samacharsecretary.com

Good Governance Campaign: 1 मई से ‘सुशासन तिहार’ की शुरुआत, अधिकारियों को तय समय में तैयारियों के आदेश

राजनांदगांव. शासन द्वारा जन शिकायतों के समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले में 1 मई से सुशासन तिहार 2026 शुरू किया जाएगा। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा में सभी अधिकारियों को इसकी आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने इसके साथ ही सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई में पावर प्लांट में हुए हादसे के मद्देनजर सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और तहसीलदारों को सुरक्षा संबंधी मापदण्डों की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ऐसे हादसों से बचाव के लिए सावधानी एवं सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शासन की महत्वपूर्ण योजना है। जिससे हरित ऊर्जा की ओर लोगों का रूझान बढ़ेगा। इस योजना के अंतर्गत कालोनी में भी सोलर पैनल लगवाने के लिए जनमानस को प्रोत्साहित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करें। कलेक्टर ने कहा कि मिशन जल रक्षा के तहत कृषकों को धान के बदले अन्य फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित करें और रबी सीजन में किसानों को धान के बदले अन्य फसल लेने से जल संरक्षण को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल को ध्यान में रखते हुए पेयजल की समस्या का प्राथमिकता से निराकरण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था की समीक्षा की।

आरटीई कोटे के तहत स्कूल चयन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में निकली लॉटरी, बच्चों को मिला मौका

दुर्ग. बच्चों की किस्मत की लॉटरी आखिरकार खुल गई। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों के क्लास वन में प्रवेश देने के लिए लाटरी के माध्यम से स्कूलों का चयन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में निकाली गई। प्रथम चरण की लॉटरी में 1059 बच्चों को स्कूल आवंटित किया गया है। दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों में आरटीई की इस बार कुल 1427 सीटें है। जबकि स्वीकृत आवेदनों की संख्या 1899 है। प्रथम चरण की लॉटरी के लिए इस बार सहायक संचालक, 5 पालक, निजी विद्यालय संगठन से जुड़े 2 पदाधिकारी, 2 पालक संघ के प्रतिनिधि तथा 2 मीडिया प्रभारी को विशेष रूप से रायपुर बुलाया गया था। इनकी मौजूदगी में लॉटरी निकाली गई। विभाग की ओर सहायक संचालक समृद्धि जोशी तथा आरटीई कक्ष प्रभारी राजदीप मौजूद थे। दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों के प्रारंभिक कक्षाओं में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत भर्ती के लिए 3485 ऑनलाइन आवेदन मिले थे। इनमें से 900 यानी करीब 26% आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। केवल 1899 आवेदन ही स्वीकृत किए गए हैं। इन्हीं आवेदनों पर लॉटरी 15 अप्रैल को निकाली गई। अब 1 मई से 30 मई तक स्कूल दाखिला की प्रक्रिया की जाएगी। वैसे इस बार आरटीई के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों की संख्या में भारी कटौती की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब एक तिहाई सीटों की कटौती हुई है। इस वर्ष केजी-1, केजी – 2 तथा नर्सरी का कांसेप्ट खत्म कर दिया गया है। इस वजह से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित थी। पिछले वर्ष आरटीई की 4267 सीट थी। यानी इस बार 2840 सीटों की कटौती की गई है।

