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जनता के बीच पहुंची Durg पुलिस, ‘पुलिस जन मित्र योजना’ से रिश्ते होंगे मजबूत

दुर्ग. पुलिस एवं आम नागरिकों के बीच संवाद, विश्वास एवं सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने थाना सुपेला एवं थाना खुर्सीपार क्षेत्र में “पुलिस जन मित्र योजना” का शुभारंभ किया. इस योजना के तहत दुर्ग पुलिस नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता, सूने मकानों की सुरक्षा एवं यातायात नियमों के पालन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान कर रही है. विभिन्न जन-जागरूकता पोस्टर एवं मार्गदर्शिका के माध्यम से नागरिकों को हेल्पलाइन नंबर 1930 (साइबर फ्रॉड), 1091 (महिला सुरक्षा) एवं 1033 (नशा नियंत्रण) की जानकारी दी जाकर आवश्यक सुरक्षा उपायों एवं सावधानियों से अवगत कराया जा रहा है. यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से नागरिकों को पुलिस कार्यों से जोड़ते हुए उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता, बेहतर समन्वय एवं अपराधों की रोकथाम में सहायता प्राप्त होगी. आम नागरिकों से दुर्ग पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे “पुलिस जन मित्र योजना” से जुड़कर कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें तथा साइबर अपराध, नशा, यातायात नियमों एवं व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति सजग रहें. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देकर सुरक्षित एवं जागरूक समाज के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें.

खड़गे पर चंद्राकर का वार: Ajay Chandrakar बोले- ‘संन्यास लेकर माला जपें’

रायपुर. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसे लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने खड़गे के बयान का पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आतंकवादियों के निकट संपर्क में है. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह आतंकवादियों के साथ डिनर करते थे. विधायक चंद्राकर ने तंज करते हुए नसीहत दी कि खड़गे की जीभ और दिमाग नियंत्रण में नहीं है, उन्हें संन्यास लेकर माला जपना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष पर चंद्राकर ने किया हमला छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल्द ही विशेष सत्र की चर्चा है, जिसमें राज्य सरकार निंदा प्रस्ताव लाने जा रही है. महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न होने के विरोध में यह प्रस्ताव लाया जाएगा. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने विशेष सत्र को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसपर विधायक चंद्राकर ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद स्पष्ट होगा कि सत्र क्यों हो रहा है. नेता प्रतिपक्ष का जवाब देंगे. उन्हें विधि विधाई प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है. कांग्रेस में यदि कोई ज्ञानी हो तो वह उनसे जानकारी ले. बीजेपी मुद्दे को जनता तक लेके जा रही : विधायक चंद्राकर  कांग्रेस ने बीजेपी सांसदों से रामचरित मानस और संविधान की कसम खाकर महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ या नहीं, इसका जवाब मांगा है. मामले पर बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि इसमें प्रश्नों से बात नहीं हो पाएगी, जिनकी मांग है वो खुलकर चर्चा करें. जो परिस्थितियां बनी है वो विधेयक में है. बीजेपी मुद्दे को जनता तक लेके जा रही है. 

मानवता की मिसाल: Dantewada में सेना के जवानों ने गर्भवती की बचाई जान

दंतेवाड़ा. नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों ने मानवता की मिसाल पेश की है। दंतेवाड़ा के सालेपाल गांव में गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। इलाके में एंबुलेंस सुविधा समय पर नहीं मिल सकी। सूचना मिलते ही सीआरपीएफ जवान मौके पर पहुंचे। महिला को सुरक्षित वाहन में बैठाकर बारसूर अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर इलाज मिलने से स्थिति संभल गई। चिकित्सकों ने बताया कि प्रसव मामलों में हर मिनट अहम होता है। जवान भर्ती होने तक अस्पताल में साथ रहे। परिजनों ने नम आंखों से जवानों का आभार जताया। ग्रामीणों ने कहा सुरक्षा बल भरोसे का चेहरा बन रहे हैं। स्वास्थ्य और मदद के मोर्चे पर भी जवान साथ खड़े हैं। इस पहल ने जनता और सुरक्षा बलों का रिश्ता और मजबूत किया है। खाट पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड फोर्स के जवानों ने दिवस मानवता की मिसाल पेश की थी. दंतेवाड़ा (Dantewada) में सर्च ऑपरेशन के दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला (pregnant woman) को डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) फोर्स के जवान ने खाट पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया. यहां तैनात जवान अक्सर यहां के निवासियों की मदद करते हैं. अब ऐसा ही एक मामला दंतेवाड़ा के गांव रेवाली में सामने आया. यहां डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड फोर्स के जवानों ने गर्भवती महिला को खाट पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया. दरअसल, नक्सलियों ने गांव रेवाली की सड़क को कई जगह से काट दिया था. इस बीच गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. उनके पति ने जब एंबुलेंस के लिए फोन किया तो नक्सलियों द्वारा सड़क काट दिए जाने के कारण एम्बुलेंस वालों ने गांव तक पहुंचने में असमर्थता जताई.

