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छत्तीसगढ़ के IPS अमित कुमार को बड़ी उपलब्धि, केंद्र में ADG के लिए इम्पैनलमेंट

रायपुर. छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IPS अफसर अमित कुमार को केंद्र सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) रैंक के लिए इम्पैनल कर लिया है। केंद्र सरकार ने अपने हालिया आदेश में साल 1998 बैच के कुल 30 आईपीएस अधिकारियों को ADG या समकक्ष पदों के लिए पैनल में शामिल किया है, जिसमें अमित कुमार का नाम भी शामिल है। यह राज्य पुलिस के लिए भी गर्व की बात मानी जा रही है। वर्तमान में संभाल रहे हैं इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी IPS अमित कुमार फिलहाल छत्तीसगढ़ पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें जनवरी 2024 में यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राज्य की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़े मामलों में IPS अमित कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इंटेलिजेंस विंग में उनकी नियुक्ति के बाद कई संवेदनशील मामलों में पुलिस को समय रहते जानकारी और रणनीति बनाने में मदद मिली है। पहले भी केंद्र में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण भूमिका IPS अमित कुमार का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। वे पहले भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर CBI में संयुक्त निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने सीबीआई में रहते हुए कई अहम जांचों में भूमिका निभाई थी। इसी वजह से उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी के रूप में देखा जाता है। कई जिलों में एसपी के रूप में दे चुके हैं सेवाएं अमित कुमार राज्य में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने रायपुर, बीजापुर, राजनांदगांव, जांजगीर और दुर्ग जैसे जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने इन जिलों में रहते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत करने और क्राइम कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रपति पुलिस पदक से हो चुके हैं सम्मानित IPSअमित कुमार की ईमानदार छवि और प्रशासनिक दक्षता के लिए उन्हें कई बार सराहना भी मिल चुकी है। उनके शानदार कार्य और सेवाओं को देखते हुए जनवरी 2025 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Police Medal for Distinguished Service) से सम्मानित भी किया गया था।

TET अनिवार्यता के विरोध में 15 को जुटेंगे 80 हजार शिक्षक

रायपुर. छत्तीसगढ़ में TET अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। 15 मार्च को रायपुर में राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय में शिक्षक संगठनों की बैठक होगी। इसमें करीब 80 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाले असर और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। इसी मुद्दे को लेकर 15 मार्च को रायपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय में होगी और दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। बैठक में प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि सभी संगठन मिलकर इस मुद्दे पर सामूहिक निर्णय ले सकें। प्रदेशभर के संगठनों को बुलाया गया सूत्रों के अनुसार इस बैठक में प्रदेश के अलग अलग जिलों से शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य TET अनिवार्यता से जुड़ी संभावित समस्याओं और उसके समाधान पर चर्चा करना है। इसके साथ ही सरकार के सामने अपनी मांगों को रखने की रणनीति भी तय की जाएगी।' 80 हजार शिक्षकों पर पड़ सकता है असर बताया जा रहा है कि यदि TET को अनिवार्य किया गया तो प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि शिक्षक संगठन इस मुद्दे को लेकर एकजुट होते नजर आ रहे हैं। बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि यदि शिक्षकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है। बैठक में तय होगी आगे की रणनीति 15 मार्च को होने वाली इस बैठक को शिक्षकों के भविष्य के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में यह तय किया जाएगा कि शिक्षक संगठन सरकार से क्या मांग रखेंगे और आगे इस मुद्दे को लेकर किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी।

प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा: 1000 करोड़ की अनुदान मांगें पास, 8 लाख करोड़ निवेश के प्रस्ताव मिले

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रुपए की अनुदान मांगे पारित की गई। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रुपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उद्योग विभाग उद्योेग मंत्री देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंत्री देवांगन ने कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है। श्रम विभाग मंत्री देवांगन ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डीपीएस राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है। वाणिज्यक कर (आबकारी) विभाग मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना से आबकारी राजस्व में सुनिश्चित वृद्धि परिलक्षित हुई है। अतः आबकारी विभाग के लिये वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 12000 करोड़ (बारह हजार करोड़) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके विरूद्ध 28 फरवरी, 2026 तक रूपये 9660.00 करोड़ (नौ हजार छः सौ साठ करोड़) का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जो कि कुल राजस्व लक्ष्य का 80.50 प्रतिशत है। मंत्री देवांगन ने कहा कि वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग में प्रशासनिक सुविधा एवं दक्षता हेतु … Read more

दुर्ग-राजनांदगांव में पारा 39°C चढ़ा पारा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी का असर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य के कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार दुर्ग और राजनांदगांव में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन दिनों तक तापमान में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि इसके बाद प्रदेश में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट देखने को मिल सकती है।  रायपुर समेत कई शहरों में गर्मी का असर राजधानी रायपुर में भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। लालपुर में अधिकतम तापमान 38.6 डिग्री और माना एयरपोर्ट में 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं बिलासपुर में 37.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो प्रदेश में सबसे कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आसमान साफ रहने के साथ हल्की धुंध की स्थिति बनी रह सकती है।  आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी मौसम विभाग ने 13 मार्च से मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार बस्तर संभाग के कुछ इलाकों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।  इसके अलावा 14 और 15 मार्च को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।  बिहार से छत्तीसगढ़ तक बना ट्रफ सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार से झारखंड होते हुए उत्तर छत्तीसगढ़ तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है। यह सिस्टम समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय है। इसी वजह से प्रदेश के मौसम में अगले कुछ दिनों में बदलाव देखने को मिल सकता है।  लोगों को सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने लोगों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। वहीं आंधी और बिजली गिरने की स्थिति में खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने को कहा गया है।