जन समस्याओं पर सख्त CM साय: कलेक्टरों को तुरंत कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक मई से शुरू होने जा रहे प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार’ के मद्देनजर तमाम कलेक्टरों को पत्र लिखा है. पत्र में शासन की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए जन शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान एवं जन समस्या निवारण शिविरों के आयोजन पर जोर दिया गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने पत्र में बताया कि सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून के मध्य जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 15-20 ग्राम पंचायतों के समूह पर और नगरीय क्षेत्रों में वार्डों के क्लस्टर के आधार पर शिविर आयोजित किए जाएं. इन शिविरों में विभिन्न शासकीय योजनाओं के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता सुनिश्चित करने के साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ वितरण करने, शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण करने के साथ प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन के निराकरण की सूचना अनिवार्य रूप से प्रदान की बात कही गई है. शिविर के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, मुख्य सचिव व प्रभारी सचिव के समय-समय पर शामिल होंगे. इसके साथ प्रदेश में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे. साथ ही विभिन्न योजनाओं से लोगों को मिल रहे लाभ के बारे में जानकारी लेंगे. शिविर में आमजन से मुलाकात के साथ दोपहर के बाद जिला मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक होगी, जिसमें समाधान शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति और विभिन्न योजनाओं व परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी, साथ ही आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा राज्य स्तर से बिंदुवार समीक्षा पत्रक उपलब्ध कराए जाएंगे. 30 अप्रैल तक व्यापक कार्रवाई के दिए निर्देश सुशासन तिहार के पहले कलेक्टरों से 30 अप्रैल तक भूमि संबंधी प्रकरण – नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन का त्वरित निराकरण, मनरेगा अंतर्गत लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान, विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान एवं प्रकरणों का निराकरण, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन के अलावा बिजली संबंधी शिकायतों के अलावा हैण्डपंप सुधार और पात्रता अनुसार उज्जवला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, वृद्धावस्था / सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की बात कही है. 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को फोन कर दी बधाई

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से दूरभाष पर बातचीत कर उन्हें नई जिम्मेदारी संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार  विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चौधरी के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण से बिहार में तीव्र प्रगति सुनिश्चित होगी। उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी ने आज ही बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है।

सुकमा की बेटी लावण्या को मिली नई मुस्कान, मुख्यमंत्री ने दिया आशीर्वाद

रायपुर.  कहते हैं कि सही समय पर मिला इलाज किसी की पूरी ज़िंदगी बदल सकता है। सुकमा जिले की 13 वर्षीय बालिका टुंकी लावण्या की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है, जिसने कठिन परिस्थितियों और वर्षों की पीड़ा के बाद आखिरकार एक नई मुस्कान और नया आत्मविश्वास पाया है। लावण्या, जो कन्या आश्रम, गोल्लापल्ली (पालाचेलमा) की निवासी है, जन्म से ही क्लैफ्ट लिप (कटे होंठ) जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। यह बीमारी सिर्फ शारीरिक दर्द तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके बचपन पर सामाजिक झिझक और आत्मविश्वास की कमी का भी गहरा असर डाल रही थी। परिवार में जागरूकता की कमी और इलाज को लेकर भय के कारण लंबे समय तक उसका उपचार नहीं हो पाया। लेकिन किस्मत ने तब करवट ली जब लावण्या मेगा सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य शिविर में पहुंची। शिविर में कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण से मिली। उन्होंने लावण्या को स्वास्थ्य शिविर में जांच कराके बेहतर इलाज का प्रबंध किया।  स्वास्थ्य शिविर बना जीवन बदलने का मोड़ शिविर में मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न सिर्फ लावण्या की जांच की, बल्कि उसके परिवार को समझाकर इलाज के लिए तैयार किया। इसी शिविर में आयुष्मान कार्ड बनाया गया। जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए लावण्या को कालाडा अस्पताल, रायपुर भेजा गया। इस दौरान आरबीएसके चिरायु टीम ने उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई। 10 अप्रैल 2026: जब दर्द की जगह उम्मीद ने ले ली सभी प्रक्रियाओं और समन्वय के बाद आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को लावण्या का सफल ऑपरेशन किया गया। यह सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उसके जीवन के अंधेरे में उम्मीद की रोशनी थी। ऑपरेशन के बाद लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों का दर्द और ताने जैसे उसी दिन समाप्त हो गए। मुख्यमंत्री ने की मुलाकात, दिया आशीर्वाद इस कहानी का सबसे भावुक पल तब आया जब 13 अप्रैल 2026 को सुकमा दौरे के दौरान माननीय मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने लावण्या से मुलाकात की। उन्होंने लावण्या के स्वास्थ्य की जानकारी ली, उसे फल भेंट किए और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। सरकारी योजनाओं की सफलता की मिसाल बनी लावण्या आज लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान केवल उसकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य विभाग का समर्पण और समय पर उपचार दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में भी चमत्कार कर सकते हैं। लावण्या अब न सिर्फ स्वस्थ है, बल्कि उसके भीतर एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी लौट आया है। उसकी मुस्कान आज पूरे सुकमा के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

भोरमदेव अभयारण्य में बाघों के संरक्षण के लिए गांवों को खाली किया जाएगा, प्राकृतिक धरोहर को बचाने की योजना

