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कोसा सिल्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर, हजारों घरों में पहुंच रही खुशहाली और आय

जगदलपुर. बस्तर का रैली कोसा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है. महज पांच ग्राम वजन वाले एक कोसा से करीब एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है. हर वर्ष करोड़ों की संख्या में कोसा उत्पादन यहां के गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है. साल वनों से घिरे बस्तर में रेशम पालन की समृद्ध परंपरा आज भी कायम है. रेशम विभाग द्वारा संचालित प्रगुणन केंद्र इस उद्योग को मजबूती दे रहे हैं. बस्तर में उत्पादित कोसा का प्रसंस्करण प्रदेश के कई जिलों में किया जाता है. यहीं से तैयार वस्त्र देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचते हैं. जापान, सिंगापुर, यूएई सहित कई देशों में इसकी मांग बनी हुई है. कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक बनावट और आरामदायक गुणों के कारण पसंद किए जाते हैं. धागे के अपशिष्ट से भी गलीचे और दरियां तैयार की जाती हैं. महिला समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और सशक्त बनाया है. कालीपुर क्षेत्र में महिलाएं धागा निर्माण से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं. बस्तर का कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

रेत कारोबार को लेकर खूनी संघर्ष, फॉर्च्यूनर में सवार शख्स की जलकर मौत; 4 संदिग्ध पकड़े गए

कोरिया. रेत का विवाद जिले में मरने-मारने में तब्दील हो चुका है. बीती रात जिले के सोनहत तहसील अंतर्गत ग्राम कटगोड़ी में हुई दिल दहला देने वाली घटना में फॉर्च्यूनर गाड़ी को आरोपियों ने पहले टिपर से मारकर क्षतिग्रस्त किया, फिर आग लगा दी. घटना में गाड़ी में सवार भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं तीन अन्य सवार घायल हो गए. आरोपी हिरासत में लिए गए हैं. जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार रात 11 बजे की है. भरत सिंह अपने साथियों के साथ जैसे ही नवगई गांव पहुंचे आरोपियों ने पहले टिपर से फॉर्च्यूनर को कई बार टक्कर मारी, इसके बाद वाहन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी. क्षतिग्रस्त वाहन के दरवाजे जाम होने की वजह से शीशा तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास कर रहे सवारों से आरोपियों ने मारपीट भी की. घटना में जहां फॉर्च्यूनर में सवार भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जलकर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका उपचार अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में जारी है. घटना की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी रात में ही मौके पर पहुंचे. पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अक्षय त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मन्नू त्रिपाठी शामिल हैं. बाकी तीन फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है. मौके पर पहुंचे बैंकुठपुर विधायक बताया जा रहा है कि मामले में मरने वाले भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह आरोपी मनोज त्रिपाठी के बीच रेत उत्खनन को लेकर विवाद था. लल्ला सिंह आरोपी मनोज त्रिपाठी 3 अन्य लोगों के साथ मंगलवार की दोपहर आपसी झड़प भी हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई थी. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दिया जवाब कोरिया जिले में घटित घटना को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि घटना की पूरी जांच होगी. घटना में जो तथ्य आयेंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी. साव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश का अपराधीकरण किया. कांग्रेस घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में विकास का महापर्व, CM साय आज देंगे 700 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गरियाबंद के क्षेत्रवासियों को 700 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने वाले हैं. मुख्यमंत्री बुधवार को आज सूरजपुर और गरियाबंद जिले के दौरे पर रहेंगे. निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक वह सुबह 11 बजे रायपुर से सूरजपुर के लिए रवाना होंगे. जहां नवनिर्वाचित अध्यक्ष, पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे. कार्यक्रम के बाद दोपहर करीब एक बजे गरियाबंद के लिए प्रस्थान करेंगे. विधान सभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह की मौजूदगी में सीएम साय दोपहर करीब 3 बजे पुलिस परेड ग्राउंड में 700 करोड़ के विकास कार्य का शिलान्यास लोकार्पण करेंगे. 4 बजे नव निर्मित कचना धुरवा गोंडवाना भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे. वहीं दर्रिपारा ग्राम में आयोजित आदिवासी समाज के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे. वहीं नव निर्मित कचना ध्रुवा गोंडवाना भवन का लोकार्पण करेंगे.

