में सबसे ज्यादा कैंसर रोगी भी वहीं हैं। वहाँ से एक ट्रेन चलती है जिसे लोग 'कैंसर ट्रेन' के नाम से जानते हैं। आज छत्तीसगढ़ में भी ऐसे लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं जो किसी प्रकार का नशा या तंबाकू का सेवन नहीं करते। इसका मुख्य कारण भोजन के माध्यम से शरीर में पहुँचने वाला केमिकल है। इसका एकमात्र समाधान जैविक खेती है। मोदी की गारंटी और किसान कल्याण को समर्पित सरकार      ​ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विजन को साझा करते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि किसानों की तरक्की से ही छत्तीसगढ़ की तरक्की संभव है क्योंकि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि सरकार 'मोदी की गारंटी' को पूरा करते हुए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल के मान से कर रही है, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन भूमिहीन कृषि मजदूरों के पास खुद की जमीन नहीं है, उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर कल्याण योजना' लागू की गई है। इसके तहत प्रदेश के लगभग 5 लाख पंजीकृत भूमिहीन मजदूरों के खातों में 10 हज़ार रुपए की राशि ट्रांसफर की जा रही है।  किसानों को जैविक खाद की किट भी वितरित       कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने हितग्राहियों को राशन कार्ड और किसानों को जैविक खाद की किट भी वितरित की। ​कार्यशाला में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने मिट्टी की जल धारण क्षमता और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। महिलाओं के स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए जैविक कीटनाशकों और खादों की प्रदर्शनी का अतिथियों ने अवलोकन किया। किसानों को वर्मीकंपोस्ट, वर्मीवॉश, नाडेप खाद के साथ-साथ हरी खाद (जैसे ढैंचा, सनई एवं मूंग) के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।       ​ इस अवसर पर गणमान्य जनप्रतिनिधि,कलेक्टर,सहित बड़ी संख्या में कृषक, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल  रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका से आज छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने लोक भवन में सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वन अधिकारियों के पास कानून, संसाधन और अधिकार उपलब्ध हैं, जिनका प्रभावी उपयोग कर वे पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप भूकंप, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता है। इसलिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और  प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का आधार है। राज्यपाल ने रेत के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आधारभूत संरचना निर्माण के लिए आवश्यक खनिज है। उन्होंने अधिकारियों से इस दिशा में शोध और नवाचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे उपाय विकसित किए जाएं जिससे नदियों में जल प्रवाह सतत बना रहे, उनकी क्षमता बढ़े, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और आवश्यक मात्रा में रेत भी प्राप्त होती रहे। राज्यपाल ने वन अधिकारियों से कहा कि वे जंगलों के प्रति लगाव उत्पन्न करें, इससे उन्हें जंगलों को समझने में आसानी होगी और वे अपने  दायित्वों का निर्वाह अच्छे से कर सकेंगे। राज्यपाल ने  वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट का घेरा बना दिया जाता है, जिससे उनके विकास में बाधा आती है तथा वर्षा जल का भू-जल स्तर में समुचित पुनर्भरण नहीं हो पाता। ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वन अधिकारियों का कार्य  कार्यालय में बैठना नहीं है  बल्कि जंगलों में भ्रमण कर  वनवासियों की समस्याओं को समझना और वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नवाचारपूर्ण उपाय करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे जीवन में कोई ऐसा भी काम करें जो सेवा से जुड़ा हुआ हो चाहे वह पर्यावरण सुरक्षा, स्वच्छता, मानव सेवा जैसे कार्य हो सकते हैं। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो? कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ। ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है। बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं। डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया। बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही। डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला। 260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षता पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’ पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। “साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

