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छत्तीसगढ़ में तबादलों की लिस्ट जारी: परिवहन विभाग के 20 RTO अधिकारी इधर से उधर

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य में सुचारू परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से 20 अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया है। महानदी भवन से जारी इस आदेश में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों से लेकर तकनीकी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। आदेश के अनुसार, कई जिलों के जिला परिवहन अधिकारियों को बदला गया है। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं…     विवेक सिन्हा: जिला परिवहन अधिकारी (कोरबा/पेंड्रा) से अब जांजगीर-चांपा भेजे गए हैं।     अतुल असैया: जिला परिवहन अधिकारी (कोण्डागांव) से अब कोरबा की जिम्मेदारी संभालेंगे।     गौरव साहू: जांजगीर-चांपा से स्थानांतरित कर रायगढ़ का जिला परिवहन अधिकारी बनाया गया है।     अब्दुल मुजाहिद: जिला परिवहन अधिकारी (धमतरी) से परिवहन मुख्यालय, नवा रायपुर स्थानांतरित किए गए हैं।     अनिल भगत: कोरिया से राजनांदगांव (अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) भेजे गए हैं। तकनीकी और मुख्यालय स्तर पर बदलाव सूची में एआरटीओ योगेश भण्डारी (बालोद), किशनलाल माहौर (बेमेतरा) और शिवभगत रावटे (धमतरी) जैसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके अलावा, तकनीकी विभाग से चुन्नीलाल देवांगन को भी मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है।  

कांकेर एकलव्य की छात्रा कृतिका टेकाम ने देशभर के एकलव्य विद्यालयों में की टॉप

रायपुर छत्तीसगढ़ के कांकेर निवासी कृतिका टेकाम ने सीबीएसई 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। होनहार छात्रा कृतिका ने संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कृतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कांकेर की होनहार छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल कृतिका के परिश्रम और प्रतिभा का परिणाम है, बल्कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी। आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कांकेर की छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और अनुकूल वातावरण मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री  नेताम ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।   गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा हाल ही में शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की छात्रा कु. कृतिका टेकाम देशभर के एकलव्य विज्ञालयों में प्रथम स्थान हासिल की है।  आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि कृतिका टेकाम कांकेर जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही थी। संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश के साथ-साथ आदिम जाति विभाग को भी गौरवान्वित किया है। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थियों द्वारा भी अच्छा परीक्षा परिणाम प्राप्त किया गया है। प्रदेश में संचालित 75 एकलव्य विद्यालयों में से हाई स्कूल स्तर पर 71 एकलव्य विद्यालय संचालित हैं। इनमें 11 एकलव्य विद्यालयों द्वारा शत्-प्रतिशत परीक्षा परिणाम अर्जित किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में संचालित कुल 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी का परिणाम है कि शिक्षण सत्र 2025-26 में चौथी एकलव्य विद्यालयों की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के दल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया गया।  आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर ने बताया कि इसी प्रकार भारत सरकार, पंचायती राज, मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित मॉडल यूथ ग्राम सभा प्रतियोगिता में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कोसमबुड़ा जिला-गरियाबंद को देश में संचालित 800 विद्यालयों में से राष्ट्रीय विजेता चुना गया। गरियाबंद के चयनित इन विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, साथ ही इस विद्यालय को एक करोड़ रूपए की उपहार राशि प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 13 हजार 868 हितग्राहियों को 11.75 करोड़ की मिली छूट

रायपुर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना कबीरधाम जिले के आम नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत कबीरधाम जिले के कुल 13 हजार 868 उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, जिन्हें अब तक 11 करोड़ 75 लाख 38 हजार 570 रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। यह योजना बीपीएल, निम्नदाब घरेलू एवं कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है, ताकि वे अपने पुराने बकाया बिजली बिलों के बोझ से मुक्त हो सकें। योजना के अंतर्गत सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि जिले में योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष ’समाधान शिविरों’ का भी लगाई गई। विभाग की टीमें न केवल इन शिविरों में उपस्थित रहकर सहायता प्रदान कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर भी लोगों को योजना की जानकारी दे रही हैं। उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट की प्रक्रिया और आवेदन संबंधी जानकारी सरल भाषा में समझाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 31 मई तक इस योजना का लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया हैं, वे इस योजना का लाभ लेकर अपने बकाया का निपटारा कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। बकाया बिजली बिलों का समय पर निपटारा कर उपभोक्ता न केवल आर्थिक बोझ से राहत पा सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही, यह कदम बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि कवर्धा सर्कल के 5 हजार 63 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 75 लाख 97 हजार 706 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 566 उपभोक्ताओं के 22 लाख 67 हजार 926, एपीएल के 538 उपभोक्ताओं के 48 लाख 62 हजार 408 रूपए और बीपीएल के 3 हजार 959 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 4 लाख 67 हजार 371 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसी तरह पंडरिया सर्कल के 8 हजार 805 उपभोक्ताओं के 7 करोड़ 99 लाख 40 हजार 864 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 340 उपभोक्ताओं के 27 लाख 35 हजार 629, एपीएल के 1881 उपभोक्ताओं के 1 करोड़ 9 लाख 97 हजार 435 रूपए और बीपीएल के 7 हजार 284 उपभोक्ताओं के 6 करोड़ 62 लाख 7 हजार 801 रुपये की छूट प्रदान की गई है।