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में एक बड़ा और दूरगामी फैसला आकार ले रहा है। भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस योजना का सबसे अहम हिस्सा है-अभयारण्य के भीतर बसे गांवों का पुनर्वास। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। वन विभाग द्वारा तैयार की गई योजना के तहत भोरमदेव अभ्यारण्य में लगभग 34 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग विकसित किया गया है। सफारी के दौरान पर्यटक गौर, चीतल, सांभर, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में नजदीक से देख सकेंगे। यह मार्ग मैकल पर्वतमाला के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जो प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। सकरी नदी मार्ग बनेगा विशेष आकर्षण इस जंगल सफारी की सबसे बड़ी खासियत सकरी नदी मार्ग है। सफारी के दौरान पर्यटकों को करीब 17 बार नदी पार करने का रोमांचक अनुभव मिलेगा। यह अनोखा सफर रोमांच और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए खास आकर्षण साबित होगा। इस परियोजना में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। सफारी वाहनों का संचालन वन प्रबंधन समिति थंवरझोल द्वारा किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोहरा आकर्षण जंगल सफारी शुरू होने के बाद भोरमदेव आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब ऐतिहासिक मंदिर दर्शन के साथ-साथ वन्यजीवन का रोमांच भी एक ही यात्रा में अनुभव कर सकेंगे। इससे भोरमदेव क्षेत्र को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वन विभाग के अनुसार सुरक्षा और संचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं और जल्द ही सफारी को औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।  रिजर्व फाॅरेस्ट न बनने से अभयारण्य क्षेत्र की 15 हजार से अधिक आबादी को फायदा कुल क्षेत्र में 160 किमी का घना जंगल एनटीसीए के कहने पर काम हुआ था शुरू भोरमदेव अभयारण्य 351.24 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसमें 160 किमी कोर एरिया यानि घने जंगल हैं। 152 वर्ग किमी बफर एरिया है। कुल 35 वन परिक्षेत्र में से भाेरमदेव और चिल्फी परिक्षेत्र मिलाकर अभयारण्य बनाते हैं। एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी) के कहने पर ही वन विभाग ने रेंगाखार, चिल्फी और कवर्धा को बांटकर बाघ के संरक्षण, संवर्धन का काम बढ़ाया था। इसलिए कान्हा किसली के बाघ आ रहे हैं यहां, पर्यटक भी बढ़े कान्हा किसली के जंगलों में बाघों की संख्या ज्यादा हो गई है। इस बीच पर्यटक बढ़े हैं। वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार बाघों को वहां से ज्यादा बेहतर और सुरक्षित वातावरण यहां भोरमदेव में मिल रहा है। यहां हिरण और चीतल जैसे जानवर बड़ी संख्या में है। इसी वजह से यहां बाघ आ रहे हैं। थंवरझोल के 37 परिवारों को शिफ्ट करने की बन चुकी थी योजना टाइगर रिजर्व के लिए कवर्धा परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत चौरा के आश्रित गांव थवरझोल में 37 परिवारों को उनकी अचल संपत्ति की कीमत देकर विस्थापन करने की योजना बन चुकी थी। वन विभाग ने गांव का सर्वे करा लिया था। इनके विस्थापन के आदेश भी जारी हो चुके थे। इन परिवारों को 3.70 करोड़ रुपए में जंगल से बाहर शिफ्ट किया जाता। भू- अर्जन के बदले में उन्हें 10-10 लाख रुपए दिए जाते। ताकि उनके जाने पर गांव में बाघों के रहवास के लिए सुविधाएं डेवलप कर सकें।  

दशकों के अंधेरे से उजियारे में आया गारपा, नियद नेल्लानार योजना से पहली बार घर-घर पहुँची बिजली

