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1 मई से तेंदूपत्ता संग्रहण का अभियान, 639 फड़ों पर होगी खरीद व्यवस्था

राजनांदगांव. जिले के वन क्षेत्र में तेंदूपत्ता का अधिक से अधिक संग्रहण सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग द्वारा इस वर्ष 639 फड़ की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है। जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित राजनांदगांव द्वारा तेंदूपत्ता का संग्रहण सुनिश्चित किया जाएगा। तेंदूपत्ता का संग्रहण सुनिश्चित करने के लिए कुल 49334 संग्राहकों को जोड़ने की तैयारी की गई है। वन विभाग के अधिकारियों की माने तो 1 में से तेंदूपत्ता की तोड़ाई ड़ाई शुरूकर दी जाएगी। वन मंडल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी पाना बरस, आंधी, डोगर गांव, अर्जुनी, छुरिया चिचोला, बागनदी, डोंगरगढ़ से लगे वन क्षेत्र सहित आसपास के जंगली क्षेत्रों में तेंदूपत्ता का अधिक से अधिक संग्रहण सुनिश्चित करने का कार्य किया जाएगा। जिसकी तैयारियां विभाग द्वारा पूर्ण कर ली गई है। विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 तेंदूपत्ता संग्रहण में प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों की संख्या 50 रखी गई है। लॉट इकाई संख्या – 51 बनाई गई है। संग्रहण केन्द्रों की संख्या (फड़ संख्या) 639 तैयार किए गए हैं। वर्ष 2026 में तेंदूपत्ता संग्रहण लक्ष्य 80800.000 मानक बोरा रखा गया है। वर्ष 2026 में तेंदूपत्ता का संग्रहण दर 5500.00 प्रति मा.बो. शासन द्वारा निर्धारित किया गया है।

निजी परिवहन कर्मियों का प्रदर्शन तेज, Bharatiya Mazdoor Sangh की रैली में Geeta Soni का नेतृत्व; 21 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा

जांजगीर/रायपुर. भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध छत्तीसगढ़ प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के नेतृत्व में रायपुर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में निजी परिवहन कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार वाहन रैली और धरना प्रदर्शन किया। लगभग 300 ऑटोरिक्शा में भारतीय मजदूर संघ के ध्वज के साथ निकली इस रैली ने श्रमिक एकता का सशक्त प्रदर्शन किया। इस आंदोलन की विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम का संचालन महासंघ की अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी गीता सोनी के कुशल नेतृत्व में हुआ। उनके मार्गदर्शन में पूरे आयोजन को व्यवस्थित, शांतिपूर्ण और प्रभावी तरीके से संचालित किया गया, जिससे श्रमिकों की मांगें मजबूती के साथ प्रशासन तक पहुंचीं। गीता सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि निजी परिवहन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान केवल संवाद और संगठित प्रयासों से ही संभव है, और संगठन उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत रहेगा। आंदोलन का नेतृत्व अखिल भारतीय महामंत्री रविशंकर अल्लूरी ने किया, वहीं प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में बीएमएस छत्तीसगढ़ के कार्यकारी अध्यक्ष शंखध्वनि सिंह बनाफर उपस्थित रहे। रैली के पश्चात परिवहन मंत्री, डीआरएम रायपुर, परिवहन आयुक्त एवं प्रदेश परिवहन सचिव के नाम 21 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। इसमें प्रमुख रूप से परिवहन कर्मचारी कल्याण बोर्ड के गठन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और बीमा सुविधाएं उपलब्ध कराने, सभी स्टेशनों पर प्रीपेड ऑटो बूथ एवं पार्किंग की व्यवस्था, ई-वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग प्वाइंट तथा अनधिकृत ओला, उबर और रैपिडो बाइक सेवाओं पर नियंत्रण की मांग शामिल है। कार्यक्रम को सफल बनाने में रायपुर रेलवे स्टेशन प्रीपेड ऑटो संघ के अध्यक्ष राजेश स्वामी, महासचिव दीपक मुदलियार, नारायण दास सोनी, भाटापारा ऑटो चालक संघ से गोविंद मनहरे, शिवकुमार साहू सहित बीएमएस के विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस पूरे आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि गीता सोनी के नेतृत्व में निजी परिवहन कर्मचारियों की आवाज अब और अधिक संगठित, सकारात्मक और प्रभावशाली रूप से सामने आ रही है।