ऑनलाइन सट्टे की लत ने बनाया चोर: बिलासपुर में एसी मिस्त्री ने गहने गिरवी रख उड़ाए पैसे, पुलिस ने पकड़ा

 बिलासपुर सूने मकानों में सिलसिलेवार चोरी करने वाले शातिर एसी मिस्त्री को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एसीसीयू और सिविल लाइन पुलिस तीन सौ से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर उस तक पहुंची है। आरोपित सट्टे की लत के कारण अपराध की राह पर चला था। एसएसपी रजनेश सिंह ने सिलसिलेवार चोरी का पर्दाफाश करते हुए बताया कि आरोपित सूरज काछी मंगला क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर एसी रिपेयरिंग के बहाने घरों की रेकी करता था। वह सुने मकानों को चिन्हित कर टोपी और मास्क पहनकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। आरोपित ने शहर में कुल आठ चोरियां करना स्वीकार किया है। चोरी को अंजाम देने बाद आरोपित गहनों को गोल्ड लोन कम्पनी में गिरवी रख रुपये ले लिया करता था। खाते में रकम आने पर वह परी मैच ऐप पर करीब 30 लाख रुपये की बड़ी रकम हार चुका था। पुलिस ने आरोपित से 252 ग्राम सोना, चांदी और चोरी की रकम से खरीदे गए घरेलू सामान सहित 45.84 लाख का माल बरामद किया है। एसी रिपेयरिंग के दौरान करता था सूने मकान की रेकी आरोपित पेशे से एसी मिस्त्री था, जिसका फायदा उठाकर वह पाश कॉलोनियों में सर्विसिंग के बहाने घुसता था। इस दौरान वह उन मकानों की सूची तैयार करता था जहां ताला लगा होता था। वह वारदात से पहले भागने के रास्तों और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का पूरा अवलोकन कर लेता था, ताकि पकड़ा न जा सके। इन आठ बड़ी चोरियों का हुआ पर्दाफाश (सामान राशि के साथ)     कुदुदंड 15 अक्टूबर 2025- सूने मकान से सोने-चांदी के जेवरात लगभग तीन लाख पार किए।     यमुना नगर 3 नवम्बर 2025- ताला तोड़कर चांदी के जेवरात और नकदी 50 हजार की चोरी की।     नंद विहार 23 नवम्बर 2025- सोने की चेन, बाली व 65 हजार नगद सहित करीब 4.65 लाख का सामान     गीतांजलि पार्क 5 दिसम्बर 2025- मंगलसूत्र, लाकेट व नगद सहित करीब 1.85 लाख की चोरी।     इन्द्रसेन कॉलोनी 9 दिसम्बर 2025- आलमारी तोड़कर चांदी के जेवर व पांच हजार नकद सहित कुल 25 हजार का सामान।     गुलमोहर पार्क 11 दिसम्बर 2026- सोने का हार, टाप्स व चांदी के जेवर सहित करीब 1.90 लाख की चोरी।     27 खोली में फरवरी 2026- कंगन, तीन चेन व छह अंगूठी सहित कुल 15.50 लाख के जेवर पार।     नेहरू नगर 20 अप्रैल 2026- अस्पताल के पास से सोने का नेकलेस, चेन व नकदी सहित करीब 3.10 लाख की चोरी। ऑनलाइन सट्टा ऐप में बेटिंग करने के लालच में बना चोर सूरज काछी को परी मैच एप में ऑनलाइन सट्टा ऐप की लत लग गई थी। ऐप पर बेटिंग के दौरान वह करीब 30 लाख रुपये हार गया, जिसकी भरपाई के लिए उसने चोरी का रास्ता चुना। वह चोरी के सामान से मिलने वाली रकम को वापस सट्टे में लगाकर हार को जीत में बदलने का प्रयास करता था। पुरानी क्राइम ब्रांच निष्क्रिय, नई टीम को सफलता एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि पुरानी क्राइम ब्रांच निष्क्रिय हो चुकी थी। नई एसीसीयू का गठन किया गया है। इस नई टीम की तकनीकी दक्षता और सक्रियता के कारण ही शहर में हो रही सिलसिलेवार चोरियों पर अंकुश लगा है और आरोपित पकड़ा गया है। पुलिस को चकमा देने कपड़ो का उपयोग आरोपित सूरज कांछी काफी शातिर चोर है। वह पुलिस व लोगों को धोखा देने के लिए बैग में दो से तीन कपड़े साथ लेकर चलता था। चोरी की वारदात को अंजाम देने बाद वह अपने कपड़े वही बदल लिया करता था, ताकि पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की जांच के दौरान एक कपड़े में दिखाई न देने पर शंका न हो। वहीं फोन पर बात करने का दिखावा करता था लेकिन काल नहीं करता, जिससे डम्प लोकेशन से उसे ट्रैस न किया जा सके।     आरोपित सट्टे की लत को पूरा करने के लिए चोरी करता था। एसी रिपेयरिंग के लिए जाने के दौरान वह सूने मकानों की रेकी किया करता और फिर रात में जाकर उन मकानों का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया करता था।     रजनेश सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर  