जहां कभी था नक्सलियों का गढ़, आज वहां स्वास्थ्य सेवा का केंद्र; डॉक्टर रामटेके की तपस्या रंग लाई

कांकेर एक समय छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था. घने जंगलों से घिरा यह इलाका नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था. सड़कें कम थीं, संचार के साधन सीमित थे और स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर. किसी को गंभीर बीमारी हो जाए तो इलाज से ज्यादा चिंता अस्पताल तक पहुंचने की होती थी. मलेरिया यहां की सबसे बड़ी समस्या थी और हर साल सैकड़ों परिवार इसके कारण तबाह हो जाते थे।  लेकिन आज उसी अंतागढ़ का एक सरकारी अस्पताल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बन चुका है. यह बदलाव किसी बड़े बजट, किसी कॉर्पोरेट निवेश या किसी चमत्कार से नहीं आया, बल्कि एक डॉक्टर की 23 साल लंबी तपस्या और जिद का नतीजा है. यह कहानी है डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की, जिन्होंने वर्ष 2003 में अंतागढ़ में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 23 साल पहले शुरू किए अपने मिशन को अब एक मॉडल में बदल दिया है।  जब लोगों ने कहा- वहां मत जाओ वर्ष 2003 में जब डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की नियुक्ति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में हुई, तब यह इलाका डॉक्टरों के लिए सबसे कठिन पोस्टिंग मानी जाती थी. नक्सली गतिविधियां लगातार होती थीं. कई गांव ऐसे थे जहां पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था. पूरे विकासखंड में न कोई निजी डॉक्टर था, न नर्सिंग होम और न कोई निजी अस्पताल।  ऐसे माहौल में अधिकांश लोग यहां लंबे समय तक काम करने की कल्पना भी नहीं करते थे. लेकिन डॉक्टर रामटेके ने इसे चुनौती नहीं, बल्कि मिशन के रूप में लिया।  स्थानीय लोग बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने अस्पताल के कमरे को ही अपना घर बना लिया था. दिन हो या रात, मरीजों के लिए वे हमेशा उपलब्ध रहते. धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि इस इलाके की सबसे बड़ी बीमारी केवल मलेरिया नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का टूटता भरोसा भी है।  गांव-गांव जाकर समझी लोगों की पीड़ा डॉक्टर रामटेके ने इलाज को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखा. वे गांवों में जाते, आदिवासी परिवारों के बीच बैठते, उनकी भाषा और जीवनशैली को समझने की कोशिश करते. उन्हें पता चला कि कई लोग बीमारी को सामान्य मानकर इलाज नहीं कराते और जब तक अस्पताल पहुंचते, हालत गंभीर हो चुकी होती।  यहीं से उन्होंने एक अलग रणनीति तैयार की. उनका मानना था कि बीमारी का इलाज अस्पताल में नहीं, बल्कि समाज के भीतर जाकर करना होगा।  मलेरिया बना सबसे बड़ा लक्ष्य उस समय अंतागढ़ में मलेरिया भयावह रूप ले चुका था. वर्ष 2003 में क्षेत्र का API (Annual Parasite Incidence) 51.11 था, जो 2006 तक बढ़कर 70.65 पहुंच गया. केवल वर्ष 2006 में 4,942 मलेरिया मरीज दर्ज किए गए।  स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 95 से 98 प्रतिशत मामले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया के थे, जो सबसे खतरनाक माना जाता है. सेरेब्रल मलेरिया और अन्य जटिल मामलों के कारण लोगों की जान तक चली जाती थी. डॉक्टर रामटेके ने तय किया कि अगर अंतागढ़ को बदलना है तो सबसे पहले मलेरिया को हराना होगा।  लोगों का भरोसा जीता, फिर बीमारी को हराया उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, मिथानिनों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय को एक साथ जोड़ा. गांवों में रैलियां निकाली गईं, ग्राम सभाएं आयोजित की गईं, दीवारों पर संदेश लिखे गए और घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया कि मलेरिया से कैसे बचा जा सकता है।  वर्ष 2010 और 2015 में पूरे इलाके में लॉन्ग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट (LLIN) वितरित किए गए. लोगों को मच्छरदानी के उपयोग की आदत डाली गई।  धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा. लोग समय पर जांच कराने लगे. बुखार होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने लगे. मलेरिया की चेन टूटने लगी।  आज स्थिति यह है कि जहां वर्ष 2006 में 4,942 मरीज थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 127 रह गई. API 70.65 से गिरकर 1.39 पर पहुंच गया. मलेरिया जनित मौतों और गंभीर मामलों में भी भारी कमी आई।  मलेरिया के बाद अस्पताल की बारी बीमारी पर नियंत्रण मिलने के बाद डॉक्टर रामटेके ने अस्पताल की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया. उन्होंने “कायाकल्प” योजना के तहत अस्पताल को एक मॉडल संस्थान बनाने की शुरुआत की।  अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएं, हाइजीन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों पर लगातार काम किया गया।  एक समय दो कमरों के खपरेल भवन से चलने वाला यह स्वास्थ्य केंद्र आज 30 बिस्तरों वाले व्यवस्थित अस्पताल में बदल चुका है।  350 मानकों पर खरा उतरता अस्पताल कायाकल्प योजना के तहत किसी अस्पताल का मूल्यांकन 350 से अधिक बिंदुओं पर किया जाता है. इसमें साफ-सफाई से लेकर संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के अनुभव से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक सब कुछ शामिल होता है। अंतागढ़ अस्पताल ने इन सभी मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है. पिछले पांच वर्षों से यह बस्तर संभाग में प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है. वर्ष 2025 में इसे पूरे छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूसरा स्थान मिला।  एक डॉक्टर की वजह से बदली हजारों जिंदगियां 23 वर्षों तक लगातार एक ही क्षेत्र में काम करना अपने आप में असाधारण है. खासकर तब, जब वह इलाका नक्सल प्रभावित, आदिवासी बहुल और संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो।  स्थानीय लोग कहते हैं कि डॉक्टर रामटेके केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हैं. कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म उनके हाथों हुआ और आज वे युवा हो चुके हैं. कई परिवार ऐसे हैं जो उन्हें भगवान का रूप मानते हैं क्योंकि उन्होंने उनके प्रियजनों की जान बचाई।  अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू होगा मॉडल डॉक्टर रामटेके द्वारा विकसित मलेरिया नियंत्रण और अस्पताल प्रबंधन मॉडल को अब राज्य सरकार पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने की तैयारी कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यदि अंतागढ़ जैसे कठिन क्षेत्र में यह मॉडल सफल हो सकता है, तो राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई मिल सकती है।  डर से भरोसे तक का सफर अंतागढ़ की यह कहानी केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं है. यह उस विश्वास की कहानी है जो एक डॉक्टर ने समाज में जगाया. यह … Read more

