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मंत्री राजवाड़े के विभागों के लिए 11,763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित

मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए लगभग 11 हजार 763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित समाज के अंतिम व्यक्ति तक के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध :  राजवाड़े महतारी वंदन योजना से राज्य की 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित  समाज कल्याण का बजट पिछले 5 वर्षों की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरा करने बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना होगी शुरू  नशा मुक्ति के लिए सामाजिक सहयोग से चलेगा अभियान, वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल के लिए “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर की होगी स्थापना रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए 11 हजार 762 करोड़ 53 लाख रूपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 10,162 करोड़ 53 लाख रूपए तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 1600 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।  महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है।  राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुई है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है और उनके जीवन में स्वावलंबन लाने का काम किया है। राजवाड़े ने सदन में कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। राजवाड़े ने कहा कि किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए ’किशोरी बालिका योजना’ के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छात्राओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ’शुचिता योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोेदी जी के गारंटी को पूरा करने राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ’रानी दुर्गावती योजना’ प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हेें 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए इस वर्ष के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पोषण अभियान के संचालन के लिए 125 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।  राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। समाज कल्याण विभाग सदन को जानकारी देते हुए राजवाड़े ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रदेश में लगभग 21 लाख 76 हजार हितग्राहियों को पेंशन का लाभ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके लिए 1402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए 6 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विशेष विद्यालयों के संचालन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सुरक्षा पहुंचाना है। इन्हीं बातों को ध्येय में रखकर हमारी सरकार सेवा, संवेदना और संकल्प के साथ समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

सरगुजा में NEET-JEEटेस्ट सीरीज के लिए कोचिंग संस्थानों से आवेदन आमंत्रित

अम्बिकापुर/रायपुर. शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सरगुजा जिले के मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने के उद्देश्य से NEET एवं IIT-JEE के लिए ऑफलाइन टेस्ट सीरीज आयोजित की जाएगी। इस हेतु जिले के उत्कृष्ट कोचिंग संस्थानों से आवेदन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कक्षा 12वीं में अध्ययनरत सरगुजा-30 के 30 विद्यार्थियों तथा जिले के अन्य 50 चिन्हांकित मेधावी विद्यार्थियों को वर्ष 2027 की NEET और IIT-JEE प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑफलाइन टेस्ट सीरीज आयोजित कराई जाएगी। इसके लिए सर्वश्रेष्ठ कोचिंग संस्थान का चयन किया जाएगा। इच्छुक कोचिंग संस्थान अपने आवेदन प्रस्ताव सरगुजा जिले की आधिकारिक वेबसाइट https://surguja.gov.in/ तथा कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर के सूचना पटल पर प्रकाशित सूचना के अनुसार प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: नक्सली ठिकाने से 3.61 करोड़ नकद, 1 किलो सोना और 101 घातक हथियार बरामद

जगदलपुर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। नक्सलियों के 101 घातक हथियार बरामद यह आत्मसमर्पण पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत हुआ। कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम और एडीजी विवेकानंद सिन्हा की मौजूदगी में हुआ। बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने 101 घातक हथियार बरामद होने की जानकारी दी। करोड़ों रुपये के हथियार समेत नगद मिला इन हथियारों में एके 47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल थे। नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलो सोना बरामद किया गया। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है। यह सभी सामग्री बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद की गई थी। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं। बरामद किए गए सभी डंप और सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शन जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री अलग-अलग अभियानों में मिली थी। इसमें 101 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में नकदी व सोना शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति प्रभावी साबित हो रही है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में वापसी की है। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल क्षेत्र में स्थिरता लाने में सहायक होगी।

मुर्गी फार्म से लगभग 80 हजार से अधिक का मासिक आय कर रहे है अर्जित

रायपुर महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम एम.के. बाहरा की जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन 150 के द्वितीय चरण के अंतर्गत समूह द्वारा स्थापित 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारम्भ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष  एतराम साहू एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  हेमंत नंदनवार के द्वारा किया गया। समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती है कि समूह की सदस्य महिलाएं पहले मुख्य रूप से खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनके पास आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगा। समूह की सभी सदस्याओं ने मिलकर आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। युगेश्वरी बताती है कि समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर मुर्गी फार्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये प्राप्त किए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख रुपये और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी प्राप्त किया। आजीविका को और विस्तारित करने के उद्देश्य से समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। इस व्यवसाय के माध्यम से समूह की सदस्याएं आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही अन्य सदस्यों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम हो रही हैं। समूह की सदस्याओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं तथा राज्य शासन एवं बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त की हैं।

Project Dhadkan की बड़ी सफलता: बिलासपुर की पीहू का सफल ऑपरेशन, अब पूरी तरह स्वस्थ

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट धड़कन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया प्रमुख स्वास्थ्य अभियान है। इसका उद्देश्य एक से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की निःशुल्क पहचान, परामर्श और सफल ऑपरेशन (इलाज) सुनिश्चित करना है। यह पहल राज्य भर में हजारों बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रोजेक्ट धड़कन के तहत पीहू सफल उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू के माता-पिता ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन रायपुर की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत बिलासपुर की पीहू को नया जीवन मिला है। प्रोजेक्ट धड़कन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं से बिलासपुर के ग्राम भोजपुरी में रहने वाली  11 वर्षीय पीहू कराके की हृदय संबंधी समस्या का इलाज किया गया। पीहू लंबे समय से हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी। कक्षा छठवीं में पढ़ने वाली पीहू के हृदय में समस्या होने के कारण उसे खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई होती थी। इसी बीच जिला प्रशासन रायपुर द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए आयोजित ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। पीहू के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और जगदलपुर में सेवाएं दे रहे हैं।  इस शिविर में माता पिता  द्वारा पीहू की भी जांच  कराई गई। ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की विशेषज्ञ टीम ने पीहू के हृदय की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद पीहू को आगे के उपचार के लिए सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर भेजा गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर उसका सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद पीहू को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह बिलासपुर में अपने घर पर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू पूरी तरह स्वस्थ है और पहले की तरह पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रही है। साथ ही वह अपनी बहनों और दादी के साथ कैरम और अन्य खेलों का भी आनंद ले रही है। पीहू की माता इंद्राणी कारके ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की मदद से उनकी बेटी का समय पर इलाज संभव हो सका और अब वह स्वस्थ जीवन जी पा रही है। प्रोजेक्ट धड़कन की पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी नई उम्मीद और विश्वास का संचार कर रही है।

छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया वालों के लिए मौका: भुगतान पर मिलेगी बड़ी छूट

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज गुरुवार को रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार बिजली बिल भुगतान पर भारी छुट दी है। योजना के तहत 29 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। लगभग 75% तक बिजली बिल माफ किया जाएगा। मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल के समय आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से बहुत से लोग बिजली बिल नहीं भर पाए थे। जिस वजह से उनका बिजली बिल धीरे-धीरे करके बढ़ते चल गया। सरकार ऐसे लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत उन्हें छूट देगी। यदि उपभोक्ता की बिजली बिल राशि अधिक है और उसे वह भुगतान नहीं कर पता है तो उसे किस्तों में भी पटाने की सुविधा दी जाएगी। इस योजना का लाभ 29 जून 2026 तक दिया जाएगा। बिजली बिल का भुगतान करने के लिए उपभोक्ताओं को विभाग वेबसाइट पर पंजीयन करना होगा।

धमतरी में महिला सशक्तिकरण की मिसाल: सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से बढ़ी आमदनी

रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।  “बिहान” का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें। धमतरी जिले में “बिहान” योजना के अंतर्गत 58 महिला सदस्यों को सेंट्रिंग प्लेट निर्माण एवं किराये के व्यवसाय के लिए ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनमें धमतरी विकासखंड की 27, कुरूद की 15, मगरलोड की 7 तथा नगरी विकासखंड की 9 महिलाएं शामिल हैं। इन समूहों को प्रकरण तैयार कर आरएफ मद से 15 हजार रुपये, सीआईएफ से 60 हजार रुपये तथा बैंक ऋण के रूप में 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। प्राप्त राशि से महिलाओं के समूहों ने 59 हजार 300 वर्गफीट सेंट्रिंग प्लेट की खरीदी की है। इन प्लेटों को महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित अन्य शासकीय निर्माण कार्यों और स्थानीय बाजार में 20 से 25 रुपये प्रति वर्गफीट के किराये पर उपलब्ध करा रही हैं। इससे उन्हें नियमित रूप से अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। समूह की महिलाओं ने न केवल स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि नियमित बचत करते हुए समय पर ऋण की अदायगी भी कर रही हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और समाज में उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। ग्रामीण गरीबी की चुनौती को दूर करने के लिए आजीविका को बढ़ावा देना है ताकि वे गरीबी से बाहर आ सकें। जिला पंचायत धमतरी द्वारा इन स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहयोग के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। “बिहान” से जुड़कर महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं और अपने परिवार तथा समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं संगठित होकर कार्य करती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा और विकास की संभावनाएं स्वतः खुल जाती हैं।

आधार से जुड़ी सेवाएं प्रदान कर आत्मनिर्भर बनीं संगीता सिंह”

आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा आत्मनिर्भर बनी संगीता सिंह  महिला सशक्तिकरण की बनी मिसाल संगीता  सिंह                           रायपुर स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज दर पर ऋण और कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे महिलाएं छोटी-छोटी आजीविका गतिविधियां (जैसे- खेती, पशुपालन, सिलाई, आधार से जुड़ी सेवाएं ) शुरू कर सकें। इस मिशन के अंतर्गत महिलाएं सशक्त बनकर न केवल परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।             ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जब महिलाओं को सही अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन में बदलाव लाती हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम दुधाशी की निवासी श्रीमती संगीता सिंह की कहानी भी महिला सशक्तिकरण की ऐसी ही प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने अपने परिश्रम और आत्मविश्वास से एक नई पहचान बनाई है। बीसी सखी के रूप में शुरू हुआ सफ              संगीता सिंह ने वर्ष 2021 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। उनके माध्यम से गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलने लगा। पहले जहां ग्रामीणों को पैसे निकालने या बैंक से जुड़े कार्यों के लिए दूर शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब यह सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होने लगीं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बचने लगा और गांव के लोगों को बड़ी सुविधा मिली। स्वयं सहायता समूह से मिली आर्थिक मजबूती              संगीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत अपने स्वयं सहायता समूह से 68 हजार रुपये का ऋण लिया था। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने बीसी सखी के रूप में अपना कार्य शुरू किया। शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और सेवा भावना से उन्होंने धीरे-धीरे गांव के लोगों का विश्वास जीत लिया। आज गांव के लोग उन्हें भरोसे के साथ अपनी बैंकिंग सेवाओं के लिए संपर्क करते हैं। उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला आधार किट             संगीता सिंह के समर्पण और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को देखते हुए मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर के जिला प्रशासन ने उन्हें नई जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में आधार सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से जिले में पांच नए आधार केंद्र खोले जा रहे हैं। इसी पहल के तहत संगीता सिंह को लैपटॉप सहित आधार किट प्रदान की गई। जिला प्रशासन की ओर से ईडीएम श्री नारायण केवर्त ने उन्हें यह आधार किट सौंपा। अब गांव में ही मिलेंगी आधार सेवाएं            आधार किट मिलने के बाद संगीता सिंह अब अपने गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। इनमें नया आधार पंजीयन, आधार अपडेट तथा अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने गांव के पास ही सुविधाएं मिल सकेंगी। अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा           संगीता सिंह की सफलता की कहानी पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उनकी उपलब्धि यह भी साबित करती है कि महिलाएं केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम           जिला प्रशासन की यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है। संगीता सिंह जैसी महिलाएं आज ग्रामीण भारत में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सही अवसर मिल जाए तो कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है। बिहान योजना का उद्देश्य गरीबों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मजबूत संस्थाएं बनाकर और उन्हें वित्तीय और आजीविका सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच प्रदान करके गरीबी कम करने को बढ़ावा देना है।

CM साय से प्रशिक्षु जजों की मुलाकात, न्यायपालिका की भूमिका पर दिया महत्वपूर्ण संदेश

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि न्याय पालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।  इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

महिला समूह की सफलता की कहानी: 10 हजार चूजों वाले AC पोल्ट्री फार्म से हर महीने ₹80 हजार की कमाई

महासमुंद/रायपुर. महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम एम.के. बाहरा की जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन 150 के द्वितीय चरण के अंतर्गत समूह द्वारा स्थापित 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारम्भ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष श्री एतराम साहू एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार के द्वारा किया गया। समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती है कि समूह की सदस्य महिलाएं पहले मुख्य रूप से खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनके पास आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगा। समूह की सभी सदस्याओं ने मिलकर आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। युगेश्वरी बताती है कि समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर मुर्गी फार्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये प्राप्त किए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख रुपये और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी प्राप्त किया। आजीविका को और विस्तारित करने के उद्देश्य से समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। इस व्यवसाय के माध्यम से समूह की सदस्याएं आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही अन्य सदस्यों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम हो रही हैं। समूह की सदस्याओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं तथा राज्य शासन एवं बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त की हैं।