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कोल लेवी घोटाले की जांच में नया मोड़, छत्तीसगढ़ के राजीव भवन तक पहुंची 104 करोड़ रुपये की रकम का दावा

रायपुर  ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था। किसे कितनी मिली अवैध रकम रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप। देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण। चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए। जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य। राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया। बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी। शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए। व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है। चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका 1. राम गोपाल अग्रवाल राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है। 2. देवेन्द्र सिंह यादव भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है। 3. विनोद तिवारी विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है। 4. रामप्रताप सिंह जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। 5. चंद्रदेव प्रसाद राय तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के … Read more

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी माता साहिब हासी देवी के स्मारक सिक्के का लोकार्पण, 35 ग्राम है वजन

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार 200 का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में सिक्के का विमोचन करेंगी। इस मौके पर माता साहिब के सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। 35 ग्राम वजन वाले इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी सहित चार धातुओं का मिश्रण होगा। इस पहल को सिंधी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया। सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, कोलकाता टकसाल में बना है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे। राष्ट्रपति के हाथों होगा सिक्के का विमोचन 22 अक्टूबर को रायपुर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्मारक सिक्के का अनावरण करेंगी। आयोजन में 200 से अधिक विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सिक्के के साथ विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी दी गई है। माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 35 ग्राम का सिक्का, 50 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक, स्मारक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा। सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातुएं: चांदी: 50 प्रतिशत तांबा: 40 प्रतिशत निकल: 5 प्रतिशत जस्ता: 5 प्रतिशत धातुओं के इस मिश्रण से तैयार होने वाला सिक्का माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति में जारी किया जाएगा। कहां और कैसे होगी सिक्के की बुकिंग? शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई के अनुसार, सिक्के के विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, उपलब्ध सिक्कों की संख्या और आधिकारिक बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए। सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि दरबार के सचिव उदय सांई ने कहा कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए गर्व का विषय है। इससे देश और विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया। शदाणी दरबार की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। दरबार के संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे और बाद में हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे। इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है। शदाणी दरबार पीठ 300 साल पुराना मठ शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे। इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते हैं। ……………………… विभाजन के बाद रायपुर बना शदाणी परंपरा का प्रमुख केंद्र भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं। सिक्के से राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विरासत को पहचान माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। रायपुर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं, इतिहास में रुचि रखने वालों और सिक्का संग्राहकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

संगीत और नाटक के जरिए दिखा पीएम मोदी का जीवन, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में हुआ विशेष आयोजन

रायपुर : इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में ‘नमो सेवा– अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय भव्य नाट्य मंचन 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में संगीत और नाट्य प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सेवा-संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का किया गया चित्रण रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालय खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय परिसर-2 में ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय नाट्य मंचन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, अभिनय और भावपूर्ण संवादों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सार्वजनिक सेवा के अनुभवों और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर आधारित संगीतमय नाटक प्रस्तुत किया।  इस प्रस्तुति में भारतीय कला, संगीत और नाट्य परंपरा के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।  इसके अतिरिक्त भारत के रंग’ की सांस्कृतिक भावभूमि पर आधारित वंदे मातरम की गौरव गाथा पर भरतनाट्यम , कथक की सामूहिक नृत्य प्रस्तुति दी गयी ।  जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नाटक के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्रस्तुत किया। संगीत और अभिनय के समन्वय से तैयार इस प्रस्तुति ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का संदेश दिया। ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ के मंचन का प्रमुख उद्देश्य सेवा और समर्पण के विचारों को जनसामान्य तक पहुंचाना तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनसेवा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी, सामूहिक प्रयास और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने सेवा के व्यापक अर्थ को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यक्रम सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा के मूल्यों को प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश के सार्वजनिक जीवन, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को समझने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने कला और संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि संगीत एवं नाट्य मंचन जनजागरूकता, सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक विचारों के प्रसार के प्रभावी माध्यम हैं। इस अवसर पर बिसेसर साहू, घम्मन साहू, शशांक ताम्रकार, जैनेन्द्र जंघेल, श्रीमती नीलिमा गोस्वामी, श्रीमती गिरिजा चंद्राकर, विकेश गुप्ता, रामाधार रजक, भावेश कोचर, गोरेलाल वर्मा, श्रीमती वंदना टांडेकर, आयूब सोलंकी, रूपेंद्र रजक और लखन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सेवा, समर्पण और जिजीविषा की मिसाल सात बार नदियां पार कर स्वास्थ्य दल पहुंचा तुमेरादी