हजारों महिलाओं को सशक्त बनाने वाली Chandrakanti Nage को ‘नारी शक्ति सम्मान’, हुनर से बदल रही हैं जिंदगी

चारामा/कांकेर. न्यू उड़ान जनसेवा फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित ‘आज की नारी: नारी शक्ति सम्मान’ कार्यक्रम में फाउंडेशन की कोऑर्डिनेटर चंद्रकांति नागे को उनके बहुमुखी कौशल और उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके द्वारा किए गए सामाजिक और कौशल विकास कार्यों की एक महत्वपूर्ण पहचान है। कौशल ही बना पहचान का आधार ब्यूटी एवं स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सक्रिय चंद्रकांति नागे सिलाई, ब्यूटी (पार्लर कार्य) सहित कई व्यावसायिक हुनरों में दक्ष हैं। अपने अनुभव और समर्पण के बल पर वे अपने क्लाइंट्स को उच्च गुणवत्ता की सेवाएं प्रदान कर रही हैं और क्षेत्र में एक विश्वसनीय नाम के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। गरिमामयी उपस्थिति में मिला सम्मान इस अवसर पर अभिनेत्री दीपिका चिखलिया एवं कांची सिंह द्वारा, फाउंडेशन के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने उनके कार्यों की सराहना की। हजारों को दिया आत्मनिर्भरता का मार्ग चंद्रकांति नागे ने अपने अनुभव और ज्ञान के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। उनके द्वारा प्रशिक्षित कई युवा आज आत्मनिर्भर बनकर अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर चुके हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। महिलाओं को देती हैं निरंतर प्रेरणा वे लगातार महिलाओं को अपने हुनर को पहचानने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि— “जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो वह अपने साथ पूरे समाज को भी आगे लेकर जाती है।” प्रेरणादायक सफर की मिसाल चंद्रकांति नागे का यह सफर न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर और मेहनत के दम पर जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण प्रयासों की सराहना कर बढ़ाया प्रदेश का मान – मुख्यमंत्री साय

रायपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है। मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में  गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited में कटौती की आहट, मैनपॉवर कॉस्ट बना कारण

भिलाई नगर. महारत्न कम्पनी सेल में इस समय नियमित कार्मिक 49752 व ठेका श्रमिक 68066 हैं। दोनों को मिलाकर कुल मैनपॉवर 117818 है। सेल का मैनपॉवर कास्ट 11.62 प्रतिशत है। इसी को आधार बनाकर सेल की सभी यूनिटों में मैनपॉवर को कम करने कवायद जारी है। छंटनी में कितने की नौकरी जाएगी यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इस समय नियमित कार्मिकों की तुलना में ठेका श्रमिकों की संख्या 18314 ज्यादा है। मैनपॉवर कास्ट कम करने के लिए अब दोनों की संख्या में कटौती करने के लिए सभी यूनिटों में कवायद चल रही है । इस्पात मंत्रालय का मानना है कि निजी स्टील कम्पनियों की तुलना में सेल का मैनपॉवर कास्ट 11.62 प्रतिशत है जो कि बहुत ज्यादा है। इस कास्ट को कम करने अब सेल को मैनपॉवर कम करने कहा गया है। नियमित कार्मिकों को जहां कम्पलसरी और वालंटरी रिटायरमेंट के जरिए कम किया जाएगा वहीं ठेका श्रमिकों की सीधे सीधे छंटनी की जाएगी। बीएसपी में ज्यादा छंटनी होने के आसार आंकड़ों की बात करें तो इस समय बीएसपी में नियमित कार्मिकों की संख्या 12552 है जबकि ठेका श्रमिक 16738 हैं। बीएसपी चूंकि सबसे बड़ी यूनिट है इसलिए यहां नियमित कार्मिकों और ठेका श्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में तुलनात्मक रूप से यहां छंटनी की ज्यादा गुंजाइश है। सेल की अन्य यूनिटों- दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, इस्को में भी आंकड़े बड़े हैं। जहां तक लेबर प्रोडक्टिविटी की बात है तो बीएसपी में यह पिछले माह 879 टन क्रूड स्टील / मैन/ वर्ष था। विगत वित्त वर्ष की औसतन लेबर प्रोडक्टिविटी 774 टन कूड स्टील/ मैन/ वर्ष थी। दुर्गापुर का मैनपॉवर कास्ट सबसे ज्यादा बीएसपी का मैनपॉवर कास्ट 10.90 प्रतिशत, दुर्गापुर का 13.47 प्रतिशत, राउरकेला का 10.08 प्रतिशत, बोकारो का 9.22 प्रतिशत, इस्को का 6.54 प्रतिशत है। इस तरह इस समय सबसे ज्यादा मैनपॉवर कास्ट दुर्गापुर का है। इन यूनिटों के अलावा अन्य यूनिटों को अपना मैनपॉवर कास्ट कम करने कहा जा रहा है। मैनपॉवर कास्ट को ही इस्पात मंत्रालय ने मैनपॉवर में कटौती करने का आधार बनाया है।

