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कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण: पक्के घर से सम्मानजनक जीवन की शुरुआत

नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।  यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।

बालोद का औराटोला बना मिसाल: आत्मनिर्भरता से ‘लखपति दीदी ग्राम’ की पहचान

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।  जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।  इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं। कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है। बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है। प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे … Read more

बिलासपुर में खास मुलाकात: तेंदुलकर परिवार ने गांव पहुंचकर जानी लोगों की समस्याएं

लोरमी. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का परिवार शनिवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी पहुँचा। इस दौरान सचिन तेंदुलकर की पत्नी डॉ. अंजली तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक तेंदुलकर ने ग्रामीणों से मुलाकात की और क्षेत्र में संचालित शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मुंगेली जिले के घने जंगलों में बसे इस आदिवासी ग्राम में तेंदुलकर परिवार के पहुँचते ही उत्सुकता और खुशी का माहौल बन गया। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। इस एक दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा की जमीनी स्थिति को समझना रहा। क्षेत्र में गनियारी जनस्वास्थ्य समिति द्वारा निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित की जा रही हैं। तेंदुलकर परिवार इसी समिति के कार्यों का अवलोकन करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ यहाँ पहुँचा था। दौरे के दौरान डॉ. अंजली तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया। साथ ही उन्होंने बालवाड़ी पहुँचकर आदिवासी बच्चों से मुलाकात की और उनके रहन-सहन, खान-पान एवं वन क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को लेकर स्थानीय समिति के सदस्यों से विस्तार से चर्चा की। तेंदुलकर परिवार की इस यात्रा ने न केवल ग्रामीणों में उत्साह बढ़ाया, बल्कि क्षेत्र में चल रही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

उत्तर बस्तर कांकेर : विशेष लेख : कभी बंदूक थामकर हिंसा करने वाले माओवादी अब सीख रहे हुनर नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के शिक्षा पर भी विशेष ध्यान  उत्तर बस्तर कांकेर जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की मार्ग अपनाया  था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हुनर दिखाते हुए काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का ‘लोगो’, ग्राम पंचायतों के लिए बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग सहित अन्य सजावटी सामग्री तैयार की जा रही है, साथ ही कपड़े का थैला, कार्यालयों के लिए बस्ता भी तैयार किया जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुशल और दक्ष बनाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। यहां पर उन्हें काष्ठशिल्प के साथ ही इलेक्ट्रिशियन, ड्रायविंग, सिलाई, राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियॉ अब विभिन्न व्यवसाय में दक्ष हो रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के बाद आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकें। चौगेल कैंप बना कौशल प्रशिक्षण केंद्र वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। शासन द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर घोषित किया जा चुका है। हिंसा की राह त्यागकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को सरकार कौशल विकास का प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत भानुप्रतापपुर विकासखंड के पास ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैम्प में विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कभी बीएसएफ का कैम्प रहा चौगेल (मुल्ला) का यह कैम्प अब हुनर सिखाने वाला गढ़ बन चुका है। यहां पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठयक्रमों जैसे- काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग, राजमिस्त्री इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दी जा रही है। पढ़ने के लिए पाठ्य सामग्री, पुस्तकें, पेन-पेंसिल दिए गए हैं तथा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां भी दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां जैसे कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। चौगेल पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वाहन चालक के साथ ही कांकेर में घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प एवं असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने हेतु कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी, पशुधन विकास विभाग के साथ ‘बिहान’ के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है।  प्रशिक्षण उपरांत नियोजन करने वाला पहला जिला बना कांकेर पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण उपरांत नक्सली पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने वाला कांकेर पहला जिला बन चुका है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने हाथों से तीन नक्सली पीड़ित और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा, इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया, जहां उन्हें 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। इन्होंने चौगेल कैम्प में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया था तथा उन्हें निजी क्षेत्र में नियोजित किया गया है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया, वहीं प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 

बलौदाबाजार : लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों का समय सीमा में करें निराकरण-कलेक्टर