रायपुर  ​बस्तर के सुदूर, वनांचल और दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाना हमेशा से एक चुनौती रहा है। लेकिन जब इरादे मजबूत हों, तो नदियां, घने जंगल और दुर्गम पहाड़ भी सेवा की राह में बाधा नहीं बन सकते। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे गांव तुमेरादी की 45 वर्षीया सन्नो बाई के जीवन में आया बदलाव, शासन के 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य अमले के अप्रतिम समर्पण की बानगी प्रस्तुत करता है। ​सात बार नदी पार कर पहुंची 'उम्मीद की किरण'  ​उप स्वास्थ्य केंद्र मड़पुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित तुमेरादी गांव तक पहुंचने की राह अत्यंत कठिन है। चारों तरफ से घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और नदी-नालों से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य दल को एक ही नदी को सात बार पार करना पड़ता है। दुर्गम रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तुमेरादी के ग्रामीणों के लिए समय पर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना हमेशा से दुष्कर रहा है। लेकिन 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया। ​शिविर में हुआ कुष्ठ रोग का खुलासा ​गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर के दौरान 45 वर्षीया श्रीमती सन्नो बाई का परीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि सन्नो बाई लंबे समय से कुष्ठ रोग से पीड़ित थीं। उचित जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी और दूरस्थ भौगोलिक स्थिति के कारण वे अब तक इलाज से वंचित थीं। बीमारी इस कदर बढ़ चुकी थी कि उनके हाथ की उंगलियां प्रभावित होने लगी थीं। ​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य दल ने तुरंत पहल की और उन्हें जिला चिकित्सालय नारायणपुर भेजा। ​जिला अस्पताल में शुरू हुआ त्वरित व मुफ्त इलाज  ​जिला चिकित्सालय नारायणपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा सन्नो बाई की विस्तृत जांच की गई और कुष्ठ रोग की पुष्टि होने के बाद तत्काल एमडीटी  दवाइयां उपलब्ध कराकर नियमित उपचार शुरू किया गया। इसके साथ ही सन्नो बाई और उनके परिवार को बीमारी से बचाव, सावधानियों और नियमित दवा के सेवन के महत्व के बारे में विस्तार से परामर्श दिया गया। समय पर बीमारी की पहचान और इलाज शुरू होने से सन्नो बाई का हाथ स्थायी रूप से विकलांग होने से बच गया। वर्तमान में उनका उपचार नियमित रूप से जारी है और उनकी स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। ​अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का संकल्प  ​सन्नो बाई की यह कहानी केवल एक मरीज के ठीक होने की कथा नहीं है, बल्कि यह उस सेवा-भाव की प्रतीक है जो राज्य सरकार के "अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा" के संकल्प को धरातल पर चरितार्थ करती है। ​मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान ने यह साबित कर दिया है कि शासन की स्वास्थ्य सेवाएं केवल सुगम और शहरी इलाकों तक सीमित नहीं हैं। जब सेवा का संकल्प दृढ़ हो, तो कठिन से कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। सात बार नदी पार कर और घने जंगलों को चीरते हुए तुमेरादी पहुंची स्वास्थ्य टीम के इस प्रयास ने न केवल सन्नो बाई को एक नया जीवन और नई उम्मीद दी है, बल्कि दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों में स्वास्थ्य तंत्र के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया है।

कैंसर अस्पताल निर्माण पर मंत्री सख्त, MLA शुक्ला बोले- तारीख बताओ, अब देरी बर्दाश्त नहीं