खराब मौसम ने बिगाड़ा तेंदूपत्ता सीजन, बारिश और ओलों से गुणवत्ता और संग्रहण दोनों पर असर

सुकमा. जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण पर इस बार मौसम का स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुई ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण कई क्षेत्रों में पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिसके चलते मानक से कम पत्तों को अलग किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में खरीदी प्रक्रिया लगातार जारी है। सुकमा में कुल 727 फड़ संचालित हैं, जिनमें से 350 फड़ सक्रिय हो चुके हैं। अब तक 35 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है। विभाग के अनुसार दूरस्थ इलाकों में संग्रहण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ क्षेत्रों में देरी को सामान्य बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और संग्राहकों को उचित लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगामी एक सप्ताह में सभी संग्रहण केंद्रों के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है। विभाग का लक्ष्य गुणवत्ता के साथ अधिकतम तेंदूपत्ता संग्रहण सुनिश्चित करना है, ताकि मौसम की चुनौतियों के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 के लिए आवेदन 1 मई से

रायपुर छत्तीसगढ़ में संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन, लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए लेखा प्रशिक्षण आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य वित्तीय नियमों और ट्रेजरी कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। 3 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके नियमित लिपिक आवेदन कर सकते हैं, जो रायपुर/बिलासपुर में आयोजित आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिये 01 मई 2026 से 29 मई 2026 के मध्य आवेदन स्वीकार किये जायेंगें।         संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन के आदेशानुसार सरकारी विभागों के लिपिकों को लेखा संबंधी नियमों, वित्तीय प्रबंधन और लेखापरीक्षा में सक्षम बनाना है। ऐसे लिपिक वर्गीय कर्मचारी जिन्होंने 3 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो। प्राचार्य शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिए 3 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके लिपिक वर्गीय कर्मचारी अपने कार्यालय प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में के आवेदन पत्र भेज सकते हैं। इस तिथि के पूर्व एवं पश्चात प्राप्त आवेदन- पत्रों पर विचार नही किया जाएगा। निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र ही मान्य होगा।        यह आवेदन शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला,नगर घड़ी चौक रायपुर को 29 मई  2026 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त हो जाना चाहिए। मानक आवेदन पत्र पर ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगें। आवेदन जिस सत्र के प्रशिक्षण हेतु किया गया है, उस सत्र के लिये ही मान्य होगा। पूर्व प्रचलित आवदेन पत्र स्वीकार नही किये जायेगें। आवेदन पत्र के साथ अन्य आवश्यक सुसंगत दस्तावेज संलग्न होना चाहिए। आवेदन का निर्धारित प्रारूप एवं निर्देश रायपुर संभाग के समस्त जिला कोषालयों के सूचना पटल पर अवलोकन किये जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार  नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री  साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा। इस अवसर पर सु निशा द्विवेदी, सु चित्रा पटेल, सु लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक सु संगीता लकड़ा एवं सु आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने सुलझाए लंबित प्रकरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी नीतियों एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की सक्रियता के चलते राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षों से लंबित विद्युत प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है। योजना के तहत हजारों उपभोक्ताओं को राहत ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लंबित विद्युत देयकों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट दी जा रही है।  इसी क्रम में सूरजपुर जिले के एक उपभोक्ता को 90 हजार रुपये से अधिक के बकाया बिल पर 55 हजार रुपये से अधिक की छूट प्रदान की गई, जिससे उन्होंने शेष राशि का भुगतान कर अपना खाता पूर्णतः शून्य कर लिया। लंबित अमानत राशि का त्वरित भुगतान फोरम की सक्रिय पहल के तहत लंबे समय से लंबित अमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के मामलों का भी निराकरण किया जा रहा है। एक प्रकरण में एक वर्ष से लंबित राशि को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किया गया। साथ ही, इस प्रकार की देरी पर फोरम द्वारा संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। समयबद्ध समाधान पर जोर विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। योजना का लाभ लेने की अपील विभागीय अधिकारियों ने प्रदेश के सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ का अधिकतम लाभ उठाएं। शासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पुराने बकाया से मुक्ति दिलाकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जा सके।