बलौदाबाजार : लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों का समय सीमा में करें निराकरण-कलेक्टर जल संचयन हेतु समुदाय की सहभागिता पर जोर राजस्व शिविर में पटवारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के दिए निर्देश बलौदाबाजार कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने मंगलवार को साप्ताहिक समय -सीमा की बैठक में  राज्य और केंद्र शासन की.विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने भूमिगत जल के रिचार्ज हेतु सभी शासकीय भवनों  में सोखता गढ्ढा और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की संरचनाएँ निर्मित करने और जन भागीदारी से जल संचयन के कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया कलेक्टर ने  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि नहरों के आसपास भी ऐसी संरचनाएं निर्मित करें जो पानी रोककर भूमिगत जल रिचार्ज में सहायक हों।उन्होंने खेतों के सबसे निचले क्षेत्र में भी जल संरक्षण की संरचना बनाने के निर्देश दिए हैं। श्री शर्मा ने आंगनवाड़ी,शासकीय और निजी स्कूलों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता पिट निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में जन जागरूकता हेतु अधिक से अधिक प्रचार प्रस्ताव के साथ  आम नागरिकों से इस कार्य में सहयोग की अपील भी की है । जल संचयन की संरचनाओं के गुणवत्ता पूर्ण निर्माण में बाद उसकी फोटो और अनिवार्य जियो टैगिंग के भी निर्देश उन्होंने दिए।  बैठक में उन्होंने लोक सेवा गारंटी के तहत विभिन्न प्रकरणों के समय सीमा में निराकरण और पोर्टल में तत्काल एंट्री के निर्देश भी दिए हैं,ऐसा  न करने पर संबंधित अधिकारी -कर्मचारी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी । उन्होंने राजस्व पखवाड़े में पटवारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश देते हुए मामलों का ऑन द स्पॉट निराकरण करने को कहा है। श्री शर्मा ने जनगणना के कार्यों को संवेदनशीलता और कर्मठता से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा जनगणना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासकीय ज़मीन पर अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने भूराजस्व संहिता के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिए हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूमिहीन नागरिकों को भी लाभान्वित किया जाना है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को पंचायत स्तर पर आबादी भूमि का चिन्हांकन कर भूमिहीनों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।

खेल प्रेमियों के लिए बड़ी खबर: रायपुर में 14 मई से राष्ट्रीय वुडबॉल चैंपियनशिप

रायपुर. वुडबॉल खेल के राष्ट्रीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में वुडबॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ वुडबॉल संघ द्वारा 20वीं सीनियर एवं 14वीं जूनियर राष्ट्रीय वुडबॉल चैंपियनशिप 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता 14 मई से 17 मई 2026 तक कृष्णा विकास ग्लोबल स्कूल ग्राउंड, रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पुरुष एवं महिला खिलाड़ी भाग लेंगे। जूनियर वर्ग के लिए आयु सीमा 19 वर्ष से कम निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार 1 जनवरी 2007 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ी पात्र होंगे। वुडबॉल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खेल है, जिसे इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स फेडरेशन (FISU), ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) तथा एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। आयोजन समिति द्वारा प्रतिभागी टीमों के लिए 14 मई से 18 मई 2026 तक आवास, भोजन एवं स्थानीय परिवहन की समुचित व्यवस्था की गई है। सभी टीमों को 14 मई 2026 की प्रातः तक रायपुर में रिपोर्ट करने का अनुरोध किया गया है, जिससे प्रतियोगिता का संचालन समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जा सके। प्रतिभागी टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे 05 मई 2026 तक अपनी भागीदारी की पुष्टि एवं टीम विवरण आयोजकों को प्रेषित करें। प्रत्येक टीम में अधिकतम 24 खिलाड़ी (12 पुरुष और 12 महिला) तथा 3 अधिकारी सम्मिलित किए जा सकते हैं, जिनमें महिला टीम के लिए एक महिला प्रबंधक का होना अनिवार्य है। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों से अनुशासन, खेल भावना एवं निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। साथ ही, खिलाड़ियों को अपने आवश्यक खेल उपकरण (किट एवं मैलेट) साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं। यह राष्ट्रीय चैंपियनशिप न केवल वुडबॉल खेल के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय मंच भी प्रदान करेगी।

सूरजपुर : जनगणना 2027 : डिजिटल तकनीक से होगी देश की गिनती, स्व-गणना पोर्टल से घर बैठे दर्ज करें अपना विवरण

सूरजपुर : जनगणना 2027 : डिजिटल तकनीक से होगी देश की गिनती, स्व-गणना पोर्टल से घर बैठे दर्ज करें अपना विवरण सूरजपुर कलेक्टर श्री एस जयवर्धन  भारत में जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बार की जनगणना पूर्णतः डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी, जो इसे पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाएगी। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग अर्थात् मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। पहले चरण में निर्धारित प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। स्व-गणना पोर्टल — घर बैठे भरें अपना विवरण इस बार नागरिकों को एक विशेष सुविधा दी जा रही है — स्व-गणना पोर्टल (Self Enumeration Portal)। इसके माध्यम से परिवार का मुखिया या कोई भी सदस्य पोर्टल पर जाकर अपने घर और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी स्वयं भर सकता है। यह सुविधा संबंधित राज्य में मकान सूचीकरण कार्य शुरू होने से 15 दिन पहले उपलब्ध होगी और 15 दिनों तक ही सक्रिय रहेगी। ध्यान रखें — एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही घर का लॉगिन संभव है और मुखिया का नाम एक बार दर्ज होने के बाद बदला नहीं जा सकता। स्व-गणना पोर्टल पर एंट्री की प्रक्रिया:- पोर्टल खोलकर अपना राज्य या केंद्र शासित प्रदेश एवं कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे के चरणों का मार्गदर्शन करेगी। परिवार की मुखिया अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर अपनी भाषा चुनें, फिर ओटीपी से सत्यापन होगा। मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिह्नित करना आवश्यक है। तत्पश्चात् एचएल प्रश्नावली का प्रारूप खुल जाएगा, जिसमें अधिकांश प्रश्न विकल्प आधारित होंगे। फोनेटिक एवं वर्चुअल कीबोर्ड भी उपलब्ध रहेगा। यदि कोई जानकारी छूट जाए तो सिस्टम स्वयं संकेत देगा। सभी विवरण भरने के बाद ड्राफ्ट सहेजें, आवश्यकता हो तो संशोधन करें और अंत में अंतिम रूप से जमा करें। सबमिशन के बाद 11 अंकों का SCID नंबर प्रदर्शित होगा, जो एसएमएस के माध्यम से भी प्राप्त होगा। जब प्रगणक घर पर आएं तो यह SCID नंबर उनके साथ साझा करें। जिला प्रशासन की अपील:- कलेक्टर श्री एस जयवर्धन ने सूरजपुर जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएं और स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण समय पर दर्ज कराएं। आपकी सही और पूर्ण जानकारी से देश की वास्तविक तस्वीर सामने आती है और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचता है।

अम्बिकापुर : ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेः पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू

अम्बिकापुर : ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेः पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू अम्बिकापुर  भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में “ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” संचालित किया जा रहा है। इस महत्त्वपूर्ण पहल का उद्देश्य देशभर में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ में भी इस सर्वेक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें जन-जागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह सर्वेक्षण उन पांडुलिपियों को खोजने और सूचीबद्ध करने का प्रयास है, जो वर्तमान में परिवारों, मंदिरों, मठों, संस्थानों या निजी संग्रहों में सुरक्षित है, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से सर्वेक्षित नहीं हो पाई हैं। यह पहल इन छिपी हुई ज्ञान-संपदाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सर्वेक्षण के पश्चात सरकार इनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी। पांडुलिपियों का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था का ही रहेगा। ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसमें पांडुलिपि धारण करने वाले परिवार, संस्था, विद्वान एवं शोधकर्ता मंदिर एवं धार्मिक संस्थान, पुस्तकालय एवं शैक्षणिक संस्थाएं, जागरूक नागरिक के अतिरिक्त, सरकार द्वारा अधिकृत सर्वेक्षक भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। ऐसे नागरिक जिन्हें अपने आसपास पांडुलिपियों की जानकारी है, वे भी इस सर्वेक्षण से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों को ज्ञानभारतम डॉट कॉम पोर्टल और ‘ज्ञानभारतम’ मोबाइल एप के माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। भारत की पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक विरासत, ज्ञान परंपरा की जीवंत धरोहर हैं। इनमें आयुर्वेद, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और जीवन दर्शन का अमूल्य ज्ञान संचित है। ऐसे में इनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। राज्य के नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अब तक सर्वेक्षित नहीं हैं, या उन्हें किसी स्थान, परिवार या संस्था में पांडुलिपियों की जानकारी है, तो वे इस सर्वेक्षण से अवश्य जुडें। यह राष्ट्रीय अभियान हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ज्ञान की इस विरासत को संजोना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है, आइए मिलकर इसे सुरक्षित करें।