भीषण गर्मी का कहर: Rajnandgaon में तापमान 45 डिग्री पहुंचा

राजनांदगांव. तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज होती जा रही है। आज फिर से जिले का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है। गर्मी से राहत पाने के लिए छांव ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन के चलते न केवल तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज होती जा रही है। बल्कि सूरज की किरणें भी पूरी तरह से लोगों को झुलसा रही है। तेज गर्मी पड़ने से राजनांदगांव जिले में लू जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। कर्फ्यू जैसे हालात होने के कारण शहर और जिले की सड़के भी पूरी तरह से सुनसान नजर आ रही है। आसमान से बादल हट जाने के साथ ही फिर से सूरज की किरणें हलाकान कर रही है। दोपहर में चलना भी कठिन हो गया है। तेज गर्मी का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जिले में पढ़ रही भीषण गर्मी के बाद प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट नजर आ रहा है। ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिले में अचानक मौसम में आए परिवर्तन से लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, राजनांदगांव जिले में भी मौसम में फिर से परिवर्तन आ चुका है। आसमान से बादल हट जाने के बाद सूरज की किरणें तरह से धरती पर पड़ रही है। सुबह 8 बजे से लेकर शाम को 5 तक यही स्थिति बनी है। 

रायपुर में संजीवनी हेल्थ कैंप, प्रशासन की तत्परता से बुधरी मड़कम को एम्स रायपुर में मिला निःशुल्क इलाज

