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चालान जमा करने का तरीका बदला, 1 अप्रैल से खत्म होगा मैनुअल सिस्टम

रायपुर  राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार राज्य में 1 अप्रैल से मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने का काम पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. जिला कोषालयों में केवल ऑनलाइन ही चालान जमा होंगे. नई व्यवस्था की अफसरों और कर्मचारियों को जानकारी देने के लिए सोमवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसमें जिला कोषालय अधिकारी गजानन पटेल ने आहरण संवितरण अधिकारियों, स्टांप वेंडर एवं बैंक प्रतिनिधियों को ओटीसी (ओवर द काउंटर ) ऑनलाइन चालान जमा करने की विस्तार से जानकारी दी. शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक बैरनबाजार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में पटेल ने बताया कि मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने में जो गलती होने की संभावना होती थी, वह ओटीसी ऑनलाइन चालान से नहीं होगी. इसमें सही मद का चयन करना सुविधाजनक होगा, जिससे बैंक एवं कोषालय में पारदर्शिता बढ़ेगी. कार्यशाला में बताया गया कि संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा नए वित्तीय साल में 1 अप्रैल से मैनुअल चालान सिस्टम को खत्म कर ऑनलाइन चालान जमा करने की सुविधा शुरू की जा रही है. ऑनलाइन चालान ई-कोष ऑनलाइन पोर्टल के अंतर्गत ई-चालान मॉड्यूल से जमा किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में चालान का डाटा सीधे बैंक को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा.

अंबिकापुर से दिल्ली के लिए 30 मार्च से डायरेक्ट फ्लाइट, एलायंस एयर चलाएगी 72 सीटर विमान

अंबिकापुर  छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से दिल्ली के लिए हवाई सेवा 30 मार्च से शुरू होगी। एलायंस एयर मां महामाया एयरपोर्ट से हफ्ते में 2 दिन सोमवार और बुधवार को फ्लाइट चलाएगी। यह उड़ान बिलासपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। एलाएंस एयर ने अपने वेबसाइट पर इसकी बुकिंग भी शुरू कर दी है। एलायंस एयर ने शुरू की जा रही फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 30 मार्च को अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से फ्लाइट दोपहर 12 बजे रवाना होगी, जो 2:30 बजे दिल्ली पहुंचेगी। एलायंस एयर 72 सीटर ATR विमान का संचालन करेगी। सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। वहीं बिलासपुर के लिए शुक्रवार को भी फ्लाइट सेवा मिलेगी। एलायंस एयर की ओर से 30 मार्च से ही बिलासपुर-दिल्ली फ्लाइट के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। पहले यह सेवा मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को चलती थी। 8 महीने बाद से बंद है हवाई सेवा अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से दिसंबर 2024 में हवाई सेवा की शुरुआत हुई थी। उड़ान 4.2 योजना के तहत फ्लाई बिग कंपनी ने मां महामाया एयरपोर्ट दरिमा से रायपुर और बिलासपुर के लिए 19 सीटर विमान सेवा शुरू की थी। शुरुआती दिनों में अनियमित उड़ान के कारण यह सेवा केवल छह महीने तक ही चल सकी। पिछले 6 महीने से अधिक समय से इसका संचालन पूरी तरह बंद है। 6000 तक हो सकता है किराया 2 साल पहले एलायंस एयर ने अंबिकापुर और बिलासपुर एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। एलायंस एयर ने अपनी वेबसाइट में अंबिकापुर एयरपोर्ट का नाम जोड़ दिया है और फ्लाइट सर्च भी हो रही है। हालांकि अभी किराया घोषित नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि बेस फेयर 6000 रुपए से शुरू हो सकता है। बिलासपुर-दिल्ली मार्ग पर सामान्यतः बेस फेयर 4000 रुपए से अधिक रहता है, जिसमें बुकिंग नियमों के अनुसार किराया कम-ज्यादा होता रहता है। एलायंस एयर ने सोमवार एवं बुधवार को बिलासपुर से चलने वाली नान स्टाप फ्लाइट को भी री-शेड्यूल किया है। जानिए एलायंस एयर के बारे में एलायंस एयर देश की प्रमुख घरेलू विमानन कंपनियों में से एक है। पहले यह एयर इंडिया के स्वामित्व में थी। एयर इंडिया के विनिवेश के बाद यह भारत सरकार की स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में एलायंस एयर प्रतिदिन 137 घरेलू उड़ानें संचालित करती है और 57 शहरों को जोड़ती है। कंपनी रायपुर से हैदराबाद और जगदलपुर के लिए भी हवाई सेवा दे रही है।