हरा सोना संग्राहकों के लिए बड़ी राहत, आय बढ़ाने की दिशा में 920 करोड़ रुपए का संभावित भुगतान

हरा सोना संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, 920 करोड़ रुपए का होगा संभावित भुगतान लगभग 920 करोड़ रुपए का होगा संभावित भुगतान तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में जुड़े 13 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवार रायपुर छत्तीसगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है, जो आदिवासियों और वनवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के कारण इन संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है।           वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिसका सीधा लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं।  लगभग 11 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण होने की संभावना           बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। बस्तर संभाग में वर्ष 2025 के 3.90 लाख परिवारों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हाजर 57 नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं। 10 नए फड़ और बेहतर तैयारी         नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है, जहां 2100 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो सका था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में कार्य शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। सुगम संचालन और पारदर्शी भुगतान         संग्रहण कार्य को सुचारू बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही तेन्दूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी। 920 करोड़ रुपये का संभावित भुगतान        इस वर्ष निर्धारित दर के अनुसार संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। तेन्दूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल वनवासियों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

महतारी वंदन योजना का लाभ पाने के लिए KYC जरूरी, Bastar में महिलाएं करा रहीं अपडेट

जगदलपुर. महतारी वंदन योजना का लाभ ले रही महिलाओं के सामने अब तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य होते ही हजारों महिलाएं दफ्तरों के चक्कर काटने मजबूर हैं। सर्वर और नाम मिसमैच ने भुगतान प्रक्रिया अटका दी है। करीब 1.73 लाख हितग्राहियों में लगभग 2 हजार मामलों में डेटा मिसमैच सामने आया है। दो साल पहले आवेदन के दौरान हुई गलत एंट्री अब परेशानी बन गई है। भीषण गर्मी में महिलाएं महिला एवं बाल विकास कार्यालय पहुंच रही हैं। कई जगह आंगनबाड़ी स्तर पर सुधार के बजाय सीधे दफ्तर भेजा जा रहा है। राज्य स्तर पर डेटा सुधार में 5 से 7 दिन का समय बताया जा रहा है। 30 जून तक समय सीमा तय होने से महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। विभाग ने साफ किया है कि ई-केवाईसी पूरी तरह निशुल्क है। रुपयों की मांग करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। महतारी वंदन योजना आत्मनिर्भर महिला की ओर कदम 1 मार्च 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में क्रांति ला दी है। विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।मार्च 2024 से सितम्बर 2025 तक 69.15 लाख से अधिक महिलाओं को 12,376.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। राशि महिलाओं की आत्मनिर्भरता, पोषण और मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहायक है।चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 5, 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। 179 महतारी सदन के निर्माण के लिए 52.20 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक सदन 2,500 वर्गफुट में 29.20 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, बैठक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र होगा। स्वरोजगार और उद्यमिता का विस्तार जिसमें मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को 7,900 रुपए की सहायता एक सिलाई मशीन के लिए दी जा रही है।दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से 3 वर्ष से पंजीकृत महिला श्रमिकों को 1 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना ने पंजीकृत श्रमिकों को अपनी 18-21 वर्ष की अविवाहित पुत्रियों के पढ़ाई लिखाई तथा अन्य आवश्यक खर्चों के लिए 20,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त  और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी साय सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसमें महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से  उन्हें बिना जमानत के 25,000 रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।सक्षम योजना – 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को 3% ब्याज पर 2 लाख रुपए तक ऋण भी दिया जा रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) – 800 करोड़ रुपए का प्रावधान, “लखपति महिला” और “ड्रोन दीदी” जैसी नवाचारी पहलें भी योजनाओं में शामिल है।इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, उन्हें रोजगार के स्थायी अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं।