रायपुर : संजीवनी बना मेगा सुपर स्पेशलिटी हेल्थ कैंप बुधरी मड़कम को प्रशासन की तत्परता से एम्स रायपुर में मिला नया जीवन आयुष्मान कार्ड से हुआ निःशुल्क ईलाज रायपुर सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के मिचवार निवासी आदिवासी महिला बुधरी मड़काम के लिए मेगा सुपर स्पेशलिटी हेल्थ कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया। गंभीर बीमारी से जूझ रही बुधरी की हालत लगातार बिगड़ रही थी और शुरुआती लक्षणों के आधार पर कैंसर या टीबी जैसी आशंका जताई जा रही थी। लेकिन समय रहते कैंप में हुई जांच ने स्थिति की गंभीरता को पहचान लिया और प्रशासन की तत्परता से उसे सही उपचार की दिशा में तुरंत आगे बढ़ाया गया। मरीज की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. आरके सिंह द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई और बुधरी को तत्काल एम्स रायपुर रेफर कराया गया। यह निर्णय मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ। जिला स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता ने यह सुनिश्चित किया कि दूरस्थ इलाके की यह महिला इलाज के लिए बड़े अस्पताल तक सुरक्षित और समय पर पहुंच सके। करीब एक सप्ताह की जांच के बाद बुधरी को दुर्लभ बीमारी सरकॉइडोसिस होने की पुष्टि हुई और 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 15 दिनों के इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई। सबसे बड़ी राहत यह रही कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पूरा उपचार निःशुल्क हुआ। यह घटना स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के उस संकल्प को भी साकार करती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गंभीर मरीजों को रायपुर ले जाकर बेहतर इलाज दिलाया जाएगा। यह कहानी सुकमा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है, जिसने एक आदिवासी महिला को नया जीवन देकर मानवता और सेवा की मिसाल कायम की है। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि सुकमा के दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। मेगा सुपर स्पेशलिटी हेल्थ कैंप के माध्यम से गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें हायर हेल्थ सेंटर रेफर किया जा रहा है। बुधरी मड़कम का सफल इलाज इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि किसी भी जरूरतमंद मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी न हो और उन्हें समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। पूरे उपचार के दौरान आयुष्मान कार्ड विभाग के जिला कार्यक्रम समन्वयक श्री अमृतेश सिंह ने मरीज और उसके परिजनों को हर कदम पर सहयोग प्रदान किया। अपॉइंटमेंट से लेकर भर्ती तक, डॉक्टरों से समन्वय और लगातार मार्गदर्शन कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रशासन केवल आदेश देने तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी मरीजों के साथ खड़ा रहता है। भाषा की समस्या भी बड़ी चुनौती थी, क्योंकि परिजन केवल गोंडी भाषा जानते थे, फिर भी समन्वय और मानवीय प्रयासों से एम्स में भर्ती और इलाज पूरी सफलता से संभव हो पाया।

बस्तर मुन्ने कार्यक्रम से कोंडागांव में हर पात्र तक योजनाओं का मिलेगा लाभ

कोंडागांव : बस्तर मुन्ने कार्यक्रम से हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगा योजनाओं का लाभ जनपद पंचायत बड़ेराजपुर में हुई समीक्षा बैठक कोंडागांव प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “बस्तर मुन्ने” कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस अभियान के अंतर्गत संतृप्तता शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य एनसीएईआर सर्वेक्षण में “नियद नेल्लानार” के तहत चिन्हित 31 जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित परिवारों को शत-प्रतिशत लाभ प्रदान करना है। इसी क्रम में जनपद पंचायत बड़ेराजपुर में नोडल अधिकारियों एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम के प्रभावी संचालन एवं व्यक्तिमूलक योजनाओं के शत-प्रतिशत सेच्यूरेशन पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायत, क्लस्टर एवं विकासखण्ड स्तर पर शिविर आयोजित कर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण कार्य जारी है। विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के संभावित लाभार्थियों का चिन्हांकन कर उन्हें त्वरित लाभ प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रथम चरण में ग्राम पंचायतों को योजनावार लक्ष्य, प्रचार-प्रसार सामग्री, पात्रता मापदंड एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही मैदानी अमले को हितग्राहियों की सूची प्रदान की गई है। द्वितीय चरण में ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर सर्वेक्षण के आधार पर पात्रता परीक्षण एवं योजनाओं का लाभ वितरण किया जाएगा। सर्वेक्षण से छूटे परिवारों का भी पंजीयन कर नियमानुसार लाभ प्रदान किया जाएगा। पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) से एक सप्ताह तक ग्राम सभाओं का आयोजन कर तीन प्रमुख सामुदायिक कार्यों का चयन किया जाएगा। अनुमोदित प्रस्तावों के आधार पर आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर शासन को प्रेषित किया जाएगा। तृतीय चरण में ग्राम पंचायत स्तर के लंबित प्रकरणों का क्लस्टर स्तर पर शिविर आयोजित कर निराकरण किया जाएगा। चतुर्थ चरण में क्लस्टर स्तर के लंबित मामलों का विकासखण्ड स्तर पर जिला अधिकारियों की उपस्थिति में समाधान किया जाएगा तथा शिविरों के प्रभाव का मूल्यांकन भी किया जाएगा। पांचवें एवं अंतिम चरण में सभी शिविरों की समीक्षा, प्रभाव का आंकलन एवं थर्ड पार्टी फीडबैक लिया जाएगा, जिससे कार्यक्रम की प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