रायपुर.  छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी "नियद नेल्लानार योजना" के तहत जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में विकास की मजबूत दस्तक सुनाई दे रही है। नारायणपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित अत्यंत दुर्गम ग्राम गारपा में अब पहली बार बिजली की रोशनी पहुँची है, जिससे वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे ग्रामीणों के जीवन में नया उजाला आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब इन दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुँच रहे हैं। पहले जहाँ सुरक्षा कारणों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं पहुँच पाती थीं, वहीं अब शासन की प्राथमिकता में इन क्षेत्रों को शामिल कर तेजी से काम किया जा रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन के सतत मार्गदर्शन में प्रशासनिक और तकनीकी टीमों ने मिलकर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। बिजली विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना में लगभग 55 लाख रुपये की लागत से 48 उपभोक्ताओं को पहली बार बिजली कनेक्शन प्रदान किया गया। कार्यपालन अभियंता कुमार लाल उइके ने बताया कि घने जंगल, कठिन रास्ते और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने अदम्य साहस और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए निर्धारित समय में लाइन विस्तार का कार्य पूर्ण किया। बिजली पहुँचने से अब गारपा के बच्चों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के नए रास्ते खुलेंगे। दशकों बाद अपने घरों को रोशन देख ग्रामीणों में उत्साह और खुशी का माहौल है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत जिले के अन्य दूरस्थ गांवों में भी इसी तरह प्राथमिकता के आधार पर विद्युतीकरण कार्य तेजी से जारी रहेगा, जिससे विकास की रोशनी हर अंतिम छोर तक पहुँच सके।

प्रधानमंत्री के दृढ़इच्छाशक्ति और साहसिक निर्णय से पूरा होगा महिलाओं का सपना : मुख्यमंत्री साय

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का पारित होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी का स्थान सर्वोच्च है। हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं और ऐश्वर्य के लिए माता लक्ष्मी, बुद्धि के लिए सरस्वती और बल के लिए दुर्गा की आराधना की जाती हैं। साय ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयास पहले भी हुए, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू करने का साहसिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम इस वर्ष को प्रदेश में ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रहे हैं और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हुआ है और प्रदेश विकास के नए मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नया संबल मिलेगा। कार्यक्रम में “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” के संकल्प को दोहराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही 14 लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस दौरान पुष्प के साथ महिलाओं का अभिनंदन कर बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें बड़े निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं। महिलाओं को जिम्मेदारी मिले तो वे देश की तस्वीर बदल सकती हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक लागू होगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पद्मऊषा बारले, विधायक पुरंदर मिश्रा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पद्मऊषा बारले, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी नीता डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

आर.टी.ई. अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी से चयन सूची जारी

रायपुर.  छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को पूर्व निर्धारित समय-सारणी के अनुसार आर.टी.ई. अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु प्राप्त आवेदनों की चयन सूची ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से मंत्रालय महानदी भवन के मुख्यमंत्री कक्ष  से जारी की गई। यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में सम्पन्न कराई गई। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी , उपसंचालक लोक शिक्षण  अशोक नारायण बंजारा ,आर टी  ई प्रभारी महेश नायक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आवेदन एवं चयन की स्थिति इस वर्ष कुल 21 हज़ार 975 सीटों के विरुद्ध 38 हजार 439 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 27 हजार 203 आवेदन पात्र एवं 11 हज़ार 236 आवेदन अपात्र पाए गए। पात्र आवेदनों में से 14 हजार 403 विद्यार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया है। यह चयन संख्या मुख्यमंत्री डी.ए.व्ही. विद्यालयों की आर.टी.ई. सीटों को छोड़कर है। इन विद्यालयों में जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी आयोजित कर पृथक जानकारी आर.टी.ई. पोर्टल में अपडेट की जाएगी। जिलेवार चयनित विद्यार्थियों का विवरण जिलेवार चयनित विद्यार्थियों की स्थिति इस प्रकार है- रायपुर में 2606, बिलासपुर में 1509, दुर्ग में 1059, कोरबा में 534, राजनांदगांव में 480, बलौदाबाजार-भाटापारा में 457, जांजगीर-चांपा में 500, मुंगेली में 702, कवर्धा में 367, धमतरी में 354, बलरामपुर में 798, रायगढ़ में 544, बेमेतरा में 315, जशपुर में 543, सक्ती में 347, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 258, महासमुंद में 244, कांकेर में 471, बालोद में 353, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 195, सूरजपुर में 427, सरगुजा में 273, गरियाबंद में 193, कोरिया में 179, बस्तर में 135, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 206, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 112, कोंडागांव में 101, नारायणपुर में 35, मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 48, दंतेवाड़ा में 35, सुकमा में 9 तथा बीजापुर में 14 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। सीटें रिक्त रहने के प्रमुख कारण कुछ निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. सीटें पूर्ण रूप से नहीं भर पाईं। इसका मुख्य कारण यह है कि कई विद्यालयों को आवेदकों द्वारा प्राथमिकता नहीं दी जाती, जिससे उनके लिए आवेदन प्राप्त नहीं होते। साथ ही जिन विद्यालयों को द्वितीय या तृतीय प्राथमिकता में रखा जाता है, वहां भी सीटें रिक्त रह जाती हैं, क्योंकि आवेदकों को उनकी प्रथम प्राथमिकता वाले विद्यालय में प्रवेश मिल जाता है। परिणामस्वरूप ऐसे विद्यालय, जो किसी भी आवेदक की प्राथमिकता में नहीं आते, उनकी सीटें खाली रह जाती हैं। राज्य शासन द्वारा आर.टी.ई. प्रवेश प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं व्यवस्थित तरीके से सम्पन्न किया गया है। आगामी चरणों में शेष सीटों की पूर्ति एवं ऑफलाइन लॉटरी से संबंधित जानकारी आर.टी.ई. पोर्टल के माध्यम से जारी की जाएगी।

नवागढ़ अध्यक्ष केस में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश पर लगाई स्टे

नवागढ़/बिलासपुर. बेमेतरा जिले के नगर पंचायत नवागढ़ के अध्यक्ष सिद्धांत चौहान को हटाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें हटाने के आदेश के प्रभाव एवं प्रचलन (इम्प्लीमेंटेशन) पर भी फिलहाल स्थगन दिया है। न्यायालय ने सिद्धांत चौहान को पद पर बने रहते हुए कार्य करते रहने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, सिद्धांत चौहान का चुनाव सीधे जनता के द्वारा नगर पंचायत नवागढ़ के अध्यक्ष के पद पर दिनांक 15.02.25 को हुआ, और पहली मीटिंग दिनांक 08.03.25 को हुई, जिसमें उपाध्यक्ष का चुनाव किया गया। 11.03.25 को सिद्धांत चौहान द्वारा प्रेसिडेंट इन काउंसिल का गठन किया गया, परंतु प्रेसिडेंट इन काउंसिल के सदस्यों द्वारा इस्तीफा प्रस्तुत किया गया, जिसे सिद्धांत चौहान द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। इसके पश्चात नगर पंचायत नवागढ़ के विभिन्न कार्यों का संपादन नियमानुसार सिद्धांत चौहान द्वारा किया गया। पार्षदों द्वारा असहयोग किए जाने पर निर्माण व आवश्यक कार्यों से संबंधित सभी प्रस्ताव सामान्य सभा में प्रस्तुत किए गए और कोरम पूर्ण न होने पर स्थगित adjourn मीटिंग में उन सभी प्रस्तावों को पास किया और कार्य किए गए। परंतु राजनीतिक विद्वेषवश राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41(क) के अंतर्गत दिनांक 04.12.25 को सिद्धांत चौहान को अध्यक्ष पद से हटाने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब सिद्धांत चौहान द्वारा विस्तार से सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया। लेकिन जवाब को संतोषजनक न मानते हुए, नए-पुराने आधारों पर सिद्धांत चौहान को राज्य सरकार द्वारा आदेश दिनांक 20.03.26 के माध्यम से अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और अगले कार्यकाल के लिए अनर्ह घोषित किया गया। उक्त आदेश दिनांक 20.03.26 को सिद्धांत चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, प्रज्ञा वैष्णव एवं अरिंदम मित्रा के माध्यम से रिट याचिका प्रस्तुत कर चुनौती दी गई, जिसमें न्यायमूर्ति एन. के. चंद्रवंशी द्वारा सुनवाई के पश्चात आदेश दिनांक 20.03.26 के प्रभाव एवं प्रचलन पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने सरकार और प्रशासन से मांगा जवाब अगली सुनवाई तक सिद्धांत चौहान को नगर पंचायत नवागढ़, जिला बेमेतरा के अध्यक्ष पद पर कार्य करते रहने की अनुमति दी गई है तथा राज्य सरकार, सचिव नगर विकास एवं प्रशासन, संचालक, अंडर सेक्रेटरी, कलेक्टर बेमेतरा और नगर पंचायत नवागढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।