बस्तर में क्रिकेट का जश्न: Sachin Tendulkar आज बच्चों संग मैदान में उतरेंगे

रायपुर. क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Cricketer Sachin Tendulkar) 22 अप्रैल को सपरिवार दंतेवाड़ा (Dantewada) पहुंच रहे हैं. यह उनका पहला बस्तर विजिट है. यहां वे बल्ला थामकर बच्चों के साथ क्रिकेट खेलेंगे. सारी कवायद इसलिए ताकि नक्सलमुक्त बस्तर (Bastar) को अब खेलकूद जैसी गतिविधियों से विकास को उस मुकाम तक पहुंचाया जाए, जिससे यह वैश्विक पटल पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर सके. उल्लेखनीय है कि बस्तर अब नक्सल मुक्त हो चुका है और बस्तर में हर क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है. इसी क्रम में बस्तर में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की कवायद की जा रही है. तेंदुलकर छिंदनार, पनेड़ा और जावंगा समेत अन्य गांवों में आयोजित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. उनकी संस्था खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने कई कार्यक्रम चला रही है. मानदेशी फाउंडेशन मैदान विकसित करने के साथ शिक्षकों को कोचिंग भी दे रहा है. इस मौके पर तेंदुलकर पनेड़ा में स्टेडियम का उ‌द्घाटन भी करेंगे. 15 शिक्षकों को संस्था अब तक दे चुकी ट्रेनिंग क्रिकेटर तेंदुलकर दंतेवाड़ा में खेल माहौल को नई ऊंचाई देने पहुंच रहे हैं. इससे स्थानीय बच्चों में खेल प्रतिभाएं और विकसित होंगे. मानदेशी फाउंडेशन सालभर से जिले की अलग-अलग संस्थाओं में खेल मैदान तैयार कर रहा है. महाराष्ट्र की यह संस्था करीब 15 से ज्यादा शिक्षकों को मुंबई में कोचिंग भी दे चुकी है. मानदेशी फाउंडेशन खेल मैदानों को सीमित जगह होने के बावजूद इस तरह तैयार करती है, जहां विभिन्न खेल गतिविधियां संचालित हो सकती हैं. दंतेवाड़ा के 25 स्कूल और आश्रमों में खेल गतिविधि संस्था की ओर से गीदम ब्लॉक के 15 स्कूल-आश्रम और पोटाकेबिन में खेल मैदान तैयार किए जा चुके हैं. इनमें छिंदनार, कासोली, पोटाकेबिन कासोली, माध्यमिक शाला कोरलापाल, पोटाकेबिन हितामेटा, गुमड़ा, कारली, बांगापाल, प्राथमिक शाला गुमड़ा, झामूपारा कारली, माध्यमिक शाला झोड़ियाबाड़म, प्राथमिक शाला बुधपदर कासोली, जपोड़ी, गुमरगुंडा, उच्च प्राथमिक शाला माधोपारा हारम और बालक आश्रम छोटे तुमनार शामिल हैं. स्कूल के मैदानों को बचाने के लिए चलाया अभियान सचिन तेंदुलकर के फाउंडेशन द्वारा खेल गतिविधियां जारी रखने प्राथमिक शाला और मिडिल स्कूलों में मुख्य रूप से खेल मैदान डेवलप करवाया जा रहा है. छोटी सी जगह में भी सभी खेल के मैदान कैसे बनते हैं, इसका प्रशिक्षण भी शिक्षकों को दिया गया है.

दिव्यांगजनों के लिए बड़ी सुविधा: प्रमाणन और रिन्यूअल कैंप आज से, तीन फेज में चलेगा अभियान