बिलासपुर बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के साथ ही राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें। 10 एकड़ में बनेगी सिम्स की नई बिल्डिंग दरअसल, कोनी स्थित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और अस्पताल की सुरक्षा से जुड़े कई फैसले लिए। उनके साथ स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, डॉ. बीपी सिंह, सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, डॉ. भूपेन्द्र कश्यप सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान सिम्स की नई बिल्डिंग के लिए जमीन, अस्पताल के खुले रैंप की सुरक्षा, मशीनों की मरम्मत के लिए बजट और अस्पताल तक पहुंचने के लिए नई सड़क बनाने पर चर्चा हुई। मंत्री सीधे जमीन देखने जाने के बजाय सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की छठी मंजिल पर पहुंचे। यहां से विधायक सुशांत शुक्ला ने पीछे स्थित करीब 10 एकड़ खाली सरकारी जमीन दिखाई। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर सिम्स की नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 2.5 एकड़ जमीन वन विभाग की है। डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभाग से पहले ही पत्राचार किया जा चुका है। खुले रैंप पर जाली लगेगी, जूदेव की प्रतिमा भी लगेगी निरीक्षण के दौरान अस्पताल के खुले रैंप को देखकर विधायक सुशांत शुक्ला ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रैंप खुला रहने से दुर्घटना की आशंका है और यह आत्महत्या जैसी घटनाओं के लिहाज से भी संवेदनशील स्थान बन सकता है। इस पर मंत्री ने तत्काल रैंप पर सुरक्षा जाली लगाने की स्वीकृति दी। विधायक ने अस्पताल परिसर में स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी। मंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं डॉ. बीपी सिंह ने अस्पताल की मशीनों में आने वाली छोटी-मोटी खराबियों को तत्काल दूर करने के लिए अलग से बजट जारी करने की मांग की, ताकि उपकरण खराब होने पर मरीजों के इलाज में बाधा न आए। ज्यादा लोग सवार हुए तो लिफ्ट नहीं चली निरीक्षण के बाद 5वीं मंजिल से नीचे उतरते समय एक लिफ्ट में क्षमता से अधिक लोग सवार हो गए। 12 से ज्यादा लोगों के चढ़ने के कारण लिफ्ट आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद डॉ. बीपी सिंह, डॉ. अर्चना सिंह और सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति को दूसरी लिफ्ट से नीचे उतरना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल में लिफ्ट के सुरक्षित उपयोग और क्षमता के पालन का मुद्दा भी सामने ला दिया। कैंसर अस्पताल का काम 25 दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के बाद मंत्री का काफिला सिम्स के लिए रवाना हो रहा था। इसी दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने याद दिलाया कि निर्माणाधीन राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण बाकी है। इसके बाद काफिला कैंसर अस्पताल पहुंचा, जहां अधिकारियों ने निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी। मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें। डिप्टी सीएम अरुण साव भी पहुंचे इस दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव का फोन आया। वे भी मौके पर पहुंचे और प्रस्तावित योजनाओं और निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों के साथ अस्पताल से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की गई। तीन रास्तों से जुड़ सकेगा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल अस्पताल तक पहुंच आसान बनाने के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय के पास से और अस्पताल के पीछे से नई सड़क निकालने पर सहमति बनी। लिंक रोड बनने से सुपरस्पेशलिटी अस्पताल परिसर तक पहुंचने के लिए कुल तीन रास्ते उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय से प्रस्ताव पर जल्द काम करने के निर्देश दिए।

बच्चों के नए आइडिया को मिलेगा प्रोत्साहन, इंस्पायर अवार्ड योजना पर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का जोर

इंस्पायर अवार्ड योजना से बच्चों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को मिल रहा प्रोत्साहन – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव शिक्षा मंत्री ने इंस्पायर मानक में चयनित 40 प्रतिभागियों का किया सम्मान रायपुर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इंस्पायर अवार्ड कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित लगभग 40 विद्यार्थियों को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता का अवसर मिला यह बहुत हर्ष की बात है।केंद्र सरकार की पहल से संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है, आवश्यकता है उसे पहचानने और उचित अवसर प्रदान करने की। ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और दैनिक जीवन में उपयोगी विभिन्न आविष्कारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार के साथ शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने तथा अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले अभिभावकों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को नवाचार, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। नवाचार का अर्थ केवल नई चीजों का आविष्कार करना नहीं, बल्कि पुराने कार्यों को नए और बेहतर तरीकों से करना भी है। विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, प्रयोग करने तथा अपनी गलतियों से सीखना चाहिए।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी चाहे ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी अंचल अथवा किसी भी सामाजिक परिवेश से आते हों, उन्हें स्वयं को कभी कम नहीं समझना चाहिए। सफलता का आधार व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, मेहनत और सोच होती है।भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी, हिंदी, छत्तीसगढ़ी अथवा कोई भी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है। वास्तविक महत्व विषय की समझ, ज्ञान और कार्य करने की योग्यता का है। रायपुर के बीटीआई ग्राउण्ड परिसर में स्थित एससीआरटी भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित चालीस विद्यार्थियों के साथ ही जुलाई माह में इंस्पायर मानक प्रतियोगिता में राज्य के पाँच प्रतिभागियों को जापान देश जाने और सीखने का अवसर मिला उनको भी सम्मानित किया गया । साथ ही जापान से वापस आए प्रतिभागी रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव को भी साझा किया । इस अवसर पर  लोक शिक्षण विभाग के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण सहित चयनित छात्र एवं छात्राएँ, शिक्षकगण उपस्थित रहे ।  ज्ञात हो कि इंस्पायर–मानक अवार्ड योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को उनके मौलिक एवं नवाचारी विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट या मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है।