CM साय आज 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे रायपुर जिला के सर्वाधिक 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा लाभ रायुपर दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन कृषि श्रमिकों को सशक्त बनाना है। इस योजना से सर्वाधिक रायपुर जिला के 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूर शामिल हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।             दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजनाके तहत 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए की वित्तीय सहायता सीधे हितग्राही के बैंक खाते में दी जाती है। 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के न्याय और सुशासन की गूंज होगी। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है।          दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। संकल्प बजट 2026-27 में 600 करोड़ रूपए का प्रावधान के साथ भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का सशक्त संबल मिलेगा। यह सहायता सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचकर उन्हें स्थिरता, सम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करेगी। सशक्त श्रमिकों के माध्यम से सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प है।          दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत रायपुर जिला के 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर, बिलासपुर जिला के 39 हजार 401 भूमिहीन कृषि मजदूर, महसमुंद जिला के 37 हजार 11 भूमिहीन कृषि मजदूर और सबसे कम बीजापुर जिला से 1542 भूमिहीन कृषि मजदूर, कोरिया जिला से 1549 भूमिहीन कृषि मजदूर और नारायणपुर जिला से 1805 भूमिहीन कृषि मजदूरों को मिलेगा लाभ मिलेगा, जिनका ई केवायसी हो चुका है।          मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना को शुरू करने के पीछे हमारा उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है। इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी व्यवस्था से संबद्ध भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं। इनके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया, माँझी परिवारों को भी शामिल किया गया है। लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

25 मार्च को CM साय देंगे 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की मदद, अंत्योदय का संकल्प

अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 22 हजार से अधिक बैगा-गुनिया परिवार होंगे लाभान्वित 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना'  के अंतर्गत हितग्राहियों को मिलेगी धनराशि बलौदाबाजार में 25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।             इस योजना के तहत इस साल 4 लाख 95 हज़ार 965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10 हज़ार रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।            25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के 'न्याय और सुशासन' की गूंज होगी। 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।          'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