उत्तर बस्तर कांकेर. जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजनों के हित में विशेष पहल करते हुए निःशुल्क सहायक उपकरण हेतु मूल्यांकन, नवीनीकरण एवं प्रमाणीकरण शिविर का आयोजन 22 अप्रैल से किया जा रहा है. कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशन में यह शिविर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड भारत सरकार के सामाजिक दायित्व के अंतर्गत तथा भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम  जबलपुर के सहयोग से आयोजित किया जाएगा. उपसंचालक समाज कल्याण क्षमा शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे. पहला शिविर 22 अप्रैल को लाइवलीहुड कॉलेज गोविंदपुर कांकेर में, दूसरा 23 अप्रैल को भानुप्रतापपुर और तीसरा शिविर 24 अप्रैल को कोयलीबेड़ा में आयोजित होगा. सभी शिविर प्रातः 10 बजे से शाम 04 बजे तक आयोजित किए जाएंगे. शिविर में दिव्यांगजनों का सहायक उपकरण हेतु मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाणीकरण, पेंशन संबंधी समस्याओं का निराकरण एवं हितग्राहियों का सत्यापन किया जाएगा. साथ ही जिन दिव्यांगजनों के मेडिकल प्रमाण पत्र या यूडीआईडी कार्ड नहीं बने हैं, उनका मौके पर ही पंजीयन एवं समाधान किया जाएगा. निःशुल्क सहायक उपकरण प्राप्त करने के लिए पात्र दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता अन्य सहायक उपकरण हेतु तथा 100 प्रतिशत दिव्यांग नेत्र सुगम्य केन, स्मार्टफोन के लिए आय प्रमाण-पत्र, जिनकी सभी स्रोतों से मासिक आय 22,500 रुपये से कम है, उन्हें आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, राशन कार्ड, बैंक खाता विवरण एवं आधार की छायाप्रति साथ लाना अनिवार्य होगा. शिविर में ऐसे दिव्यांग जिनका मेडिकल प्रमाण-पत्र नहीं बना है, उनका मेडिकल यूडीआईडी, अन्य पेंशन विषयक समस्या का समाधान समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा. शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों का प्रमाणीकरण, नवीनीकरण, यूडीआईडी कार्ड बनने से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं में पारदर्शिता एवं त्वरित लाभ मिलेगा. शिविर में आने से पूर्व अपना मोबाइल नंबर आधार से लिंक या अपडेट करा लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो.

Raipur में नई शुरुआत: PNG गैस पाइपलाइन से सीधे घरों तक पहुंचेगी रसोई गैस

रायपुर. राजधानी रायपुर में नेचुरल गैस पाइप लाइन डालने का कार्य जल्द शुरू होगा. इसके लिए हरियाणा सिटी गैस कंपनी को पेट्रोलियम मंत्रालय ने अधिकृत किया है. वर्तमान में यह कार्ययोजना शहर में प्रारंभिक दौर में है. (Raipur PNG Service) संबंधित एजेंसी को शहर में गैस पाइप लाइन डालने से पहले नियम अनुसार नगर निगम से एनओसी लेनी होगी. साथ ही निर्धारित दर अनुसार शुल्क भी जमा करना होगा, ताकि इस कार्य से नागरिकों को शहर में प्राकृतिक गैस लाइन की सुविधा केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप जल्द मिले. इस दौरान किसी भी नागरिक को कोई असुविधा न होने पाए. मंगलवार को निगम आयुक्त विश्वदीप ने इसी सिलसिले में गांधी सदन के सभागार में हरियाणा सिटी एजेंसी के प्रतिनिधि राकेश रंजन और दस जोन के जोन कमिश्नरों के साथ बैठक की. निगम आयुक्त विश्वदीप ने हरियाणा सिटी गैस एजेंसी के प्रतिनिधि को निर्देशित किया है कि वह निगम के संबंधित जोनों के जल और नगर निवेश विभाग के जोन अधिकारियों से तालमेल रखकर शहर में गैस पाइप लाइन डालने का कार्य करें. उन्होंने ये भी कहा कि पेयजल पाइप लाइन किसी भी हालत में क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए, साथ ही शहर में गैस पाइप लाइन बिछाने के दौरान खोदी गई सड़कों को तत्काल मरम्मत किया जाना चाहिए, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए. बैठक के दौरान नगर निगम आयुक्त ने सभी अभियंताओं को निर्देशित किया कि नेचुरल गैस पाइप लाइन डालने के कार्य दौरान शहर गर्मी के मौसम में नागरिकों असुविधा न हो यह ध्यान रखें. बैठक में अपर आयुक्त पंकज शर्मा, दस जोन के जोन कमिश्नर, नगर निवेश विभाग के कार्यपालन अभियंता आशुतोष सिंह, सहायक अभियंता नितीश झा, उप अभियंता नगर निवेश रविप्रभात साहू, हरियाणा सिटी गैस एजेंसी के प्रतिनिधि राकेश रंजन और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