सेवा और विश्वास की मिसाल: अतुल लालवानी ने हाउसिंग बोर्ड के नए कॉम्प्लेक्स में शुरू की कारोबार की नई शुरुआत

सेवा संकल्प अभियान सेवा की कहानी: 15 वर्षों का भरोसा फिर बना नई शुरूआत का आधार, हाउसिंग बोर्ड के नए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में अतुल लालवानी ने चुना कारोबार का नया ठिकाना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आवास के साथ व्यावसायिक अधोसंरचना के विकास को मिल रहा प्रोत्साहन वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में व्यापारियों को बेहतर सुविधाओं के साथ व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने की पहल एम्स के नजदीक बेहतर लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और किफायती कीमत बनी आकर्षण का केंद्र रायपुर,  किसी भी संस्था के प्रति विश्वास उसकी सेवाओं और कार्यों से बनता है। जब यही विश्वास वर्षों तक कायम रहता है और व्यक्ति दोबारा उसी संस्था को अपनी नई शुरूआत के लिए चुनता है, तो यह उसकी विश्वसनीयता का उदाहरण बन जाता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के प्रति ऐसा ही भरोसा राजधानी रायपुर के टाटीबंध निवासी व्यवसायी अतुल लालवानी ने व्यक्त किया है। पिछले 15 वर्षों से हाउसिंग बोर्ड के व्यावसायिक परिसर में दुकान संचालित कर रहे लालवानी ने अब मंडल के नए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भी अपना व्यवसाय आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आवासीय सुविधाओं के विस्तार के साथ व्यावसायिक अधोसंरचना के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नागरिकों और व्यापारियों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं को विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बेहतर लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और उचित कीमत पर संपत्तियां उपलब्ध कराकर व्यापार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। 15 वर्षों का अनुभव बना भरोसे की सबसे बड़ी वजह टाटीबंध स्थित हाउसिंग बोर्ड के व्यावसायिक परिसर में पिछले 15 वर्षों से अपनी दुकान संचालित कर रहे अतुल लालवानी बताते हैं कि इतने लंबे समय तक यहां व्यवसाय करने का अनुभव उनके लिए संतोषजनक रहा है। यही कारण है कि जब हाउसिंग बोर्ड ने इसी क्षेत्र में नया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की पहल की, तो उन्होंने एक बार फिर मंडल की परियोजना को प्राथमिकता दी। लालवानी कहते हैं, “पिछले 15 वर्षों से मैं हाउसिंग बोर्ड के व्यावसायिक परिसर में अपनी दुकान चला रहा हूं। इतने वर्षों का अनुभव ही मेरे भरोसे की सबसे बड़ी वजह है। आज जब इसी क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड नया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स लेकर आया है, तो मैंने एक बार फिर उसी भरोसे के साथ इसे चुना है।” एम्स के नजदीक लोकेशन और किफायती कीमत बनी खासियत लालवानी के अनुसार किसी भी व्यवसाय की सफलता में उसकी लोकेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टाटीबंध क्षेत्र में एम्स के नजदीक स्थित नया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स व्यापारियों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है। आसपास विकसित व्यावसायिक गतिविधियां, बेहतर आवागमन और स्थापित बाजार की उपलब्धता इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं हैं। उन्होंने बताया कि अच्छी लोकेशन के साथ निर्माण की गुणवत्ता और किफायती कीमत भी इस परियोजना को आकर्षक बनाती है। नए परिसर में बेहतर व्यावसायिक सुविधाओं और स्थापित बाजार का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे व्यापारियों को अपने कारोबार का विस्तार करने के अवसर मिल सकते हैं। “हाउसिंग बोर्ड पर मेरा भरोसा आज भी कायम है” अतुल लालवानी का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड की व्यावसायिक परियोजनाएं छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। अच्छी लोकेशन पर उचित कीमत में दुकान या व्यावसायिक स्थान मिलने से कारोबार को स्थायित्व और विस्तार की संभावनाएं मिलती हैं। वे कहते हैं, “एम्स के नजदीक लोकेशन, निर्माण की गुणवत्ता और किफायती कीमत इस परिसर की खासियत हैं। हमारे जैसे व्यापारियों के लिए अच्छी जगह पर उचित कीमत में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिलना सराहनीय है। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड पर मेरा भरोसा आज भी कायम है।” आवास के साथ व्यापार और स्वरोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासीय परियोजनाओं के साथ व्यावसायिक परिसरों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से व्यापारियों को सुव्यवस्थित व्यावसायिक स्थान उपलब्ध कराने तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। व्यावसायिक परिसरों का विकास केवल दुकानों और भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार, स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएं जुड़ी हैं। सरकार और हाउसिंग बोर्ड के प्रति जताया आभार अतुल लालवानी ने छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार आवास के साथ व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी बहुत अच्छा काम कर रही है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।” लालवानी की कहानी बताती है कि किसी संस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल नई परियोजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि हितग्राहियों का लंबे समय तक कायम रहने वाला विश्वास भी है। 15 वर्षों से हाउसिंग बोर्ड के व्यावसायिक परिसर में कारोबार कर रहे लालवानी का नए कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को दोबारा चुनना इसी भरोसे का उदाहरण है। उनके लिए यह नया व्यावसायिक परिसर केवल कारोबार का नया ठिकाना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने विश्वास के साथ आगे बढ़ने और व्यवसाय के विस्तार की नई उम्मीद भी है।

सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री

विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से तैयार होंगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पद्म भूषण पुलेला गोपीचंद, प्रदेश की प्रतिभाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण खेल प्रतिभाओं को अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता, खेल विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान बस्तर ओलंपिक से सामने आ रही दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं, दूसरे वर्ष लगभग 3.91 लाख खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा खेल उत्कृष्टता, आधुनिक सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के राज्य सरकार के प्रयासों की गोपीचंद ने की सराहना रायपुर  छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के जोरा में आयोजित सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्लब के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। नवा रायपुर में उनकी बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी करते हैं। खेलों में निवेश वास्तव में हमारी युवा पीढ़ी और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है। बस्तर ओलंपिक ने बदली तस्वीर, गांवों से निकलकर मैदान तक पहुंच रहे युवा मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने का सशक्त मंच बना है। बस्तर ओलंपिक के पहले वर्ष में लगभग एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग तीन लाख 91 हजार हो गई। खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी बताती है कि बस्तर के युवाओं में खेलों को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आज युवा बंदूक और हिंसा से दूर होकर खेल, शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांव की प्रतिभा को भी वही अवसर और मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाड़ियों को उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘खेलो इंडिया’ के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय खेलों का सफल आयोजन किया गया है। प्रदेश के खिलाड़ी भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अपने परिश्रम और प्रतिभा से प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं। खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ सहित विभिन्न योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवश्यक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी, चाहे वह किसी शहर से हो या सुदूर वनांचल से, संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। प्रतिभा को अवसर से जोड़ना और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। नक्सलवाद से मुक्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता उनकी सरकार के लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद ने बस्तर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के विकास को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि इस परिवर्तन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोगों के विश्वास और सहयोग से आज उन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, खेल और रोजगार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘मोदी की गारंटी’ के अंतर्गत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा … Read more

जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही हुआ नामांतरण, मंगल सिंह सांडिया को मिली बड़ी राहत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी अब नामांतरण के लिए महीनों का इंतजार नहीं, रजिस्ट्री होते ही मंगल सिंह सांडिया का पूरा हुआ काम ऑटोम्यूटेशन से मिली बड़ी राहत, तहसील कार्यालय की दौड़भाग और लंबे इंतजार से मिली मुक्ति मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से आम नागरिकों का जीवन हो रहा आसान रायपुर जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करने की परेशानी अब तकनीक आधारित पंजीयन व्यवस्था से दूर हो रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटकखर्रा, पोस्ट लालपुर निवासी श्री मंगल सिंह सांडिया ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पहले जिस नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, इस बार वह रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही पूरा हो गया। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से उन्हें लंबी प्रक्रिया और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए इस नई व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी बताया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने वाली ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था इन्हीं सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे नागरिकों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करने और लंबे इंतजार की परेशानी से राहत मिल रही है। पहले नामांतरण के लिए महीनों का इंतजार, अब रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ काम श्री मंगल सिंह सांडिया ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लगता था। कई बार महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। इस दौरान संपत्ति से जुड़े आगे के कार्यों को पूरा करने में भी परेशानी होती थी। लेकिन इस बार उनका अनुभव बिल्कुल अलग रहा। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा के कारण रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण हो गया। इससे उन्हें न तो महीनों इंतजार करना पड़ा और न ही नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयों की दौड़भाग करनी पड़ी। श्री सांडिया ने इस बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण का काम पूरा हो जाना उनके लिए बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं से आम नागरिकों का समय बचता है और सरकारी कामकाज के प्रति भरोसा भी बढ़ता है। ऑटोम्यूटेशन से आसान हुई रजिस्ट्री के बाद की प्रक्रिया पंजीयन विभाग द्वारा लागू ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के अंतर्गत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की संबंधित प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है। पहले नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और राजस्व कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही कम करने और नामांतरण की प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिल रही है। इस सुधार का विशेष महत्व ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भूमि स्वामियों के लिए है, जिन्हें संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए बार-बार तहसील और राजस्व कार्यालय जाना पड़ता था। ऑटोम्यूटेशन से उनका समय बचने के साथ जमीन से जुड़े कार्यों को पूरा करना अधिक सुविधाजनक हो रहा है। मुख्यमंत्री और वित्त एवं पंजीयन मंत्री के प्रति जताया आभार श्री मंगल सिंह सांडिया ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नामांतरण की प्रक्रिया में आई तेजी से उन्हें बड़ी सुविधा मिली है। श्री सांडिया का अनुभव बताता है कि शासन द्वारा पंजीयन सेवाओं में किए जा रहे तकनीकी सुधारों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। उनके लिए ऑटोम्यूटेशन केवल एक डिजिटल व्यवस्था नहीं, बल्कि महीनों के इंतजार से मुक्ति और समय पर सरकारी काम पूरा होने की खुशी है। सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही सुशासन की कहानियां ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मंगल सिंह सांडिया की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। जहां पहले नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब तकनीक आधारित व्यवस्था से रजिस्ट्री के साथ ही संबंधित प्रक्रिया पूरी होने की सुविधा मिल रही है। यह पहल नागरिकों के समय की बचत, कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

छत्तीसगढ़ के IPS अधिकारी संतोष सिंह की नई पोस्टिंग, दिल्ली मेट्रो में DIG पद की कमान संभाली

रायपुर छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के उप महानिरीक्षक (DIG) का पदभार ग्रहण कर लिया है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात संतोष सिंह अब देश की राजधानी की सुरक्षा लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।  सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक कुशलता में संतोष सिंह का अनुभव काफी समृद्ध रहा है. वे छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे 9 प्रमुख जिलों में एसपी व एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके अतिरिक्त वे सुकमा में अतिरिक्त एसपी और दुर्ग में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) के पद पर भी तैनात रहे हैं।  दिल्ली में इस नई जिम्मेदारी से ठीक पहले वे हैदराबाद में 'साउथ जोन-2' के डीआईजी के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में फैले पूर्वी तटीय बंदरगाहों तथा सामरिक व औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की कमान संभाली थी।  क्षेत्रीय सुरक्षा और अति-संवेदनशील अवसंरचनाओं की रखवाली के उनके इस विस्तृत अनुभव का लाभ अब दिल्ली मेट्रो को मिलेगा।  उल्लेखनीय है कि दिल्ली मेट्रो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की लाइफलाइन है, जो 271 स्टेशनों के जरिए दिल्ली को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी शहरों से जोड़ती है।  इस विशाल नेटवर्क ने बीते 17 सितंबर को ही लगभग 82.45 लाख यात्रियों के दैनिक सफर का नया रिकॉर्ड कायम किया है. इतने बड़े पैमाने पर दैनिक आवाजाही वाले इस नेटवर्क की सुरक्षा में संतोष सिंह का अनुभव बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।