रायपुर कैबिनेट मंत्री  लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल विश्व क्षय दिवस के अवसर पर को टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कोरबा जिले में 100 दिवसीय विशेष पहचान एवं उपचार अभियान का शुभारंभ आज  कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अभियान के तहत  जिले में टीबी के संभावित मरीजों एवं उच्च जोखिम वाले समूहों की पहचान कर उनकी समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में टीबी को जड़ से समाप्त करने का अभियान स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सतत प्रयासों से प्रदेश में गांव से लेकर शहर तक टीबी  की रोकथाम एवं उपचार के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं तथा मरीजों के लिए निःशुल्क उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों के सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में सशक्त अभियान चलाया जा रहा है। “निक्षय निरामय मित्र” जैसी पहल के माध्यम से टीबी मरीजों की पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। मंत्री  देवांगन ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है और वर्तमान में 101 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों से जल्द ही कोरबा जिले को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाया जा सकेगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि टीबी के लक्षणों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर तुरंत जांच एवं उपचार कराएं। जिले के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों में उपचार की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।  देवांगन ने टीबी मरीजों के उपचार में परिवार, समाज एवं सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए सभी से सहयोग करने तथा टीबी मुक्त कोरबा बनाए रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस दौरान मंत्री  देवांगन ने कार्यक्रम में  उपस्थित सभी लोगो को टीबी मुक्त भारत बनाने हेतु योगदान देने का शपथ दिलाया। साथ ही जिले के टीबी मुक्त घोषित पंचायतों को प्रमाण पत्र एवं गांधी प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया। टीबी उन्मूलन में योगदान देने वाले सार्वजनिक उपक्रम, समाजसेवी संस्थानों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 20 टीबी मरीजों को पोषण सहयोग प्रदान करने हेतु निक्षय किट का वितरण किया गया, जिससे उनके उपचार में सहायता मिल सके। इस अवसर पर निगम आयुक्त  आशुतोष पांडेय, जिला पंचायत सीईओ  दिनेश कुमार नाग, अपर कलेक्टर  देवेंद्र पटेल,  ओंकार यादव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस एन केसरी, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ बी आर रात्रे, लायन्स क्लब के अध्यक्ष  विक्रम अग्रवाल, एनजीओ प्रमुख, जनप्रतिनिधि सहित टीबी मुक्त पंचायतो के सरपंच, मितानिन एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने में जनता की भूमिका सबसे अहम, सब मिलकर बनाएं टीबी मुक्त भारत…. स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ विश्व क्षय दिवस के अवसर पर पूरे देश के साथ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में भी “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा नोएडा से वर्चुअल माध्यम से की गई, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से होना अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले – जनभागीदारी से ही होगा टीबी का अंत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 24 मार्च का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “टीबी मुक्त भारत” का संकल्प तेजी से साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025 तक चले अभियान में 4113 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की 118 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को उत्कृष्ट कार्य के लिए गांधी जी की प्रतिमा एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अब गांव-गांव पहुंचेगी हाईटेक जांच –   AI  से 10 मिनट में मिलेगी रिपोर्ट अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब गांव-गांव तक पहुंचेंगी। आयुष्मान स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच की जाएगी, जिसमें रक्त जांच के साथ हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से मौके पर ही छाती का एक्स-रे किया जाएगा। आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) तकनीक की मदद से मात्र 5 से 10 मिनट में रिपोर्ट उपलब्ध होगी, जिससे शुरुआती स्तर पर ही टीबी की पहचान संभव हो सकेगी। जिले में 203 मरीज उपचार, निक्षय योजना से मिल रही पोषण सहायता वर्तमान में जिले में 203 टीबी मरीज उपचाररत हैं, जिनमें 7 एमडीआर और 4 टीबी संक्रमण के मरीज शामिल हैं। सभी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रतिमाह (6 माह तक) तथा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 200 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। वहीं वर्ष 2025-26 में 205 निक्षय मित्रों द्वारा 283 मरीजों को गोद लेकर पोषण आहार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही जिले में 3 ट्रू-नेट मशीन, 5 सामान्य एक्स-रे मशीन और 1 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से जांच कार्य संचालित किया जा रहा है। जागरूकता रथ रवाना, 100 दिनों में घर-घर पहुंचेगा अभियान अभियान को चार चरणों में संचालित किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इसके बाद हाई रिस्क क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले स्थानों, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो जिलेभर में अभियान का प्रचार-प्रसार करेगा। कार्यक्रम में चंपा देवी पावले, महापौर रामनरेश राय, सभापति संतोष सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, एमआईसी सदस्य नीलम सलूजा, मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम सोनकर, राम लखन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया कि “हम सब ने ठाना है, छत्तीसगढ़ से टीबी को भगाना है। टीबी हारेगा, देश जीतेगा।”

वन मंत्री कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की राह में आने वाली हर बाधा को दूर करना उनका लक्ष्य है।  मंत्री  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखी। उन्होंने क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान मुरकुची और पखना कोंगेरा में आयोजित भव्य कार्यक्रमों मंस शिरकत की, जहाँ उन्होंने विधायक निधि से स्वीकृत कुल 56 लाख रूपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और सामुदायिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित होगा। जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं का निर्माण केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। उन्होंने पूर्ववर्ती कठिनाईयों का स्मरण कराते हुए कहा कि बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नालों के उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों और मरीजों को जो परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, अब ये नई पुलियाएं उन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगी। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन की असली पहचान है। उन्होंने पुल-पुलिया के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य स्थानीय परिवहन को सुगम बनाएंगे और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में किसानों की मदद करेंगे। साथ ही तारागांव में सामुदायिक भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए गांवों में सुरक्षित और पक्के भवनों का होना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं का निर्वहन कर सके। मंत्री  कश्यप ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं भी नजर रखें, क्योंकि यह संपत्ति उनकी अपनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायणपुर विधानसभा के हर कोने में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी रहेगा और धन की कमी को कभी विकास में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।    