जनजातीय क्षेत्रों के लिए बड़ी पहल: नक्सल मुक्त क्षेत्रों में जल्द लागू होगा ‘नियद नेल्ला नार 2.0’

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने दिए कई आवश्यक निर्देश मुख्यमंत्री साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा – रामविचार नेताम आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मंत्री नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव मरपच्ची, विधायक रायमुनी भगत, विधायक चैतराम अटामी, विधायक विक्रम उसेंडी, विधायक उद्देश्वरी पैकरा, विधायक नीलकंठ टेकाम, विधायक आशाराम नेताम, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

जल प्रबंधन का ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लिए बना मिसाल

​रायपुर        छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन और जैव-विविधता के केंद्र बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य ने इस भीषण गर्मी में वन्यजीव संरक्षण की एक नई इबारत लिखी है। जब पारा आसमान छू रहा है और प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, तब बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक और व्यावहारिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। ​हर 5 वर्ग किलोमीटर पर पानी की उपलब्धता      ​अभयारण्य प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र का विस्तृत मानचित्रण (Mapping) कर 240 से अधिक जल स्रोतों को चिन्हित किया है। इसमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर शामिल हैं। रणनीति ऐसी बनाई गई है कि वन्यप्राणियों को पानी के लिए भटकना न पड़े। प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ​मैनेजमेंट का 'स्मार्ट' फॉर्मूला: मैपिंग से जियो-टैगिंग तक     ​ बारनवापारा का यह मॉडल केवल पानी भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा और तकनीक पर आधारित है। स्थलों का ​नियमित निगरानी का प्रबंध किया गया है। प्रत्येक 15 दिनों में जल स्तर का आकलन किया जाता है। 'स्टाफ गेज' के माध्यम से जल स्तर मापकर स्रोतों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि जहां पानी कम हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जा सके।सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है, जिससे मुख्यालय से भी इनकी स्थिति पर सटीक नजर रखी जा सके।  पानी की pH और TDS की नियमित जांच     ​वन्यजीवों को केवल पानी ही नहीं, बल्कि 'सुरक्षित पानी' मिले, इसके लिए नियमित अंतराल पर pH मान और TDS (Total Dissolved Solids) का परीक्षण किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पानी वन्यजीवों के स्वास्थ्य के अनुकूल हो। जिन दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, वहां विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। ​मिनरल्स का भी रखा ख्याल: स्थापित किए 'साल्ट लिक' ​वन्यजीवों के समग्र स्वास्थ्य और उनकी खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जल स्रोतों के पास रणनीतिक रूप से 'साल्ट लिक' (Salt Licks) बनाए गए हैं। इससे जानवरों को पानी के साथ-साथ आवश्यक मिनरल्स भी एक ही स्थान पर मिल रहे हैं, जो गर्मी के तनाव (Heat Stress) को कम करने में सहायक है। वनमंडलाधिकारी ने कहा कि एक ऐसी जवाबदेह प्रणाली विकसित की है जो केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के कारण हम जल स्तर गिरने से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करने में सक्षम हैं। यह मॉडल भविष्य के वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है।"