देश की प्रसिद्ध पंडवानी कलाकार तीजन बाई अस्पताल में भर्ती, रायपुर AIIMS के ICU में चल रहा इलाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ की मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल के न्यूरो सर्जरी वार्ड के आईसीयू में रखा है, जहां उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार तीजन बाई का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में चल रहा है। फिलहाल उनकी स्थिति को लेकर डॉक्टर लगातार मेडिकल जांच कर रहे हैं। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्या जानकारी के मुताबिक 70 वर्षीय तीजन बाई पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। वर्ष 2024 से वे लकवे की बीमारी से पीड़ित बताई जा रही हैं। इसी वजह से उनकी सेहत लगातार कमजोर होती जा रही थी। परिजनों के अनुसार पिछले करीब 20 दिनों से वे सामान्य भोजन नहीं कर पा रही थीं और केवल जूस तथा फलों के सहारे ही रह रही थीं। इससे उनकी शारीरिक स्थिति और कमजोर हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ली थी जानकारी बताया जा रहा है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान भी तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय उनके परिजनों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई थी। तीजन बाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रदेशभर में चिंता और प्रार्थना का माहौल है। पंडवानी कला को दुनिया तक पहुंचाने वाली कलाकार तीजन बाई छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध कलाकारों में गिनी जाती हैं। उन्होंने पंडवानी की कपालिक शैली को देश और विदेश में पहचान दिलाई है। अपनी दमदार आवाज और अनोखी प्रस्तुति शैली के कारण उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की परंपरा को नई पहचान दी। उनकी कला के कारण पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। 17 देशों में दे चुकी हैं प्रस्तुति तीजन बाई ने अपने लंबे कला जीवन में दुनिया के कई देशों में पंडवानी की प्रस्तुति दी है। जानकारी के अनुसार वे अब तक करीब 17 देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व विधायक मती मंगली बाई रावटे के निधन पर जताया गहरा शोक

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा की पूर्व सदस्य मती मंगली बाई रावटे के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।        मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय मंगली बाई रावटे अत्यंत सरल, विनम्र और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व की धनी थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के लोगों के सुख-दुःख में सदैव सहभागिता निभाते हुए सेवा और सहयोग की भावना से कार्य किया।         मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता था। उनके निधन से समाज ने एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी कमी सदैव महसूस की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

मंत्री देवांगन के विभागों के लिए 1823 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

मंत्री  लखनलाल देवांगन के विभागों के लिए 01 हजार 823 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रूपए से अधिक निवेश प्रस्ताव भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया-जिससे राजस्व 20 प्रतिशत बढ़ा*  श्रमिक आवास एवं ई-रिक्शा की राशि 01 लाख रूपए से बढ़ाकर  1.50 लाख रूपए कर दी गई अगले वर्ष से श्रमिकों के 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला हेतु अभिनव पहल  रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रूपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रूपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश मंे नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।  उद्योग विभाग उद्योेग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा रु 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है। श्रम विभाग  मंत्री  देवांगन सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डी.पी.एस. राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।  औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।  वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है।  वाणिज्यक कर (आबकारी) विभाग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना … Read more

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक सम्पन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक सम्पन्न छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक का आयोजन 12 मार्च को बोर्ड कार्यालय के सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने की। बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कहा कि वन मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि बोर्ड और शासन की योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय वैद्यों के स्थायी पंजीकरण के लिए भी आवश्यक प्रयास करने को कहा।     बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला ने बैठक में कहा कि औषधीय पौधों का क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि हमारा सपना है कि बस्तर औषधीय पौधों के माध्यम से दुनिया के समृद्ध क्षेत्रों में शामिल हो। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं और गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों का रोपण, औषधीय पौधों की खेती (कृषिकरण) तथा विभिन्न नवाचार कार्यों की जानकारी दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने आश्वस्त किया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर बस्तर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बस्तर क्षेत्र में पहले से लगाए गए पाम और नीलगिरी के प्लांटेशन में औषधीय पौधों की मल्टी- क्रॉपिंग के माध्यम से कार्य किया जाएगा। बैठक में नारायण संकल्प फाउंडेशन रायपुर की मती सीमा गुप्ता, एन.डी. मेमोरियल फाउंडेशन दुर्ग के  शालीभद्र मुथा, क्रिस्टल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसायटी की मती रीनू छाबड़ा सहित बोर्ड की योजनाओं से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा बोर्ड के तकनीकी सलाहकार और कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।

अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख

रायपुर  प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।  मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री ने “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।