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से किसान मनोहर यादव की खेती बनी अधिक लाभकारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचंदा निवासी किसान  मनोहर यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती की लागत कम करने के साथ-साथ उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। लगभग दो एकड़ भूमि पर खेती करने वाले  यादव पहले बढ़ती कृषि लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से चिंतित रहते थे। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा राज्य शासन की किसान हितैषी पहलों से प्रेरित होकर उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और अपनी फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग शुरू किया। नई तकनीक के परिणाम शीघ्र ही सामने आने लगे। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ, जिससे खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद मिली। कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित होने वाले नैनो उर्वरकों ने उनकी खेती को पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बना दिया है।  मनोहर यादव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों का परिवहन और उपयोग बेहद सरल है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। बेहतर गुणवत्ता वाली फसल और बढ़ी हुई पैदावार का सीधा लाभ उनकी आय में वृद्धि के रूप में मिला है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ नवाचार आधारित खेती ही समृद्धि का मार्ग है। उनका मानना है कि नई तकनीकों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।

56 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की, युवाओं को दिए क्रिकेट किट

रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने 5 गांवों में लगाई चौपाल उप मुख्यमंत्री तथा स्थानीय विधायक  अरुण साव ने लोरमी के खेकतरा, कुम्हरौली, मोहतरा कुर्मी, पीपरखुंटा और औराबांधा में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने इन गांवों में 56 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने जनचौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनके सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने इस दौरान मोदी सरकार और साय सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने गांववालों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया। उप मुख्यमंत्री  साव ने खेकतरा में महामाया मंदिर में ज्योति कलश भवन का लोकार्पण कर ग्रामवासियों को समर्पित किया। उन्होंने औराबांधा में नवनिर्मित सामुदायिक भवन एवं खाद्यान्न भंडारण भवन का लोकार्पण किया।  साव ने पांचों गांवों के युवाओं को क्रिकेट किट भी प्रदान किया। उन्होंने युवाओं को खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

खेत में बैल चराते समय दर्ज कराई शिकायत, प्रशासन ने घर पहुंचकर खुलवाया बैंक खाता और बनवाया किसान क्रेडिट कार्ड

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सराईटीकरा निवासी किसान  राजनाथ राजवाड़े का अनुभव इसका सशक्त उदाहरण है, जहां एक फोन कॉल पर प्रशासन ने महज 24 घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान कर दिया।  राजनाथ राजवाड़े आगामी खरीफ फसल के लिए खाद की व्यवस्था को लेकर चिंतित थे। खेत में बैल चराने के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और मात्र दो घंटे के भीतर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली तथा सीधे उनके घर पहुंच गए। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि शासकीय व्यवस्था के माध्यम से खाद-बीज प्राप्त करने के लिए किसान का सहकारी बैंक में खाता और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना आवश्यक है। अधिकारियों ने स्वयं पहल करते हुए किसान को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग दिया। बैंक का समय समाप्त हो जाने के कारण अगले दिन सहकारी बैंक में उनका खाता खुलवाया गया, पासबुक जारी की गई और आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए। इसके बाद अल्प समय में ही किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया। केसीसी बनने के साथ ही  राजवाड़े को आवश्यक खाद और बीज उपलब्ध करा दिए गए तथा भविष्य में कृषि कार्यों के लिए ऋण एवं नकद सहायता प्राप्त करने का रास्ता भी आसान हो गया। बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए समस्या का समाधान मिलने से किसान ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के 24 घंटे के भीतर ही उनका पूरा काम हो गया। उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा और कृषि विभाग के अधिकारियों ने घर पहुंचकर हर संभव सहायता प्रदान की।  राजनाथ राजवाड़े ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसानों और आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए जा रहे संवेदनशील और जनहितकारी प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभा का आयोजन, विकास योजनाओं पर होगी चर्चा

रायपुर. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास, पंचायतों की वित्तीय स्थिति, आवास योजनाओं, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय विकास कार्यों जैसे जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची होगी तैयार ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। ग्राम सभा द्वारा शासन की मार्गदर्शिका एवं एसओपी के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर निराकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। वीबी जी राम जी के संबंध में दी जाएगी जानकारी ग्राम सभा में पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति, तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी तथा इसके क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने, बेरोजगारी भत्ते के बेहतर प्रावधान, समय पर मजदूरी भुगतान और ग्राम सभा आधारित विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। ग्राम सभा में ज्यादा से ज्यादा सहभागिता की अपील प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा ग्राम विकास से जुड़े निर्णयों में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। ग्राम सभा में पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों की समीक्षा, पंचायतों के आय-व्यय का अनुमोदन, विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची तथा पंचायत संपत्तियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 के परिणामों को भी ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण सत्र आयोजित

रायपुर  लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।         प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव  अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI (Artificial Intelligence) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। सत्र में ।प् के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की।            कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों- कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार मती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सु निधि साहू,  सुधीर सुलतानिया,  लक्षित त्रिलोक सेठिया,  अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

यूएसएससी ने पाँच वर्षों में खरीद, अनुबंध और विक्रेता प्रबंधन में स्थापित की नई पहचान

नवा रायपुर एनटीपीसी के यूनिफाइड शेयर्ड सर्विस सेंटर (यूएसएससी) का स्थापना दिवस 15 जून 2026 को नवा रायपुर स्थित परिसर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्ष 2021 में स्थापित यूएसएससी आज एनटीपीसी की महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्रीकृत संचालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो खरीद एवं अनुबंध प्रक्रियाओं, विक्रेता प्रबंधन तथा विभिन्न सेवाओं के प्रभावी निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पश्चिम क्षेत्र-II) एवं कार्यकारी निदेशक-यूएसएससी  नीरज जलोटा ने संगठन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में यूएसएससी ने असाधारण दृढ़ता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एनटीपीसी के रणनीतिक एवं परिचालन लक्ष्यों को पूरा करने में एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि, सक्रिय रेट कॉन्ट्रैक्ट और पंजीकरणों में बढ़ोतरी तथा विक्रेता आधार के विस्तार जैसी उपलब्धियां यूएसएससी की निरंतर प्रगति को दर्शाती हैं।  जलोटा ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक एकीकरण तथा रेट कॉन्ट्रैक्ट और विक्रेता पंजीकरण के विस्तार पर विशेष बल दिया। समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य निष्पादन करने वाले यूएसएससी के 40 कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने कर्मचारियों के उत्साह और मनोबल को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक केक कटिंग समारोह से हुई, जिसके बाद कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत इन-हाउस स्कीट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। रंगारंग प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया और कर्मचारियों के बीच टीम भावना को और मजबूत किया। इस अवसर पर  राम भजन मलिक, कार्यकारी निदेशक (ऐश मैनेजमेंट एवं एनआई),  बिद्या नंद झा, कार्यकारी निदेशक (ऑपरेशन सर्विसेज),  हर्ष आहूजा, कार्यकारी निदेशक (यूएसएससी सी एंड एम) सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगठन की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की गई।