नेउरगाँव खुर्द में ग्रामीणों ने पेश की आपसी एकता की मिसाल- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने भारत माता की प्रतिमा एवं भव्य शहीद स्मारक का किया लोकार्पण उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम नेउरगाँव खुर्द में भारत माता की प्रतिमा एवं भव्य शहीद स्मारक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों की एकजुटता, देशभक्ति और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना की सराहना करते हुए कहा कि नेउरगाँव खुर्द ने पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। ’गाँव के हर घर से हुआ सहयोग’  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि शहीदों के त्याग और बलिदान को स्मरणीय बनाए रखने के लिए ग्रामीणों द्वारा किया गया यह प्रयास समाज में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक समरसता का अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि शहीद स्मारक परिसर के निर्माण की शुरुआत उनकी विधायक निधि से प्रदत्त 3.50 लाख रुपए की राशि से हुई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने इसे केवल एक निर्माण कार्य न मानकर अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक बना दिया। इसके लिए गाँव के हर घर से कुछ ना कुछ सहयोग प्रदान किया गया और ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और जनभागीदारी से स्वयं चंदा एकत्र कर लगभग 10 लाख रुपए की लागत से शहीद स्मारक का निर्माण कराया।   ’नई पीढ़ी को मिलेगी देश के वीर शहीदों के बलिदान से प्रेरणा’ उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि इस कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गाँव का सामूहिक प्रयास सामाजिक एकता, सद्भाव और राष्ट्रभक्ति की उत्कृष्ट मिसाल है। ऐसे कार्य नई पीढ़ी को देश के वीर शहीदों के बलिदान से प्रेरणा लेने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों से मुलाकात कर उनसे संवाद भी किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशी राम धुर्वे,  रामकिंकर वर्मा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

मंत्री वर्मा ने की विकास कार्यों की समीक्षा

​रायपुर राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने सारंगढ़ कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में सुशासन तिहार, सीएम हेल्पलाइन के आवेदनों के निपटारे और लोक- कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़मीनी हकीकत परखी। मंत्री   वर्मा ने कहा कि सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिकारी-कर्मचारी का सामूहिक योगदान होता है, इसलिए सभी अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करें। राजस्व मामलों में लाएं तेजी, सीमांकन और नामांतरण को दें प्राथमिकता     ​राजस्व मंत्री  वर्मा ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों से तहसीलवार लंबित राजस्व प्रकरणों जैसे—सीमांकन, खाता विभाजन और फौती नामांतरण की तुलनात्मक प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और राजस्व से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने पिछले वर्षों के स्वीकृत प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अपूर्ण और अप्रारंभ कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और अधिकारियों से इसका कारण पूछा। ​जिला पंचायत सीईओ ने जानकारी दी कि कई मूल हितग्राहियों की मृत्यु हो जाने और उनके वैध नॉमिनी (वारिसदार) न होने के कारण कुछ कार्य अपूर्ण या अप्रारंभ हैं। ​मंत्री  वर्मा ने इस तकनीकी समस्या को जल्द से जल्द दूर कर आवास निर्माण  कार्य को गति देने के निर्देश दिए। जरूरतमंद हितग्राही को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिले        मंत्री  वर्मा ने पीएम ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से जिले की नई स्वीकृत सड़कों और वर्तमान सड़कों के निर्माण व मरम्मत कार्य का ब्यौरा लिया। उन्होंने बारिश के मौसम को देखते हुए सड़कों की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी दुरुस्त रखने की हिदायत दी।उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के अच्छे कर्तव्य निर्वहन और सेवा भाव से ही अंतिम छोर पर बैठे जरूरतमंद हितग्राही को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिल सकता है। काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खाद-बीज का भंडारण व सहकारी समितियों में मांग-आपूर्ति की ली जानकारी      ​ बैठक के दौरान  मंत्री ने जिले के विकास और आम जनता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। जिसमे आयुष्मान कार्ड प्रगति, जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएँ, जीवनदीप समिति के कार्य,जिले में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की उपलब्धता, खरीफ सीजन हेतु किसानों के लिए खाद-बीज का भंडारण व सहकारी समितियों में मांग-आपूर्ति की स्थिति,पेंशन योजनाएं, छात्रावासों की स्थिति, अनुकंपा नियुक्ति के मामले और 'सेवा सेतु' के माध्यम से आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रगति,पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना,जल जीवन मिशन के कार्य आदि शामिल है। इसी तरह डीएमएफ के कार्यों, ई-ऑफिस प्रणाली, रोड सेफ्टी, महतारी वंदन योजना और देश में लागू 'भारतीय न्याय संहिता' के तीन नए कानूनों के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।         बैठक में कलेक्टर मती पद्मिनी भोई साहू, प्रभारी पुलिस अधीक्षक सु निमिषा पाण्डेय सहित जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ​