samacharsecretary.com

लेमन ग्रास की खेती से महक रही आत्मनिर्भरता, GPM की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर

लेमन ग्रास की खुशबू से महक रही आत्मनिर्भरता, जीपीएम की महिलाएं बढ़ रहीं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प को साकार कर रही बिहान की दीदियां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मिल रहा नया आधार, अमारू में 20 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती रायपुर   प्राकृतिक सौंदर्य और वनौषधीय संपदा के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की वादियों में इन दिनों एक नई खुशबू फैल रही है। यह खुशबू केवल लेमन ग्रास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, समृद्धि और महिला सशक्तिकरण की है। कभी परिवार की सीमित आय में घर-गृहस्थी संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं आज संगठित होकर खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक ताकत बन रही हैं। ग्राम अमारू में बिहान योजना से जुड़ी महिला स्वसहायता समूहों की दीदियों ने लेमन ग्रास की खेती के जरिए ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में एक नई शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में आगे बढ़ाने की परिकल्पना को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़ने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीपीएम जिले में लेमन ग्रास जैसी औषधीय और व्यावसायिक फसलों को ग्रामीण महिलाओं की आय का नया माध्यम बनाने की पहल की गई है। जनपद पंचायत पेंड्रा के ग्राम अमारू में गठित 10 महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने लगभग 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। इनमें ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह सहित अन्य स्वसहायता समूह शामिल हैं। महिलाओं का यह सामूहिक प्रयास केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से स्थायी ग्रामीण आजीविका का एक नया मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेतों से निकलेगा सुगंधित तेल, बाजार से जुड़ेगी महिलाओं की मेहनत लेमन ग्रास एक सुगंधित एवं औषधीय पौधा है, जिससे प्राप्त तेल का उपयोग विभिन्न उत्पादों में किया जाता है। ग्राम अमारू की महिलाएं इसकी खेती के बाद तेल निकालकर खुले बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। इससे खेती को सीधे बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। ज्योति महिला समूह की सदस्य श्रीमती गायत्री काशीपुरी ने बताया कि उनके समूह की 11 सदस्य पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास से तेल निकालकर बाजार एवं औषधीय संस्थानों में बेचा जाएगा। इसका उपयोग चाय, इत्र तथा विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है। श्रीमती गायत्री ने उत्साह के साथ कहा कि समूह की महिलाएं इस खेती को आने वाले समय में और विस्तार देना चाहती हैं। सरकारी मदद ने बढ़ाया हौसला, आजीविका के खुले कई रास्ते महामाया समूह की  सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की श्रीमती पूजा ध्रुव ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं के लिए आजीविका के कई नए रास्ते खुले हैं। समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि तथा बैंक लिंकेज का लाभ मिला है। इस आर्थिक सहयोग और समूह की सामूहिक शक्ति के बल पर महिलाएं आज केवल लेमन ग्रास की खेती ही नहीं कर रही हैं, बल्कि सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं। इससे महिलाओं की स्वयं की आय बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और उनमें निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। ‘लखपति दीदी’ के संकल्प की ओर मजबूत कदम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने स्वसहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय बढ़ाकर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में साय सरकार द्वारा भी ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जीपीएम जिले के अमारू में लेमन ग्रास की खेती इसी दिशा में संभावनाओं से भरा प्रयास है। यदि उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित होती है, तो यह गतिविधि महिलाओं के लिए नियमित और बेहतर आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। खेतों में उग रही फसल के साथ बढ़ रहे महिलाओं के सपने ग्राम अमारू की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ रहे सकारात्मक बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करती है। जिन हाथों ने वर्षों तक परिवार और घर की जिम्मेदारियां संभालीं, वही हाथ अब खेतों में लेमन ग्रास लगाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। समूह की ताकत, सरकारी योजनाओं का सहयोग और महिलाओं की मेहनत मिलकर गांव में आजीविका का नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली राज्य सरकार की नीतियों के बीच ग्राम अमारू की महिलाएं बदलाव की मजबूत कड़ी बनकर उभरी हैं। लेमन ग्रास की यह महक अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के आत्मविश्वास, उनके परिवारों की खुशहाली और आत्मनिर्भर ग्रामीण छत्तीसगढ़ की नई उम्मीद की खुशबू बन रही है।

गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है। स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी मती सुमन लता वाकरे आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया। 15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह समूह के माध्यम से मती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया। ‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा मती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है। महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल मती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान में सुमन लता की कहानी बनी प्रेरणा सेवा संकल्प अभियान के परिप्रेक्ष्य में सुमन लता वाकरे की सफलता की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। यह कहानी बताती है कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब लाभार्थी उन्हें अवसर में बदलकर अपनी मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करते हैं। गुदुमदेवरी की सुमन लता आज केवल अपने परिवार के लिए आय का मजबूत आधार नहीं बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि संगठित प्रयास, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

हौसलों की उड़ान: संघर्षों से लड़कर बनीं ‘लखपति दीदी’ कांति साहू, अब चार सफल कारोबार की मालिक

हौसलों की उड़ान: संघर्षों को मात देकर 'लखपति दीदी' बनीं कांति साहू दोना-पत्तल से कारोबार शुरू कर चार व्यवसायों का कर रही हैं सफल संचालन गांव की महिलाओं के लिए पेश की मिसाल रायपुर, स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर श्लखपति दीदीश् बन रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसी कई महिलाओं ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और छोटी पूंजी की मदद से  स्वरोजगार अपनाकर अपनी तकदीर बदली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत चल रहा लखपति दीदी अभियान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। इसका सबसे सटीक और जीवंत उदाहरण बनी हैं बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा की रहने वाली श्रीमती कांति साहू। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच कांति ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। समूह से जुड़ाव और 4 लाख की वित्तीय मदद          एक सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाली कांति साहू हमेशा से खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी के अभाव में उनका यह सपना दबा हुआ था। करीब तीन साल पहले वह गांव की महिलाओं के साथ मिलकर शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत और व्यावसायिक बारीकियों की समझ मिली। इसके बाद बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज, एसवीईपी योजना और मुद्रा ऋण के माध्यम से उन्हें करीब 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस पूंजी ने उनके सपनों को पंख दे दिए। एक नहीं, शुरू किए कई व्यवसाय          कांति दीदी ने जोखिम उठाते हुए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय विविधता को चुना। उन्होंने एक साथ कई आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय), सिलाई केंद्र, पति का मिला मजबूत साथ कांति साहू बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके पति महेन्द्र साहू हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। शुरुआती चुनौतियों को मात देने में पति-पत्नी की साझा मेहनत और समर्पण का बड़ा योगदान रहा। सालाना आय 3 लाख के पार           आज कांति साहू के सभी व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहे हैं। वर्तमान में इन व्यवसायों से हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये तक का टर्नओवर (कारोबार) हो रहा है, जिसमें से वे 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मासिक लाभ कमा रही हैं। इस तरह उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे उन्होंने आधिकारिक तौर पर श्लखपति दीदीश् की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है। महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल           आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही कांति का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे न केवल अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं। कांति साहू की यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले, तो वे समाज में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

सरकारी योजनाओं का मिला सहारा, प्रीति गुप्ता ने आत्मनिर्भर बनकर हासिल की नई पहचान

मुद्रा लोन और बिहान योजना ने बदली प्रीति गुप्ता की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल, सालाना 2.50 लाख रुपये तक की कर रही हैं आय अर्जित रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित योजनाएं जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम बुढाडांड की प्रीति गुप्ता आज सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। अपने परिश्रम, लगन और शासन की सहायता से उन्होंने ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना साकार किया है। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ी प्रीति गुप्ता को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग का उपयोग उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत करने में किया। उन्होंने गांव में ‘दुर्गा श्रृंगार एवं किराना दुकान’ की स्थापना की, जहां सौंदर्य प्रसाधनों से लेकर दैनिक उपयोग की विभिन्न वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रारंभ में छोटे स्तर पर शुरू किए गए इस व्यवसाय को प्रीति ने ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझते हुए लगातार विस्तार दिया। आज उनकी दुकान गांव की प्रमुख दुकानों में शामिल है और आसपास के ग्रामीणों के लिए आवश्यक वस्तुओं का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। मुद्रा लोन से मिली आर्थिक सहायता और उनके निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 2.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही हैं। इस आय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे आत्मनिर्भरता और महिला उद्यमिता की प्रेरक मिसाल भी बन गई हैं। प्रीति गुप्ता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि बिहान और मुद्रा योजना के सहयोग से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास मिला और आज वे सम्मानजनक आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। प्रीति की कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं भी स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर सकती हैं और समाज में परिवर्तन की वाहक बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लेमरू में मंजू बहन के स्टॉल पर चखा गुपचुप, आत्मीय संवाद में जानी सफलता की कहानी