रायपुर: 50 हजार से ज्यादा परिवारों को मिला ‘अपना घर’, सपना हुआ सच

रायपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 50 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम जन मन योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिसके माध्यम से जिले के हजारों जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिली है।        राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिले ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए 50 हजार 44 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। कुल 781.13 करोड़ रुपये की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और कार्यों में तेजी आई।     क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मस्तूरी विकासखंड 14 हजार 973 आवासों के साथ जिले में शीर्ष पर रहा। इसके बाद बिल्हा में 13 हजार 762, कोटा में 11हजार 205 और तखतपुर में 10 हजार 104 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया। यह आंकड़े न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी साबित करते हैं।        इस सफलता के पीछे ‘नारी शक्ति’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिले में 113 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित कर उन्हें निर्माण कार्य में सक्रिय भागीदारी दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। वहीं 331 महिलाओं को ‘डीलर दीदी’ बनाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता बढ़ी। इसके अलावा 2,231 महिलाओं को शटरिंग सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई और महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित हुए।        प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक जिले ने कुल एक लाख 3 हजार 873 आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले की मजबूत कार्ययोजना, सतत मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का परिणाम है। इस योजना का मानवीय पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ग्राम डारसागर की झांगली बैगा और  ग्राम नेवसा की कैलाशा बाई जैसी हितग्राही, जो वर्षों से कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं, आज पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का प्रतीक है।        कलेक्टर बिलासपुर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ये 50 हजार से अधिक घर केवल ईंट और सीमेंट की संरचनाएं नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की नींव हैं। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि भविष्य में भी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी।

नारायणपुर के सबसे सुदूर ‘लंका’ गांव तक पहुंचा प्रशासन

​रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन में नारायणपुर जिला में विकास और सुशासन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर और दुर्गम छोर पर स्थित लंका गांव में दो दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन कर प्रशासन ने यह सिद्ध कर दिया कि विकास की किरणें अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं।       ​ दुर्गम रास्तों को पार कर ग्रामीणों के द्वार पहुंचा 'सुशासन' ​जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर और इन्द्रावती नदी के किनारे बसा लंका गांव, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था, वहां आजादी के बाद पहली बार जिला स्तरीय प्रशासनिक शिविर का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन की टीम ने नदी-नालों और पहाड़ों के कठिन रास्तों को पार कर ग्रामीणों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उनका समाधान भी किया। सुशासन एक्सप्रेस बनी ग्रामीणों के लिए वरदान इस शिविर में सबसे बड़ा आकर्षण 'सुशासन एक्सप्रेस' रही। वाई-फाई युक्त इस मोबाइल सेवा वाहन ने ग्रामीणों की तकनीकी बाधाओं को दूर कर दिया। इस वाहन के माध्यम से ​तत्काल आधार कार्ड, जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र सहित 27 प्रकार के आवश्यक दस्तावेज मौके पर ही तैयार किए गए। इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने की मजबूरी से मुक्ति मिली। सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक कुल 17,520 आवेदनों का त्वरित निस्तारण कर रिकॉर्ड बनाया गया है। ​शिविर में आवेदनों की झड़ी ​दो दिवसीय शिविर में लंका सहित आसपास के पांच गांवों के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कुल 310 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 242 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। इस शिविर में ​प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 179, मनरेगा जॉब कार्ड के 34, राशन कार्ड के 25 और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित 18 आवेदन प्रमुख रहे। शिविर में ​कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा, "नियद नेल्लानार योजना के तहत आयोजित ये शिविर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शासन की मजबूत उपस्थिति का प्रमाण हैं। इससे न केवल ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का उनका सपना भी साकार हो रहा है।  आगामी 29 और 30 अप्रैल को शिविर का आयोजन आदनार में किया जाएगा। जिसमें मलमेटा, कोंजे और बोडुम के ग्रामीण लाभान्वित होंगे। सुशासन का यह कारवां निरंतर जारी रहेगा।