राम नगरी की ओर श्रद्धा का कारवां: मनेंद्रगढ़ से 49 श्रद्धालु अयोध्या रवाना

राम नगरी की ओर श्रद्धा का कारवां: मनेंद्रगढ़ से 49 श्रद्धालु अयोध्या रवाना मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना” के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से चयनित श्रद्धालुओं का दल आज गहरी आस्था और उत्साह के साथ अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ। इस जनकल्याणकारी पहल के माध्यम से आम नागरिकों को भगवान श्रीराम के पावन जन्मस्थल के दर्शन का सुअवसर मिल रहा है। जिले के नगरीय निकायों और जनपद पंचायतों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर 57 श्रद्धालुओं की सूची तैयार कर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड को भेजी गई थी, जिनमें से 49 श्रद्धालु यात्रा पर निकले। मनेंद्रगढ़ से बस द्वारा अंबिकापुर पहुंचने के बाद श्रद्धालु विशेष ट्रेन के माध्यम से अयोध्या धाम के लिए प्रस्थान करेंगे। 21 से 24 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित इस यात्रा के दौरान ठहरने, भोजन, दर्शन, सुरक्षा और चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं शासन और जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा दल के साथ एक एस्कॉर्ट अधिकारी भी नियुक्त किया गया है, जो पूरी यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। भक्ति और उल्लास से गूंजा वातावरण रवाना होते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और खुशी साफ झलक रही थी। राम धुन, भजन और जयघोषों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर के लिए शासन के प्रति आभार जताते हुए इसे जीवन का एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम “श्री रामलला दर्शन योजना” केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि लोगों को भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करेंगे। यह पहल राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

विकास को लेकर सख्त रुख: कलेक्टर ने कहा—5 साल की प्लानिंग बनाएं, DMF नियमों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

एमसीबी. कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा लागू प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY-2024) के संशोधित दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 9B(3) के तहत अधिसूचित इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। बैठक में कलेक्टर ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि केवल उन्हीं परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाए, जो सीधे तौर पर खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां के निवासियों को लाभ पहुंचाती हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत लाभ या योजना की मूल भावना के विपरीत कार्यों को किसी भी स्थिति में स्वीकृति नहीं दी जाएगी। कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि व्यायामशाला नवीनीकरण, मुर्गों की लड़ाई के लिए चबूतरा निर्माण, पंचायत उपयोग हेतु मोबाइल/वाहन क्रय जैसे कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित हैं और ऐसे प्रस्तावों को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही मूर्तियां, स्मारक, हेलीपैड, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, निजी औद्योगिक पार्क, राजनीतिक कार्यक्रम, अधिकारियों के लिए वाहन एवं मोबाइल खरीद जैसी गतिविधियों को भी योजना से बाहर रखने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान सभी विभागों को 5 वर्षीय Perspective Plan (दीर्घकालिक योजना) तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसे 15 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस योजना में आगामी पांच वर्षों के लिए जिले के समग्र विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया जाएगा। 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए अलग विस्तृत योजना तथा 25-30 करोड़ रुपये के कार्यों को प्राथमिकता में शामिल करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने सभी विभागों को खनन प्रभावित गांवों की सूची के आधार पर योजनाओं का चयन करने तथा पंचायत, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, विद्युत, क्रेडा और उद्यानिकी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन करने तथा प्रति वर्ष कम से कम 30 केंद्रों के निर्माण या उन्नयन का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों की उपलब्धता एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए, जबकि पंचायत विभाग को जल संरक्षण हेतु चेक डैम निर्माण की योजना तैयार करने को कहा गया। कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक अधोसंरचना परियोजना में बिजली सुविधा अनिवार्य रूप से शामिल की जाए, ताकि सभी परिसंपत्तियां पूर्ण रूप से उपयोगी बन सकें। साथ ही सभी विभागों को अपने कार्यों की जानकारी नियमित रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, सीमांकन, बंटवारा एवं नामांतरण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के रिक्त पदों, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यय की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यय को न्यूनतम रखते हुए अधिक से अधिक राशि जनहितकारी कार्यों पर खर्च की जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।