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के कोरबा जिले के लेमरू प्रवास के दौरान आत्मीयता, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्रीसाय ने यहां ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लखपति दीदी श्रीमती मंजू द्वारा संचालित छोटे से स्टॉल पर पहुंचकर उनके हाथों से बने चटपटे गुपचुप का स्वाद लिया और आत्मीय संवाद किया। बातचीत के दौरान श्रीमती मंजू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने छोटे स्तर से अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी। गुपचुप स्टॉल से होने वाली बचत और लगातार मेहनत के बल पर आज वे भवन निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली ‘सेंटरिंग प्लेट’ के व्यवसाय से भी जुड़ गई हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसले, परिश्रम और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्रीसाय ने मंजू बहन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना आज महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक मजबूती का मजबूत आधार बन रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्रीसाय ने श्रीमती मंजू को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेहनत को अवसर और हौसले को सहारा मिलता है, तब बदलाव केवल एक व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं र

बालोद का औराटोला बना मिसाल: आत्मनिर्भरता से ‘लखपति दीदी ग्राम’ की पहचान

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।  जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।  इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं। कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है। बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है। प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे … Read more

जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई दिशा, बढ़ी रफ्तार

रायपुर : जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई रफ्तार लखपति दीदी 18 हजार से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, गांवों की अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।

लखपति दीदी: 18 हजार से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, गांवों की अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।  

आजिविका की विभिन्न गतिविधियां ने भगवती को बनाया सफल उद्यमी

रायपुर आजिविका की विभिन्न गतिविधियां ने भगवती को बनाया सफल उद्यमी छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) योजना से ग्रामीण अंचलों की महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत गुमगरा खुर्द की रहने वाली  भगवती सिंह आज आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रही हैं। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली भगवती आज न केवल अपने परिवार का संबल बनी हैं, बल्कि समाज में ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं। बिहान से मिला आत्मविश्वास का नया सवेरा  भगवती सिंह बताती हैं कि वर्ष 2014 में ‘रेखा महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने से पहले वे काफी संकोच करती थीं और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क न के बराबर था। समूह का हिस्सा बनने के बाद उनमें न केवल आत्मविश्वास का संचार हुआ, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों और समाज को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिला। सब्जी की खेती से ईंट निर्माण तक का सफर अपनी आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में भगवती ने पहला कदम समूह से मिली 15 हजार रुपये की आरएफ  राशि के साथ बढ़ाया, जिससे उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की। इस प्रारंभिक सफलता के बाद उन्होंने 30 हजार रुपये की सीआईएफ राशि का निवेश ईंट निर्माण के कार्य में किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं मेहनत कर 50 हजार ईंटें बनवाईं, जिससे प्राप्त लाभ ने उनके बच्चों की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। आज उनके दोनों पुत्र, विवेक और विक्की, अच्छे स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। व्यवसाय में विविधता और बढ़ती आय सफलता के इस क्रम को जारी रखते हुए भगवती ने समूह के माध्यम से 50 हजार रुपये का बैंक लोन लिया। इस राशि से उन्होंने गांव में ही किराना और कपड़े की दुकान शुरू की। इन विविध आय स्रोतों से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार आया है। कच्चे मकान से पक्के घर का सपना साकार भगवती बड़े गर्व से कहतीं हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था, लेकिन बिहान योजना से जुड़कर बढ़ी आजीविका के दम पर उन्होंने अपना पक्का घर बनवा लिया है। आज उनके पति श्री भलेनाथ सिंह उरे और उनके बच्चे अत्यंत खुशहाल और गौरव महसूस करते हैं। अपनी उन्नति का श्रेय शासन की योजनाओं को देते हुए भगवती सिंह कहती हैं, “बिहान योजना की बदौलत आज हम ग्रामीण दीदियां अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को सहृदय आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने हम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है।  प्रशासन द्वारा ’बिहान’ के माध्यम से भगवती जैसी हजारों महिलाएं आज न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को धरातल पर साकार करने में अपना योगदान दे रही हैं।

लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री साय

रायपुर लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।  कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी  राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है। बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं। जशपुर जिले की लखपति दीदी  अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  सुनील सोनी, सचिव  भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त  महादेव कावड़े, कलेक्टर  गौरव सिंह, मिशन संचालक  अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।