अंदरूनी इलाकों में लौटी पढ़ाई की रौनक, बस्तर के 123 स्कूलों में फिर गूंजी घंटी

सुकमा। नक्सलवाद के काले साये को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का उजाला एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। शासन की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान नक्सलियों के दहशत से बंद हुए सुकमा जिले के सैकड़ों स्कूलों के दरवाजे अब बच्चों के लिए पूरी तरह खुल चुके हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। पुनर्जीवित हुई शिक्षा व्यवस्था दस्तावेज के मुताबिक, वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के कारण कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे। इनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक शालाएं शामिल थीं। प्रशासन के निरंतर प्रयासों से इन सभी स्कूलों को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्तमान में ऐसे स्कूलों की संख्या शून्य है, जो पूर्व में माओवादी प्रभाव के कारण बंद थे। प्रमुख उपलब्धियां और बुनियादी ढांचा शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरस्थ इलाकों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का जाल बिछाया गया है। पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) वर्तमान में 16 पोटा केबिन संचालित हैं, जिनमें 6,722 छात्र दर्ज हैं। छात्रावास सुविधा 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 (कक्षा 6वीं से 12वीं) के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं और टाइप-4 (कक्षा 9वीं से 12वीं) के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं। नियद नेल्लानार योजना से नई शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में विकास की गति को और तेज करते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत शामिल गांवों में 07 नवीन प्राथमिक शालाएं खोली गई है। इन स्कूलों में अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। भविष्य की कार्ययोजना को देखते हुए प्रशासन ने 19 और नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। जमीनी स्तर पर आ रहे ये बदलाव न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि इन क्षेत्रों में विश्वास की एक नई किरण भी जगा रहे हैं। शासन ने ‘पहले’ और ‘अब’ की तस्वीरों के साथ विकास के इस परिवर्तन को प्रमाणित भी किया है, जो स्पष्ट करता है कि बंदूक की गूंज पर अब स्कूलों में बच्चों के ककहरा की गूंज और किताबों की सरसराहट भारी पड़ रही है।

ग्रामीण स्वच्छता को लेकर बड़ी बैठक: स्वच्छ भारत मिशन की अपेक्स कमेटी ने की समीक्षा

रायपुर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों, वित्तीय वर्ष 2025-26 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, वित्तीय वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान, स्वच्छता के लिए नवाचार तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु अंतर्विभागीय अभिसरण पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के तहत गांवों में कम्पोस्ट पिट, सोखता गडड्ा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामों की स्वच्छता के कार्यों की सर्टिफिकेशन ग्राम सभा द्वारा कराया जाना चाहिए।  मुख्य सचिव ने भारत स्वच्छ मिशन के अंतर्गत राज्य के सभी ग्रामों में स्वच्छता के कार्यों को नियमित रूप से मॉनिटरिंग कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। गांवों के हाट-बाजारों में सामूहिक शौचालय का उपयोग एवं स्वच्छता के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसी तरह से आवश्यकतानुसार सामूहिक शौचालय की उपयोगिता एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्थलों पर करीब 14 हजार 279 सामुदायिक शौचालयोें का निर्माण किया जा चुका है। इसी तरह से वर्ष 2026-27 में 2014 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक कार्ययोजना के निर्माण के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।  मुख्य सचिव ने इस हेतु देश के अन्य राज्यों के सफल प्लास्टिक वेस्ट मैंनेजमेंट के मॉडल को अपनाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वेस्ट से सशक्त सड़कों के निर्माण करने की अभिनव एवं सतत् पहल की जा रही है। राज्य के बस्तर, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्लास्टिक मिक्स डामर रोड निर्माण किए जा रहे हैं। रोड निर्माण में करीब 3000 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता, जल प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन करने हेतु स्वच्छ पंचायत पोर्टल की शुरूआत की गई है। ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा ग्राम की स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं प्रशासन की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है। सभी ग्रामों की ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए सभी ग्रामों की ऑनलाईन एंट्री का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।  बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मिशन संचालक राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) श्री अश्वनी देवांगन सहित स्कूल शिक्षा, वित्त, जनसम्पर्क, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, यूनिसेफ के अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

खल्लारी रोप-वे दुर्घटना: मुख्यमंत्री ने सहायता राशि की घोषणा की, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  महासमुंद जिले के खल्लारी माता मंदिर में हाल ही में हुई रोप-वे दुर्घटना में प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। उन्होंने दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों को 5 लाख रुपए एवं घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है, ताकि इस कठिन समय में उन्हें संबल मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।